अखबारों के डिजिटल सबस्क्रिप्शन की दिशा में आगे बढ़ने को लेकर अब उठने लगा है ये सवाल

हालांकि कुछ अखबार पहले से ऑनलाइन एडिशन के लिए सबस्क्रिप्शन मॉडल (paywall) अपना रहे हैं, जबकि कुछ अन्य अखबार इस नक्शे कदम पर चलने की तैयारी में हैं

Last Modified:
Friday, 22 May, 2020
Digital Media

देश-दुनिया में आतंक मचा रहे कोरोनावायरस (कोविड-19) ने मार्केट ट्रेंड और उपभोग के पैटर्न्स (consumption patterns) को काफी बदल दिया है। कोरोनासंक्रमण के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लागू किए गए लॉकडाउन का असर प्रिंट मीडिया पर भी पड़ रहा है। इस दौरान कई अखबारों की प्रिंटिंग प्रभावित हुई है। कोरोनावायरस के अखबारों पर पड़ रहे प्रभावों के बीच पाठकों की एक नई कैटेगरी उभरकर सामने आई है। हालांकि, ये ऐसे नए पाठक नहीं हैं, जिन्हें रोजाना सुबह-सुबह अखबार पढ़ने की आदत है, लेकिन वे उस माध्यम के लिए नए हैं जो उन्होंने हाल ही में अपने समाचार पत्रों को पढ़ने के लिए इस्तेमाल किया है।

हालांकि, न्यू मीडिया के तमाम समर्थकों का लंबे समय से कहना है कि देश में प्रिंट मीडिया जल्द ही खत्म हो जाएगा, लेकिन प्रिंट मीडिया की स्थिति को देखें और इंडस्ट्री से जुड़े तमाम शीर्ष अधिकारियों की मानें तो फिलहाल ऐसा कुछ भी नहीं होने जा रहा है। पिछले तीन सालों में सर्कुलेशन के हिसाब से सबसे ज्यादा बिकने वाला अखबार (इंडियन रीडरशिप सर्वे के अनुसार) अपनी रीडरशिप यानी पाठक संख्या को 6.8 करोड़ से सात करोड़ के बीच में बनाए रखने में कामयाब रहा है। इस बात से साफ पता चलता है कि देश में अभी भी प्रिंट माध्यम लोगों की पसंद बना हुआ है।

अब सवाल उठता है कि क्या जो लोग ऑनलाइन अखबार पढ़ते हैं, वे भी इसके लिए भुगतान करने के लिए तैयार हैं? इस बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक धीमी प्रक्रिया है लेकिन जो अखबार को महत्व देते हैं वे देर-सवेर इसके लिए भुगतान करने के लिए तैयार हो जाएंगे। विश्लेषकों के अनुसार, यह आने वाले समय में रेवेन्यू के हिसाब से न्यूज ऑपरेशंस के लिए भी काफी फायदेमंद होगा। हालांकि, बहुत सारे समाचार पत्र जैसे बिजनेस स्टैंडर्ड (Business Standard) लंबे समय से ऑनलाइन अखबार पढ़ने के लिए भुगतान का मॉडल अपना रहे हैं, कई अन्य ब्रैंड्स भी हाल ही में इस दौड़ में शामिल हुए हैं।

देश के प्रमुख अंग्रेजी अखबार ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ (The Times of India) ने पिछले हफ्ते ही अपने ई-पेपर को पढ़ने के लिए इस पर सबस्क्रिप्शन मॉडल लागू किया है। यानी अब इस अखबार का ई-पेपर पढ़ने के लिए पाठकों को इसे सबस्क्राइब करना होगा, जिसके लिए हर महीने 199 रुपए शुल्क भी चुकाना होगा।

ऐसे में सवाल उठता है कि धीमी अर्थव्यवस्था के बावजूद इंडियन रीडरशिप सर्वे 2019 की चौथी तिमाही (IRS 2019 Q4)  में जिन अखबारों की रीडरशिप में बढ़ोतरी देखी गई है, वे आखिर क्यों सबस्क्रिप्शन मॉडल अपना रहे हैं? ‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ (BCCL) की एग्जिक्यूटिव कमेटी के चेयरमैन शिवकुमार सुंदरम का कहना है, ‘लॉकडाउन के कारण हमारे अखबार की डिलीवरी हमारे सभी पाठकों तक सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, ऐसे में हमारी ड्यूटी है कि लोगों तक हम प्रमाणिक खबरें पहुंचाएं। ऐसे में मुफ्त में ई-पेपर उपलब्ध होने पर शरारत करने वाले तत्व समाचारों को डाउनलोड कर उनसे साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं अथवा फेक न्यूज को प्रसारित कर सकते हैं। ई-पेपर के लिए सबस्क्रिप्शन मॉडल अपनाकर हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि जो पाठक न्यूज का ऑरिजिनल वर्जन पढ़ना चाहते हैं वे इसकी प्रमाणिकता पर पूरा भरोसा कर सकते हैं।’

शिवकुमार सुंदरम का यह भी कहना है, ‘इस तरह हम अखबार के डाउनलोड किए गए और फॉरवर्ड किए गए वर्जन की खपत (consumption) को हतोत्साहित करते हैं, क्योंकि इस नाजुक समय में यह हमारे समाज के लिए भ्रामक और खतरनाक हो सकता है।’ सुंदरम के अनुसार, ‘वॉट्सऐप ग्रुप्स पर जो भी मुफ्त में और फॉरवर्ड होकर मिलता है, उसका कोई महत्व नहीं है। अखबार द्वारा सबस्क्रिप्शन का यह मॉडल रेवेन्यू जुटाने के लिए नहीं अपनाया गया है, हालांकि इसकी घोषणा के बाद से इसे अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।’

हालांकि, सिर्फ ‘बीसीसीएल’ ही नहीं है, जिसके पाठक कंटेंट हासिल करने के लिए अखबार द्वारा लगाए गए शुल्क का समर्थन कर रहे हैं, ‘द हिंदू’ भी अपने ई-पेपर को लंबे समय से सबस्क्रिप्शन मॉडल पर उपलब्ध करा रहा है और वह भी इसके परिणाम से खुश है। ‘द हिंदू’ ग्रुप के वाइस प्रेजिडेंट और बिजनेस हेड (डिजिटल मीडिया) प्रदीप गैरोला (Pradeep Gairola) का कहना है, ‘हमारे सबस्क्रिप्शन के आंकड़े काफी उत्साहित करने वाले हैं। द हिंदू की सफलता ने हमें अपने अन्य ब्रैंड्स को सबस्क्रिप्शन मॉडल अपनाने के लिए प्रेरित किया है। अब इस ब्रैंड के सभी प्रॉडक्ट जैसे- BusinessLine, Frontline, Sportstar और Young World Club आदि भुगतान वाले सबस्क्रिप्शन मॉडल पर हैं। लॉकडाउन ने ब्रैंड के लिए इन नंबरों को बढ़ाने में वास्तव में मदद की है। यह दर्शाता है कि इस ट्रेंड को न सिर्फ मीडियम द्वारा बल्कि पाठकों द्वार भी स्वीकार किया जा रहा है।’

गैरोला का कहना है, ‘लॉकडाउन के दौरान हमें अपने सबस्क्राइबर बेस में काफी उछाल देखने को मिला है। हालांकि हमने द हिंदू की वेबसाइट पर फ्री आर्टिकल्स की संख्या दोगुनी कर दी है, ई-पेपर के फ्री ट्रायल के दिनों की संख्या को बढ़ा दिया है और कई अन्य कवायद भी की है, अधिकांश लोग हमारी पत्रकारिता को पसंद कर रहे हैं और कंटेंट के लिए भुगतान कर रहे हैं। कोविड-19 के दौरान न्यूज का उपभोग (consumption) पूरी दुनिया में बढ़ा है। इसने लोगों को समाचार के भरोसेमंद स्रोतों को चुनने के लिए भी मजबूर किया है। इसलिए हमारा मानना है कि लॉकडाउन के बाद भी यह ट्रेंड जारी रहेगा।’

यह सिर्फ अंग्रेजी अखबारों की बात नहीं है, हिंदी और अन्य प्रादेशिक अखबार भी इस कदम का समर्थन कर रहे हैं। इनमें से अधिकांश भी इस मॉडल को अपनाने के रास्ते पर हैं। इस बारे में ‘जागरण प्रकाशन’ के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (स्ट्रैटेजी, ब्रैंड और बिजनेस डेवलपमेंट) बसंत राठौड़ का कहना है, ‘तमाम अखबारों ने अपने डिजिटल कंटेंट को एक्सेस करने के लिए सबस्क्रिप्शन मॉडल अपनाया है और यह सही है। कंटेंट को तैयार करने में काफी खर्च आता है, यदि कंटेंट निर्माता उसके लिए शुल्क लेने का निर्णय लेते हैं तो यह पूरी तरह सही है। देश के लोग भी डिजिटल सबस्क्रिप्शन के भुगतान के लिए तैयार है, लेकिन अभी बड़े पैमाने पर ऐसा नहीं है। आने वाले समय में यह और बढ़ेगा और लोग अखबार के डिजिटल सबस्क्रिप्शन के लिए भुगतान करेंगे।’

वहीं, ‘मातृभूमि’ ग्रुप के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर एमवी श्रेयम्स कुमार का कहना है कि हालांकि कुछ समय से उनका अखबार डिजिटल सबस्क्रिप्शन मॉडल पर है लेकिन उन्होंने इसे ज्यादा प्रमोट नहीं किया है। उनका कहना है, ‘लोग फ्री कंटेंट के आदी हैं, ऐसे में हमें यह नहीं भूलना चाहे कि 80 प्रतिशत डिजिटल एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू दुनिया में दो बड़ी कंपनियों को जाता है। अखबार यहां टिके हुए हैं और यदि इन्हें ऑनलाइन पढ़ने के लिए सबस्क्रिप्शन मॉडल पर लाया जाता है तो देर-सवेर पाठक इसके लिए भुगतान करेंगे।’

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TV9 भारतवर्ष को मिला नया डिजिटल एडिटर

हिंदी न्यूज चैनल ‘टीवी9 भारतवर्ष’ (TV9 Bharatvarsh) को नया डिजिटल एडिटर मिल गया है।

Last Modified:
Monday, 10 August, 2020
Shailesh Chaturvedi

हिंदी न्यूज चैनल ‘टीवी9 भारतवर्ष’ (TV9 Bharatvarsh) को नया डिजिटल एडिटर मिल गया है। खबर है कि वरिष्ठ पत्रकार शैलेश चतुर्वेदी ने यहां जॉइन कर लिया है। वे यहां डिजिटल टीम की कमान संभालेंगे। टीवी9 भारतवर्ष के साथ नई पारी शुरू करने से पहले शैलेश चतुर्वेदी करीब चार साल से नेटवर्क18 का हिस्सा थे।

मूल रूप से अलीगढ़ के रहने वाले शैलेश चतुर्वेदी को प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों में काम करने का 22 साल से ज्यादा का अनुभव है। शैलेश चतुर्वेदी ने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत ‘अमर उजाला’ से की थी। इसके बाद उन्होंने ‘हिन्दुस्तान’ अखबार में अपने सेवाएं दीं। बाद में प्रिंट को छोड़कर शैलेश चतुर्वेदी ने टीवी की दुनिया में कदम रखा और न्यूज चैनल ‘सहारा समय’ में अपनी जिम्मेदारी संभाली।

इसके बाद टीवी को अलविदा कहकर शैलेश डिजिटल की दुनिया में आ गए और नेटवर्क18 के साथ जुड़ गए। यही उन्होंने काफी समय तक फर्स्टपोस्ट (firstpost) हिंदी की कमान संभाली। इसके बाद करीब एक साल से वह ‘न्यूज18 हिंदी’ (news18 hindi) में न्यूजरूम हेड के तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब उन्होंने यहां से बाय बोल दिया है और ‘टीवी9’ नेटवर्क का हिस्सा बन गए हैं। समाचार4मीडिया की ओर से शैलेश चतुर्वेदी को उनकी नई पारी के लिए ढेरों शुभकामनाएं।

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वरिष्ठ पत्रकार अनुरंजन झा ने लॉन्च किया स्वदेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप

देश के पहले मैट्रिमोनियल चैनल ‘शगुन टीवी’ की नींव रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार अनुरंजन झा ने स्वदेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप लॉन्च किया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 08 August, 2020
Last Modified:
Saturday, 08 August, 2020
Anuranjan Jha

अपने स्वामित्व और संपादकीय निर्देशन में देश के पहले मैट्रिमोनियल चैनल ‘शगुन टीवी’ की नींव रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार अनुरंजन झा ने पिछले दिनों स्वदेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप ‘लउक’ (Lauk) लॉन्च किया है।

बताया जाता है कि भोजपुरी में लउक का अर्थ होता है देखना और इसी वजह से इस ऐप का नाम लउक रखा गया है। अब लउक ऐप का इस्तेमाल कर आप किसी अपने को ऑनलाइन देख सकते हैं, मीटिंग कर सकते हैं अथवा स्कूल-कॉलेज की क्लास भी ले सकते हैं।

बिहार में मोतिहारी के मूल निवासी अनुरंजन झा ने अपने फेसबुक पेज पर खुद इसकी जानकारी दी है, जिसे आप यहां भी देख सकते हैं।

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‘डिजिटल की दुनिया’ में इन कंपनियों ने मारी बाजी, देखें लिस्ट

ऑडियंस, ब्रैंड्स और कंज्यूमर्स बिहेवियर आदि को मापने वाली प्रमुख कंपनी ‘कॉमस्कोसर’ ने देश में देखी जाने वालीं 10 टॉप मल्टी प्लेटफॉर्म प्रॉपर्टीज की लिस्ट जारी की है।

Last Modified:
Tuesday, 04 August, 2020
Digital

ऑडियंस, ब्रैंड्स और कंज्‍यूमर बिहेवियर आदि को मापने वाली प्रमुख कंपनी ‘कॉमस्कोर’ (ComScore) के अनुसार, भारत के डिजिटल परिदृश्य में टेक्नोलॉजी कंपनी ‘गूगल’ और ‘फेसबुक’ ने अपना दबदबा बनाए रखा है। इंडिया कॉमस्कोर डिजिटल रैंकिंग जून 2020 (India Comscore Digital Rankings, June 2020) के अनुसार, जून में इन कंपनियों के यूनिक विजिटर्स की संख्या क्रमश: 397 मिलियन और 385 मिलियन रही है।  

इस रैंकिंग के अनुसार, लिस्ट में 98 प्रतिशत पहुंच के साथ ‘गूगल’ टॉप पर बनी हुई है, जबकि 94.9 प्रतिशत के साथ ‘फेसबुक’ दूसरे नंबर पर है, जबकि ‘टाइम्स इंटरनेट’ ने 77.7 प्रतिशत पहुंच के साथ तीसरे नंबर पर अपना नाम दर्ज कराया है। इसके यूनिक विजिटर्स की संख्या 315 मिलियन है।

टॉप10 मल्टी-प्लेटफॉर्म प्रॉपर्टीज (डेस्कटॉप और मोबाइल) की इस लिस्ट में ई-कॉमर्स साइट्स ‘अमेजॉन’ और ‘फ्लिपकार्ट’ क्रमश: 309 मिलियन और 228 मिलियन यूनिक विजिटर्स के साथ चौथे और पांचवे नंबर पर बनी हुई हैं।  

‘Bytedance Inc.’ की ‘टिकटॉक’ जिसे भारत में पिछले महीने के अंत में बैन कर दिया गया है, को 196 मिलियन विजिटर्स मिले हैं और पहुंच के मामले में 48.3 प्रतिशत के साथ यह इस लिस्ट में छठे नंबर पर है। ‘Truecaller.com’ और ‘Paytm.com’ का इस लिस्ट में छठा और सातवां नंबर है। इनके यूनिक विजिटर्स की संख्या क्रमश: 193 मिलियन और 190 मिलियन दर्ज की गई है।

टॉप 10 साइट्स की इस लिस्ट में ‘जी डिजिटल’ और ‘रिलायंस जियो डिजिटल सर्विसेज’ ने भी अपना नाम दर्ज कराया है। ‘जी डिजिटल’ जहां नौवें नंबर पर है, वहीं ‘रिलायंस जियो डिजिटल सर्विसेज’ 10वें नंबर पर है और इनके यूनिक विजिटर्स की संख्या क्रमश:  186 मिलियन और 176 मिलियन रही है।

ComScore की ओर से रैंकिंग को लेकर जारी पूरी लिस्ट को आप यहां देख सकते हैं।

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चीन पर भारत की फिर ‘डिजिटल स्ट्राइक’, अब इन ऐप्स पर लगाया बैन

चीन पर एक और ‘डिजिटल स्ट्राइक’ करते हुए भारत सरकार ने एक बार फिर 47 चाइनीज ऐप्स को देश में प्रतिबंधित कर दिया है।

Last Modified:
Tuesday, 28 July, 2020
APPS

चीन पर एक और ‘डिजिटल स्ट्राइक’ करते हुए भारत सरकार ने एक बार फिर 47 चाइनीज ऐप्स को देश में प्रतिबंधित कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ये ऐप्स जून के आखिर में बैन किए गए ऐप्स के ही क्लोन थे। यानी पहले से बैन ऐप के जैसे ऐप बनाकर बाजार में उतार दिये गए थे। इन ऐप्स पर यूजर्स का डेटा चोरी करने का आरोप है। इस वजह से अब इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इन ऐप्स पर भी कार्रवाई की है।

जिन ऐप्स पर बैन लगाया गया है, उनमें Tiktok Lite, Helo Lite, SHAREit Lite, BIGO LIVE Lite और VFY Lite आदि शामिल हैं। ये प्रतिबंधित ऐप्स के क्लोन या लाइट वर्जन थे। इस फैसले के बाद देश में प्रतिबंधित ऐसे चाइनीज ऐप्स की संख्या 106 हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी कहा गया है कि बैन किए गए ऐप्स की संख्या और बढ़ सकती है। सरकार इस दायरे में अभी 254 अन्य ऐप्स को ला सकती है, जिसमें  PUBG का नाम भी शामिल हो सकता है।

गौरतलब है कि पिछले महीने ही भारत ने देश में 59 चीनी मोबाइल ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस लिस्ट में Tik Tok, UC ब्राउजर समेत कई ऐप्स शामिल थे। इन ऐप्स की वजह से डेटा पर सुरक्षा को लेकर चिंता जतायी जा रही थी।

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LinkedIn India के मैनेजिंग एडिटर का बड़ा कदम

लिंक्डइन से पहले चार्ली बिजनेस न्यूज चैनल ‘सीएनबीसी टीवी18’ (CNBC-TV18) में डिप्टी एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे

Last Modified:
Thursday, 23 July, 2020
Linkedin

नेटवर्किंग साइट ‘लिंक्डइन इंडिया’ (LinkedIn India) के मैनेजिंग एडिटर अदित चार्ली (Adith Charlie) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। चार्ली का कहना है कि वह पत्रकारिता से ब्रेक ले रहे हैं, इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया है। चार्ली को रिपोर्टिंग, लेखन, संपादन और लोक प्रबंधन में काम करने का करीब 14 साल का अनुभव है।चार्ली के इस कदम के बारे में ‘लिंक्डइन न्यूज’ के सीनियर मैनेजिंग एडिटर (APAC) निकोलेट लॉग (Nicolette Logue) का कहना है, ’17 जुलाई अदित का लिंक्डइन में आखिरी दिन था। हम उनके योगदान के बहुत आभारी हैं और उन्हें भविष्य में नई पारी के लिए शुभकामनाएं देते हैं। जब तक इस पद पर कोई स्थायी नियुक्ति नहीं हो जाती है, तब तक अंतरिम तौर पर मैं इंडिया में लिंक्डइन न्यूज की जिम्मेदारी संभालूंगा।’

बता दें कि चार्ली तीन साल से ज्यादा समय से लिंक्डइन से जुड़े हुए थे। लिंक्डइन से पहले चार्ली बिजनेस न्यूज चैनल ‘सीएनबीसी टीवी18’ (CNBC-TV18) में डिप्टी एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। वे अप्रैल, 2016 में ‘सीएनबीसी टीवी18’ के डिप्टी एडिटर बने थे, इससे पहले वे ‘द वीसी सर्कल नेटवर्क’ (The VCCircle Network) के सीनियर असिसटेंट एडिटर थे, जहां उन्होंने मई, 2015 से मार्च, 2016 तक काम किया।

इस कदम के बारे में चार्ली ने प्रोफेशनल नेटवर्किंग साइट पर लिखे एक संदेश में कहा है, ‘साढ़े तीन साल की पारी के बाद मैंने लिंक्डइन को बाय बोल दिया है। हमारे वीडियो इंटरव्यूज, डेली रन डाउन, टूडेज न्यूज व व्यूज और लाइव शोज से जुड़े रहने के लिए आप सभी का शुक्रिया। आपके प्यार और फीडबैक ने मुझे उत्कृष्ट और कुछ नया करने में मदद की। मैं ब्रेक ले रहा हूं और फिलहाल केरल में अपने गांव में परिवार के साथ समय गुजार रहा हूं।’ वहीं, लिंक्डइन ने स्पष्ट किया है कि चार्ली के इस कदम का कंपनी द्वारा हाल में की गई छंटनी की घोषणा से कोई लेना-देना नहीं है।

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EORTV ने अपनी कोर टीम का किया विस्तार, शामिल हुए ये नाम

इस ओटीटी प्लेटफॉर्म की ओर से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस युक्त वेबसाइट भी लॉन्च की गई है।

Last Modified:
Saturday, 18 July, 2020
EORTV

ओवर द टॉप मीडिया सर्विस प्लेटफॉर्म ‘EORTV’ ने अपनी कोर टीम में कुछ अप्वॉइंटमेंट करने की घोषणा की है। इसके अलावा इसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) युक्त अपनी वेबसाइट भी लॉन्च की है। कंपनी की ओर से कहा गया है कि इस कदम से वेबसाइट की एपीरिएंस, और सर्च की क्षमता को मजबूती मिलेगी। इसके अलावा इन्वेंट्री को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।

नई नियुक्तियों के तहत रूना सिन्हा ने कंपनी में चीफ रेवेन्यू ऑफिसर के तौर पर जॉइन किया है। रूना सिन्हा को विभिन्न नेशनल और इंटरनेशनल मीडिया में काम करने का करीब 23 साल का अनुभव है। अपनी नई भूमिका में वह सेल्स से जुड़े सभी कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगी।

रूना सिन्हा को Interact Vision Advtg and Marketing, The new Indian Express group, Mediascope Publicitas, Outlook Publishing,Burda International, Dainik Bhaskar और  Exchange4media आदि में काम करने का काफी अनुभव है। दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट रूना सिन्हा ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवर्टाइजिंग से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इसके अलावा उन्होंने आईआईएम कोलकाता से सीनियर मैनेजमेंट प्रोग्राम किया है।

रूना सिन्हा के अलावा अमित कश्यप ने ‘EORTV’ में चीफ डिजिटल ऑफिसर के पद पर जॉइन किया है। वह Aiozium ( Ai for Marketing ), Edibbee Digital Agency Samachar के फाउंडर हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स की डिग्री ली है। इसके अलावा वह AMA-अहमदाबाद से सर्टिफाइड प्रोफेशनल ट्रेनर भी हैं।

वहीं, देव दत्त ने चीफ डिजाइन ऑफिसर के तौर पर इस टीम में जॉइन किया है। देव दत्त को प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, डिजाइन, ब्रैंड डेवलपमेंट और मार्केटिंग में काम करने का काफी अनुभव है। न्यूजीलैंड में Whanganui School of Design से डिजाइन एंड कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट देव दत्त भारत, अमेरिका, यूरोप और न्यूजलैंड में क्लाइंट्स के लिए काम कर चुके हैं।

इसके अलावा ऊषा राचेल थॉमस (Usha Rachael Thomas) ने यहां चीफ पब्लिक रिलेशंस ऑफिसर के तौर पर जॉइन किया है। उन्हें जर्नलिज्म और कम्युनिकेशन के क्षेत्र में काम करने का दो दशक से ज्यादा का अनुभव है। वर्ष 2007 से 2017 के दौरान वह STAR Plus, ZEE TV, ZEE Cinema, Esselvision  में पब्लिक रिलेशन की जिम्मेदारी निभा चुकी हैं। आईआईएम अहमदाबाद और जमनाबाई नर्सी स्कूल की विद्यार्थी रहीं ऊषा ने सोफिया कॉलेज से इकनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में पोस्ट ग्रेजुएशन में मुंबई यूनिवर्सिटी को टॉप किया था।

बता दें कि ‘EORTV’  एलजीबीटीक्यू (LGBTQ) और इसी तरह की हार्मोनल चुनौतियों का सामना कर रहे समुदाय के बारे में समाज में स्वीकार्यता लाने के लिए उनसे जुड़ी स्टोरीज पर फोकस करता है। इस ओटीटी प्लेटफॉर्म को शुरू करने का उद्देश्य लोगों की मानसिकता में बदलाव लाने के साथ शांति, समानता, बंधुत्व और भाईचारा को बढ़ावा देना है।

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युवा पत्रकार पंकज कुमार ने तलाशी नई मंजिल

उत्तर प्रदेश में बलिया के रहने वाले पंकज कुमार ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

Last Modified:
Saturday, 18 July, 2020
Pankaj Kumar

युवा पत्रकार पंकज कुमार ने अपने करियर को नई दिशा देते हुए ‘नेटवर्क18’ के साथ अपनी नई पारी का आगाज किया है। उन्होंने यहां पर बतौर चीफ सब एडिटर, News 18 Languages जॉइन किया है। अपनी नई भूमिका में वह News18 की 11 भारतीय भाषाओं में मौजूद वेबसाइटों का काम देखेंगे, जिनमें News18 Lokmat, News18 Bangla और News18 Tamil शामिल हैं। 

समाचार4मीडिया से बातचीत में मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया ज़िले के रहने वाले पंकज कुमार ने बताया कि उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC) से साल 2012-13 में पत्रकारिता की पढ़ाई की है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘गांव कनेक्शन’ में बतौर रिपोर्टर की थी। यहां करीब तीन महीने अपनी जिम्मेदारी निभाने के बाद उन्होंने ‘एबीपी न्यूज’ का रुख कर लिया। यहां उन्हें आउटपुट में काम करने का मौका मिला। करीब पौने तीन साल ‘एबीपी न्यूज’ में बिताने के बाद पंकज कुमार ने यहां से बाय बोलकर ‘आईबीएन7’ का दामन थाम लिया।

इसके बाद पंकज कुमार ने ‘अजब गजब’ (Azab Gazab) के नाम से अपनी वेबसाइट शुरू की। करीब दो साल बाद वह News18 की डिजिटल टीम में शामिल हो गए। यहां करीब 15 महीने रहने के बाद उन्होंने भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफार्म ShareChat  के साथ अपनी पारी शुरू की, जहां बतौर key alliance manager उन्होंने उत्तर भारत मे मीडिया पार्टनरशिप का काम देखा।

करीब 10 महीने तक ShareChat में रहने के बाद पिछले दिनों उन्होंने नेटवर्क18 के साथ अपनी नई पारी शुरू की है। समाचार4मीडिया की ओर से पंकज कुमार को नई पारी के लिए शुभकामनाएं।

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RPSG ग्रुप के साथ पार्टनरशिप को लेकर Editorji के फाउंडर विक्रम चंद्रा ने कही ये बात

‘एक्सचेंज4मीडिया’ के साथ एक बातचीत में ‘एडिटरजी’ के फाउंडर विक्रम चंद्रा ने माना कि महामारी कोविड-19 के कारण डिजिटल कंटेंट को लेकर चीजें काफी बदल रही हैं।

Last Modified:
Thursday, 16 July, 2020
Vikram Chandra

‘आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस’ (AI)  पर आधारित ऑनलाइन वीडियो न्यूज प्लेटफॉर्म ‘एडिटरजी’ (Editorji) में आरपी संजीव गोयनका ग्रुप (RP Sanjiv Goenka Group) द्वारा 51% की बहुमत हिस्सेदारी (majority stake) हासिल करने की खबर ने एक बार फिर साबित कर दिया है डिजिटल न्यूज का इस्तेमाल (consumption) कितनी तेजी से बढ़ रहा है।

इस ऐप को ‘एनडीटीवी’ (NDTV) के पूर्व सीईओ विक्रम चंद्रा ने शुरू किया था। हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) के साथ एक बातचीत में विक्रम चंद्रा ने कहा, ‘डिजिटल न्यूज स्पेस में Editorji Technologies को हमेशा काफी हलचल (disruptive) करने वाली पेशकश के रूप में रखा गया। हम डिजिटल में कुछ बिल्कुल अलग करने का प्रयास कर रहे हैं और हम जानते थे कि लोगों को इस बात को समझने में समय लगेगा कि डिजिटल क्यों भविष्य है और क्यों वीडियो डिजिटल की ओर रुख कर रहे हैं।’

चंद्रा ने यह भी माना कि इन दिनों चल रही महामारी कोविड-19 इस बात का प्रमाण है कि जब डिजिटल कंटेंट को लेकर चीजें काफी बदल रही हैं। विक्रम चंद्रा के अनुसार, ‘पिछले करीब 100 दिनों में हमने ‘ओवर द टॉप’ की खपत और अन्य डिजिटल प्लेटफार्मों में काफी वृद्धि देखी है। डिजिटल की बात आती है तो यह काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है और लोग एक-दूसरे से मिलने के बजाय एक-दूसरे से बात करने के लिए डिजिटल वीडियो का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह एक बड़ा बदलाव है।’

चंद्रा ने कहा कि इस प्लेटफॉर्म के लिए कई संभव मुद्रीकरण मॉडल्स (monetization models) उपलब्ध थे और वे नई संभावनाओं को भी तलाशेंगे। उनका कहना था, ‘अभी अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और आरपी संजीव गोयनका (RPSG) समूह ने इसमें 51% की बहुमत हिस्सेदारी (majority stake) हासिल कर ली है। हम अब RPSG समूह के साथ बैठेंगे और इसके ठोस मॉडल (exact model) को अंतिम रूप देंगे। अभी हमारे सामने संभावित मॉडल्स की बड़ी लिस्ट है।’

हाल ही में कुछ इस तरह की रिपोर्ट्स आई थीं कि कोविड-19 के कारण पिछले करीब 100 दिनों में स्टार्ट-अप प्लेयर्स पर काफी व्यापक प्रभाव पड़ा है और उनमें से कुछ तो बंद भी हो गए हैं। विक्रम चंद्रा ने माना कि यह काफी मुश्किल समय है। उन्होंने यह भी कहा कि इस दौर में न सिर्फ स्टार्ट-अप्स बल्कि पूरा एमएसएमई (MSME) सेक्टर भी चुनौतीपूर्ण समय से गुजर रहा है।

विक्रम चंद्रा का यह भी कहना था, ‘मुश्किल समय के बावजूद हम हमेशा आशान्वित रहे हैं कि कुछ होगा और मुझे लगता है कि यह संभवत: सबसे अच्छा क्षण है, जिसकी मुझे उम्मीद थी। हमारा जो प्लेटफॉर्म है और जो प्रॉडक्ट है (आईटी कंटेंट आदि) और अब RPSG समूह के साथ यह पार्टनरशिप हमें बहुत आगे ले जाएगी।’

उन्होंने कहा, ‘मार्केट में एडिटरजी की स्थिति बिल्कुल स्पष्ट है। हम 15 से 20 सेकंड के तथ्यात्मक सूचनाओं वाले वीडियो बनाने के बिजनेस में हैं। लोग इन वीडियो को शेयर कर सकते हैं और अपनी राय शामिल कर सकते हैं। एडिटरजी की प्रकृति केवल तथ्यात्मक होना है। इसमें कोई राजनीतिक संबद्धता या पूर्वाग्रह नहीं है और लोगों को एडिटरजी इसलिए काफी पसंद है।’

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इस नाम से HT Media ने शुरू की बंगाली न्यूज वेबसाइट

एचटी मीडिया (HT Media) ने बंगाली न्यूज वेबसाइट की शुरुआत की है, जोकि अपनी तरह की पहली मोबाइल न्यूज वेबसाइट है

Last Modified:
Wednesday, 15 July, 2020
HTBangla

एचटी मीडिया (HT Media) ने बंगाली न्यूज वेबसाइट ‘एचटी बांग्ला’ (HT Bangla) की शुरुआत की है, जोकि अपनी तरह की पहली मोबाइल न्यूज वेबसाइट है।

‘एचटी बांग्ला’ (bangla.hindustantimes.com) बंगाली युवाओं के लिए एक नए जमाने का न्यूज प्लेटफॉर्म है। इसमें उनसे संबंधित विषयों को नए अंदाज में रखा गया है  

लॉन्च के कुछ ही महीनों में ‘एचटी बांग्ला’ में 10 मिलियन मंथली पेज व्यू और 4 मिलियन मंथली यूजर्स हो गए हैं, इनमें 66% से अधिक पाठक 18-34 वर्ष की आयु वर्ग के हैं।   

शुरुआत से ही ‘एचटी बांग्ला’ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और ट्विटर पर मौजूद है और अब यह यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर भी जगह बना चुका है।

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डिजिटल इंडिया के लिए गूगल 5-7 वर्षों में करेगा 75,000 करोड़ का निवेश

गूगल के छठे ‘गूगल फॉर इंडिया इवेंट 2020’ को पहली बार वर्चुअली आयोजित किया गया।

Last Modified:
Monday, 13 July, 2020
Google45

गूगल के छठे ‘गूगल फॉर इंडिया इवेंट 2020’ को पहली बार वर्चुअली आयोजित किया गया। इस दौरान गूगल और अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई ने घोषणा कि डिजिटल इंडिया (India Digitization Fund) के लिए गूगल अगले 5-7 सालों में 75,000  करोड़ रुपए का निवेश करेगा।

गूगल और अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई ने कहा कि गूगल का यह निवेश इक्विटी इनवेस्टमेंट, पार्टनरशिप और ऑपरेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम इंडस्ट्री में होगा। गूगल ने सीबीएसई के साथ साझेदारी की घोषणा की, इसके तहत ई-लर्निंग का विस्तार किया जाएगा।  उन्होंने कहा कि यह भारत के भविष्य और इसकी डिजिटल अर्थव्यवस्था को लेकर हमारे आत्मविश्वास का प्रतिबिंब है।

यह निवेश डिजिटल इंडिया के चार महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर पर होगा, जिसमें पहले है कि इस राशि का इस्तेमाल हिन्दी, तमिल और पंजाबी सहित अन्य भारतीय भाषाओं में सूचनाओं को हर देशवासी तक पहुंचाने के लिए किया जाएगा। दूसरा भारतीय लोगों की जरूरतों को पूरा करने वाले नए प्रॉडक्ट्स एवं सर्विसेज के विकास के लिए भी इस फंड का इस्तेमाल किया जाएगा। 

तीसरा व्यवसायों को और ज्यादा सशक्त बनाया जा रहा है ताकि वे अपने डिजिटल ट्रांसफोर्मेशन को जारी रखें अथवा शुरू कर सकें। चौथा समाज की बेहतरी के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि जैसे क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का लाभ उठाने के लिए इसमें निवेश किया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  ट्विटर के जरिए गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई के साथ हुई वर्चुअल मीटिंग जानकारी भी दी। उन्होंने ट्वीट किया कि आज सुबह @सुंदरपिचाई के साथ एक सफल बातचीत हुई। हमने भारत के किसानों, युवाओं और उद्यमियों के जीवन को बदलने के लिए टेक्नोलॉजी के इस्‍तेमाल सहित कई मुद्दों पर चर्चा की।

पीएम मोदी ने ट्वीट किया कि मुझे गूगल की ओर से कई सेक्टर में किए जा रहे कामों के बारे में पता चला। खासतौर पर एजुकेशन, लर्निंग, डिजिटल इंडिया, डिजिटल पेमेंट समेत कई सेक्टर में।

पीएम मोदी ने लिखा, 'सुंदर पिचाई से बातचीत के दौरान मैंने नई कार्य संस्कृति के बारे में बात की जो कोरोना के समय में उभर रही है। हमने उन चुनौतियों पर चर्चा की जो वैश्विक महामारी ने खेल जैसे क्षेत्रों में ला दी है। हमने डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा के महत्व के बारे में भी बात की।'

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