मीडिया से जुड़े मुद्दों का अब इस तरह समाधान करेगी सरकार

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया फैसला

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 18 September, 2019
Last Modified:
Wednesday, 18 September, 2019
Media

पाकिस्तान में मीडिया से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए अब विशेष मीडिया न्यायाधिकरणों (Special Media Tribunals) का गठन किया जाएगा। पाकिस्तान की सरकार ने इसकी घोषणा की है। बताया जाता है कि प्रधानमंत्री इमरान खान की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की विशेष सहायक (सूचना) फिरदौस आशिक अवान ने मंगलवार को बताया कि ये न्यायाधिकरण पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण (PEMRA) की शिकायत परिषद की जगह लेंगे।

उन्होंने बताया कि न्यायाधिकरणों के गठन के लिए संसद में कानून बनाया जाएगा। इन न्यायाधिकरणों में मीडिया से जुड़े मुद्दे 90 दिन के भीतर सुलझाए जाएंगे और ये न्यायाधिकरण किसी न्यायपालिका के तहत काम करेंगे। ये न्यायाधिकरण सरकारी नियंत्रण या प्रभाव से मुक्त होंगे और सरकारी अधिकारी भी उनके प्रति जवाबदेह होंगे।

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कश्मीर के हालात पर वरिष्ठ पत्रकार के.जी.सुरेश ने लिखा केंद्रीय मंत्री को पत्र

फ़ेसर और वरिष्ठ पत्रकार के. जी. सुरेश ने सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखा है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 17 October, 2019
Last Modified:
Thursday, 17 October, 2019
kg-suresh

370 से आज़ाद हुए कश्मीर में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं, लेकिन स्कूलों में पसरा सन्नाटा चिंता का विषय है। इसी चिंता को रेखांकित करते हुए प्रोफ़ेसर और वरिष्ठ पत्रकार के. जी. सुरेश ने सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखा है। हालांकि, उन्होंने अपने पत्र में सरकार को कठघरे में खड़ा नहीं किया है, जैसा कि पहले होता आया है। उन्होंने इस चिंता से निपटने का नायब सुझाव सरकार को दिया है। 

सुरेश ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को लिखा है ‘यह बहुत संतोष की बात है कि कश्मीर की स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है और इस बारे में आवाम को सूचित करने के लिए आकाशवाणी और दूरदर्शन दोनों कई कश्मीर केंद्रित कार्यक्रम पेश कर रहे हैं, जैसे कि ‘कश्मीर का सच’। लेकिन विरोध या हिंसा के डर से स्कूलों में छात्रों की अनुपस्थिति चिंता का विषय रही है। इससे लाखों युवाओं की शिक्षा प्रभावित हो रही है, जो इस क्षेत्र और देश का भविष्य हैं’।

2014 में इबोला के खौफ के चलते सिएरा लियोन के स्कूलों से गायब हुए बच्चों की पढ़ाई को लेकर वहां की सरकार द्वारा उठाये गए क़दमों का जिक्र करते हुए के. जी. सुरेश ने आगे लिखा है ‘यह काबिले गौर है कि 2014 में पश्चिम अफ्रीकी देश सिएरा लियोन में इबोला के प्रकोप के कारण एक मिलियन से अधिक बच्चों ने कई महीनों तक स्कूल से दूरी बना ली थी। इसके बाद, सिएरा लियोन सरकार ने यूनिसेफ और कई संगठनों के साथ मिलकर रेडियो शिक्षा कार्यक्रम शुरू किया। इस कार्यक्रम का प्रसारण 41 सरकारी रेडियो स्टेशनों के साथ ही राज्य के स्वामित्व वाले टीवी चैनलों पर भी किया गया। प्रशिक्षकों ने बच्चों के लिए एक घंटे का शिक्षण सत्र तैयार किया। कुछ ही समय में ये सेशन इतने लोकप्रिय हो गए कि शुरुआत में महज 20 की भागीदारी बढ़कर 70 प्रतिशत हो गई। 

इसी तरह, हरियाणा के मेवात जिले से संचालित होने वाले सामुदायिक रेडियो स्टेशन ‘रेडियो मेवात’ भी चुनिंदा विषयों पर बच्चों को शिक्षित करने में लगा है और इसके सकरात्मक परिणाम भी दिखाई दे रहे हैं। उपरोक्त के मद्देनजर, रेडियो कश्मीर और डीडी कश्मीर भी राज्य में शैक्षणिक संस्थान, केंद्रीय संगठन जैसे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग एंड कंसोर्टियम फॉर एजुकेशनल कम्युनिकेशन (दोनों मानव संसाधन मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं) के साथ मिलकर इसी तरह के कार्यक्रम तैयार कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो ये निश्चित रूप से कश्मीर के छात्रों के लाभकारी होगा’।

अपने पत्र को आगे बढ़ाते हुए सुरेश ने लिखा है ‘आप इस उद्देश्य के लिए केंद्र शासित प्रदेश में मौजूद सामुदायिक रेडियो स्टेशनों का उपयोग करने की संभावना का पता लगा सकते हैं, साथ ही शैक्षणिक संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों और स्वयंसेवी संगठनों द्वारा अधिक स्टेशनों की स्थापना पर भी विचार कर सकते हैं। आईआईएमसी में महानिदेशक के रूप में मेरे कार्यकाल के दौरान सामुदायिक रेडियो सशक्तिकरण और संसाधन केंद्र की स्थापना की गई थी, जो बच्चों को प्रौद्योगिकी, विषय-वस्तु और संसाधन उत्पादन में प्रशिक्षित करने के लिए एक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य कर सकता है। 
हमारे माननीय प्रधानमंत्री ने रेडियो की शक्ति का उपयोग करते हुए अपने लोकप्रिय कार्यक्रम 'मन की बात' के माध्यम से बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुँच बनाई है। मुझे विश्वास है कि आपके गतिशील नेतृत्व में, रेडियो कश्मीर और डीडी कश्मीर छात्रों का भविष्य संवारने के लिए इस दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं’।
के. जी. सुरेश एपीजे इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन के प्रोफेसर रहे हैं, एससीडीआर, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के वह विजिटिंग प्रोफेसर हैं। इसके अलावा, भारतीय जनसंचार संस्थान में उन्होंने महानिदेशक पद की ज़िम्मेदारी संभाली है। साथ ही वह हील(Heal) फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक और मुख्य संपादक हैं।
 
 

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अयोध्या केस की कवरेज को लेकर चैनलों के लिए जारी हुई मीडिया एडवाइजरी

आज अयोध्या केस को लेकर चल रही सुनवाई के पूरी होने के बाद न्यूज चैनलोंके लिए एक एडवाइजरी जारी की है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 16 October, 2019
Last Modified:
Wednesday, 16 October, 2019
Advisory

टीवी न्यूज मीडिया ब्रॉडकास्टर्स के संगठन न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड्स ऑथरिटी (NBSA) ने आज अयोध्या केस को लेकर चल रही सुनवाई के पूरी होने के बाद न्यूज चैनलों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि कोर्ट कार्यवाही को लेकर कोई भी भ्रामिक खबर न चलाई जाए। सुनवाई को लेकर कोई कयास नहीं लगाए जा।

सुनवाई की खबर दिखाते समय फैक्ट्स यानी तथ्यों का खास ध्यान रखा जाए। मस्जिद विध्वंस की फुटेज का प्रयोग नहीं किया जाए। किसी भी तरह के जश्न की फुटेज नहीं दिखाई जाए और साथ ही ये भी सुनिश्चित किया जाए कि डिबेट शो में किसी भी तरह के अतिवादी विचारों का प्रसारण नहीं किया जाए। 

 

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चुनावी बैलेट पर बुलेट एंकर का जबर्दस्त निशाना

महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों को लेकर जहां सियासी दल अपनी तैयारियों में मशगूल हैं, वहीं मीडिया ने भी कमर कस ली है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 16 October, 2019
Last Modified:
Wednesday, 16 October, 2019
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महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों को लेकर जहां सियासी दल अपनी तैयारियों में मशगूल हैं, वहीं मीडिया ने भी कमर कस ली है। खबरिया चैनल कई नए प्रोग्राम ला रहे हैं, ताकि टीआरपी के खेल में दूसरों से दो कदम आगे रहा जा सके। ‘आज तक’ ने भी ‘बुलेट रिपोर्टर’ के नाम से चुनावों पर केंद्रित एक शो शुरू किया है, जिसे चित्रा त्रिपाठी होस्ट कर रही हैं। ‘बुलेट रिपोर्टर’ की ख़ास बात है इसका अंदाज़, जो लोगों को सबसे ज्यादा पसंद आ रहा है। चित्रा चैनल की ओबी वैन में नहीं बल्कि बुलेट पर सवार होकर महाराष्ट्र और हरियाणा में घूम-घूमकर मतदाताओं का मन टटोल रही हैं। हालांकि, बुलेट चलाते-चलाते चुनावी चर्चा जोखिम भरी है, उम्मीद है चैनल इस विषय पर ध्यान देगा। ‘बुलेट रिपोर्टर’ के पहले एपिसोड की शुरुआत हरियाणा के चरखी-दादरी और आदमपुर से की गई, जहां चित्रा त्रिपाठी ने प्रत्याशियों का मन भी टटोला।

चुनावी मौसम में अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में सेट लगाकर शो करने का चलन पिछले कुछ समय से काफी बढ़ गया है। चुनिंदा लोगों के बीच एंकर विकास, वादों और इरादों पर               बात करते  हैं और आरोप-प्रत्यारोप के बीच शो समाप्त हो जाता है। इस लिहाज से देखें तो आज तक का ‘बुलेट रिपोर्टर’ सबसे जुदा है। क्योंकि यहां न सेट लगाया जाता है, न चुनिंदा लोगों को तवज्जो दी जाती है और न ही सीमित वर्ग की सोच को संपूर्ण जनता की सोच करार दिया जाता है। रिपोर्टर घूम-घूमकर मतदाताओं से बात करते हैं, प्रत्याशियों का हाल जानते हैं और उन समस्याओं पर भी प्रकाश डालते हैं, जो अब तक अनसुलझी हैं।

जैसे आदमपुर में चित्रा त्रिपाठी सबसे पहले आम जनता से रूबरू हुईं, फिर प्रत्याशियों से बात की और इसके बाद सीधे कपास मंडी पहुंचकर व्यापारियों के हाल जाने। शो के साथ-साथ चित्रा का अंदाज़ भी बेहद निराला है। वह जिस तरह से सवाल दागती हैं या मतदाताओं का मन टटोलती हैं, वह काबिले तारीफ है। स्टूडियो में बैठकर किसी विषय पर बात करना आसान है, लेकिन लोगों के बीच जाकर बिना रुके बोलते जाना मुश्किल और चित्रा इस मुश्किल काम को अच्छी तरह से अंजाम दे रही हैं। शो देखने के बाद पता चलता है कि चित्रा त्रिपाठी ने इसके लिए कितना दोनों राज्यों के बारे में खूब जानकारी जुटाई है। महाराष्ट्र की सड़क पर उन्हें नऊवारी महाराष्ट्रियन साड़ी पहन कर बुलेट चलाते देखा गया, स्थानीय लोगों ने ऐसे में उनकी खूब फोटो भी खींची।

उल्लेखनीय है कि चित्रा ने इस साल की शुरुआत में ही ‘आज तक’ का दामन थमा है। इससे पहले वह एबीपी न्यूज में शानदार पारी खेल चुकी हैं। ‘एबीपी न्यूज’ में वह ‘2019 कौन जीतेगा’ शो करती थीं, साथ ही उनके पास 'प्रेस कॉन्फ्रेंस' जैसा बड़ा वीकली प्रोग्राम भी था। सियाचिन में की गई रिपोर्टिंग के लिए उन्हें बेस्ट रिपोर्टर का अवॉर्ड भी मिला था।

‘बुलेट रिपोर्टर’ के लिए आजतक और चित्रा त्रिपाठी को समाचार4मीडिया की ओर से शुभकामनाएं एवं बधाई!

 

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Zee को अलविदा कह वंदना यादव का ये बना नया ‘ठिकाना’ 

जी न्यूज की वेबसाइट में कार्यरत पत्रकार वंदना यादव ने अब समूह को अलविदा कह दिया है...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 16 October, 2019
Last Modified:
Wednesday, 16 October, 2019
Vandana Yadav

जी न्यूज की वेबसाइट में कार्यरत पत्रकार वंदना यादव ने अब समूह को अलविदा कह दिया है। वे वहां बतौर सीनियर सब एडिटर कार्रयत थीं। वे जल्दी ही अपनी नई पारी का आगाज ओपेरा न्यूज (Opera News) के साथ करेगी। यहां वे असोसिएट न्यूज ऑपरेशंस का दायित्व संभालेगी। जी न्यूज की वेबसाइट में रीजनल डेस्क के साथ-साथ वे एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल, फूड-ट्रैवल सेक्शन संभाल ही थीं।

जी न्यूज डिजिटल के साथ करीब डेढ़ साल काम करने से पहले वे आजतक के डिजिटल पोर्टल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत रह चुकी है। आजतक में वे एंटरटेनमेंट, लाइफ स्टाइल और ट्रैवेल बीट पर अपना सहयोग देती थीं। वे यहां दिसंबर, 2015 से जुड़ी हुईं थीं और अप्रैल 2018 में उन्होंने यहां से विदाई ले जी समूह जॉइन किया था

आजतक से पहले वंदना दैनिक जागरण के साथ थीं और यहां वे सखी मैगजीन के लिए इन्हीं बीट्स पर काम करतीं थीं। इसके अतिरिक्त वे यहां करियर बीट भी संभालती थीं। जागरण में सीनियर सब एडिटर के पद पर रहते हुए उन्होंने यहां जनवरी, 2015 से नवंबर, 2015 तक अपना योगदान दिया। इसके पहले वे फरवरी, 2013 से दिसंबर, 2014 तक ‘दैनिक राष्ट्रीय उजाला’ में सब एडिटर के पद पर कार्यरत थीं। यहां उन्हें रिपोर्टिंग में भी हाथ आजमाने का मौका मिला।

दिल्ली के साउथ दिल्ली कैंपस स्थित डब्लूएलसीआई (WLCI) से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा करने के बाद उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ओशो फाउंडेशन से जून, 2012 में बतौर सब एडिटर की थी। यहां जनवरी, 2013 तक रहीं और इसके बाद वे  ‘दैनिक राष्ट्रीय उजाला’ से जुड़ीं।
वंदना यादव को नई पारी के लिए समाचार4मीडिया की ओर से शुभकामनाएं...

 

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न्यूज एंकर की पत्नी के साथ ससुराल में बड़ी वारदात

चार साल पहले हुई थी शादी, करीब 15 दिन पहले ही दिल्ली से अपनी ससुराल इटावा आई थी महिला

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 15 October, 2019
Last Modified:
Tuesday, 15 October, 2019
Divyanshi

दिल्ली से अपनी ससुराल इटावा आई न्यूज एंकर की पत्नी की घर में घुसकर हत्या करने का मामला सामने आया है। इटावा की लड़ैती भवन के पास वाली गली में हुई इस वारदात की जानकारी मिलते ही इलाके में सनसनी फैल गई।

बताया जाता है कि दिल्ली में एक न्यूज चैनल के एंकर अजितेश मिश्रा की 27 वर्षीय पत्नी दिव्यांशी करीब 15 दिन पहले ही दिल्ली से ससुराल आई थी और मंगलवार को उसे वापस लौटना था। घटना के दौरान अजितेश की मां और भाई दिल्ली में थे, जबकि घर में केवल ससुर प्रमोद मिश्रा थे।

प्रमोद मिश्रा कर्बा बुजुर्ग प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद से रिटायर हुए हैं। वाल्मीकि जयंती पर सोमवार को विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम से वो दोपहर करीब एक बजे लौटे थे और मुख्य गेट की दूसरी चाबी से गेट खोलकर अपने कमरे में सो गए।

करीब तीन बजे जब वे सोकर उठे, तब बहू को आवाज दी। जवाब नहीं मिलने पर वह कमरे में पहुंचे तो देखा कि कमरे में दिव्यांशी का लहूलुहान शव पड़ा था। इसके बाद उन्होंने शोर मचाया और पड़ोसियों को सूचना दी। मोहल्ले के लोगों की मदद से दिव्या को दूसरी मंजिल स्थित कमरे से नीचे उतारकर जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

फिलहाल हत्यारे और हत्या के कारणों का पता नहीं चल सका है। पुलिस के अनुसार, सिर पर वजनदार वस्तु के प्रहार से इस वारदात को अंजाम दिया गया है। अलमारी के पास दो बैग अस्त-व्यस्त मिले हैं, कमरे का भी सामान बिखरा पड़ा था। दिव्यांशी की शादी करीब चार वर्ष पूर्व हुई थी।

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अस्पताल में रिपोर्टिंग करने गए पत्रकार को ही पड़ गई इलाज की जरूरत

अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के महिला वार्ड से चार दिन पहले नवजात बच्चे की हो गई थी चोरी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 15 October, 2019
Last Modified:
Tuesday, 15 October, 2019
Journalist

बिहार के गया स्थित अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (ANMMCH) में जूनियर डॉक्टरों द्वारा एक पत्रकार की पिटाई का मामला सामने आया है। पिटाई का शिकार हुआ पत्रकार यहां पर न्यूज कवरेज के लिए गया हुआ था। आरोप है कि डॉक्टरों ने यहां भर्ती एक मरीज के परिजन की भी पिटाई की। घायल पत्रकार और मरीज के परिजन को इलाज के लिए जयप्रकाश नारायण  अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पीड़ित पत्रकार ने मेडिकल थाने में जूनियर डॉक्टरों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करवायी है।

दरअसल, अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के महिला वार्ड में चार दिन पहले नवजात बच्चे की चोरी को लेकर एक जूनियर डॉक्टर व मरीज के परिजनों में कहासुनी हो गई थी। इस पर जूनियर डॉक्टर ने फोन कर साथियों को बुला लिया। इस दौरान कवरेज के लिए वहां इलेक्ट्रॉनिक चैनल के पत्रकार एलेन लिलि भी पहुंच गए। आरोप है कि जूनियर डॉक्टरों ने एलेन लिलि को घेरकर उनकी पिटाई शुरू कर दी। बताया जाता है कि इस दौरान डॉक्टरों ने हॉकी स्टिक से भी हमला किया। कुछ अन्य पत्रकारों ने किसी तरह एलेन लिलि को डॉक्टरों के चंगुल से बचाया और बाहर ले आए।

आरोप है कि इसी दौरान हमलावरों ने वहां भर्ती मरीज सोनी कुमारी के एक परिजन शिवनंदन चौधरी की पिटाई भी कर दी। एलेन लिलि के सर, पेट और छाती में गंभीर चोट है, वहीं शिवनंदन चौधरी की पसली टूट गई है। दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जाता है कि शिवनंदन चौधरी के नवजात भतीजे की ही चोरी हुई है। इस घटना के बाद डॉक्टर वहां भर्ती सोनी कुमारी को अस्पताल से जाने का दबाव बना रहे हैं और इसी मामले को लेकर झगड़ा शुरू हुआ।

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स्क्रिप्ट में 'छेड़छाड़' पर घिरा दूरदर्शन, शुरू हुआ विरोध

महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस समिति के महासचिव और पार्टी प्रवक्ता सचिन सावंत ने दूरदर्शन पर लगाए कई आरोप

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 15 October, 2019
Last Modified:
Tuesday, 15 October, 2019
Doordarshan

कांग्रेस ने ‘दूरदर्शन’ (डीडी) पर आरोप लगाया है कि वह सरकार के दबाव में विपक्षी पार्टियों की आवाज को दबाने की कोशिश कर रहा है। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस समिति के महासचिव और पार्टी प्रवक्ता सचिन सावंत का कहना है कि इसी के चलते मतदान की अपील करने वाली पार्टी की स्क्रिप्ट में दूरदर्शन द्वारा बदलाव कर दिया गया। सावंत ने एक बयान जारी कर दूरदर्शन की इस हरकत को विपक्ष के संवैधानिक अधिकारों और अपनी बात रखने की स्वतंत्रता का लगा घोंटने वाली करार दिया है।

सावंत के मुताबिक, दूरदर्शन पर राजनीतिक दलों को चुनाव प्रचार के लिए टाइम स्लॉट दिया जाता है। इसके लिए कांग्रेस ने एक स्क्रिप्ट दी थी। कांग्रेस की स्क्रिप्ट में लिखा हुआ था कि ‘पिछले पांच सालों में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आंख में धूल झोंकने और झूठ बोलने के अलावा कुछ नहीं किया है।’ लेकिन दूरदर्शन की जांच समिति ने इन शब्दों को स्क्रिप्ट से निकाल दिया।

सावंत ने कहा कि किसी कार्यक्रम में अपनी बात रखने का विपक्ष को संवैधानिक अधिकार है, लेकिन दूरदर्शन ने इस पर रोक लगा दी है। सावंत ने कहा कि इस तरह विपक्ष को अपनी बात रखने से रोकना आपत्तिजनक है। सावंत ने कहा कि विपक्ष को सरकार की आलोचना का अधिकार संविधान ने दिया है और इस पर रोक को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक दूरदर्शन की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया जाएगा कि ऐसा क्यों किया गया, कांग्रेस अपनी स्क्रिप्ट को रिकॉर्ड नहीं कराएगी।

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पत्रकारों के काम को मिलेगी नई पहचान, जीत सकते हैं ये अवॉर्ड्स

इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए रिपोर्टर्स और फोटो जर्नलिस्ट्स अपनी एंट्रीज 25 अक्टूबर की शाम पांच बजे तक भेज सकते हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 15 October, 2019
Last Modified:
Tuesday, 15 October, 2019
Awards

पत्रकारों की सामाजिक संस्था ‘नोएडा मीडिया क्लब’ (Noida Media Club) ने पत्रकारों को ‘फ्री स्पीच अवॉर्ड’ (Free Speech Award) देने की घोषणा की है। यह अवॉर्ड तीन रिपोर्टर्स और तीन फोटो जर्नलिस्ट्स को दिया जाएगा। इस अवॉर्ड के तहत बेस्ट रिपोर्टर और फोटो जर्नलिस्ट प्रतियोगिता द्वारा चुने गए विजेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज के तहत क्रमश: 25 हजार, 15 हजार और 10 हजार रुपए दिए जाएंगे। इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए रिपोर्टर्स और फोटो जर्नलिस्ट्स अपनी एंट्रीज नोएडा मीडिया क्लब की ई-मेल आईडी- noidamediaclub@gmail.com पर भेज सकते हैं।

बताया जाता है कि सभी आवेदन 14 अक्टूबर 2019 से 25 अक्टूबर 2019 की शाम पांच बजे तक ही स्वीकार किए जाएंगे। इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रतिभागी एक जनवरी 2019 से अक्टूबर तक की ही खबरें और फोटो भेजें। फोटो व खबरों के साथ अपना पूरा विवरण जैसे-नाम, संस्थान का नाम, पद, मोबाइल नंबर व ई-मेल आईडी भी जरूर भेजें।

नोएडा मीडिया क्लब की ओर से जारी सूचना के अनुसार, प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए प्रिंट मीडिया से जुड़े रिपोर्टर एक जनवरी 2019 से अब तक पब्लिश एक्सक्लूसिव खबरें ही भेजें। पब्लिश खबरों की स्कैन कॉपी अथवा ई-पेपर से डाउनलोड पीडीएफ खबर को प्रकाशन की तिथि एवं एडिशन के नाम सहित भेजें। प्रतिभागी अधिकतम दो खबरें भेज सकते हैं।

वहीं, फोटो जर्नलिस्ट एक जनवरी 2019 से अब तक खींची गई फोटो ही भेजें। प्रतिभागी के पास जो कैमरा हो, उसी से ली गई फोटो ही भेजें। प्रतिभागी अधिकतम दो फोटो ही भेज सकते हैं। आपके द्वारा भेजी जाने वाली फोटो यदि पब्लिश हुई है तो अखबार की स्कैन कॉपी अथवा ई-पेपर से डाउनलोड पीडीएफ भेजें। इसके साथ ही फोटो के प्रकाशन की तिथि और किस एडिशन में प्रकाशित हुई है, वह जानकारी भी अवश्य भेजें।

इलेक्ट्रॉनिक और वेब मीडिया से जुड़े पत्रकार भी एक जनवरी 2019 से अब तक पब्लिश हुई खबरें ही भेजें। प्रसारित हुई अपनी खबर की क्लिप अथवा न्यूज चैनल की वेबसाइट पर प्रकाशित खबर की स्कैन कॉपी भेज सकते हैं। प्रतिभागी अधिकतम दो खबरें ही भेज सकते हैं। इसके लिए गूगल न्यूज में लिस्टेड वेबसाइट को ही मान्यता दी जाएगी।

इस बारे में अधिक जानकारी के लिए नोएडा मीडिया क्लब के कार्यालय के फोन नंबर- 0120-2453333, 8888 पर अथवा 9958944322, 8920315602 एवं 9999213937 पर भेज सकते हैं।

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इंडियन एक्सप्रेस और एबीपी समूह में बड़ी जिम्मेदारी निभा चुके कनक घोष नहीं रहे

9.9 Group के फाउंडर डायरेक्टर कनक घोष को दिल का दौरा पड़ने के बाद बेंगलुरु के अस्पताल में कराया गया था भर्ती

Last Modified:
Monday, 14 October, 2019
Kanak Ghosh

‘9.9 समूह’ (9.9 Group) के फाउंडर-डायरेक्टर कनक घोष का सोमवार को निधन हो गया है। बताया जाता है कि कनक घोष को शुक्रवार को दिल का दौरा पड़ा था। इसके बाद उन्हें बेंगलुरु के मणिपाल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां सोमवार की दोपहर करीब साढ़े तीन बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

पूर्व में इंडियन एक्सप्रेस और एबीपी समूह जैसे संस्थानों में काम कर चुके कनक घोष पिछले कुछ सालों से अस्वस्थ चल रहे थे। कनक घोष बेंगलुरु में किसी काम से आए थे, जहां उन्हें दिल का दौरा पड़ गया।

कनक घोष ने कोलकाता की जादवपुर यूनिवर्सिटी (Jadavpur University) से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। करीब छह साल तक बतौर जनरल मैनेजर उन्होंने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में अपनी जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद वह ‘इंडिया डॉट कॉम’ (india.com) से जुड़ गए थे और जनरल मैनेजर (ई-कॉमर्स) के पद पर करीब एक साल काम करने के बाद उन्होंने यहां से बाय बोलकर रिलायंस एनर्जी लिमिटेड में वाइस प्रेजिडेंट के पद पर जॉइन कर लिया था।

करीब पांच साल तक यहां अपनी जिम्मेदारी निभाने के बाद कनक घोष ने वाइस प्रेजिडेंट (सर्कुलेशन) के तौर पर ‘एबीपी समूह’ में नई पारी शुरू की थी। हालांकि इस संस्थान में उनका यह सफर करीब पौने दो साल ही चला और यहां से छोड़कर उन्होंने ‘9.9 Group’ की शुरुआत की थी।

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पत्रकार ने पूछा 1 सवाल, सरकार ने दिए 360 से ज्यादा जवाब

मध्य प्रदेश के पत्रकार जितेंद्र सुराना ने डाक विभाग को किया था ऑनलाइन आवेदन, मांगी थी विभाग की अचल संपत्तियों की आधिकारिक कीमत की जानकारी

Last Modified:
Monday, 14 October, 2019
RTI

‘सूचना का अधिकार’ (RTI)  के तहत डाक विभाग से एक जानकारी मांगना मध्य प्रदेश के एक सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार के लिए काफी मुसीबत का सबब बन गया है। पत्रकार की परेशानी यह है कि मांगे गए एक सवाल के जवाब में विभाग की ओर से अब तक 360 से ज्यादा जवाब मिल चुके हैं।

पत्रकार ने इसे विभाग का गैरजिम्मेदाराना रवैया बताया है। इसके साथ ही कहा है कि जब ऑनलाइन जानकारी मांगी गई तो डाक के द्वारा जवाब क्यों दिए जा रहे हैं? मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सात अगस्त को पत्रकार जितेंद्र सुराना ने आरटीआई के तहत डाक विभाग को ऑनलाइन आवेदन दिया था। इसमें उन्होंने विभाग की अचल संपत्तियों की आधिकारिक कीमत की जानकारी मांगी थी।

बताया जाता है कि सुराना के आवेदन पर विभाग ने इस संबंध में चीफ पोस्टमास्टर जनरल और प्रदेश के सभी पोस्टमास्टर जनरल से जानकारी मांगी। आवेदन करने के कुछ दिनों के बाद से ही सुराना को जवाब भेजे जाने लगे।

सुराना का कहना है कि डाक विभाग की ओर से 13 अगस्त को उनके पास पहला जवाब आया। इसके बाद तो तकरीबन रोजाना पत्र आने शुरू हो गए। सुराना का यह भी कहना है कि हर दिन औसतन 10 पत्र उन्हें मिले हैं। अब तक इन जवाबों की संख्या 360 तक पहुंच चुकी है।

सुराना के अनुसार, डाक विभाग के सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे मांगी गई जानकारी का जवाब अपने वरिष्ठ पदाधिकारियों को दें। उसके बाद विभाग समेकित जवाब आवेदक को उपलब्ध कराए। अलग-अलग अधिकारियों द्वारा सभी जवाब भेजना गलत है।

इसके साथ ही जितेंद्र सुराना ने इस बात पर भी रोष जताया है कि अभी तक प्रदेश के सिर्फ 25 से 30 जिलों के डिविजनल कार्यालयों से ही डाक विभाग की अचल संपत्ति की जानकारी दी गई है। इसमें भी आधी-अधूरी जानकारी ही है।

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