होम / इंडस्ट्री ब्रीफिंग / क्या घट रही है एडिटर्स बनने की औसत उम्र? ‘ET’ के श्रुतिजीत केके हैं इसका बड़ा उदाहरण
क्या घट रही है एडिटर्स बनने की औसत उम्र? ‘ET’ के श्रुतिजीत केके हैं इसका बड़ा उदाहरण
‘इकनॉमिक टाइम्स’ के युवा एग्जिक्यूटिव एडिटर श्रुतिजीत केके पूर्व में महज 36 साल की उम्र में करीब तीन साल तक ‘एचटी मीडिया’ (HT Media) के बिजनेस अखबार ‘मिंट’ (Mint) में एडिटर-इन-चीफ रह चुके हैं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago
वरिष्ठ पत्रकार श्रुतिजीत केके (Sruthijith KK) दैनिक बिजनेस अखबार ‘इकनॉमिक टाइम्स’ (ET) के सबसे युवा एडिटोरियल लीडर्स में से एक हैं। सात जनवरी 2024 को वह 40 बरस के हो गए हैं और 41वें वर्ष में प्रवेश कर लिया है। बता दें कि श्रुतिजीत केके ने कुछ महीने पहले ही महज 39 साल की उम्र में ‘इकनॉमिक टाइम्स’ में एग्जिक्यूटिव एडिटर के तौर पर जॉइन किया है और इसे नई ऊंचाइयों पर ले जाने में जुटे हुए हैं।
श्रुतिजीत केके को मीडिया में काम करने का 18 साल से ज्यादा का अनुभव है। पूर्व में वह ‘Mint’, ‘HuffPost India’, ‘Apple’ और ‘Quartz’ जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रमुख भूमिकाएं निभा चुके हैं, जहां उन्होंने उच्च गुणवत्ता वाला कंटेंट और आकर्षक स्टोरीटैलिंग के माध्यम से आर्थिक परिदृश्य पर व्यावहारिक विश्लेषण प्रदान करने में अहम भूमिका निभाई।
श्रुतिजीत केके इससे पहले भी दो बार इस पब्लिकेशन के साथ काम कर चुके हैं। पूर्व में वह वर्ष 2009 से 2014 के दौरान ‘ET’ में असिस्टेंट एडिटर के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। इसके बाद वह जून 2018 से अक्टूबर 2020 तक ‘ईटी मैगजीन’ (ET Magazine) के एडिटर रह चुके हैं। इस बीच सितंबर 2017 से मई 2018 तक वह ‘एप्पल’ (Apple) में ऐप स्टोर एडिटर के रूप में अपनी भूमिका निभा चुके हैं।
‘इकनॉमिक टाइम्स’ से पहले श्रुतिजीत केके करीब तीन साल तक ‘एचटी मीडिया’ (HT Media) के बिजनेस अखबार ‘मिंट’ (Mint) में एडिटर-इन-चीफ रह चुके हैं। उस समय वह सिर्फ 36 साल के थे। नवंबर 2014 से अगस्त 2017 के बीच करीब पौने तीन साल तक श्रुतिजीत महज तीस साल की उम्र में भारत में ‘Huffingtonpost’ के एडिटर-इन-चीफ रह चुके हैं। इससे पहले वह करीब छह महीने तक ‘Quartz India’ के एडिटर भी रहे हैं। उस समय वह 30 साल के थे। यही नहीं, वर्ष 2002 से 2005 तक श्रुतिजीत ने सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी सहित कई कार्य किए। श्रुतिजीत ने टेक्नोलॉजी, मीडिया और टेलीकॉम (TMT) पर दमदार रिपोर्टिंग करके खूब नाम कमाया है।
वर्ष 2023 में श्रुतिजीत केके ने जब ‘ET’ के साथ अपनी नई पारी शुरू की थी, उस समय उनकी कंपनी के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (पब्लिशिंग) एस. शिवकुमार का कहना था, ‘श्रुतिजीत के पास मीडिया इंडस्ट्री में काम करने का काफी अनुभव और मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड है। उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम किया है। उभरते मीडिया परिदृश्य के बारे में उनकी गहरी समझ, चुनौतियों से सफलतापूर्वक निपटने और मीडिया ईकोसिस्टम के डिजिटलीकरण के अवसरों का लाभ उठाने की क्षमता उन्हें ईटी की लीडरशिप टीम के लिए खास बनाती है।’ पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो श्रुतिजीत केके ने ‘दिल्ली यूनिवर्सिटी’ से ग्रेजुएशन किया है।
अब यदि हम श्रुतिजीत केके के करियर ग्राफ पर नजर डालें तो सबसे बड़ा सवाल उठता है कि क्या एडिटर्स बनने की औसत उम्र में कमी आ रही है? इसके अलावा, क्या व्यापक डिजिटल अनुभव और डिजिटल क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करना संपादकीय नेतृत्व के लिए आवश्यक है?
आज के दौर में प्रतिष्ठित और अच्छी तरह स्थापित मीडिया घराने जो बी2सी की डिजिटल परिसंपत्तियों (digital assets) में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं, ने अपनी टीमों को आदेश दिया है कि वे डिजिटल डोमेन में 40 वर्ष से अधिक उम्र के प्रोफेशनल्स और एडिटर्स को काम पर न रखें। दरअसल, संपादकीय क्षेत्र में 35 वर्ष से कम उम्र के प्रोफेशनल्स को नियुक्त करने के पीछे का उद्देश्य समग्र डोमेन को बढ़ावा देना है। वर्तमान दौर में युवा वर्ग कंटेंट का सबसे बड़ा कंज्यूमर है और यंग लीडर्स बेहतर तरीके से समझते हैं कि 22 से 38 साल की उम्र को पाठक क्या चाहते हैं।
यदि हम पूरा परिप्रेक्ष्य देखें तो ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब ‘इकनॉमिक टाइम्स’ ने पहली बार युवा एडिटोरियल लीडर्स की नियुक्ति की है। वर्तमान में ‘नेटवर्क18’ में न्यूज टीवी, न्यूज ब्रॉडकास्ट और डिजिटल न्यूज बिजनेस के एडिटर-इन-चीफ के पद पर अपनी भूमिका निभा रहे राहुल जोशी को उस समय ‘ET’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर पद पर नियुक्त किया गया था, जब उनकी उम्र महज 36 साल थी।
महज 33-34 साल की उम्र में ही राहुल जोशी ‘ET’ के रेजिडेंट एडिटर बन गए थे। दरअसल, जब जोशी ‘ET’ के रेजिडेंट एडिटर बने तो उस समय राजऋषि सिंघल एग्जिक्यूटिव एडिटर थे। लगभग दो वर्षों तक सिंघल और जोशी दोनों ‘ET’ को एक साथ चला रहे थे।
सिंघल जनवरी 2004 से अप्रैल 2007 तक करीब तीन साल और चार महीने के लिए एग्जिक्यूटिव एडिटर रहे। हालांकि, अप्रैल 2007 में जोशी ने एग्जिक्यूटिव एडिटर के रूप में ‘ET’ का संपादकीय संचालन शुरू किया।
जोशी के अलावा, ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (TOI) में एडिटोरियल बोर्ड के हेड जयदीप बोस (जिन्हें लोग जोजो के नाम से भी जानते हैं) ने भी ‘ET’ के साथ उस समय काम करना शुरू किया था, जब वह अपने जीवन के दूसरे दशक में थे। इसके बाद वह महज 32-33 साल की उम्र में ‘ET’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर बन गए थे।
‘टाइम्स ग्रुप’ और ‘ET’ नेतृत्व प्रतिभा को पहचानने और उन्हें संपादकीय व न्यूज रूम्स का नेतृत्व करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए जाने जाते हैं। माना जा सकता है कि प्रमुख एडिटोरियल पदों के लिए युवा और डिजिटल अनुभव अब एक आवश्यक शर्त बन गया है।
सिर्फ टाइम्स ग्रुप ही नहीं, तमाम अन्य पब्लिकेशंस में भी इसी तरह का ट्रेंड चलन में है। मीडिया के क्षेत्र में जाने-माने नाम वीर सांघवी और रजत शर्मा भी अपनी उम्र के दूसरे दशक में एडिटर बन गए थे। यही नहीं, एमजे अकबर भी उस समय एडिटर बन गए थे, जब वह काफी युवा थे।
मिंट में श्रुतिजीत केके की जगह लेने वाले रवि कृष्णन की उम्र भी 40 के आसपास है। बिनॉय प्रभाकर, जो मनीकंट्रोल के एडिटर थे और अब HT में चीफ कंटेंट ऑफिसर के रूप में काम करते हैं, उनकी उम्र भी 40 के आसपास है।
टैग्स टाइम्स ऑफ इंडिया मिंट इकनॉमिक टाइम्स श्रुतिजीत केके ईटी बिजनेस अखबार बोधिसत्व गांगुली संपादकों की औसत उम्र