अखबारों के डिजिटल सबस्क्रिप्शन की दिशा में आगे बढ़ने को लेकर अब उठने लगा है ये सवाल

हालांकि कुछ अखबार पहले से ऑनलाइन एडिशन के लिए सबस्क्रिप्शन मॉडल (paywall) अपना रहे हैं, जबकि कुछ अन्य अखबार इस नक्शे कदम पर चलने की तैयारी में हैं

Last Modified:
Friday, 22 May, 2020
Digital Media

देश-दुनिया में आतंक मचा रहे कोरोनावायरस (कोविड-19) ने मार्केट ट्रेंड और उपभोग के पैटर्न्स (consumption patterns) को काफी बदल दिया है। कोरोनासंक्रमण के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लागू किए गए लॉकडाउन का असर प्रिंट मीडिया पर भी पड़ रहा है। इस दौरान कई अखबारों की प्रिंटिंग प्रभावित हुई है। कोरोनावायरस के अखबारों पर पड़ रहे प्रभावों के बीच पाठकों की एक नई कैटेगरी उभरकर सामने आई है। हालांकि, ये ऐसे नए पाठक नहीं हैं, जिन्हें रोजाना सुबह-सुबह अखबार पढ़ने की आदत है, लेकिन वे उस माध्यम के लिए नए हैं जो उन्होंने हाल ही में अपने समाचार पत्रों को पढ़ने के लिए इस्तेमाल किया है।

हालांकि, न्यू मीडिया के तमाम समर्थकों का लंबे समय से कहना है कि देश में प्रिंट मीडिया जल्द ही खत्म हो जाएगा, लेकिन प्रिंट मीडिया की स्थिति को देखें और इंडस्ट्री से जुड़े तमाम शीर्ष अधिकारियों की मानें तो फिलहाल ऐसा कुछ भी नहीं होने जा रहा है। पिछले तीन सालों में सर्कुलेशन के हिसाब से सबसे ज्यादा बिकने वाला अखबार (इंडियन रीडरशिप सर्वे के अनुसार) अपनी रीडरशिप यानी पाठक संख्या को 6.8 करोड़ से सात करोड़ के बीच में बनाए रखने में कामयाब रहा है। इस बात से साफ पता चलता है कि देश में अभी भी प्रिंट माध्यम लोगों की पसंद बना हुआ है।

अब सवाल उठता है कि क्या जो लोग ऑनलाइन अखबार पढ़ते हैं, वे भी इसके लिए भुगतान करने के लिए तैयार हैं? इस बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक धीमी प्रक्रिया है लेकिन जो अखबार को महत्व देते हैं वे देर-सवेर इसके लिए भुगतान करने के लिए तैयार हो जाएंगे। विश्लेषकों के अनुसार, यह आने वाले समय में रेवेन्यू के हिसाब से न्यूज ऑपरेशंस के लिए भी काफी फायदेमंद होगा। हालांकि, बहुत सारे समाचार पत्र जैसे बिजनेस स्टैंडर्ड (Business Standard) लंबे समय से ऑनलाइन अखबार पढ़ने के लिए भुगतान का मॉडल अपना रहे हैं, कई अन्य ब्रैंड्स भी हाल ही में इस दौड़ में शामिल हुए हैं।

देश के प्रमुख अंग्रेजी अखबार ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ (The Times of India) ने पिछले हफ्ते ही अपने ई-पेपर को पढ़ने के लिए इस पर सबस्क्रिप्शन मॉडल लागू किया है। यानी अब इस अखबार का ई-पेपर पढ़ने के लिए पाठकों को इसे सबस्क्राइब करना होगा, जिसके लिए हर महीने 199 रुपए शुल्क भी चुकाना होगा।

ऐसे में सवाल उठता है कि धीमी अर्थव्यवस्था के बावजूद इंडियन रीडरशिप सर्वे 2019 की चौथी तिमाही (IRS 2019 Q4)  में जिन अखबारों की रीडरशिप में बढ़ोतरी देखी गई है, वे आखिर क्यों सबस्क्रिप्शन मॉडल अपना रहे हैं? ‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ (BCCL) की एग्जिक्यूटिव कमेटी के चेयरमैन शिवकुमार सुंदरम का कहना है, ‘लॉकडाउन के कारण हमारे अखबार की डिलीवरी हमारे सभी पाठकों तक सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, ऐसे में हमारी ड्यूटी है कि लोगों तक हम प्रमाणिक खबरें पहुंचाएं। ऐसे में मुफ्त में ई-पेपर उपलब्ध होने पर शरारत करने वाले तत्व समाचारों को डाउनलोड कर उनसे साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं अथवा फेक न्यूज को प्रसारित कर सकते हैं। ई-पेपर के लिए सबस्क्रिप्शन मॉडल अपनाकर हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि जो पाठक न्यूज का ऑरिजिनल वर्जन पढ़ना चाहते हैं वे इसकी प्रमाणिकता पर पूरा भरोसा कर सकते हैं।’

शिवकुमार सुंदरम का यह भी कहना है, ‘इस तरह हम अखबार के डाउनलोड किए गए और फॉरवर्ड किए गए वर्जन की खपत (consumption) को हतोत्साहित करते हैं, क्योंकि इस नाजुक समय में यह हमारे समाज के लिए भ्रामक और खतरनाक हो सकता है।’ सुंदरम के अनुसार, ‘वॉट्सऐप ग्रुप्स पर जो भी मुफ्त में और फॉरवर्ड होकर मिलता है, उसका कोई महत्व नहीं है। अखबार द्वारा सबस्क्रिप्शन का यह मॉडल रेवेन्यू जुटाने के लिए नहीं अपनाया गया है, हालांकि इसकी घोषणा के बाद से इसे अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।’

हालांकि, सिर्फ ‘बीसीसीएल’ ही नहीं है, जिसके पाठक कंटेंट हासिल करने के लिए अखबार द्वारा लगाए गए शुल्क का समर्थन कर रहे हैं, ‘द हिंदू’ भी अपने ई-पेपर को लंबे समय से सबस्क्रिप्शन मॉडल पर उपलब्ध करा रहा है और वह भी इसके परिणाम से खुश है। ‘द हिंदू’ ग्रुप के वाइस प्रेजिडेंट और बिजनेस हेड (डिजिटल मीडिया) प्रदीप गैरोला (Pradeep Gairola) का कहना है, ‘हमारे सबस्क्रिप्शन के आंकड़े काफी उत्साहित करने वाले हैं। द हिंदू की सफलता ने हमें अपने अन्य ब्रैंड्स को सबस्क्रिप्शन मॉडल अपनाने के लिए प्रेरित किया है। अब इस ब्रैंड के सभी प्रॉडक्ट जैसे- BusinessLine, Frontline, Sportstar और Young World Club आदि भुगतान वाले सबस्क्रिप्शन मॉडल पर हैं। लॉकडाउन ने ब्रैंड के लिए इन नंबरों को बढ़ाने में वास्तव में मदद की है। यह दर्शाता है कि इस ट्रेंड को न सिर्फ मीडियम द्वारा बल्कि पाठकों द्वार भी स्वीकार किया जा रहा है।’

गैरोला का कहना है, ‘लॉकडाउन के दौरान हमें अपने सबस्क्राइबर बेस में काफी उछाल देखने को मिला है। हालांकि हमने द हिंदू की वेबसाइट पर फ्री आर्टिकल्स की संख्या दोगुनी कर दी है, ई-पेपर के फ्री ट्रायल के दिनों की संख्या को बढ़ा दिया है और कई अन्य कवायद भी की है, अधिकांश लोग हमारी पत्रकारिता को पसंद कर रहे हैं और कंटेंट के लिए भुगतान कर रहे हैं। कोविड-19 के दौरान न्यूज का उपभोग (consumption) पूरी दुनिया में बढ़ा है। इसने लोगों को समाचार के भरोसेमंद स्रोतों को चुनने के लिए भी मजबूर किया है। इसलिए हमारा मानना है कि लॉकडाउन के बाद भी यह ट्रेंड जारी रहेगा।’

यह सिर्फ अंग्रेजी अखबारों की बात नहीं है, हिंदी और अन्य प्रादेशिक अखबार भी इस कदम का समर्थन कर रहे हैं। इनमें से अधिकांश भी इस मॉडल को अपनाने के रास्ते पर हैं। इस बारे में ‘जागरण प्रकाशन’ के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (स्ट्रैटेजी, ब्रैंड और बिजनेस डेवलपमेंट) बसंत राठौड़ का कहना है, ‘तमाम अखबारों ने अपने डिजिटल कंटेंट को एक्सेस करने के लिए सबस्क्रिप्शन मॉडल अपनाया है और यह सही है। कंटेंट को तैयार करने में काफी खर्च आता है, यदि कंटेंट निर्माता उसके लिए शुल्क लेने का निर्णय लेते हैं तो यह पूरी तरह सही है। देश के लोग भी डिजिटल सबस्क्रिप्शन के भुगतान के लिए तैयार है, लेकिन अभी बड़े पैमाने पर ऐसा नहीं है। आने वाले समय में यह और बढ़ेगा और लोग अखबार के डिजिटल सबस्क्रिप्शन के लिए भुगतान करेंगे।’

वहीं, ‘मातृभूमि’ ग्रुप के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर एमवी श्रेयम्स कुमार का कहना है कि हालांकि कुछ समय से उनका अखबार डिजिटल सबस्क्रिप्शन मॉडल पर है लेकिन उन्होंने इसे ज्यादा प्रमोट नहीं किया है। उनका कहना है, ‘लोग फ्री कंटेंट के आदी हैं, ऐसे में हमें यह नहीं भूलना चाहे कि 80 प्रतिशत डिजिटल एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू दुनिया में दो बड़ी कंपनियों को जाता है। अखबार यहां टिके हुए हैं और यदि इन्हें ऑनलाइन पढ़ने के लिए सबस्क्रिप्शन मॉडल पर लाया जाता है तो देर-सवेर पाठक इसके लिए भुगतान करेंगे।’

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ZEE5 इंडिया के सीईओ तरुण कात्याल को IAMAI में मिली बड़ी जिम्मेदारी

उन्हें ‘फेसबुक इंडिया’ (Facebook India) के मैनेजिंग डायरेक्टर अजीत मोहन की जगह यह पदभार दिया गया है

Last Modified:
Thursday, 21 May, 2020
Tarun Katial

मोबाइल स्ट्रीमिंग ‘ZEE5 इंडिया’ (Zee5 India) के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर तरुण कात्याल को ‘इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (IAMAI) की डिजिटल एंटरटेनमेंट कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। उन्हें ‘फेसबुक इंडिया’ (Facebook India) के मैनेजिंग डायरेक्टर अजीत मोहन की जगह यह नियुक्ति मिली है। इसके अलावा ‘Kurate Digital Consulting’ के सीनियर पार्टनर उदय सोढी के स्थान पर ‘वायकॉम18 डिजिटल वेंचर्स’ (Viacom 18 Digital Ventures) के सीओओ  गौरव रक्षित को नया वाइस चेयरमैन नामित किया गया है।  

बता दें कि ‘IAMAI’ सभी प्रमुख विडियो ऑन डिमांड और ऑडियो ऑन डिमांड कंपनियों जैसे- Netflix, Zee5, Prime Video, Hotstar, Sony Liv, Viacom18, RJio Studios, MX Player, Hungama, Discovery, Hoichoi, Arre, Hooq, Gaana, Saavn और Flickstree आदि का प्रतिनिधित्व करती है।

अपनी नियुक्ति के बारे में तरुण कात्याल का कहना है, ‘कोविड-19 के कारण अन्य क्षेत्रों की तरह डिजिटल एंटरटेनमेंट सेक्टर भी तमाम चुनौतियों का सामना कर रहा है। IAMAI के रूप में इस समय हमारा प्रमुख काम प्रॉडक्शन से संबंधित गतिविधियों को जल्द से जल्द फिर शुरू कराने के लिए सरकार, नीति निर्माताओं और स्थानीय अधिकारियों से सपोर्ट हासिल करना है। इस महामारी के कारण उभरे तमाम मुद्दों को सूचना प्रसारण मंत्रालय के समक्ष उठाया जाएगा। इसके अलावा इस सेक्टर की ग्रोथ में बाधा डाल रहे लंबित मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।’

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न्यूज वेबसाइट The Quint का अधिग्रहण करेगी यह कंपनी

एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बिजनेस में द क्विंट की हिंदी और अंग्रेजी वेबसाइट शामिल होगी, लेकिन BloombergQuint शामिल नहीं होगी।

Last Modified:
Thursday, 07 May, 2020
The Quint

‘हल्दीराम स्नैक्स’ (Haldiram Snacks) की हिस्सेदारी वाली कंपनी ‘गौरव मर्केंटाइल्स लिमिटेड’ (Gaurav Mercantiles Ltd) ने कहा है कि वह मीडिया मुगल राघव बहल और उनकी पत्नी रितु कपूर के स्वामित्व वाली ‘क्विंटिलियन मीडिया’ (Quintillion Media) के डिजिटल बिजनेस का अधिग्रहण करने जा रही है। ‘VCCircle’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, ‘गौरव मर्केंटाइल्स लिमिटेड’ ने स्टॉक एक्सचेंज को इस बारे में जानकारी दी है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है, ‘इस बिजनेस में ‘द क्विंट’ की हिंदी और अंग्रेजी वेबसाइट शामिल हैं, लेकिन ‘क्विंटिलियन मीडिया’ (Quintillion Media) और अमेरिकी कंपनी ‘ब्लूमबर्ग एलपी’ (Bloomberg LP) के जॉइंट वेंचर ‘ब्लूमबर्गक्विंट’ (BQ) की न्यूज वेबसाइट का बिजनेस शामिल नहीं है।’

रिपोर्ट के अनुसार, क्विंटिलियन ने ‘द क्विंट’ को बेचने का निर्णय पिछले महीने की गई उस घोषणा के बाद लिया है, जिसमें कहा गया था कि ‘ब्लूमबर्गक्विंट’ अपनी टेलिविजन डिवीजन को बंद कर देगा, क्योंकि सरकार से अभी तक ब्रॉडकास्ट लाइसेंस नहीं मिला है। इसके साथ ही यह भी कहा गया था कि अपनी अवॉर्ड विनिंग प्रीमियम डिजिटल सबस्क्रिप्शन सर्विस BloombergQuint.com की शुरुआती सफलता को देखते हुए ‘ब्लूमबर्गक्विंट’ अपने सभी संसाधनों का पूरा फोकस इस पर रखेगा। उस समय यह भी कहा गया था कि वह अब ‘BloombergQuint.com’ वेबसाइट पर फोकस करेगी।  

‘VCCircle’ की रिपोर्ट के अनुसार, गौरव मर्केंटाइल्स ने कहा है कि वह अपना नाम बदलेगी और अपना रजिस्टर्ड ऑफिस मुंबई से दिल्ली शिफ्ट करेगी, जहां पर क्विंटिलियन का ऑफिस है। स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में गौरव मर्केंटाइल्स की ओर से यह भी कहा गया है कि इस कदम से डिजिटल मीडिया बिजनेस में अपने पैर जमाने में मदद मिलेगी।  

VCCircle’ की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मुंबई की यह कंपनी  ‘क्विंटिलियन’ का अधिकरण 30.58 करोड़ रुपए के एंटरप्राइज वैल्यूएशन (enterprise valuation) और 12.62 करोड़ रुपए की इक्विटी वैल्यू (equity value) पर करेगी।

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ZEE5 India से जुड़े राजीव ढल, मिली बड़ी जिम्मेदारी

'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) की ओटीटी सर्विस 'ZEE5' में राजीव ढल को बड़ी जिम्मेदारी मिली है।

Last Modified:
Tuesday, 21 April, 2020
Zee5

'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) की ओटीटी सर्विस 'ZEE5' में राजीव ढल को बड़ी जिम्मेदारी मिली है। उन्हें यहां चीफ रेवेन्यू ऑफिसर बनाया गया है। वह तरनजीत सिंह की जगह लेंगे और ‘ZEE5 India’ के सीईओ तरुण कात्याल को रिपोर्ट करेंगे।

इस बारे में तरुण कात्याल का कहना है, ‘हमें विश्वास है कि राजीव के अनुभवों और उनकी लीडरशिप स्किल्स का हमें काफी लाभ मिलेगा। उम्मीद है कि देश में हमारी ग्रोथ को अगले चरण में ले जाने में ऐड सेल्स टीम और ऑपरेशन फंक्शन को उनका मार्गदर्शन मिलेगा। अपनी टीम में राजीव ढल के शामिल होने को लेकर हम काफी उत्साहित हैं।’

बता दें कि दो दशक से ज्यादा के करियर में ढल ने मीडिया और कंज्यूमर इंटरनेट कंपनियों में विभिन्न वरिष्ठ पदों पर काम किया है। फिलहाल वह ‘SHAREit’ में रेवेन्यू से जुड़े कामों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इससे पहले वह ‘Dailyhunt’ में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। पिछले 13 वर्षों में वह चार स्टार्टअप्स का नेतृत्व कर चुके हैं। अब अपनी नई भूमिका में वह एडवर्टाइजिंग सेल्स और ऑपरेशंस के द्वारा ‘ZEE5 India’ के रेवेन्यू की ग्रोथ के लिए जिम्मेदार होंगे।

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लॉकडाउन के दौरान अब मुफ्त में देख सकेंगे ये टीवी चैनल्स

लॉकडाउन के दौरान घरों में बैठे लोगों के मनोरंजन का ध्यान रखते उठाया गया है ये कदम

Last Modified:
Saturday, 18 April, 2020
Channel

पूरी दुनिया में कोरोनावायरस (कोविड-19) ने कोहराम मचा रखा है। कोरोना के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सरकार ने देश में लॉकडाउन कर लोगों से घरों पर रहने की अपील की है। ऐसे में घरों में बैठे हुए लोग अपना समय काटने और बोरियत दूर करने के लिए तमाम उपाय कर रहे हैं। घरों में लोग बोर न हों और उन्हें भरपूर मनोरंजन उपलब्ध कराया जा सके, इसके लिए ब्रॉडकास्टर्स भी तमाम कदम उठा रहे हैं।

पिछले दिनों ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ (Indian Broadcasting Foundation) द्वारा चार पेड चैनल्स को दर्शकों के लिए दो महीने तक मुफ्त में दिखाने की पेशकश के बाद अब ‘एयरटेल’ (Airtel) और ‘डिशटीवी’ (Dish TV)  ने अपने यूजर्स को मुफ्त में चार चैनल देने की घोषणा की है।

Airtel Digital TV ने जिन चैनल्स को फ्री में देने का ऐलान किया है, उनमें Airtel CuriosityStream, Airtel Seniors TV, Aapki Rasoi और Let's Dance शामिल हैं। लॉनडाउन के दौरान इन चैनल्स को देखने के लिए यूजर्स को अब अलग से पैसे देने की आवश्यकता नहीं हैं। यानी ये चैनल्स मुफ्त में देखे जा सकेंगे।

वहीं, डिश टीवी ने भी यूजर्स के लिए मुफ्त में Fitness Active, Kids Active Toons, Ayushmaan Active और Kids Active Rhymes चैनल्स  ऑफर किए हैं। यानी कि लॉकडाउन के दौरान इन चैनल के लिए भी कोई चार्ज नहीं देना होगा।

गौरतलब है कि कुछ दिनों पूर्व ही ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ ने भी इसी तरह का कदम उठाया था। इसके तहत ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ के सदस्यों ने सोनी के चैनल ‘सोनी पल’, स्टार इंडिया के चैनल ‘स्टार उत्सव’ जी टीवी के चैनल ‘जी अनमोल’ और ‘वायकॉम18’ के कलर्स बुके (bouquet) में शामिल चैनल ‘कलर्स रिश्ते’ को दो माह तक मुफ्त में प्रसारित करने की पेशकश की थी। ये सभी चैनल पे चैनल्स (pay channels) हैं। इस पेशकश के तहत अब ये चैनल्स देश भर में सभी ‘डायरेक्ट टू होम’ (DTH) और केबल नेटवर्क्स पर दो महीने के लिए मुफ्त में देखे जा सकते हैं। यानी देश भर के दर्शकों को अब इन चैनल्स को देखने के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ेगा।

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CM योगी के खिलाफ फर्जी खबर फैलाने पर संपादक के खिलाफ 2 जगह दर्ज हुईं FIR

यूपी की योगी सरकार ने ‘द वायर’ के संस्थापक-संपादक सिद्धार्थ वरदराजन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कराई है।

Last Modified:
Thursday, 02 April, 2020
yogi

कोरोना के संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए पूरा देश 21 दिनों के लिए लॉकडाउन है। ऐसे में कोरोना से बचने व लोगों में जागरूकता फैलाने को लेकर देश की मीडिया भी अपना बड़ा योगदान दे रही है। वहीं इस  बीच फेक खबरों को बाजार भी गर्म है। इसी कड़ी में  यूपी की योगी सरकार ने ‘द वायर’ के संस्थापक-संपादक सिद्धार्थ वरदराजन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कराई है।

वरदराजन पर आरोप है कि उन्होंने तब्लीगी जमात की हरकतों के बचाव में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का गलत उद्धरण दिया था।

बता दें कि एक अप्रैल को 'द वायर' के संपादक ने सीएम योगी पर झूठी टिप्पणी करते हुए कहा था, 'जिस दिन तब्लीगी जमात का आयोजन हुआ था, उस दिन योगी आदित्यनाथ ने जोर देकर कहा था कि 25 मार्च से 2 अप्रैल तक रामनवमी के अवसर पर अयोध्या में आयोजित होने वाला एक बड़ा मेला हमेशा की तरह आयोजित होगा।' 

इसे लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने ट्वीट कर उन्हें आगाह भी किया था कि झूठ फैलाने का प्रयास ना करें, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कभी ऐसी कोई बात नहीं कही है। इसे फौरन डिलीट करें अन्यथा इस पर कार्यवाही की जाएगी तथा डिफेमेशन का केस भी लगाया जाएगा। वेबसाइट के साथ-साथ केस लड़ने के लिए भी डोनेशन मांगना पड़ेगा फिर।

मृत्युंजय कुमार के मुताबिक राज्य सरकार की चेतावनी के बावजूद, वरदराजन द्वारा न ही गलत लेख को हटाया गया और न ही इसके लिए माफी मांगी गई। इसलिए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। द वॉयर के खिलाफ उक्त कार्रवाई चेतावनी के बाद की गई है।

मृत्युंजय कुमार ने एक अन्य ट्वीट करते हुए लिखा, ‘हमारी चेतावनी के बावजूद इन्होंने अपने झूठ को ना डिलीट किया ना माफी मांगी। कार्यवाही की बात कही थी, FIR दर्ज हो चुकी है आगे की कार्यवाही की जा रही है। अगर आप भी योगी सरकार के बारे में झूठ फैलाने के की सोच रहे है तो कृपया ऐसे ख्याल दिमाग से निकाल दें।’

बता दें कि वरदराजन के खिलाफ दो अलग-अलग जगहों पर मामला दर्ज किया गया है। पहला मामला फैजाबाद में भारतीय दंड संहिता की धारा 188 और 505 (2) के तहत दर्ज किया गया है, वहीं दूसरा मामला  अयोध्या में धारा 188 और 505 (2) व आईटी एक्ट के 66D के तहत  मामला दर्ज किया गया है।

 

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e4m समूह ने की DigiOne अवॉर्ड्स की घोषणा, इन कैटेगरी में करें आवेदन

विजेताओं को 15 मई 2020 को दिल्ली-एनसीआर में होने वाले एक भव्य समारोह में सम्मानित किया जाएगा।

Last Modified:
Tuesday, 31 March, 2020
Awards

प्रतिष्ठित मीडिया समूह ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) ने ऑनलाइन मीडिया और पब्लिशिंग के क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट कार्य को नई पहचान व सम्मान देने के लिए ‘डिजिवन’ (DigiOne) अवॉर्ड्स लॉन्च करने की घोषणा की है।

इन अवॉर्ड्स को तीन ग्रुप्स (वेबसाइट्स, विडियो और मोबाइल साइट्स व ऐप्स) में बांटा गया है। तीनों ग्रुप्स में इंड्स्ट्री, फीचर और डिजाइन अथवा परफॉर्मेंस व क्राफ्ट से संबंधित अवॉर्ड्स कैटेगरी होंगी।‘वेबसाइट’ ग्रुप की बात करें तो इसमें हास्य से लेकर न्यूज और एंटरटेनमेंट कैटेगरी को शामिल किया गया है। ऑनलाइन विडियो ग्रुप में न्यूज, स्पोर्ट्स, पब्लिक सर्विस, म्यूजिक, ट्रेलर्स और रियलिट शोज जैसी कैटेगरी शामिल हैं।

बता दें कि एक एंट्री को कई कैटेगरी (मल्टीपल कैटैगरी) में शामिल किया जा सकता है। मल्टीपल कैटेगरी में मिलने वाली एंट्रीज की हर कैटेगरी के लिए अलग से समीक्षा की जाएगी और वे कई अवॉर्ड्स भी जीत सकती हैं।   

इस बारे में ‘एक्सचेंज4मीडिया’ समूह के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा का कहना है, ‘ बिजनेस से लेकर दैनिक जीवन में ऑनलाइन मीडिया की जबर्दस्त ग्रोथ और इस दिशा में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों को दर्शाने के लिए हमने ये अवॉर्ड्स शुरू किए हैं।’

इन अवॉर्ड्स के लिए शामिल होने वाली एंट्रीज का मूल्यांकन मीडिया, मार्केटिंग, एडवर्टाइजिंग, फिल्म मेकिंग, डिजिटल मीडिया और डिजाइन से जुड़े दिग्गजों द्वारा किया जाएगा। विजेताओं को 15 मई 2020 को दिल्ली-एनसीआर में होने वाले एक भव्य समारोह में सम्मानित किया जाएगा। विजेताओं में शामिल एंट्रीज को ‘एक्सचेंज4मीडिया’ समूह के सभी ऑनलाइन और पब्लिशिंग प्लेटफॉर्म्स (exchange4media.com, Impact और Pitch) में भी शामिल किया जाएगा।

इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए आप यहां पर क्लिक कर सकते हैं।

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रोहित सक्सेना लाए नया मीडिया वेंचर, जनता के सामने रखेंगे सांसदों के कामकाज का ब्योरा

पार्लियामेंट के कामकाज का अनुभव एवं लेखनी पर अच्छी पकड रखने वाले लोग इस ग्रुप के साथ जुड़ सकते हैं

Last Modified:
Monday, 23 March, 2020
Digital Media

दो दशक से ज्यादा समय तक प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अपनी सेवाएं दे चुके रोहित सक्सेना ने लंबे समय से संसदीय कार्यप्रणाली और संसद व सांसदों से जुड़ी खबरों से रूबरू कराने वाले ‘पार्लियामेंट्री बिजनेस’ (ParliamentaryBusiness.com) के तहत सांसदों पर रिसर्च कर रहे नीरज गुप्ता के साथ मिलकर इसे अब मीडिया वेंचर का रूप दिया है। रोहित सक्सेना इस ग्रुप में सीईओ और मैनेजिंग एडिटर के रूप में कार्यभार संभालेंगे। वहीं, नीरज गुप्ता बतौर एडिटर-इन-चीफ अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे। y

बता दें कि  यह ग्रुप IPTV के कॉन्सेप्ट पर वेबसाइट ‘पार्लियामेंट्री बिजनेस डॉट कॉम’ (ParliamentaryBusiness.com) शुरू कर रहा है। साथ ही मैगजीन भी ला रहा है। इसके अतिरिक्त यह ग्रुप जल्द ही एक चैनल भी शुरू करेगा।

इस मीडिया हाउस का संचालन नोएडा सेक्टर 7 स्थित इसके हेड ऑफिस से होगा। बताया जाता है कि इस मीडिया हाउस का उद्देश्य सांसदों को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति जवाबदेही तय कराना हैl  पार्लियामेंट बिजनेस सांसदों को उनके क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं से अवगत कराने एवं संसदीय क्षेत्र की जनता और उनके प्रतिनिधियों (सांसदों) के बीच कड़ी का काम करेगाl

खबर है कि देशभर से लगभग 600 पत्रकार (Reporters) इस समूह के साथ जुड़ेंगे। ‘एक सांसद-एक रिपोर्टर’ की शैली पर पार्लियामेंट बिजनेस के रिपोर्टर्स रोजाना सांसदों के कामकाज का ब्यौरा जनता के बीच लाने का कार्य करेंगे तथा संसदीय क्षेत्र से लेकर संसद में की गई उनके परफॉर्मेंस का लेखा-जोखा भी जनता तक पहुंचाएंगे।

पार्लियामेंट के कामकाज का अनुभव एवं लेखनी पर अच्छी पकड़ रखने वाले लोग इस ग्रुप के साथ जुड़ने के लिए अपना प्रोफाइल  hr@parliamentarybusiness.com पर भेज सकते हैं।

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BBC India के डिजिटल एडिटर मिलिंद खांडेकर ने लिया ये बड़ा फैसला

हिंदी और अंग्रेजी दोनो ही भाषाओं में बराबर की पकड़ होने के बावजूद भी मिलिंद खांडेकर ने शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता की ओर अपना रुख किया।

Last Modified:
Friday, 13 March, 2020
Milind Khandekar

‘बीबीसी (इंडिया)’ के डिजिटल एडिटर मिलिंद खांडेकर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। खांडेकर ने अपने ट्विटर अकाउंट पर इसके बारे में जानकारी दी है।

इस ट्वीट में खांडेकर का कहना है, ‘बीबीसी इंडिया के साथ मेरा सफर काफी बेहतर रहा। इस दौरान कई नई चीजें सीखने का मौका भी मिला। भारत में बीबीसी ने काफी विस्तार किया है और मैं काफी सौभाग्यशालू हूं जो इसका हिस्सा रहा। मैं अपने सभी साथियों को धन्यवाद देता हूं और उनके उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं। अपने अगले कदम के बारे में मैं जरूर जानकारी दूंगा।’

गौरतलब है कि मिलिंद खांडेकर ने अगस्त, 2018 की शुरुआत में एबीपी न्यूज में अपनी 14 साल की लंबी पारी को विराम दिया था। वे यहां मैनेजिंग एडिटर पद पर कार्यरत थे।  2016 में उनका कद बढ़ाकर उन्हें नई जिम्मेदारियां सौंपी गई थी। एबीपी न्यूज नेटवर्क में उनका योगदान हिंदी चैनल के साथ शुरू हुआ और धीरे-धीरे एबीपी न्यूज नेटवर्क के डिजिटल और क्षेत्रीय (बंगाली, मराठी और गुजराती) चैनलों की ओर भी बढ़ा।

गौरतलब है कि 2016 में ही मिलिंद खांडेकर को टीवी न्यूज इंडस्ट्री के प्रतिष्ठित अवॉर्ड एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड (enba) के तहत बेस्ट एडिटर कैटेगरी के लिए भी चुना गया था।

हिंदी और अंग्रेजी दोनो ही भाषाओं में बराबर की पकड़ होने के बावजूद भी मिलिंद खांडेकर ने शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता की ओर अपना रुख किया। मिलिंद ने पत्रकारिता में अपनी शुरुआत 1992 से ‘नवभारत टाइम्स’ के साथ की। नवभारत में उन्होंने सब-एडिटर और रिपोर्टर के रूप में काम किया। 1995 तक वे यहां रहे। तीन साल काम करने के बाद वे ‘आजतक’ के साथ जुड़ गए। आजतक में उन्होंने कुछ समय तक रिपोर्टर की भूमिका निभाई, जिसके बाद कई विभिन्न पदों पर काम करते हुए वे यहां एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर बन गए और बाद में उन्होंने वेस्टर्न ब्यूरो ऑपरेशन की भी कमान संभाली। 2004 में मिलिंद ने 'आजतक' को अलविदा कह दिया और तब स्टार न्यूज यानी आज के 'एबीपी न्यूज' के साथ जुड़ गए थे। तब से वे एमसीसीएस (एबीपी चैनल का संचालन करने वाली कंपनी) में बतौर मैनेजिंग एडिटर की भूमिका निभा रहे थे।

मिलिंद ने किताब 'दलित करोड़पति-15 प्रेरणादायक कहानियां' भी लिखी । इसमें 15 कहानियां है, जिनमें 15 दलित उद्योगपतियों के संघर्ष को शॉर्ट स्टोरीज की शक्ल में प्रस्तुत किया गया है। ये कहानियां दलित करोड़पतियों की है,जिन्होंने शून्य से शुरू कर कामयाबी के नए आयाम रचे, जिनके पास पेन की निब बदलने के लिए पैसे नहीं थे आज उनकी कंपनी का टर्नओवर करोड़ों में है, लेकिन उन्होंने ये कामयाबी कैसे हासिल की, क्या मुश्किलें आई और उन्होंने इन मुश्किलों पर कैसे फतह हासिल की।  

पत्रकारिता जगत में उन्हें दो दशक से भी ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई प्रतिष्ठित टाइम्स सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज से की है। 1991 में हिंदी में बेस्ट ट्रेनी के लिए उन्हें ‘राजेन्द्र माथुर अवॉर्ड’ से भी नवाजा गया था।

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पत्रकार अरसलान अहमर ने तलाशी नई मंजिल

हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का अरसलान अहमर को लगभग 13 साल का अनुभव है

Last Modified:
Saturday, 07 March, 2020
Arsalan Ahmer

खेल पत्रकार अरसलान अहमर (Arsalan Ahmer) ने मुंबई में स्थित स्पोर्ट्स वेबसाइट और ऐप 100 एमबी (100mb) के साथ अपनी नई पारी शुरू की है। यहां उन्होंने बतौर असिस्टेंट मैनेजर जॉइन किया है। अरसलान इससे पहले स्पोर्ट्स इंटरैक्टिव में बतौर हिंदी एडिटर कार्यरत थे, जहां वह हिंदी कंटेंट टीम को लीड रहे थे।

अरसलान इससे पहले स्पोर्ट्सवाला में भी बतौर हिंदी एडिटर काम कर चुके हैं। हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का अरसलान को लगभग 13 साल का अनुभव है। मुंबई से पहले अरसलान तकरीबन 10 सालों तक दिल्ली में हिंदी पत्रकारिता में काम कर चुके हैं। इस दौरान वह  ‘एएनआई’ (ANI), ‘क्रिकेट टुडे’ (Cricket Today) और ‘बीकेपी मीडिया’ (BKP media) जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों में अपनी अहम भूमिका निभा चुके हैं।

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युवा पत्रकार मनोज मिश्रा ने पकड़ी नई राह

कु़छ दिन पहले दैनिक भास्कर, रोहतक को अलविदा कहने वाले युवा पत्रकार मनोज मिश्रा ने नई शुरुआत की है।

Last Modified:
Friday, 06 March, 2020
Manoj Mishra

कु़छ दिन पहले दैनिक भास्कर, रोहतक को अलविदा कहने वाले युवा पत्रकार मनोज मिश्रा ने हैदराबाद में 'इनाडु’ समूह के हिंदी न्यूज पोर्टल 'ईटीवी भारत’ (ETV Bharat)  के साथ अपनी नई पारी का आगाज किया है। उन्होंने यहां पर बतौर सीनियर कंटेट एडिटर जॉइन किया है। उन्हें यहां डेस्क पर जिम्मेदारी दी गई है।

पत्रकारिता के क्षेत्र में छह वर्ष से सक्रिय मनोज मिश्रा मूल रूप से यूपी के प्रयागराज शहर के निवासी हैं। ‘सैम हिगिनबॉटम कृषि, प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय' (Sam Higginbottom University of Agriculture, Technology and Science), प्रयागराज से पत्रकारिता में बीजेएमसी करने के बाद उन्होंने ‘हिन्दुस्तान’ अखबार में प्रयागराज से ही बतौर इंटर्न अपने करियर की शुरुआत की थी।

वर्ष 2014 में दिल्ली की ओर रुख करते हुए ‘पंजाब केसरी’ समूह के हिंदी दैनिक ‘नवोदय टाइम्स’ के साथ बतौर रिपोर्टर जुड़कर नगर निगम व अन्य विभागों को कवर करते हुए वर्ष 2018 तक अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद रोहतक में ही दैनिक जागरण के बाद दैनिक भास्कर में सीनियर रिपोर्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।

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