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अब इन हिंदी पोर्टल्स के संग जुड़े प्रशांत कनौजिया, बोले- 'भारत माता' में यकीन नहीं
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट के आरोप में पुलिस ने कुछ दिन पूर्व किया था गिरफ्तार
नीरज नैयर 6 years ago
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में गिरफ्तारी का सामना कर चुके पत्रकार प्रशांत कनौजिया का कहना है कि उनकी निष्ठा केवल संविधान के प्रति है और वह ‘भारत माता’ जैसी अवधारणा में यकीन नहीं रखते। कनौजिया का यह ताजा बयान विरोधियों को उनके खिलाफ मोर्चा खोलने का मौका दे सकता है।
‘द टेलीग्राफ’ को दिए इंटरव्यू में कनौजिया ने 8 जून को हुई घटना का जिक्र करते हुए अपने अनुभव साझा किये। कनौजिया ने बताया कि जब पुलिस उन्हें ले जा रही थी तो उन्हें अपने एनकाउंटर का डर था, क्योंकि यूपी पुलिस का रिकॉर्ड इस मामले में काफी दागदार रहा है।
बकौल कनौजिया, ‘सादा कपड़ों में जब पुलिस वालों ने मुझे पूर्वी दिल्ली से उठाया तो लगा कि वो मुझे दिल्ली या नोएडा के किसी पुलिस स्टेशन ले जाएंगे, मगर जैसे ही गाड़ी ग्रेटर नोएडा से आगे निकली, मेरी चिंताएं बढ़ने लगीं। मेरे मन में ख्याल चलने लगे कि यदि पुलिस ने मेरा एनकाउंटर कर दिया तो? क्या होगा यदि पुलिसवाले मुझे गोली मारकर यह थ्योरी बना दें कि मैं उनकी गिरफ्त से भागने का प्रयास कर रहा था? हालांकि, पुलिस मुझे सीधे लखनऊ ले गई, जहां पेशी के बाद मुझे जेल भेज दिया गया।’
प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी के बाद उनके पुराने ट्वीट खंगालकर यह साबित करने का प्रयास किया गया कि वो जात-पांत के नाम पर सामाजिक सद्भाव को प्रभावित कर रहे हैं। सोशल मीडिया के साथ-साथ मेनस्ट्रीम मीडिया में कनौजिया के खिलाफ खबरें दिखाई गईं। मीडिया, खासकर कुछ पत्रकारों के इस रुख से कनौजिया खासे नाराज हैं।
कनौजिया का कहना है, ‘आप मेरे बारे में कुछ भी भला-बुरा बोल सकते हैं, लेकिन जो व्यक्ति कैमरे के सामने 100 करोड़ की रिश्वत मांगते पकड़ा गया हो, क्या वह पत्रकार है? इसी तरह, कठुआ कांड का समर्थन करने वाले खुद को पत्रकार कैसे कह सकते हैं’? कनौजिया का ट्विटर हैंडल विवादस्पद ट्वीट, फोटो से भरा पड़ा है। उनकी भाषा पर भी ऐतराज जताया जाता रहा है। यही वजह है कि जब उनकी गिरफ्तारी हुई तो इसका समर्थन करने वालों की संख्या भी कम नहीं थी।
कनौजिया दलित हैं और दलितों पर होने वाले अत्याचारों को लेकर मुखर रहते हैं। इस बारे में उनका कहना है, ‘यदि कोई दलित को मारेगा, उसके मुंह में पेशाब करेगा तो मैं यह नहीं कहूंगा कि मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं। मैं चुभने वाले शब्द इस्तेमाल करूंगा, क्योंकि दलित होने के चलते मैंने भी बहुत कुछ सहा है।’
इस सवाल के जवाब में कि देश और उसके नेताओं के खिलाफ विवादास्पद विचार क्यों? कनौजिया ने कहा, ‘मेरी निष्ठा संविधान के प्रति है, देश और उसके नेताओं के प्रति नहीं। मैं ‘ये धरती मेरी मां है’ जैसी अवधारणा में विश्वास नहीं रखता।’ 8 जून के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कनौजिया ने कहा, ‘मुझे ले जाते हुए पुलिसवाले बोल रहे थे कि तुम वायर वालों को बहुत चर्बी चढ़ गई है, तुमको डालेंगे, फिर तुम्हारे बाप को भी डालेंगे।‘
गौरतलब है कि कनौजिया ‘द वायर’ के साथ काम कर चुके हैं। बकौल कनौजिया ‘लखनऊ में उन्हें मजिस्ट्रेट के घर ले जाया गया, जहां से पुलिस अस्पताल लेकर गई। अस्पताल में 150 पुलिसकर्मी मौजूद थे, डॉक्टर भी उन्हें ऐसे देख रहे थे जैसे वो कोई आतंकवादी हों। इसके बाद उन्हें लखनऊ सेंट्रल जेल ले जाया गया। कनौजिया के मुताबिक, जेल के कैदी भी इस बात को लेकर अचंभित थे कि मुख्यमंत्री पर टिप्पणी के चलते उन्हें जेल भेजा गया है।
प्रशांत कनौजिया फ़िलहाल फ्रीलांस पत्रकार के रूप में ‘द प्रिंट हिंदी और ‘सत्यहिंदी’ के साथ जुड़े हुए हैं।
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