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देश के चीफ जस्टिस बोले, ‘आप टीवी पर डिबेट शो में जाते ही क्यों हैं?
मर्यादाओं की तिलांजलि का ऐसा ही एक मामला सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंचा हुआ है
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
डिबेट शो आजकल न्यूज़ चैनलों पर आने वाले कार्यक्रमों में सबसे ख़ास माने जाते हैं। ख़ास इस लिहाज से की इनकी टीआरपी अन्य प्रोग्रामों के मुकाबले अच्छी रहती है। चैनल चाहे छोटा हो या बड़ा डिबेट शो उसका अभिन्न अंग है, लेकिन पिछले कुछ समय से यह अंग सड़ा-गला नज़र आने लगा है। हालांकि, इसकी वजह न्यूज़ चैनल नहीं बल्कि शो में शिरकत करने वाले अधिकांश अतिथि हैं। पहले बहस में शाब्दिक गहमागहमी होती थी, लेकिन अब मर्यादाओं के सारे बंधन तोड़ दिए गए हैं। कभी कोई एंकर नेता पर हाथ उठा देता है, तो कभी नेता ही आपस में उलझ पड़ते हैं।
मर्यादाओं की तिलांजलि का ऐसा ही एक मामला सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंचा हुआ है। यह मामला करीब सात साल पुराना है और स्मृति ईरानी एवं कांग्रेस नेता संजय निरुपम से जुड़ा हुआ है। शीर्ष अदालत ने निरुपम की याचिका पर ईरानी को नोटिस भेजा है। स्मृति ईरानी द्वारा दर्ज कराये गए केस के आधार पर पटियाला हाउस कोर्ट ने संजय निरुपम को समन भेजा था, जिसे रद्द करवाने वो हाईकोर्ट पहुंचे लेकिन राहत न मिलने पर अब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
पूरे मामले को लेकर सर्वोच्च अदालत का रुख क्या होगा, ये तो आने वाले वक़्त में ही पता चलेगा, लेकिन चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया ने इसे लेकर जो टिप्पणी की है, उस पर वाकई नेताओं को विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा है ‘आप टीवी डिबेट में जाते ही क्यों हैं, जब लड़ाई के बाद कोर्ट जाना पड़ता है’।
‘न्यूज़24’ के विशेष संवाददाता प्रभाकर मिश्रा ने अपने ट्वीट में चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया की टिप्पणी का उल्लेख किया है। मिश्रा ने अपने ट्वीट में बताया कि ‘स्मृति ईरानी ने निरुपम के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है जिसपर कोर्ट ने सम्मन जारी किया है। HC ने सम्मन रद्द करने से मना कर दिया था उसके बाद निरूपम ने SC का दरवाजा खटखटाया है। #CJI की टिप्पणी - आप टीवी डिबेट में जाते ही क्यों हैं, जब लड़ाई के बाद कोर्ट जाना पड़ता है’।
स्मृति ईरानी ने निरुपम के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है जिसपर कोर्ट ने सम्मन जारी किया है। HC ने सम्मन रद्द करने से मना कर दिया था उसके बाद निरूपम ने SC का दरवाजा खटखटाया है। #CJI की टिप्पणी - आप टीवी डिबेट में जाते ही क्यों हैं, जब लड़ाई के बाद कोर्ट जाना पड़ता है।
— Prabhakar Mishra (@PMishra_Journo) April 22, 2019
आपको बता दें कि पिछले साल दिसंबर में दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को राहत देते हुए संजय निरुपम द्वारा उन पर दर्ज कराए गए मानहानि के केस को खत्म कर दिया था। कोर्ट ने माना था कि निरुपम ने लाइव टीवी डिबेट के दौरान जिस तरह से स्मृति ईरानी पर व्यक्तिगत हमले करते हुए अपशब्दों का इस्तेमाल किया उससे उनके ऊपर मानहानि का केस बनता है। अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कराने के लिए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जी लगाई थी जिस पर हाईकोर्ट ने फैसला स्मृति ईरानी के पक्ष में सुनाया। इससे पहले हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को समझौता करने का मौका दिया था लेकिन इसके लिए ना तो स्मृति ईरानी तैयार थीं और ना ही संजय निरुपम। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।
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