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MIB का बड़ा कदम: पत्रकारों व क्रिएटर्स को अडानी पर 221 सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का नोटिस
सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने कई पत्रकारों, डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और कंटेंट क्रिएटर्स को अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) से जुड़े वीडियो और पोस्ट हटाने का निर्देश दिया है
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 5 months ago
सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने कई पत्रकारों, डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और कंटेंट क्रिएटर्स को अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) से जुड़े वीडियो और पोस्ट हटाने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई इसी महीने की शुरुआत में कंपनी द्वारा दायर मानहानि केस में दिल्ली की एक अदालत से मिले गैग ऑर्डर के बाद हुई है।
16 सितंबर 2025 को जारी नोटिस के मुताबिक, मंत्रालय ने 138 यूट्यूब लिंक और 83 इंस्टाग्राम पोस्ट्स को फ्लैग किया है। केवल न्यूजलॉन्ड्री को ही 42 वीडियो हटाने के लिए कहा गया है। इसके अलावा रवीश कुमार, ध्रुव राठी, द वायर, HW न्यूज, आकाश बनर्जी का द देशभक्त और द न्यूज मिनट का कंटेंट भी इस लिस्ट में शामिल है। आदेश का दायरा सिर्फ इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सटायर, एक्सप्लेनर वीडियो और यहां तक कि सब्सक्रिप्शन अपील्स भी शामिल हैं, जिनमें अडानी से जुड़ी कवरेज दिखी।
फ्लैग किए गए कंटेंट में TV Newsance के एपिसोड्स, NDTV पर अडानी टेकओवर पर चर्चाएं और पत्रकार श्रीनिवासन जैन के शरद पवार और अजित पवार के साथ इंटरव्यू भी हैं, जिनमें दोनों ने 2019 की एक राजनीतिक बैठक में गौतम अडानी की भूमिका को स्वीकार किया था। इसमें कॉमेडियन कुणाल कामरा का एक इंटरव्यू भी शामिल है, जिसमें उन्होंने सेंसरशिप पर मजाक किया था।
मंत्रालय ने अपने नोटिस में 6 सितंबर को रोहिणी कोर्ट द्वारा दिए गए अंतरिम निषेधाज्ञा (interim injunction) का हवाला दिया है, जिसमें पत्रकार परनजॉय गुहा ठाकुरता, रवि नायर और अन्य को अडानी एंटरप्राइजेज के खिलाफ कथित मानहानिकारक कंटेंट हटाने का निर्देश दिया गया था। वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंग ने सवाल उठाया कि जब आदेश गूगल और मेटा जैसे इंटरमीडियरीज के लिए था, तो मंत्रालय ने हस्तक्षेप क्यों किया। उन्होंने इसे “न्यायिक प्रक्रिया से पहले की कार्रवाई” बताया। वहीं, ठाकुरता, जिन पर 2017 से अडानी के कई मानहानि केस चल रहे हैं, ने कहा कि वे इस आदेश को चुनौती देंगे। उन्होंने न्यायपालिका पर भरोसा जताया और अपनी रिपोर्टिंग के साथ खड़े रहने की बात कही।
अडानी एंटरप्राइजेज की ओर से पेश वरिष्ठ वकील जगदीप शर्मा ने दलील दी कि बार-बार “दुर्भावनापूर्ण” रिपोर्ट्स फैलने से कंपनी की ब्रांड वैल्यू और निवेशकों का भरोसा प्रभावित हुआ है। उन्होंने 2023 की हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट का भी हवाला दिया। अदालत ने कंपनी की प्रतिष्ठा की रक्षा से सहमति जताई, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि जांच और अदालत की कार्यवाही पर निष्पक्ष और सही रिपोर्टिंग सुरक्षित रहेगी।
पब्लिशर्स को मंत्रालय के आदेश का पालन 36 घंटे के भीतर करने को कहा गया था। हालांकि 36 घंटे से ज्यादा वक्त गुजर चुका है और अभी भी कुछ पेजों पर अडानी से जुड़े वीडियो दिखाई दे रहे हैं।
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