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बॉम्बे हाई कोर्ट ने मीडिया संस्थानों के लिए जारी किए ये दिशा निर्देश
बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने मीडिया संस्थानों के लिए ये दिशा निर्देश जारी किए हैं
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने मीडिया संस्थानों के लिए ये दिशा निर्देश जारी किए हैं कि बलात्कार या बाल शोषण के शिकार पीड़ितों का असली नाम या उससे जुडी कोई भी जानकारी उजागर नहीं की जा सकती। पीड़िता की पहचान का खुलासा कर उसके निजता के अधिकार का हनन माना जाएगा।
दरअसल, रेप पीड़ितों की पहचान उजागर करने के खिलाफ दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मीडिया संस्थानों के लिए ये दिशा निर्देश जारी किए हैं।
औरंगाबाद बेंच ने कहा कि भारतीय दंड संहिता के तहत बलात्कार के मामलों और बाल यौन अपराध संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम तहत दर्ज किए जाने वाले मामलों में, प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया आदि यह सुनिश्चित करें कि बलात्कार या बाल शोषण के शिकार लोगों की पहचान कर उनके स्कूल, अभिभावकों के पते या नाम का विवरण प्रकाशित ना किया जाए। इसके साथ ही मीडिया को माता-पिता के नाम, उनके आवासीय या कार्यालय के पते प्रकाशित करने से भी रोक लगानी चाहिए। यहां तक कि अगर पीड़ित की मौत हो गई हो तब भी पीड़ित की नजदीकी रिश्तेदार या सेशंस जज की अनुमति के बिना नाम या पहचान उजागर नहीं किया जाए।
बता दें कि बलात्कार की शिकार लड़की या महिला का नाम प्रचारित-प्रकाशित करने और उसके नाम को उजागर करने से संबंधित कोई भी मामला आईपीसी की धारा 228 ए के तहत अपराध है। आईपीसी की धारा 376, 376ए, 376बी, 376सी, 376डी, 376जी के तहत केस की पीडिता का नाम प्रिंट या पब्लिश करने पर दो साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है। कानून के तहत बलात्कार पीडि़ता के निवास, परिजनों, दोस्तों, विश्वविद्यालय या उससे जुड़े अन्य विवरण को भी उजागर नहीं किया जा सकता।
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