डॉ. संदीप गोयल ने उदय शंकर की स्टार टीवी में वापसी का कुछ यूं मनाया जश्न

मशहूर विज्ञापन निर्माता और रेडिफ्यूजन के चेयरमैन डॉ. संदीप गोयल ने 8 दिसंबर को मुंबई के NMACC स्थित आलीशान इंडियन एक्सेंट रेस्टोरेंट में एक भव्य लंच पार्टी का आयोजन किया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 20 December, 2024
Last Modified:
Friday, 20 December, 2024
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मशहूर विज्ञापन निर्माता और रेडिफ्यूजन के चेयरमैन डॉ. संदीप गोयल ने 8 दिसंबर को मुंबई के NMACC स्थित आलीशान इंडियन एक्सेंट रेस्टोरेंट में एक भव्य लंच पार्टी का आयोजन किया। यह कार्यक्रम बहुत ही शानदार रहा, जिसमें इंडस्ट्री जगत की नामचीन हस्तियां शामिल हुईं और सभी ने इस खास मौके के लिए बेहतरीन कपड़े पहने हुए थे।

जब उनसे इस आयोजन के बारे में पूछा गया, तो डॉ. गोयल ने मुस्कुराते हुए कहा, "हम हर साल दिसंबर के पहले सप्ताह में लंच पार्टी आयोजित करते हैं। 3 दिसंबर को मेरी पत्नी तान्या गोयल का जन्मदिन होता है और 5 दिसंबर को मेरा। इस बार मुख्य अवसर मेरे करीबी दोस्त उदय शंकर की स्टार टीवी में शानदार वापसी का जश्न मनाने का था।"

दोस्ती का जश्न (A Celebration of Friendship)

मीडिया दिग्गज और इस मौके के केंद्र बिंदु उदय शंकर ने वास्तविक संबंधों के महत्व पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा, "जब आप निराश और हताश यानी मुश्किल में होते हैं, तो बहुत कम लोग आपके संपर्क में रहते हैं। संदीप और कुछ अन्य लोग हमेशा जुड़े रहते हैं। हमारा ये संबंध कभी भी व्यापार या काम से संबंधित नहीं है। बहुत कम लोग ही सचमुच दूसरों की खुशी में खुश होते हैं।"

डॉ. गोयल ने उदय शंकर के साथ अपनी लंबे समय से चली आ रही दोस्ती को प्यार से याद किया और कहा, "मैं उदय को जी और 'आजतक' के दिनों से जानता हूं। जब मैंने डेंट्सू को छोड़ा था और कुछ नया करने की तलाश में था। उस समय उदय 'स्टार टीवी' में थे और उन्होंने मुझे 'लाइफ ओके' के लॉन्च की जिम्मेदारी लेने और मोबाइल विज्ञापन में उतरने के लिए प्रोत्साहित किया। तभी मैंने एयरटेल से बात की और प्रीपेड फोन के जरिए कॉल के अंत में संदेश भेजने का तरीका तैयार किया। एक ही शाम को 50 करोड़ संदेश भेजे गए। इस इनोवेशन ने मेरी मोबाइल मार्केटिंग कंपनी मोगे मीडिया की नींव रखी और हमारी प्रगति के लिए मंच तैयार किया।"

दिग्गजों का जमावड़ा

इस लंच में विभिन्न क्षेत्रों से कई दिग्गज शामिल हुए, जिससे यह वाकई एक यादगार कार्यक्रम बन गया। इसमें शामिल होने वाले प्रमुख लोगों में उदय शंकर, सुबोध जायसवाल और प्रवीर सिन्हा शामिल थे, जिनकी जड़ें बिहार से हैं। इन दिग्गजों के बीच की दोस्ती और बातचीत ने इस समारोह में एक अनूठा आकर्षण जोड़ा।

कैरोल गोयल द्वारा 9 कोर्स में आयोजित शानदार भोजन, स्वादिष्ट व्यंजनों और दिल छू लेने वाली बातचीत से भरपूर यह पार्टी महज एक जमावड़ा नहीं था; बल्कि यह उपलब्धियों, रिश्तों और सच्चे संबंधों की स्थायी शक्ति का जश्न था। 

उपस्थित लोगों में शेफ संजीव कपूर, नेटफ्लिक्स की मोनिका शेरगिल, टाटा प्ले के हरित नागपाल, टाटा कंज्यूमर के सुनील डिसूजा, अकासा एयर के अमित गोयल, बीसीसीआई के पूर्व सीईओ राहुल जौहरी, ताज होटल्स की वीतीका डियोरास, आरती व कैलाश सुरेंद्रनाथ, कलाकार बृंदा मिलर, CNBC के अविनाश कौल, विज़क्राफ्ट के सव्वास जोसेफ व एडिट II के बेननीफर और संजय कोहली, पॉलोमी धवन, IiAS के अमित टंडन, कंसाई नेरोलैक के अनुज जैन, अभिनेत्री पूनम ढिल्लों, FPJ के अभिषेक कर्णानी, सोशल इंफ्लुएंसर मनिंदर सिंह रंधावा और डॉ. अनुराग बत्रा शामिल थे।

डॉ. गोयल की वार्षिक लंच पार्टी विज्ञापन और मीडिया जगत में एक बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम बन गई है, जो अपनी गर्मजोशी, भव्यता और विचारशील उद्देश्य के लिए जानी जाएगी। इस वर्ष का उत्सव कोई अपवाद नहीं था, जो दोस्ती, सफलता और साझा खुशी के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ।

तस्वीरों में देखें इस लंच पार्टी की झलकियां:

 

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NDTV ने बदली अपनी पहचान, ‘When It Really Matters’ के साथ नया आगाज

‘एनडीटीवी’ (NDTV) ने तीन दशक से ज्यादा की यात्रा के बाद अपनी नई ब्रैंड आइडेंटिटी ‘When It Really Matters’ पेश की है। इसके साथ ही NDTV 24x7 अब सिर्फ NDTV के नाम से जाना जाएगा।

Samachar4media Bureau by
Published - Sunday, 16 August, 2026
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Sunday, 16 August, 2026
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देश के प्रमुख न्यूज ब्रैंड ‘एनडीटीवी’ (NDTV) ने तीन दशक से ज्यादा की यात्रा के बाद अपनी नई ब्रैंड आइडेंटिटी ‘When It Really Matters’ पेश की है। इसके साथ ही NDTV 24x7 अब सिर्फ NDTV के नाम से जाना जाएगा। कंपनी के मुताबिक, यह बदलाव NDTV के 24 घंटे चलने वाले टेलीविजन न्यूज चैनल से आगे बढ़कर एक ऐसे न्यूज ब्रैंड के रूप में विकसित होने को दर्शाता है, जो टीवी, वेबसाइट, ऐप, सोशल मीडिया, स्ट्रीमिंग और कनेक्टेड टीवी समेत अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर एक ही पहचान के साथ मौजूद है।

जब NDTV 24x7 की शुरुआत हुई थी, तब 24 घंटे चलने वाला टेलीविजन न्यूज अपने आप में एक खास पहचान और बड़ी पेशकश थी। लेकिन आज दर्शक अलग-अलग माध्यमों और प्लेटफॉर्म पर खबरों से जुड़ते हैं। ऐसे में NDTV 24x7 से NDTV की ओर बढ़ना इसी बदलाव को दर्शाता है। अब एक ही NDTV अलग-अलग स्क्रीन और प्लेटफॉर्म पर दर्शकों तक पहुंचेगा।

नई पहचान के साथ NDTV ने अपनी विजुअल पहचान और लुक एंड फील में भी बदलाव किया है। यह बदलाव उसके टेलीविजन और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दिखाई देगा। कंपनी के मुताबिक, यह उस न्यूज ब्रैंड के सफर का अगला अध्याय है, जिसने तीन दशक से ज्यादा समय में लगातार बदलते देश और सूचना के बदलते माहौल को कवर किया है।

‘When It Really Matters’ क्यों है खास?: नई ब्रैंड पहचान के केंद्र में NDTV का संपादकीय उद्देश्य ‘When It Really Matters’ है। आज खबरों की संख्या बहुत ज्यादा है और सूचनाएं लगातार सामने आती रहती हैं। एक ही घटना को लेकर अलग-अलग दावे, राय, अनुमान और प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिलती हैं। ऐसे माहौल में पत्रकारिता की जिम्मेदारी सिर्फ सूचना देने तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि यह समझाना भी जरूरी हो जाता है कि किसी खबर की वास्तविक अहमियत क्या है।

NDTV की नई सोच इसी संपादकीय समझ पर आधारित है। इसके तहत तीन सवालों पर जोर दिया गया है-

1: इससे क्या बदलता है?

2: इसका असर किन लोगों की जिंदगी पर पड़ेगा?

3: यह क्यों मायने रखता है?

NDTV के मुताबिक, नई पहचान उसकी तीन दशक से ज्यादा पुरानी विश्वसनीयता और पत्रकारिता की बुनियाद पर आधारित है, लेकिन साथ ही यह आज के भारत में खबरों को देखने, समझने और उनसे जुड़ने के बदलते तरीके को भी ध्यान में रखती है।

इस बदलाव पर एनडीटीवी के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल ने कहा कि जब NDTV 24x7 शुरू हुआ था, तब 24x7 का मतलब 24 घंटे चलने वाली टेलीविजन न्यूज का आना था। आज खबरें हर जगह और हर समय उपलब्ध हैं। दर्शक NDTV को टेलीविजन, ऐप, वेबसाइट, सोशल मीडिया, कनेक्टेड टीवी और दूसरे उभरते प्लेटफॉर्म पर देख सकते हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में 24x7 एक माध्यम को दर्शाता है, जबकि NDTV ब्रैंड को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ‘When It Really Matters’ यह स्पष्ट करता है कि NDTV किस चीज के लिए खड़ा होना चाहता है। उनके मुताबिक, ऐसी दुनिया में जहां सूचनाओं की भरमार है, पत्रकारिता को लोगों को सिर्फ यह नहीं बताना चाहिए कि क्या हो रहा है, बल्कि यह भी समझाना चाहिए कि किस चीज पर ध्यान देना जरूरी है और क्यों। इसके साथ ही राहुल कंवल ने कहा कि NDTV पिछले तीन दशकों की विश्वसनीयता और पत्रकारिता की बुनियाद पर आगे बढ़ रहा है और आज के भारत तथा आने वाली दुनिया के लिए खुद को तैयार कर रहा है।

वहीं, एनडीटीवी के मैनेजिंग एडिटर शिव अरूर ने कहा कि ऐसे समय में जब प्रतिस्पर्धी शोर के बीच खबरें कई बार दब जाती हैं, ‘When It Really Matters’ NDTV को एक स्पष्ट संपादकीय दिशा देता है। उन्होंने कहा कि यह इस बात की याद दिलाता है कि किस खबर पर सिर्फ ध्यान जा रहा है और किस खबर का वास्तविक महत्व है, दोनों के बीच अंतर किया जाए। साथ ही उन स्टोरीज, सवालों और उनके प्रभावों पर ध्यान केंद्रित किया जाए, जो जनता के लिए वास्तव में महत्वपूर्ण हैं। शिव अरूर के मुताबिक, यही उद्देश्य NDTV के खबरों को रिपोर्ट करने, उनकी व्याख्या करने और महत्वपूर्ण खबरों के साथ बने रहने के तरीके को दिशा देगा।

टीवी और डिजिटल पहचान को एक साथ लाने पर जोर: एनडीटीवी की नई पहचान बदलते भारतीय दर्शकों को भी ध्यान में रखती है। आज का दर्शक पहले से ज्यादा युवा, कनेक्टेड, महत्वाकांक्षी और सूचनाओं से जुड़ा हुआ है। ऐसे में पत्रकारिता के सामने भी नई जिम्मेदारियां हैं।

नई पहचान में इस बात पर जोर दिया गया है कि खबरों में तेजी जरूरी है, लेकिन सिर्फ तेजी पर्याप्त नहीं है। किसी खबर तक पहुंच महत्वपूर्ण है, लेकिन संदर्भ के बिना वह भ्रम को बढ़ा सकती है। इसी तरह तीखे सवाल जरूरी हैं, लेकिन धैर्य, नजरिया और जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

एनडीटीवी की नई विजुअल पहचान उसके ऑन-एयर और डिजिटल प्लेटफॉर्म को एक ज्यादा एकीकृत रूप में जोड़ती है। यह ऐसे समय में किया गया बदलाव है, जब टेलीविजन और डिजिटल न्यूज के बीच की सीमाएं तेजी से कम हो रही हैं। नई पहचान एनडीटीवी के टेलीविजन और डिजिटल प्लेटफॉर्म, पत्रकारिता, सार्वजनिक संवाद और भारत समेत दुनिया भर के दर्शकों के साथ उसके जुड़ाव में दिखाई देगी।

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ZEEL को SAT से अंतरिम राहत, कनवर्टिबल वारंट जारी करने की मिली अनुमति

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (ZEEL) को प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (SAT) से अंतरिम राहत मिली है।

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 15 August, 2026
Last Modified:
Saturday, 15 August, 2026
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जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (ZEEL) को प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (SAT) से अंतरिम राहत मिली है। SAT ने 14 अगस्त 2026 को दिए आदेश में SEBI के 31 जुलाई 2026 के आदेश के तहत कंपनी और पुनीत गोयनका पर लगाए गए मार्केट से प्रतिबंध में सीमित राहत दी है।

यह राहत प्रवर्तक समूह की एक इकाई को तरजीही आधार पर (Preferential Basis) फुली कनवर्टिबल वारंट (Fully Convertible Warrants) जारी करने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए दी गई है। हालांकि, इसके लिए कंपनी और पुनीत गोयनका को एक सप्ताह के भीतर पूरा जुर्माना जमा करना होगा। SEBI इस राशि को ब्याज वाले खाते में रखेगा।

SAT ने साफ किया है कि कंपनी और पुनीत गोयनका पर प्रतिभूति मार्केट में पहुंच को लेकर लगाया गया प्रतिबंध पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। यह प्रतिबंध जारी रहेगा। इसमें सिर्फ उतनी ही राहत दी गई है, जितनी वारंट जारी करने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए SAT ने अपने आदेश में दी है।

SAT ने जी एंटरटेनमेंट को रोजमर्रा की कारोबारी जरूरतों के लिए सामान्य तौर पर म्यूचुअल फंड में लेनदेन करने की अनुमति भी दी है। हालांकि, इस अनुमति का इस्तेमाल किसी दूसरे उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता। इसमें प्रस्तावित लाभांश का भुगतान भी शामिल है।

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स्पोर्ट्स बिजनेस में जल्दबाजी नहीं, टिकाऊ मुनाफे पर जोर: पुनीत गोयनका

पुनीत गोयनका ने साफ कहा कि स्पोर्ट्स बिजनेस में कंपनी का फोकस लंबे समय में वैल्यू बनाने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने पर है।

Vikas Saxena by
Published - Saturday, 15 August, 2026
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Saturday, 15 August, 2026
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जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (ZEEL) के सीईओ पुनीत गोयनका ने 10 अगस्त को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजों पर हुई अर्निंग कॉन्फ्रेंस कॉल में कंपनी की मौजूदा स्थिति, आगे की रणनीति और ग्रोथ प्लान पर विस्तार से बात की। उन्होंने अपनी शुरुआती टिप्पणी के साथ-साथ निवेशकों के सवालों के जवाब में स्पोर्ट्स बिजनेस, FIFA, Bundesliga और Serie A, ZEE5, विज्ञापन कारोबार, सब्सक्रिप्शन, फंडरेजिंग, Zee Music और आने वाले समय की रणनीति पर कंपनी का रुख साफ किया।  

पुनीत गोयनका ने कहा कि नए वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भी पिछली वित्तीय वर्ष से चली आ रही कमजोर मैक्रोइकोनॉमिक स्थिति का असर देखने को मिला। पश्चिम एशिया में लगातार बनी अस्थिरता ने महंगाई का दबाव बढ़ाया, जिसका असर विज्ञापनदाताओं के खर्च करने के तरीके पर पड़ा। ऐसे माहौल के बावजूद Zee ने इन चुनौतियों के बीच मजबूती से काम किया और भविष्य के लिए अपनी बुनियाद मजबूत करने पर ध्यान बनाए रखा।

उन्होंने बताया कि कंपनी ने ग्रोथ के नए रास्ते खोलने के लिए कुछ रणनीतिक कदम उठाए हैं। कंपनी का मकसद नए अवसरों का फायदा उठाना और आगे अपनी प्रतिस्पर्धी स्थिति मजबूत करना है। इसी सोच के तहत Zee ने स्पोर्ट्स बिजनेस में कदम बढ़ाया है। Unite8 स्पोर्ट्स चैनलों की लॉन्चिंग इसी दिशा में एक अहम कदम है। इन चैनलों के जरिए कंपनी उभरते और ज्यादा संभावनाओं वाले स्पोर्ट्स कंटेंट का पोर्टफोलियो तैयार करना चाहती है।

पुनीत गोयनका ने साफ कहा कि स्पोर्ट्स बिजनेस में कंपनी का फोकस लंबे समय में वैल्यू बनाने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने पर है। उनके मुताबिक Zee सिर्फ महंगे स्पोर्ट्स राइट्स हासिल करने की दौड़ में शामिल नहीं होगी। कंपनी के लिए वैल्यू डिलीवर करना ज्यादा महत्वपूर्ण है, ताकि एक अलग और टिकाऊ बिजनेस तैयार किया जा सके।

इसी रणनीति के तहत Zee ने FIFA, Bundesliga और Serie A जैसे बड़े इंटरनेशनल फुटबॉल राइट्स हासिल किए हैं। गोयनका ने कहा कि हाल ही में खत्म हुआ FIFA World Cup 2026 Zee के लीनियर और डिजिटल दोनों प्लेटफॉर्म पर बहुत अच्छा रहा। भारत में इसकी पहुंच 40 करोड़ से ज्यादा दर्शकों तक हुई और इस टूर्नामेंट ने दोनों बिजनेस सेगमेंट को मजबूत बढ़ावा दिया।

ZEE5 की लगातार तीसरी तिमाही में मुनाफा

डिजिटल बिजनेस पर पुनीत गोयनका ने कहा कि ZEE5 ने लगातार तीसरी तिमाही में मुनाफा दर्ज किया है। पहली तिमाही में इसका रेवेन्यू साल-दर-साल 58% बढ़ा। इस बढ़त को आगे भी जारी रखने के लिए कंपनी ने हाल ही में कई भाषाओं में नया कंटेंट स्लेट पेश किया है। इसमें फिल्में, ओरिजिनल सीरीज, लाइव स्पोर्ट्स, AI की मदद से तैयार की गई स्टोरीटेलिंग, एनीमेशन और एंटरटेनमेंट किड्स से जुड़ा कंटेंट शामिल है।

उनके मुताबिक इस तरह के कंटेंट का मिश्रण ZEE5 को आने वाले समय में ज्यादा ग्रोथ हासिल करने के लिए मजबूत स्थिति में रखता है। कंपनी की कंटेंट स्ट्रैटेजी अलग-अलग बिजनेस में सकारात्मक नतीजे दे रही है।

Zee TV और नेटवर्क शेयर पर भी जोर

पुनीत गोयनका ने बताया कि लीनियर टीवी बिजनेस में कंपनी ने तिमाही के दौरान 20% का ऑल टाइम हाई नेटवर्क शेयर हासिल किया। उन्होंने कहा कि कंपनी का फ्लैगशिप हिंदी चैनल Zee TV भी लगातार मजबूत हो रहा है। यह 32 से ज्यादा लगातार हफ्तों से प्राइम टाइम में लीडर बना हुआ है। उनके मुताबिक नए शो दर्शकों के साथ अच्छा कनेक्ट बना रहे हैं। भाषा आधारित चैनल भी अपने-अपने बाजारों में मजबूत स्थिति बनाए हुए हैं।

विज्ञापन रेवेन्यू के बारे में उन्होंने कहा कि तिमाही के दौरान यह कमजोर रहा और इसके पीछे मुख्य रूप से बाहरी परिस्थितियां रहीं। हालांकि, विज्ञापन कंपनी के लिए अब भी एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता है और टीम इसे मजबूत बनाने के लिए जरूरी प्रयास कर रही है। वहीं, सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू में साल-दर-साल 16% की बढ़ोतरी हुई, जिसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म का बड़ा योगदान रहा।

उन्होंने कहा कि फिल्मों और म्यूजिक का बिजनेस भी तिमाही-दर-तिमाही स्थिर गति से बढ़ रहा है और दूसरे बिजनेस सेगमेंट के साथ तालमेल बना रहा है। कंपनी माइक्रो-ड्रामा, किड्स एंटरटेनमेंट, लाइव इवेंट्स, VFX और एनीमेशन जैसे दूसरे रणनीतिक क्षेत्रों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है।

पुनीत गोयनका ने कहा कि मैक्रोइकोनॉमिक माहौल में मामूली सुधार दिखाई दे रहा है और उन्हें आने वाले फेस्टिव सीजन से बेहतर संकेतों की उम्मीद है। उन्होंने शेयरहोल्डर्स का भी धन्यवाद किया और कहा कि हाल ही में हुई असाधारण आम बैठक (EGM) में कंपनी की ओर से रखे गए प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए वे उनका आभार व्यक्त करते हैं।

उन्होंने कंपनी के एम्प्लॉयीज को भी कंपनी की मजबूत ताकत बताया। गोयनका ने कहा कि शेयरहोल्डर्स द्वारा मंजूर ‘Truly Yours’ Employee Stock Option Plan एम्प्लॉयीज को कंपनी के सह-मालिक की तरह काम करने और इस संस्थान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में मदद करेगा।

स्पोर्ट्स बिजनेस कब मुनाफे में आएगा?

अर्निंग कॉल में जब गोयनका से पूछा गया कि Zee का स्पोर्ट्स बिजनेस लगातार और टिकाऊ तरीके से कब प्रॉफिटेबल हो सकता है, तो उन्होंने कहा कि कंपनी इस बिजनेस में बहुत सावधानी से आगे बढ़ेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि आखिरकार यह बिजनेस लंबे समय में टिकाऊ तरीके से प्रॉफिटेबल बने।

उन्होंने बताया कि Zee के पास FIFA के राइट्स 2034 तक हैं। जिन 39 प्रॉपर्टीज के लिए कंपनी ने करार किया है, उनमें से 38 अभी बाकी हैं। गोयनका ने कहा कि इसके बाद क्या होता है, यह आगे देखा जाएगा।

उन्होंने यह भी बताया कि अब दूसरे राइट्स owners भी Zee के साथ पार्टनरशिप के लिए कंपनी से संपर्क कर रहे हैं। इंटरनेशनल फुटबॉल में कंपनी Bundesliga और Serie A के साथ जुड़ चुकी है। साथ ही Zee घरेलू स्तर पर भी एक मजबूत sports calendar तैयार करने पर काम कर रही है।

हालांकि, उन्होंने स्पोर्ट्स बिजनेस के प्रॉफिटेबल होने की कोई निश्चित तारीख बताने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि अभी बहुत शुरुआती दौर है और Zee इस बिजनेस को उसी तरह सावधानी और planning के साथ आगे बढ़ाएगी, जिस तरह कंपनी आम तौर पर काम करती है।

FIFA के बाद बड़े विज्ञापनदाता Zee के साथ रहेंगे?

जब उनसे पूछा गया कि FIFA से पहले Zee पर मौजूद नहीं रहने वाले कुछ बड़े और प्रीमियम विज्ञापनदाता क्या FIFA के बाद भी नेटवर्क के साथ बने रहेंगे, तो पुनीत गोयनका ने कहा कि कुछ बड़े विज्ञापनदाता सिर्फ स्पोर्ट्स के लिए आए हो सकते हैं और वे बाद में Zee से बाहर भी जा सकते हैं।

लेकिन उन्होंने कहा कि अगर कंपनी ने इन विज्ञापनदाताओं के साथ अच्छे रिश्ते बनाए हैं और FIFA या स्पोर्ट्स बिजनेस के जरिए उन्हें अच्छी वैल्यू दी है, तो इनमें से कुछ विज्ञापनदाता निश्चित तौर पर Zee के साथ जुड़े रहेंगे। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि Zee आगे भी उन्हें कितनी अच्छी वैल्यू दे पाती है।

अब स्पोर्ट्स बिजनेस पहले से ज्यादा viable क्यों?

जब उनसे पूछा गया कि Zee के पुराने स्पोर्ट्स बिजनेस और अभी के मॉडल में क्या बदलाव आया है, तो पुनीत गोयनका ने कहा कि मौजूदा समय में स्पोर्ट्स बिजनेस का पूरा परिदृश्य बदल गया है।

उन्होंने माना कि स्पोर्ट्स राइट्स की कीमत सामान्य कंटेंट के मुकाबले ज्यादा है। लेकिन अगर कंपनी दर्शकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए सही कंटेंट चुनती है और राइट्स चुनने में सावधानी बरतती है, तो स्थिति बेहतर हो सकती है।

पुनीत गोयनका ने यह भी कहा कि Zee के पुराने दौर में फुटबॉल शायद 4-5 करोड़ लोगों तक ही पहुंच पाता था, जबकि अब FIFA के मामले में कंपनी 40 करोड़ लोगों तक पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि यह जरूर FIFA की वजह से है, लेकिन अगर non-FIFA प्रॉपर्टीज में भी इसका आधा ऑडियंस हासिल हो जाए तो भी यह मॉनेटाइजेशन के लिए काफी बड़ा नंबर होगा।

Fundraising पर क्या बोले गोयनका?

फंडरेजिंग प्लान के बारे में पूछे जाने पर पुनीत गोयनका ने कहा कि कंपनी ने इस मामले में नियामक से स्पष्टीकरण मांगा है, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। कंपनी ने सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) का भी रुख किया है और वहां अपील दाखिल की है।

उन्होंने कहा कि कंपनी को उम्मीद है कि इस मामले में जल्द समाधान होगा। इसके बाद ही इन प्रयासों के नतीजे के आधार पर आगे की रणनीति तय की जा सकेगी।

ZEE5 की ग्रोथ कितनी टिकाऊ है?

ZEE5 की subscription growth के बारे में गोयनका ने कहा कि अगर कंपनी लगातार उपभोक्ताओं की पसंद और उनकी जरूरत के मुताबिक कंटेंट देती रहेगी, तो वे अपनी subscriptions को renew करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ FIFA से जुड़ी ग्रोथ नहीं है।

उनके मुताबिक FIFA के दौरान और उसके बाद भी सब्सक्रिप्शन के नवीनीकरण का अच्छा आधार देखने को मिला है। इसी वजह से कंपनी को भरोसा है कि यह ग्रोथ टिकाऊ है और आगे भी बढ़ सकती है।

विज्ञापन कारोबार को लेकर उन्होंने कहा कि मौजूदा बाजार की स्थिति थोड़ी चुनौतीपूर्ण है। पश्चिम एशिया और युद्ध की स्थिति जैसी चीजों से अनिश्चितता पैदा हो रही है। लेकिन कंपनी की बाजार हिस्सेदारी काफी बेहतर हुई है और त्योहारों का मौसम भी आ रहा है। ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि Zee अपनी बेहतर स्थिति का फायदा उठा पाएगी।

पुनीत गोयनका ने एक और ग्रोथ के रास्ते की बात की। उन्होंने कहा कि कंपनी सब्सक्रिप्शन और डिजिटल ग्रोथ के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों को भी देख रही है, क्योंकि अब तक इन बाजारों की क्षमता का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं किया गया है।

ZEE5 के भाषा पैक से मिली मदद

ZEE5 के भाषा पैक के बारे में गोयनका ने कहा कि इनसे निश्चित तौर पर मदद मिली है। हालांकि, उन्होंने भुगतान करने वाले सब्सक्राइबर्स के भाषा के हिसाब से आंकड़े साझा करने से इनकार किया, क्योंकि यह गोपनीय और कारोबारी रूप से महत्वपूर्ण जानकारी है।

Linear TV में कीमत बढ़ाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कंपनी NTO के तहत नियमन में है। अगला NTO चक्र फरवरी 2027 के आसपास होने पर कंपनी वहां भी कीमत बढ़ाने पर विचार करेगी।

 Zee Music को लेकर क्या स्थिति है?

Zee Music के बारे में पूछे गए सवाल पर गोयनका ने कहा कि कंपनी रणनीतिक कदमों के कई विकल्पों का लगातार मूल्यांकन करती रहती है। जब कोई दूसरा पक्ष कंपनी से संपर्क करता है या Zee खुद किसी दूसरे पक्ष से संपर्क करती है, तब भी इन विकल्पों पर विचार किया जाता है। लेकिन फिलहाल ऐसा कोई फैसला नहीं है जिसके बारे में वह खुलासा कर सकें।

उन्होंने कहा कि कंपनी अतिरिक्त जानकारी के खुलासे पर भी काम कर रही है, ताकि जब इसे सार्वजनिक किया जाए तो पूरी जानकारी सभी के सामने साफ और पारदर्शी तरीके से रखी जा सके।

ZEE5 और टीवी चैनलों द्वारा Zee Music के कैटलॉग के इस्तेमाल को लेकर उन्होंने कहा कि ऐसा मुफ्त में नहीं होता। जब ZEE5 या टीवी चैनल Zee Music के कैटलॉग का इस्तेमाल करते हैं, तो उसके लिए भुगतान किया जाता है। यह भुगतान बाजार में चल रही व्यवस्था के हिसाब से होता है।

FIFA के बाद ZEE5 के सब्सक्राइबर दोगुने से ज्यादा

जब ZEE5 में B2C सब्सक्राइबर बढ़ने के बारे में पूछा गया, तो गोयनका ने बताया कि पिछली तिमाही में सब्सक्राइबर बेस दोगुने से ज्यादा हो गया। उन्होंने कहा कि इसका बड़ा हिस्सा FIFA की वजह से हो सकता है, लेकिन ऐसे ग्राहक भी हैं जो गैर-स्पोर्ट्स कंटेंट के लिए ZEE5 पर आते हैं।

B2B सौदों को लेकर उन्होंने कहा कि कंपनी B2B साझेदारों के साथ बातचीत कर रही है, लेकिन गोपनीयता की वजह से फिलहाल इसके बारे में कोई जानकारी साझा नहीं कर सकते।

उन्होंने ZEE5 पर दर्शकों को जोड़े रखने की रणनीति पर कहा कि कंपनी की टीम लगातार नया कंटेंट स्लेट तैयार कर रही है और दर्शकों की जुड़ाव बनाए रखने पर काम कर रही है।

FIFA के मुकाबले Bundesliga और Serie A को बेहतर कमाई में बदलने का भरोसा

FIFA के मार्जिन और कमाई को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में गोयनका ने कहा कि FIFA शुरू होने से सिर्फ 10 दिन पहले कंपनी के पास इसे कमाई में बदलने का मौका आया था। इसलिए विज्ञापन के मोर्चे पर इससे कमाई करने के लिए बहुत कम समय मिला।

हालांकि, सब्सक्रिप्शन के मोर्चे पर कंपनी FIFA से अच्छी कमाई करने में सफल रही। गोयनका ने कहा कि Bundesliga और Serie A के मामले में कंपनी के पास पर्याप्त समय है। इसलिए उन्हें भरोसा है कि इन खेल अधिकारों से FIFA के मुकाबले ज्यादा बेहतर तरीके से कमाई की जा सकेगी।

Preferential Allotment की मंजूरी पर क्या बोले?

शेयरधारकों से मिली Preferential Allotment की मंजूरी की वैधता के बारे में पूछे जाने पर गोयनका ने कहा कि सामान्य तौर पर ऐसी मंजूरी एक साल के लिए वैध होती है।

हालांकि, उन्होंने साथ ही कहा कि कंपनी ने नियामक और ट्रिब्यूनल का रुख किया है और मामला अदालत के विचाराधीन है। इसलिए इस समय वह इस विषय पर आगे कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं करना चाहेंगे।

विज्ञापन रेवेन्यू में सुधार की उम्मीद

विज्ञापन रेवेन्यू की आगे की स्थिति पर गोयनका ने कहा कि कंपनी आने वाले समय में इसके स्थिर होने को लेकर सावधानी के साथ सकारात्मक है।

उन्होंने इसके पीछे तीन बातें गिनाईं- कंपनी की बाजार हिस्सेदारी बेहतर हुई है, त्योहारों का मौसम आने वाला है और पश्चिम एशिया में चल रही युद्ध की स्थिति अब धीरे-धीरे सुलझती दिख रही है। उनके मुताबिक इन तीनों चीजों का आगे विज्ञापन कारोबार पर असर पड़ना चाहिए।

हालांकि, पूरे साल के EBITDA मार्जिन पर उन्होंने कोई अनुमान देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि बाजार में इस तरह की अनिश्चितता के बीच वह इस समय पूरे साल के EBITDA मार्जिन पर कोई अनुमान देने की स्थिति में नहीं हैं।

FIFA डील की कीमत बताने से इनकार

FIFA डील की कुल लागत और भुगतान की समयसीमा पर गोयनका ने कहा कि Zee के पास इसके राइट्स आठ साल के लिए हैं और भुगतान भी आठ साल में किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने राइट्स की कुल कीमत बताने से इनकार किया और इसे बेहद गोपनीय जानकारी बताया।

Zee Music के Demerger पर भी साफ किया रुख

Zee Music के Demerger के बारे में पूछे जाने पर गोयनका ने कहा कि कंपनी ने इस विकल्प पर विचार किया है। लेकिन अभी ऐसा कोई रणनीतिक कारण नहीं है, जिसकी वजह से कंपनी Music Business को अलग करे।

उन्होंने साफ कहा कि फिलहाल Zee Music के Demerger को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है। अगर भविष्य में कोई कारोबारी कदम ऐसी स्थिति पैदा करता है, तो उस समय इस पर विचार किया जा सकता है।

कुल मिलाकर, पुनीत गोयनका की पूरी बातचीत में एक तरफ Zee के TV और Digital Business को मजबूत करने पर जोर दिखा, तो दूसरी तरफ Sports Business को लेकर उनका रुख साफ रहा कि कंपनी इस क्षेत्र में आगे बढ़ेगी, लेकिन जल्दबाजी में महंगे राइट्स लेने के बजाय मुनाफे और वैल्यू बनाने को प्राथमिकता देगी। ZEE5 की Growth, बेहतर Network Share, आने वाला Festive Season और International Digital Opportunities कंपनी की आगे की रणनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं। यह पूरा निष्कर्ष भी उनके Opening Remarks और सवाल-जवाब में कही गई बातों पर ही आधारित है।

 

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श्रीनिवासन स्वामी की BARC में नियुक्ति पर फिर उठे सवाल, आदेश रावल की पोस्ट से छिड़ी नई बहस

स्वामी की नियुक्ति के बाद चर्चा इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि आर.के. स्वामी ग्रुप का हिस्सा हंसा रिसर्च पहले BARC के ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम से जुड़ा रहा है।

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Published - Friday, 14 August, 2026
Last Modified:
Friday, 14 August, 2026
Barc Ratings

‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) के बोर्ड में श्रीनिवासन के. स्वामी की नियुक्ति को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। वरिष्ठ पत्रकार आदेश रावल की सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर की गई पोस्ट के बाद इस नियुक्ति को लेकर इंडस्ट्री में चर्चा बढ़ गई है। यह मामला BARC की गवर्नेंस और उसकी विश्वसनीयता से जुड़े सवालों के बीच सामने आया है।

दरअसल, हमारी सहयोगी वेबसाइट 'एक्सचेंज4मीडिया' (e4m) ने रिपोर्ट किया था कि आर.के. स्वामी के एग्जिक्यूटिव चेयरमैन श्रीनिवासन के. स्वामी को एडवरटाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) के बोर्ड ने BARC बोर्ड में शामिल करने के लिए नामित और निर्वाचित किया है। वह शशि सिन्हा की जगह लेंगे।

स्वामी की नियुक्ति के बाद चर्चा इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि आर.के. स्वामी ग्रुप का हिस्सा हंसा रिसर्च पहले BARC के ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम से जुड़ा रहा है। हंसा रिसर्च ने मुंबई और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में BARC के ऑडियंस मेजरमेंट मीटर लगाने और उनके रखरखाव का काम किया था। यह वही दौर था, जिसके बाद 2020 में टेलीविजन रेटिंग्स को लेकर विवाद सामने आया था।

आदेश रावल की पोस्ट के बाद फिर चर्चा में मामला

आदेश रावल की पोस्ट ने इस मुद्दे को एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा में ला दिया है। इससे पहले यह मामला मुख्य रूप से विज्ञापन और ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री के बीच चर्चा में था, लेकिन अब सोशल मीडिया पर भी इस नियुक्ति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

BARC इस समय टेलीविजन ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम को लेकर भरोसा बहाल करने की कोशिशों के बीच है। वहीं, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) भी देश में रेटिंग्स के व्यापक ढांचे की समीक्षा कर रहा है। ऐसे समय में BARC बोर्ड में हुई यह नियुक्ति और उससे जुड़ी चर्चा महत्वपूर्ण हो जाती है।

एक्सचेंज4मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडस्ट्री के कुछ हिस्सों में स्वामी की नियुक्ति को लेकर संभावित हितों के टकराव की धारणा पर चिंता जताई गई है, क्योंकि वह उस ग्रुप के प्रमुख हैं जिसमें हंसा रिसर्च भी शामिल है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्वामी के खुद टेलीविजन रेटिंग्स में कथित हेरफेर में शामिल होने का कोई सुझाव नहीं है।

2020 के TRP मामले से जुड़ा है हंसा रिसर्च का नाम:  हंसा रिसर्च का नाम 2020 के टीआरपी मामले के दौरान सामने आया था, जब टेलीविजन रेटिंग्स में कथित हेरफेर के आरोपों ने पूरे उद्योग को प्रभावित किया था।

मुंबई पुलिस की चार्जशीट के अनुसार, हंसा रिसर्च की होल्डिंग कंपनी के तौर पर बताई गई हंसा विजन प्राइवेट लिमिटेड के विभिन्न टेलीविजन चैनलों के साथ व्यावसायिक हित थे, जिन्हें कथित तौर पर BARC के सामने जाहिर नहीं किया गया था। चार्जशीट में यह भी आरोप लगाया गया था कि हंसा रिसर्च ने इन हितों के बारे में BARC से जुड़ी इकाई मीटरोलॉजी डेटा लिमिटेड को जानकारी नहीं दी थी। हालांकि, इन आरोपों का विरोध किया गया था और ये हंसा रिसर्च, उसकी पैरेंट कंपनी या उसके अधिकारियों के खिलाफ दोष सिद्ध होने का निष्कर्ष नहीं हैं। हंसा ने 2021 में BARC के लिए सेवाएं देना बंद कर दिया था।

स्वामी ने उठे सवालों पर क्या कहा?: श्रीनिवासन स्वामी ने हंसा रिसर्च की भूमिका के आधार पर अपनी नियुक्ति पर सवाल उठाए जाने को खारिज किया है। AAAI के सदस्यों को भेजे ईमेल में उन्होंने कहा कि टीआरपी मामले में हंसा रिसर्च शिकायतकर्ता थी। स्वामी के मुताबिक, हंसा के एक कर्मचारी को आंतरिक गड़बड़ी का पता चला था, जिसके बाद उसने मुंबई पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई थी। उन्होंने यह भी कहा कि इसके बाद कानूनी मुश्किलों के बावजूद हंसा ने इस मामले को आगे बढ़ाया। स्वामी ने यह भी कहा कि हंसा रिसर्च ने मुंबई पुलिस की जांच को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया था और दावा किया कि अदालत ने कंपनी को किसी भी गलत काम से मुक्त कर दिया था।

BARC की विश्वसनीयता पर फिर फोकस: टेलीविजन रेटिंग्स ब्रॉडकास्टर्स, विज्ञापनदाताओं और एजेंसियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इनका असर विज्ञापन आवंटन, चैनलों के मूल्यांकन, प्रोग्रामिंग से जुड़े फैसलों और व्यावसायिक बातचीत पर पड़ता है। इसलिए रेटिंग सिस्टम की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता को लेकर उठने वाले सवालों का असर BARC के बोर्डरूम से कहीं आगे तक जा सकता है।

इंडस्ट्री में उठ रही चिंता सिर्फ इस बात को लेकर नहीं है कि स्वामी का वास्तव में कोई हितों का टकराव है या नहीं, बल्कि यह भी है कि उनकी नियुक्ति से इस तरह के टकराव की धारणा बनती है या नहीं। BARC के लिए यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसे अपने गवर्नेंस सिस्टम को लेकर इंडस्ट्री का भरोसा बनाए रखना है।

अब सवाल इस बात पर भी है कि सभी संभावित व्यावसायिक संबंधों का खुलासा किया गया है या नहीं और क्या ऐसे पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद हैं, जो किसी व्यक्ति या ग्रुप के हितों को BARC के फैसलों को प्रभावित करने से रोक सकें। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि ये व्यवस्थाएं MIB और पूरी इंडस्ट्री के भरोसे पर खरी उतरती हैं या नहीं।

रेटिंग्स की वापसी के बीच बढ़ी संवेदनशीलता: यह बहस ऐसे समय में सामने आई है, जब इंडस्ट्री टेलीविजन रेटिंग्स की वापसी और उसके भविष्य के ढांचे को लेकर ज्यादा स्पष्टता का इंतजार कर रही है। आने वाले फेस्टिव सीजन से पहले BARC की विश्वसनीयता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यह टेलीविजन विज्ञापन के लिहाज से महत्वपूर्ण दौर माना जाता है।

इंडस्ट्री को सिर्फ रेटिंग डेटा की वापसी नहीं चाहिए, बल्कि ऐसे सिस्टम पर भरोसा भी चाहिए जो स्वतंत्र, पारदर्शी और व्यावसायिक हितों के प्रभाव से सुरक्षित हो। ऐसे में श्रीनिवासन स्वामी की BARC बोर्ड में नियुक्ति और आदेश रावल की पोस्ट के बाद उठी सार्वजनिक चर्चा ने एक बार फिर BARC की गवर्नेंस और विश्वसनीयता को केंद्र में ला दिया है।

BARC के लिए फिलहाल यह एक बोर्ड नियुक्ति का मामला है, लेकिन इससे जुड़ा बड़ा सवाल यह है कि क्या टेलीविजन रेटिंग्स का पूरा सिस्टम ब्रॉडकास्टर्स, विज्ञापनदाताओं, एजेंसियों और सरकार का भरोसा दोबारा हासिल कर पाएगा और उसे बनाए रख सकेगा। 

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NDTV में शैलेश हेगड़े की एंट्री, मिली यह जिम्मेदारी

एनडीटीवी में शामिल होने से पहले हेगड़े जय महाराष्ट्र न्यूज (Jai Maharashtra News) में बिजनेस हेड के तौर पर कार्यरत थे।

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Published - Friday, 14 August, 2026
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Friday, 14 August, 2026
Shailesh Hegde

‘एनडीटीवी’ (NDTV) ने शैलेश हेगड़े को नेशनल रेवेन्यू हेड (NDTV Marathi & Government Sales) नियुक्त किया है। हेगड़े ने अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘लिंक्डइन’ (LinkedIn) पोस्ट के जरिए साझा की है।

शैलेश हेगड़े को मीडिया सेल्स के क्षेत्र में 18 साल से ज्यादा का अनुभव है। अपने करियर के दौरान उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस (The Indian Express), जी टेलीफिल्म्स (Zee Telefilms), सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन (Sony Entertainment Television), स्टार न्यूज (Star News) और एबीपी न्यूज (ABP News) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है।

एनडीटीवी में शामिल होने से पहले हेगड़े जय महाराष्ट्र न्यूज (Jai Maharashtra News) में बिजनेस हेड के तौर पर कार्यरत थे। यहां उनका कार्यकाल एक साल से भी कम रहा। इससे पहले उन्होंने एबीपी नेटवर्क के साथ एक दशक से ज्यादा समय तक काम किया है।

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ZEEL के शेयरों में 7% की तेजी : SAT से मिली बड़ी राहत

जी एंटरटेनमेंट (ZEEL) के शेयरों में शुक्रवार को करीब 7 फीसदी तेजी आई। सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) ने कंपनी को 3,143 करोड़ रुपये के वारंट इश्यू पर राहत दी है।

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Published - Friday, 14 August, 2026
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Friday, 14 August, 2026
zeel

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Zee Entertainment Enterprises Limited-ZEEL) के शेयरों में शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में करीब 7 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। यह तेजी सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (Securities Appellate Tribunal-SAT) से मिली अंतरिम राहत के बाद आई है।

SAT ने सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के 31 जुलाई के आदेश के प्रभाव पर रोक लगाते हुए ZEEL को 3,143 करोड़ रुपये के प्रस्तावित प्रेफरेंशियल वारंट इश्यू को आगे बढ़ाने की अनुमति दी है।

कंपनी यह फंड अपने प्रमोटर समूह की इकाई सनब्राइट मॉरीशस इन्वेस्टमेंट्स (Sunbright Mauritius Investments) के जरिए जुटाना चाहती है। ZEEL ने ट्रिब्यूनल को बताया था कि इश्यू पूरा करने के लिए उसके पास सीमित समय है और शेयरधारक पहले ही प्रस्ताव को मंजूरी दे चुके हैं। स्टॉक एक्सचेंज भी इसे सैद्धांतिक मंजूरी दे चुके हैं।

SAT ने ZEEL को डिविडेंड बांटने के लिए अपने म्यूचुअल फंड यूनिट्स का इस्तेमाल करने की भी अनुमति दी है। हालांकि, यह राहत एक शर्त के साथ मिली है और कंपनी को SEBI की ओर से लगाया गया जुर्माना जमा करना होगा।

क्या है पूरा विवाद?

मामला हैदराबाद की एक संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों से शुरू हुआ। SEBI का आरोप है कि कंपनी की संपत्ति के टाइटल दस्तावेज प्रमोटर से जुड़ी निजी संस्थाओं के कर्ज के लिए इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस (Indiabulls Housing Finance) के पास सुरक्षा के तौर पर दिए गए थे। SEBI के मुताबिक, इसके लिए जरूरी कॉरपोरेट मंजूरी नहीं ली गई थी।

ZEEL ने इन आरोपों से इनकार किया है। कंपनी का कहना है कि दस्तावेज बिना अनुमति लिए गए थे और कंपनी की जानकारी या मंजूरी साबित करने वाला कोई सीधा निष्कर्ष नहीं है।

SEBI के आदेश के तहत ZEEL पर दो महीने और सीईओ पुनीत गोयनका (Punit Goenka) पर एक साल का बाजार प्रतिबंध लगाया गया है। SEBI ने यह भी कहा था कि सनब्राइट मॉरीशस के जरिए वारंट जारी होने से गोयनका को अप्रत्यक्ष रूप से बाजार तक पहुंच मिल सकती है।

SAT की अंतरिम राहत से ZEEL को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। हालांकि, SEBI के साथ कंपनी का मूल कानूनी विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है। अब निवेशकों की नजर मामले के अंतिम फैसले और 3,143 करोड़ रुपये की फंड जुटाने की प्रक्रिया पर रहेगी।

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रूना अख्तर बनीं सिप्ला यूरोलॉजी की मार्केटिंग हेड

रूना अख्तर (Runa Akhtar) को सिप्ला (Cipla) में मार्केटिंग हेड–यूरोलॉजी (Marketing Head – Urology) पद पर प्रमोट किया गया है। वह 2023 में कंपनी से जुड़ी थीं।

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Published - Friday, 14 August, 2026
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Friday, 14 August, 2026
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सिप्ला (Cipla) ने रूना अख्तर (Runa Akhtar) को प्रमोट कर मार्केटिंग हेड–सिप्ला यूरोलॉजी (Marketing Head – Cipla Urology) की जिम्मेदारी दी है। रूना ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की।

रूना अख्तर 2023 में सिप्ला से ग्रुप ब्रांड मैनेजर (Group Brand Manager) के तौर पर जुड़ी थीं। अब प्रमोशन के बाद वह कंपनी के यूरोलॉजी कारोबार से जुड़े मार्केटिंग कामकाज की जिम्मेदारी संभालेंगी।

सिप्ला में शामिल होने से पहले रूना ने करीब पांच साल आईपीका लैबोरेटरीज (Ipca Laboratories) में काम किया। वहां उनकी आखिरी भूमिका सीनियर ग्रुप प्रोडक्ट मैनेजर (Senior Group Product Manager) की थी।

रूना ने अपने करियर की शुरुआत में कोये फार्मास्यूटिकल्स (Koye Pharmaceuticals), सेंच्यूर फार्मास्यूटिकल्स (Centaur Pharmaceuticals) और इंटास फार्मास्यूटिकल्स (Intas Pharmaceuticals) जैसी कंपनियों में भी काम किया है।

फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री में रूना के पास ब्रांड मैनेजमेंट, प्रोडक्ट मार्केटिंग और मार्केटिंग रणनीति का अनुभव है। नई जिम्मेदारी में वह सिप्ला के यूरोलॉजी कारोबार को आगे बढ़ाने से जुड़े मार्केटिंग प्रयासों का नेतृत्व करेंगी।

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'पैनोरमा स्डूडियोज' ने Rhea & Dia Enterprises में खरीदी 10% हिस्सेदारी, निवेश हुआ पूरा

पैनोरमा स्डूडियोज इंटरनेशनल लिमिटेड (Panorama Studios International Limited) ने Rhea & Dia Enterprises Private Limited में रणनीतिक निवेश पूरा कर लिया है।

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Published - Friday, 14 August, 2026
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Friday, 14 August, 2026
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पैनोरमा स्डूडियोज इंटरनेशनल लिमिटेड (Panorama Studios International Limited) ने Rhea & Dia Enterprises Private Limited में रणनीतिक निवेश पूरा कर लिया है। कंपनी ने 13 अगस्त 2026 को स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया कि उसने Rhea & Dia Enterprises की पूरी तरह डायल्यूटेड और पोस्ट-मनी पेड-अप इक्विटी शेयर पूंजी में 10% हिस्सेदारी हासिल कर ली है।

कंपनी के मुताबिक, यह निवेश उसके रणनीतिक कारोबारी उद्देश्यों और कमर्शियल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। इस निवेश से Rhea & Dia Enterprises में कंट्रोल में कोई बदलाव नहीं होगा। यानी पैनोरमा स्डूडियोज ने कंपनी में हिस्सेदारी तो ली है, लेकिन इसका नियंत्रण अपने हाथ में नहीं लिया है।

7 अगस्त को बोर्ड ने दी थी मंजूरी

Panorama Studios के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 7 अगस्त 2026 को इस निवेश को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। बोर्ड बैठक दोपहर 2 बजे शुरू हुई और 3:40 बजे खत्म हुई।

बैठक में निवेश प्रस्ताव पर चर्चा के बाद कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर कुमार मंगत पाठक को इससे जुड़े जरूरी समझौते और दस्तावेज तैयार करने और उन्हें अंतिम रूप देने की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्हें निवेश की शर्तों पर बातचीत करने, जरूरी डीड और एग्रीमेंट साइन करने और जरूरत के मुताबिक बदलाव करने का अधिकार भी दिया गया था।

13 अगस्त को पूरा हुआ शेयर अलॉटमेंट

अब कंपनी ने बताया है कि Rhea & Dia Enterprises के नए और पूरी तरह चुकता इक्विटी शेयरों का अलॉटमेंट पूरा हो गया है। इसी के साथ Panorama Studios की 10% हिस्सेदारी का निवेश भी पूरा हो गया।

हालांकि, कंपनी ने इस फाइलिंग में कुल निवेश राशि का खुलासा नहीं किया है। इसलिए इस सौदे में Panorama Studios ने कितनी रकम लगाई, इसकी जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

रणनीतिक साझेदारी पर फोकस

इस निवेश को एक तरह से माइनॉरिटी स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के तौर पर देखा जा सकता है। Panorama Studios ने 10% हिस्सेदारी लेकर Rhea & Dia Enterprises में अपनी मौजूदगी बनाई है, लेकिन कंपनी का नियंत्रण अपने हाथ में नहीं लिया है।

इस तरह पैनोरमा स्डूडियोज को दोनों कंपनियों के बीच संभावित कारोबारी तालमेल का फायदा उठाने का मौका मिलेगा, जबकि उसे कंपनी के संचालन की जिम्मेदारी या बहुमत हिस्सेदारी लेने की जरूरत नहीं होगी।

SEBI नियमों के तहत दी जानकारी

पैनोरमा स्डूडियोज ने यह जानकारी SEBI के Listing Obligations and Disclosure Requirements (LODR) Regulations, 2015 के Regulation 30 और Schedule III के तहत स्टॉक एक्सचेंज को दी है।

कंपनी की ओर से यह सूचना कंपनी सेक्रेटरी यतिन चाफेकर ने BSE को दी है।

कुल मिलाकर, पैनोरमा स्डूडियोज का यह कदम Rhea & Dia Enterprises में रणनीतिक हिस्सेदारी बनाने की दिशा में है। हालांकि, इस निवेश से होने वाले कारोबारी फायदे और दोनों कंपनियों के बीच संभावित सहयोग का असर आने वाले समय में सामने आएगा।

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कुणाल प्रधान बनेंगे ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ के नए एडिटर-इन-चीफ

कुणाल प्रधान एक अक्टूबर को ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ के एडिटर-इन-चीफ (एक्टिंग) के तौर पर संस्थान से जुड़ेंगे। वह नवंबर 2026 के मध्य में आर. सुकुमार के पद छोड़ने के बाद एडिटर-इन-चीफ की जिम्मेदारी संभालेंगे।

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Published - Thursday, 13 August, 2026
Last Modified:
Thursday, 13 August, 2026
Kunal Pradhan

‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) में कुणाल प्रधान की वापसी होने जा रही है। एचटी मीडिया ग्रुप ने नेतृत्व परिवर्तन की घोषणा करते हुए बताया है कि कुणाल प्रधान एक अक्टूबर 2026 को ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ के एडिटर-इन-चीफ (एक्टिंग) के तौर पर संस्थान से जुड़ेंगे। वह नवंबर 2026 के मध्य में आर. सुकुमार के पद छोड़ने के बाद एडिटर-इन-चीफ की जिम्मेदारी संभालेंगे।

कुणाल प्रधान का ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ से पुराना जुड़ाव रहा है। वह इससे पहले यहां मैनेजिंग एडिटर समेत कई वरिष्ठ संपादकीय जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। करीब तीन दशक के अपने करियर में उन्होंने इंडिया टुडे, द इंडियन एक्सप्रेस, मुंबई मिरर और रॉयटर्स जैसे प्रमुख समाचार संगठनों के साथ काम किया है।

‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ में वापसी पर कुणाल प्रधान ने कहा, “हिन्दुस्तान टाइम्स एक ऐसा न्यूजरूम है, जिसे मैं अच्छी तरह जानता हूं और यह एक ऐसा संस्थान है, जिसकी मुझे गहरी परवाह है। इसलिए इसके अगले एडिटर-इन-चीफ के तौर पर लौटना मेरे लिए सम्मान और जिम्मेदारी दोनों है। सुकुमार और मैंने कई वर्षों तक साथ काम किया है और उनके विजन, स्पष्टता और उन्होंने जो कुछ बनाया है, उसके लिए मेरे मन में बहुत सम्मान है। मैं टीम के साथ काम करते हुए उस नींव को और मजबूत करने और एचटी की पत्रकारिता को विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर और अधिक पाठकों तक पहुंचाने के लिए उत्साहित हूं।”

कुणाल प्रधान के एडिटर-इन-चीफ बनने के साथ आर. सुकुमार एचटी मीडिया से विदा होंगे। सुकुमार इस साल होने वाले हिन्दुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट के बाद नवंबर 2026 के मध्य में एडिटर-इन-चीफ के पद से हटेंगे।

आर. सुकुमार पिछले दो दशकों से एचटी मीडिया से जुड़े रहे हैं। वह ‘मिंट’ के संस्थापक संपादकों में शामिल रहे और बाद में ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ के एडिटर-इन-चीफ बने। एचटी मीडिया के मुताबिक, उन्होंने समूह की पत्रकारिता को मजबूत करने और मीडिया इंडस्ट्री में आए महत्वपूर्ण बदलावों के दौर में न्यूजरूम का मार्गदर्शन करने में अहम भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ ने विश्वसनीय और स्वतंत्र पत्रकारिता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बनाए रखते हुए पाठकों के खबरों को खोजने और पढ़ने के बदलते तरीकों के अनुरूप खुद को ढाला।

अपने फैसले पर आर. सुकुमार ने कहा, “एचटी मीडिया लिमिटेड उन चुनिंदा मीडिया कंपनियों में से एक है, जो आज भी अपनी पत्रकारिता की गहराई से परवाह करती है। पिछले दो दशकों में कंपनी के दो प्रमुख प्रकाशनों- ‘मिंट’ और ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ का संपादन करना मेरे लिए सम्मान और सौभाग्य की बात रही है। संपादक उन टीमों का सिर्फ दिखाई देने वाला चेहरा होते हैं, जो न्यूजरूम चलाती हैं। ‘मिंट’ और ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ दोनों में मुझे असाधारण प्रतिभाशाली टीमों का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला। मुझे खुशी है कि एचटी में मेरे अधिकांश कार्यकाल के दौरान मेरे साथ काम करने वाले कुणाल प्रधान न्यूजरूम की कमान संभालने के लिए वापस लौट रहे हैं।”

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‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ से आर. सुकुमार जल्द लेंगे विदाई, कुणाल प्रधान संभालेंगे कमान

20 साल से एचटी मीडिया से जुड़े आर. सुकुमार नवंबर में छोड़ेंगे पद, 1 अक्टूबर से कुणाल प्रधान संभालेंगे एडिटर-इन-चीफ (एक्टिंग) की जिम्मेदारी

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Published - Thursday, 13 August, 2026
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Thursday, 13 August, 2026
S Kumar

देश के बड़े मीडिया नेटवर्क्स में शुमार ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) के एडिटर-इन-चीफ आर. सुकुमार ने एचटी मीडिया को अलविदा कहने का फैसला किया है। वह इस साल होने वाले हिन्दुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट के बाद नवंबर 2026 के मध्य में एडिटर-इन-चीफ के पद से हटेंगे।

एचटी मीडिया ग्रुप ने नेतृत्व में बदलाव की घोषणा करते हुए बताया है कि कुणाल प्रधान एक अक्टूबर 2026 को ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ के एडिटर-इन-चीफ (एक्टिंग) के तौर पर संस्थान से जुड़ेंगे। नवंबर 2026 के मध्य में आर. सुकुमार के पद छोड़ने के बाद कुणाल प्रधान एडिटर-इन-चीफ की जिम्मेदारी संभालेंगे।

आर. सुकुमार पिछले दो दशकों से एचटी मीडिया से जुड़े हुए हैं। वह ‘मिंट’ के संस्थापक संपादकों में शामिल रहे और बाद में ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ के एडिटर-इन-चीफ बने। एचटी मीडिया के मुताबिक, उन्होंने समूह की पत्रकारिता को मजबूत करने और मीडिया इंडस्ट्री में आए महत्वपूर्ण बदलावों के दौर में न्यूजरूम का मार्गदर्शन करने में अहम भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ ने विश्वसनीय और स्वतंत्र पत्रकारिता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बनाए रखते हुए पाठकों के खबरों को खोजने और पढ़ने के बदलते तरीकों के अनुरूप खुद को ढाला।

अपने फैसले पर आर. सुकुमार ने कहा, 'एचटी मीडिया लिमिटेड उन चुनिंदा मीडिया कंपनियों में से एक है, जो आज भी अपनी पत्रकारिता की गहराई से परवाह करती है। पिछले दो दशकों में कंपनी के दो प्रमुख प्रकाशनों- ‘मिंट’ और ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ का संपादन करना मेरे लिए सम्मान और सौभाग्य की बात रही है। संपादक उन टीमों का सिर्फ दिखाई देने वाला चेहरा होते हैं, जो न्यूजरूम चलाती हैं। ‘मिंट’ और ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ दोनों में मुझे असाधारण प्रतिभाशाली टीमों का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला। मुझे खुशी है कि एचटी में मेरे अधिकांश कार्यकाल के दौरान मेरे साथ काम करने वाले कुणाल प्रधान न्यूजरूम की कमान संभालने के लिए वापस लौट रहे हैं।'

कुणाल प्रधान की ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ में वापसी हो रही है। वह इससे पहले यहां मैनेजिंग एडिटर समेत कई वरिष्ठ संपादकीय जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। करीब तीन दशक के करियर में उन्होंने इंडिया टुडे, द इंडियन एक्सप्रेस, मुंबई मिरर और रॉयटर्स जैसे प्रमुख समाचार संगठनों के साथ काम किया है।

‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ में वापसी पर कुणाल प्रधान ने कहा, 'हिन्दुस्तान टाइम्स एक ऐसा न्यूजरूम है, जिसे मैं अच्छी तरह जानता हूं और यह एक ऐसा संस्थान है, जिसकी मुझे गहरी परवाह है। इसलिए इसके अगले एडिटर-इन-चीफ के तौर पर लौटना मेरे लिए सम्मान और जिम्मेदारी दोनों है। सुकुमार और मैंने कई वर्षों तक साथ काम किया है और उनके विजन, स्पष्टता और उन्होंने जो बनाया है, उसके लिए मेरे मन में बहुत सम्मान है। मैं टीम के साथ काम करते हुए उस नींव को और मजबूत करने और एचटी की पत्रकारिता को विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर और अधिक पाठकों तक पहुंचाने के लिए उत्साहित हूं।'

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