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सिस्टम में तितलियों की तरह नहीं, कॉकरोच के समान हैं पत्रकार: राजदीप सरदेसाई

‘ई4एम इंग्लिश जर्नलिज्म 40अंडर40’ समिट एंड अवॉर्ड्स के मौके पर दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में राजदीप सरदेसाई ने रखे अपने विचार

समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago

समाज में पत्रकारों की भूमिका के बारे में वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, टीवी न्यूज प्रेजेंटर राजदीप सरदेसाई का कहना है कि सिस्टम में पत्रकार कॉकरोच की तरह हैं, तितलियों की तरह नहीं। अपनी इस बात के समर्थन में उन्होंने कहा कि अगर कल को परमाणु विस्फोट हो जाता है, तो सब कुछ नष्ट हो जाएगा, लेकिन एक पत्रकार अगले दिन रिपोर्ट करने के लिए मौके पर मौजूद होगा।‘

राजदीप सरदेसाई ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) समूह द्वारा अंग्रेजी पत्रकारिता से जुड़े 40 प्रतिभाशाली पत्रकारों को सम्मानित करने के लिए दिल्ली के ‘इंडिया इंटरनेशनल सेंटर’ (IIC) में 27 अप्रैल 2022 को आयोजित एक कार्यक्रम को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे।

बता दें कि ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) समूह द्वारा अंग्रेजी पत्रकारिता से जुड़े 40 प्रतिभाशाली पत्रकारों के काम को एक नई पहचान देते हुए उन्हें ‘ई4एम इंग्लिश जर्नलिज्म 40अंडर40’ (e4m English Journalism 40 Under 40) की लिस्ट में शामिल किया गया है। इन पत्रकारों को सम्मानित करने के लिए ही यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था।

इस मौके पर ‘न्यूजनेक्स्ट 2022, फेस्टिवल ऑफ न्यूज’ के तहत ‘जर्नलिज्म: कल, आज और कल’ टॉपिक पर अपनी बात रखते हुए राजदीप सरदेसाई का कहना था, ‘हमें कुछ अलग करना चाहिए। यदि पत्रकार ऐसा नहीं कर सकते हैं तो उन्हें पब्लिक रिलेशंस में काम करना चाहिए। पत्रकारों और पब्लिक रिलेशंस प्रोफेशनल्स के बीच अंतर यह है कि अधिकतर पब्लिक रिलेशंस प्रोफेशनल्स प्रसिद्ध होने की इच्छा रखते हैं। पब्लिक रिलेशंस लोकप्रियता के बारे में है। पत्रकारों को लोकप्रियता के प्रतिस्पर्धा में शामिल नहीं होना चाहिए, उन्हें लोगों को अच्छे-बुरे का आईना दिखाना चाहिए और सच को उजागर करना चाहिए।’

इस दौरान सरदेसाई ने यह भी बताया कि 1988 में जब उन्होंने एक अखबार के साथ काम करना शुरू किया था, तब पत्रकारिता कैसी थी और आज के दौर में यह कैसे बदल गई है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी एक मल्टीमीडिया पीढ़ी है, क्योंकि वे इस डिजिटल युग में पॉडकास्ट, ब्लॉग, इंटरनेट, टेलीविजन, समाचार पत्रों सभी का इस्तेमाल कर सकते हैं और सभी प्रकार के मीडिया कम्युनिकेशन में शामिल हो सकते हैं लेकिन मैं अखबार की पीढ़ी से हूं।

सरदेसाई ने कहा कि वह अखबार के लिए काम करना पसंद करेंगे। उनका कहना था, ‘मैं 1991-92 में टाइम्स ऑफ इंडिया में संपादक था, लेकिन कई मायनों में, मेरी पसंदीदा यादें अखबार और टेलीविजन के शुरुआती दिनों की होंगी।’

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जब उन्होंने पत्रकारिता में अपनी यात्रा शुरू की थी, उस समय अखबारों की दुनिया बहुत अलग थी। सरदेसाई के अनुसार, ‘1988 में हम हाथ से अखबार निकालते थे, जिसे हम हॉट मेटल कहते हैं, उस पर इसे निकाला जाता था। अगली सुबह जब अखबार हाथ में आता था तो वह समय ऐसा होता था, जिसे मैं कभी नहीं भूलूंगा और मुझे अखबार की उस पीढ़ी का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला है।’

सरदेसाई ने एक पत्रकार के रूप में अपने शुरुआती दिनों के बारे में बताया, जब संचार विकल्पों की कमी के कारण रिपोर्टिंग करना मुश्किल था। सरदेसाई के अनुसार, ‘महाराष्ट्र के एक शहर लातूर में भूकंप आया, जिसने एक पूरे गांव को तहस-नहस कर दिया था। मुझे याद है कि उस समय मैं यात्रा नहीं कर पा रहा था और स्टोरी नहीं बता पा रहा था, क्योंकि हर संचार लाइन ठप थी। औरंगाबाद के एक कोने में, एक टेलेक्स मशीन चालू थी। देश को यह रिपोर्ट करने में हमें 10 दिन लगे कि उस दौरान 10,000 से अधिक लोग मारे गए थे। आज, आप इसे अपने मोबाइल फोन पर लाइव दिखाकर महज 10 सेकंड में कर सकते हैं। मोबाइल ऐप आप किसी को भी देश के किसी भी हिस्से में क्या हो रहा है, यह दिखा सकते हैं। ऐसे में दुनिया करीब आ गई है। अब यूक्रेन हमारे पड़ोस की तरह लगता है, जबकि 1990 के दशक की शुरुआत में खाड़ी युद्ध के समय भी ऐसा नहीं था।’

उनके अनुसार, ‘आज की पीढ़ी के पास इस मायने में एक ‘हथियार’ है। टेक्नोलॉजी आपको न्यूज का ‘योद्धा‘ बनने में सक्षम बनाती है। मेरी पीढ़ी के पास वह अवसर नहीं था। मैं इस बात से चकित हूं कि कैसे युवा पीढ़ी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने में सक्षम हैं, जबकि मैं टाइपराइटर से जूझ रहा था। मैं यह भी कहना चाहता हूं कि आप भाग्यशाली पीढ़ी हैं, जिसके पास हथियार के रूप में टेक्नोलॉजी है, आप अपनी स्टोरीज को रीयल-टाइम में भेजते हैं।’

सरदेसाई ने कहा, ‘पत्रकारिता की सबसे बड़ी खुशी यह थी कि यह 9-5 की नौकरी नहीं है। हर दिन एक नया दिन है और मैं आशा करता हूं कि यह आपमें में भी यह भावना पैदा करे, जब आप कुछ खोजते हैं। मेरा मानना ​​है कि टीवी में एंकर की तुलना में प्रोड्यूसर कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।’ टीवी पर अभद्र भाषा (हेट स्पीच) के बारे में बात करते हुए सरदेसाई ने कहा कि उन्हें इस बात की चिंता है कि खबरों में जहर घोला जा रहा है। टीआरपी के दबाव से टीवी पर तीखी बहस होती है, जबकि अखबार भी राजस्व के दबाव में होते हैं।

उन्होंने कहा, ‘मुझे यकीन है कि आप भविष्य को फिर से परिभाषित करेंगे। मुझे कोई संदेह नहीं है कि भविष्य बहुत उज्ज्वल है और आप दैनिक आधार पर समाचार एकत्र करने के लिए जो इनोवेशन और बुद्धिमत्ता का परिचय देते हैं, वह एक बेहतर भारत का निर्माण करेगा। यह टीआरपी के बारे में नहीं है, या आपके वीडियो कितने वायरल हैं। बल्कि यह इस बारे में है कि आप एक बेहतर भारत के निर्माण में एक छोटा सा अंतर कैसे लाते हैं।’


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