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रवीश कुमार व न्यूजलॉन्ड्री का अडानी एंटरप्राइजेज से समझौता, दिल्ली HC ने बंद की याचिकाएं
दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार, 26 सितंबर 2025 को पत्रकार रवीश कुमार और डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म 'न्यूजलॉन्ड्री' द्वारा दायर याचिकाओं को बंद कर दिया है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 4 months ago
दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रेस स्वतंत्रता और कॉरपोरेट जवाबदेही से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में शुक्रवार, 26 सितंबर 2025 को पत्रकार रवीश कुमार और डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म 'न्यूजलॉन्ड्री' द्वारा दायर याचिकाओं को बंद कर दिया है। ये याचिकाएं केंद्र सरकार के आदेशों को चुनौती दे रही थीं, जिसमें अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) से संबंधित रिपोर्ट और वीडियो हटाने को कहा गया था। वैसे बता दें कि कोर्ट ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि मामले से संबंधित पक्षों के बीच समझौता हो गया है।
कोर्ट का अवलोकन
न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने अडानी एंटरप्राइजेज के साथ एक “समझौता” कर लिया है। इस व्यवस्था के अनुसार:
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26 सितंबर 2025 दोपहर 12:00 बजे तक याचिकाकर्ताओं की वेबसाइट या उनके माध्यम से होस्ट की गई कोई भी सामग्री नहीं हटाई जाएगी।
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जो सामग्री पहले हटाई जा चुकी है, उसे फिर से अपलोड नहीं किया जाएगा।
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यह व्यवस्था केवल तब तक वैध होगी जब तक AEL की सिविल मुकदमे में अंतरिम निषेधाज्ञा आवेदन का निर्णय नहीं हो जाता।
कोर्ट ने अडानी एंटरप्राइजेज को दोनों मामलों में शामिल होने की अनुमति भी दी और याचिकाकर्ताओं को पार्टियों के संशोधित मेमो दाखिल करने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान 'न्यूजलॉन्ड्री' की ओर से सीनियर एडवोकेट सौरभ कृपाल ने बताया कि अंतरिम निषेधाज्ञा के फैसले तक वर्तमान स्थिति बनी रहे। अडानी की ओर से सीनियर एडवोकेट अनुराग अहलुवालिया ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता अपील करने की बजाय सिविल जज के समक्ष ऑर्डर 39, रूल्स 1 और 2 के तहत आवेदन करेंगे।
न्यायमूर्ति दत्ता ने केंद्र सरकार को आदेश के अनुसार सुधार जारी करने के लिए भी निर्देश दिया, जबकि यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय मामले की मेरिट पर कोर्ट की राय को प्रतिबिंबित नहीं करता।
विवाद का पृष्ठभूमि
यह कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब केंद्र सरकार ने रवीश कुमार और 'न्यूजलॉन्ड्री' को अडानी एंटरप्राइजेज के कथित मानहानि संबंधी कंटेंट को हटाने के लिए निर्देश जारी किए। रवीश कुमार ने अपने एडवोकेट शंतनु डेर्घावेण के माध्यम से कहा कि ये आदेश प्रेस स्वतंत्रता का उल्लंघन हैं, जो संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत सुरक्षित है। कुमार की सामग्री कॉर्पोरेट जवाबदेही, सार्वजनिक हित की पत्रकारिता और लोकतांत्रिक निगरानी पर केंद्रित है।
इसी तरह, 'न्यूजलॉन्ड्री' ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) द्वारा 16 सितंबर 2025 को जारी किए गए आदेश को चुनौती दी, जिसमें अडानी एंटरप्राइजेज द्वारा मानहानिकारक माने गए लेख और वीडियो हटाने को कहा गया। ये निर्देश रोहिणी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के 6 सितंबर 2025 के एक्स पार्टे गैग आदेश पर आधारित थे, जिसमें पत्रकार परांजॉय गुप्ता ठाकुरता और अन्य के खिलाफ AEL की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री की प्रकाशन पर रोक लगाई गई थी।
दिल्ली जिला कोर्ट ने हाल ही में रोहिणी ट्रायल कोर्ट के व्यापक गैग आदेश को रद्द कर दिया। अपीलीय अदालत ने कहा कि व्यापक प्री-पब्लिकेशन प्रतिबंध कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं हैं और कंटेंट हटाने के लिए माध्यमों पर निर्भरता से उत्पन्न जोखिमों को उजागर किया। इस आदेश ने अपीलकर्ताओं को आगे के निर्णय तक तत्काल अनुपालन से बचाया।
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