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साल 2025: जब मीडिया इंडस्ट्री में मिले दो 'धुरंधर', बदल गई पूरी तस्वीर
साल 2025 भारतीय और वैश्विक मीडिया इंडस्ट्री के लिए बेहद रोमांचक और उथल-पुथल भरा रहा। इस साल बड़ी कंपनियों ने भविष्य की मजबूती और बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए रणनीतिक हाथ मिलाए।
Vikas Saxena 1 month ago
साल 2025 भारतीय और वैश्विक मीडिया इंडस्ट्री के लिए बेहद रोमांचक और उथल-पुथल भरा रहा। इस साल बड़ी कंपनियों ने भविष्य की मजबूती और बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए रणनीतिक हाथ मिलाए। टीवी, डिजिटल, ओटीटी और कंटेंट बिजनेस के क्षेत्र में जॉइंट वेंचर और मर्जर ने न सिर्फ कंपनियों के स्केल को बढ़ाया, बल्कि इंडस्ट्री की दिशा और रणनीति को भी नया आकार दिया।
कंपनियों ने अपनी पहुंच बढ़ाने, दर्शकों के अनुभव को बेहतर बनाने और डिजिटल बदलाव के दबाव का मुकाबला करने के लिए विभिन्न तरह के गठजोड़ किए। इस प्रक्रिया में कंटेंट लाइब्रेरी, तकनीकी प्लेटफॉर्म, विज्ञापन नेटवर्क और ब्रैंड वैल्यू को ध्यान में रखकर फैसले लिए गए, जिससे इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा और सहयोग का नया संतुलन बन पाया। परिणामस्वरूप, 2025 का साल मीडिया इंडस्ट्री के लिए बदलाव, अवसर और नए प्रारूपों के लिए आधारशिला साबित हुआ।
पूरी हो चुकी प्रमुख डील्स: जहां तस्वीर साफ रही
डिज्नी-स्टार और रिलायंस का जॉइंट वेंचर: साल की सबसे बड़ी मीडिया डील
2025 की सबसे बड़ी और चर्चित मीडिया डील वाल्ट डिज्नी और रिलायंस इंडस्ट्रीज के बीच बना जॉइंट वेंचर रहा। डिज्नी ने भारत में अपने टीवी और डिजिटल बिजनेस को रिलायंस के साथ मिलाकर एक नई ताकत खड़ी की। स्टार इंडिया के चैनल्स, हॉस्टार और रिलायंस के वायकॉम18 नेटवर्क को एक छत के नीचे लाने का यह फैसला भारतीय मीडिया इतिहास के सबसे बड़े कंसॉलिडेशन में गिना गया।
इस जॉइंट वेंचर ने न सिर्फ टीवी और डिजिटल स्पेस में प्रतिस्पर्धा की परिभाषा बदली, बल्कि यह साफ संकेत दिया कि भारत में अकेले लड़ना अब वैश्विक कंपनियों के लिए आसान नहीं रहा। कंटेंट, स्पोर्ट्स राइट्स और टेक्नोलॉजी- तीनों मोर्चों पर स्केल ही असली ताकत बन चुका है।
मैडिसन मीडिया–HiveMinds
मैडिसन मीडिया ने डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी HiveMinds का 100% अधिग्रहण पूरा कर लिया। इस डील के साथ HiveMinds पूरी तरह मैडिसन वर्ल्ड के नेटवर्क का हिस्सा बन गई। यह अधिग्रहण मैडिसन की डिजिटल और परफॉर्मेंस मार्केटिंग क्षमताओं को मजबूत करने की रणनीति का अहम हिस्सा माना गया।
फ्लिपकार्ट–पिंकविला
ई-कॉमर्स दिग्गज फ्लिपकार्ट ने डिजिटल मीडिया कंपनी पिंकविला का अधिग्रहण पूरा किया। इस कदम को कंटेंट-कॉमर्स और एंटरटेनमेंट आधारित कंज्यूमर इंगेजमेंट बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना गया। पिंकविला अब फ्लिपकार्ट के कंटेंट इकोसिस्टम का हिस्सा है।
सारेगमा–Finnet Media
सारेगमा ने Finnet Media का अधिग्रहण पूरा कर लिया, जिससे कंपनी का शॉर्ट-फॉर्म वीडियो और डिजिटल कंटेंट पोर्टफोलियो और मजबूत हुआ। यह डील खास तौर पर यंग डिजिटल ऑडियंस को ध्यान में रखकर की गई।
Yaap Digital–GoZoop Online
Yaap Digital ने GoZoop Online के अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद GoZoop की डिजिटल और सोशल मीडिया क्षमताएं Yaap के नेटवर्क में समाहित हो गईं।
Connekkt Media–Mob Scene
भारत की Connekkt Media ने हॉलीवुड की मार्केटिंग एजेंसी Mob Scene का अधिग्रहण पूरा किया। यह भारतीय एजेंसी द्वारा किया गया एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहण माना गया, जिससे Connekkt की ग्लोबल मौजूदगी मजबूत हुई।
सैफायर मीडिया–92.7 BIG FM
सैफायर मीडिया लिमिटेड ने 92.7 BIG FM रेडियो नेटवर्क का अधिग्रहण पूरा किया। इसके साथ ही रेडियो इंडस्ट्री में लंबे समय से चल रही अनिश्चितता का अंत हुआ।
WPP–InfoSum
वैश्विक ऐडवरटाइजिंग दिग्गज WPP ने डेटा कंपनी InfoSum का अधिग्रहण पूरा किया। यह डील कुकीलैस ऐडवर्टाइजिंग और डेटा कोलैबोरेशन के भविष्य को ध्यान में रखकर की गई।
Omnicom–Interpublic Group
नवंबर 2025 में Omnicom ने आधिकारिक तौर पर The Interpublic Group of Companies (IPG) के अधिग्रहण को पूरा करने की घोषणा की। सभी जरूरी रेगुलेटरी मंजूरियां मिलने और क्लोज़िंग कंडीशंस पूरी होने के बाद यह मेगा डील फाइनल हुई। इस अधिग्रहण के साथ Omnicom और IPG का संयोजन दुनिया की सबसे बड़ी मार्केटिंग और सेल्स कंपनी के रूप में उभरा।
NDTV–GoodTimes डील
भारत में 2025 की एक अहम लेकिन अपेक्षाकृत शांत डील NDTV द्वारा GoodTimes चैनल का अधिग्रहण रही। इस कदम को NDTV के न्यूज केंद्रित ब्रैंड से आगे बढ़कर लाइफस्टाइल और फीचर कंटेंट में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के तौर पर देखा गया। यह डील बताती है कि न्यूज नेटवर्क अब सिर्फ खबरों तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि दर्शकों के साथ लंबे समय तक जुड़ाव बनाने वाले कंटेंट सेगमेंट की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
आंशिक या रणनीतिक अधिग्रहण
A23 (Head Digital)–Deltatech Gaming
A23 की पैरेंट कंपनी Head Digital ने Deltatech Gaming में 51% हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया। यह मेजॉरिटी स्टेक डील है, जिसमें ऑपरेशनल कंट्रोल Head Digital के पास गया, जबकि बाकी हिस्सेदारी प्रमोटर्स के पास बनी रही।
Sony का Peanuts में बहुमत नियंत्रण
2025 में Sony Group ने मशहूर कॉमिक और एनिमेशन फ्रैंचाइजी Peanuts में बहुमत हिस्सेदारी हासिल की। Charlie Brown और Snoopy जैसे कैरेक्टर सिर्फ बच्चों के कंटेंट तक सीमित नहीं रहे, बल्कि ग्लोबल लाइसेंसिंग, मर्चेंडाइज और डिजिटल एक्सटेंशन का बड़ा बिजनेस बन चुके हैं।
इस डील ने साफ कर दिया कि आने वाले समय में IP ownership मीडिया कंपनियों के लिए सबसे बड़ा एसेट बनने जा रहा है, खासकर ऐसे दौर में जब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स कंटेंट की लंबी उम्र और री-यूज वैल्यू पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं।
वैश्विक मीडिया मार्केट में निर्णायक सौदे
Havas–Kaimera
Havas ने स्वतंत्र मीडिया एजेंसी Kaimera का अधिग्रहण किया, जिससे कंपनी की स्ट्रैटेजिक और कंसल्टिंग क्षमताएं बढ़ीं। यह डील पूरी हो चुकी है और Kaimera अब Havas नेटवर्क का हिस्सा है।
Paramount Skydance–The Free Press
Paramount Skydance ने The Free Press में रणनीतिक निवेश/साझेदारी की। यह पूर्ण अधिग्रहण नहीं बल्कि कंटेंट और ब्रैंड विस्तार को लेकर किया गया कदम है।
Hotel Designs–SPACE Magazine
Hotel Designs ने SPACE मैगजीन का अधिग्रहण पूरा किया, जिससे डिजाइन और आर्किटेक्चर मीडिया स्पेस में इसका दायरा बढ़ा।
Netflix–Warner Bros. Discovery: अधिग्रहण नहीं, साझेदारी
Netflix और Warner Bros. Discovery के बीच 2025 में कोई मर्जर या अधिग्रहण नहीं हुआ, लेकिन दोनों के बीच लाइसेंसिंग और कंटेंट डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर रणनीतिक समझौते जरूर हुए। इसे डील की बजाय इंडस्ट्री की मजबूरी से जन्मी साझेदारी के तौर पर देखा गया।
Warner Bros. Discovery और Paramount: बातचीत हुई, भरोसा नहीं बना
वैश्विक स्तर पर 2025 में सबसे ज्यादा चर्चा Warner Bros. Discovery और Paramount के संभावित जॉइंट वेंचर या अधिग्रहण को लेकर रही। कई दौर की बातचीत और संशोधित ऑफर के बावजूद यह डील किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी।
कंपनी के बड़े शेयरधारकों ने वैल्यूएशन और भविष्य की रणनीति को लेकर सवाल उठाए। यह मामला इस बात का उदाहरण बना कि आज के समय में सिर्फ कंटेंट लाइब्रेरी या ब्रैंड नेम ही काफी नहीं, बल्कि फाइनेंशियल स्ट्रक्चर और लॉन्ग-टर्म ग्रोथ प्लान भी उतना ही अहम है।
क्यों टूट रही हैं बड़ी डील्स?
2025 की टूटी डील्स ने कुछ बड़े सबक भी दिए। सबसे अहम कारण रहा कॉरपोरेट गवर्नेंस और कंट्रोल को लेकर असहमति। इसके अलावा रेगुलेटरी जांच, शेयरधारकों का दबाव और तेजी से बदलता बिजनेस मॉडल भी बड़ी रुकावट बने।
मीडिया इंडस्ट्री में अब फैसले सिर्फ भावनाओं या ब्रैंड वैल्यू पर नहीं बल्कि डेटा, सब्सक्रिप्शन ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी पर हो रहे हैं।
जॉइंट वेंचर क्यों बन रहे हैं मजबूरी?
इस साल बने जॉइंट वेंचर्स यह दिखाते हैं कि कंटेंट, टेक्नोलॉजी और डिस्ट्रीब्यूशन– तीनों में भारी निवेश की जरूरत है। अकेली कंपनियों के लिए यह बोझ उठाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में संसाधन साझा करना और जोखिम बांटना एक व्यावहारिक रास्ता बन चुका है।
2026 की ओर इशारा
2025 ने साफ संकेत दे दिया है कि आने वाले सालों में मीडिया इंडस्ट्री में कम लेकिन ज्यादा ताकतवर खिलाड़ी होंगे। जॉइंट वेंचर और कंसॉलिडेशन की रफ्तार धीमी नहीं पड़ेगी, लेकिन हर डील अब पहले से ज्यादा सख्त जांच और रणनीतिक सोच के साथ होगी।
YearEnder 2025 यह बताता है कि मीडिया की दुनिया में सिर्फ कंटेंट किंग नहीं है, बल्कि सही साझेदारी और सही समय पर लिया गया फैसला ही असली गेम-चेंजर बन रहा है।
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