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AI से बने फेक कंटेंट पर रोक के लिए MeitY ने नए नियमों का जारी किया मसौदा, मांगे सुझाव
केंद्र सरकार ने इंटरनेट पर बढ़ते डीपफेक और फेक कंटेंट के खतरे से निपटने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में बदलाव का मसौदा जारी किया है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 3 months ago
केंद्र सरकार ने इंटरनेट पर बढ़ते डीपफेक और फेक कंटेंट के खतरे से निपटने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में बदलाव का मसौदा जारी किया है। यह मसौदा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने जारी किया है और इस पर हितधारकों से 6 नवंबर 2025 तक सुझाव मांगे गए हैं।
मंत्रालय का कहना है कि हाल के समय में जेनरेटिव एआई (Generative AI) टूल्स के जरिए गलत जानकारी फैलाने, चुनावों को प्रभावित करने और लोगों की पहचान का दुरुपयोग करने के मामले बढ़े हैं। ऐसे में सरकार का लक्ष्य है कि इंटरनेट को खुला, सुरक्षित, विश्वसनीय और जवाबदेह बनाया जाए, ताकि सिंथेटिक या एआई-जनित कंटेंट पर नियंत्रण रखा जा सके।
मसौदे में पहली बार “सिंथेटिक रूप से तैयार की गई जानकारी (synthetically generated information)” की एक औपचारिक परिभाषा दी गई है। साथ ही, यह भी प्रस्ताव है कि ऐसे कंटेंट पर स्पष्ट लेबल या डिस्क्लेमर लगाए जाएं ताकि यूजर असली और नकली कंटेंट में फर्क कर सकें। यह लेबल वीडियो या ऑडियो में कम से कम 10 प्रतिशत स्क्रीन या शुरुआती हिस्से में साफ तौर पर दिखना या सुनाई देना चाहिए।
इसके अलावा, सभी बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों को तकनीकी उपाय अपनाने होंगे ताकि यह पता लगाया जा सके कि कोई कंटेंट एआई से बनाया गया है या नहीं, और फिर उसे सही तरह से लेबल किया जाए। जो प्लेटफॉर्म एआई कंटेंट बनाने या बदलने की सुविधा देते हैं, उन्हें भी ड्यू डिलिजेंस (सावधानीपूर्वक जांच) की प्रक्रिया का पालन करना होगा।
मंत्रालय ने कहा कि इन बदलावों का मकसद यूजर्स की सुरक्षा और एआई तकनीक में नवाचार के बीच संतुलन बनाए रखना है। इससे सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पारदर्शिता, जवाबदेही और ट्रेसबिलिटी बढ़ेगी, साथ ही एआई एप्लिकेशंस का विकास भी जारी रह सकेगा।
यह मसौदा अधिसूचना, आसान भाषा में तैयार व्याख्यात्मक नोट और संशोधित आईटी नियमों का एक समेकित संस्करण MeitY की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। मंत्रालय ने कहा कि सभी प्राप्त सुझावों को गोपनीय रूप में रखा जाएगा ताकि हितधारक बिना किसी झिझक के अपनी राय दे सकें।
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