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TRAI रिपोर्ट ने ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री के बदलते रुझानों की ओर किया इशारा
भारतीय टेलीकॉम और प्रसारण क्षेत्र में मार्च 2025 में समाप्त तिमाही के दौरान कई अहम बदलाव देखे गए हैं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 7 months ago
भारतीय टेलीकॉम और ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री में मार्च 2025 में समाप्त तिमाही के दौरान कई अहम बदलाव देखे गए हैं। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) द्वारा जारी ‘टेलीकॉम सर्विसेज परफॉर्मेंस इंडिकेटर रिपोर्ट’ के मुताबिक, इस तिमाही की सबसे अहम बातों में से एक पेड डीटीएच सेवाओं के सक्रिय सब्सक्राइबर्स की संख्या में गिरावट है।
मार्च 2025 तक पेड डीटीएच के कुल सक्रिय सब्सक्राइबर 5.692 करोड़ रह गए हैं, जो दिसंबर 2024 में 5.822 करोड़ थे। यानी केवल तीन महीनों में करीब 13 लाख सब्सक्राइबर्स की कमी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव उपभोक्ताओं की प्राथमिकताओं में बदलाव, या फिर ब्रॉडकास्टर्स और डीटीएच ऑपरेटर्स द्वारा हाल ही में किए गए पैकेजिंग और मूल्य निर्धारण में बदलावों का असर हो सकता है।
भारत में फिलहाल चार प्रमुख पेड डीटीएच सेवा प्रदाता सक्रिय हैं। इनके अलावा, दूरदर्शन का DD Free Dish, जो एक फ्री-टू-एयर सेवा है, स्वतंत्र रूप से संचालित होता है और इस आंकड़े में शामिल नहीं किया गया है।
इस रिपोर्ट में पेड टीवी और डीटीएच क्षेत्रों के प्रमुख रुझानों को रेखांकित किया गया है, साथ ही उद्योग की राजस्व स्थिति का भी सार प्रस्तुत किया गया है।
3 मार्च 2017 के टैरिफ ऑर्डर (संशोधित) के तहत ब्रॉडकास्टर्स द्वारा रिपोर्ट किए गए आंकड़ों के अनुसार, भारत में कुल 908 उपग्रह टीवी चैनल्स को डाउनलिंकिंग की अनुमति प्राप्त है। इनमें से 333 चैनल्स को पेड चैनल के रूप में रिपोर्ट किया गया है।
इन 333 पेड चैनलों में 232 स्टैंडर्ड डेफिनिशन (SD) और 101 हाई डेफिनिशन (HD) चैनल्स शामिल हैं।
DTH सब्सक्राइबर्स की संख्या में धीरे-धीरे हो रही गिरावट एक बड़े बदलाव का संकेत देती है, जहां दर्शक पारंपरिक टीवी के बजाय ब्रॉडबैंड आधारित मनोरंजन विकल्पों, जैसे OTT प्लेटफॉर्म्स की ओर रुख कर रहे हैं।
इंटरनेट की पहुंच और सस्ते डेटा प्लान्स के कारण भारत में ‘कॉर्ड कटिंग’ (यानि पारंपरिक टीवी सेवाओं को छोड़ना) का चलन धीरे-धीरे बढ़ रहा है, खासकर शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में।
हालांकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि करीब 5.7 करोड़ सक्रिय पेड डीटीएच सब्सक्राइबर आज भी बने हुए हैं, जो दर्शाता है कि सेटेलाइट के जरिए मिलने वाला लीनियर टीवी भारत के गैर-मेट्रो और ग्रामीण इलाकों में आज भी प्रासंगिक बना हुआ है।
यह आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं, जब ब्रॉडकास्टिंग और डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में संरचनात्मक बदलाव हो रहे हैं। नए रेफरेंस इंटरकनेक्ट ऑफर्स (RIOs) की प्रक्रिया, ब्रॉडकास्टर्स और डीटीएच ऑपरेटर्स के बीच बदलती समीकरण और हालिया मूल्य परिवर्तन- ये सभी आने वाले समय में सब्सक्राइबर्स के व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं।
अब इंडस्ट्री की निगाहें अगली तिमाही की दिशा पर टिकी होंगी, जब नियामकीय नीतियों और मूल्य निर्धारण से जुड़े चर्चाएं बाजार की धारणा को और ज्यादा आकार देंगी।
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