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मीडिया पर कोरोना के प्रभाव को लेकर क्या बोले दिग्गज, पढ़ें यहां
‘बॉम्बे चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री’ की ओर से आयोजित वेबिनार में मीडिया और एंटरटेनमेंट जगत की तमाम शख्सियतों ने की शिरकत
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
देशभर में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था 'ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल' (BARC) इंडिया के सीईओ सुनील लुल्ला का कहना है कि टेलिविजन हमेशा से तमाम घरों का हिस्सा रहा है और लॉकडाउन के दौरान यह सिर्फ बढ़ रहा है। ‘बॉम्बे चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री’ (Bombay Chamber of Commerce and Industry) की ओर से शुक्रवार को ‘Recalibrating the Media Landscape’ और मीडिया व एंटरटेनमेंट पर कोविड-19 के प्रभाव को लेकर आयोजित एक वेबिनार में उन्होंने यह बात कही।
वेबिनार में ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के ग्रुप सीईओ जॉर्ज वर्गीस, ‘रिलायंस ब्रॉडकास्ट नेटवर्क लिमिटेड’ (RBNL) के सीईओ अब्राहम थॉमस और ‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ के सीईओ अविनाश पांडे भी शामिल हुए। वेबिनार को प्रदीप द्विवेदी CEO-India, EIML (Eros International Plc) ने मॉडरेट किया।
वर्तमान में चल रहे कोविड-19 और लॉकडाउन के दौरान और उससे पहले टीवी के इस्तेमाल अथवा खपत (consumption) के बारे में लुल्ला का कहना था कि 18वें हफ्ते में टोटल टीवी व्युअरशिप में 24 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है और यह 1.10 ट्रिलियन व्यूइंग मिनट (viewing minutes) दर्ज की गई है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि 40 प्रतिशत के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद अब व्युअरशिप में धीरे-धीरे कमी दिखाई दे रही है।
सुनील लुल्ला ने कहा, ‘देश में टीवी व्युअरशिप में इतनी वृद्धि पिछले वर्षों में कभी नहीं देखी गई और दुर्भाग्य से यह शायद विज्ञापन के लिहाज से सबसे खराब समय है। टीवी को मिलने वाले विज्ञापन में 30 प्रतिशत की कमी आई है और पिछले साल इसी अवधि के दौरान मिलने वाले विज्ञापन से यह 36 प्रतिशत कम है। पिछले साल हमारे पास आईपीएल (IPL) था और इस साल इसकी गैरमौजूदगी ने विज्ञापन को काफी प्रभावित किया है। टीवी पर विज्ञापनदाताओं की संख्या 35 प्रतिशत तक घट गई है। लॉकडाउन के दौरान टीवी की व्युअरशिप तो बढ़ी है, लेकिन बिजनेस नहीं बढ़ा है।’
वहीं, प्रिंट और डिजिटल बिजनेस के बारे में वर्गीस का कहना था कि कोविड-19 का प्रिंट मीडिया पर काफी प्रभाव पड़ा है और यह प्रभाव लंबे समय तक महसूस किया जाएगा। पश्चिमी मीडिया का उदाहरण देते हुए वर्गीस ने कहा कि आठ-दस साल पहले डिजिटल मीडिया के विकास के साथ प्रिंट के सर्कुलेशन में गिरावट आनी शुरू हुई थी। इससे प्रिंट पर विज्ञापन रेवेन्यू को लेकर काफी दबाव आ गया था। ‘Buzzfeed’ और ‘Huffington Post’ जैसे पब्लिशर्स के बीच काफी कड़ी प्रतिस्पर्धा थी।
वर्गीस का कहना था, ‘पिछले ढाई सालों में हालात बद से बदतर हो गए हैं। सर्कुलेशन कम हो गया है। पेजव्यूज धीमे हैं, लेकिन पेज व्यूज बढ़ने के साथ ऐड रेवेन्यू में गति नहीं आई है। प्रिंट और डिजिटल बिजनेस अलग तरीके से काम करते हैं। उदाहरण के लिए-प्रिंट में पूरा का पूरा ऐड रेवेन्यू पब्लिशर के पास जाता है लेकिन डिजिटल में 80-85 ऐड रेवेन्यू गूगल और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर चला जाता है। डिजिटल के देसी पब्लिशर्स को भारी नुकसान की वजह से कॉस्ट कटिंग करनी पड़ी है, जबकि बड़े पब्लिशर्स भी इसी तरह की मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।’
उन्होंने कहा, ‘करीब एक महीने पहले तक सर्कुलेशन और एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू कम होने के बावजूद प्रिंट काफी फायदेमंद बिजनेस था। कोरोना ने हमें बुरी तरह से प्रभावित किया है। टेलिविजन के विपरीत हमारा डिस्ट्रीब्यूशन काफी बाधित हुआ है। प्रिंट की बात करें तो ऐड रेवेन्यू 70-75 प्रतिशत तक प्रभावित हुआ है। प्रिंट बिजनेस को डिजिटल की ओर शिफ्ट करना होगा, लेकिन यह इतना आसान नहीं होगा।’
वहीं,रेडियो बिजनेस पर पड़े कोरोना के प्रभाव को लेकर अब्राहम थॉमस ने कहा कि सामान्य धारणा यह है कि गाड़ियों में रेडियो का इस्तेमाल ज्यादा होता है और चूंकि कोई भी यात्रा नहीं कर रहा है, इसलिए लॉकडाउन के कारण रेडियो इंडस्ट्री प्रभावित हुई है। हालांकि, इस पर उन्होंने कहा कि नवीनतम आंकड़ों पर नजर डालें तो 52% रेडियो का इस्तेमाल मोबाइल पर होता है। एफएम रेडियो ने लॉकडाउन के दौरान 51 मिलियन तक अपनी पहुंच हासिल की है। छह महानगरों में बीते समय में 28% की वृद्धि हुई है और यह बढ़ोतरी एसईसी (SEC) के पार है। उन्होंने कहा कि रेडियो की विश्वसनीयता इंटरनेट को छोड़कर किसी भी अन्य मीडिया से अधिक है। विज्ञापन के मामले में, यह पूरे मीडिया में धीमा रहा है।
वेबिनार में न्यूज ब्रॉडकास्टिंग पर पड़े कोविड-19 के प्रभाव को लेकर अविनाश पांडे ने कहा कि इस अवधि के दौरान न्यूज कैटेगरी 7% से बढ़कर 15% हो गई है। हिंदी न्यूज में इम्प्रेशंस 136% तक बढ़ गए हैं, जबकि FCT 32% कम हो गया है। देश में न्यूज जहां सभी प्लेटफॉर्म्स पर निशुल्क उपलब्ध है, वहां न्यूज के लिए सब्सक्रिप्शन चार्ज लेना वास्तव में एक कठिन चुनौती है, लेकिन न्यूज इंडस्ट्री में लोगों को डिजिटल के साथ-साथ टेलिविजन पर सब्सक्रिप्शन चार्ज लेने के लिए एक मॉडल खोजने की जरूरत है ताकि यह संतुलन बना सके। वैसे इस संकट ने हमें एक रेवन्यू स्ट्रीम पर निर्भर न रहने का सबक सिखाया है।
इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि एबीपी नेटवर्क ने अपने रिपोर्टर्स को सुरक्षित रखने के लिए बहुत कुछ किया है। उन्होंने कहा, ‘न्यूज चैनल ने न केवल उन किट्स में निवेश किया है, जिनकी जरूरत रेड जोन में रिपोर्टिंग करते समय पड़ती है, बल्कि अपने एम्प्लायीज को जागरूक भी किया है और ऐसे समय पर लाखों दर्शकों को भी जागरूक करने का काम कर रहे हैं।’ पांडे ने यह भी कहा कि कोरोना वायरस ने इंडस्ट्री को बुरी तरह प्रभावित किया है और इसकी वजह से कई कारोबारी इस कारोबार से बाहर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि सरकार शराब जैसी नई कैटेगरी को विज्ञापन देने की अनुमति देती है तो इससे बहुत मदद मिलेगी।
मॉडरेटर प्रदीप द्विवेदी ने भी डिजिटल इंडस्ट्री के कुछ डेटा शेयर किए और कहा कि लॉकडाउन के दौरान इंटरनेट के इस्तेमाल में अच्छी खासी वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा, `सभी ओटीटी प्लेटफार्म्स के इस्तेमाल में बहुत ज्यादा बढ़त देखी जा रही है। बैंडविड्थ को ध्यान में रखते हुए, हमने HD से SD से रेजॉल्यूशन कम कर दिया है ताकि कंटेंट को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सके।’
डिजिटल स्पेस के बढ़ते ट्रेंड्स को लेकर द्विवेदी ने कहा कि धार्मिक कंटेंट को लेकर लोगों की रुचि में काफी वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि एयरलाइंस, ऑटोमोबाइल और ट्रैवल जैसे कैटेगरीज ने अपने खर्चों में कटौती की है, लेकिन ये कैटेगरीज वापस उछाल दर्ज करेंगी। दिलचस्प बात यह है कि ऐसी कैटेगरीज भी हैं जो पहले की तुलना में डिजिटल पर बहुत अधिक खर्च कर रही हैं। वहीं ओटीटी प्लेटफॉर्म मूवी रिलीज के लिए पहली स्क्रीन बन गई है और थियेटर की विंडोज फिलहाल कुछ महीनों के लिए चलन से बाहर है। लिहाजा उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि इंडस्ट्री को यह सुनिश्चित करने के लिए एक साथ मिलकर काम करने की जरूरत है ताकि किसी को नुकसान न हो।
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