निवेशकों को ठगने वालों पर SEBI की बड़ी कार्रवाई, सोशल मीडिया से 1 लाख भ्रामक कंटेंट हटाया

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने पिछले 18 महीनों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 1 लाख से अधिक अवैध या भ्रामक कंटेंट की पहचान की है।

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Tuesday, 07 October, 2025
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भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने पिछले 18 महीनों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 1 लाख से अधिक अवैध या भ्रामक कंटेंट की पहचान की है और उन पर रोक लगाई है। यह जानकारी सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने सोमवार को दी।

सेबी प्रमुख नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में आयोजित वर्ल्ड इन्वेस्टर वीक 2025 के शुभारंभ समारोह में बोल रहे थे।

निवेशक जागरूकता बढ़ाने और धोखाधड़ी पर रोक लगाने के अपने अभियान के तहत सेबी ने कई नए कदम उठाए हैं। इनमें पंजीकृत बिचौलियों को भुगतान के लिए सत्यापित UPI हैंडल्स की सुविधा और एक नया ‘Sebi Check’ वेरिफिकेशन टूल शामिल है।

इसके अलावा, सेबी अब राज्य की राजधानियों और बड़े शहरों में स्थानीय कार्यालय भी स्थापित कर रहा है, ताकि निवेशकों तक पहुंच मजबूत की जा सके और अनियमित बाजार गतिविधियों की निगरानी की जा सके।

तुहिन कांत पांडे ने निवेशकों को चेतावनी दी कि ठग अब सतर्क बचतकर्ताओं को भी उच्च जोखिम वाले निवेशों को सुरक्षित बताकर गुमराह कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ने जहां बाजार को हमारी उंगलियों तक पहुंचा दिया है, वहीं इसने ठगों को भी नए औज़ार दे दिए हैं। मैसेजिंग ऐप्स पर आने वाले अवांछित संदेश, संदिग्ध ‘फिनफ्लुएंसर्स’ और फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स या वेबसाइट्स एक ऐसी चीज़ का वादा करते हैं जो बाजार कभी नहीं दे सकता- गारंटीड रिटर्न।”

सेबी प्रमुख ने यह भी बताया कि भारत में बाजार में भागीदारी दर अभी भी बहुत कम है। शहरी आबादी का लगभग 15 प्रतिशत और ग्रामीण आबादी का केवल 6 प्रतिशत हिस्सा ही निवेश बाजारों से जुड़ा है।

उन्होंने निवेशकों से कहा कि उन्हें अपने वित्तीय लक्ष्यों को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वे दीर्घकालिक संपत्ति बनाना चाहते हैं या अल्पकालिक सट्टेबाजी में शामिल होना चाहते हैं, क्योंकि अध्ययनों में बार-बार यह साबित हुआ है कि डेरिवेटिव्स सेगमेंट में खुदरा निवेशकों को अक्सर नुकसान होता है।

सेबी प्रमुख ने कहा, “डेरिवेटिव्स हेजिंग और रिस्क मैनेजमेंट के लिए होते हैं, त्वरित मुनाफे के लिए नहीं। खुदरा निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करना चाहिए, यह समझना चाहिए कि ये कॉन्ट्रैक्ट कैसे काम करते हैं और सट्टेबाजी से बचना चाहिए।”

इस मौके पर NSE ने भी कई निवेशक जागरूकता पहलें शुरू करने की घोषणा की, जिनमें क्विज, 40 स्थानों पर शैक्षणिक सत्र और निवेश धोखाधड़ी को पहचानने में मदद करने वाले इंटरैक्टिव फाइनेंस गेम्स शामिल हैं।

NSE के चेयरमैन श्रीनिवास इन्जेटी, जिन्होंने हाल ही में यह पद संभाला है, ने कहा कि एक्सचेंज का लंबे समय से प्रतीक्षित IPO तय समय पर है।

उन्होंने कहा, “हम पूरी तरह सही राह पर हैं। NSE के पब्लिक होने के पीछे एक प्रमुख कारण यह है कि वह खुद वही उदाहरण पेश करना चाहता है जो वह अन्य सूचीबद्ध कंपनियों से अपेक्षा करता है। यह एक उदाहरण के तौर पर आगे बढ़ेगा। भले ही यह अभी सूचीबद्ध नहीं है, लेकिन इसके लगभग 1.8 लाख शेयरधारक हैं, जिससे यह एक व्यापक रूप से होल्ड की गई कंपनी है।”

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NDTV छोड़कर अब डिजिटल मंच पर आए राजीव रंजन, शुरू किया अपना यूट्यूब चैनल

वरिष्ठ पत्रकार राजीव रंजन ने एनडीटीवी इंडिया (NDTV India) से विदाई ले ली है। करीब 19 साल तक इस संस्थान से जुड़े रहने के बाद अब उन्होंने अपना नया सफर शुरू करने का फैसला किया है।

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Wednesday, 21 October, 2026
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वरिष्ठ पत्रकार राजीव रंजन ने एनडीटीवी इंडिया (NDTV India) से विदाई ले ली है। करीब 19 साल तक इस संस्थान से जुड़े रहने के बाद अब उन्होंने अपना नया सफर शुरू करने का फैसला किया है। 'समाचार4मीडिया' से राजीव रंजन ने बताया कि वह अपने यूट्यूब चैनल (BharatDefX) के जरिए दर्शकों से जुड़ेंगे। उन्होंने एक संदेश के जरिए एनडीटीवी छोड़ने के फैसले और अपने पत्रकारिता के सफर के बारे में जानकारी दी है।

राजीव रंजन ने अपने संदेश में कहा कि पिछले कुछ समय से चीजें वैसी नहीं चल रही थीं, जैसी उन्हें चलनी चाहिए थीं। ऐसे में जब उन्हें लगा कि आगे बढ़ने का सही समय आ गया है, तो उन्होंने एनडीटीवी छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने दिसंबर 2007 में एनडीटीवी जॉइन किया था और तब से वह रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, संसद और देश की राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर कर रहे थे।

एनडीटीवी के साथ रहा करीब 19 साल का सफर

राजीव रंजन ने एनडीटीवी के साथ अपने लंबे सफर को याद करते हुए कहा कि यह उनके लिए बेहद सुखद अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था, जब इस संस्थान से जुड़ना कई पत्रकारों का सपना हुआ करता था। हालांकि, उनका मानना है कि हर सफर का एक पड़ाव होता है और अब उनके लिए आगे बढ़ने का समय आ गया है।

उन्होंने अपने संदेश में दर्शकों के विश्वास को अपनी सबसे बड़ी पूंजी बताया। उनके मुताबिक, पत्रकारिता के इस लंबे सफर में उन्हें कई सम्मान और पुरस्कार मिले, लेकिन दर्शकों का लगातार मिलता रहा भरोसा उनके लिए सबसे ज्यादा मायने रखता है।

विनोद दुआ के मार्गदर्शन में शुरू किया पत्रकारिता का सफर

राजीव रंजन ने बताया कि पत्रकारिता में उनकी शुरुआत 30 साल से भी पहले हुई थी। उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ के मार्गदर्शन में 'परख' और 'न्यूज वेव' जैसे कार्यक्रमों के लिए रिपोर्टिंग की बारीकियां सीखीं। इसके बाद उन्होंने दूरदर्शन के लिए 'परसेप्शन' और 'खोज खबर' जैसे खोजी कार्यक्रमों में काम किया।

इसके बाद वह एशिया न्यूज इंटरनेशनल (ANI) से जुड़े और जम्मू-कश्मीर से रिपोर्टिंग की। यह उनके करियर का एक चुनौतीपूर्ण दौर था। बाद में उन्होंने सहारा समय में रक्षा और गृह मंत्रालय से जुड़ी खबरों की जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान उन्होंने 'डिफेंस डायरी' नाम का साप्ताहिक कार्यक्रम भी तैयार किया।

दिसंबर 2007 में एनडीटीवी इंडिया से जुड़ने के बाद उन्होंने रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, संसद और राजनीति से जुड़ी कई अहम खबरों को कवर किया।

'वतन के रखवाले' रहा यादगार कार्यक्रम

राजीव रंजन के पत्रकारिता करियर का एक खास पड़ाव 'वतन के रखवाले' कार्यक्रम रहा। इस कार्यक्रम के जरिए उन्होंने भारतीय सेना के जवानों के जीवन और उनके कामकाज को दर्शकों के सामने पेश किया। उन्होंने इस कार्यक्रम के 100 एपिसोड तैयार किए और उन्हें होस्ट भी किया।

राजीव रंजन के मुताबिक, यह उनके पत्रकारिता जीवन के सबसे यादगार अनुभवों में से एक रहा। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें एनटी अवॉर्ड, ईएनबीए अवॉर्ड और चंद्रशेखर सम्मान समेत कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं।

नए मंच पर भी निष्पक्ष पत्रकारिता का वादा

अपने नए सफर को लेकर राजीव रंजन ने कहा कि मंच और काम करने का अंदाज नया होगा, लेकिन निष्पक्ष पत्रकारिता के बुनियादी उसूल नहीं बदलेंगे। उन्होंने कहा कि सवाल पूछना, तथ्यों की पड़ताल करना और खबरों के पीछे की सच्चाई दर्शकों तक पहुंचाना आगे भी उनकी प्राथमिकता रहेगी।

उन्होंने दर्शकों से आगे भी अपना साथ बनाए रखने की अपील की। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीति जैसे विषयों पर लंबे समय तक रिपोर्टिंग करने वाले राजीव रंजन अपने नए यूट्यूब चैनल के जरिए किस तरह की खबरें और विश्लेषण दर्शकों के सामने लाते हैं।

 

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फेसबुक पेज ब्लॉक करने पर यूजर को देनी होगी सरकारी नोटिस की कॉपी: पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा है कि अगर सरकार किसी सोशल मीडिया यूजर के कंटेंट को ब्लॉक करने के लिए किसी सोशल मीडिया कंपनी को नोटिस भेजती है, तो उस नोटिस की कॉपी यूजर को भी तुरंत देनी होगी।

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Wednesday, 21 October, 2026
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पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा है कि अगर सरकार किसी सोशल मीडिया यूजर के कंटेंट को ब्लॉक करने के लिए किसी सोशल मीडिया कंपनी को नोटिस भेजती है, तो उस नोटिस की कॉपी यूजर को भी तुरंत देनी होगी। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करने और यूजर को अपना पक्ष रखने का मौका देने के लिए जरूरी है।

जस्टिस त्रिभुवन दहिया की पीठ ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 में यह साफ तौर पर नहीं लिखा है कि सरकार को सोशल मीडिया कंपनी को नोटिस भेजने से पहले प्रभावित यूजर को इसकी जानकारी देनी होगी। हालांकि, कोर्ट के मुताबिक, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3)(b) के तहत कंपनी को भेजे गए नोटिस की कॉपी यूजर को देना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत जरूरी है।

कोर्ट ने स्पष्ट कहा, “इसलिए, जब सोशल मीडिया कंपनी को नोटिस भेजा जाए, उसी समय उसकी एक कॉपी यूजर को भी दी जानी चाहिए।”

क्या है पूरा मामला?

हाई कोर्ट हरियाणा 24 न्यूज नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। कंपनी ने भारत में अपने फेसबुक पेज को ब्लॉक किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी। यह पेज हरियाणा पुलिस की ओर से मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक. को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3)(b) के तहत भेजे गए नोटिस के बाद ब्लॉक किया गया था।

कंपनी का फेसबुक पेज 21 अगस्त, 2026 को ब्लॉक कर दिया गया था। कंपनी ने अदालत में कहा कि उसे न तो पहले कोई नोटिस दिया गया और न ही मेटा को भेजे गए नोटिस की कॉपी उपलब्ध कराई गई। इस वजह से उसे यह पता ही नहीं चला कि पेज ब्लॉक करने के पीछे क्या कारण थे और इसके लिए किन तथ्यों या सामग्री का इस्तेमाल किया गया था।

एसपी के नोटिस जारी करने पर भी उठे सवाल

राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि कंपनी के एक निदेशक पर एक आपराधिक मामले में आरोपी होने का आरोप है। सरकार के मुताबिक, वह फेसबुक पेज के जरिए वीडियो पोस्ट कर रहा था और संदेश भेजकर कथित तौर पर पीड़ित तथा गवाहों को डराने की कोशिश कर रहा था। इसी आधार पर यमुनानगर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने मेटा को फेसबुक पेज की पहुंच बंद करने के लिए नोटिस भेजा था।

हालांकि, हाई कोर्ट ने पाया कि यह नोटिस पुलिस अधीक्षक की ओर से जारी किया गया था, जबकि 2021 के नियमों के तहत ऐसे नोटिस जारी करने के लिए कम से कम पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) रैंक के अधिकारी का अधिकृत होना जरूरी है।

नियमों के मुताबिक, संबंधित सरकार की ओर से विशेष रूप से अधिकृत ऐसा पुलिस अधिकारी, जो डीआईजी रैंक से नीचे का न हो, पुलिस प्रशासन की तरफ से इस तरह का नोटिस जारी कर सकता है।

कोर्ट ने कहा कि जब नियमों में नोटिस जारी करने वाले अधिकारी का न्यूनतम पद तय किया गया है, तो इस अधिकार को उससे नीचे के पद के अधिकारी को नहीं सौंपा जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने माना कि संबंधित नोटिस अधिकार क्षेत्र के बिना जारी किया गया था।

शिकायत निवारण व्यवस्था के लिए कार्रवाई की जानकारी जरूरी

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि कंपनी को अपना फेसबुक पेज दोबारा शुरू कराने के लिए मेटा की शिकायत निवारण व्यवस्था का सहारा लेना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि 2021 के नियमों का नियम 3(2) यूजर्स को शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था देता है। लेकिन इस व्यवस्था का सही तरीके से इस्तेमाल तभी हो सकता है, जब प्रभावित यूजर को यह पता हो कि उसका कंटेंट किस आधार पर ब्लॉक किया गया है।

अदालत के मुताबिक, मेटा के शिकायत अधिकारी के सामने फैसले के बाद सुनवाई के दौरान यूजर को संबंधित नोटिस, उसमें लिखे कारणों और नोटिस जारी करने के लिए इस्तेमाल की गई सामग्री की जानकारी होनी चाहिए। इसके बिना यूजर अपना बचाव नहीं कर पाएगा और शिकायत निवारण व्यवस्था का मकसद भी पूरा नहीं होगा।

कोर्ट ने कहा कि कानून के तहत अपनाई जाने वाली हर प्रक्रिया निष्पक्ष और उचित होनी चाहिए। इसके लिए प्राकृतिक न्याय के बुनियादी सिद्धांतों का पालन जरूरी है, जिनमें निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार भी शामिल है।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले माध्यमम ब्रॉडकास्टिंग लिमिटेड बनाम भारत संघ का भी हवाला दिया। हाई कोर्ट ने दोहराया कि निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार और पक्षपात के खिलाफ अधिकार प्राकृतिक न्याय के प्रमुख सिद्धांत हैं।

कोर्ट ने कहा कि भले ही नियम 3(2) में सरकार की ओर से सोशल मीडिया कंपनी को नोटिस भेजने से पहले यूजर को जानकारी देने की स्पष्ट शर्त नहीं है, लेकिन नोटिस की कॉपी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी को इस नियम का हिस्सा माना जाना चाहिए।

इस मामले में कंपनी को न तो पुलिस और न ही मेटा की ओर से नोटिस की कॉपी मिली थी। इस तरह उसे फेसबुक पेज ब्लॉक किए जाने की कार्रवाई के बारे में पूरी तरह अंधेरे में रखा गया। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में कंपनी को केवल मेटा की शिकायत निवारण व्यवस्था के पास जाने के लिए कहना बेअसर होगा और इससे अपना पक्ष रखने के उसके अधिकार पर गंभीर असर पड़ेगा।

फेसबुक पेज बहाल करने का आदेश

हाई कोर्ट ने 21 अगस्त, 2026 को यमुनानगर के पुलिस अधीक्षक की ओर से जारी नोटिस को रद्द कर दिया। साथ ही, अदालत ने निर्देश दिया कि आदेश की प्रमाणित कॉपी मिलने के 24 घंटे के भीतर संबंधित अधिकारी मेटा को कंपनी का फेसबुक पेज पहले की स्थिति में बहाल करने के निर्देश दें।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि सरकार को लगता है कि कंपनी के फेसबुक पेज पर मौजूद कोई जानकारी या कंटेंट कानून के तहत प्रतिबंधित है और उसका इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, तो अधिकृत अधिकारी की ओर से सोशल मीडिया कंपनी को भेजे जाने वाले किसी भी नोटिस की कॉपी कंपनी को तुरंत उपलब्ध करानी होगी।

इसके साथ ही हाई कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया। 

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Quint Digital का दूसरी तिमाही में रेवेन्यू 372% बढ़ा, 36.78 करोड़ रुपये पर पहुंचा

डिजिटल मीडिया और टेक्नोलॉजी कंपनी Quint Digital Limited ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में शानदार बढ़त दर्ज की है।

Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2026
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डिजिटल मीडिया और टेक्नोलॉजी कंपनी Quint Digital Limited ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में शानदार बढ़त दर्ज की है। कंपनी का जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही में परिचालन से राजस्व सालाना आधार पर 372 प्रतिशत बढ़कर 36.78 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी ने इस तिमाही में ब्याज लागत और कुछ गैर-नकद खर्चों को समायोजित करने के बाद 5.67 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया है।

कंपनी ने 19 अक्टूबर 2026 को शेयर बाजार को दी जानकारी में वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही और पहली छमाही के अनऑडिटेड वित्तीय नतीजे साझा किए। कंपनी के मुताबिक, उसकी कारोबारी रणनीति में बदलाव, मीडिया-टेक्नोलॉजी कारोबार की बढ़त और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित समाधानों की मांग से कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है।

पहली छमाही में 354% बढ़ा राजस्व

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान Quint Digital का परिचालन से राजस्व सालाना आधार पर 354 प्रतिशत बढ़कर 71.57 करोड़ रुपये हो गया। इस अवधि में ब्याज लागत और कुछ अन्य खर्चों को समायोजित करने के बाद कंपनी का लाभ 10.62 करोड़ रुपये रहा।

कंपनी ने बताया कि वह अपने कारोबार को वैश्विक मीडिया-टेक्नोलॉजी और एआई आधारित मंच के रूप में विकसित करने पर काम कर रही है। इसके तहत मीडिया, टेक्नोलॉजी, हॉस्पिटैलिटी और अनुभव आधारित कारोबार में विस्तार किया जा रहा है।

Quintype बना कारोबार की बढ़त का प्रमुख आधार

कंपनी के मुताबिक, Quintype उसके कारोबार की बढ़त का प्रमुख आधार बना हुआ है। यह मंच एआई आधारित मीडिया-टेक्नोलॉजी समाधान उपलब्ध कराता है और दुनियाभर में अपने संस्थागत ग्राहकों का दायरा बढ़ा रहा है।

दूसरी तिमाही में Quintype के मीडिया-टेक कारोबार से 34.3 करोड़ रुपये का राजस्व मिला। वहीं, पहली छमाही में इस कारोबार का राजस्व 67.13 करोड़ रुपये रहा।

कंपनी का कहना है कि उसके एआई आधारित मीडिया-टेक मंच को वैश्विक स्तर पर अपनाया जा रहा है। इससे कारोबार का विस्तार करने और ज्यादा ग्राहकों तक पहुंच बनाने में मदद मिल रही है।

दिल्ली में दिसंबर में शुरू होगा Time Out Market

Quint Digital अपने कारोबार को डिजिटल मीडिया और टेक्नोलॉजी से आगे बढ़ाकर हॉस्पिटैलिटी और मनोरंजन के क्षेत्र में भी विस्तार दे रही है। इसी रणनीति के तहत कंपनी नई दिल्ली के एयरोसिटी स्थित वर्ल्डमार्क में दिसंबर 2026 में भारत का पहला Time Out Market शुरू करने की तैयारी कर रही है।

इस केंद्र में खाने-पीने से जुड़े 11 चुने हुए कॉन्सेप्ट, दो खास बार, लाइव मनोरंजन और पूरे साल सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है। इसका उद्देश्य लोगों को एक ही जगह पर खानपान, संस्कृति और मनोरंजन का अनुभव देना है।

कंपनी ने इस परियोजना के लिए छह रणनीतिक खानपान साझेदारियां भी हासिल की हैं। इनमें Chard, Mizu, Bhawan, Delhi Food Walks और Levonne शामिल हैं। कंपनी के अनुसार, अन्य प्रमुख साझेदारियों पर भी बातचीत आगे बढ़ रही है। Mizu के साथ इस परियोजना के संबंध में रियायत समझौता किए जाने का प्रस्ताव है।

Lee Enterprises के साथ संबंध मजबूत करने पर जोर

Quint Digital ने अमेरिकी मीडिया कंपनी Lee Enterprises में अपने निवेश को भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया है। कंपनी इस साझेदारी को और मजबूत करने तथा भविष्य में कारोबार की बढ़त के नए अवसर तलाशने पर ध्यान दे रही है।

Lee Enterprises अमेरिका के 25 राज्यों के 72 बाजारों में स्थानीय समाचार और विज्ञापन सेवाएं देती है। कंपनी के पास करीब 350 डिजिटल मंच और प्रिंट प्रकाशन हैं। Quint Digital की इसमें महत्वपूर्ण अल्पांश हिस्सेदारी है।

इसके अलावा, Quint Digital ने न्यूयॉर्क स्थित सोशल मीडिया और डिजिटल विश्लेषण मंच ListenFirst Media का अधिग्रहण किया है। इससे कंपनी को एआई आधारित दर्शक विश्लेषण और लोगों की भागीदारी को समझने की क्षमता मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

राइट्स इश्यू से जुटाए 90.87 करोड़ रुपये

कंपनी ने बताया कि उसने राइट्स इश्यू के जरिए 90.87 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इस इश्यू को मौजूदा सार्वजनिक शेयरधारकों ने पूरी तरह सब्सक्राइब किया। इश्यू के आकार के मुकाबले 1.09 गुना बोलियां मिलीं।

कंपनी के मुताबिक, जुटाई गई रकम से भविष्य के कारोबारी कामकाज को समर्थन मिलेगा। Quint Digital का कहना है कि वह अपने कारोबार को विस्तार देने, परिचालन क्षमता बेहतर बनाने और लंबी अवधि में मूल्य बढ़ाने पर ध्यान दे रही है।

Quint Digital के कारोबार में क्या-क्या शामिल है?

Quint Digital के प्रमुख डिजिटल मीडिया ब्रैंड्स में The Quint, The News Minute, Youth Ki Awaaz और Kisan India शामिल हैं। कंपनी का प्रमुख समाचार मंच The Quint वर्ष 2015 में शुरू हुआ था। वहीं, Quintype का संपादकीय मंच दुनियाभर में 300 से अधिक प्रकाशकों को सामग्री तैयार करने से जुड़े समाधान उपलब्ध कराता है।

कंपनी बीएसई में सूचीबद्ध है और उसके शेयरों को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में कारोबार की अनुमति वाली श्रेणी में भी शामिल किया गया है।

कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में Quint Digital के राजस्व में तेज बढ़त दर्ज की गई है। कंपनी अब मीडिया-टेक्नोलॉजी और एआई कारोबार के साथ हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में भी विस्तार की तैयारी कर रही है। हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया है कि भविष्य की योजनाओं और कारोबारी प्रदर्शन से जुड़े अनुमान कई बाजार और नियामकीय परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं। 

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हजारों करोड़ के GST नोटिस के बाद Delta Corp ने ₹444 करोड़ का किया प्रावधान

कैसीनो कारोबार से जुड़ी कंपनी Delta Corp ने जीएसटी (GST) देनदारी के लिए ब्याज सहित 443.65 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।

Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2026
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कैसीनो कारोबार से जुड़ी कंपनी Delta Corp ने जीएसटी (GST) देनदारी के लिए ब्याज सहित 443.65 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। कंपनी ने यह प्रावधान सितंबर 2026 में समाप्त हुई तिमाही के वित्तीय नतीजों में दिखाया है। यह कदम ऐसे समय में आया है, जब गेमिंग, सट्टेबाजी, जुआ और कैसीनो से जुड़े लेनदेन पर जीएसटी लागू होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के फैसले के बाद कंपनियों पर पड़ने वाले वित्तीय असर का आकलन किया जा रहा है।

कंपनी को 2023 में हजारों करोड़ रुपये के जीएसटी भुगतान में कमी का आरोप लगाते हुए कारण बताओ नोटिस मिले थे। अब जुलाई 2017 से मार्च 2022 की अवधि के लिए जारी आदेशों में कैसीनो से जुड़े लेनदेन और मिश्रित आपूर्ति (मिक्स्ड सप्लाई) के आधार पर अलग-अलग देनदारी तय की गई है।

Delta Corp ने 30 सितंबर 2026 को समाप्त छह महीने की अवधि के नतीजों में इस प्रावधान को असाधारण मद (Exceptional Item) के रूप में दर्ज किया है। हालांकि, कंपनी ने साफ किया है कि वह इन मांगों को संबंधित अधिकारियों और मंचों पर चुनौती देने का अधिकार सुरक्षित रखती है। खास तौर पर कंपनी ने मिक्स्ड सप्लाई से जुड़ी पूरी मांग और सीजीएसटी नियमों के नियम 31C के तहत तय जीएसटी देनदारी पर लगाए गए ब्याज को चुनौती देने की बात कही है।

यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि पहले जारी किए गए कारण बताओ नोटिस, जांच के बाद आदेशों में तय की गई रकम और कंपनी की ओर से किए गए प्रावधान अलग-अलग हैं। 443.65 करोड़ रुपये का प्रावधान कंपनी के प्रबंधन के आकलन पर आधारित है और इसमें ब्याज भी शामिल है। इसे सभी लंबित जीएसटी विवादों का अंतिम निपटारा नहीं माना जाना चाहिए।

हजारों करोड़ के नोटिस से घटकर तय हुई देनदारी

Delta Corp और उसकी दो सहायक कंपनियों Highstreet Cruises & Entertainment तथा Delta Pleasure Cruise Company को 27 सितंबर 2023 को हैदराबाद स्थित जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (DGGI) से कारण बताओ नोटिस मिले थे। इन नोटिसों में 1 जुलाई 2017 से 31 मार्च 2022 की अवधि के दौरान कुल 16,822.98 करोड़ रुपये के जीएसटी भुगतान में कमी का आरोप लगाया गया था।

कंपनी की पूर्व सहयोगी Deltatech Gaming को भी 28 अक्टूबर 2023 को कोलकाता स्थित DGGI से अलग नोटिस मिला था। इसमें जुलाई 2017 से नवंबर 2022 की अवधि के लिए 6,384.32 करोड़ रुपये के जीएसटी भुगतान में कमी का आरोप लगाया गया था।

इसके बाद कंपनी और संबंधित संस्थाओं ने अलग-अलग हाई कोर्ट का रुख किया था। उन्हें जुलाई 2017 से नवंबर 2022 की अवधि से जुड़े मामलों की कार्यवाही पर रोक मिल गई थी। केंद्र सरकार ने भी उद्योग की ओर से अलग-अलग हाई कोर्ट में दायर इसी तरह की याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के फैसले के बाद लंबित मामलों पर अदालत के तय सिद्धांतों और केंद्रीय जीएसटी नियमों के तहत लागू मूल्यांकन प्रावधानों के अनुसार फैसला किया जाना था।

इसके बाद कंपनी को जुलाई 2017 से मार्च 2022 की अवधि के लिए समूह स्तर पर आदेश मिले। इन आदेशों में नियम 31C के तहत कैसीनो लेनदेन के लिए 151.15 करोड़ रुपये और मिक्स्ड सप्लाई के लिए 125.27 करोड़ रुपये की जीएसटी देनदारी तय की गई।

वहीं, केवल Delta Corp के स्तर पर कैसीनो लेनदेन के लिए 78.56 करोड़ रुपये और मिक्स्ड सप्लाई के लिए 93.80 करोड़ रुपये की देनदारी तय की गई।

ये आंकड़े तय अवधि और संबंधित श्रेणियों के लिए जारी आदेशों से जुड़े हैं। इन्हें समूह की ओर से किए गए कुल प्रावधान के बराबर नहीं माना जा सकता, क्योंकि प्रावधान में अतिरिक्त अवधि और ब्याज भी शामिल हैं।

ब्याज और बाद की अवधि को मिलाकर 443.65 करोड़ रुपये का प्रावधान

Delta Corp ने बताया कि उसने सुप्रीम कोर्ट के फैसले में बताए गए सिद्धांतों और संबंधित आदेशों के आधार पर कैसीनो लेनदेन के लिए जुलाई 2017 से सितंबर 2023 तक और मिक्स्ड सप्लाई के लिए जुलाई 2017 से सितंबर 2025 तक की अवधि की जीएसटी देनदारी का आकलन किया है।

इस आधार पर 30 सितंबर 2026 तक समूह स्तर पर ब्याज सहित कुल 443.65 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। इसमें जून 2026 को समाप्त तिमाही के दौरान दर्ज किए गए 306.73 करोड़ रुपये भी शामिल हैं।

केवल Delta Corp के स्तर पर यह प्रावधान 319.60 करोड़ रुपये रहा। इसमें जून तिमाही के दौरान दर्ज किए गए 200.62 करोड़ रुपये शामिल हैं।

कंपनी ने कहा कि उसने सावधानी बरतते हुए यह प्रावधान किया है, लेकिन संबंधित अधिकारियों और मंचों के सामने मांग को चुनौती देने के अपने सभी अधिकार सुरक्षित रखे हैं।

कंपनी ने अपने वित्तीय नतीजों से जुड़े खुलासे में कहा, “कानूनी सलाह और प्रबंधन के आकलन के आधार पर कंपनी का मानना है कि उसके पास मिक्स्ड सप्लाई की पूरी मांग और नियम 31C के तहत तय जीएसटी मांग पर लगाए गए ब्याज को चुनौती देने के मजबूत आधार हैं।”

कंपनी ने यह भी बताया कि उसने बैलेंस शीट की तारीख के बाद जुलाई 2017 से मार्च 2022 की अवधि से जुड़े आदेश के तहत नियम 31C के अंतर्गत तय मूल देनदारी के लिए 80.97 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। केवल कंपनी के स्तर पर यह भुगतान 49 करोड़ रुपये बताया गया है।

यह भुगतान नियम 31C के तहत तय मूल देनदारी से संबंधित है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मिक्स्ड सप्लाई और ब्याज समेत पूरा विवाद सुलझ गया है।

नए नोटिस से जीएसटी देनदारी को लेकर अनिश्चितता बरकरार

पहले जारी आदेशों के बाद भी Delta Corp के सामने जीएसटी से जुड़े मामले खत्म नहीं हुए हैं। कंपनी और उसकी सहायक कंपनियों को गोवा के वाणिज्यिक कर आयुक्त की ओर से भी कारण बताओ नोटिस मिले हैं।

इन नोटिसों में 1 अप्रैल 2022 से 31 मार्च 2023 की अवधि के दौरान 1,883.96 करोड़ रुपये के जीएसटी भुगतान में कमी का आरोप लगाया गया है।

Delta Corp और Highstreet Cruises & Entertainment को ये नोटिस 17 मार्च 2026 को जारी किए गए थे, जबकि Delta Pleasure Cruise Company को 25 सितंबर 2026 को नोटिस मिला।

इन मामलों में आगे का फैसला जांच और सुनवाई की प्रक्रिया के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के फैसले और लागू मूल्यांकन नियमों के आधार पर होगा।

जीएसटी प्रावधान का सितंबर तिमाही के नतीजों पर असर

जीएसटी से जुड़े इस असाधारण खर्च का असर Delta Corp के सितंबर तिमाही के वित्तीय नतीजों पर भी पड़ा। कंपनी ने 30 सितंबर 2026 को समाप्त तिमाही में समूह स्तर पर 106.41 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया। एक साल पहले इसी तिमाही में कंपनी को 25.10 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। इस दौरान कंपनी की कामकाज से होने वाली आय घटकर 159.34 करोड़ रुपये रह गई, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 182.76 करोड़ रुपये थी।

असाधारण मदों और टैक्स को शामिल करने से पहले कंपनी का मुनाफा 21.57 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल की समान तिमाही में यह 34.69 करोड़ रुपये था।

सितंबर 2026 को समाप्त छह महीने की अवधि में भी समूह को 318.83 करोड़ रुपये का घाटा हुआ, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में 54.56 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। इस छह महीने की अवधि में कंपनी ने 443.65 करोड़ रुपये की असाधारण मद दर्ज की।

इस तरह, Delta Corp का जीएसटी प्रावधान कंपनी के वित्तीय नतीजों पर बड़ा असर डालने वाला रहा है। हालांकि, कंपनी ने मिक्स्ड सप्लाई और ब्याज से जुड़ी मांगों को चुनौती देने का अधिकार सुरक्षित रखा है और कुछ मामलों में आगे की कार्यवाही अभी बाकी है। 

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YouTube पर सुन सकेंगे ऑडियोबुक, 2027 में लॉन्च करने की तैयारी

यूट्यूब (YouTube) अब वीडियो और म्यूजिक के साथ ऑडियोबुक के क्षेत्र में भी कदम रखने की तैयारी कर रहा है।

Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2026
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यूट्यूब (YouTube) अब वीडियो और म्यूजिक के साथ ऑडियोबुक के क्षेत्र में भी कदम रखने की तैयारी कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गूगल के स्वामित्व वाला यह मंच बड़े बुक पब्लिशर्स के साथ बातचीत कर रहा है, ताकि 2027 तक ऑडियोबुक की सुविधा शुरू की जा सके। इसके जरिए यूजर्स किताबों को पढ़ने के बजाय सुन सकेंगे।

इस सुविधा को यूट्यूब प्रीमियम (YouTube Premium) की मौजूदा सदस्यता के साथ जोड़ने या इसके लिए अलग से शुल्क लेने का विकल्प भी तलाशा जा रहा है। फिलहाल यूट्यूब प्रीमियम की सदस्यता की कीमत 15.99 डॉलर प्रति माह है। अगर यह योजना शुरू होती है, तो यूट्यूब का सीधा मुकाबला एमेजॉन की ऑडिबल (Audible) और स्पॉटिफाई (Spotify) जैसी सेवाओं से होगा।

पब्लिशर्स के लिए कमाई का नया मौका

बुक पब्लिशर्स के साथ यूट्यूब की बातचीत उनके लिए कमाई का नया रास्ता खोल सकती है। यूट्यूब के पास बड़ी संख्या में यूजर्स हैं, जिन तक ऑडियोबुक पहुंचाकर पब्लिशर अपनी किताबों से कमाई बढ़ा सकते हैं।

इसके साथ ही, मंच पर यूजर्स की ओर से अपलोड की गई बिना अनुमति वाली ऑडियोबुक पर भी लगाम लगाने में मदद मिल सकती है। फिलहाल यूट्यूब पर कई ऐसे ऑडियोबुक अपलोड मौजूद हैं, जिन्हें संबंधित अधिकारधारकों की अनुमति के बिना साझा किया गया है।

हालांकि, इस सुविधा को किस तरह शुरू किया जाएगा और कमाई का बंटवारा कैसे होगा, इस पर अभी बातचीत चल रही है। संभावित योजनाओं में यूट्यूब प्रीमियम के सदस्यों को हर महीने एक ऑडियोबुक चुनने का मौका देना और उन्हें अलग-अलग किताबों की बदलती सूची उपलब्ध कराना शामिल है।

विज्ञापन से आगे बढ़कर कमाई बढ़ाने की तैयारी

यूट्यूब का यह कदम विज्ञापन से होने वाली कमाई के अलावा सदस्यता के जरिए अपनी आमदनी बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। ऑडियोबुक को जोड़ने से यूट्यूब प्रीमियम की सुविधाएं बढ़ेंगी और यूजर्स को सदस्यता लेने की एक और वजह मिल सकती है।

कंपनी पहले ही यूट्यूब म्यूजिक और यूट्यूब प्रीमियम के 10 करोड़ से ज्यादा सशुल्क सदस्यों का आंकड़ा पार करने की घोषणा कर चुकी है। अब ऑडियोबुक की सुविधा जोड़कर कंपनी डिजिटल ऑडियो बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है।

दुनियाभर में ऑडियोबुक की लोकप्रियता बढ़ रही है और कई डिजिटल मंच इस क्षेत्र में अपनी सेवाओं का विस्तार कर रहे हैं। ऐसे में यूट्यूब की इस संभावित पहल से ऑडियोबुक बाजार में प्रतिस्पर्धा और बढ़ सकती है।

फिलहाल यह योजना बातचीत के स्तर पर है। यूट्यूब ने अभी तक इसके शुरू होने की तारीख, सदस्यता की कीमत और उपलब्ध किताबों की सूची को लेकर अंतिम जानकारी नहीं दी है। 

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Quint Digital ने Quintype Solutions के लिए दी 50 लाख डॉलर तक की कॉरपोरेट गारंटी

क्विंट डिजिटल लिमिटेड ने Quintype Solutions LLC के लिए कुल 50 लाख डॉलर (5 मिलियन अमेरिकी डॉलर) तक की कॉरपोरेट गारंटी दी है।

Last Modified:
Monday, 19 October, 2026
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क्विंट डिजिटल लिमिटेड ने Quintype Solutions LLC के लिए कुल 50 लाख डॉलर (5 मिलियन अमेरिकी डॉलर) तक की कॉरपोरेट गारंटी दी है। कंपनी ने 17 अक्टूबर, 2026 को शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि यह गारंटी दो अलग-अलग मास्टर सर्विस एग्रीमेंट के तहत दी गई है। इन समझौतों के तहत कंपनी की अधिकतम गारंटी राशि 25-25 लाख डॉलर तय की गई है।

कंपनी ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के लिस्टिंग नियमों के तहत बीएसई को यह जानकारी दी है। यह खुलासा सेबी के नियमों के तहत जरूरी जानकारी साझा करने के लिए किया गया है।

दो कंपनियों के साथ हुए समझौतों के लिए गारंटी

क्विंट डिजिटल ने बताया कि Quintype Solutions LLC ने दो अलग-अलग कंपनियों के साथ मास्टर सर्विस एग्रीमेंट किए हैं। इनमें INN Partners, LLC, जो BLOX Digital के नाम से कारोबार करती है, और Lee Enterprises, Incorporated शामिल हैं।

इन दोनों समझौतों के तहत क्विंट डिजिटल ने Quintype Solutions की कुछ तय भुगतान संबंधी जिम्मेदारियों के लिए कॉरपोरेट गारंटी दी है। प्रत्येक समझौते में क्विंट डिजिटल की अधिकतम गारंटी की सीमा 25 लाख अमेरिकी डॉलर रखी गई है। इस तरह दोनों समझौतों के लिए कंपनी की कुल अधिकतम गारंटी राशि 50 लाख डॉलर तक है।

हालांकि, ये गारंटी संबंधित समझौतों के गारंटी से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होने के बाद ही लागू होंगी। इनकी जिम्मेदारी संबंधित समझौतों में तय शर्तों, नियमों और सीमाओं के अधीन होगी।

Quintype Solutions में 10% हिस्सेदारी

कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, Quintype Solutions LLC में क्विंट डिजिटल की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Global Media Technologies Inc. के माध्यम से 10% इक्विटी हिस्सेदारी है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस लेनदेन में प्रमोटर, प्रमोटर समूह या समूह की कंपनियों का कोई हित नहीं है।

तत्काल नकदी खर्च होने की उम्मीद नहीं

क्विंट डिजिटल के मुताबिक, इन गारंटी के कारण कंपनी को तत्काल नकदी खर्च नहीं करनी पड़ेगी। कंपनी पर कोई वित्तीय जिम्मेदारी तभी आ सकती है, जब संबंधित समझौतों में तय शर्तों के अनुसार कोई विशेष स्थिति पैदा होती है। कंपनी के मौजूदा आकलन के अनुसार, इन गारंटी से उसके वित्तीय प्रदर्शन पर किसी बड़े असर की उम्मीद नहीं है। 

 

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अनन्या दत्ता बनीं HOOK Global की सीनियर न्यूज एडिटर व एंकर

इंटरनेशनल न्यूज प्लेटफॉर्म HOOK Global ने अनन्या दत्ता को सीनियर न्यूज एडिटर एवं एंकर नियुक्त किया है।

Last Modified:
Monday, 19 October, 2026
AnanyaDutta541

इंटरनेशनल न्यूज प्लेटफॉर्म HOOK Global ने अनन्या दत्ता को सीनियर न्यूज एडिटर एवं एंकर नियुक्त किया है। ब्रॉडकास्ट और डिजिटल पत्रकारिता में लगभग सात वर्ष का अनुभव रखने वाली दत्ता इससे पहले वे हिंदुस्तान टाइम्स में कार्यरत थीं।

अनन्या दत्ता ने 'समाचार4मीडिया' से बातचीत में कहा कि वह नई भूमिका में न्यूजरूम की संपादकीय दिशा तय करने में अहम योगदान देंगी, अंतरराष्ट्रीय खबरों की कवरेज को मजबूत करेंगी और मौलिक कार्यक्रमों का विकास करेंगी। HOOK Global इस समय अपने विकास के अगले चरण में प्रवेश कर रहा है।

अनन्या दत्ता ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत मई 2019 में WION से की। एशियन कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म से पढ़ाई पूरी करने के बाद वे बतौर न्यूज राइटर चैनल से जुड़ीं। दो वर्ष के भीतर ही वे एंकरिंग में आ गईं और भू-राजनीति तथा चुनावों पर केंद्रित प्राइम-टाइम कार्यक्रम प्रस्तुत करने लगीं।

WION में पांच साल से अधिक के कार्यकाल के दौरान उन्होंने "द विटनेस" (The Witness) नाम की मौलिक डिजिटल न्यूज प्रॉपर्टी भी तैयार की, जो डिजिटल-प्रथम कहानी कहने की दिशा में उनका शुरुआती कदम था।

जनवरी 2025 में वे हिंदुस्तान टाइम्स से जुड़ीं, जहां उन्होंने यूट्यूब के लिए मौलिक डिजिटल फॉर्मेट विकसित करने और शुरू करने में भूमिका निभाई। संपादकीय शोध, स्क्रिप्टिंग, टैलेंट के चयन और प्रोडक्शन की निगरानी उनकी जिम्मेदारियों में शामिल थी। वे जून 2026 तक संस्थान में रहीं।

अपनी नई भूमिका पर अनन्या दत्ता ने कहा, "हम एक महत्वाकांक्षी न्यूजरूम हैं और अपने सफर के अहम मोड़ पर खड़े हैं। मेरे लिए यह अलग-अलग कहानियों और शो बनाने से आगे बढ़कर पूरे न्यूजरूम की संपादकीय दिशा गढ़ने का रोमांचक अवसर है।"

मौजूदा टीम के काम की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, "टीम ने न्यूजरूम की बुनियाद बनाने में शानदार काम किया है। अब मेरी भूमिका यह तय करने में मदद करना है कि हम आगे कहां जाएं।"

आगे की योजना पर उन्होंने कहा कि उनका ध्यान ऐसा न्यूजरूम बनाने पर रहेगा जो मजबूत संपादकीय मूल्यों को इस समझ के साथ जोड़े कि दुनिया भर के दर्शक खबरें कैसे देखते-पढ़ते हैं। उनके शब्दों में, "मैं ऐसा न्यूजरूम बनाने में योगदान देना चाहती हूं, जिसका हिस्सा बनने की मैंने हमेशा चाह रखी है: जिसकी पत्रकारिता महत्वाकांक्षी हो, जो दुनिया को लेकर जिज्ञासु हो और अपने दर्शकों के साथ निरंतर विकसित होता रहे।"

उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब HOOK Global अपनी अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी का विस्तार कर रहा है। मौलिक पत्रकारिता, एंकर-आधारित कार्यक्रमों और डिजिटल-प्रथम न्यूज फॉर्मेट पर संस्थान का जोर लगातार बढ़ रहा है, जिनका लक्ष्य दुनिया भर के बाजारों के दर्शक हैं।

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दिग्विजय सिंह ने लल्लनटॉप से विदाई लेकर 'टाइम्स नाउ नवभारत' में संभाली अहम जिम्मेदारी

पत्रकारिता में करीब 25 वर्षों का अनुभव रखने वाले सिंह इससे पहले द लल्लनटॉप में सीनियर एडिटोरियल भूमिका में कार्यरत थे। यहां उन्होंने करीब तीन साल तक काम किया।

Last Modified:
Monday, 19 October, 2026
DigvijaySingh874

वरिष्ठ पत्रकार दिग्विजय सिंह टाइम्स नाउ नवभारत में एडिटर- डिजिटल वीडियो (ओरिजन्स) के पद पर नई जिम्मेदारी संभाल ली है। पत्रकारिता में करीब 25 वर्षों का अनुभव रखने वाले सिंह इससे पहले 'द लल्लनटॉप' में सीनियर एडिटोरियल भूमिका में कार्यरत थे। यहां उन्होंने करीब तीन साल तक काम किया और मॉर्निंग बैंड के साथ स्पेशल स्टोरीज और लॉन्ग फॉर्म कंटेंट की जिम्मेदारी संभाली।

टाइम्स नाउ नवभारत में उनकी नई भूमिका डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए ओरिजिनल वीडियो कंटेंट की रणनीति, विकास और क्रियान्वयन से जुड़ी होगी। उनके लंबे संपादकीय अनुभव, न्यूज रूम संचालन और विभिन्न माध्यमों में काम करने की विशेषज्ञता का इस्तेमाल नए डिजिटल वीडियो फॉर्मेट और स्टोरीटेलिंग को आगे बढ़ाने में किया जाएगा।

दिग्विजय सिंह ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2002 में सहारा से बतौर रिपोर्टर की थी। इसके बाद उन्होंने इंडिया टीवी, आज तक, जी न्यूज और न्यूज नेशन जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। उनके अनुभव में रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, प्रोग्रामिंग, संपादकीय संचालन और डिजिटल कंटेंट जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं।

दिग्विजय सिंह जनसत्ता ऑनलाइन की वीडियो टीम की संस्थापक टीम के सदस्य भी रहे हैं। पारंपरिक टेलीविजन न्यूजरूम से लेकर डिजिटल पत्रकारिता तक काम करने के अनुभव ने उन्हें कंटेंट निर्माण के विभिन्न स्वरूपों और दर्शकों की बदलती पसंद को करीब से समझने का अवसर दिया है।

डिफेंस और एंटरटेनमेंट रिपोर्टिंग उनकी प्रमुख विशेषज्ञताओं में शामिल हैं। अपने करियर के दौरान उन्होंने कई डिफेंस ड्रिल कवर की हैं और अंतरराष्ट्रीय भारतीय फिल्म अकादमी पुरस्कार यानी IIFA जैसे बड़े मनोरंजन आयोजनों की रिपोर्टिंग भी की है।

मूल रूप से इलाहाबाद के रहने वाले दिग्विजय सिंह ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है। उनके खाते में अटल रत्न अवॉर्ड और भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय से मिला नेशनल यूथ अवॉर्ड भी शामिल है। 

टेलीविजन, रेडियो, अखबार और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखने वाले दिग्वजिय सिंह की नई नियुक्ति ऐसे समय में हो रही है, जब न्यूज संस्थान डिजिटल वीडियो और अपने प्लेटफॉर्म के लिए विशिष्ट, मौलिक कंटेंट तैयार करने पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।

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अन्वी दधीच ने संभाली जियोब्लैकरॉक में मार्केटिंग की जिम्मेदारी

अन्वी दधीच का फोकस निवेश सलाहकार सेवाओं को पहली बार निवेश करने वालों और जटिल वेल्थ पोर्टफोलियो वाले निवेशकों तक पहुंचाने पर रहेगा।

Last Modified:
Friday, 16 October, 2026
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जियोब्लैकरॉक इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स (JioBlackRock Investment Advisers) ने अन्वी दधीच को मार्केटिंग फंक्शन का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी है। कंपनी का लक्ष्य भारत में निवेश सलाहकार सेवाओं को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक आसान तरीके से पहुंचाना है।

अन्वी दधीच ने लिंक्डइन (LinkedIn) पर अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि वह निवेश सलाहकार सेवाओं को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के इस अवसर को लेकर उत्साहित हैं। उनका फोकस पहली बार निवेश करने वाले लोगों के साथ-साथ जटिल वेल्थ पोर्टफोलियो संभालने वाले निवेशकों की जरूरतों को पूरा करने पर रहेगा।

जियोब्लैकरॉक से पहले अन्वी पावरअप मनी (PowerUp Money) के साथ थीं। वहां उन्होंने जनवरी से अगस्त 2026 तक एसोसिएट मार्केटिंग डायरेक्टर (Associate Marketing Director) के रूप में काम किया। इससे पहले वह कंपनी में कंटेंट और मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभाल चुकी थीं और प्रोडक्ट मार्केटिंग तथा ब्रांड मार्केटिंग पर भी काम किया।

पावरअप मनी से पहले अन्वी ने दिसंबर 2022 से सितंबर 2023 तक स्वतंत्र ब्रांड मार्केटिंग कंसल्टेंट के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने उद्यमी राज शमानी के साथ फिगरिंग आउट (Figuring Out) में उनके पर्सनल ब्रांड को विकसित करने पर काम किया। उन्होंने टीम मैनेजमेंट और ब्रांड पार्टनरशिप तैयार करने की जिम्मेदारी भी संभाली। इसके अलावा शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को ब्रांड पोजिशनिंग, सोशल मीडिया और कंटेंट स्ट्रैटेजी पर सलाह दी।

अन्वी ने यूनिकार्ड्स (Uni Cards) में भी एक साल से ज्यादा समय तक काम किया, जहां उन्होंने ब्रांड एंड मार्केटिंग मैनेजर और असिस्टेंट मैनेजर-ब्रांड एंड मार्केटिंग जैसी भूमिकाएं निभाईं। यहां उनका काम ब्रांड कैंपेन, कम्युनिटी बिल्डिंग, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग, परफॉर्मेंस मार्केटिंग और कस्टमर सक्सेस से जुड़ा रहा।

उन्होंने मई 2019 में वीवर्क इंडिया (WeWork India) के साथ एसोसिएट मार्केटिंग स्ट्रैटेजिस्ट के तौर पर करियर की शुरुआत की। बाद में वह सीनियर एसोसिएट-डिजिटल मार्केटिंग एंड स्ट्रैटेजी बनीं। यहां उन्होंने मार्केटिंग स्ट्रैटेजी, पार्टनरशिप, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग और वीवर्क ऑन-डिमांड (WeWork On-Demand) डे-पास ऑफरिंग पर काम किया।

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YouTube Music पर अब AI से बने गानों की होगी पहचान, लेबल से मिलेगी जानकारी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल म्यूजिक इंडस्ट्री में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में यूट्यूब ने गानों में एआई के इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया है।

Last Modified:
Friday, 16 October, 2026
YouTube47

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल म्यूजिक इंडस्ट्री में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में यूट्यूब ने गानों में एआई के इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया है। कंपनी ने YouTube Music पर ऐसे लेबल देने शुरू किए हैं, जिनकी मदद से श्रोता पहचान सकेंगे कि किसी गाने को बनाने में जनरेटिव एआई (Generative AI) का कितना इस्तेमाल हुआ है। इस सुविधा को आगे मुख्य YouTube ऐप पर भी शुरू किया जाएगा।

ये लेबल गाने के प्लेयर पेज पर दिखाई देंगे। श्रोता इन पर क्लिक करके जान सकेंगे कि गाने को तैयार करने में एआई की क्या भूमिका रही है। इसके लिए यूट्यूब म्यूजिक इंडस्ट्री के भागीदारों के साथ काम कर रहा है। साथ ही, कंपनी अपने डिटेक्शन सिस्टम की मदद से भी एआई से तैयार किए गए गानों की पहचान करेगी। यूट्यूब के दूसरे कंटेंट में एआई के इस्तेमाल की जानकारी देने के लिए पहले से लागू व्यवस्था को अब म्यूजिक के क्षेत्र में भी आगे बढ़ाया जा रहा है।

यूट्यूब ने कहा, “हमारा लक्ष्य दर्शकों और श्रोताओं को उनके देखे और सुने जाने वाले कंटेंट के बारे में सही जानकारी और स्पष्टता देना है, ताकि उनके लिए यह समझना आसान हो कि वे क्या देख या सुन रहे हैं।”

तीन श्रेणियों में बांटे जाएंगे गाने

यूट्यूब की इस व्यवस्था के तहत म्यूजिक इंडस्ट्री के भागीदार गानों को एआई के इस्तेमाल के आधार पर तीन श्रेणियों में रख सकेंगे। इनमें ‘फुली जनरेटिव एआई’, ‘पार्शियली जनरेटिव एआई’ और ‘नो जनरेटिव एआई’ शामिल हैं। 

फुली जनरेटिव एआई (Fully Gen AI): इस श्रेणी में वे गाने आएंगे, जो पूरी तरह एआई की मदद से तैयार किए गए हैं।

पार्शियली जनरेटिव एआई (Partly Gen AI): इसमें ऐसे गाने शामिल होंगे, जिनमें एआई से तैयार किए गए हिस्सों के साथ कलाकारों का योगदान भी हो। इसमें कलाकारों की लाइव प्रस्तुति जैसे हिस्से भी शामिल हो सकते हैं।

नो जनरेटिव एआई (No Gen AI): इस श्रेणी में वे गाने रखे जाएंगे, जो ऊपर बताई गई दोनों एआई श्रेणियों में नहीं आते।

इस तरह श्रोताओं को यह समझने में मदद मिलेगी कि किसी गाने को तैयार करने में एआई की कितनी भूमिका रही है और उसमें कलाकारों का कितना योगदान है।

हर डिजिटल बदलाव पर नहीं लगेगा AI लेबल

यूट्यूब ने यह भी स्पष्ट किया है कि गाने में इस्तेमाल होने वाले हर डिजिटल टूल के कारण उसे एआई से बना गाना नहीं माना जाएगा। उदाहरण के लिए, ऑटो-ट्यून (Auto-Tune) की मदद से आवाज का सुर ठीक करना अपने आप में किसी गाने को एआई से तैयार गानों की श्रेणी में नहीं रखता।

इस व्यवस्था का मकसद जनरेटिव एआई के जरिए संगीत या आवाज तैयार करने और म्यूजिक प्रोडक्शन में इस्तेमाल होने वाले सामान्य टूल्स के बीच अंतर स्पष्ट करना है। यानी केवल आवाज में सुधार करने या किसी सामान्य तकनीक का इस्तेमाल करने से गाने पर एआई का लेबल नहीं लगेगा।

Apple Music और Spotify भी उठा रहे हैं कदम

एआई से तैयार होने वाले गानों की बढ़ती संख्या के बीच म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म अपने-अपने तरीके से पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

Apple Music की योजना इस साल के अंत में अपने ‘एआई ट्रांसपेरेंसी टैग्स’ के तहत ‘मेड विद एआई’ (Made With AI) लेबल शुरू करने की है। वहीं, Spotify भी एआई से जुड़े लेबल लगाने के उपाय शुरू कर चुका है। इसके अलावा, प्लेटफॉर्म ने म्यूजिक स्पैम से निपटने के लिए एक फिल्टर भी पेश किया है।

हालांकि, सभी प्लेटफॉर्म एआई से तैयार गानों को लेकर एक जैसा तरीका नहीं अपना रहे हैं। कुछ सेवाएं ऐसे गानों को अपने प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने या उनसे कमाई करने पर पाबंदियां लगाती हैं, जबकि यूट्यूब फिलहाल गाने में एआई के इस्तेमाल की जानकारी देने पर जोर दे रहा है।

यूट्यूब पर किसी गाने में एआई का इस्तेमाल होने का मतलब यह नहीं है कि उससे कमाई नहीं की जा सकती। यानी केवल एआई की मदद से गाना तैयार होने के कारण वह कमाई के लिए अयोग्य नहीं हो जाता।

गाने बनाने में भी AI का इस्तेमाल कर रहा YouTube

यूट्यूब सिर्फ एआई से तैयार गानों की पहचान करने की व्यवस्था ही नहीं बना रहा, बल्कि संगीत तैयार करने में भी इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। कंपनी के ‘ड्रीम ट्रैक’ (Dream Track) टूल की मदद से चुनिंदा क्रिएटर्स भाग लेने वाले कलाकारों की एआई से तैयार आवाजों का इस्तेमाल करके साउंडट्रैक बना सकते हैं।

इस तरह यूट्यूब संगीत के क्षेत्र में एआई का इस्तेमाल दो स्तरों पर कर रहा है। एक तरफ यह क्रिएटर्स को एआई की मदद से संगीत बनाने के साधन दे रहा है, तो दूसरी तरफ श्रोताओं को यह बताने की व्यवस्था भी कर रहा है कि किसी गाने को तैयार करने में इस तकनीक की क्या भूमिका रही है।

श्रोताओं को मिलेगी अपनी पसंद चुनने की आजादी

जैसे-जैसे म्यूजिक प्रोडक्शन में एआई की भूमिका बढ़ रही है, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के सामने चुनौती यह है कि श्रोताओं को सही जानकारी मिले, लेकिन तकनीक के हर इस्तेमाल को एक जैसा न माना जाए। यूट्यूब के नए लेबल इसी दिशा में एक कदम हैं। इनकी मदद से श्रोता जान सकेंगे कि किसी गाने में एआई का इस्तेमाल हुआ है या नहीं और फिर अपनी पसंद के हिसाब से तय कर सकेंगे कि वे क्या सुनना चाहते हैं। 

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