टाइम्स ऑफ इंडिया डिजिटल (TOI Digital) ने मेघना डेका को नेशनल एडिटर और वीडियो स्ट्रैटेजी की हेड नियुक्त किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
टाइम्स ऑफ इंडिया डिजिटल (TOI Digital) ने मेघना डेका को नेशनल एडिटर और वीडियो स्ट्रैटेजी की हेड नियुक्त किया है। अपनी नई भूमिका में मेघना, TOI Digital के वीडियो कारोबार की रणनीति और उसके विस्तार की जिम्मेदारी संभालेंगी। वह टाइम्स ऑफ इंडिया डिजिटल की एग्जिक्यूटिव एडिटर-वीडियो अदिति प्रसाद को रिपोर्ट करेंगी।
मेघना की जिम्मेदारी में टाइम्स ऑफ इंडिया के मौजूदा वीडियो पोर्टफोलियो के साथ-साथ नए वीडियो प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाना शामिल होगा। खास तौर पर वह Times Axis, TOI Bharat और Defence HQ के यूट्यूब चैनलों को अलग पहचान वाले वीडियो प्लेटफॉर्म के तौर पर विकसित करने और उनका विस्तार करने पर काम करेंगी।
इसके अलावा वह संपादकीय और बिजनेस टीमों के साथ मिलकर नए वीडियो फॉर्मेट, फ्रेंचाइजी और दर्शकों से जुड़ने के नए अवसरों पर भी काम करेंगी। यह काम TOI Digital के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स के लिए किया जाएगा।
ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म में 22 साल से ज्यादा का अनुभव
मेघना डेका को ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म में 22 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह इससे पहले Times Now में एडिटर-आउटपुट और प्राइम-टाइम एंकर के तौर पर काम कर चुकी हैं। उन्होंने ‘Decoding Now with Meghna Deka’ और ‘Setting the Agenda’ जैसे कार्यक्रमों को एंकर किया है।
Times Now में हेड ऑफ आउटपुट के तौर पर उन्होंने पिछले करीब 8 साल तक चैनल की रणनीति को लीड किया। इससे पहले वह CNN-News18, India Today, NewsX और NDTV में भी संपादकीय भूमिकाओं में काम कर चुकी हैं और एंकरिंग की है।
वीडियो अब न्यूज देखने का अहम जरिया: अदिति प्रसाद
मेघना डेका की नियुक्ति पर अदिति प्रसाद, एग्जीक्यूटिव एडिटर-वीडियो, Times of India Digital ने कहा कि आज वीडियो इस बात का अहम हिस्सा बन गया है कि दर्शक न्यूज को कैसे खोजते और देखते हैं।
उन्होंने कहा कि मेघना ने दो दशक से ज्यादा समय न्यूजरूम में बिताया है और Times Now में प्राइम-टाइम न्यूज के प्रमुख चेहरों में रही हैं। उनके मुताबिक मेघना को अच्छी तरह पता है कि दर्शकों का ध्यान किस तरह बनाए रखा जा सकता है।
अदिति प्रसाद ने कहा कि अब लक्ष्य सिर्फ वीडियो बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि मजबूत वीडियो ब्रैंड तैयार करना है। उन्होंने कहा कि Defence HQ और Times Axis जैसे प्लेटफॉर्म्स से यह पता चला है कि दर्शकों के बीच फोकस्ड और भरोसेमंद वीडियो कंटेंट की मांग है।
'सिर्फ ज्यादा वीडियो बनाने से बात नहीं बनेगी': मेघना डेका
अपनी नियुक्ति पर मेघना डेका ने कहा कि उन्होंने वर्षों तक दर्शकों को सिर्फ हेडलाइन से आगे की पूरी कहानी समझाने की कोशिश की है और वीडियो इसके लिए एक प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने कहा कि न्यूज वीडियो का अगला दौर सिर्फ ज्यादा से ज्यादा वीडियो बनाने से तय नहीं होगा। इसके बजाय ऐसे फॉर्मेट जरूरी होंगे, जिनकी अपनी अलग पहचान और आवाज हो और जिन्हें दर्शक दोबारा देखना चाहें।
मेघना ने कहा कि Times of India की पहुंच और भरोसे के साथ-साथ Times Axis और Defence HQ जैसे प्लेटफॉर्म पहले से दिशा दिखा रहे हैं और ऐसे समय में कुछ नया तैयार करने का यह महत्वपूर्ण मौका है।
क्विंट डिजिटल लिमिटेड ने अपने शेयरधारकों से पोस्टल बैलेट के जरिए 9 अहम प्रस्तावों पर मंजूरी मांगी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
क्विंट डिजिटल लिमिटेड ने अपने शेयरधारकों से पोस्टल बैलेट के जरिए 9 अहम प्रस्तावों पर मंजूरी मांगी है। इनमें कंपनी की अमेरिका स्थित Lee Enterprises Inc. में हिस्सेदारी पर कर्ज के लिए सुरक्षा बनाने, RB Diversified Private Limited को 120 करोड़ रुपये तक का कर्ज देने और कई संबंधित पक्षों के साथ लेन-देन से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। कंपनी ने इसकी जानकारी 1 अक्टूबर 2026 को शेयर बाजार को दी है।
कंपनी ने बताया कि शेयरधारकों की मंजूरी ई-वोटिंग के जरिए ली जाएगी। इसके लिए वोटिंग 2 अक्टूबर 2026 को सुबह 9 बजे शुरू होगी और 31 अक्टूबर 2026 को शाम 5 बजे खत्म होगी।
Lee Enterprises में हिस्सेदारी को लेकर पहला प्रस्ताव
पहले प्रस्ताव में क्विंट डिजिटल ने अपनी Lee Enterprises Inc. में मौजूद हिस्सेदारी को लेकर बोर्ड को सुरक्षा बनाने की मंजूरी देने की बात कही है। कंपनी के पास Lee Enterprises के 32,44,800 शेयर हैं। कंपनी या उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियां भविष्य में कर्ज या अन्य वित्तीय सुविधा ले सकती हैं, जिसके लिए इन शेयरों को सुरक्षा के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
प्रस्ताव में कंपनी के बोर्ड को इन शेयरों पर गिरवी, चार्ज या दूसरी तरह की सुरक्षा बनाने की अनुमति देने की बात है। साथ ही, जरूरत पड़ने पर कंपनी अपनी इस हिस्सेदारी को बेच भी सकती है। हालांकि, दस्तावेज में साफ कहा गया है कि अभी बोर्ड ने Lee Enterprises में अपनी हिस्सेदारी बेचने का कोई फैसला मंजूर नहीं किया है। यह प्रस्ताव फिलहाल एक सक्षम मंजूरी के तौर पर रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर कंपनी वित्त जुटा सके।
RB Diversified को 120 करोड़ रुपये तक कर्ज
दूसरे प्रस्ताव में RB Diversified Private Limited को कर्ज देने के लिए शेयरधारकों की मंजूरी मांगी गई है। इसके तहत कंपनी एक या कई चरणों में कर्ज दे सकती है और किसी भी समय इस कर्ज की कुल बकाया राशि 120 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं होगी। कर्ज का इस्तेमाल RB Diversified अपने मुख्य कारोबार और कार्यशील पूंजी की जरूरतों के लिए करेगी।
इसी कंपनी के साथ कर्ज से जुड़े 120 करोड़ रुपये तक के संबंधित पक्ष के लेन-देन को मंजूरी देने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
Shvaas Creations को 5 करोड़ रुपये तक कर्ज
चौथे प्रस्ताव में Shvaas Creations Private Limited को कर्ज देने की मंजूरी मांगी गई है। कंपनी के मुताबिक, Shvaas एक सहायक कंपनी और संबंधित पक्ष है।
प्रस्ताव के तहत Shvaas को उसकी फंडिंग और कार्यशील पूंजी की जरूरतों के लिए अधिकतम 5 करोड़ रुपये तक का कर्ज दिया जा सकता है। यह कर्ज असुरक्षित होगा और इसकी ब्याज दर कंपनी द्वारा लिए गए किसी भी कर्ज की सबसे ऊंची ब्याज दर से 68 बेसिस पॉइंट ज्यादा रखने का प्रस्ताव है। कर्ज की अवधि 12 महीने तक या आपसी सहमति से तय दूसरी अवधि हो सकती है।
Make A Difference Hospitality के साथ 50 करोड़ रुपये तक का समझौता
पांचवें प्रस्ताव में Make A Difference Hospitality Private Limited के साथ संबंधित पक्ष के लेन-देन को मंजूरी देने की बात है। इसके तहत कंपनी की जगह, उससे जुड़ी सप्लाई, सेवाओं और संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर समझौता किया जा सकता है।
इस लेन-देन की कुल सीमा प्रति वर्ष 50 करोड़ रुपये तक रखी गई है।
Quintype से जुड़े कई प्रस्ताव
क्विंट डिजिटल ने अपनी सहायक कंपनियों Quintype Technologies India Limited, Quintype Technologies Inc. और Quintype Services India Private Limited के साथ जुड़े कई लेन-देन की सीमा और अवधि में बदलाव के लिए भी शेयरधारकों की मंजूरी मांगी है।
एक प्रस्ताव के तहत Quintype Technologies India Limited की ओर से Quintype Technologies Inc. को प्रोडक्ट की बिक्री, प्लेटफॉर्म लाइसेंस, होस्टिंग, मानव संसाधन, प्रशासन, वित्त, बैक-ऑफिस सपोर्ट, रिसर्च एंड डेवलपमेंट जैसी सेवाएं दी जा सकती हैं। इसके लिए 5 साल की अवधि और अलग-अलग वित्त वर्षों के लिए 25 करोड़ रुपये से 75 करोड़ रुपये तक की सालाना सीमा प्रस्तावित है।
एक अन्य प्रस्ताव में Quintype Services India Private Limited की ओर से लोगों और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े संसाधन, प्रशासन, वित्त, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, प्रोडक्ट इंजीनियरिंग, तकनीकी सहायता और ग्राहक सेवा जैसी सेवाओं का प्रावधान शामिल है। इसके लिए भी 2031 तक की अवधि और वित्त वर्ष के हिसाब से 25 करोड़ रुपये से 75 करोड़ रुपये तक की सीमा प्रस्तावित है।
RBD Real Estate को 100 करोड़ रुपये तक वित्तीय मदद
नौवें प्रस्ताव में कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Global Media Technologies Inc. समेत अन्य पूर्ण स्वामित्व वाली विदेशी सहायक कंपनियों को RBD Real Estate Inc. और उसकी विदेशी सहयोगी कंपनियों को कर्ज, अग्रिम या अन्य वित्तीय मदद देने की अनुमति मांगी गई है।
इसकी कुल बकाया सीमा किसी भी समय 100 करोड़ रुपये तक रखने का प्रस्ताव है। यह वित्तीय मदद तय नियमों के मुताबिक और सामान्य व्यावसायिक शर्तों पर देने की बात कही गई है।
31 अक्टूबर तक वोटिंग
क्विंट डिजिटल के शेयरधारकों के लिए ई-वोटिंग 2 अक्टूबर सुबह 9 बजे से 31 अक्टूबर शाम 5 बजे तक चलेगी। 25 सितंबर 2026 की कट-ऑफ तारीख पर कंपनी के शेयर रखने वाले सदस्य इन प्रस्तावों पर वोट कर सकेंगे।
कंपनी ने ई-वोटिंग की सुविधा के लिए सीडीएसएल की सेवाएं ली हैं। प्रस्तावों पर मतदान के बाद स्क्रूटिनाइजर रिपोर्ट के आधार पर नतीजे जारी किए जाएंगे। अगर जरूरी बहुमत से प्रस्ताव मंजूर होते हैं, तो इन्हें 31 अक्टूबर 2026, यानी ई-वोटिंग की आखिरी तारीख को पारित माना जाएगा।
ऐपल पे ने एक्सिस बैंक के साथ साझेदारी कर भारत में अपनी भुगतान सेवा शुरू की है, शुरुआत में वीजा और मास्टरकार्ड क्रेडिट कार्ड ग्राहकों को सुविधा मिलेगी, रुपे कार्ड पात्र नहीं हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ऐपल (Apple) ने भारत में अपनी पेमेंट सर्विस ऐपल पे (Apple Pay) लॉन्च कर दी है। इसके साथ ही कंपनी ने दुनिया के बड़े डिजिटल पेमेंट मार्केट्स में से एक भारत में अपनी सेवा की शुरुआत की है। इसके लिए एप्पल ने एक्सिस बैंक (Axis Bank) के साथ साझेदारी की है।
फिलहाल ऐपल पे की सुविधा एक्सिस बैंक के वीजा (Visa) और मास्टरकार्ड (Mastercard) नेटवर्क वाले क्रेडिट कार्ड ग्राहकों के लिए उपलब्ध है। भारत के घरेलू रुपे (RuPay) नेटवर्क पर जारी कार्ड अभी इस सेवा के लिए पात्र नहीं हैं।
ऐपल की ऐपल पे और ऐपल वॉलेट की वाइस प्रेसिडेंट जेनिफर बेली (Jennifer Bailey) ने कहा कि भारत की डिजिटल रूप से सक्रिय आबादी कैशलेस भविष्य को अपना रही है और सुरक्षा व प्राइवेसी के उच्च मानकों की उम्मीद करती है। उन्होंने भारत में ऐपल पे लाने को लेकर उत्साह जताया।
कंपनी के मुताबिक, ऐपल पे के जरिए स्टोर, ऑनलाइन और ऐप्स में आसानी से भुगतान किया जा सकता है। इसमें पूरा भुगतान करने, समय के साथ भुगतान करने और रिवॉर्ड्स के इस्तेमाल जैसी सुविधाएं शामिल हैं। कंपनी ने इसे सुरक्षित और प्राइवेट पेमेंट सर्विस बताया है।
दीपक सिंह को ओपनएआई में पार्टनर डायरेक्टर, इंडिया नियुक्त किया गया है। वह भारत में जीटीएम पार्टनरशिप को तैयार करने और विस्तार देने की जिम्मेदारी संभालेंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दीपक सिंह (Deepak Singh) को ओपनएआई (OpenAI) में पार्टनर डायरेक्टर, इंडिया (Partner Director, India) नियुक्त किया गया है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की।
दीपक सिंह ने कहा कि वह ओपनएआई के साथ नई शुरुआत को लेकर उत्साहित हैं और भारत में जीटीएम पार्टनरशिप (GTM Partnerships) को तैयार करने और बड़े स्तर पर विस्तार देने में योगदान करेंगे।
दीपक के पास 23 वर्षों से ज्यादा का ईएनटी (ENT) अनुभव है, जिसमें 12 से अधिक वर्षों का अनुभव क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा/एआई (Cloud Computing & Data/AI) इकोसिस्टम में रहा है। उन्होंने इंटेल (Intel), हेवलेट पैकार्ड (Hewlett Packard), वीएमवेयर (VMware), अमेजन वेब सर्विसेज (Amazon Web Services) और गूगल (Google) जैसी प्रमुख कंपनियों के साथ काम किया है।
अपने करियर में दीपक भारत और सार्क क्षेत्र (SAARC Region) में एडब्ल्यूएस (AWS), गूगल क्लाउड (Google Cloud) और वीएमवेयर के शुरुआती विस्तार और बिल्ड-अप फेज (Build-up Phase) का हिस्सा रहे हैं। उन्हें अलग-अलग इंडस्ट्रीज में क्लाउड एडॉप्शन पैटर्न (Cloud Adoption Patterns) का भी अनुभव है।
ओपनएआई से पहले दीपक सिंह पालो ऑल्टो नेटवर्क्स (Palo Alto Networks) में इंडिया और सार्क के लिए सीनियर डायरेक्टर (Sr Director) के तौर पर एंटरप्राइज बिजनेस (Enterprise Business) संभाल रहे थे।
यूट्यूब, बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मेटा के बहु-राज्यीय सेटलमेंट में शामिल होने की योजना नहीं बना रहा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
यूट्यूब, बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मेटा के बहु-राज्यीय सेटलमेंट में शामिल होने की योजना नहीं बना रहा है। यूट्यूब के सीईओ नील मोहन ने इसकी वजह बताते हुए कहा कि प्लेटफॉर्म पहले से ही युवा यूजर्स की सुरक्षा के लिए कई कदम उठा चुका है।
मोहन ने सीएनएन से कहा, "हमने यह सुनिश्चित करने के लिए लंबे समय से निवेश किया है कि हमारे प्लेटफॉर्म पर युवा सुरक्षित रहें। यूट्यूब से आप उम्मीद कर सकते हैं कि हम इन चीजों पर लगातार ध्यान देते रहेंगे।"
मोहन ने बुधवार को यूट्यूब के सालाना ‘मेड ऑन यूट्यूब’ कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही। इस कार्यक्रम में कंपनी ने क्रिएटर्स और दर्शकों के लिए नए फीचर्स की भी घोषणा की, जिसमें नए AI टूल्स और मैसेजिंग फीचर्स शामिल हैं।
मेटा ने राज्यों के साथ करीब 18 अरब डॉलर के सेटलमेंट पर सहमति जताई है। यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है कि मेटा के प्लेटफॉर्म इस तरह डिजाइन किए गए थे, जिससे युवा यूजर्स के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा। हालांकि, समझौते के तहत मेटा ने किसी गलत काम को स्वीकार नहीं किया है।
इस सेटलमेंट में 13 से 17 साल के यूजर्स के लिए रोजाना इस्तेमाल की समय सीमा, रात के समय इस्तेमाल पर रोक और माता-पिता के लिए ज्यादा मजबूत कंट्रोल जैसे कदम शामिल हैं।
समझौते के तहत मेटा ने कहा है कि वह सेटलमेंट की 70 प्रतिशत रकम का भुगतान करेगा। बाकी 30 प्रतिशत रकम इस बात पर निर्भर करेगी कि यूट्यूब और टिकटॉक इस समझौते में शामिल होते हैं या नहीं और इसी तरह के बदलाव लागू करते हैं या नहीं। राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने कहा है कि अगर ये प्लेटफॉर्म समझौते में शामिल नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
नील मोहन ने यूट्यूब के पहले से मौजूद सुरक्षा उपायों का जिक्र किया। इनमें माता-पिता के लिए ऐसा विकल्प भी शामिल है, जिससे वे यह तय कर सकते हैं कि उनके किशोर बच्चे शॉर्ट्स कितनी देर तक देख सकें। उन्होंने यह भी बताया कि यूट्यूब बच्चों की सुरक्षा से जुड़े फीचर्स पर तीसरे पक्ष के विशेषज्ञों के साथ काम करता है।
मोहन ने कहा कि यूट्यूब और मेटा एक-दूसरे से काफी अलग प्लेटफॉर्म भी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी घरों में टीवी पर यूट्यूब देखने के अनुभव पर ध्यान दे रही है।
टिकटॉक ने मेटा के समझौते में शामिल होने की अपील पर अभी कोई टिप्पणी नहीं की है। वहीं, कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा के कार्यालय ने भी मोहन के इस रुख पर टिप्पणी के लिए भेजे गए अनुरोध का तुरंत जवाब नहीं दिया।
मार्च में लॉस एंजिल्स में हुई एक अलग सुनवाई में यूट्यूब और मेटा को भी जिम्मेदार ठहराया गया था। इस मामले में आरोप था कि उनके प्लेटफॉर्म की वजह से लत और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को बढ़ावा मिला। दोनों कंपनियों ने इस फैसले के खिलाफ अपील करने की योजना बनाई है।
यूट्यूब को युवा यूजर्स से जुड़े अलग-अलग मुकदमों का भी सामना करना पड़ा है। इस साल कंपनी ने टिकटॉक और स्नैप के साथ इसी तरह के दावों से जुड़े कुछ व्यक्तिगत मामलों में समझौता किया है। हालांकि, युवा यूजर्स को नुकसान पहुंचने के आरोपों को लेकर इन कंपनियों के खिलाफ लोगों, परिवारों और स्कूल जिलों की ओर से सैकड़ों मुकदमे अभी भी चल रहे हैं।
डिलिजेंट मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड की 21वीं सालाना आम बैठक 25 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित हुई। कंपनी ने बताया कि AGM में रखे गए दोनों प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ मंजूर हो गए हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डिलिजेंट मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड की 21वीं सालाना आम बैठक (AGM) 25 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित हुई। कंपनी ने बताया कि AGM में रखे गए दोनों प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ मंजूर हो गए हैं।
AGM दोपहर 12:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग/अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यम से हुई। कंपनी ने शेयरधारकों को प्रस्तावों पर वोट करने के लिए रिमोट ई-वोटिंग और AGM के दौरान ई-वोटिंग की सुविधा दी थी।
18 सितंबर 2026 की रिकॉर्ड डेट के मुताबिक, कंपनी के कुल 84,624 शेयरधारक थे। AGM में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप के 7 और पब्लिक कैटेगरी के 41 शेयरधारकों ने हिस्सा लिया। दस्तावेज के मुताबिक, प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप के 7 शेयरधारकों की संख्या उनके पास मौजूद फोलियो की संख्या के आधार पर निकाली गई है।
पहला प्रस्ताव: वित्तीय नतीजों को मंजूरी
पहले प्रस्ताव में 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के कंपनी के ऑडिट किए गए वार्षिक वित्तीय विवरण और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स व ऑडिटर्स की रिपोर्ट को अपनाने की मंजूरी मांगी गई थी। इस प्रस्ताव के पक्ष में कुल 7,86,62,491 वोट पड़े, जबकि 604 वोट इसके खिलाफ रहे। कुल वैध वोटों में 99.999 प्रतिशत वोट प्रस्ताव के पक्ष में रहे।
रिमोट ई-वोटिंग में 169 सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में 7,86,62,486 वोट डाले, जबकि AGM के दौरान ई-वोटिंग में 3 सदस्यों ने 5 वोट प्रस्ताव के पक्ष में दिए। वहीं, रिमोट ई-वोटिंग में 15 सदस्यों ने 604 वोट प्रस्ताव के खिलाफ डाले।
दूसरा प्रस्ताव: मुकेश जिंदल की दोबारा नियुक्ति
दूसरे प्रस्ताव में मुकेश जिंदल को कंपनी के नॉन-एग्जीक्यूटिव, नॉन-इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर दोबारा नियुक्त करने की मंजूरी मांगी गई थी। वह रोटेशन के आधार पर रिटायर होने वाले थे और दोबारा नियुक्ति के लिए पात्र होने के चलते उन्होंने अपना नाम पेश किया था। इस प्रस्ताव के पक्ष में कुल 7,86,61,161 वोट पड़े, जबकि 2,006 वोट इसके खिलाफ रहे। कुल वोटों में 99.997 प्रतिशत वोट प्रस्ताव के पक्ष में रहे।
रिमोट ई-वोटिंग में 165 सदस्यों ने 7,86,61,156 वोट प्रस्ताव के पक्ष में डाले, जबकि AGM के दौरान ई-वोटिंग में 3 सदस्यों ने 5 वोट पक्ष में दिए। वहीं, 19 सदस्यों ने 2,006 वोट प्रस्ताव के खिलाफ डाले। स्क्रूटिनाइजर रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों प्रस्ताव शेयरधारकों ने जरूरी बहुमत के साथ मंजूर कर दिए।
मीता पुष्पल संघवी थीं स्क्रूटिनाइजर
कंपनी ने रिमोट ई-वोटिंग और AGM के दौरान हुई ई-वोटिंग की जांच के लिए एमपी संघवी एंड एसोसिएट्स एलएलपी की डिजाइनटेड पार्टनर मीता पुष्पल संघवी को स्क्रूटिनाइजर नियुक्त किया था।
शेयरधारकों के लिए रिमोट ई-वोटिंग 22 सितंबर 2026 को सुबह 9 बजे शुरू हुई और 24 सितंबर 2026 को शाम 5 बजे समाप्त हुई। 18 सितंबर 2026 की कट-ऑफ डेट तक शेयर रखने वाले वे सदस्य, जिन्होंने रिमोट ई-वोटिंग के जरिए वोट नहीं किया था, उन्हें AGM के दौरान और AGM खत्म होने के 15 मिनट बाद तक ई-वोटिंग की सुविधा दी गई थी।
AGM खत्म होने के बाद 25 सितंबर को ई-वोटिंग के नतीजे खोले गए। स्क्रूटिनाइजर ने बताया कि यह प्रक्रिया दो ऐसे गवाहों की मौजूदगी में हुई, जो कंपनी के कर्मचारी नहीं थे।
गूगल ने Google Cloud पर टेक्स्ट को आवाज में बदलने वाले दो नए AI मॉडल पेश किए हैं। इनमें कस्टम आवाज, अलग-अलग भाषाओं और बोलने की गति बदलने की सुविधा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गूगल (Google) ने अपने क्लाउड प्लेटफॉर्म (Cloud Platform) पर टेक्स्ट को आवाज में बदलने वाले दो नए एआई मॉडल (AI Models) जेमिनी 3.8 फ्लैश टीटीएस (Gemini 3.8 Flash TTS) और जेमिनी 3.8 फ्लैश-लाइट टीटीएस (Gemini 3.8 Flash-Lite TTS) पेश किए हैं। दोनों मॉडल लिखे हुए टेक्स्ट को आवाज में बदलने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
कंपनी ने दोनों मॉडल को अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से तैयार किया है। फ्लैश-लाइट टीटीएस को कम खर्च और तेज काम के लिए बनाया गया है, जबकि फ्लैश टीटीएस बेहतर आवाज की गुणवत्ता पर फोकस करता है।
दोनों मॉडल में 2,000 से ज्यादा पहले से तैयार आवाजों का विकल्प मिलता है। डेवलपर्स अपनी जरूरत के हिसाब से नई आवाज भी बना सकते हैं। इसमें आवाज का टोन (Tone), एक्सेंट (Accent) और बोलने की गति बदली जा सकती है। 30 सेकंड के ऑडियो से भी नई आवाज तैयार की जा सकती है।
गूगल के मुताबिक, फ्लैश टीटीएस 130 भाषाओं में और फ्लैश-लाइट टीटीएस 101 भाषाओं में आवाज तैयार कर सकता है। इसके अलावा, आवाज को जरूरत के अनुसार बदलने की सुविधा भी मिलती है। डेवलपर्स यह तय कर सकते हैं कि कोई लाइन किस तरह और कितनी तेजी से बोली जाए।
गूगल एआई से तैयार की गई आवाज में खास वॉटरमार्क (Watermark) भी जोड़ता है। इसे इंसान सुन नहीं सकते, लेकिन कुछ एआई पहचानने वाले टूल (AI Detection Tools) इसे पहचान सकते हैं। कंपनी ऑडियो के साथ एक रिकॉर्ड भी देती है, जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि फाइल कब बनाई गई थी।
जेमिनी 3.8 फ्लैश टीटीएस और जेमिनी 3.8 फ्लैश-लाइट टीटीएस गूगल क्लाउड पर डेवलपर्स के लिए उपलब्ध हैं। इनका इस्तेमाल ऑडियोबुक (Audiobook), वॉयस एजेंट (Voice Agent) और दूसरे ऐप बनाने में किया जा सकता है। गूगल के मुताबिक, दोनों मॉडल की आवाज की गुणवत्ता को अलग-अलग परीक्षणों में जांचा गया है। दोनों मॉडल की कीमत अलग-अलग हो सकती है।
इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन ने पहली बार कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) की ओर से मार्च 2025 में अपने नई दिल्ली स्थित रजिस्टर्ड ऑफिस में की गई सर्च और सीजर कार्रवाई की जानकारी दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF) ने पहली बार कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) की ओर से मार्च 2025 में अपने नई दिल्ली स्थित रजिस्टर्ड ऑफिस में की गई सर्च और सीजर कार्रवाई की जानकारी दी है। IBDF ने बताया कि यह मामला अभी जांच के स्तर पर है और CCI के डायरेक्टर जनरल (DG-CCI) ने संगठन से अब तक कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं मांगी है।
यह जानकारी IBDF के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में दी गई है। इसके मुताबिक, CCI की जांच शाखा ने 18 मार्च 2025 को IBDF के रजिस्टर्ड ऑफिस में बिना किसी पूर्व सूचना के सर्च और सीजर की कार्रवाई की थी। इस दौरान IBDF को पता चला कि CCI में यह मामला Suo Motu Case No. 02 of 2024 के तौर पर दर्ज है।
यह खुलासा सर्च कार्रवाई के करीब 18 महीने बाद सामने आया है। मार्च 2025 में हुई इस कार्रवाई के समय IBDF, Advertising Agencies Association of India (AAAI) और Indian Society of Advertisers (ISA) ने सार्वजनिक तौर पर इस सर्च को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की थी।
IBDF के मुताबिक, इसके बाद संगठन ने बाहरी वकीलों की नियुक्ति की। इन वकीलों ने CCI के केस रिकॉर्ड की जांच के लिए इंस्पेक्शन रिक्वेस्ट दाखिल की। वकीलों की शुरुआती जांच के आधार पर IBDF ने बताया कि 9 अगस्त 2024 के CCI के एक आदेश में ISA, AAAI, उनके सदस्यों और IBDF के खिलाफ जांच का निर्देश दिया गया था। इसमें Competition Act, 2002 की Section 3 के प्रथम दृष्टया उल्लंघन की बात कही गई थी।
Competition Act की Section 3 ऐसे समझौतों से जुड़ी है, जिनका प्रतिस्पर्धा पर महत्वपूर्ण प्रतिकूल असर पड़ता है या पड़ने की संभावना होती है।
इंडस्ट्री संगठनों की गतिविधियों की भी जांच
CCI की जांच में यह देखा गया कि क्या ISA, AAAI और IBDF की ओर से जारी गाइडलाइंस, एडवाइजरी और व्यावसायिक तौर-तरीकों से प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। CCI ने खास तौर पर उन इंडस्ट्री दस्तावेजों और प्रथाओं की जांच की, जो विज्ञापनदाताओं, विज्ञापन एजेंसियों और ब्रॉडकास्टर्स के बीच संबंधों से जुड़ी थीं।
इसके बाद CCI ने कई बड़े विज्ञापन और मीडिया एजेंसियों के दफ्तरों के साथ-साथ इन इंडस्ट्री संगठनों के दफ्तरों में भी सर्च की कार्रवाई की।
CCI की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि उसे कमीशन और अन्य व्यावसायिक शर्तों को लेकर समन्वय के शुरुआती सबूत मिले हैं। हालांकि, ये सभी बातें अभी जांच का हिस्सा हैं और इन्हें किसी अंतिम तौर पर जिम्मेदारी तय करने का निष्कर्ष नहीं माना गया है।
समन को लेकर अदालत में मामला
IBDF ने अपने खुलासे में CCI की जांच से जुड़ी कानूनी कार्यवाही का भी जिक्र किया है। संगठन ने बताया कि एक पक्ष ने दिल्ली हाई कोर्ट में संवैधानिक रिट याचिका दायर की थी। इसके बाद कोर्ट ने समन पर रोक लगा दी थी।
एक दूसरी संवैधानिक रिट याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने भी समन पर रोक लगा दी है। यह रोक तब तक जारी रहेगी, जब तक दिल्ली हाई कोर्ट संबंधित मामले पर फैसला नहीं करता।
IBDF ने यह भी बताया कि उसके कुछ कर्मचारियों को DG-CCI के सामने पेश होने के लिए समन मिले थे। संगठन ने इन समन को टालने की मांग करते हुए कहा कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चल रही संबंधित कार्यवाही पूरी होने तक समन पर रोक रखी जाए। संगठन ने बताया कि वह फिलहाल DG-CCI के जवाब का इंतजार कर रहा है।
IBDF ने साफ किया कि मामला अभी जांच के स्तर पर है और DG-CCI ने संगठन से आगे कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं मांगी है। इसी वजह से IBDF ने कहा कि इस मामले को लेकर अपने अलग फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में किसी तरह के बदलाव की जरूरत नहीं समझी गई।
IBDF का यह खुलासा अब तक इस मामले में संगठन की भूमिका को लेकर सबसे स्पष्ट जानकारी देता है। इससे यह भी साफ होता है कि इंडस्ट्री संगठनों के खिलाफ CCI की कार्रवाई अभी किसी अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंची है।
फिलहाल CCI की जांच जारी है और DG-CCI ने मामले में शामिल संस्थाओं के खिलाफ अपनी कार्यवाही पूरी नहीं की है। प्रतिस्पर्धा कानून का कोई उल्लंघन हुआ है या नहीं, इस पर अंतिम फैसला कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद CCI की ओर से किया जाएगा।
डिजिटल विज्ञापन एजेंसी ब्लिंक डिजिटल ने मेटा के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में मुकदमा दायर कर चार बिजनेस अकाउंट बहाल करने और 1,000 करोड़ से ज्यादा हर्जाने की मांग की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डिजिटल एडवरटाइजिंग एजेंसी ब्लिंक डिजिटल इंडिया (Blink Digital India) ने मेटा (Meta) के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) का रुख किया है। एजेंसी ने अपने बिजनेस अकाउंट्स और कॉरपोरेट पेज बंद किए जाने को चुनौती देते हुए 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के हर्जाने की मांग की है।
ब्लिंक डिजिटल ने फेसबुक इंडिया ऑनलाइन सर्विसेज (Facebook India Online Services) और मेटा प्लेटफॉर्म्स (Meta Platforms) के खिलाफ कमर्शियल सूट (Commercial Suit) दायर किया है। इसमें चार बिजनेस मैनेजर (Business Manager) अकाउंट्स को बंद किए जाने को चुनौती देते हुए उन्हें बहाल करने की मांग की गई है।
मेटा का बिजनेस मैनेजर प्लेटफॉर्म विज्ञापन एजेंसियों को फेसबुक (Facebook) और इंस्टाग्राम (Instagram) पर कई क्लाइंट अकाउंट्स, एडवरटाइजिंग कैंपेन और बिजनेस पेज मैनेज करने की सुविधा देता है। इन अकाउंट्स के बंद होने से एजेंसियों के लिए कैंपेन मैनेजमेंट और क्लाइंट्स के एडवरटाइजिंग एसेट्स तक पहुंच प्रभावित हो सकती है।
यह मामला 17 सितंबर को जस्टिस संदीप वी. मार्ने (Justice Sandeep V. Marne) के सामने आया। मेटा की ओर से पेश वकील ने ब्लिंक डिजिटल की अंतरिम अर्जी (Interim Application) का विरोध करने के लिए हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा।
कोर्ट ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए मेटा का जवाब मिलने के बाद ब्लिंक डिजिटल को अपना जवाब दाखिल करने के लिए एक अतिरिक्त सप्ताह दिया। अंतरिम अर्जी पर अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को शाम 4:30 बजे तय की गई है।
सुनवाई के दौरान मेटा प्लेटफॉर्म्स की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जनक द्वारकादास (Janak Dwarkadas) ने कहा कि अगली सुनवाई तक कंपनी कानून के मुताबिक ब्लिंक डिजिटल का डेटा सुरक्षित रखेगी। इस आश्वासन को 17 सितंबर के कोर्ट ऑर्डर में दर्ज किया गया है।
कोर्ट ने अभी तक अकाउंट बंद किए जाने की वैधता या ब्लिंक डिजिटल के हर्जाने के दावे पर कोई फैसला नहीं दिया है। अगली सुनवाई में ब्लिंक डिजिटल की अंतरिम राहत की अर्जी पर विचार होगा, जबकि हर्जाने से जुड़ा मुख्य कमर्शियल सूट बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित है।
फेस्टिव सीजन में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर नकली, तस्करी और घटिया उत्पादों की बिक्री रोकने के लिए सीबीआईसी संदिग्ध विक्रेताओं और सामान की जांच कर रही है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
फेस्टिव सीजन में बढ़ती ऑनलाइन शॉपिंग के बीच सरकार ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म (Ecommerce Platforms) पर नकली, तस्करी और घटिया सामान की बिक्री रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी है। इकनॉमिक टाइम्स (Economic Times) की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (Central Board of Indirect Taxes and Customs) यानी सीबीआईसी (CBIC) बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और दूसरी एजेंसियों के साथ मिलकर संदिग्ध विक्रेताओं और उत्पादों की पहचान कर रहा है।
जांच में खासतौर पर ऐसे आयातित सामान पर नजर है, जो असामान्य रूप से कम कीमत पर बेचे जा रहे हैं। इसके अलावा तस्करी के जरिए देश में आने वाले संदिग्ध उत्पादों और जरूरी सर्टिफिकेशन (Certification) या सही घोषणा के बिना बेचे जा रहे सामान की भी जांच की जा रही है।
इस निगरानी में इलेक्ट्रॉनिक सामान, घड़ियां, परफ्यूम और कॉस्मेटिक्स समेत कई कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (Consumer Products) शामिल हैं। अधिकारी ऐसे उत्पादों की भी जांच कर रहे हैं, जिन पर जरूरी कंट्री-ऑफ-ओरिजिन (Country of Origin) की जानकारी मौजूद नहीं है।
फेस्टिव सीजन में ऑनलाइन शॉपिंग बढ़ने से डिजिटल मार्केटप्लेस और लास्ट-माइल डिलीवरी नेटवर्क (Last-Mile Delivery Network) के जरिए बड़ी मात्रा में सामान पहुंचता है। इसी वजह से सरकार का फोकस ऑनलाइन सप्लाई चेन (Online Supply Chain) में उत्पादों और विक्रेताओं की जांच पर बढ़ गया है।
सरकार तेजी से बढ़ रहे डार्क स्टोर्स (Dark Stores) के नेटवर्क की भी जांच कर रही है। क्विक-कॉमर्स और ऑनलाइन डिलीवरी में इस्तेमाल होने वाले इन हाइपरलोकल फुलफिलमेंट सेंटर (Hyperlocal Fulfilment Centres) की संख्या तेजी से बढ़ी है। इनका फैला हुआ नेटवर्क निगरानी को चुनौतीपूर्ण बना सकता है। अधिकारियों की नजर संभावित टर्नओवर और रेवेन्यू (Revenue) की अंडर-रिपोर्टिंग से जुड़ी चिंताओं पर भी है।
रिसर्च कंसल्टेंसी इन्फिसम (Infisum) के मुताबिक, भारत का ई-कॉमर्स मार्केट 2024 के 125 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक करीब 345 अरब डॉलर हो सकता है। वहीं, डार्क स्टोर्स का नेटवर्क 2025 के 2,525 आउटलेट्स से बढ़कर 2030 तक करीब 7,500 आउटलेट्स तक पहुंचने का अनुमान है।
क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) ने बताया है कि उसे अपने नए शेयर और वारंट को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने और उनमें कारोबार शुरू करने के लिए BSE से मंजूरी मिल गई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) ने बताया है कि उसे अपने नए शेयर और वारंट्स को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने और उनमें कारोबार शुरू करने के लिए बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) से मंजूरी मिल गई है। कंपनी को यह मंजूरी 16 सितंबर 2026 को मिली है।
कंपनी के मुताबिक, इसके तहत 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता (Partly Paid-Up) 10 प्रतिशत गैर-संचयी, गैर-भागीदारी और अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय प्राथमिकता शेयर (Non-Cumulative Non-Participating Compulsorily Convertible Preference Shares) जारी किए गए हैं।
इन शेयरों का अंकित मूल्य 100 रुपये है। इसके साथ ही 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता अलग किए जा सकने वाले वारंट्स (Partly Paid-Up Detachable Warrants) भी जारी किए गए हैं, जिनका अंकित मूल्य 10 रुपये है। इन दोनों में कारोबार शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 से शुरू होगा।
कंपनी ने बताया कि यह मंजूरी इस मामले में पहले दी गई जानकारियों के आगे की कड़ी है। इससे पहले कंपनी ने 22 मई, 19 अगस्त, 21 अगस्त, 28 अगस्त, 11 सितंबर और 16 सितंबर 2026 को इस संबंध में शेयर बाजार को जानकारी दी थी।
BSE की ओर से जारी सूचना के मुताबिक, Quint Digital के 82,61,401 प्राथमिकता शेयर अधिकार के आधार पर जारी किए गए हैं। इनका अंकित मूल्य 100 रुपये प्रति शेयर है, जबकि अभी प्रत्येक शेयर पर 50 रुपये चुकाए गए हैं। इन शेयरों का कोड 710058 है और इन्हें QDLCCPS पहचान के साथ कारोबार के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इनका आवंटन 11 सितंबर 2026 को किया गया था।
इसके अलावा 82,61,401 वारंट भी अधिकार के आधार पर जारी किए गए हैं। प्रत्येक वारंट का अंकित मूल्य 10 रुपये है, जिसमें से अभी 5 रुपये चुकाए गए हैं। इन वारंट का कोड 961921 है और इन्हें QDLDW पहचान के साथ कारोबार के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इनका आवंटन भी 11 सितंबर 2026 को किया गया था।