BBC न्यूज के लिए कैसा रहा ये साल, जानें यहां

ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (BBC) ने हाल ही में अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की है

पंकज शर्मा by
Published - Thursday, 04 July, 2019
Last Modified:
Thursday, 04 July, 2019
BBC News

‘ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन’ (BBC) ने हाल ही में अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की है। इसके अनुसार, बीबीसी की कॉमर्शियल और इंटरनेशनल न्यूज कंपनी ‘बीबीसी ग्लोबल न्यूज’ (BBC Global News) का प्रदर्शन काफी शानदार रहा है। प्रॉफिट और पहुंच के मामले में यह इसके लिए अब तक का सबसे बेहतर साल रहा है। बता दें कि बीबीसी की यह सहायक कंपनी ‘बीबीसी वर्ल्ड न्यूज’ (BBC World News) के नाम से 24 घंटे के अंग्रेजी न्यूज चैनल का संचालन करती है। इसके साथ ही डिजिटल में भी इसने बीबीसी डॉट कॉम (bbc.com) के नाम से अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज करा रखी है।

कंपनी की ओर से पेश की गई रिपोर्ट में ‘EBITDA’ (Earnings before interest, tax, depreciation and amortization) प्रॉफिट आठ मिलियन पाउंड दिखाया गया है। कंपनी के अंग्रेजी न्यूज चैनल BBC World News की बात करें तो गलोबल लेवल पर इसकी मौजूदगी में दो प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली। पिछले साल जहां 458 मिलियन घरों में इसकी पहुंच थी, वह अब बढ़कर 465 मिलियन घरों तक हो गई है। इसके अलावा इस साल BBC.com की पहुंच में भी काफी इजाफा हुआ है और वर्ष 2017/18 में जहां इसके मंथली ब्राउसर्स 88 मिलियन थे, उनमें साल भर में छह प्रतिशत वृद्धि के साथ यह संख्या 93.5 मिलियन हो गई है।

इस बारे में बीबीसी ग्लोबल न्यूज के सीईओ जिम एगान (Jim Egan) का कहना है,’ इससे पता चलता है कि कंपनी के प्रति दर्शकों के साथ ही क्लाइंट का भरोसा पहले से कहीं अधिक बढ़ा है। आज के दौर में, जहां पर न्यूज प्रोवाइडर्स दर्शकों और एडवर्टाइजर्स की संख्या बढ़ाने के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा में हैं, वहां यह आंकड़े साबित करते हैं कि इस कंपनी में पत्रकारिता के उच्च स्तर के मापदंडों का पालन किया जाता है। आजकल जब अधिकांश न्यूज प्रोवाइडर्स एजेंडा आधारित पत्रकारिता कर रहे हैं अथवा कम संख्या में मुद्दों पर अपना फोकस कर रहे हैं, कंपनी ग्लोबल परिप्रेक्ष्य और ज्यादा संतुलित रिपोर्टिंग पर ध्यान देती है, जिससे इसकी ओर आकर्षित होने वालों की संख्या में और इजाफा हो रहा है।‘

बता दें बीबीसी ग्लोबल न्यूज ने अपने प्लेटफॉर्म पर एक वीकली शो ‘Cut Through The Noise’ के लिए फेसबुक के साथ एक नया करार किया था। इसके साथ ही कंपनी ने Yahoo! Japan पर नई लाइव न्यूज स्ट्रीमिंग सर्विस भी शुरू की थी। वर्ष 2018/19 के दौरान बीबीसी न्यूज यूट्यूब चैनल की ग्रोथ में भी काफी ज्यादा बढ़ोतरी हुई और यह चार मिलियन सबस्क्राइबर्स का आंकड़ा पार कर गई। इसके साथ ही वर्ष 2013 में लॉन्चिंग के बाद से इसके एक बिलियन लाइफटाइम विडियो व्यूज हो चुके हैं।

पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बीबीसी ग्लोबल न्यूज को वर्ष 2018/19 के दौरान कई अवॉर्ड्स भी मिले, जिनमें  ‘Peabody Award’, ‘Gracie award’ और ‘David Bloom award’  भी शामिल हैं। ऑनलाइन की बात करें तो BBC Travel को Lowell Thomas award दिया गया। यह अवॉर्ड इसे बेस्ट ट्रैवल जर्नलिज्म वेबसाइट के लिए दिया गया। बेस्ट राइटिंग (एडिटोरियल) के लिए BBC Future ने इस साल Webby अवॉर्ड जीता था। इसके अलावा BBC Culture को silver Telly Award दिया जा चुका है। गौरतलब है कि बीबीसी वर्ल्ड न्यूज दुनियाभर में 200 से ज्यादा देशों में उपलब्ध है।

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जासूसी के आरोप में गिरफ्तार पत्रकार राजीव शर्मा को दिल्ली HC ने दी जमानत, कही ये बात

देश की सुरक्षा से संबंधित गोपनीय जानकारी और दस्तावेज चीन को मुहैया कराने के आरोप में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने राजीव शर्मा को गिरफ्तार किया था।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 05 December, 2020
Last Modified:
Saturday, 05 December, 2020
Rajeev Sharma

देश की सुरक्षा से संबंधित गोपनीय जानकारी और दस्तावेज चीन को मुहैया कराने के आरोप में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा 14 सितंबर को गिरफ्तार किए गए फ्रीलान्स पत्रकार राजीव शर्मा को दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को सशर्त जमानत दे दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने अपने फैसले में कहा है कि इस मामले में पुलिस 60 दिन में आरोपपत्र दायर नहीं कर सकी। ऐसे में आरोपी जमानत पाने का हकदार है। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने याची को निर्देश दिया कि वह संबंधित थानाध्यक्ष को अपना संपर्क नंबर/पता प्रदान करेगा और अपने मोबाइल में लोकेशन एप हर समय खुला रखेगा, साथ ही बिना अनुमति के दिल्ली-एनसीआर नहीं छोड़ेगा।

यह भी पढ़ें: पत्रकार की इस याचिका पर हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार से मांगा जवाब

बता दें कि इससे पहले निचली अदालत ने 19 अक्टूबर को राजीव शर्मा की जमानत याचिका निरस्त कर दी थी और मजिस्ट्रेट अदालत ने भी 28 सितंबर को जमानत याचिका खारिज की थी। निचली अदालत के फैसले को शर्मा ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर दिल्ली हाई कोर्ट ने राजीव शर्मा की जमानत याचिका पर पिछले महीने दिल्ली सरकार से जवाब मांगा था।

उल्लेखनीय है कि पीतमपुरा, दिल्ली निवासी राजीव शर्मा पर अपने देश से जुड़ी कुछ संवेदनशील सूचनाएं चीन की खुफिया एजेंसी को सौंपने का आरोप है। पुलिस ने इस मामले में चीन की एक महिला व उसके नेपाली सहयोगी को भी गिरफ्तार किया था।

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डिजिटल के खिलाफ लड़ाई में टीवी को अपने कंटेंट में करना होगा बदलाव: सुनील लुल्ला

बार्क इंडिया के सीईओ सुनील लुल्ला ने ‘गवर्नेंस नाउ’ के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में तमाम पहलुओं पर रखी अपनी राय

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 05 December, 2020
Last Modified:
Saturday, 05 December, 2020
Governance Now

‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) इंडिया को लेकर विवाद उठ रहा है कि देश की इतनी विशाल जनसंख्या की तुलना में संस्था का टीवी ऑडियंस मीजरमेंट सिस्टम छोटे सैंपल साइज पर आधारित है। इस तरह के विवादों का जवाब देते हुए बार्क इंडिया के सीईओ सुनील लुल्ला ने इस बात का उदाहरण दिया है कि किस तरह से किसी व्यक्ति के डीएनए की जांच के लिए रक्त की एक बूंद ही काफी होती है। 

‘गवर्नेंस नाउ’ (Governance Now) के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में सुनील लुल्ला ने ऑडियंस मीजरमेंट सिस्टम मॉडल, एडवर्टाइजिंग, टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, समेत तमाम पहलुओं पर अपने विचार रखे।

पब्लिक पॉलिसी प्लेटफॉर्म पर ‘विजिनरी टॉक सीरीज’ (Visionary Talk series) के तहत होने वाले इस वेबिनार के दौरान सुनील लुल्ला ने कहा, ‘रक्त की एक बूंद से किसी भी व्यक्ति का डीएनए पता चल सकता है, उसके लिए उस व्यक्ति के शरीर से पांच लीटर रक्त निकालने की आवश्यकता नहीं है। यह सैंपल होता है, जो समूची चीज का प्रतिनिधित्व करता है।’

मीजरमेंट प्रणाली का पक्ष रखते हुए लुल्ला ने कहा कि यह दुनिया में सबसे बड़े नमूनों में से एक है और सभी प्रमुख कारकों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ऑडिट फर्मों और सांख्यिकीय संस्थानों द्वारा प्रमाणित है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि स्टेकहोल्डर्स (stakeholders) बड़े सैंपल साइज के लिए भुगतान करने के लिए तैयार नहीं हैं।

इस बातचीत के दौरान सुनील लुल्ला का कहना था, ‘यदि आप नमूना घरों को 50000 के बजाय एक लाख करना चाहते हैं तो किसी न किसी को तो इसके लिए भुगतान करना होगा। हम एक स्टेकहोल्डर्स निकाय हैं और स्टेकहोल्डर्स इसको लेकर भुगतान करने को लिए इच्छुक नहीं हैं। हो सकता है कि कुछ लोग इस विचार से सहमत न हों, लेकिन स्टेकहोल्डर्स बड़े सैंपल साइज के लिए भुगतान करना नहीं चाहते हैं, क्योंकि इससे उन्हें आर्थिक रूप से फायदा नहीं होता और न ही बेहतर रिटर्न मिलता है।’

लुल्ला के अनुसार, अपने बिजनेस में निवेश के कुछ प्रतिशत का आप मीजरमेंट के लिए भुगतान करते हैं। कोई एडवर्टाइजर जो टीवी पर पांच-दस करोड़ रुपये का विज्ञापन देता है, वह इस विज्ञापन के लिए मीडिया एजेंसी अथवा मीजरमेंट के लिए कुछ राशि का ही भुगतान करेगा। किसी ब्रॉडकास्टर के लिए जिसका काम ऑडियंस को जुटाना और मुद्रीकरण करना है, वह मीजरमेंट के लिए सिर्फ कुछ राशि का भुगतान करेगा, इससे क्या फायदा होगा? इसलिए किसी चैनल में यदि सैंपल्स की हिस्सेदारी कम है तो उसे अपने डाटा में विविधता लानी होगी।

‘प्राइम टाइम में ज्यादा प्रतिस्पर्धा है, इसे किसने और क्यों शुरू किया? एडवर्टाइजर्स इस तरह का व्यवहार नहीं करते। ऐसे समय में जब हम नए डाटा जारी नहीं कर रहे हैं, न्यूज चैनल्स पर विज्ञापन बढ़ गए हैं। एडवर्टाइजर्स इस बात को लेकर काफी स्मार्ट हैं कि कौन का चैनल चुनना है और कौन सा डाटा इस्तेमाल करना है और उनकी पार्टनर एजेंसियां भी इन विकल्पों को तैयार करने में काफी स्मार्ट हैं। हमें इस स्मार्टनेस पर डिस्काउंट नहीं देना चाहिए। मेरा मानना है कि हमारे पास आज जो सैंपल साइज है, वह सही है।  

मीडिया, डिजिटल, म्यूजिक, एडवर्टाइजिंग और एफएमसीजी सेक्टर में 35 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले सुनील लुल्ला का कहना था कि वह सैंपल साइज को 100 प्रतिशत तक बढ़ाने के विरुद्ध नहीं थे। उन्होंने कहा कि किसी को इसके लिए भुगतान करना चाहिए और इसके फायदों को समझना चाहिए।

एडवर्टाइजिंग के बारे में सुनील लुल्ला ने कहा कि मार्च 2020 में काफी विज्ञापन थे, लेकिन व्युअरशिप में काफी बढ़ोतरी के बाद भी उतने विज्ञापन मिल नहीं पाए। इस तरह की स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई। अब एडवर्टाइजिंग वॉल्यूम वापस आ गया है और पिछले साल की तुलना में अधिक है। एडवर्टाइजिंग मूल्यों को अपने पुराने स्तर पर वापस लौटने में कुछ समय लगेगा।  

डिजिटल एडवर्टाइजिंग के बारे में सुनील लुल्ला का कहना था कि अमेरिका में डिजिटल एडवर्टाइजिंग ने टीवी एडवर्टाइजिंग को पीछे छोड़ दिया है और वर्ष 2030 तक भारत में भी ऐसा होने की संभावना है, क्योंकि यह पहले से ही यहां तेज गति से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगले कुछ वर्षों में डिजिटल एडवर्टाइजिंग में काफी ज्यादा बढ़तरी होगी।

टीवी के बारे में लुल्ला ने कहा कि यह बना रहेगा और कम नहीं हो रहा है। भारतीय घरों में पहुंच बनाने के मामले में टीवी अभी भी सबसे अच्छा माध्यम है और यदि ऐसा ही चलता रहा तो यह अपना अस्तित्व बनाए रखेगा। उन्होंने कहा कि क्यूरेटेड कंटेंट और ओटीटी को आगे बढ़ने में अभी समय लगेगा। डिजिटल के खिलाफ लड़ाई में टीवी को अपने कंटेंट में बदलाव करना होगा। लुल्ला ने कहा कि एडवर्टाइजिंग किसी चीज की मांग को बढ़ाता है और भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अमेरिका से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि वहां जीडीपी में एडवर्टाइजिंग तीन प्रतिशत है और भारत में यह सिर्फ 0.4 प्रतिशत है, जो अमेरिका के आधे से भी कम है और उसे अभी लंबा रास्ता तय करना है। एक विकसित अर्थव्यवस्था में विज्ञापन और जीडीपी के बीच एक प्रतिशत का अनुपात होता है।

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किसान आंदोलन की मीडिया कवरेज को लेकर एडिटर्स गिल्ड ने जारी की ये एडवाइजरी

संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (Editors Guild Of India) ने इन दिनों चल रहे किसान आंदोलन की मीडिया कवरेज को लेकर एडवाइजरी जारी की है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 04 December, 2020
Last Modified:
Friday, 04 December, 2020
Editors Guild

संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (Editors Guild Of India) ने इन दिनों चल रहे किसान आंदोलन की कवरेज को लेकर मीडिया एडवाइजरी जारी की है। इस बारे में एडिटर्स गिल्ड द्वारा एक स्टेटमेंट भी जारी किया गया है।

इस स्टेटमेंट में कहा गया है, ‘एडिटर्स गिल्ड इस बात को लेकर चिंतित है कि रिपोर्टिंग के दौरान मीडिया का एक वर्ग बिना किसी सबूत के आंदोलनकारियों के लिए ‘खालिस्तानी’ (Khalistanis) अथवा ‘राष्ट्रविरोधी’ (Anti-Nationals) जैसी शब्दावली का इस्तेमाल कर रहा है। यह जिम्मेदारी और नैतिक पत्रकारिता के खिलाफ है। इस तरह की रिपोर्टिंग से मीडिया की विश्वसनीयत प्रभावित होती है।’

स्टेटमेंट में कहा गया है, ‘गिल्ड की सलाह है कि किसान आंदोलन के दौरान मीडिया संस्थान निष्पक्ष और संतुलित रिपोर्टिंग करें।’ एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया की ओर से जारी स्टेटमेंट को आप यहां देख सकते हैं।

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Hindustan Times से जुड़े उत्कर्ष आनंद, अहम भूमिका निभाते आएंगे नजर

उत्कर्ष आनंद को पिछले 14 वर्षों में लीगल अफेयर्स कॉरेस्पोंडेंट और एडिटर के रूप में काम करने का अनुभव है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 04 December, 2020
Last Modified:
Friday, 04 December, 2020
utkarsh

हिन्दुस्तान टाइम्स (Hindustan Times) ने लीगल एडिटर के तौर पर उत्कर्ष आनंद को नियुक्त किया है। आनंद को पिछले 14 वर्षों में लीगल अफेयर्स कॉरेस्पोंडेंट और एडिटर के रूप में काम करने का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने प्रिंट, टीवी और वेब के लिए देश की कुछ बड़ी लीगल स्टोरीज और अहम केसेज को कवर किया है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी से लॉ ग्रेजुएट रहे आनंद ने 2006 में ‘प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया’ (Press Trust of India) से अपना करियर शुरू किया। उन्होंने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ (The Indian Express) में भी काम किया है, जहां उन्होंने मुख्य तौर पर सुप्रीम कोर्ट को कवर किया। इसके बाद उन्होंने  सीएनuएन-न्यूज18 (CNN-News18) अपना योगदान दिया और फिर यहां से एचटी में आ गए, यहां भी उन्होंने लीगल कवरेज की जिम्मेदारी संभाली है।

एचटी में, वे सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाई को कवर करेंगे, दिल्ली में स्थित कानूनी मामलों के संवाददाता के तौर पर काम करेंगे, साथ ही देश के कानूनी कवरेज को भी सुव्यवस्थित करेंगे। अब्राहम थॉमस, जो सुप्रीम कोर्ट को कवर करते हैं और ऋचा बांका, जो दिल्ली हाई कोर्ट को कवर करती हैं, अब आनंद को रिपोर्ट करेंगी। वहीं निचली अदालतों को कवर करने के लिए एक संवाददाता को नियुक्त किया जाएगा, जिसकी प्रक्रिया चल रही है।

 

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पत्रकारिता में दैनिक भास्कर के चेयरमैन के योगदान को कुछ यूं मिला सम्मान

दैनिक भास्कर ने अपने चेयरमैन स्वर्गीय रमेश चंद्र अग्रवाल की 76वीं जयंती के अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट जारी किया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 04 December, 2020
Last Modified:
Friday, 04 December, 2020
dainikbhaskar

दैनिक भास्कर ने अपने चेयरमैन स्वर्गीय रमेश चंद्र अग्रवाल की 76वीं जयंती के अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट जारी किया। समाज के लिए उनके योगदान को चिह्नित करने के लिए स्वर्गीय रमेश चंद्र की स्मृति में जारी यह टिकट उनके 76वें जन्मदिवस 30 नवंबर को 12 राज्यों के मुख्यमंत्रियों और चार राज्यपालों को भेंट किया गया, जिसे उन्होंने लोकार्पित किया।

दैनिक भास्कर समूह ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गुजरात, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ छत्तीसगढ़, बिहार, चंडीगढ़ और झारखंड के राज्यपालों का आभार व्यक्त किया है। 

रमेश चंद्र अग्रवाल भारत के प्रमुख बिजनेसमैन और समाज के गणमान्य व्यक्तियों में से एक थे, जिन्होंने समाज पर अमिट छाप छोड़ते हुए व्यवसाय और सामुदायिक सेवा दोनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई। ये उनके विजन और स्पष्ट लक्ष्य का ही नतीजा है कि आज भास्कर 50 बिलियन से ज्यादा टर्नओवर के साथ 3 भाषाओं में 65 संस्करणों के साथ 12 राज्यों में फैलने वाला देश का सबसे बड़ा मीडिया समूह बन गया।

12 अप्रैल, 2017 का दिन था, जब सुबह अहमदाबाद एयरपोर्ट पर रमेश चंद्र अग्रवालजी ने सीने में दर्द की शिकायत की थी, जिसके कुछ समय बाद वे गिर पड़े थे और उन्हें तत्काल अहमदाबाद के अपोलो अस्पताल ले जाया गया था, जहां हार्टअटैक से उनका निधन हो गया था। उस समय वे 73 साल के थे।

10 दिसबंर 2005 को वे डीबी कॉर्प के बोर्ड में शामिल हुए थे और अपने अंतिम दिनों तक वे इसके साथ जुड़े रहे। उन्हें प्रकाशन और अखबार के कारोबार का बेहद लंबा अनुभव था। वे भोपाल यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में पोस्ट ग्रेजुएट थे।

रमेश चंद्र जी मध्य प्रदेश में FICCI (Federation of Indian Chambers of Commerce and Industry) के चेयरमैन भी रह चुके थे। उन्हें साल 2003, 2006 और 2007 में इंडिया टुडे मैगजीन द्वारा 50 सबसे शक्तिशाली बिजनेस घरानों की सूची में शामिल किया जा चुका था। साल 2012 में तो वे प्रतिष्ठित मैगजीन ‘फोर्ब्स’ द्वारा जारी भारत के सबसे अमीर लोगों की सूची में 95वें स्थान पर थे।

30 नवंबर 1944 को उत्तर प्रदेश के झांसी में जन्मे रमेश चंद्र अग्रवाल 1956 में पिता सेठ द्वारकाप्रसाद अग्रवाल के साथ भोपाल आ गए थे। उन्होंने 1958 में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से दैनिक भास्कर की नींव रखी थी। 1983 में इंदौर संस्करण की शुरुआत की थी। उन्हीं के ही नेतृत्व में समूह ने हिंदी अखबार ‘दैनिक भास्कर’, गुजराती अखबार ‘दिव्य भास्कर’, अंग्रेजी अखबार ‘डीएनए’, मराठी समाचार पत्र ‘दिव्य मराठी’, रेडियो चैनल ‘माय एफएम’ और ‘डीबी डिजिटल’ को मीडिया जगत में सबसे अग्रणी बनाया। उन्हें पत्रकारिता में राजीव गांधी लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका था।

‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar) ग्रुप के प्रमोटर डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल का कहना है, ‘हमें उस विरासत का हिस्सा होने पर गर्व है, जो हमारे चेयरमैन रमेश चंद्र अग्रवाल ने अपने समय में तैयार की थी। पत्रकारिता की अखंडता पर उनके विशेष फोकस ने नया बेंचमार्क स्थापित किया, जिसे हम इस्तेमाल करते हैं। खासकर इस तरह के मुश्किल समय में। वह अपने पीछे जो विरासत छोड़ गए हैं वह काफी उल्लेखनीय है और इसने दैनिक भास्कर ग्रुप को मजबूत और मजबूत होते हुए देखा है। हम भारतीय डाक सेवा का धन्यवाद अदा करते हैं, जिन्होंने रमेश चंद्र अग्रवाल जी पर डाक टिकट जारी किया। पूरी भास्कर फैमिली के लिए यह काफी गर्व का क्षण है और उससे हमें अपने प्रयासों को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।’

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‘स्टार’ और ‘डिज्नी इंडिया’ के चेयरमैन उदय शंकर बने FICCI के प्रेजिडेंट

‘स्टार’ (Star) और ‘डिज्नी इंडिया’ (Disney India) के चेयरमैन उदय शंकर को ‘भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ’ (FICCI) का प्रेजिडेंट चुना गया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 04 December, 2020
Last Modified:
Friday, 04 December, 2020
uday Shankar

‘स्टार’ (Star) और ‘डिज्नी इंडिया’ (Disney India) के चेयरमैन उदय शंकर को ‘भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ’ (FICCI) का प्रेजिडेंट चुना गया है। उनका यह चुनाव वर्ष 2020-21 के लिए किया गया है। 11, 12 व 14 दिसंबर को होने वाली फिक्की की 93वीं वार्षिक आम बैठक में वह फिक्की प्रेजिडेंट और ‘अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप’ की जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. संगीता रेड्डी की जगह ये जिम्मेदारी संभालेंगे। उदय शंकर भारत में मीडिया और इंडस्ट्री के पहले ऐसे एग्जिक्यूटिव हैं, जो फिक्की जैसे नेशनल इंडस्ट्री चैंबर का नेतृत्व करेंगे।

बता दें कि डिज्नी और स्टार में अपनी लीडरशिप भूमिका के अलावा उदय शंकर ने देश में मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर की ग्रोथ को एक नया आयाम देने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, ताकि इंडस्ट्री से स्टेकहोल्डर्स के साथ-साथ कंज्यूमर्स को भी लाभ मिल सके।

टेलिविजन ब्रॉडकास्टिंग में कंटेंट के रेगुलेशन और ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में डिजिटाइजेशन जैसी उल्लेखनीय पहल के मामलों में वह अग्रिम मोर्चे पर रहे हैं। उदय शंकर पूर्व में ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ (IBF) के प्रेजिडेंट और फिक्की की मीडिया और एंटरटेनमेंट कमेटी के चेयरमैन रह चुके हैं। 

देश में टेलिविजन न्यूज को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में उदय शंकर ने अपनी अहम भूमिका निभाई है। स्टार से पहले वे मीडिया कंटेंट एंड कम्युनिकेशंस सर्विसेज (Media Content and Communications Services) के सीईओ व एडिटर थे। वे ‘टीवी टुडे समूह’ में भी एडिटर व न्यूज डायरेक्टर के तौर पर अपना ‘करिश्मा’ दिखा चुके हैं। यहां उनके नेतृत्व में ही वर्ष 2000 में ‘आजतक’ और वर्ष 2003 में ‘हेडलाइंस टुडे’ का शुभारंभ हुआ था। उदय शंकर ने दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से एमफिल की डिग्री ली है।

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PR-कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस इंडस्ट्री के प्रतिभाशाली युवाओं की बनेगी लिस्ट, मिलेगी नई पहचान

‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) ने ‘e4m PR and Corporate Communications 30 Under 30’ के पहले एडिशन को लॉन्च करने की घोषणा की है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 03 December, 2020
Last Modified:
Thursday, 03 December, 2020
30 Under 30

कोरोनावायरस (कोविड-19) के कहर के कारण इस साल तमाम उद्योग-धंधों पर काफी बुरा असर पड़ा है। कम्युनिकेशन इंडस्ट्री भी इससे अछूती नहीं रही है। लेकिन, इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने काफी दृढ़ता से इस मुश्किल समय का सामना किया है। तमाम चुनौतियों के बावजूद कम्युनिकेशन प्रोफेशन से जुड़े लोगों के सामूहिक प्रयासों ने इंडस्ट्री को सामान्य रूप से वापस लौटने में काफी मदद की है।

इंडस्ट्री के 30 साल से कम उम्र के ऐसे ही 30 युवाओं की मेहनत व उनके हौसले को पहचानने व उन्हें सम्मानित करने के लिए ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) ने ‘e4m PR and Corporate Communications 30 Under 30’ के पहले एडिशन को लॉन्च करने की घोषणा की है।

इस लिस्ट में 30 साल से कम उम्र के 30 ऐसे युवाओं के नाम शामिल किए जाएंगे, जिन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से न सिर्फ खुद को साबित किया है,  बल्कि सीखने के साथ नई पहल करने व जोखिम लेने का रिस्क भी उठाया है।

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#MeToo: सरकारी टीवी चैनल के एंकर पर लगा यौन उत्पीड़न का आरोप

मीडियाकर्मी झोऊ झाऊ शियाशुआन उर्फ शायनजी एक जाने-माने टीवी एंकर के खिलाफ कोर्ट पहुंची हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 03 December, 2020
Last Modified:
Thursday, 03 December, 2020
MeToo2

चीन में कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न रोकने के लिए बनाए गए विशेष कानून के तहत पहली सुनवाई शुरू हो गई है। वहीं अब इसे 'मी-टू' (#metoo) आंदोलन में एक बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल, मीडियाकर्मी झाऊ शियाशुआन उर्फ शायनजी एक जाने-माने टीवी एंकर के खिलाफ कोर्ट पहुंची हैं। उनका आरोप है कि जाने माने टीवी एंकर झू जुन ने 2014 में उनका यौन शोषण किया था।

2018 में 27वर्षीय झाऊ ने अपना 2014 का अनुभव 3000 शब्दों के एक लेख में बताया था। उनका आरोप था कि जब वे चीनी सरकारी मीडिया चैनल ‘सीसीटीवी’ (CCTV) में इंटर्नशिप कर रही थीं, तब जाने-माने टीवी होस्ट झू जुन ने उन्हें जबरन किस किया था।

झाऊ ने मुकदमा शुरू होने को चीन के इतिहास का एक बड़ा क्षण बताया है। दरअसल, चीन का नया कानून इसी साल मई में पारित हुआ है। इसके तहत यौन उत्पीड़न की परिभाषा को विस्तृत कर दिया गया।

झाऊ ने बुधवार को एक न्यूज एजेंसी से कहा, मैं बहुत नर्वस हूं। लेकिन हम हारें या जीतें, इस केस का एक खास मतलब है। अगर हम केस हार भी गए तब भी मैंने जो सवाल उठाए हैं, वे इतिहास में दर्ज रहेंगे। किसी न किसी को तो उसका जवाब देना होगा।

बुधवार को सुनवाई शुरू हुई तो हाइदियान पीपुल्स कोर्ट के बाहर बड़ी भीड़ इकट्ठी हो गई। चीन में इसे राजनीतिक सक्रियता का एक बड़ा मामला समझा गया है। वहां मौजूद लोग झाऊ के प्रति अपना समर्थन जता रहे थे और मांग कर रहे थे कि इस मामले में उठे सवालों के जवाब दिए जाएं। लेकिन वहां पुलिस ने लोगों से प्लेकार्ड ना दिखाने को कहा। कुछ खबरों के मुताबिक पुलिस ने जबरन वहां लगाए प्लेकार्ड्स को हटा दिया।

शियांजी ने यह भी बताया कि उन्होंने पुलिस में भी शिकायत दर्ज करवाई थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें आरोप वापस लेने को कहा क्योंकि झू जुन एक बड़े टीवी होस्ट हैं और समाज में उनका काफी रुतबा है।

झाऊ ने उम्मीद जताई है कि ये केस चीन की कानूनी व्यवस्था में एक प्रगति साबित होगा। झाऊ का आरोप है कि 2014 में वे ड्रेसिंग रूम में झू जुन के साथ अकेली रह गई थीं। तब झू जुन ने उनसे पूछा कि क्या तुम इस चैनल में आगे भी काम करना चाहती हो। जब झाऊ ने हां कहा, तो झू जुन ने उन्हें जकड़ लिया और जबरन किस किया।

वहीं टीवी एंकर झू जुन ने आरोपों का खंडन किया और झाऊ पर उल्टा मानहानि का केस कर दिया है।

शुरुआत में झू जुन के खिलाफ केस व्यक्तिगत अधिकार कानून के तहत दर्ज हुआ था। इस कानून में व्यक्तियों की सेहत और शरीर की रक्षा का प्रावधान है, लेकिन जब मई में नया कानून बना, तो उनके वकीलों ने इसके तहत मामले की सुनवाई की अर्जी दी।

2018 में दुनिया भर में मी-टू आंदोलन के तहत अनगिनत महिलाएं सामने आई थीं और अतीत में हुए उनके साथ हुए यौन उत्पीड़न के मामलों का खुलासा किया था। झाऊ भी तभी सामने आई थीं। मी-टू आंदोलन चीन में काफी जोरशोर से चला था।

 

 

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PIB की इस शाखा के नए डायरेक्टर नियुक्त किए गए अजय महिमा

अजय महिमा ने पदभार ग्रहण कर लिया है। वह इससे पहले कोलकाता में निदेशक के पद पर सेवारत थे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 03 December, 2020
Last Modified:
Thursday, 03 December, 2020
PIB

अजय महिमा प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) की सिक्किम शाखा के नए निदेशक (Director)  (मीडिया और संचार) नियुक्त किए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सहायक निदेशक एस मित्रा ने बताया कि भारतीय सूचना सेवा के अधिकारी महिमा ने पदभार ग्रहण कर लिया है। वह इससे पहले कोलकाता में निदेशक के पद पर सेवारत थे।

जुलाई 2015 में तत्कालीन निदेशक सीके दोर्जी की सेवानिवृत्ति के बाद अजय महिमा ने अब पीआईबी का नेतृत्व संभाला है। इससे पहले यह पद खाली था।

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‘देशबंधु’ के प्रधान संपादक ललित सुरजन का निधन, राजकीय सम्मान के साथ होगी अंतिम विदाई

देशबंधु समाचार समूह के प्रधान संपादक व वरिष्ठ पत्रकार ललित सुरजन का बुधवार रात करीब 8 बजे निधन हो गया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 03 December, 2020
Last Modified:
Thursday, 03 December, 2020
LalitSurjan

देशबंधु समाचार समूह के प्रधान संपादक व वरिष्ठ पत्रकार ललित सुरजन का बुधवार रात करीब 8 बजे निधन हो गया। 74 वर्षीय ललित सुरजन के परिवार के सदस्यों ने बताया कि वे कैंसर के इलाज के लिए दिल्ली में थे। सोमवार को अचानक ब्रेन स्ट्रोक होने के बाद उन्हें धर्मशीला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका निधन हो गया। छत्तसीगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उनके अंतिम संस्कार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ करने के निर्देश प्रशासन को दिए हैं।

छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार ललित सुरजन के परिवार में पत्नी और तीन बेटियां हैं। उनके निधन पर राज्यपाल अनुसुईया उइके और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दुख जताया है। राज्यपाल उइके ने ट्वीट कर कहा, ‘वरिष्ठ पत्रकार व देशबंधु पत्र के प्रधान संपादक श्री ललित सुरजन जी के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ। पत्रकारिता के क्षेत्र में श्री सुरजन जी के योगदान को सदैव याद किया जाएगा। मैं ईश्वर से प्रार्थना करती हूं कि दिवंगत आत्मा को शांति एवं परिजनों को संबल प्रदान करें।’

वहीं ट्विटर के जरिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने शोक संदेश में कहा, ‘ललित सुरजन जी के निधन की सूचना ने स्तब्ध कर दिया है। आज छत्तीसगढ़ ने अपना एक सपूत खो दिया। सांप्रदायिकता और कूपमंडूकता के खिलाफ देशबंधु के माध्यम से जो लो मायाराम सुरजन जी ने जलाई थी, उसे ललित भैया ने बखूबी आगे बढ़ाया।’

सीएम बघेल ने कहा कि पूरी ज़िंदगी उन्होंने मूल्यों को लेकर कोई समझौता नहीं किया। मैं ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार को संबल देने की प्रार्थना करता हूं। ललित भैया को मैं छात्र जीवन से ही जानता था और राजनीति में आने के बाद समय-समय पर मार्गदर्शन लेता रहता था।

एक अन्य ट्वीट में सीएम लिखते हैं, ‘वे राजनीति पर पैनी नजर रखते थे और लोकतंत्र में उनकी गहरी आस्था थी। नेहरू जी के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा मुझे बहुत प्रेरित करती थी। उनके नेतृत्व में देशबंधु ने दर्जनों ऐसे पत्रकार दिए हैं, जिन पर छत्तीसगढ़ और मप्र दोनों को गर्व हो सकता है।’

ललित सुरजन देशबंधु पत्र समूह के प्रधान संपादक थे। वे 1961 से एक पत्रकार के रूप में कार्यरत थे। वे एक जाने माने कवि व लेखक थे। ललित सुरजन स्वयं को एक सामाजिक कार्यकर्ता मानते थे तथा साहित्य, शिक्षा, पर्यावरण, सांप्रदायिक सदभाव व विश्व शांति से सम्बंधित विविध कार्यों में उनकी गहरी संलग्नता थी।

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