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मीडिया इंडस्ट्री पर भी टूट रहा कोरोना का कहर, शुरू हुआ छंटनी का सिलसिला
धीमी अर्थव्यवस्था के दौर से धीरे-धीरे उबरने की कोशिश कर रही मीडिया इंडस्ट्री के सामने कोरोनावायरस (कोविड-19) के रूप में फिर एक परेशानी आ गई है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
धीमी अर्थव्यवस्था के दौर से धीरे-धीरे उबरने की कोशिश कर रही मीडिया इंडस्ट्री के सामने कोरोनावायरस (कोविड-19) के रूप में फिर एक परेशानी आ गई है। इस महामारी के कारण मीडिया इंडस्ट्री आर्थिक रूप से काफी प्रभावित हो रही है। ऐसी स्थिति में देश के तमाम मीडिया संस्थानों से एंप्लायीज को निकाले जाने अथवा उनकी सैलरी में कटौती की खबरें आनी शुरू हो गई हैं।
करीब एक हफ्ते पहले की ही बात है, जब ‘एक्सप्रेस ग्रुप’ ने अपने एंप्लायीज को बताया था कि उनकी सैलरी में अस्थायी तौर पर कटौती की जा रही है। यहां एडिटोरियल टीम में 10 से 30 प्रतिशत की सैलरी कटौती के बीच चीफ एडिटर राजकमल झा ने भी सैलरी में 100 प्रतिशत की कटौती की है। इसके बाद ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ अखबार ने भी अपने स्टाफ को सैलरी में कटौती करने के लिए कहा। यही नहीं, ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ के शीर्ष प्रबंधन ने स्वैच्छिक रूप से अपनी सैलरी में 25 प्रतिशत की कटौती कर ली।
सोमवार को तमाम मीडिया संस्थानों से सैलरी में कटौती की खबरों के बाद कुछ जगह एंप्लायीज को नौकरी से निकाले जाने के मामले भी सामने शुरू हो गए। ऐसा ही मामला हिंदी न्यूज चैनल ‘न्यूजनेशन’ से निकलकर सामने आया, जहां पर चैनल ने अंग्रेजी डिजिटल की टीम के तमाम पत्रकारों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस बीच यह भी खबर मिली कि ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ अपनी ‘संडे मैगजीन’ टीम को भी बाहर करने जा रहा है। इस बारे में पत्रकार नोना वालिया ने फेसबुक पर एक पोस्ट की, जिसमें उनका कहना था, ‘टाइम्स ऑफ इंडिया की संडे मैगजीन की पूरी टीम को बाहर जाने के लिए कह गिया गया है। इस बारे में मुझे मेरी बॉस पूनम सिंह ने फोन किया।’
शाम होते सोशल मीडिया और विभिन्न मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर इस तरह की खबरों की बाढ़ सी आ गई। कुछ ने जहां नौकरी से निकाले जाने की बात कही तो कई ने सैलरी में कटौती का मुद्दा उठाया।
‘एनडीटीवी’ के बारे में खबर आई कि यहां एंप्लायीज की सैलरी में 50 प्रतिशत तक कटौती की घोषणा की गई है। डिजिटल मीडिया में भी कटौती किए जाने की खबरें हैं। बताया जाता है कि न्यूज पोर्टल ‘द क्विंट’ ने भी अपने करीब आधे स्टाफ को लीव विदाउट पे (leave without pay) पर जाने के लिए कह दिया है। संस्थान द्वारा जारी मेल में कहा गया है कि देश में पिछले दो वर्षों के दौरान आर्थिक मंदी का दौर रहा है। क्विंट ने इसका मजबूती से मुकाबला करते हुए अपना काम जारी रखा और विभिन्न जॉनर्स जैसे- फैक्ट चेकिंग, सिटीजन जर्नलिज्म, मल्टीमीडिया स्टोरीटैलिंग में बेंचमार्क स्थापित किए। अब हम वास्तव में एक अभूतपूर्व स्थिति का सामना कर रहे हैं।
‘ब्लूमबर्ग क्विंट’ ने एक मेल जारी कर कहा है, ‘संस्थान की ओर से अप्रैल महीने की सैलरी में कटौती की जा रही है। जिन लोगों की ग्रॉस सीटीसी छह लाख रुपए सालाना है, उन्हें इस सैलरी कटौती से मुक्त रखा गया है। इससे ज्यादा सीटीसी वालों की सैलरी में कटौती की जाएगी।’ इस मेल में यह भी कहा गया है कि अप्रैल में यह कदम अस्थायी तौर पर उठाया गया है और उम्मीद है कि मई से स्थिति पहले की तरह सामान्य हो जाएगी और सैलरी पूर्ववत मिलती रहेगी।
इसके अलावा कई अखबारों और न्यूज चैनल्स द्वारा भी एंप्लायीज की सैलरी मे 30 प्रतिशत तक की कटौती की बात सामने आई है। इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में इससे भी बुरी खबरें आ सकती हैं, जिनमें छंटनी तक की खबरें हो सकती हैं।
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