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सोशल मीडिया पर पोस्ट लाइक करना अपराध नहीं: इलाहाबाद हाई कोर्ट
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी पोस्ट को केवल 'लाइक' करना उसे न तो प्रकाशित करने के बराबर है और न ही प्रसारित करने जैसा माना जा सकता है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 10 months ago
सोशल मीडिया पर किसी पोस्ट को 'लाइक' करना क्या अपराध की श्रेणी में आता है? इस सवाल पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी पोस्ट को केवल 'लाइक' करना उसे न तो प्रकाशित करने के बराबर है और न ही प्रसारित करने जैसा माना जा सकता है। इसलिए यह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत अपराध नहीं माना जाएगा।
यह फैसला जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ ने दिया। उन्होंने आगरा निवासी इमरान खान की ओर से दायर याचिका को स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया।
क्या था मामला?
2019 में आगरा के मंटोला थाने में इमरान खान के खिलाफ IPC की धाराओं 147, 148, 149, आईटी एक्ट की धारा 67 और आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम की धारा 7 के तहत मामला दर्ज हुआ था। पुलिस का आरोप था कि इमरान ने सोशल मीडिया पर एक भड़काऊ पोस्ट को 'लाइक' किया, जिसके बाद करीब 600-700 लोग बिना अनुमति के जुलूस निकालने के लिए इकट्ठा हो गए, जिससे सार्वजनिक शांति को खतरा हुआ।
आरोप और दलीलें
सरकारी पक्ष का कहना था कि साइबर सेल की रिपोर्ट में सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री का उल्लेख है जो हिंसा भड़का सकती थी। जबकि इमरान के वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता ने खुद कोई पोस्ट नहीं किया और न ही कोई भड़काऊ संदेश फैलाया। फेसबुक अकाउंट की जांच में भी कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली।
कोर्ट का फैसला
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी पोस्ट को 'लाइक' करना, उसे 'शेयर' या 'रीट्वीट' करने से अलग है। कोर्ट ने कहा कि ‘प्रकाशित’ का अर्थ है उसे सार्वजनिक रूप से पोस्ट करना, जबकि ‘प्रसारित’ तब कहा जा सकता है जब कोई पोस्ट को आगे साझा करता है। इस मामले में याचिकाकर्ता ने महज एक पोस्ट को लाइक किया था, जो कानूनन अपराध नहीं माना जा सकता।
इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि आईटी एक्ट की धारा 67 का इस्तेमाल अश्लील सामग्री से जुड़े मामलों में होता है, न कि सामाजिक या राजनीतिक रूप से संवेदनशील पोस्ट को लेकर। इसलिए इस मामले में वह धारा लागू नहीं होती।
कार्यवाही रद्द, लेकिन अन्य आरोपी पर केस जारी रहेगा
हाई कोर्ट ने इमरान खान के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई अन्य कानूनी बाधा न हो तो ट्रायल कोर्ट अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही जारी रख सकता है।
यह फैसला डिजिटल अभिव्यक्ति और सोशल मीडिया के दायरे में आने वाले कानूनी विवादों को लेकर एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।
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