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नई सोच, पुराना आधार: करियर में 'कमबैक' का नया चलन
मीडिया इंडस्ट्री, जो हमेशा भविष्य पर केंद्रित रहती है, उसमें अब कई भारतीय मीडिया लीडर फिर से अपने भीतर झांक रहे हैं और उन्हीं संगठनों की ओर लौट रहे हैं, जहां से कभी उन्होंने विदाई ली थी।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 6 months ago
अनुजा जैन, कॉरेस्पोंडेंट, एक्सचेंज4मीडिया ।।
वापसी की सबसे अनपेक्षित बात क्या होती है? अकसर लोग मानते हैं कि वापसी अचानक या अनजाने में होती है, लेकिन हकीकत यह है कि ऐसा बहुत कम होता है। मीडिया इंडस्ट्री, जो हमेशा भविष्य पर केंद्रित रहती है, उसमें अब कई भारतीय मीडिया लीडर फिर से अपने भीतर झांक रहे हैं और उन्हीं संगठनों की ओर लौट रहे हैं, जहां से कभी उन्होंने विदाई ली थी। ये न तो असफलता की कहानियां हैं और न ही मजबूरी में लिए गए फैसले। बल्कि ये बेहद सोच-समझकर की गई वापसी है- अपने शुरुआती सफर को एक नए नजरिए और मिशन के साथ फिर से जीने का फैसला। और यह चलन आज करियर ग्रोथ की पारंपरिक परिभाषा को पूरी तरह उलट रहा है।
उदाहरण के तौर पर अजित वर्गीज को ही लें। तीन दशकों का अनुभव रखने वाले इस मीडिया दिग्गज ने JioStar, ShareChat और GroupM जैसे प्लेटफॉर्म्स पर काम किया है और हाल ही में वह Madison World में Group CEO और पार्टनर के रूप में लौटे हैं। इस पर उन्होंने कहा है, “Madison में लौटना घर आने जैसा है, लेकिन इस बार एक नई दृष्टि और बड़े मकसद के साथ,”
उनकी वापसी जितनी अतीत से जुड़े अधूरे काम को पूरा करने की है, उतनी ही पहचाने गए मैदान से भविष्य को दोबारा गढ़ने की कोशिश भी।
यह केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं है, बल्कि भारत के मीडिया और मार्केटिंग जगत में उभरती एक बड़ी प्रवृत्ति का संकेत है। हाल के वर्षों में कई सीनियर प्रोफेशनल वापस अपने पुराने संगठनों में लौटते देखे गए हैं। यह रिटर्न नॉस्टैल्जिया से नहीं, बल्कि एक अनकहे वादे की पूर्ति की भावना से प्रेरित है- खुद में और उन संस्थानों में, जिनके निर्माण में उन्होंने भूमिका निभाई थी।
एक और उदाहरण है मोना जैन का, जिन्होंने Zee Media में दूसरी बार वापसी की थी और तब Chief Revenue Officer के रूप में। उनकी वापसी एक सामान्य “रीहायरिंग” नहीं थी बल्कि एक नई प्रतिबद्धता की तरह महसूस होती है, क्योंकि वह कंपनी की कार्यप्रणाली और बाजार में उसकी स्थिति- दोनों को गहराई से समझती हैं। Zee को सिर्फ उनका अनुभव नहीं मिला, बल्कि एक ऐसी लीडर मिली जो उनकी ‘भाषा’ की प्राकृतिक वक्ता थीं।
इसी तरह, सुनील गाडगिल ने यूरोप में Beiersdorf में सीनियर भूमिकाएं निभाने के बाद Nivea India में मार्केटिंग डायरेक्टर के तौर पर वापसी की। भारतीय बाजार की गहरी समझ के साथ-साथ, वह अब एक वैश्विक दृष्टिकोण लेकर लौटे हैं। सालों की यात्रा और अनुभव ने उन्हें ऐसी रणनीतिक सोच दी है जिसे वे अब स्थानीय विशेषज्ञता के साथ जोड़ सकते हैं।
संचारी चक्रवर्ती की वापसी 22feet Tribal WW (DDB Mudra Group) में Senior VP और हेड ऑफ स्ट्रैटेजी के तौर पर इसी प्रवृत्ति का प्रतीक है।
Leo Burnett और Tilt Brand Solutions में Netflix, Meta और Instagram जैसे ब्रैंड्स के लिए कैंपेन लीड करने से पहले उन्होंने इस संस्था में 10 साल से ज्यादा वक्त बिताया था। उनकी यह वापसी पूरी तरह से रणनीतिक सोच का नतीजा है। अब उनके पास एक ऐसा टीम होगी, जो उनकी क्रिएटिव भाषा को समझती है और DDB के पास एक ऐसा लीडर होगा जिसके पास अनुभव की ठोस नींव है। अब फोकस इस बात पर नहीं है कि वह कहां-कहां रहीं, बल्कि इस पर है कि अब वे साथ मिलकर कहां तक जा सकते हैं।
गौरांग मेनन की वापसी भी कुछ ऐसी ही कहानी है। इस बार Chief Creative Officer के रूप में BC Web Wise से जुड़े हैं। वह एक जाना-पहचाना नाम तो थे ही, लेकिन अब उनकी वापसी एक नए अध्याय की शुरुआत है- एक ऐसा लीडर जो अब नेटवर्क एजेंसियों में अर्जित विविध अनुभव के साथ लौटा है। उनकी वापसी बताती है कि कई लीडर्स एक मजबूत नींव पर नए प्रयोग करने के लिए ही वापस लौटते हैं, ताकि संस्था में निरंतरता और नई रचनात्मक ऊर्जा दोनों लाई जा सके।
ऐसे दौर में जहां करियर मूवमेंट अब वर्टिकल से ज्यादा लेटरल होता जा रहा है, कंपनियां अब केवल नया टैलेंट नहीं, बल्कि लौटे हुए लीडर्स को भी ज्यादा महत्व देने लगी हैं, जो ताजा दृष्टिकोण के साथ संदर्भगत समझ (contextual intelligence) भी लाते हैं।
इन "वापसियों" में एक खास बात है- पिछले अनुभव की गहरी समझ (contextual intelligence) और नई सोच का मेल।
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