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कोरोना संकट के बीच इन दो राज्यों ने पत्रकारों के हित में लिया बड़ा फैसला

कोरोनावायरस (कोविड-19) का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। कोरोना का विकराल रूप नियंत्रण में आने की बजाय अधिक विकराल होता जा रहा है।

Last Modified:
Monday, 03 May, 2021
Bihar Government

कोरोनावायरस (कोविड-19) का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। कोरोना का विकराल रूप नियंत्रण में आने की बजाय अधिक विकराल होता जा रहा है। कोरोनावायरस के खिलाफ पूरे देश में ‘जंग’ जारी है। संकट के इस दौर में अपनी जान को जोखिम में डालते हुए तमाम पत्रकार अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं और कोरोना को लेकर रिपोर्टिंग भी कर रहे हैं। ऐसे में कई पत्रकारों के कोरोनावायरस की चपेट में आने से मौत की खबरें भी सामने आई हैं औऱ तमाम पत्रकार विभिन्न अस्पतालों में अपना इलाज करा रहे हैं। लिहाजा, इसे देखते हुए बिहार सरकार ने राज्य में पत्रकारों को प्राथमिकता के आधार पर कोरोना का टीका लगाए जाने का फैसला लिया है।

दरअसल, राज्य सरकार द्वारा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा एक्रिडेटेड सभी पत्रकारों के साथ-साथ जिला जनसंपर्क पदाधिकारी द्वारा सत्यापित नॉन एक्रिडिटेड पत्रकारों (प्रिंट,इलेक्ट्रानिंक और डिजिटल) को प्राथमिकता के आधार पर कोविड-19 के टीकाकरण के लिए फ्रंटलाइन वर्कर का दर्जा दिया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को इस आशय का निर्देश दिया है। बिहार सरकार के इस फैसले से कोरोना संक्रमण के इस दौर में अपनी भूमिका का निर्वहन कर रहे पत्रकारों को जल्द टीका लगाया जा सकेगा, जिससे वे संक्रमण से सुरक्षित हो पाएंगे।

बता दें कि ऐसा करने वाला बिहार ओडिशा के बाद देश का तीसरा राज्य बन गया है। इससे पहले ओडिशा और उत्तराखंड की सरकारें पत्रकारों को फ्रंटलाइन वॉरियर घोषित कर चुकी हैं। ओडिशा सरकार ने भी बयान जारी कर पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर मानने की बात रविवार को कही है। ओडिशा ने जारी किए गए बयान में कहा है कि ओडिशा के तमाम पत्रकार फ्रंटलाइन वॉरियर हैं। उन्होंने इस कोरोना काल में बेहतरीन काम किया है। लोगों तक जरूरी खबरें पहुंचाई हैं, कोरोना को लेकर जागरूक किया है और इस महायुद्ध में एक सक्रिय भूमिका निभाई है। 

वहीं, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने एक महीने पहले ही राज्य के सभी पत्रकारों को फ्रंट लाइन वर्कर घोषित किया कर दिया था, साथ ही सभी को कोरोना वैक्सीन दिए जाने की मंजूरी भी दी हुई है।  ऐसा करने वाला वह पहला राज्य था। यहां पत्रकारों के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं रखी गई है।  

गौरतलब है कि कोरोना महामारी के दौरान पत्रकार दिन-रात फील्ड में रहकर रिपोर्टिंग करते हैं। ऐसे में कोरोना संक्रमण का खतरा हमेशा बना रहता है। यही वजह है कि दिल्ली समेत कई राज्य में पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर्स घोषित कर कोरोना वैक्सीन प्राथमिकता के आधार पर दिए जाने की मांग हो रही है। ऐसे में उड़ीसा के बाद बिहार ऐसा दूसरा राज्य है, जिसने पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर माना है।

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‘भारत को भी अपनाना चाहिए News Media Bargaining Code’

e4m-DNPA वर्चुअल राउंडटेबल में ऑस्ट्रेलियन कॉम्पटीशन एंड कंज्यूमर कमीशन (ACCC) के पूर्व अध्यक्ष रोडनी सिम्स ने न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड के बारे में विस्तार से बातचीत की।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 26 November, 2022
Last Modified:
Saturday, 26 November, 2022
Rodney Sims

‘ऑस्ट्रेलियन कॉम्पटीशन एंड कंज्यूमर कमीशन’ (ACCC) के पूर्व अध्यक्ष रोडनी सिम्स (Rodney Sims) का कहना है कि भारत को भी ‘न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड’ (News Media Bargaining Code) अपनाना चाहिए। e4m-DNPA वर्चुअल राउंडटेबल के दौरान शुक्रवार को उन्होंने न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड के बारे में विस्तार से बातचीत की। बता दें कि ऑस्ट्रेलिया की संसद ने पिछले साल ‘News Media Bargaining Code’ नामक कानून पारित किया है। यह कानून ग्लोबल डिजिटल प्लेटफार्म्स को अपने संबंधित प्लेटफार्म्स पर ऑस्ट्रेलियाई न्यूज कंटेंट को पब्लिश करने के लिए भुगतान को अनिवार्य बनाता है।

दरअसल, डिजिटल मीडिया ईकोसिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) की चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा करने के लिए एक्सचेंज4मीडिया और डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) ने इंटरशनेशनल स्पीकर्स के साथ 25 नवंबर को वर्चुअल रूप से गोलमेज सम्मेलन (राउंडटेबल कॉन्फ्रेंस) का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में इंटरनेशनल स्पीकर्स एक मंच पर आए और तेजी से हो रहे डिजिटलीकरण के दौर में प्लेटफॉर्म्स और पब्लिशर्स के संबंधों पर अपने विचार रखे।

इस मौके पर ऑस्ट्रेलियन अर्थशास्त्री, वर्ष 1988-90 के दौरान ऑस्ट्रेलिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री बॉब हॉक (Bob Hawke) के मुख्य आर्थिक सलाहकार रह चुके और वर्तमान में Crawford School of Public Policy के प्रोफेसर सिम्स का कहना था कि न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड की सिफारिशों (recommendation) को लेकर की गई स्टडी के दौरान हमने पाया कि गूगल और फेसबुक जैसी बड़ी कंपनियों के पास बहुत ज्यादा मार्केट पॉवर है और वे बिना भुगतान किए मीडिया बिजनेस के कंटेंट का इस्तेमाल कर रही हैं।  

उन्होंने कहा कि फेसबुक और गूगल को अपने प्लेटफॉर्म पर न्यूज मीडिया कंटेंट की सख्त जरूरत थी। इन टेक कंपनियों को सिर्फ मीडिया बिजनेस से न्यूज मीडिया कंटेंट की आवश्यकता नहीं थी, लेकिन दूसरी ओर प्रत्येक मीडिया बिजनेस को अपने अस्तित्व के लिए गूगल और फेसबुक पर होना आवश्यक था।

सिम्स के अनुसार, ‘इससे बाजार में असंतुलन की स्थिति पैदा हुई। हम इसका वर्णन कर सकते हैं और कह सकते हैं कि यह बाजार की विफलता है। एक अर्थशास्त्री के रूप में हम समझते थे कि बाजार में बहुत सारी विफलताएं हैं। लेकिन यह वास्तव में मायने रखता था, क्योंकि इसका मीडिया, पत्रकारिता और समाज पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा था। हम इस बात को लेकर पूरी तरह स्पष्ट हैं कि बेहतर समाज के लिए पत्रकारिता मूलभूत तत्व है, इसलिए इस मुद्दे को उठाया जाना जरूरी था।’

इसके बाद सिम्स ने बताया कि कैसे न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड का ड्राफ्ट तैयार किया गया। सिम्स के अनुसार, ‘शुरू में सरकार ने सुझाव दिया कि एक स्वैच्छिक कोड होगा जो गूगल और न्यूज मीडिया बिजनेस के बीच एक समझौते की तरह काम करेगा। स्वैच्छिक कोड ने काम नहीं किया और मजबूत एक्शन की जरूरत थी। ऐसे में बातचीत शुरू हुई और सरकार ने ‘एसीसीसी’ से इस पर राय मांगी। इस पर हमने कहा कि हमें नहीं लगता कि इन वार्ताओं से उस तरह का वित्तीय परिणाम प्राप्त होगा, जैसा हम चाहते हैं। इसके बाद सरकार ने ‘एसीसीसी’ से न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड का ड्राफ्ट तैयार करने को कहा। इसके बाद हमने संचार विभाग के मंत्री के साथ मिलकर काम किया और ड्राफ्ट पर चर्चाओं के बाद कानून पास किया गया।’

इसके बाद सिम्स ने यह भी बताया कि कैसे गूगल ने ‘एसीसीसी’ द्वारा पेश किए गए ड्राफ्ट के कानून बन जाने पर ऑस्ट्रेलियाई सरकार को अपनी गूगल सर्च सर्विसेज को वापस लेने की धमकी देकर उस पर हावी होने की कोशिश की। हालांकि गूगल की इस दिशा में बिल्कुल नहीं चली। फेसबुक ने एक अलग ही तरीका अपनाया और सभी न्यूज कंटेंट को अपनी फेसबुक साइट से हटा दिया। फेसबुक के साथ समस्या यह थी कि वह इस दिशा में ज्यादा ही आगे बढ़ गए। उन्होंने न केवल न्यूज कंटेंट को हटा दिया बल्कि कोविड चेतावनियों को भी हटा दिया। इससे लोगों के बीच काफी प्रतिक्रिया हुई और लोग इससे पीछे हटना शुरू हो गए। इस पर फेसबुक ने भी अपने कदम पीछे खींच लिए।

सिम्स के अनुसार, ‘नतीजा यह हुआ कि गूगल और फेसबुक द्वारा प्रति वर्ष 200 मिलियन डॉलर से अधिक का भुगतान किया गया है। न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड को कनाडा में कॉपी किया जा रहा है। इसके 2023 में पारित होने की संभावना है। इसी तरह यूएस और यूके भी इस कोड को अपना रहे हैं। ऐसे में भारत को मेरी सलाह है कि वह न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड को अपने यहां भी अपनाए।’

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‘मीडिया कंपनियों को कानून के समर्थन में एकजुट होकर आगे आना चाहिए’

e4m-DNPA डायलॉग्स में ‘मिंडेरू फाउंडेशन’ की सीनियर पॉलिसी एडवाइजर एम्मा मैकडॉनल्ड और ‘दि ऑस्ट्रेलिया इंस्टीट्यूट’ के डायरेक्टर पीटर लुईस के बीच काफी ज्ञानपरक व रोचक चर्चा हुई।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 26 November, 2022
Last Modified:
Saturday, 26 November, 2022
e4m DNPA

डिजिटल मीडिया ईकोसिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) की चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा करने के लिए एक्सचेंज4मीडिया और डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) ने इंटरशनेशनल स्पीकर्स के साथ 25 नवंबर को वर्चुअल रूप से गोलमेज सम्मेलन (राउंडटेबल कॉन्फ्रेंस) का आयोजन किया।

इस कार्यक्रम के दौरान e4m ‘DNPA Dialogues’ के उद्घाटन सत्र में इंटरनेशनल स्पीकर्स एक मंच पर आए और तेजी से हो रहे डिजिटलीकरण के दौर में प्लेटफॉर्म्स और पब्लिशर्स के संबंधों पर अपने विचार रखे।

इस आयोजन के दौरान एक सेशन में ‘मिंडेरू फाउंडेशन’ (Minderoo Foundation) की सीनियर पॉलिसी एडवाइजर एम्मा मैकडॉनल्ड (Emma McDonald) और ‘दि ऑस्ट्रेलिया इंस्टीट्यूट’ (The Australia Institute) के डायरेक्टर पीटर लुईस (Peter Lewis) के बीच बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को लेकर चर्चा हुई।

बता दें कि बतौर जनरल काउंसिल मैकडॉनल्ड्स के पास नीति (policy), विनियामक (regulatory) और सार्वजनिक मामलों (public affairs) में काम करने का 25 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वह ऑस्ट्रेलियाई कम्युनिकेशंस मिनिस्टर की सीनियर पॉलिसी एडवाइजर भी रह चुकी हैं। वहीं, लुईस ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख सार्वजनिक प्रचारकों में से एक हैं और उन्हें मीडिया, पॉलिटिक्स व कम्युनिकेशंस में काम करने का दो दशक से ज्यादा का अनुभव है।

इस सेशन की अध्यक्षता ‘DNPA’ के चेयरपर्सन तन्मय माहेश्वरी और ‘डीबी कॉर्प लिमिटेड’ के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर पवन अग्रवाल ने की। बता दें कि डीएनपीए (Digital News Publishers Association) प्रिंट व टेलिविजन के क्षेत्र में काम कर रही देश की शीर्ष मीडिया कंपनियों की डिजिटल विंग का प्रतिनिधित्व करता है।

इस सेशन की शुरुआत में मैकडॉनल्ड्स ने ऑस्ट्रेलिया सरकार द्वारा बड़े टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म्स से दूर जाने के फैसले के बारे में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि ऑस्ट्रेलिया में पिछले 10 वर्षों या उससे अधिक समय से सरकारों को डिजिटल में हो रहे क्रांतिकारी बदलाव और इन प्लेटफॉर्म्स द्वारा मीडिया इंडस्ट्री पर पड़ रहे प्रभाव के बारे में जानकारी थी। मैं एक मीडिया कंपनी से आई थी, इसलिए मैंने इसे पहली बार देखा था। ऑस्ट्रेलिया में सरकार पिछले कुछ समय से इस समस्या से निपट रही है। सरकार ने इस दौरान विभिन्न कार्यक्रमों और फंडिंग योजनाओं के माध्यम से इससे निपटने की कोशिश की और इसके समाधान के बारे में बहुत सारी लिखा-पढ़ी भी की।’

मैकडॉनल्ड्स के अनुसार, ‘प्रस्तावित स्वैच्छिक कोड (voluntary code) का वह शुरुआती चरण था और मुझे लगता है कि हर कोई आशावादी था कि गूगल और फेसबुक इस मुद्दे पर साथ बैठेंगी और मीडिया कंपनियों के साथ मिलकर काम करेंगी। अप्रैल 2020 में कोविड-19 महामारी के आने के बाद जब मैं मंत्री कार्यालय में काम कर रही थी, तमाम पब्लिशर्स हमारे पास आते थे। वे इस बात को लेकर बहुत चिंतित थे कि उनका भविष्य क्या होगा और हम उनकी मदद कैसे कर सकते हैं।’

मैकडॉनल्ड ने इस बात पर भी जोर दिया कि मीडिया कंपनियों को एक संयुक्त मोर्चा (United Front) बनाना चाहिए और इसके फलने-फूलने के लिए कानून का समर्थन करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘जब सभी मीडिया कंपनियां एक साथ आएंगी, तो इससे कानून का रास्ता साफ होगा। यह उस समय में वाकई में काफी महत्वपूर्ण है, जब सरकार इस दिशा में अपने कदम उठा रही है।’ इसके साथ ही मैकडॉनल्ड का यह भी कहना था कि हालांकि यह पूरी तरह से सही नहीं है। यदि कानून से परिणाम निकलता है तो यह सब व्यर्थ नहीं है। पत्रकारिता के समर्थन में यह बहुत अच्छा किया गया है।

वहीं, लुईस का कहना था कि जब लोग फेसबुक और गूगल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स लाते हैं तो वे इन टेक्नोलॉजी कंपनियों के बारे में नहीं बल्कि विज्ञापन एकाधिकार (advertising monopolies) के बारे में बात कर रहे होते हैं। उन्होंने कहा, ‘विज्ञापन एकाधिकार पर रोक के लिए हमारे नियामक आयोग ने तमाम सिफारिशें (recommendations) पास कीं। मुझे लगता है कि उन्होंने 27 सिफारिशों की एक श्रंखला पास की, जिनमें सिर्फ एक न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड था। लेकिन अगर यह सिर्फ एक मंत्री के कार्यालय में बैठकर बनाई हुई नीति होती तो गूगल और फेसबुक दोनों की ओर से विरोध होता।’

लुईस के अनुसार, ‘वे इस सिद्धांत से पीछे नहीं हटने वाले थे क्योंकि इस प्रस्ताव को राष्ट्रीय स्तर पर विनियमित करना था। जिस तरह से प्लेटफॉर्म्स संचालित होते हैं, वह कुछ ऐसा है जो उन्होंने पहले कभी नहीं किया है।’ इस सेशन के आखिर में अपनी बात रखते हुए लुईस ने कहा, ‘मेरा मानना ​​​​है कि इन प्लेटफॉर्म्स ने इस तरह की बातों को शांत करने के लिए ऑस्ट्रेलियाई मीडिया कंपनियों को भुगतान किया और मुझे लगता है कि उन्हें उम्मीद थी कि बाकी दुनिया में इसकी गूंज नहीं हो रही होगी।’

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जाने-माने लेखक डॉ. भुवन लाल के नाम जुड़ी अब ये बड़ी उपलब्धि

देश के जाने-माने लेखक व फिल्म निर्माता डॉ. भुवन लाल को इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ टेलीविजन आर्ट्स एंड साइंसेज का सदस्य चुना गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 23 November, 2022
Last Modified:
Wednesday, 23 November, 2022
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देश के जाने-माने लेखक व फिल्म निर्माता डॉ. भुवन लाल को इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ टेलीविजन आर्ट्स एंड साइंसेज (International Emmy Awards) का सदस्य चुना गया है।

डॉ. भुवन लाल ने 2017 में सबसे अधिक बिकने वाली जीवनी 'द मैन इंडिया मिस्ड द मोस्ट - सुभाष चंद्र बोस' (The Man India Missed The Most - Subhas Chandra Bose) प्रकाशित की। वहीं, दूसरी जीवनी, जिसके लिए उन्होंने बड़ी रिसर्च की है, उसका नाम है 'द ग्रेट इंडियन जीनियस हर दयाल' (The Great Indian Genius Har Dayal [2020]) है, जो 2020 में प्रकाशित हुई।

डॉ. लाल की तीसरी किताब का नाम 'इंडिया ऑन द वर्ल्ड स्टेज' (India on the World Stage [2021]) है, जो 2021 में प्रकाशित हुई। उनकी लेटेस्ट किताब का नाम है- 'दिल्ली इन द एरा ऑफ रेवोल्यूशनरीज 1857-1947' (Delhi in the Era of Revolutionaries 1857-1947 [July 2022]), जोकि जुलाई 2022 में प्रकाशित हुई है। फिलहाल इन दिनों डॉ. लाल सरदार पटेल की जीवनी लिख रहे हैं।

डॉ. लाल को हॉलीवुड, यूरोप और भारत में ग्लोबल एंटरटेनमेंट बिजनेस में टॉप लेवल के डिसीजन लेने का तीन दशकों से अधिक का अनुभव है। वह बेवर्ली हिल्स स्थित अरबों डॉलर की भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनी एमकॉर्प- स्पाइस ग्रुप (MCorp - Spice Group) के प्रेसिडेंट भी थे।

इससे पहले डॉ. लाल, इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन (2000-03) के सेक्रेट्री- जनरल (महसचिव) के रूप में भारत में सबसे बड़े M&E व्यापार निकाय की स्थापना की। 1995 में वह एक टीवी नेटवर्क के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट भी रह चुके हैं। उन्होंने विभिन्न M&E कंपनियों में बोर्ड पदों पर भी काम किया है। डॉ. लाल वर्तमान में सरदार पटेल मेमोरियल सोसाइटी, यूके में संरक्षक की भूमिका में भी हैं।

भारत के झारखंड राय यूनिवर्सिटी द्वारा 2019 में उन्हें डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (PHD) की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। उन्होंने जामिया MCRC से मास कम्युनिकेशन (फिल्म टीवी रेडियो प्रॉडक्शन) में फर्स्ट क्लास में मास्टर डिग्री प्राप्त की है।

 

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HC के आदेश पर पलकी शर्मा ने कहा- स्वतंत्रता हर पत्रकार का अधिकार

दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा 'जी मीडिया' की याचिका को ठुकराए जाने के बाद अंग्रेजी न्यूज चैनल WION की पूर्व मैनेजिंग एडिटर पलकी शर्मा ने एक ट्वीट किया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 23 November, 2022
Last Modified:
Wednesday, 23 November, 2022
Palki Sharma

दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा 'जी मीडिया' की याचिका को ठुकराए जाने के बाद अंग्रेजी न्यूज चैनल WION की पूर्व मैनेजिंग एडिटर पलकी शर्मा ने एक ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि यह फैसला स्वतंत्र रूप से अपने करियर का रास्ता चुनने का हर पत्रकार को अधिकार देता है और उसकी आजादी की पुष्टि करता है। साथ ही एक संदेश भी देता है कि कॉर्पोरेट के बॉस (corporate bosses) अब प्रोफेशनल्स को धमका नहीं सकते हैं या उसकी स्वतंत्रता को बाधित नहीं कर सकते हैं। अब ये वो दिन नहीं रहे, जब एक एम्प्लॉयी, हमेशा एक एम्प्लॉयी ही रहेगा।

बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को 'जी मीडिया कॉर्पोरेशन' की उस याचिका को खारिज करते हुए अंग्रेजी न्यूज चैनल WION की पूर्व मैनेजिंग एडिटर पलकी शर्मा के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसमें ये मांग की गई थी कि पलकी शर्मा को TV18 के साथ जुड़ने या उसके साथ काम करने से रोका जाए।   

दरअसल, पलकी शर्मा ने सितंबर में 'जी मीडिया' से इस्तीफा दे दिया था और बाद में TV18 ब्रॉडकास्ट लिमिटेड में बतौर मैनेजिंग एडिटर शामिल हो गईं थीं।

अपनी याचिका में, जी मीडिया ने दावा किया था कि उन्होंने (पलकी शर्मा ने) अनिवार्य नोटिस नीति (mandatory notice policy) और गैर-प्रतिस्पर्धा खंड (non-compete clause) का उल्लंघन किया है और उनके पास 'गोपनीय जानकारी' है, जिसका उपयोग वह 'जी' के प्रतिस्पर्धियों को लाभ पहुंचाने के लिए कर सकती हैं।

इन आधारों पर, जी ने अदालत से अनुरोध किया था कि उन्हें TV18 में शामिल होने या उनके काम को जारी रखने से रोका जाए।

वहीं पलकी शर्मा के वकील, सैफ महमूद और अनिल सपरा ने जी के इस अपील का विरोध किया और तर्क दिया कि इस याचिका का अपने आप में ही कोई वजूद नहीं है। उनका किसी संस्थान से जुड़ने से रोकने का अनुरोध करना तो दूर की बात है।

उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि उनके मुवक्किल की गोपनीयता भंग करने की मंशा नहीं है और इस संबंध में जी मीडिया की दलीलें निराधार हैं। अदालत ने जी के वकील जॉय बसु की दलीलों में कोई दम नहीं पाया और कहा कि पलकी शर्मा को किसी अन्य चैनल में काम करने से नहीं रोका जा सकता है।

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Zee मीडिया से जुड़े सुदीप रॉय, निभाएंगे यह बड़ी भूमिका

सुदीप रॉय इससे पहले ‘टीसीएम स्पोर्ट्स’ (TCM Sports) से जुड़े हुए थे और बतौर एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट व रेवेन्यू हेड (न्यू बिजनेस) के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 23 November, 2022
Last Modified:
Wednesday, 23 November, 2022
Sudip Roy

‘जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड’ (ZMCL) ने सुदीप रॉय को क्लस्टर नेशनल हेड के पद पर नियुक्त किया है। रॉय ने इस बारे में अपनी लिंक्डइन पोस्ट में जानकारी शेयर की है।

अपनी पोस्ट में सुदीप रॉय ने बताया है कि अपनी इस भूमिका में वह सात चैनल्स- जी हिन्दुस्तान, जी राजस्थान, जी यूपी/यूके, जी एमपी/सीजी, जी पीएचएच, जी डीएनएच, जी सलाम और सभी 14 चैनल्स से सरकारी बिजनेस का नेतृत्व करेंगे।

सुदीप रॉय इससे पहले ‘टीसीएम स्पोर्ट्स’ (TCM Sports) से जुड़े हुए थे और बतौर एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट व रेवेन्यू हेड (न्यू बिजनेस) के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। यहां वह जून 2021 से नवंबर 2022 तक कार्यरत रहे।  

बता दें कि रॉय इससे पहले ‘नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड’ (Network18 Media & Investments Limited), ‘नियो स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्ट प्राइवेट लिमिटेड’ (Neo Sports Broadcast Pvt. Ltd) और ‘एबीपी नेटवर्क’ (ABP Network) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ भी काम कर चुके हैं।

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पलकी शर्मा को लेकर दिल्ली HC ने खारिज की ZEE मीडिया की यह याचिका

दिल्ली हाई कोर्ट ने जी मीडिया कॉर्पोरेशन की उस याचिका को खारिज कर दिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 22 November, 2022
Last Modified:
Tuesday, 22 November, 2022
DelhiHC4895

दिल्ली हाई कोर्ट ने 'जी मीडिया कॉर्पोरेशन' की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें ये मांग की गई थी कि 'जी मीडिया' के अंग्रेजी न्यूज चैनल WION की पूर्व मैनेजिंग एडिटर पलकी शर्मा को TV18 के साथ जुड़ने या उसके साथ काम करने से रोका जाए।

दरअसल, पलकी शर्मा ने सितंबर में 'जी मीडिया' से इस्तीफा दे दिया था और बाद में TV18 ब्रॉडकास्ट लिमिटेड में बतौर मैनेजिंग एडिटर शामिल हो गईं थीं।

अपनी याचिका में, जी मीडिया ने दावा किया था कि उन्होंने (पलकी शर्मा ने) अनिवार्य नोटिस नीति (mandatory notice policy) और गैर-प्रतिस्पर्धा खंड (non-compete clause) का उल्लंघन किया है और उनके पास 'गोपनीय जानकारी' है, जिसका उपयोग वह 'जी' के प्रतिस्पर्धियों को लाभ पहुंचाने के लिए कर सकती हैं।

इन आधारों पर, जी ने अदालत से अनुरोध किया था कि उन्हें TV18 में शामिल होने या उनके काम को जारी रखने से रोका जाए।

वहीं पलकी शर्मा के वकील, सैफ महमूद और अनिल सपरा ने जी के इस अपील का विरोध किया और तर्क दिया कि इस याचिका का अपने आप में ही कोई वजूद नहीं है। उनका किसी संस्थान से जुड़ने से रोकने का अनुरोध करना तो दूर की बात है।

उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि उनके मुवक्किल की गोपनीयता भंग करने की मंशा नहीं है और इस संबंध में जी मीडिया की दलीलें निराधार हैं। अदालत ने जी के वकील जॉय बसु की दलीलों में कोई दम नहीं पाया और कहा कि पलकी शर्मा को किसी अन्य चैनल में काम करने से नहीं रोका जा सकता है।

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गौरव द्विवेदी ने संभाला प्रसार भारती के CEO का पदभार, कही ये बात

भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी गौरव द्विवेदी ने सोमवार को प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पदभार संभाल लिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 22 November, 2022
Last Modified:
Tuesday, 22 November, 2022
Gaurav458

भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी गौरव द्विवेदी ने सोमवार को प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पदभार संभाल लिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्‍हें पांच वर्ष के लिए नियुक्त किया है।

पदभार ग्रहण करने के बाद गौरव द्विवेदी ने कहा कि प्रसार भारती की दो इकाइयां, आकाशवाणी और दूरदर्शन को अब भी सबसे विश्वसनीय माना जाता है। उन्होंने कहा कि इन इकाइयों को और मजबूत करने के प्रयास किए जाएंगे।

इस अवसर पर आकाशवाणी की महानिदेशक डॉक्‍टर वसुधा गुप्ता और दूरदर्शन के महानिदेशक मयंक अग्रवाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

पदभार ग्रहण करने के बाद डीडी न्यूज के संवाददाता कुमार आलोक ने उनसे बातचीत की। इस दौरान गौरव द्विवेदी ने कहा कि हम शायद उस आखिरी पीढ़ी के लोग हैं, जो केवल दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो के साथ बड़े हुए हैं। पिछले ढाई दशक में काफी तेजी से निजी चैनल्स, फिर चाहे वह रेडियो पर हों या टीवी पर हों, उनका मार्केट शेयर बढ़ा है। आगे की पीढ़ियों ने बहुत सी चॉइस देखी हैं, बावजूद इसके आज भी प्रसार भारती की जो आउटरीच है, उसको सबसे ज्यादा विश्वसनीय माना जाता है। हम मनोरंजन के क्षेत्र में मजबूत हैं। प्रसार भारती की बेहतरी के लिए हम लगातार प्रयास करेंगे। हम दर्शकों को बैलेंस कंटेंट प्रदान करेंगे। आगे जब सभी लोगों के साथ चर्चा करेंगे और अभी तक जो कार्यवाही हुई उसकी विवेचना होगी, तब स्पष्ट होगा कि हम लोग और बेहतर कैसे कर सकते हैं और यह कोई एक बार करने वाली चीज नहीं है, यह हर दिन होगा। समाचार व अन्य क्षेत्र के लिए भी हम काम करेंगे।

बता दें कि गौरव द्विवेदी 1995 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। इससे पूर्व गौरव द्विवेदी केरल, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में विभिन्न जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। वह मसूरी में आईएएस ट्रेनिंग एकेडमी के फैकल्टी मेंबर भी रह चुके हैं। वर्तमान में वह ‘इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय’ (Ministry of Electronics & Information Technology) में बतौर सीईओ तैनात हैं। बेहतर प्रशासन के लिए उन्हें प्राइम मिनिस्टर अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। 

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ZEE मीडिया की इस याचिका पर दिल्ली HC ने पलकी शर्मा को दिया ये निर्देश

जी मीडिया कॉरपोरेशन ने पलकी शर्मा के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर रखी है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 22 November, 2022
Last Modified:
Tuesday, 22 November, 2022
Palki Sharma

‘जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड’ (Zee Media Corporation Ltd) की ओर से दायर एक याचिका को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने ‘नेटवर्क18’ (Network18) की मैनेजिंग एडिटर पलकी शर्मा को यह आदेश दिया है कि वह अपनी पूर्व कंपनी जी मीडिया से जुड़ी कोई भी गोपनीय या मालिकाना स्तर की जानकारी किसी भी अन्य संस्थान या तीसरे पक्ष को शेयर नहीं करेंगी।

दरअसल, जी मीडिया कॉरपोरेशन ने पलकी शर्मा के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर रखी है, जिसमें कोर्ट से ये अपील की गई थी कि पलकी को जी मीडिया से जुड़ी कोई भी गोपनीय या मालिकाना स्तर की जानकारी किसी भी अन्य संस्थान या तीसरे पक्ष को शेयर करने से रोका जाए।

‘जी मीडिया‘ की ओर से सीनियर एडवोकेट जॉय बसु के नेतृत्व में ट्रस्ट लीगल की पार्टनर रित्विका नंदा और एसोसिएट पार्टनर अक्षिता सलामपुरिया ने अपनी बात रखी और साथ ही कोर्ट के समक्ष एम्प्लॉयीज कॉन्ट्रैक्ट की अनुबंधित शर्तों का भी उल्लेख किया गया था।

वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष दायर इस मामले में प्रतिवादी पलकी शर्मा को मिले एडवांस नोटिस पर उन्होंने अंडरटेकिंग दी है, जिसमें उन्होंने यह वचन दिया है कि जी मीडिया से संबंधित किसी भी गोपनीय या मालिकाना जानकारी को वह किसी अन्य तीसरे पक्ष को शेयर नहीं करेंगी।

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बदल गया है पत्रकारिता का दौर, अब चुनौतियों से निकालना होगा रास्ता: हरिवंश नारायण सिंह

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने किया 21 से 25 नवंबर तक आयोजित होने वाले आईआईएमसी के सत्रारंभ समारोह का शुभारंभ

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 21 November, 2022
Last Modified:
Monday, 21 November, 2022
IIMC

‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (आईआईएमसी) के शैक्षणिक सत्र 2022-23 का सोमवार को शुभारंभ करते हुए राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने कहा कि आजादी के पहले भारतीय पत्रकारिता का स्वर्णिम काल रहा है। उस समय के पत्रकार 'इन्वेस्टिगेटर' के साथ-साथ 'इन्वेस्टर' भी थे। सीमित संसाधनों के साथ उन्होंने पत्रकारिता के स्वर्णिम काल का निर्माण किया। आज के टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में आसानी से हम बहुत कुछ कर सकते हैं और पत्रकारिता का एक नया स्वर्णिम काल गढ़ सकते हैं।

'अमृतकाल के संकल्प और मीडिया' विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए हरिवंश नारायण सिंह ने कहा कि जो चीजें पहले सौ वर्षों में बदलती थीं, आज उसके लिए दो दिन का समय भी नहीं लगता। आज आप मामूली संसाधनों के साथ मीडिया स्टार्टअप की शुरुआत कर सकते हैं और समाज में बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में संघर्ष से कठिन सृजन होता है। यह कठिन तप और साधना है। युवाओं के तप से ही भारत का भविष्य तय होगा। आजादी के सौवें वर्ष में भारत की क्या तस्वीर होगी, वो युवाओं के सपनों और संकल्पों से तय होगा।

राज्यसभा के उपसभापति के अनुसार, ‘पत्रकारिता का दौर अब पूरी तरह बदल गया है। आपको चुनौतियों में से रास्ता निकालना है, लेकिन सबसे अच्छी बात यह है कि चुनौतियों के बीच आज युवाओं के पास अनंत अवसर हैं।’ उन्होंने कहा कि बदलाव का सबसे बड़ा अध्याय इंसान लिख सकता है। आज प्रिंट, रेडियो और टीवी के अलावा डिजिटल मीडिया, विज्ञापन एवं जनसंपर्क, ऑडियो, पॉडकास्ट, मल्टीमीडिया, डाटा साइंस और मीडिया शिक्षण जैसे तमाम विकल्प मौजूद हैं।

हरिवंश नारायण सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया से आज पत्रकारिता के सामने साख का संकट खड़ा हो गया है। फेसबुक, ट्विटर आदि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रोजाना लाखों फेक न्यूज परोसी जा रही हैं। हम सभी को मिलकर इनका सामना करना होगा। उन्होंने कहा कि मीडिया की विश्वसनीयता के बिना आप कुछ भी कर सकते हैं, लेकिन उसका कोई असर समाज पर नहीं होगा। तकनीक हमारे लिए वरदान के साथ सबक भी है। ये हम पर निर्भर करता है कि इसका कैसा उपयोग किया जाए।

इस अवसर पर भारत सरकार के सूचना आयुक्त उदय माहुरकर, आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी, डीन (अकादमिक) प्रो. गोविंद सिंह, कार्यक्रम के संयोजक एवं उर्दू पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष प्रो. प्रमोद कुमार सहित आईआईएमसी के सभी केंद्रों के संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

भारत के पुनर्जागरण का काल: माहुरकर

इस अवसर पर भारत सरकार के सूचना आयुक्त उदय माहुरकर ने कहा कि देश में डिजिटल क्रांति से विकास की नई तस्वीर निकलकर सामने आई है। आज प्रत्येक व्यक्ति के लिए राष्ट्रहित सर्वोपरि है। ये भारत के पुनर्जागरण का काल है। उन्होंने कहा कि हम जहां एकतरफ 'नेशन फर्स्ट' की डिप्लोमेसी कर रहे हैं, वहीं भारत की 'सॉफ्ट पावर' ने पूरी दुनिया को चकित कर दिया है। माहुरकर के अनुसार टीआरपी बेस्ड जर्नलिज्म मीडिया और समाज दोनों के लिए बहुत नुकसानदायक है।

संकटों का सामना करने में सक्षम हैं हिन्दुस्तानी : प्रो. द्विवेदी

नवागत विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि आप सभी के लिए ये साधना और समर्पण का साल है। उन्होंने कहा कि हम वही बनते हैं, जो हम सोचते हैं। पिछले 75 वर्षों में हमने शानदार यात्रा की है। आने वाले 25 वर्षों में हमें विश्व मंच पर भारत को पुनः विश्व गुरु के रूप में स्थापित करना है। प्रो. द्विवेदी के अनुसार इस विश्व में हिन्दुस्तानी अकेले हैं, जो हर स्थिति में समन्वय बैठा लेते हैं। दुनिया मानती है कि किसी भी तरह के संकटों का सामना करने में हिन्दुस्तानी सक्षम हैं।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में 'अमृतकाल : पंच प्रण और मीडिया' विषय पर भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष डॉ. जे.के. बजाज, पेसिफिक विश्वविद्यालय के योजना एवं नियंत्रण के ग्रुप प्रेसिडेंट प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा, जेएनयू के स्कूल ऑफ लैंग्वेज, लिटरेचर एंड कल्चर स्टडीज के डीन प्रो. मजहर आसिफ एवं ‘ऑर्गनाइजर’ के संपादक प्रफुल्ल केतकर ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।

शुभारंभ समारोह के अंतिम सत्र में 'मीडिया उद्यमिता और आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य' विषय पर ‘न्यूज 24’ की प्रधान संपादक अनुराधा प्रसाद, बिजनेस वर्ल्ड के अध्यक्ष एवं प्रधान संपादक डॉ. अनुराग बत्रा, NEWJ के संस्थापक, सीईओ एवं प्रधान संपादक शलभ उपाध्याय एवं डीबीजी टेक्नोलॉजी (भारत) के कार्यकारी निदेशक डॉ. अभिषेक गर्ग ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर प्रो. अनुभूति यादव द्वारा संपादित पुस्तक 'न्यू मीडिया जर्नलिज्म' एवं प्रो. प्रमोद कुमार द्वारा लिखित पुस्तक 'मीडियाकर्म : योग्यता और यथार्थ' का भी विमोचन किया गया।

द्वितीय दिवस का कार्यक्रम: कार्यक्रम के दूसरे दिन मंगलवार को 'भारतीय भाषाओं की वैश्विक यात्रा' विषय पर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलपति प्रो. रजनीश शुक्ल, केंद्रीय हिंदी संस्थान के उपाध्यक्ष अनिल के. शर्मा, दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्रोफेसर कुमुद शर्मा एवं तंजानिया की लेखिका सुश्री प्रियंका ओम विद्यार्थियों से बातचीत करेंगी। द्वितीय सत्र में 'डिजिटल युग में ब्रांड निर्माण' विषय पर भारतीय विज्ञापन मानक परिषद् की मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुश्री मनीषा कपूर, केंद्रीय संचार ब्यूरो के अपर महानिदेशक के. सतीश नंबुदिरीपाड एवं एडेलमैन के डिजिटल एडवाइजरी हेड देबांजन चक्रवर्ती अपनी बात रखेंगे।

दिन के अंतिम सत्र में 'जनसंपर्क और ख्याति प्रबंधन' विषय पर रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अध्यक्ष एवं निदेशक (मीडिया) उमेश उपाध्याय, एडफैक्टर्स पीआर के निदेशक समीर कपूर, पीआरएसआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजीत पाठक, हिंदुस्तान कोका कोला के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट (पीआर) कल्याण रंजन एवं इफको के पब्लिसिटी एंड पीआर विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक हर्षेंद्र वर्धन सिंह विद्यार्थियों से रूबरू होंगे।

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डिजिटल मीडिया के भविष्य को लेकर इंटरनेशनल स्पीकर्स के साथ e4m-DNPA की चर्चा शुरू

e4m और DNPA, डिजिटल मीडिया ईकोसिस्टम की चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा करने के लिए इंटरनेशनल स्पीकर्स के साथ वर्चुअल रूप से गोलमेज सम्मेलनों का आयोजन कर रहे हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 24 November, 2022
Last Modified:
Thursday, 24 November, 2022
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बड़े पैमाने पर इंटरनेट व मोबाइल कनेक्टिविटी की ग्रोथ और ऑनलाइन शॉपिंग, ओटीटी एंटरटेनमेंट व गेमिंग की बढ़ती लोकप्रियता के चलते जब डिजिटल मीडिया ईकोसिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) पूरी दुनिया से जुड़ रहा है, तो ऐसे समय पर डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स (डिजिटल ईकोसिस्टम में प्रमुख स्टेक होल्डर्स में से एक) तेजी से डिजिटल परिदृश्य को अपनाने और उसका लाभ उठाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।

न्यूज प्रॉडक्शन में महत्वपूर्ण निवेश के बावजूद उनका प्रतिफल निराशाजनक रहा है। यहां तक कि पिछले कुछ वर्षों में गूगल और मेटा जैसी दिग्गज टेक कंपनियों के रेवेन्यू में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पत्रकारिता में क्वॉलिटी को बनाए रखने के लिए पब्लिशर्स अपने और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के बीच समान अवसर की मांग कर रहे हैं।

इसी पृष्ठभूमि को देखते हुए एक्सचेंज4मीडिया और डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) डिजिटल मीडिया ईकोसिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) की चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा करने के लिए इंटरशनेशनल स्पीकर्स के साथ वर्चुअल रूप से दो गोलमेज सम्मेलन (राउंडटेबल कॉन्फ्रेंस) का आयोजन कर रहे हैं।

बता दें कि डीएनपीए (Digital News Publishers Association) प्रिंट व टेलीविजन के क्षेत्र में काम कर रही देश की शीर्ष मीडिया कंपनियों की डिजिटल विंग का प्रतिनिधित्व करता है।

पहला गोलमेज सम्मेलन 25 नवंबर को है, जोकि शुरू हो चुका है और दूसरा 9 दिसंबर को आयोजित किया जा रहा है। पहला गोलमेज सम्मेलन डिजिटल मीडिया के भविष्य और इसके सामने आने वाली चुनौतियों की विभिन्न रूपरेखाओं का पता लगाने के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को एक साथ लाया है।

इस सम्मेलन के दौरान, स्पीकर्स ऑस्ट्रेलिया द्वारा हाल ही में अपनाए गए ‘न्यूज मीडिया एंड डिजिटल प्लेटफॉर्म्स मैंडेटरी बार्गेनिंग कोड’ की मुख्य विशेषताओं को साझा कर रहे हैं। वे उन उपायों पर भी चर्चा कर रहे हैं, जिससे दुनियाभर के देश पब्लिशर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के बीच समन्वय स्थापित कर सकें। साथ ही उच्च गुणवत्ता वाली पत्रकारिता के संरक्षण के लिए अधिक टिकाऊ आधार तैयार कर सकें।

इस सम्मेलन से ही 20 जनवरी, 2023 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले e4m-DNPA ‘डिजिटल मीडिया समिट एंड अवॉर्ड्स का भविष्य’ कार्यक्रम की आधारशिला रखी जाएगी। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कृप्या नीचे दिए लिंक पर क्लिक कर अपना रजिस्ट्रेशन करें-

https://e4mevents.com/e4m-dnpa-dialouges/register

स्पीकर्स की सूची:

प्रोफेसर रोडनी सिम्स, पूर्व अध्यक्ष, ऑस्ट्रेलियन कॉम्पटीशन एंड कंज्यूमर कमीशन (ACCC)  

तन्मय माहेश्वरी, एमडी, अमर उजाला (चेयरपर्सन, डीएनपीए)

पवन अग्रवाल, डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर, डीबी कॉर्प लिमिटेड

डॉ. अनुराग बत्रा, चेयरमैन व मैनेजिंग एडिटर, बिजनेस वर्ल्ड व एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप

एम्मा मैकडॉनल्ड, सीनियर पॉलिसी एडवाइजर, मिंडेरू फाउंडेशन (Minderoo Foundation)

पीटर लुईस, डायरेक्टर, दि ऑस्ट्रेलिया इंस्टीट्यूट

पॉल थॉमस, मैनेजिंग डायरेक्टर, स्टार न्यूज ग्रुप प्राइवेट लिमिटेड

डॉ जेम्स मीज़, सीनियर लेक्चरर, आरएमआईटी यूनिवर्सिटी

 

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