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विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस: पत्रकारों के साहस व समर्पण को सम्मान
विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस न केवल पत्रकारिता के महत्व को रेखांकित करता है, बल्कि उन पत्रकारों के साहस और समर्पण को सम्मानित करता है जो सच्चाई की खोज में जोखिम उठाते हैं।
Vikas Saxena 9 months ago
हर साल 3 मई को मनाया जाने वाला विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस न केवल पत्रकारिता के महत्व को रेखांकित करता है, बल्कि उन पत्रकारों के साहस और समर्पण को सम्मानित करता है जो सच्चाई की खोज में जोखिम उठाते हैं। वर्ष 2025 में यह दिन विशेष रूप से अहम है, क्योंकि मीडिया और तकनीक के बदलते परिदृश्य में प्रेस की भूमिका अब पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण और निर्णायक हो गई है।
इस वर्ष का थीम "Brave New World में रिपोर्टिंग: प्रेस स्वतंत्रता और मीडिया पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रभाव" है, जिसे यूनेस्को द्वारा तय किया गया है। इस विषयवस्तु का उद्देश्य एआई के उभरते हुए प्रयोगों और उसके कारण पत्रकारिता की स्वतंत्रता व विश्वसनीयता पर पड़ने वाले प्रभावों की पड़ताल करना है।
यह दिवस 1993 से प्रतिवर्ष मनाया जा रहा है, जिसकी नींव 1991 में नामीबिया के विंडहोक में पारित ऐतिहासिक घोषणापत्र पर आधारित है। इस घोषणा में स्वतंत्र, निष्पक्ष और बहुलवादी प्रेस को लोकतंत्र और विकास के लिए आवश्यक माना गया था। उसी भावना को आगे बढ़ाते हुए 'संयुक्त राष्ट्र महासभा' ने भी तीन मई को यह दिवस मनाने की घोषणा की थी। वहीं, 1991 में यूनेस्को और संयुक्त राष्ट्र के 'जन सूचना विभाग' ने भी मिलकर अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता स्वतंत्रता दिवस मनाने का फैसला किया था। साल 1993 में यूनेस्को महासम्मेलन के 26वें सत्र में इससे संबंधित प्रस्ताव को स्वीकार किया गया था और तब से लेकर अब तक हर साल तीन मई को यह दिवस मनाया जाता है।
इस दिन का उद्देश्य है– प्रेस की स्वतंत्रता को बढ़ावा देना, पत्रकारों के खिलाफ खतरों व हिंसा के बारे में जागरूकता फैलाना, नैतिक और स्वतंत्र पत्रकारिता की रक्षा करना और अभिव्यक्ति की आजादी को कायम रखना। यह हमें याद दिलाता है कि प्रेस की स्वतंत्रता कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि मानव अधिकार है, जो हर नागरिक को सटीक जानकारी तक पहुंच का हक देता है और सत्ता को जवाबदेह बनाता है।
2025 में यह दिन सिर्फ पत्रकारों के लिए नहीं, बल्कि समाज के हर जागरूक नागरिक के लिए महत्वपूर्ण है। यह हमें मीडिया के विविध स्वरूपों में स्वतंत्रता, पारदर्शिता और जवाबदेही की भावना को मजबूत करने के लिए प्रेरित करता है।
इस अवसर पर पत्रकारों की सुरक्षा, मीडिया साक्षरता, डिजिटल स्वतंत्रता और गलत सूचना से लड़ने जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है। यह सरकारों, मीडिया संस्थानों और नागरिक समाज के बीच एकजुटता और सहयोग को प्रोत्साहित करता है, ताकि प्रेस स्वतंत्रता की रक्षा की जा सके।
निष्कर्षतः, पत्रकारिता दिवस केवल एक तारीख नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा की पहचान है। यह दिन हमें सिखाता है कि सच्ची, निष्पक्ष और साहसी पत्रकारिता ही किसी देश के भविष्य की दिशा तय करती है। पत्रकारों की भूमिका को सलाम करते हुए हमें भी यह जिम्मेदारी निभानी चाहिए कि हम सत्य, स्वतंत्रता और न्याय के पक्ष में खड़े रहें, क्योंकि एक स्वतंत्र प्रेस ही एक स्वतंत्र समाज की सबसे मजबूत नींव होती है।
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