ये बने भारत सरकार के नए मुख्य प्रवक्ता

नई भूमिका के साथ भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) के महानिदेशक का अतिरिक्त कार्यभार भी संभालते रहेंगे

Last Modified:
Friday, 04 October, 2019
PIB

‘भारतीय सूचना सेवा’ (आईआईएस) के अधिकारी कुलदीप सिंह धतवालिया को भारत सरकार का नया मुख्य प्रवक्ता नियुक्त किया गया है। केंद्र सरकार ने उन्हें ‘प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो’ (पीआईबी) के नये प्रमुख महानिदेशक (डीजी) के पद पर नियुक्त किया है। वे सूचना-प्रसारण मंत्रालय में महानिदेशक (डीजी) प्रशिक्षण और अनुसंधान के रूप में कार्यरत थे। धतवालिया मौजूदा प्रमुख महानिदेशक सितांशु कार की जगह लेंगे। इसके अलावा वह प्रतिष्ठित ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) के महानिदेशक पद का अतिरिक्त कार्यभार भी संभालते रहेंगे।

बता दें कि भारतीय सूचना सेवा (आईआईएस) के 1984 बैच के अधिकारी धतवालिया फिलहाल सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में प्रधान महानिदेशक (अनुसंधान और प्रशिक्षण) के पद पर कार्यरत थे। इससे पहले वह गृह मंत्रालय में महानिदेशक (मीडिया और संचार) के पद पर भी रह चुके हैं।

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इस बड़े पद पर UNI से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार अजय कौल

कौल दो दशक से ज्यादा समय से प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया से जुड़े रहे हैं।

Last Modified:
Wednesday, 23 June, 2021
Ajay Kaul

देश की जानी-मानी न्यूज एजेंसी ‘यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया’ (UNI) ने वरिष्ठ पत्रकार अजय कौल को एडिटर-इन-चीफ के पद पर नियुक्त किया है। इससे पहले वह एपीएन न्यूज चैनल में एग्जिक्यूटिव मैनेजिंग एडिटर के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

कौल दो दशक से ज्यादा समय से ‘प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया’ (पीटीआई) से जुड़े रहे हैं। वह पीटीआई के रेजिडेंट एडिटर रह चुके हैं। बाद में उन्होंने ‘इंडो एशियन न्यूज सर्विस’ (IANS)  न्यूज एजेंसी जॉइन कर ली थी, लेकिन यहां उन्होंने सिर्फ नौ महीने की संक्षिप्त पारी खेली और इसके बाद एपीएन न्यूज में आ गए थे। 

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आउटलुक समूह से जुड़े आशीष झा, मिली यह बड़ी जिम्मेदारी

डेढ़ दशक से ज्यादा के अपने करियर में आशीष प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में अपनी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

Last Modified:
Wednesday, 23 June, 2021
Outlook Group

‘आउटलुक’ (Outlook) ग्रुप से आ रही एक बड़ी खबर के मुताबिक कंपनी ने आशीष झा को आउटलुक ट्रैवलर (Outlook Traveller) का एडिटर नियुक्त किया है।  

डेढ़ दशक से ज्यादा के अपने करियर में आशीष प्रिंट, ब्रॉडकास्ट और न्यू मीडिया जर्नलिज्म में अपनी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उन्हें मीडिया इंडस्ट्री और ऑडियंस की गहरी समझ है। पूर्व में वह ‘ऑटोएक्स‘ (AutoX) और ‘एनडीटीवी कंवर्जेंस‘ (NDTV Convergence) में प्रमुख जिम्मेदारी निभा चुके हैं और विशेष प्रोजेक्ट पर ‘नेशनल जियोग्राफिक ट्रैवलर इंडिया‘ में सहयोग कर चुके हैं। वह मीडिया एजेंसीज Ideate Labs और Publicis Groupe के अलावा ग्लोबल टीवी न्यूज चैनल विऑन (WION) में भी अपनी भूमिका निभा चुके हैं।

‘आउटलुक ग्रुप‘ के सीईओ इंद्रनील रॉय (Indranil Roy) का कहना है, ‘विकास के अगले चरण में जाना काफी अच्छा है। उम्मीद है कि अपने नेतृत्व में आशीष ‘आउटलुक ट्रैवलर‘ को एक नई यात्रा पर ले जाएंगे।‘

वहीं, ‘आउटलुक ट्रैवलर‘ की पब्लिशर मीनाक्षी मेहता का कहना है, ‘न्यूज और मीडिया इंडस्ट्री के लिए पिछले कुछ साल काफी मुश्किल भरे रहे हैं। आशीष के साथ मिलकर हमने आउटलुक ट्रैवलर के बारे में नई सोच तैयार की है और इसके द्वारा हम इसे प्रिंट, डिजिटल और स्पेशल प्रोजेक्ट में काफी आगे ले जाएंगे। आशीष झा को बोर्ड में शामिल करना और नए दृष्टिकोण के साथ ब्रैंड को आगे बढ़ाना बहुत अच्छा है।‘

इस बारे में ‘आउटलुक ट्रैवलर‘ के एडिटर आशीष झा का कहना है, ‘आउटलुक ट्रैवलर जैसे प्रतिष्ठित ब्रैंड के साथ काम करने का अवसर मिलना काफी बड़ी बात है। मैं सभी विभागों के लोगों के साथ काम करने के लिए उत्सुक हूं और उम्मीद करता हूं कि सामूहिक रूप से इस प्रतिष्ठित मीडिया ब्रैंड को और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाऊंगा।‘

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जी न्यूज के पूर्व पत्रकार आनंद दुबे को यूपी बीजेपी की मीडिया टीम में मिली जगह

भारतीय जनता पार्टी ने यूपी विधानसभा चुनाव में विजय हासिल करने के लिए अपनी विशेष रणनीति बनाकर उस पर अमल करना शुरू कर दिया है।

Last Modified:
Wednesday, 23 June, 2021
abhaydubey454.jpg

भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में विजय हासिल करने के लिए अपनी विशेष रणनीति बनाकर उस पर अमल करना शुरू कर दिया है। लंबे विचार-विमर्श के बाद पार्टी ने रविवार को नई मीडिया टीम का भी ऐलान कर दिया गया है। बीजेपी मीडिया टीम की कमान फिर से मनीश दीक्षित को सौंपी गई है। प्रदेश भाजपा की नवगठित मीडिया टीम की पहली बैठक बुधवार को हुई।

वहीं इसके अलावा मनीष दीक्षित को प्रदेश मीडिया प्रभारी तथा हिमांशु दुबे, धर्मेंद्र राय, प्रियंक पांडेय, व अभय सिंह को प्रदेश सह मीडिया प्रभारी बनाया है। वही प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने 15 प्रदेश प्रवक्ता की घोषणा की है, जिसमें मऊ जनपद के निवासी व जी न्यूज के पूर्व पत्रकार आनंद दुबे का नाम भी शामिल है। आनंद दुबे ‘जी न्यूज’ में पांच वर्षों तक रहे। उन्होंने जुलाई, 2014 में जी न्यूज जॉइन किया था। वे यहां सीनियर प्रड्यूसर थे। इसके पहले वे पी7 न्यूज चैनल में दो साल तक रहे।

इसके अतिरिक्त आनंद दुबे ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। वे ‘इंडिया टीवी’, ‘सहारा समय’, ‘नवभारत टाइम्स’ और ‘अमर उजाला’ में काम कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ और ‘हिन्दुस्तान’ फ्रीलांसर के तौर पर योगादन दिया है।

वहीं, इस सूची में अन्य प्रवेश प्रवक्ताओं में हरीश चंद्र श्रीवास्तव, समीर सिंह, मनीष शुक्ला, हीरो बाजपेई, आलोक अवस्थी, अशोक पाण्डेय, जुगल किशोर, अनिला सिंह, राकेश त्रिपाठी, प्रशांत वशिष्ठ, संजय चौधरी, साक्षी दिवाकर, आलोक वर्मा और महामेघा नागर का नाम शामिल है।

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इस मामले में पत्रकार राणा अय्यूब को मिली ट्रांजिट अग्रिम जमानत

बॉम्बे हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद पुलिस द्वारा दर्ज एक प्राथमिकी के सिलसिले में सोमवार को पत्रकार राणा अय्यूब को चार सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दे दी।

Last Modified:
Wednesday, 23 June, 2021
ranaja754

बॉम्बे हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद पुलिस द्वारा दर्ज एक प्राथमिकी के सिलसिले में सोमवार को पत्रकार राणा अय्यूब को चार सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दे दी।

अदालत ने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता द्वारा अदालत के सामने प्रोटेक्शन मांगी गई है, क्योंकि इस मामले की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है और संबंधित कोर्ट इस मामले में अपना फैसला सुनाएगी। हालांकि, याचिकाकर्ता द्वारा दाखिल अपील के आधार पर चार हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी जा रही है।

गाजियाबाद पुलिस ने इस मामले में राणा अय्यूब के अलावा अन्य कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस ने ट्विटर, ट्विटर इंडिया पर भी केस दर्ज किया था। बुजुर्ग मारपीट मामले में सभी पर फर्जी वीडियो ट्वीट करने और माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया था, जिसके आधार पर पुलिस ने केस दर्ज किया था। इस वीडियो में एक बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्ति ने दावा किया था उसे पीटा गया और उनसे ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने के लिए कहा गया। पुलिस ने अपनी प्राथमिकी में दावा किया कि वीडियो सांप्रदायिक अशांति पैदा करने के लिए प्रसारित किया गया था।

उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद के लोनी बॉर्डर पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 153 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना), 153ए (धर्म, वर्ग आदि के आधार पर समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295 ए (किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वास का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य करना), 120बी (आपराधिक साजिश) और अन्य के प्राथमिकी दर्ज की गई है।

अय्यूब के वकील मिहिर देसाई ने सोमवार को न्यायमूर्ति पी.डी. नाइक की एकल पीठ को बताया कि आवेदक एक पत्रकार है जिसने अपने ट्विटर हैंडल से वीडियो को केवल ‘फॉरवर्ड’ किया था। देसाई ने कहा, ‘जब 16 जून को उन्हें पता चला कि वीडियो की सामग्री सही नहीं है, तो उन्होंने उसे हटा दिया।’

उन्होंने कहा कि जिन अपराधों के तहत अय्यूब पर मामला दर्ज किया गया है, उन सभी में केवल तीन साल तक की जेल की सजा हो सकती हैं और इसलिए, उन्हें राहत पाने के लिए उत्तर प्रदेश में संबंधित अदालत से संपर्क करने का समय दिया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति नाइक ने कहा कि बाद में पुलिस जांच में पता चला कि कथित तौर पर उसे पीटने और ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने के लिए मजबूर करने का दावा करने वाले व्यक्ति का उन लोगों के साथ कुछ विवाद था जिन्होंने उसे किसी अन्य लेनदेन के मामले को लेकर पीटा था।

न्यायमूर्ति नाइक ने कहा, ‘इस अवधि में आवेदक की गिरफ्तारी की स्थिति में उसे 25,000 रुपए के निजी मुचलके पर रिहा किया जाएगा।’ साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि आवेदक को प्रदान की गई, इस अवधि को बढ़ाया नहीं जाएगा।

अय्यूब के अलावा पुलिस ने ट्विटर इंक, ट्विटर कम्युनिकेशंस इंडिया, समाचार वेबसाइट ‘द वायर’, पत्रकारों मोहम्मद जुबैर, कांग्रेस नेताओं सलमान निजामी, मश्कूर उस्मानी, शमा मोहम्मद और लेखिका सबा नकवी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।

गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर 14 जून को सामने आए वीडियो क्लिप में बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्ति अब्दुल समद सैफी ने आरोप लगाया था कि कुछ युवकों ने उसकी पिटाई की और उनसे ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने के लिए कहा।

हालांकि, गाजियाबाद पुलिस ने इस घटना में किसी भी तरह के सांपद्रायिक होने से इनकार किया और कहा कि आरोपी व्यक्ति उस ‘ताबीज’ को लेकर नाखुश थे जो पीड़ित वृद्ध ने उन्हें बेचा था।

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टीवी जर्नलिस्ट निदा अहमद ने इंडिया न्यूज को कहा अलविदा

टीवी पत्रकार निदा अहमद ने हिंदी न्यूज चैनल ‘इंडिया न्यूज’ (India News) को अलविदा कह दिया है।

Last Modified:
Wednesday, 23 June, 2021
Nida Ahmad

टीवी पत्रकार निदा अहमद ने हिंदी न्यूज चैनल ‘इंडिया न्यूज’ (India News) को अलविदा कह दिया है। इस बात की जानकारी उन्होंने खुद एक फेसबुक पोस्ट के जरिये दी है। निदा अहमद ने करीब तीन महीने पहले ही इस चैनल के साथ अपनी नई पारी शुरू की थी। यहां पर वह एंकर कम प्रड्यूसर की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। हालांकि, उन्होंने अपना नया सफर किस चैनल के साथ शुरू किया है, यह फिलहाल पता नहीं चल पाया है।   

‘इंडिया न्यूज’ में अपनी पारी शुरू करने से पहले निदा अहमद ‘जी यूपी-उत्तराखंड’ में एंकर कम प्रड्यूसर की जिम्मेदारी निभा रही थीं। यहां वह करीब छह महीने तक कार्यरत रहीं। वहीं, ‘जी यूपी-उत्तराखंड’ में शामिल होने से पहले निदा अहमद अक्टूबर 2018 से ‘तेज’ न्यूज चैनल की टीम हिस्सा थीं। यूपी-उत्तराखंड के रीजनल न्यूज चैनल ‘समाचार प्लस’ से वह यहां पहुंची थीं। ‘तेज’ में वह सीनियर एसोसिएट प्रड्यूसर के साथ-साथ एंकरिंग की भी जिम्मेदारी संभाल रहीं थीं। ‘समाचार प्लस’ में उन्होंने बतौर एंकर करीब दो साल काम किया।

निदा अहमद ने अपने करियर की शुरुआत क्राइम रिपोर्टर के रूप में की। 'तेज', 'समाचार प्लस', ' जी यूपी-उत्तराखंड ' और 'इंडिया न्यूज' के अतिरिक्त निदा 'ईटीवी नेटवर्क' और 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' में भी काम कर चुकी हैं। निदा ने 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' से अपने करियर की शुरुआत बतौर असिसटेंट प्रड्यूसर की थी, जहां से ही उन्होंने एंकरिंग की बारीकियों को सीखा और क्राइम रिपोर्टर की भूमिका निभाई।

सामाजिक सेवा में भी निदा का ​​योगदान हमेशा सराहनीय रहा है। गरीब बच्चों की मदद के लिए निदा को स्वर्ण पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है। निदा अहमद को मीडिया इंडस्ट्री में भी काफी पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।  

निदा अहमद द्वारा इंडिया न्यूज से अपने इस्तीफे के बारे में की गई फेसबुक पोस्ट आप यहां देख सकते हैं।

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टीआरपी मामले में CBI ने दर्ज किए BARC के अधिकारियों के बयान: रिपोर्ट

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसी ने प्रवर्तन निदेशालय से इस मामले में की गई जांच का ब्योरा भी मांगा है।

Last Modified:
Tuesday, 22 June, 2021
TRP

कथित फर्जी टीआरपी घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) इंडिया के कुछ अधिकारियों के बयान दर्ज किए हैं। एक प्रमुख मीडिया पोर्टल के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसी ने प्रवर्तन निदेशालय से इस मामले में की गई जांच का ब्योरा भी मांगा है।

बता दें कि टीआरपी में कथित हेरफेर के मामले में सीबीआई जांच चल रही है। टीआरपी किसी टीवी चैनल या कार्यक्रम की लोकप्रियता की जानकारी देने का माध्यीम है। टीआरपी के जरिये ही एडवर्टाइजर्स को व्युअर्स के पैटर्न को समझने में आसानी होती है और टीवी चैनल्स के कार्यक्रमों को विज्ञापन मिलता है।
 

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इस मीडिया कंपनी के साथ संभावित विलय की खबरों को ZEE एंटरटेनमेंट ने सिरे से किया खारिज

देश के बड़े मीडिया समूहों में शुमार ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ ने ’वायकॉम18’ के साथ संभावित विलय की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है।

Last Modified:
Monday, 21 June, 2021
Zee

देश के बड़े मीडिया समूहों में शुमार ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEE ENTERTAINMENT ENTERPRISES LTD) ने ’वायकॉम18’ (Viacom18) के साथ संभावित विलय की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। बता दें कि एक बड़े बिजनेस अखबार ने खबर दी थी कि ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ और ’वायकॉम18’ संभावित विलय के लिए शुरुआती बातचीत के दौर में हैं और यह मिलकर एक बड़ी मीडिया फर्म बना सकते हैं।  

इस बारे में नियामक संस्था को दी गई जानकारी (Regulatory filing) में ’ZEEL’ का कहना है, ’ZEEL’ और ’वायकॉम18’ के संभावित विलय की खबर के बारे में हमारा कहना है कि इस तरह की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है।’

अखबार की रिपोर्ट में सूत्र के हवाले से जानकारी दी गई थी कि यह विलय शेयर हस्तांतरण (शेयर स्वैप सौदे) के जरिये किया जाएगा और इसमें नकद लेन-देन की संभावना नहीं है। इसके साथ ही यह भी कहा गया था कि विलय के बाद संयुक्त इकाई में वायकॉम18 के प्रमोटर्स की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी हो सकती है, क्योंकि ZEEL के 65 प्रतिशत से ज्यादा शेयर का स्वामित्व विदेशी संस्थागत निवेशकों के पास है।

सूत्र का यह भी कहना था कि यह डील तभी परवान चढ़ेगी, जब ZEEL के शेयर की कीमत वर्तमान से 15 से 20 प्रतिशत नीचे आ जाएगी। बता दें कि वायकॉम18 जॉइंटवेंचर में रिलांयस और वायकॉम की 51:49 हिस्सेदारी है जबकि ZEEL का अधिकांश स्वामित्व विदेशी संस्थागत निवेशकों के पास है।

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प्रेस काउंसिल ने अखबार को भेजा कारण बताओ नोटिस, मांगा जवाब

बीएमएसआईसीएल, पटना के मैनेजिंग डॉयरेक्टर के प्रदीप कुमार की शिकायत पर जारी किया गया है नोटिस

Last Modified:
Monday, 21 June, 2021
PCI

कोरोना काल में बिहार सरकार और स्वास्थ्य विभाग के संबंध में गलत खबर छापने के आरोप में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने बुधवार को दैनिक अखबार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ‘बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम’(बीएमएसआईसीएल), पटना के मैनेजिंग डॉयरेक्टर के प्रदीप कुमार की शिकायत पर पटना से प्रकाशित होने वाले दैनिक अखबार के एडिटर के खिलाफ नोटिस जारी किया गया है।

इसके साथ ही 14 दिनों के अंदर इस नोटिसस का जवाब देने के लिए कहा गया है कि आखिर क्यों काउंसिल उनके खिलाफ कार्रवाई ना करे। बताया जाता है कि रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद प्रेस काउंसिल की जांच समिति अपने स्तर से मामले को देखेगी और उसी के अनुसार फैसला लेगी।

प्रदीप कुमार की ओर से प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि बुधवार को एक दैनिक अखबार में गलत, तथ्यहीन और भ्रामक खबर छापी गई है। खबर में दी गई जानकारी कि बिहार स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना काल में ब्लैक लिस्टेड कंपनी से आरटीपीसीआर जांच वैन भाड़े पर ली, सच्चाई से एकदम दूर है।

पत्र में कहा गया कि विभाग द्वारा जानकारी देने के बावजूद खबर छापने से पहले तथ्यों की सही से जांच नहीं की गई है। ऐसी खबर की वजह से न सिर्फ सरकार और विभाग की क्षवि धूमिल हुई, बल्कि बीते दो महीने से जो स्वास्थ्यकर्मी लगातार काम कर रहे हैं, उनका मनोबल भी घटा है। ऐसे में मामले की जांच कर दैनिक अखबार के खिलाफ कार्रवाई की जाए।.

दरअसल, बुधवार को पटना से छपने वाले एक दैनिक अखबार में ये खबर छपी थी कि बिहार स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना काल में आरटीपीसीआर जांच के लिए 29 करोड़ में ब्लैकलिस्टेड कंपनी से पांच वैन तीन महीने के लिए किराए पर ली। वहीं, ये सवाल भी किया कि एक दागी कंपनी से इतनी ऊंची कीमत पर सरकार ने सौदा क्यों किया? इसी खबर को गलत ठहराते हुए के प्रदीप कुमार की ओर से पीसीआई को पत्र लिखा गया है।

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न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के इस संगठन का NBF में हुआ विलय

न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन के गवर्निंग बोर्ड की बैठक में इस निर्णय की पुष्टि की गई है।

Last Modified:
Saturday, 19 June, 2021
NBF

न्यूज इंडस्ट्री से जुड़े मुद्दे सुलझाने और न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के हितों की रक्षा के लिए गठित ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन’ (News Broadcasters Federation)  में ‘एसोसिएशन ऑफ रीजनल टीवी ब्रॉडकास्टर्स ऑफ इंडिया’ (ARTBI) का विलय हो गया है।

फेडरेशन की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, एनबीएफ के गवर्निंग बोर्ड की बैठक में इस निर्णय की पुष्टि की गई है। इस निर्णय को काफी महत्वपूर्ण बताते हुए फेडरेशन का कहना है कि इससे क्षेत्रीय समाचार चैनल्स और उनके डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को नियामकीय जरूरतों (regulatory requirements) को समझने और उनका पालन करने में मदद मिलेगी।

‘एनबीएफ’ का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य बड़े पैमाने पर लोकहित में फेडरेशन को 'अधिक लोकतांत्रिक, विविध और भावनात्मक रूप से एकजुट' कर न्यूज ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री को और मजबूत करना है।

इस बारे में ‘एनबीएफ’ के प्रेजिडेंट अरनब गोस्वामी का कहना है, ‘एआरटीबीआई के विलय के बाद एनबीएफ निर्विवाद रूप से देशभर में ब्रॉडकास्टर्स की सबसे बड़ी इकाई बन गई है, जो मौजूद अन्य ब्रॉडकास्टर्स संगठनों से दोगुनी से ज्यादा बड़ी है। इस उपलब्धि के बाद एनबीएफ नए न्यूज स्टैंडर्ड्स के साथ ही उच्चतम सेल्फ रेगुलेशन और एडिटोरियल स्टैंडर्ड्स स्थापित करेगी।‘

‘एआरटीबीआई‘ के फाउंडर कार्तिकेय शर्मा ने इस कदम को लेकर खुशी जताई है। एनबीएफ की ओर से जारी बयान में कार्तिकेय शर्मा के हवाले से कहा गया है, ‘हम देश के पहले मान्यता प्राप्त ‘एसोसिएशन ऑफ रीजनल टेलिविजन ब्रॉडकास्टर्स ऑफ इंडिया’ के ‘एनबीएफ’ के साथ विलय से खुश हैं। समय की मांग को देखते हुए हमने एआरटीबीआई और एनबीएफ को मिलाकर सबसे बड़ा निकाय बनाया है और इस तरह हम इसके सभी स्टेकहोल्डर्स के लिए और बेहतर कर सकते हैं।‘

वहीं, इसके संयोजक राकेश शर्मा का कहना है, ‘एआरटीबीआई पिछले एक दशक से अधिक समय से राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर क्षेत्रीय चैनल्स के मुद्दों के समाधान के लिए सरकार और अन्य एजेंसियों के साथ काम कर रहा है।’

इसके साथ ही उनका यह भी कहना है, ‘इस अवधि के दौरान प्रसारण उद्योग विकसित हुआ है। क्षेत्रीय और राष्ट्रीय ब्रॉडकास्टर्स के मुद्दे लगभग समान हैं। प्रसारण उद्योग को और मजबूत व प्रभावी बनाने के लिए ARTBI का NBF के साथ विलय करने का निर्णय लिया गया है। मुझे विश्वास है कि यह पहल क्षेत्रीय चैनलों के उद्देश्य को मजबूती प्रदान करेगी।’

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हैप्पी बर्थडे सुधीर चौधरी: ऐसे ही नहीं बनाई आपने लोगों के दिलों में जगह

'जी न्यूज' के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी आज मीडिया जगत में किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। वह एक ऐसे इंसान हैं, जिन्होंने टीवी पत्रकारिता में हमेशा नए प्रयोग किए हैं और सफल भी हुए हैं।

Last Modified:
Friday, 18 June, 2021
Sudhir Chaudhary

'जी न्यूज' के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी आज मीडिया जगत में किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। वह एक ऐसे इंसान हैं, जिन्होंने टीवी पत्रकारिता में हमेशा नए प्रयोग किए हैं और सफल भी हुए हैं। आज उनके लिए बेहद खास दिन है, क्योंकि आज उनका जन्मदिन है।

दरअसल, फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर एंकरिंग तक ऐसा कोई काम नहीं है जो सुधीर चौधरी ने नहीं किया है। वर्तमान समय में ‘जी न्यूज’ पर रात 9 बजे आने वाले उनके प्राइम टाइम शो ‘डीएनए’ के बहुसंख्य दर्शक हैं। लोग इस शो को काफी पसंद करते हैं। अपनी रिसर्च से कई बार वह लोगों को चौंका देते हैं। उनके प्राइम टाइम में ऐसी खबरें होती हैं, जो न सिर्फ सामाजिक सरोकार से जुड़ी होती हैं, बल्कि लोगों के ज्ञान को भी बढ़ाती हैं।

सुधीर चौधरी अपनी टीम और अपने काम को लेकर किस कदर जुनूनी हैं, इसका अंदाजा आप सिर्फ इस बात से लगा सकते हैं कि कोविड-19 के दौर में एक दिन भी ऐसा नहीं हुआ, जब वह ऑफिस न गए हों और वहां जाकर खुद अपने एम्प्लॉयीज को प्रोत्साहित न किया हो। भावनात्मक मजबूती को बढ़ाना और उस डर को दूर करना बहुत जरूरी था और यही एक असली लीडर की पहचान होती है।हालांकि यह अलग बात है कि कोरोना संक्रमित होने के बाद मजबूरन उन्हें कुछ दिनों के लिए ऑफिस से दूर रहना पड़ा।

‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन’ (IIMC) से पढ़कर निकले सुधीर चौधरी ने करियर के शुरुआती दौर में ही अपना लक्ष्य सोच लिया था और जैसे अर्जुन को सिर्फ चिड़िया की आंख दिखाई देती थी, उसी तरह सुधीर चौधरी को सिर्फ अपने लक्ष्य दिखाई देते हैं और उन्हें पाने के लिए वो दिन-रात एक कर देते हैं। टीवी में छोटे पद से लेकर सीईओ तक का सफर उन्होंने तय किया है।

आपको यह जानकार हैरानी होगी कि जब ‘डीएनए’ का कंटेंट तैयार किया जाता है तो उसमें महिलाओं और बच्चों का भी पूरा ध्यान रखा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस शो को लॉन्च करने  से पहले उनकी टीम ने पूरे देश में सर्वे किया और यह पता लगाया कि लोग क्या देखना चाहते हैं और अब उसी तरह का कंटेंट वे अपने शो में देते हैं। यही वजह है कि आज उनका प्राइम टाइम शो लोगों के दिलों पर राज करता है।

आज ट्विटर पर सुधीर चौधरी के छह मिलियन से अधिक फॉलोअर्स हैं और इस लिहाज से भी वह सबसे प्रसिद्ध एंकर्स में से एक हैं। उनकी दीवानगी का आलम यह है ये कि जब हाल ही में वह कोरोना वायरस से संक्रमित हुए तो देश-दुनिया से उनकी सलामती के संदेश आने लगे। सुधीर चौधरी खुद जानते हैं कि उनकी ताकत उनकी फैंन-फॉलोइंग है। लिहाजा, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कोरोना से जमकर लड़ाई लड़ी और उसे मात दी।

कोरोना को मात देने के बाद सुधीर चौधरी चाहते तो सीधे टीवी पर आ सकते थे, लेकिन उन्होंने उससे पहले फेसबुक लाइव करने का निर्णय किया, ताकि उनके लाखों चाहने वाले उनसे बात कर सकें। जब वो फेसबुक लाइव हुआ तो वो कोई साधारण लाइव नहीं था। उसने एक तरह से इतिहास रच दिया। मीडिया जगत में शायद ही पहले कभी हुआ हो कि किसी प्राइम टाइम एंकर के फेसबुक लाइव को करीब नौ मिलियन लोगों ने देखा हो।

सुधीर चौधरी ने अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए कई बड़े मुद्दों को कवर किया है। उन्होंने लोकसभा चुनावों के साथ कई राज्यों के विधानसभा चुनावों को भी कवर किया है। इसके अलावा उन्होंने तमाम बड़े राजनेताओं के साक्षात्कार भी किए हैं। सुधीर चौधरी उन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्तोत्र हैं, जो पत्रकारिता जगत में कदम रख रहे हैं। बहुत ही कम समय में उन्होंने न केवल आसमान की बुलंदियों को छुआ है, बल्कि वे अब अपनी दमदार एंकरिंग और अपनी प्रतिभा से मीडिया जगत में एक चमकता सितारा हैं। समाचार4मीडिया की ओर से सुधीर को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं।

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