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बीजेपी MLA के कोप का शिकार हुआ पत्रकार, विडियो वायरल

पत्रकार ने दिल्ली के चाणक्यपुरी थाने में की मामले की शिकायत

Last Modified:
Friday, 14 June, 2019
Rajeev Tiwari

पत्रकारों के दिन लगता है इन दिनों खराब चल रहे हैं। पिछले दिनों स्वतंत्र पत्रकार प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी और उत्तर प्रदेश के शामली में पुलिसकर्मियों द्वारा पत्रकार अमित शर्मा की पिटाई का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि एक और पत्रकार के उत्पीड़न का मामला सामने आया है। इस बार आरोप लगा है उत्तराखंड में खानपुर से बीजेपी विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन पर। दरअसल, चैंपियन के दो विडियो वायरल हुए हैं, जिनमें से एक विडियो में वह ‘न्यूज18’ के पत्रकार राजीव तिवारी से अभद्रता करते हुए दिख रहे हैं।

आरोप है कि चैनल में दिखाई गई एक खबर से नाराज प्रणव चैंपियन ने राजीव तिवारी को जान से मारने की धमकी भी दी। यही नहीं, पिस्टल दिखाते हुए थप्पड़ भी मारा। बताया जाता है कि यह पूरा वाकया नई दिल्ली स्थित उत्तराखंड सदन का है। राजीव तिवारी ने दिल्ली के चाणक्यपुरी थाने में शिकायत दर्ज करा दी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

राजीव तिवारी का कहना है कि वह न्यूज 18 की तरफ से उत्तराखंड की रिपोर्टिंग करते हैं। गुरुवार की सुबह चैंपियन ने उन्हें मिलने के लिए दिल्ली स्थित उत्तराखंड सदन के कमरा नंबर-204 में बुलाया था। आरोप है कि जब राजीव वहां पहुंचे तो चैंपियन ने अपनी पिस्तौल मंगाई और फिल्मी स्टाइल में टेबल पर रख दी। इसके बाद चैंपियन ने उन्हें धमकी दी कि अगर मेरे खिलाफ खबर चलाओगे तो गोली मार दूंगा।

आरोप है कि कुछ दिन पहले उत्तराखंड सदन में हरिद्वार नंबर के रजिस्ट्रेशन वाली एक गाड़ी पार्क की गई थी। इस गाड़ी का इस्तेमाल चैंपियन अपने काफिले में करते हैं। इस गाड़ी पर अवैध रूप से उत्तराखंड पुलिस लिखवाया हुआ है‌, जबकि यह निजी वाहन है। राजीव का कहना है कि यह खबर चलाने को लेकर चैंपियन उनसे नाराज थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पत्रकार को थप्पड़ मारने के आरोपों को चैंपियन ने गलत बताया है। उनका कहना है कि टीवी पत्रकार गुंडई दिखाकर अवैध वसूली करने आए थे। एक पत्रकार ने साजिश के तहत कैमरा ऑन कर उन्हें उकसाने के लिए गालियां दीं। उन्होंने कहा कि वीडियो में जो हाथ उठाने वाली बात दिखाई जा रही है, वह गलत है। वे पत्रकार को चुप कराने के लिए कुर्सी से भय दिखाने के लिए उठे थे और उसे बाहर निकलने का इशारा किया। टीवी पर थप्पड़ मारने की खबर देखने के बाद उन्होंने बहरोड कोतवाली पुलिस को पत्रकार के खिलाफ तहरीर दी है। चैंपियन का कहना है कि उनकी सामाजिक और राजनैतिक प्रतिष्ठा धूमिल करने के लिए ऐसा किया गया है।

इस पूरी घटना का विडियो आप यहां देख सकते हैं-  

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अनुराग ठाकुर की मीडिया को नसीहत, आतंकी हमले की LIVE रिपोर्टिंग करते समय रखें ये ध्यान

59वीं एशिया-पैसिफिक ब्रॉडकास्टिंग यूनियन जनरल असेंबली के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने मीडिया को नसीहत दी है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 29 November, 2022
Last Modified:
Tuesday, 29 November, 2022
AnuragThakur

सूचना-प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने मीडिया को नसीहत दी है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भूकंप, आग और आतंकवादी हमलों में मीडिया को जिम्मेदारी के साथ रिपोर्ट करने की जरूरत है। 59वीं एशिया-पैसिफिक ब्रॉडकास्टिंग यूनियन जनरल असेंबली के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने यह बात कही।

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि मीडिया को सुनिश्चित करना चाहिए कि आतंकवादी हमले की लाइव रिपोर्टिंग से हमलावरों को सुराग नहीं मिलना चाहिए और उनके बुरे इरादों को बढ़ावा नहीं देना चाहिए। इसलिए मीडिया को भूकंप, आग और आतंकवादी हमलों में मीडिया को जिम्मेदारी के साथ रिपोर्ट करने की जरूरत है।

वहीं, इस दौरान अनुराग ठाकुर ने कहा कि कोविड-19 का दौर दुनिया में सभी के लिए परीक्षण का समय रहा है। लॉकडाउन में मीडिया ने लोगों को बाहरी दुनिया से जोड़ा। ऐसी स्थिति में सही और समय पर जानकारी देना मीडिया की जिम्मेदारी है।

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा भारतीय ब्रॉडकास्टर्स और भारतीय मीडिया ने आम तौर पर यह सुनिश्चित किया है कि Covid-19 के दौरान जागरूकता संदेश, महत्वपूर्ण सरकारी दिशा-निर्देश और मुफ्त ऑनलाइन परामर्श और डॉक्टर इस देश के हर कोने में हर किसी तक पहुंचे।

कार्यक्रम के दौरान अनुराग ठाकुर ने जनता के पास जाने से पहले तथ्यों की जांच करने के लिए अपने तंत्र को संस्थागत बनाने के लिए आकाशवाणी और दूरदर्शन की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि दूरदर्शन और आकाशवाणी हमेशा प्रामाणिकता के आधार पर रिपोर्टिंग करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रसार भारती ने कोविड में 100 से अधिक कर्मचारियों को खो दिया था, लेकिन ये फिर भी उन्हें इसे जारी रखने से नहीं रोक सका।

केंद्रीय मंत्री ने कहा एबीयू जैसे कार्यक्रम भारतीय मीडिया को इस तरह की चुनौतियों से उबरने और विश्व स्तर पर प्रसारण के हित को आगे बढ़ाने के लिए बाहरी दुनिया से बातचीत करने और सीखने की सुविधा प्रदान करते हैं। 

उल्लेखनीय है कि प्रसार भारती, भारत का लोक सेवा प्रसारक, 59वें एशिया पैसिफिक ब्रॉडकास्टिंग यूनियन (ABU) महासभा 2022 की मेजबानी कर रहा है। यह सम्मेलन 25 नवंबर को नई दिल्ली में शुरू हुआ है और इस महीने की 30 तारीख तक जारी रहेगा। यह आयोजन भारत की स्वतंत्रता के 75वें वर्ष को चिह्नित करने के लिए आजादी का अमृत महोत्सव के साथ मेल खाता है। 50 संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले 40 देशों के लगभग 300 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।

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‘Disney Star’ की HR हेड अमिता माहेश्वरी ने लिया ये बड़ा फैसला

अमिता माहेश्वरी ने तत्कालीन सीईओ उदय शंकर के नेतृत्व में वर्ष 2009 में ‘स्टार इंडिया’ (Star India) की कोर मैनेजमेंट टीम में जॉइन किया था।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 29 November, 2022
Last Modified:
Tuesday, 29 November, 2022
Amita Maheshwari

एशिया पैसिफिक (APAC) और भारत के लिए ‘डिज्नी स्टार’ (Disney Star) की एचआर हेड अमिता महेश्वरी ने यहां अपनी पारी को विराम देने का फैसला लिया है। वह यहां 13 साल से ज्यादा समय से अपनी जिम्मेदारी निभा रही थीं।

इस बारे में कंपनी के कंट्री मैनेजर व प्रेजिडेंट के. माधवन (K Madhavan) और रीजनल हेड ल्यूक कांग (Luke Kang) की ओर से एक इंटरनल मीमो भी जारी किया गया है। अमिता माहेश्वरी अब ‘केदारा कैपिटल’ (Kedaara Capital) के साथ बतौर ऑपरेटिंग डायरेक्टर (HR) अपनी नई पारी शुरू करेंगी।

अमिता माहेश्वरी ने तत्कालीन सीईओ उदय शंकर के नेतृत्व में वर्ष 2009 में ‘स्टार इंडिया’ (Star India) की कोर मैनेजमेंट टीम में जॉइन किया था। मार्च 2019 में डिज्नी द्वारा 21वीं सेंचुरी फॉक्स (21st Century Fox) के अधिग्रहण के बाद उन्हें एशिया पैसिफिक और भारत में डिज्नी की एचआर हेड के पद पर पदोन्नत किया गया।

अपने करीब 28 साल के करियर में अमिता माहेश्वरी ने तमाम इंडस्ट्रीज में वरिष्ठ नेतृत्व पदों पर रहते हुए वैश्विक स्तर पर कई विलय, अधिग्रहण और पुनर्गठन की दिशा में अपनी अहम भूमिका निभाई है। ‘स्टार’ से पहले वह Asian Paints, GE Capital, Genpact और MetLife India Insurance जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुकी हैं।

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‘Josh’ में इस बड़े पद से अलग हुईं रुबीना सिंह

बता दें कि रुबीना सिंह ने पिछले साल अक्टूबर में ‘जोश’ जॉइन किया था। इससे पहले वह मीडिया एजेंसी ‘आईप्रॉस्पेक्ट’ (Iprospect) में चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर के तौर पर अपनी भूमिका निभा रही थीं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 28 November, 2022
Last Modified:
Monday, 28 November, 2022
Rubeena Singh

शॉर्ट वीडियो ऐप ‘जोश’ (Josh) से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। विश्वस्त सूत्रों के हवाले से मिली इस खबर के अनुसार ‘जोश’ की कंट्री मैनेजर रुबीना सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

इस बारे में हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) ने रुबीना सिंह से संपर्क करने का काफी प्रयास किया, लेकिन खबर लिखे जाने तक वहां से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई थी। रुबीना सिंह का अगला कदम क्या होगा, फिलहाल इस बारे में भी पता नहीं चल पाया है।

बता दें कि रुबीना सिंह ने पिछले साल अक्टूबर में ‘जोश’ जॉइन किया था। इससे पहले वह ‘डेंट्सू’ (Dentsu) की डिजिटल फर्स्ट एंड टू एंड मीडिया एजेंसी ‘आईप्रॉस्पेक्ट’ (Iprospect) में चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) के तौर पर अपनी भूमिका निभा रही थीं।

रुबीना सिंह को डिजिटल, प्रिंट और ब्रॉडकास्टिंग के क्षेत्र में काम करने का 21 साल से ज्यादा अनुभव है। रुबीना सिंह ने ‘स्टार टीवी’ (Star TV) के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी।

पूर्व में वह ‘नेटवर्क18‘ की ‘मनीकंट्रोल‘ (Moneycontrol) में सीओओ के रूप में अपनी भूमिका संभाल चुकी हैं। इसके अलावा वह ‘फोर्ब्स इंडिया‘,‘सीएनबीसी टीवी18‘,‘सीएनबीसी आवाज‘,‘आईबीएन7‘ और ‘आईबीएन लोकमत‘ में प्रमुख जिम्मेदारी निभा चुकी हैं।

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‘AAAI’ में अब यह बड़ी जिम्मेदारी निभाएंगे प्रशांत कुमार

अभी तक यहां प्रेजिडेंट के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभाल रहीं अनुप्रिया आचार्य अब वर्ष 2022-23 के लिए AAAI बोर्ड की पदेन सदस्य होंगी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 28 November, 2022
Last Modified:
Monday, 28 November, 2022
Prasanth Kumar

‘एडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (AAAI) में प्रशांत कुमार (Prashanth Kumar) को प्रेजिडेंट के पद पर चुना गया है। अभी तक यहां प्रेजिडेंट के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभाल रहीं अनुप्रिया आचार्य अब वर्ष 2022-23 के लिए AAAI बोर्ड की पदेन सदस्य होंगी

पीके के नाम से लोकप्रिय प्रशांत कुमार का इस मौके पर कहना था, ‘मैं इस प्रतिष्ठित संस्था का प्रेजिडेंट चुने जाने पर बेहद सम्मानित महसूस कर रहा हूं। मेरी राय में विज्ञापन काफी गतिशील (dynamic) और विचार-चालित (idea-driven) इंडस्ट्री है। इंडस्ट्री के संस्थानों के साथ सहयोग हमें इसे प्रगतिशील तरीके से नया आकार देने में मदद करेगा, जिससे सभी को लाभ होगा। मैं समान विचारधारा वाले लोगों और संगठनों के साथ तालमेल बनाने के लिए तत्पर हूं और मुझे विश्वास है कि अगर हम एक साथ काम करते हैं तो हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सक्षम होंगे।’

बता दें कि ‘ग्रुप एम’ (GroupM) में जाने-माने नाम पीके को इंडस्ट्री में काम करने का ढाई दशक से ज्यादा का अनुभव है। ‘ग्रुप एम’ को जॉइन करने से पहले वह ‘Pepsi’, ‘The Hindu‘,‘The Media Edge‘ और ‘McCann Erickson‘ के साथ काम कर चुके हैं। इसके अलावा वह वर्ष 2020-2022 तक ‘AAAI’ के वाइस प्रेजिडेंट भी रह चुके हैं।

वहीं, निवर्तमान प्रेजिडेंट अनुप्रिया आचार्य का कहना है, ‘पिछले दो वर्षों से संस्था में प्रेजिडेंट का पद संभालना और इसके साथ आने वाली जिम्मेदारियों को निभाना मेरे लिए सौभाग्य की बात रही है। इस दौरान हमने संस्था को आगे बढ़ाने की दिशा में काफी काम किया। मैं इस अवसर पर अपने साथी बोर्ड के सदस्यों को धन्यवाद देना चाहती हूं और प्रशांत कुमार को प्रेजिडेंट चुने जाने पर बधाई देती हूं। वह लंबे समय तक भारतीय मीडिया और विज्ञापन इंडस्ट्री के प्रमुख सदस्य रहे हैं। मुझे यकीन है कि वह एसोसिएशन को मजबूती से आगे ले जाएंगे।’

गौरतलब है कि एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री के हितों को आगे बढ़ाने के लिए वर्ष 1945 में ‘एडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (AAAI) का गठन किया गया था।

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‘भारत को भी अपनाना चाहिए News Media Bargaining Code’

e4m-DNPA वर्चुअल राउंडटेबल में ऑस्ट्रेलियन कॉम्पटीशन एंड कंज्यूमर कमीशन (ACCC) के पूर्व अध्यक्ष रोडनी सिम्स ने न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड के बारे में विस्तार से बातचीत की।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 26 November, 2022
Last Modified:
Saturday, 26 November, 2022
Rodney Sims

‘ऑस्ट्रेलियन कॉम्पटीशन एंड कंज्यूमर कमीशन’ (ACCC) के पूर्व अध्यक्ष रोडनी सिम्स (Rodney Sims) का कहना है कि भारत को भी ‘न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड’ (News Media Bargaining Code) अपनाना चाहिए। e4m-DNPA वर्चुअल राउंडटेबल के दौरान शुक्रवार को उन्होंने न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड के बारे में विस्तार से बातचीत की। बता दें कि ऑस्ट्रेलिया की संसद ने पिछले साल ‘News Media Bargaining Code’ नामक कानून पारित किया है। यह कानून ग्लोबल डिजिटल प्लेटफार्म्स को अपने संबंधित प्लेटफार्म्स पर ऑस्ट्रेलियाई न्यूज कंटेंट को पब्लिश करने के लिए भुगतान को अनिवार्य बनाता है।

दरअसल, डिजिटल मीडिया ईकोसिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) की चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा करने के लिए एक्सचेंज4मीडिया और डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) ने इंटरशनेशनल स्पीकर्स के साथ 25 नवंबर को वर्चुअल रूप से गोलमेज सम्मेलन (राउंडटेबल कॉन्फ्रेंस) का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में इंटरनेशनल स्पीकर्स एक मंच पर आए और तेजी से हो रहे डिजिटलीकरण के दौर में प्लेटफॉर्म्स और पब्लिशर्स के संबंधों पर अपने विचार रखे।

इस मौके पर ऑस्ट्रेलियन अर्थशास्त्री, वर्ष 1988-90 के दौरान ऑस्ट्रेलिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री बॉब हॉक (Bob Hawke) के मुख्य आर्थिक सलाहकार रह चुके और वर्तमान में Crawford School of Public Policy के प्रोफेसर सिम्स का कहना था कि न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड की सिफारिशों (recommendation) को लेकर की गई स्टडी के दौरान हमने पाया कि गूगल और फेसबुक जैसी बड़ी कंपनियों के पास बहुत ज्यादा मार्केट पॉवर है और वे बिना भुगतान किए मीडिया बिजनेस के कंटेंट का इस्तेमाल कर रही हैं।  

उन्होंने कहा कि फेसबुक और गूगल को अपने प्लेटफॉर्म पर न्यूज मीडिया कंटेंट की सख्त जरूरत थी। इन टेक कंपनियों को सिर्फ मीडिया बिजनेस से न्यूज मीडिया कंटेंट की आवश्यकता नहीं थी, लेकिन दूसरी ओर प्रत्येक मीडिया बिजनेस को अपने अस्तित्व के लिए गूगल और फेसबुक पर होना आवश्यक था।

सिम्स के अनुसार, ‘इससे बाजार में असंतुलन की स्थिति पैदा हुई। हम इसका वर्णन कर सकते हैं और कह सकते हैं कि यह बाजार की विफलता है। एक अर्थशास्त्री के रूप में हम समझते थे कि बाजार में बहुत सारी विफलताएं हैं। लेकिन यह वास्तव में मायने रखता था, क्योंकि इसका मीडिया, पत्रकारिता और समाज पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा था। हम इस बात को लेकर पूरी तरह स्पष्ट हैं कि बेहतर समाज के लिए पत्रकारिता मूलभूत तत्व है, इसलिए इस मुद्दे को उठाया जाना जरूरी था।’

इसके बाद सिम्स ने बताया कि कैसे न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड का ड्राफ्ट तैयार किया गया। सिम्स के अनुसार, ‘शुरू में सरकार ने सुझाव दिया कि एक स्वैच्छिक कोड होगा जो गूगल और न्यूज मीडिया बिजनेस के बीच एक समझौते की तरह काम करेगा। स्वैच्छिक कोड ने काम नहीं किया और मजबूत एक्शन की जरूरत थी। ऐसे में बातचीत शुरू हुई और सरकार ने ‘एसीसीसी’ से इस पर राय मांगी। इस पर हमने कहा कि हमें नहीं लगता कि इन वार्ताओं से उस तरह का वित्तीय परिणाम प्राप्त होगा, जैसा हम चाहते हैं। इसके बाद सरकार ने ‘एसीसीसी’ से न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड का ड्राफ्ट तैयार करने को कहा। इसके बाद हमने संचार विभाग के मंत्री के साथ मिलकर काम किया और ड्राफ्ट पर चर्चाओं के बाद कानून पास किया गया।’

इसके बाद सिम्स ने यह भी बताया कि कैसे गूगल ने ‘एसीसीसी’ द्वारा पेश किए गए ड्राफ्ट के कानून बन जाने पर ऑस्ट्रेलियाई सरकार को अपनी गूगल सर्च सर्विसेज को वापस लेने की धमकी देकर उस पर हावी होने की कोशिश की। हालांकि गूगल की इस दिशा में बिल्कुल नहीं चली। फेसबुक ने एक अलग ही तरीका अपनाया और सभी न्यूज कंटेंट को अपनी फेसबुक साइट से हटा दिया। फेसबुक के साथ समस्या यह थी कि वह इस दिशा में ज्यादा ही आगे बढ़ गए। उन्होंने न केवल न्यूज कंटेंट को हटा दिया बल्कि कोविड चेतावनियों को भी हटा दिया। इससे लोगों के बीच काफी प्रतिक्रिया हुई और लोग इससे पीछे हटना शुरू हो गए। इस पर फेसबुक ने भी अपने कदम पीछे खींच लिए।

सिम्स के अनुसार, ‘नतीजा यह हुआ कि गूगल और फेसबुक द्वारा प्रति वर्ष 200 मिलियन डॉलर से अधिक का भुगतान किया गया है। न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड को कनाडा में कॉपी किया जा रहा है। इसके 2023 में पारित होने की संभावना है। इसी तरह यूएस और यूके भी इस कोड को अपना रहे हैं। ऐसे में भारत को मेरी सलाह है कि वह न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड को अपने यहां भी अपनाए।’

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‘मीडिया कंपनियों को कानून के समर्थन में एकजुट होकर आगे आना चाहिए’

e4m-DNPA डायलॉग्स में ‘मिंडेरू फाउंडेशन’ की सीनियर पॉलिसी एडवाइजर एम्मा मैकडॉनल्ड और ‘दि ऑस्ट्रेलिया इंस्टीट्यूट’ के डायरेक्टर पीटर लुईस के बीच काफी ज्ञानपरक व रोचक चर्चा हुई।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 26 November, 2022
Last Modified:
Saturday, 26 November, 2022
e4m DNPA

डिजिटल मीडिया ईकोसिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) की चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा करने के लिए एक्सचेंज4मीडिया और डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) ने इंटरशनेशनल स्पीकर्स के साथ 25 नवंबर को वर्चुअल रूप से गोलमेज सम्मेलन (राउंडटेबल कॉन्फ्रेंस) का आयोजन किया।

इस कार्यक्रम के दौरान e4m ‘DNPA Dialogues’ के उद्घाटन सत्र में इंटरनेशनल स्पीकर्स एक मंच पर आए और तेजी से हो रहे डिजिटलीकरण के दौर में प्लेटफॉर्म्स और पब्लिशर्स के संबंधों पर अपने विचार रखे।

इस आयोजन के दौरान एक सेशन में ‘मिंडेरू फाउंडेशन’ (Minderoo Foundation) की सीनियर पॉलिसी एडवाइजर एम्मा मैकडॉनल्ड (Emma McDonald) और ‘दि ऑस्ट्रेलिया इंस्टीट्यूट’ (The Australia Institute) के डायरेक्टर पीटर लुईस (Peter Lewis) के बीच बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को लेकर चर्चा हुई।

बता दें कि बतौर जनरल काउंसिल मैकडॉनल्ड्स के पास नीति (policy), विनियामक (regulatory) और सार्वजनिक मामलों (public affairs) में काम करने का 25 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वह ऑस्ट्रेलियाई कम्युनिकेशंस मिनिस्टर की सीनियर पॉलिसी एडवाइजर भी रह चुकी हैं। वहीं, लुईस ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख सार्वजनिक प्रचारकों में से एक हैं और उन्हें मीडिया, पॉलिटिक्स व कम्युनिकेशंस में काम करने का दो दशक से ज्यादा का अनुभव है।

इस सेशन की अध्यक्षता ‘DNPA’ के चेयरपर्सन तन्मय माहेश्वरी और ‘डीबी कॉर्प लिमिटेड’ के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर पवन अग्रवाल ने की। बता दें कि डीएनपीए (Digital News Publishers Association) प्रिंट व टेलिविजन के क्षेत्र में काम कर रही देश की शीर्ष मीडिया कंपनियों की डिजिटल विंग का प्रतिनिधित्व करता है।

इस सेशन की शुरुआत में मैकडॉनल्ड्स ने ऑस्ट्रेलिया सरकार द्वारा बड़े टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म्स से दूर जाने के फैसले के बारे में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि ऑस्ट्रेलिया में पिछले 10 वर्षों या उससे अधिक समय से सरकारों को डिजिटल में हो रहे क्रांतिकारी बदलाव और इन प्लेटफॉर्म्स द्वारा मीडिया इंडस्ट्री पर पड़ रहे प्रभाव के बारे में जानकारी थी। मैं एक मीडिया कंपनी से आई थी, इसलिए मैंने इसे पहली बार देखा था। ऑस्ट्रेलिया में सरकार पिछले कुछ समय से इस समस्या से निपट रही है। सरकार ने इस दौरान विभिन्न कार्यक्रमों और फंडिंग योजनाओं के माध्यम से इससे निपटने की कोशिश की और इसके समाधान के बारे में बहुत सारी लिखा-पढ़ी भी की।’

मैकडॉनल्ड्स के अनुसार, ‘प्रस्तावित स्वैच्छिक कोड (voluntary code) का वह शुरुआती चरण था और मुझे लगता है कि हर कोई आशावादी था कि गूगल और फेसबुक इस मुद्दे पर साथ बैठेंगी और मीडिया कंपनियों के साथ मिलकर काम करेंगी। अप्रैल 2020 में कोविड-19 महामारी के आने के बाद जब मैं मंत्री कार्यालय में काम कर रही थी, तमाम पब्लिशर्स हमारे पास आते थे। वे इस बात को लेकर बहुत चिंतित थे कि उनका भविष्य क्या होगा और हम उनकी मदद कैसे कर सकते हैं।’

मैकडॉनल्ड ने इस बात पर भी जोर दिया कि मीडिया कंपनियों को एक संयुक्त मोर्चा (United Front) बनाना चाहिए और इसके फलने-फूलने के लिए कानून का समर्थन करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘जब सभी मीडिया कंपनियां एक साथ आएंगी, तो इससे कानून का रास्ता साफ होगा। यह उस समय में वाकई में काफी महत्वपूर्ण है, जब सरकार इस दिशा में अपने कदम उठा रही है।’ इसके साथ ही मैकडॉनल्ड का यह भी कहना था कि हालांकि यह पूरी तरह से सही नहीं है। यदि कानून से परिणाम निकलता है तो यह सब व्यर्थ नहीं है। पत्रकारिता के समर्थन में यह बहुत अच्छा किया गया है।

वहीं, लुईस का कहना था कि जब लोग फेसबुक और गूगल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स लाते हैं तो वे इन टेक्नोलॉजी कंपनियों के बारे में नहीं बल्कि विज्ञापन एकाधिकार (advertising monopolies) के बारे में बात कर रहे होते हैं। उन्होंने कहा, ‘विज्ञापन एकाधिकार पर रोक के लिए हमारे नियामक आयोग ने तमाम सिफारिशें (recommendations) पास कीं। मुझे लगता है कि उन्होंने 27 सिफारिशों की एक श्रंखला पास की, जिनमें सिर्फ एक न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड था। लेकिन अगर यह सिर्फ एक मंत्री के कार्यालय में बैठकर बनाई हुई नीति होती तो गूगल और फेसबुक दोनों की ओर से विरोध होता।’

लुईस के अनुसार, ‘वे इस सिद्धांत से पीछे नहीं हटने वाले थे क्योंकि इस प्रस्ताव को राष्ट्रीय स्तर पर विनियमित करना था। जिस तरह से प्लेटफॉर्म्स संचालित होते हैं, वह कुछ ऐसा है जो उन्होंने पहले कभी नहीं किया है।’ इस सेशन के आखिर में अपनी बात रखते हुए लुईस ने कहा, ‘मेरा मानना ​​​​है कि इन प्लेटफॉर्म्स ने इस तरह की बातों को शांत करने के लिए ऑस्ट्रेलियाई मीडिया कंपनियों को भुगतान किया और मुझे लगता है कि उन्हें उम्मीद थी कि बाकी दुनिया में इसकी गूंज नहीं हो रही होगी।’

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जाने-माने लेखक डॉ. भुवन लाल के नाम जुड़ी अब ये बड़ी उपलब्धि

देश के जाने-माने लेखक व फिल्म निर्माता डॉ. भुवन लाल को इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ टेलीविजन आर्ट्स एंड साइंसेज का सदस्य चुना गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 23 November, 2022
Last Modified:
Wednesday, 23 November, 2022
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देश के जाने-माने लेखक व फिल्म निर्माता डॉ. भुवन लाल को इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ टेलीविजन आर्ट्स एंड साइंसेज (International Emmy Awards) का सदस्य चुना गया है।

डॉ. भुवन लाल ने 2017 में सबसे अधिक बिकने वाली जीवनी 'द मैन इंडिया मिस्ड द मोस्ट - सुभाष चंद्र बोस' (The Man India Missed The Most - Subhas Chandra Bose) प्रकाशित की। वहीं, दूसरी जीवनी, जिसके लिए उन्होंने बड़ी रिसर्च की है, उसका नाम है 'द ग्रेट इंडियन जीनियस हर दयाल' (The Great Indian Genius Har Dayal [2020]) है, जो 2020 में प्रकाशित हुई।

डॉ. लाल की तीसरी किताब का नाम 'इंडिया ऑन द वर्ल्ड स्टेज' (India on the World Stage [2021]) है, जो 2021 में प्रकाशित हुई। उनकी लेटेस्ट किताब का नाम है- 'दिल्ली इन द एरा ऑफ रेवोल्यूशनरीज 1857-1947' (Delhi in the Era of Revolutionaries 1857-1947 [July 2022]), जोकि जुलाई 2022 में प्रकाशित हुई है। फिलहाल इन दिनों डॉ. लाल सरदार पटेल की जीवनी लिख रहे हैं।

डॉ. लाल को हॉलीवुड, यूरोप और भारत में ग्लोबल एंटरटेनमेंट बिजनेस में टॉप लेवल के डिसीजन लेने का तीन दशकों से अधिक का अनुभव है। वह बेवर्ली हिल्स स्थित अरबों डॉलर की भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनी एमकॉर्प- स्पाइस ग्रुप (MCorp - Spice Group) के प्रेसिडेंट भी थे।

इससे पहले डॉ. लाल, इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन (2000-03) के सेक्रेट्री- जनरल (महसचिव) के रूप में भारत में सबसे बड़े M&E व्यापार निकाय की स्थापना की। 1995 में वह एक टीवी नेटवर्क के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट भी रह चुके हैं। उन्होंने विभिन्न M&E कंपनियों में बोर्ड पदों पर भी काम किया है। डॉ. लाल वर्तमान में सरदार पटेल मेमोरियल सोसाइटी, यूके में संरक्षक की भूमिका में भी हैं।

भारत के झारखंड राय यूनिवर्सिटी द्वारा 2019 में उन्हें डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (PHD) की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। उन्होंने जामिया MCRC से मास कम्युनिकेशन (फिल्म टीवी रेडियो प्रॉडक्शन) में फर्स्ट क्लास में मास्टर डिग्री प्राप्त की है।

 

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HC के आदेश पर पलकी शर्मा ने कहा- स्वतंत्रता हर पत्रकार का अधिकार

दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा 'जी मीडिया' की याचिका को ठुकराए जाने के बाद अंग्रेजी न्यूज चैनल WION की पूर्व मैनेजिंग एडिटर पलकी शर्मा ने एक ट्वीट किया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 23 November, 2022
Last Modified:
Wednesday, 23 November, 2022
Palki Sharma

दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा 'जी मीडिया' की याचिका को ठुकराए जाने के बाद अंग्रेजी न्यूज चैनल WION की पूर्व मैनेजिंग एडिटर पलकी शर्मा ने एक ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि यह फैसला स्वतंत्र रूप से अपने करियर का रास्ता चुनने का हर पत्रकार को अधिकार देता है और उसकी आजादी की पुष्टि करता है। साथ ही एक संदेश भी देता है कि कॉर्पोरेट के बॉस (corporate bosses) अब प्रोफेशनल्स को धमका नहीं सकते हैं या उसकी स्वतंत्रता को बाधित नहीं कर सकते हैं। अब ये वो दिन नहीं रहे, जब एक एम्प्लॉयी, हमेशा एक एम्प्लॉयी ही रहेगा।

बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को 'जी मीडिया कॉर्पोरेशन' की उस याचिका को खारिज करते हुए अंग्रेजी न्यूज चैनल WION की पूर्व मैनेजिंग एडिटर पलकी शर्मा के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसमें ये मांग की गई थी कि पलकी शर्मा को TV18 के साथ जुड़ने या उसके साथ काम करने से रोका जाए।   

दरअसल, पलकी शर्मा ने सितंबर में 'जी मीडिया' से इस्तीफा दे दिया था और बाद में TV18 ब्रॉडकास्ट लिमिटेड में बतौर मैनेजिंग एडिटर शामिल हो गईं थीं।

अपनी याचिका में, जी मीडिया ने दावा किया था कि उन्होंने (पलकी शर्मा ने) अनिवार्य नोटिस नीति (mandatory notice policy) और गैर-प्रतिस्पर्धा खंड (non-compete clause) का उल्लंघन किया है और उनके पास 'गोपनीय जानकारी' है, जिसका उपयोग वह 'जी' के प्रतिस्पर्धियों को लाभ पहुंचाने के लिए कर सकती हैं।

इन आधारों पर, जी ने अदालत से अनुरोध किया था कि उन्हें TV18 में शामिल होने या उनके काम को जारी रखने से रोका जाए।

वहीं पलकी शर्मा के वकील, सैफ महमूद और अनिल सपरा ने जी के इस अपील का विरोध किया और तर्क दिया कि इस याचिका का अपने आप में ही कोई वजूद नहीं है। उनका किसी संस्थान से जुड़ने से रोकने का अनुरोध करना तो दूर की बात है।

उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि उनके मुवक्किल की गोपनीयता भंग करने की मंशा नहीं है और इस संबंध में जी मीडिया की दलीलें निराधार हैं। अदालत ने जी के वकील जॉय बसु की दलीलों में कोई दम नहीं पाया और कहा कि पलकी शर्मा को किसी अन्य चैनल में काम करने से नहीं रोका जा सकता है।

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Zee मीडिया से जुड़े सुदीप रॉय, निभाएंगे यह बड़ी भूमिका

सुदीप रॉय इससे पहले ‘टीसीएम स्पोर्ट्स’ (TCM Sports) से जुड़े हुए थे और बतौर एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट व रेवेन्यू हेड (न्यू बिजनेस) के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 23 November, 2022
Last Modified:
Wednesday, 23 November, 2022
Sudip Roy

‘जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड’ (ZMCL) ने सुदीप रॉय को क्लस्टर नेशनल हेड के पद पर नियुक्त किया है। रॉय ने इस बारे में अपनी लिंक्डइन पोस्ट में जानकारी शेयर की है।

अपनी पोस्ट में सुदीप रॉय ने बताया है कि अपनी इस भूमिका में वह सात चैनल्स- जी हिन्दुस्तान, जी राजस्थान, जी यूपी/यूके, जी एमपी/सीजी, जी पीएचएच, जी डीएनएच, जी सलाम और सभी 14 चैनल्स से सरकारी बिजनेस का नेतृत्व करेंगे।

सुदीप रॉय इससे पहले ‘टीसीएम स्पोर्ट्स’ (TCM Sports) से जुड़े हुए थे और बतौर एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट व रेवेन्यू हेड (न्यू बिजनेस) के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। यहां वह जून 2021 से नवंबर 2022 तक कार्यरत रहे।  

बता दें कि रॉय इससे पहले ‘नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड’ (Network18 Media & Investments Limited), ‘नियो स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्ट प्राइवेट लिमिटेड’ (Neo Sports Broadcast Pvt. Ltd) और ‘एबीपी नेटवर्क’ (ABP Network) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ भी काम कर चुके हैं।

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पलकी शर्मा को लेकर दिल्ली HC ने खारिज की ZEE मीडिया की यह याचिका

दिल्ली हाई कोर्ट ने जी मीडिया कॉर्पोरेशन की उस याचिका को खारिज कर दिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 22 November, 2022
Last Modified:
Tuesday, 22 November, 2022
DelhiHC4895

दिल्ली हाई कोर्ट ने 'जी मीडिया कॉर्पोरेशन' की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें ये मांग की गई थी कि 'जी मीडिया' के अंग्रेजी न्यूज चैनल WION की पूर्व मैनेजिंग एडिटर पलकी शर्मा को TV18 के साथ जुड़ने या उसके साथ काम करने से रोका जाए।

दरअसल, पलकी शर्मा ने सितंबर में 'जी मीडिया' से इस्तीफा दे दिया था और बाद में TV18 ब्रॉडकास्ट लिमिटेड में बतौर मैनेजिंग एडिटर शामिल हो गईं थीं।

अपनी याचिका में, जी मीडिया ने दावा किया था कि उन्होंने (पलकी शर्मा ने) अनिवार्य नोटिस नीति (mandatory notice policy) और गैर-प्रतिस्पर्धा खंड (non-compete clause) का उल्लंघन किया है और उनके पास 'गोपनीय जानकारी' है, जिसका उपयोग वह 'जी' के प्रतिस्पर्धियों को लाभ पहुंचाने के लिए कर सकती हैं।

इन आधारों पर, जी ने अदालत से अनुरोध किया था कि उन्हें TV18 में शामिल होने या उनके काम को जारी रखने से रोका जाए।

वहीं पलकी शर्मा के वकील, सैफ महमूद और अनिल सपरा ने जी के इस अपील का विरोध किया और तर्क दिया कि इस याचिका का अपने आप में ही कोई वजूद नहीं है। उनका किसी संस्थान से जुड़ने से रोकने का अनुरोध करना तो दूर की बात है।

उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि उनके मुवक्किल की गोपनीयता भंग करने की मंशा नहीं है और इस संबंध में जी मीडिया की दलीलें निराधार हैं। अदालत ने जी के वकील जॉय बसु की दलीलों में कोई दम नहीं पाया और कहा कि पलकी शर्मा को किसी अन्य चैनल में काम करने से नहीं रोका जा सकता है।

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