क्या आपने देखा भारतीय महिला पत्रकार का ये 'तौबा-तौबा' विडियो,उड़ाई पाक की धज्जियां

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में पिछले दिनों हुए आतंकी हमले में भारतीय सुरक्षा बलों के...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 28 February, 2019
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Thursday, 28 February, 2019
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समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में पिछले दिनों हुए आतंकी हमले में भारतीय सुरक्षा बलों के कई जवानों के शहीद होने और बदले में भारत द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई के बाद से दोनों देशों की मीडिया में भी तल्खी स्पष्ट दिखाई दे रही है। दोनों देशों के न्यूज एंकर अपने गुस्से को विभिन्न अंदाज में बयां भी कर रहे हैं।

हाल ही में सोशल मीडिया पर इस मामले से जुड़े ऐसे ही दो विडियो वायरल हुए हैं, जिन्हें लोगों द्वारा खूब देखा और शेयर किया जा रहा है। पहला विडियो पाकिस्तान का है। इसमें पाकिस्तानी टीवी चैनल ‘सिटी42’ का सीनियर रिपोर्टर कैसर खोखर न्यूज रूम के लाइव चैट में इतना ज्यादा इमोशनल हो गया कि तौबा-तौबा करने लगा। उसने कम से कम 20 बार अपने कान पकड़कर तौबा-तौबा की। दरअसल, वह मोदी सरकार से नाराज था कि इंडिया ने पुलवामा के बाद पाकिस्तान में निर्यात होने वाले टमाटर पर बैन लगाकर काफी गलत काम किया है। उसका कहना था कि भारत को इसका जवाब एटम बम से दिया जायेगा।

कैसर खोखऱ को इस अंदाज में जवाब देने के लिए भारतीय पत्रकार निदा अहमद भी आगे आईं और उन्होंने भी सोशल मीडिया पर एक विडियो शेयर कर कैसर खोखर के ‘तौबा-तौबा’ की धज्जियां उड़ा दीं। लगभग सात मिनट के इस विडियो को सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है। निदा अहमद को उनके इस अंदाज के लिए सोशल मीडिया यूजर्स बधाइयां भी दे रहे हैं।

निदा अहमद का ये विडियो आप यहां देख सकते हैं-

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मानहानि मामले में BTV News को एक लाख रुपये देने का आदेश, कर्नाटक बैंक से मांगनी होगी माफी

कर्नाटक की एक अदालत ने कन्नड़ न्यूज चैनल BTV News को कर्नाटक बैंक को एक लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया है।

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Published - Tuesday, 27 October, 2026
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Tuesday, 27 October, 2026
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कर्नाटक की एक अदालत ने कन्नड़ न्यूज चैनल BTV News को कर्नाटक बैंक को एक लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया है। अदालत ने चैनल को बैंक से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और बैंक तथा उसके अधिकारियों के खिलाफ इस विवाद से जुड़े मानहानिकारक बयान दोबारा प्रकाशित या प्रसारित नहीं करने का निर्देश भी दिया है।

बेंगलुरु के अतिरिक्त सिटी सिविल एवं सेशंस जज आरवाई शशिधर ने 1 अक्टूबर को दिए फैसले में कहा कि चैनल ने भरोसेमंद स्रोतों से जानकारी की पुष्टि किए बिना बैंक के खिलाफ आरोप प्रसारित किए। अदालत के मुताबिक, चैनल ने भारतीय प्रेस परिषद (Press Council of India) की ओर से तय पत्रकारिता के आचरण संबंधी मानकों और नैतिक सिद्धांतों का पालन नहीं किया।

बैंक के एमडी और सीईओ के इस्तीफे के बाद शुरू हुआ विवाद

यह मामला कर्नाटक बैंक के तत्कालीन प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (MD एवं CEO) श्रीकृष्णन हरि हरा शर्मा के इस्तीफे के बाद शुरू हुआ था। उन्होंने 29 जून 2025 को इस्तीफा दिया था।

बैंक के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 के ऑडिट में सामने आया था कि शर्मा ने सलाहकारों और अन्य राजस्व खर्चों पर अपने निर्धारित अधिकारों से अधिक 1.16 करोड़ रुपये खर्च किए थे। इसके बाद बैंक के बोर्ड ने ऑडिट के निष्कर्षों पर विचार किया और संबंधित राशि की वसूली की सिफारिश की। बैंक ने इन घटनाक्रमों की जानकारी 14 मई 2025 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को दी थी।

इसके बाद शर्मा ने व्यक्तिगत कारणों और मुंबई स्थानांतरित होने की इच्छा का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया।

बैंक की वित्तीय स्थिति को लेकर प्रसारण पर आपत्ति

कर्नाटक बैंक ने अदालत में आरोप लगाया कि BTV News ने इस्तीफे से जुड़े घटनाक्रमों की पुष्टि किए बिना बैंक की वित्तीय स्थिति, आंतरिक कामकाज और ग्राहकों की जमा राशि की सुरक्षा को लेकर सनसनीखेज और मानहानिकारक दावे प्रसारित किए।

बैंक के अनुसार, चैनल पर ऐसी बातें कही गईं जिनसे जमाकर्ताओं के पैसे के गलत इस्तेमाल की आशंका जताई गई और लोगों को बैंक में खाता खोलने से पहले सावधानी बरतने की सलाह दी गई। चैनल ने कथित तौर पर बैंक में वित्तीय गड़बड़ियों और निदेशकों के बीच विवाद होने की बातें भी प्रसारित कीं।

बैंक ने दावा किया कि इन प्रसारणों से निवेशकों और जमाकर्ताओं के बीच चिंता पैदा हुई और बैंक के निदेशकों को कई सवालों के जवाब देने पड़े।

शेयर की कीमत गिरने का भी किया था दावा

बैंक ने अपनी याचिका में कहा कि प्रसारणों से उसकी प्रतिष्ठा और कारोबारी हितों को नुकसान पहुंचा। बैंक के मुताबिक, 26 जून 2025 को कारोबार बंद होने के समय उसके शेयर की कीमत करीब 207 रुपये थी और प्रसारणों के बाद इसमें तेज गिरावट आई।

हालांकि, शेयर की कीमत में गिरावट से जुड़ी बात बैंक की ओर से अदालत में किया गया दावा था।

कर्नाटक बैंक ने 30 जून 2025 को मानहानि का मुकदमा दायर किया था। इसमें बैंक ने 1 लाख रुपये के हर्जाने, सार्वजनिक माफी और भविष्य में ऐसे मानहानिकारक प्रसारणों पर स्थायी रोक लगाने की मांग की थी।

अदालत में पेश नहीं हुआ न्यूज चैनल

मामले की सुनवाई के दौरान BTV News समन मिलने के बावजूद अदालत में पेश नहीं हुआ। इसके बाद अदालत ने चैनल की अनुपस्थिति में मामले की सुनवाई आगे बढ़ाई।

अदालत ने बैंक के मुख्य कारोबार अधिकारी चंद्रशेखर की गवाही के साथ ऑडिट किए गए वित्तीय विवरण, तत्कालीन एमडी के इस्तीफे का पत्र, टीवी प्रसारणों की तस्वीरों और संबंधित सामग्री वाली सीडी की जांच की।

इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने माना कि चैनल ने बैंक के प्रबंधन से विश्वसनीय जानकारी हासिल किए बिना आरोप प्रसारित किए। अदालत के मुताबिक, इन प्रसारणों से बैंक की प्रतिष्ठा और कारोबारी हितों को नुकसान पहुंचा, जिसके लिए चैनल हर्जाना देने के लिए जिम्मेदार है।

हर्जाना, माफी और प्रसारण पर स्थायी रोक

अदालत ने कर्नाटक बैंक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए BTV News को 1 लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया। साथ ही, चैनल को बैंक से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और बैंक तथा उसके अधिकारियों के खिलाफ इस विवाद से संबंधित मानहानिकारक बयान प्रकाशित या प्रसारित करने से स्थायी रूप से रोक दिया।

अदालत ने मुकदमे का खर्च भी बैंक को देने का आदेश दिया।

यह फैसला मीडिया संस्थानों के लिए खबरों की पुष्टि, विश्वसनीय स्रोतों के इस्तेमाल और पत्रकारिता के पेशेवर मानकों के पालन के महत्व को रेखांकित करता है।

 

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21 न्यूज पब्लिशर्स ने डेटा प्राइवेसी कानून को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

भारत के डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून को लेकर मीडिया जगत में नई कानूनी बहस शुरू हो गई है।

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Published - Tuesday, 27 October, 2026
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Tuesday, 27 October, 2026
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भारत के डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून को लेकर मीडिया जगत में नई कानूनी बहस शुरू हो गई है। मुकेश अंबानी और गौतम अडानी से जुड़ी मीडिया कंपनियों समेत 21 समाचार प्रकाशकों ने इस कानून के कुछ प्रावधानों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। प्रकाशकों का कहना है कि कानून में पत्रकारों को स्पष्ट छूट नहीं मिलने से खोजी पत्रकारिता और खबरों के गोपनीय सूत्रों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) और अन्य मीडिया समूहों ने 6 अक्टूबर को याचिका दायर की थी। इस मामले की सुनवाई 27 अक्टूबर को होने की संभावना है। यह कानून के खिलाफ अब तक की प्रमुख कानूनी चुनौतियों में से एक है। 

किन मीडिया कंपनियों ने उठाए सवाल?

इस चुनौती में शामिल प्रकाशकों में मुकेश अंबानी की कंपनी नेटवर्क18, गौतम अडानी के मीडिया समूह से जुड़ा एनडीटीवी, इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स इंटरनेट जैसे नाम शामिल हैं। टाइम्स इंटरनेट, टाइम्स ऑफ इंडिया समूह का हिस्सा है।

प्रकाशकों की मुख्य आपत्ति यह है कि कानून में मीडिया संस्थानों और पत्रकारों के लिए स्पष्ट लिखित छूट नहीं दी गई है। DNPA का कहना है कि अगस्त में सरकार के साथ हुई बैठक में मीडिया कंपनियों को आश्वासन दिया गया था कि कानून प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करेगा। हालांकि, संगठन के मुताबिक, केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं है और पत्रकारों के लिए लिखित सुरक्षा प्रावधान जरूरी हैं।

DNPA ने अपनी याचिका में कानून के उन प्रावधानों को रद्द करने की मांग की है, जिन्हें वह पत्रकारिता के काम में बाधा डालने वाला मानता है।

पत्रकारिता की जांच प्रक्रिया पर क्या है आपत्ति?

प्रकाशकों की सबसे बड़ी चिंता व्यक्तिगत डेटा के इस्तेमाल के लिए सहमति लेने से जुड़े प्रावधानों को लेकर है। उनका तर्क है कि अगर किसी व्यक्ति के बारे में खोजी रिपोर्ट तैयार करने से पहले पत्रकार को उस व्यक्ति को सूचना देनी पड़े या उसकी सहमति लेनी पड़े, तो जांच प्रभावित हो सकती है।

DNPA का कहना है कि ऐसी स्थिति में जांच के दायरे में आया व्यक्ति सबूत मिटा सकता है या गवाहों पर दबाव डाल सकता है। इससे भ्रष्टाचार, कारोबारी गड़बड़ियों और चुनाव से जुड़े मामलों की पड़ताल करना मुश्किल हो सकता है।

प्रकाशकों ने यह भी चिंता जताई है कि कानून के तहत कोई व्यक्ति अपनी सहमति वापस लेकर अपने व्यक्तिगत डेटा को मिटाने की मांग कर सकता है। DNPA के मुताबिक, जनहित में प्रकाशित किसी खबर को सुरक्षित रखने के लिए स्पष्ट प्रावधान नहीं होने से मीडिया संस्थानों पर खबर हटाने या उसमें बड़े बदलाव करने का दबाव बन सकता है।

हालांकि, ये प्रकाशकों की ओर से अदालत में रखी गई दलीलें हैं। इनका अंतिम कानूनी अर्थ और कानून के अलग-अलग मामलों में लागू होने का तरीका अदालत के फैसले तथा संबंधित प्रावधानों की व्याख्या पर निर्भर करेगा।

पत्रकारों के सूत्रों की पहचान उजागर होने का डर

मीडिया समूहों ने सरकार को कुछ संगठनों से जानकारी मांगने के अधिकार से जुड़े प्रावधानों पर भी सवाल उठाए हैं। DNPA के मुताबिक, कानून के तहत संबंधित सरकारी प्राधिकरण कुछ मामलों में जानकारी मांग सकता है और नियमों का पालन नहीं करने पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

प्रकाशकों को आशंका है कि सरकार के पास जानकारी मांगने की व्यापक शक्तियां होने से पत्रकारों को अपने गोपनीय सूत्रों से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

खोजी पत्रकारिता में कई बार लोग भ्रष्टाचार, कंपनियों की कथित गड़बड़ियों या चुनावी अनियमितताओं से जुड़ी जानकारी पत्रकारों को गोपनीय तरीके से देते हैं। DNPA का कहना है कि अगर ऐसे लोगों की पहचान उजागर होने का डर बढ़ता है, तो वे पत्रकारों के साथ जानकारी साझा करने से बच सकते हैं।

संगठन ने यह भी कहा है कि कानून में सरकार को कुछ परिस्थितियों में छूट दी गई है, लेकिन पत्रकारों के लिए वैसी स्पष्ट सुरक्षा नहीं है। उसने यूरोपीय संघ, सिंगापुर और ब्रिटेन में पत्रकारिता से जुड़े सुरक्षा प्रावधानों का हवाला दिया है।

मई 2027 से लागू होने हैं कई प्रावधान

प्रकाशकों ने कानून के उन विवादित प्रावधानों को चुनौती दी है, जिन्हें मई 2027 से लागू किया जाना है। वे चाहते हैं कि अदालत कानून के अधिकांश विवादित हिस्सों को रद्द करे।

यह मामला डिजिटल व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता के बीच संतुलन से जुड़ा है। सरकार ने यह कानून लोगों के डिजिटल व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के उद्देश्य से लागू करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इससे मेटा और गूगल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी डेटा के इस्तेमाल और अनुपालन से जुड़ी जिम्मेदारियां बढ़ती हैं।

दूसरी ओर, मीडिया समूहों का कहना है कि पत्रकारिता के लिए स्पष्ट छूट के अभाव में कानून का इस्तेमाल खबरों की जांच और प्रकाशन को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है।

सरकार का पक्ष भी महत्वपूर्ण

रॉयटर्स के मुताबिक, DNPA, संबंधित मीडिया समूहों और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने उसकी टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया। इसलिए इस मामले में सरकार की विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।

सरकार पहले कह चुकी है कि वह प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान करती है और भारत में बड़ी संख्या में अखबारों तथा टीवी चैनलों वाला व्यापक मीडिया तंत्र मौजूद है। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता रैंकिंग पर भी आपत्ति जताई है।

अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से यह स्पष्ट होने की दिशा में अहम कदम उठ सकता है कि व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों और खोजी पत्रकारिता की जरूरतों के बीच कानूनी संतुलन कैसे तय किया जाए। फिलहाल, प्रकाशकों की आपत्तियां याचिका में दर्ज दलीलें हैं और अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है। 

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गुलाम जिलानी ने ‘मिंट’ में अपनी पारी को दिया विराम

मीडिया संस्थान मिंट (LiveMint) में पॉलिटिकल डेस्क एडिटर के तौर पर काम कर रहे गुलाम जिलानी ने संस्थान से विदाई ले ली है। वह फरवरी 2024 से अक्टूबर 2026 तक इस संस्थान से जुड़े रहे।

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Published - Monday, 26 October, 2026
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Monday, 26 October, 2026
Gulam Jeelani

मीडिया संस्थान मिंट (LiveMint) में पॉलिटिकल डेस्क एडिटर के तौर पर काम कर रहे गुलाम जिलानी ने संस्थान से विदाई ले ली है। वह फरवरी 2024 से अक्टूबर 2026 तक इस संस्थान से जुड़े रहे। इस दौरान उन्होंने राजनीति और शासन से जुड़ी खबरों की कवरेज की जिम्मेदारी संभाली।

समाचार4मीडिया से बातचीत में जिलानी ने बताया कि इस दौरान उन्होंने बिहार व बंगाल चुनाव की ग्राउंड कवरेज भी की। जिलानी का कहना था कि वह जल्द ही अपनी नई पारी शुरू करेंगे और फिर उसके बारे में बताएंगे।

पत्रकारिता में 17 साल का अनुभव रखने वाले गुलाम जिलानी ने मिंट में ब्रेकिंग न्यूज, विस्तृत साक्षात्कार और विश्लेषणात्मक खबरों के जरिए राजनीतिक घटनाक्रमों को कवर किया। उन्होंने चुनाव, विरोध प्रदर्शनों और अन्य प्रमुख घटनाओं के दौरान मौके पर जाकर रिपोर्टिंग भी की। इसके अलावा, उन्होंने वीडियो इंटरव्यू और एक्सप्लेनर तैयार करने का काम किया।

मिंट से पहले गुलाम जिलानी एसोसिएटेड ब्रॉडकास्टिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (टीवी9) में सीनियर असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत थे। अगस्त 2022 से फरवरी 2024 तक यहां काम करते हुए उन्होंने News9Plus ऐप के लिए राजनीति पर 10 से 12 मिनट की वीडियो डॉक्यूमेंट्री तैयार कीं। साथ ही, News9Live वेबसाइट के लिए लेख लिखे और News9 Live के यूट्यूब लाइवस्ट्रीमिंग चैनल के लिए रिपोर्टिंग की।

इससे पहले वह मनीकंट्रोल में अगस्त 2020 से जुलाई 2022 तक असिस्टेंट एडिटर रहे। यहां उन्होंने राजनीति और शासन से जुड़े विषयों पर ब्रेकिंग न्यूज, साक्षात्कार और विश्लेषणात्मक लेख लिखे। उन्होंने विभिन्न स्रोतों और प्रतिस्पर्धी मीडिया संस्थानों की खबरों का चयन कर प्रकाशन के लिए तैयार करने का काम भी किया।

गुलाम जिलानी ने दिसंबर 2018 से अगस्त 2020 तक इंडिया टुडे ग्रुप के मेल टुडे में असिस्टेंट एडिटर के रूप में काम किया। यहां उन्होंने रिपोर्टरों की टीम का नेतृत्व करने के साथ कवर स्टोरीज के संपादन और चयन की जिम्मेदारी संभाली।

जनवरी 2017 से दिसंबर 2018 तक वह हिंदुस्तान टाइम्स में स्पेशल कॉरेस्पॉन्डेंट रहे। इस दौरान उन्होंने दिल्ली में राजनीति और शासन से जुड़े मुद्दों को कवर किया। उत्तर प्रदेश और पंजाब के विधानसभा चुनावों की रिपोर्टिंग के अलावा, उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दंगों तथा मांस और चमड़ा उद्योग पर कार्रवाई के प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी काम किया।

अपने करियर में गुलाम जिलानी हिंदुस्तान टाइम्स, सीएनएन-न्यूज18, कश्मीर रीडर और द पायनियर जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं। सीएनएन-न्यूज18 में उन्होंने उत्तर प्रदेश के स्टेट कॉरेस्पॉन्डेंट के तौर पर लखनऊ से रिपोर्टिंग की। वहीं, द पायनियर में उन्होंने शिक्षा से जुड़ी खबरों पर काम किया।

अप्रैल से सितंबर 2018 के बीच उन्होंने अमेरिका के मिनियापोलिस स्थित स्टार ट्रिब्यून में अल्फ्रेड फ्रेंडली प्रेस पार्टनर्स फेलो के रूप में भी काम किया। यहां उन्होंने खोजपरक रिपोर्टिंग और स्थानीय खबरों पर काम किया। गुलाम जिलानी ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई की है। इसके साथ ही उन्होंने यहीं से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की है।

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आउटलुक पब्लिशिंग में अदिति मल्होत्रा की नियुक्ति, बनीं जनरल मैनेजर–एचआर

आउटलुक पब्लिशिंग से पहले वह एचटी मीडिया लिमिटेड के फीवर एफएम में सीनियर मैनेजर–ह्यूमन रिसोर्स के पद पर कार्यरत थीं।

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Published - Monday, 26 October, 2026
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Monday, 26 October, 2026
Aditi Malhotra Outlook

मीडिया कंपनी आउटलुक पब्लिशिंग (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड में अदिति मल्होत्रा ने जनरल मैनेजर–एचआर के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने लिंक्डइन पर अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की है। इस पद पर वह कंपनी के मानव संसाधन (एचआर) विभाग का नेतृत्व करेंगी।

अदिति मल्होत्रा को मीडिया, ब्रॉडकास्ट और डिजिटल कारोबार में एचआर के क्षेत्र में काम करने का अनुभव है। आउटलुक पब्लिशिंग से पहले वह एचटी मीडिया लिमिटेड के फीवर एफएम में सीनियर मैनेजर–ह्यूमन रिसोर्स के पद पर कार्यरत थीं। उन्होंने मार्च 2022 में यह जिम्मेदारी संभाली थी और सितंबर 2026 तक इस भूमिका में रहीं।

फीवर एफएम में उन्होंने कंटेंट, सेल्स, मार्केटिंग और कॉरपोरेट विभागों में एचआर बिजनेस पार्टनर के तौर पर काम किया।

इससे पहले अदिति मल्होत्रा ने जनवरी 2021 से मार्च 2022 तक बेटर डॉट कॉम में पीपल बिजनेस पार्टनर के तौर पर काम किया। उन्होंने सितंबर 2009 से फरवरी 2010 तक MAH India में मैनेजमेंट ट्रेनी के तौर पर काम किया। इसके बाद मार्च 2010 में रेड एफएम में मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में अपना सफर शुरू किया।

इसके बाद उन्होंने वहां एचआर से जुड़ी विभिन्न भूमिकाओं में काम किया और मार्च 2018 से जनवरी 2021 तक मैनेजर–ह्यूमन रिसोर्स के पद पर रहीं।

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डेल्टा एक्सचेंज बना भारत-न्यूजीलैंड सीरीज का सह-प्रायोजक

डेल्टा एक्सचेंज भारत-न्यूजीलैंड टी20 अंतरराष्ट्रीय और वनडे सीरीज का सह-प्रायोजक बना है। साझेदारी के तहत कंपनी की ब्रांडिंग मैदान और प्रसारण से जुड़े प्रमुख स्थानों पर दिखाई देगी।

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Published - Monday, 26 October, 2026
Last Modified:
Monday, 26 October, 2026
delta

डेल्टा एक्सचेंज (Delta Exchange) भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेली जा रही टी20 अंतरराष्ट्रीय और वनडे सीरीज का सह-प्रायोजक बन गया है। इसके साथ ही क्रिप्टोकरेंसी डेरिवेटिव प्लेटफॉर्म ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के साथ अपनी साझेदारी को आगे बढ़ाया है।

भारत-न्यूजीलैंड सीरीज की शुरुआत 22 अक्टूबर से हुई है। इसमें पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय और पांच वनडे मुकाबले खेले जाएंगे। सीरीज 15 नवंबर तक चलेगी। साझेदारी के तहत डेल्टा एक्सचेंज की ब्रांडिंग मैदान और प्रसारण से जुड़े कई प्रमुख स्थानों पर दिखाई देगी। इसमें स्थिर और हाई-डेफिनिशन डिजिटल पेरिमीटर बोर्ड, डिजिटल साइट स्क्रीन और विकेट के पीछे वर्चुअल पिच मैट शामिल हैं।

मैच प्रेजेंटेशन, मैदान के बीच होने वाली चर्चाओं और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस्तेमाल होने वाले साझा बैकड्रॉप पर भी कंपनी की ब्रांडिंग नजर आएगी। इस साझेदारी का उद्देश्य क्रिकेट दर्शकों के बीच डेल्टा एक्सचेंज की पहचान मजबूत करना और उसके प्रोडक्ट्स के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।

डेल्टा एक्सचेंज खुद को एफआईयू-इंडिया (FIU-India) में पंजीकृत क्रिप्टोकरेंसी डेरिवेटिव एक्सचेंज के तौर पर पेश करता है।

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भास्कर रावत बने डिश टीवी के वाइस प्रेसिडेंट, ग्रोथ

भास्कर रावत डिश टीवी में वाइस प्रेसिडेंट, ग्रोथ बने हैं। इससे पहले वह ओटीटीप्ले में हेड ऑफ ग्रोथ थे और ग्रोथ, एनालिटिक्स, मार्केटिंग तथा कस्टमर एक्विजिशन पर काम करते रहे हैं।

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Published - Monday, 26 October, 2026
Last Modified:
Monday, 26 October, 2026
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भास्कर रावत (Bhaskar Rawat) ने डिश टीवी (DishTV) में वाइस प्रेसिडेंट, ग्रोथ (Vice President, Growth) के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी साझा की।

डिश टीवी से जुड़ने से पहले रावत एचटी मीडिया ग्रुप (HT Media Group) के ओटीटीप्ले (OTTplay) में हेड ऑफ ग्रोथ (Head of Growth) थे।

नई भूमिका में रावत ग्रोथ और एनालिटिक्स (Analytics) से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालेंगे। उनका फोकस कंज्यूमर बिजनेस के लिए स्केलेबल ग्रोथ सिस्टम तैयार करने पर रहेगा। उनके काम में मार्केटिंग, एनालिटिक्स, लाइफसाइकिल मैनेजमेंट, कस्टमर एक्विजिशन पार्टनरशिप और बिजनेस आउटकम्स शामिल हैं।

करियर के शुरुआती दौर में रावत ने आरपी-संजीव गोयनका ग्रुप (RP-Sanjiv Goenka Group), जियो (Jio), एयरटेल (Airtel) और लावा इंटरनेशनल (Lava International) समेत कई संस्थानों के साथ काम किया है।

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स्पॉटिफाई का मजबूत प्रदर्शन, राजस्व 5 अरब यूरो पहुंचा

स्पॉटिफाई ने तीसरी तिमाही में 16 फीसदी राजस्व वृद्धि दर्ज की। कंपनी का राजस्व 5 अरब यूरो, पेड सब्सक्राइबर 30.6 करोड़ और मासिक सक्रिय उपयोगकर्ता 78.8 करोड़ पहुंच गए।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 26 October, 2026
Last Modified:
Monday, 26 October, 2026
spotify

स्पॉटिफाई (Spotify) ने तीसरी तिमाही में सालाना आधार पर राजस्व में 16 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की है। कंपनी का राजस्व बढ़कर 5 अरब यूरो हो गया। इस दौरान भुगतान करने वाले ग्राहकों की संख्या 9 फीसदी बढ़कर 30.6 करोड़ पहुंच गई, जबकि मासिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं (Monthly Active Users) की संख्या 11 फीसदी बढ़कर 78.8 करोड़ हो गई।

कंपनी अब म्यूजिक से आगे बढ़कर पॉडकास्ट, क्रिएटर्स और ऑडियोबुक जैसे क्षेत्रों में भी अपनी पहुंच बढ़ा रही है। स्पॉटिफाई की योजना 2026 के अंत तक ऑडियोबुक की उपलब्धता 22 बाजारों से बढ़ाकर 180 से ज्यादा बाजारों तक करने की है। इससे दुनिया भर में 75 करोड़ से अधिक लोगों को स्ट्रीमिंग या खरीद के जरिए ऑडियोबुक उपलब्ध हो सकेंगी।

स्पॉटिफाई का पार्टनर प्रोग्राम (Partner Program) भी 35 से ज्यादा नए बाजारों तक पहुंचाया जा रहा है। इससे पात्र पॉडकास्ट क्रिएटर्स के लिए कमाई के नए अवसर खुलेंगे। कंपनी ने 34 बाजारों में क्रिएटर मेंबरशिप (Creator Membership) की शुरुआत भी की है। इसके तहत पात्र क्रिएटर्स अपने प्रशंसकों को विशेष सामग्री और अनुभव उपलब्ध करा सकेंगे।

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TRAI की नई सिफारिशें: इंटरनेट पर टीवी चैनल दिखाने वाले ऐप्स के लिए बनेगा अलग नियम

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने इंटरनेट के जरिए टीवी चैनल दिखाने वाले ऐप्स के लिए अलग नियम बनाने की सिफारिश की है।

Vikas Saxena by
Published - Monday, 26 October, 2026
Last Modified:
Monday, 26 October, 2026
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भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने इंटरनेट के जरिए टीवी चैनल दिखाने वाले ऐप्स के लिए अलग नियम बनाने की सिफारिश की है। इसके तहत फ्री एड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टेलीविजन (FAST) सेवाओं समेत ऐप आधारित टीवी चैनल डिस्ट्रीब्यूशन सेवाओं के लिए एक अलग मंजूरी व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया गया है। इसका मकसद इस क्षेत्र में काम करने वाली सेवाओं के लिए नियम तय करने के साथ उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना और कारोबार को आसान बनाना है।

TRAI ने इन सेवाओं को एप्लिकेशन-बेस्ड लीनियर टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन (ALTD) नाम दिया है। इसमें ऐसे ऐप शामिल हैं, जो इंटरनेट के जरिए दर्शकों को तय कार्यक्रम के अनुसार चलने वाले टीवी चैनल उपलब्ध कराते हैं। ये ऐप स्मार्ट टीवी में पहले से मौजूद हो सकते हैं या मोबाइल, स्मार्ट टीवी और वेबसाइट के जरिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

ALTD सेवाओं के लिए अलग मंजूरी व्यवस्था का सुझाव

TRAI ने सिफारिश की है कि ALTD सेवाओं को दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत प्रसारण सेवाओं की मंजूरी व्यवस्था में टीवी चैनल डिस्ट्रीब्यूशन सेवाओं की एक अलग श्रेणी के रूप में शामिल किया जाए। इसके लिए मंजूरी लेने और सेवा चलाने से जुड़े नियम तय किए जाने चाहिए।

प्राधिकरण के मुताबिक, इस व्यवस्था में ऐप के जरिए टीवी चैनल उपलब्ध कराने वाली सेवाओं के साथ टीवी निर्माता कंपनियों, ऑपरेटिंग सिस्टम उपलब्ध कराने वाली कंपनियों और प्रसारकों की जिम्मेदारियां भी तय होंगी।

TRAI ने मंजूरी की प्रक्रिया को आसान रखने का सुझाव दिया है। इसके तहत सेवा का दायरा पूरे देश में होगा और शुरुआती मंजूरी 20 साल के लिए देने की सिफारिश की गई है। इसे आगे हर बार 10 साल के लिए बढ़ाया जा सकेगा।

आवेदन और एंट्री फीस कितनी होगी?

TRAI की सिफारिशों के मुताबिक, ALTD सेवा के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी करने की फीस 10,000 रुपये और एकमुश्त एंट्री फीस 1 लाख रुपये रखी जानी चाहिए। साथ ही, इसके लिए अलग से मंजूरी शुल्क, बैंक गारंटी या सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं लेने का सुझाव दिया गया है।

ये फिलहाल TRAI की सिफारिशें हैं। इन्हें लागू करने के लिए संबंधित नियमों और मंजूरी प्रक्रिया को अधिसूचित करना होगा।

केवल अधिकृत ऐप ही उपलब्ध कराने का सुझाव

TRAI ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) को ALTD ऐप्स का एक केंद्रीय रिकॉर्ड यानी ‘मास्टर ALTD ऐप रिपॉजिटरी’ बनाए रखने की सिफारिश की है। इसके तहत टीवी बनाने वाली कंपनियों और ऑपरेटिंग सिस्टम उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को अपने उपकरणों और ऐप स्टोर पर केवल अधिकृत ALTD ऐप उपलब्ध कराने होंगे। उन्हें मंत्रालय को हर साल अनुपालन रिपोर्ट भी देनी होगी।

सिफारिशों के मुताबिक, इन ऐप्स के जरिए वही टीवी चैनल वितरित किए जा सकेंगे, जिन्हें केंद्र सरकार से जरूरी अनुमति या पंजीकरण मिला हो। इसके अलावा, इंटरनेट पर ही शुरू हुए लीनियर टीवी चैनलों के लिए आसान पंजीकरण व्यवस्था बनाने का भी सुझाव दिया गया है।

हालांकि, ऐसे प्रसारक-स्वामित्व वाले प्लेटफॉर्म, जो केवल अपने या अपनी होल्डिंग अथवा सहायक कंपनी के चैनल दिखाते हैं, इस प्रस्तावित व्यवस्था के दायरे से बाहर रखे गए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर होने वाली लाइव स्ट्रीमिंग को भी इसमें शामिल नहीं किया गया है।

शिकायतों के लिए ऐप उपलब्ध कराने वाली कंपनी जिम्मेदार

TRAI ने सिफारिश की है कि ALTD सेवा से जुड़ी उपभोक्ताओं की शिकायतों और उनके समाधान के लिए ऐप उपलब्ध कराने वाली कंपनी मुख्य संपर्क बिंदु होगी। इससे दर्शकों को अपनी शिकायत दर्ज कराने और उसका समाधान पाने के लिए जिम्मेदार पक्ष की पहचान करने में मदद मिल सकती है।

टीवी दर्शक संख्या मापने की व्यवस्था में भी शामिल होंगी ये सेवाएं

TRAI ने यह भी सुझाव दिया है कि ALTD ऐप्स के जरिए देखे जाने वाले टीवी चैनलों की दर्शक संख्या को टेलीविजन ऑडियंस मेजरमेंट व्यवस्था में शामिल किया जाए। अधिकृत ऐप प्रदाताओं को टीवी रेटिंग नीति, 2026 के अनुसार, दर्शक संख्या से जुड़े पहचान-रहित आंकड़े समय-समय पर जारी करने की अनुमति देने की भी सिफारिश की गई है।

इससे इंटरनेट आधारित ऐप्स पर टीवी चैनलों की दर्शक संख्या को मापने और पारंपरिक टीवी डिस्ट्रीब्यूशन सेवाओं के साथ उसे समझने का रास्ता खुल सकता है।

207 टिप्पणियों और 11 जवाबी टिप्पणियों के बाद तैयार हुईं सिफारिशें

TRAI ने बताया कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 15 दिसंबर 2025 को इस विषय पर नियामकीय ढांचा तैयार करने के लिए प्राधिकरण से सुझाव मांगे थे। इसके बाद TRAI ने 6 अप्रैल 2026 को इस मुद्दे पर एक परामर्श पत्र जारी किया था।

इस प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग पक्षों से 207 टिप्पणियां और 11 जवाबी टिप्पणियां मिलीं। जून 2026 में इस विषय पर खुली चर्चा भी हुई। इन सुझावों और अपने अध्ययन के आधार पर TRAI ने अब अपनी सिफारिशें जारी की हैं।

इन सिफारिशों का उद्देश्य इंटरनेट के जरिए टीवी चैनल देखने की सेवाओं के लिए स्पष्ट नियम बनाना, उपभोक्ताओं की सुरक्षा करना और इस क्षेत्र में कारोबार के लिए आसान व भविष्य को ध्यान में रखने वाली व्यवस्था तैयार करना है। 

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नेटवर्क18 में होगा न्यूज18 मराठी का विलय, NCLT ने दी मंजूरी

नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड में उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी न्यूज18 मराठी प्राइवेट लिमिटेड का विलय होगा।

Vikas Saxena by
Published - Monday, 26 October, 2026
Last Modified:
Monday, 26 October, 2026
NewsMarathi4512

नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड में उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी न्यूज18 मराठी प्राइवेट लिमिटेड का विलय होगा। मुंबई स्थित नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने 22 अक्टूबर 2026 के अपने आदेश में इस विलय योजना को मंजूरी दे दी है।

कंपनी ने 23 अक्टूबर को शेयर बाजार को दी गई जानकारी में यह बताया। यह जानकारी सेबी के लिस्टिंग नियमों के तहत साझा की गई है।

हालांकि, विलय की प्रक्रिया आदेश के साथ ही प्रभावी नहीं होगी। कंपनी के मुताबिक, यह योजना तब प्रभावी होगी, जब इसमें तय की गई सभी जरूरी शर्तें पूरी हो जाएंगी।

नेटवर्क18 ने इससे पहले 25 मार्च 2026 को भी इस विलय योजना के बारे में जानकारी दी थी। ताजा सूचना में कंपनी ने बताया है कि एनसीएलटी की मुंबई पीठ ने अब इस योजना को मंजूरी दे दी है। 

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इस बड़े पद पर ‘दैनिक भास्कर’ की टीम में शामिल हुए वरिष्ठ पत्रकार अनुराग द्वारी

अनुराग द्वारी (Anurag Dwary) ने कुछ दिनों पूर्व ही ‘एनडीटीवी’ (NDTV) से इस्तीफा दे दिया था। वह करीब दो दशक से इस संस्थान के साथ जुड़े हुए थे।

Samachar4media Bureau by
Published - Sunday, 25 October, 2026
Last Modified:
Sunday, 25 October, 2026
Anurag Dwary Dainik Bhaskar

वरिष्ठ पत्रकार अनुराग द्वारी (Anurag Dwary) अब दैनिक भास्कर (Dainik Bhaskar) की टीम में शामिल हो गए हैं। यहां उन्होंने बतौर सोशल मीडिया एडिटर जॉइन किया है। वह भोपाल से अपना कामकाज देखेंगे।

बता दें कि अनुराग द्वारी (Anurag Dwary) ने कुछ दिनों पूर्व ही ‘एनडीटीवी’ (NDTV) से इस्तीफा दे दिया था। वह करीब दो दशक से इस संस्थान के साथ जुड़े हुए थे।

मूल रूप से देवघर (झारखंड) के रहने वाले अनुराग द्वारी को मीडिया में काम करने का करीब ढाई दशक का अनुभव है। NDTV में वह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के एग्जिक्यूटिव एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। पिछले करीब 10 वर्षों से वह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, शासन, सामाजिक मुद्दों और जमीनी बदलावों से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

पत्रकारिता में उनके काम को रामनाथ गोयनका अवॉर्ड और रेड इंक अवॉर्ड जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। उनकी पहचान गहरी फील्ड रिपोर्टिंग और जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग के लिए रही है।

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी संभालने से पहले अनुराग द्वारी ने करीब एक दशक महाराष्ट्र में रिपोर्टिंग की। इस दौरान उन्होंने चुनाव, आतंकी हमले, हाईकोर्ट, राजनीति और सामाजिक आंदोलनों को कवर किया। उन्होंने गुजरात, पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड समेत कई राज्यों के चुनावों की भी रिपोर्टिंग की है।

अनुराग द्वारी ने देश की कई बड़ी खबरों के साथ अंतरराष्ट्रीय असाइनमेंट भी कवर किए हैं। उन्होंने श्रीलंका में क्रिकेट वर्ल्ड कप की रिपोर्टिंग की। NDTV की ‘मॉनसून एक्सप्रेस’ जैसी सीरीज के दौरान उन्होंने करीब दो महीने तक नॉर्थ ईस्ट से पंजाब तक सड़क यात्रा की और देश के अलग-अलग हिस्सों से रिपोर्टिंग की। उन्होंने अमिताभ बच्चन और मनोज बाजपेयी जैसे अभिनेताओं पर NDTV के कई विशेष कार्यक्रमों की स्क्रिप्ट भी लिखी है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि की बात करें तो उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के AJK Mass Communication Research Centre से Development Communication में मास्टर डिग्री हासिल की है। पूर्व में वह PTI, Star News और BBC जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ भी काम कर चुके हैं।

समाचार4मीडिया की ओर से अनुराग द्वारी को उनके नए सफर के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।

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