कश्मीर के मुद्दे पर पीएम मोदी के फैसले का अखबार ने कुछ यूं किया समर्थन

कहा-जम्मू-कश्मीर के विकास और उसके बेहतर भविष्य के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है यह कदम, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की जमकर की खिंचाई

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 24 September, 2019
Last Modified:
Tuesday, 24 September, 2019
PM MODI

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के मुद्दे पर अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स (New York Times) ने पहली बार भारत का समर्थन किया है। इसके साथ ही भारत के विरोधी माने जाने वाले इस अखबार ने कश्मीर में मुस्लिमों के जनसंहार का दुष्प्रचार करने पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की जमकर खिंचाई भी की है।

दैनिक जागरण की वेबसाइट में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के प्रख्यात विश्लेषक रोजर कोहेन (Roger Cohen) ने न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित अपने लेख में लिखा है, 'जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर भारत ने इसे अपना अभिन्न हिस्सा बना लिया है। ये फैसला जम्मू-कश्मीर के विकास और उसके बेहतर भविष्य के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री मोदी इस फैसले को किसी भी सूरत में वापस लेने वाले नहीं हैं।' न्यूयॉर्क टाइम्स ने पहली बार अपने किसी लेख में भारत के इस कदम का समर्थन किया है।

रोजर कोहेन के अनुसार, 'मोदी कश्मीर की स्वायत्ता को खत्म करने के फैसले से पीछे नहीं हटेंगे। भारतीय इतिहास का वह दौर खत्म हो चुका है। मैं ये दावा कर सकता हूं कि मोदी सरकार द्वारा लिए जा रहे फैसले, नए व एकीकृत कश्मीर क्षेत्र सहित पूरे भारत की तस्वीर बदलने वाले हैं।' कोहेन ने इसके साथ ही पाकिस्तान के लिए लिखा है कि उन्हें भारत के इस फैसले को स्वीकार कर आगे बढ़ना चाहिए। कोहेन ने ये लेख इमरान-ट्रंप की सोमवार को हुई मुलाकात से कुछ घंटे पहले ही लिखा था।

कोहेन ने आगे लिखा है, 'ह्यूस्टन में आयोजित हाउडी मोदी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कश्मीर मुद्दे पर भारत के कदम का समर्थन कर चुके हैं। ये सच है कि भारत के इस फैसले के बाद से कश्मीर में रक्तपात कम हुआ है। इसके बावजूद पाकिस्तान लगातार कश्मीर में नरसंहार बढ़ने के झूठे आरोप लगा रहा है। सवाल ये है कि क्या मोदी के पास कश्मीर मुद्दे पर कोई विकल्प था? क्या अस्थाई रूप से लागू किया गया अनुच्छेद 370 कभी भी कश्मीर द्वारा समाप्त किया जाता? क्या कभी ऐसा होता कि स्थानीय भ्रष्ट राजनेता व सक्षम लोग कश्मीरी जनता के गले मिलते और उन्हें बेहतर भविष्य प्रदान करते? मुझे लगता है कि अब ये हो सकता है।'

न्यूयॉर्क टाइम्स में कश्मीर मुद्दे पर समर्थन भरा ये लेख सोमवार को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की डोनाल्ड ट्रंप व दुनिया के अन्य नेताओं संग संयुक्त राष्ट्र महासभा में होने वाली मुलाकात से ठीक पहले आया है। रोजर कोहेन ने अपने लेख में उम्मीद जताई है कि इस मुलाकात में भी पाकिस्तान, कश्मीर मुद्दे को जरूर उठाएगा। कोहेन ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के रवैये पर तीखी टिप्पणी करते हुए उनकी प्रतिक्रिया को जंगली करार दिया है।

रोजर कोहेन के अनुसार, ‘पाकिस्तान द्वारा बार-बार भारत को परमाणु युद्ध की धमकी देना उसकी लापरवाही को दर्शाता है। परमाणु युद्ध पाकिस्तान का ऐसा झांसा है, जिसके चक्कर में अब भारत आने वाला नहीं है। अमेरिकी विश्लेषक ने अपने लेख में इस बात की भी आशंका जताई है कि पाकिस्तान वास्तव में कश्मीर मुद्दे का कोई हल चाहता भी है या नहीं। इसकी वजह ये है कि पाकिस्तान अपने कब्जे वाले कश्मीर में लगातार सैन्य बजट में बढ़ोतरी कर रहा है। पाकिस्तान के सामने अब भी बड़ा प्रश्न है कि क्या उसकी खुफिया एजेंसियों ने भारत के खिलाफ इस्लामिक कट्टरपंथियों का प्रयोग बंद कर दिया है? पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का ये बयान कि कश्मीर मुद्दे पर अगर दुनिया ने साथ नहीं दिया तो परमाणु शक्ति क्षेत्र में कुछ भी हो सकता है, गैरजिम्मेदाराना है।

पाकिस्तान जब-जब भारत पर मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाता है, वह खुद घिर जाता है। दरअसल पाकिस्तान में अल्पसंखयक और हिंदू महिलाओं पर होने वाले अमानवीय अत्याचार दुनिया से छिपे नहीं हैं। इसकी वजह से पाकिस्तान को कुछ दिनों पहले ही संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (UNHRC) में भी मुसीबत का सामना करना पड़ा था। पाकिस्तान यहां पर कश्मीर में मुस्लिमों के उत्पीड़न और नरसंहार के झूठे सबूतों के आधार पर घेरने का नाकाम प्रयास कर रहा था।

मालूम हो कि केंद्र सरकार ने पांच अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए हटाकर कर विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर दिया है। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर का दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजन कर दिया गया है। जम्मू-कश्मीर को पहला केंद्र शासित और लद्दाख को अलग दूसरा केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया है। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर में विधानसभा की व्यवस्था की गई है, लेकिन लद्दाख में कोई विधानसभा नहीं होगी। भारत के इस फैसले के बाद से ही पाकिस्तान बिलबिलाया हुआ है। जम्मू-कश्मीर से 370 हटाने के फैसले को पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) समेत तमाम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा चुका है।

पाकिस्तान को भारत के खिलाफ कश्मीर मुद्दे पर मुस्लिम देशों समेत किसी अन्य देश का साथ नहीं मिला है। उल्टा पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंचों के अलावा देश के अंदर भी कड़ा विरोध झेलना पड़ रहा है। बावजूद पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। पहले बालाकोट एयर स्ट्राइक, फिर अंतरराष्ट्रीय दबाव में विंग कमांडर अभिनंदन को मुक्त करना और उसके बाद जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने पर पाकिस्तान खुद को हारा हुआ महसूस कर रहा है। यही वजह है कि बदला लेने के लिए वह कभी सोशल मीडिया पर तो कभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहा है, तो कभी सीमापार से सीज फायर उल्लंघन और आतंकी घुसपैठ की नाकाम कोशिशों में लगा हुआ है।

जम्मू-कश्मीर समेत तमाम मुद्दों पर हारा हुआ महसूस कर रहा पाकिस्तान अब दुनिया के तमाम ताकतवर देशों से मध्यस्थता की गुहार लगा रहा है। एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के दौरान भी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने उनके सामने फिर से मध्यस्थता का मुद्दा उठाया। इस पर ट्रंप ने उन्हें साफ इनकार कर दिया है। ट्रंप ने इमरान खान को सलाह दी है कि दोनों देश बातचीत के जरिए आपसी मुद्दों को सुलझाएं। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर पहले ही ट्रंप की मध्यस्थता को खारिज कर चुके हैं। उन्होंने पूर्व में ट्रंप संग हुई मुलाकात में भी इसे लेकर स्पष्ट संदेश दे दिया था। इतना ही नहीं रविवार को ह्यूस्टन में आयोजित 'हाउडी मोदी' (Howdy Modi) कार्यक्रम में भी ट्रंप और मोदी ने बिना पाकिस्तान का नाम लिये, उस पर जमकर हमला किया।

आप इस रिपोर्ट को दैनिक जागरण के ट्विटर अकाउंट पर जाकर भी पढ़ सकते हैं।

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नए साल पर युवा पत्रकार प्रभात उपाध्याय ने नई दिशा में बढ़ाए कदम

उत्तर प्रदेश में जौनपुर के मूल निवासी प्रभात उपाध्याय को मीडिया के क्षेत्र में काम करने का करीब सात साल का अनुभव है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 22 January, 2020
Last Modified:
Wednesday, 22 January, 2020
Prabhat Upadhyay

युवा पत्रकार प्रभात उपाध्याय ने नए साल पर नई पारी की शुरुआत की है। ‘एनडीटीवी’ समूह को बाय बोलकर अब उन्होंने अपना नया सफर ‘इंडियन एक्सप्रेस’ समूह के साथ शुरू किया है। उन्होंने इस समूह के नोएडा स्थित हिंदी न्यूज पोर्टल ‘जनसत्‍ता.कॉम’(jansatta.com) में बतौर असिस्टेंट एडिटर जॉइन किया है।

उत्तर प्रदेश में जौनपुर के मूल निवासी प्रभात उपाध्याय को मीडिया के क्षेत्र में काम करने का करीब सात साल का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में ‘हिन्दुस्तान’ मीडिया समूह के साथ बतौर सब एडिटर कम रिपोर्टर के तौर पर की थी। यहां करीब दो साल तक अपनी जिम्मेदारी निभाने के बाद उन्होंने जुलाई 2015 में ‘दैनिक जागरण’ का दामन थाम लिया। यहां प्रभात उपाध्याय ने सीनियर रिपोर्टर के तौर पर करीब पौने तीन साल तक अपनी भूमिका निभाई और कई स्पेशल स्टोरीज लिखीं।

इसके बाद प्रभात उपाध्याय ने अप्रैल 2018 में ‘एनडीटीवी’ (NDTV) समूह की डिजिटल शाखा एनडीटीवी कंवर्जेंस (NDTV Convergence) का रुख कर लिया। बतौर चीफ सब एडिटर प्रभात ने यहां रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग के साथ-साथ सोशल मीडिया का जिम्मा भी संभाला। इसके बाद अब उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस समूह के साथ नई शुरुआत की है।

मेरठ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट (बैचलर इन कंप्यूटर एप्लीकेशन) प्रभात उपाध्याय ने दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षण संस्थान ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन’ (IIMC) से जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया है। उन्होंने हरियाणा की गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से ‘साइंस एंड स्पोर्ट्स जर्नलिज्म’ और ‘ह्यूमन राइट्स’ में सर्टिफिकेट कोर्स भी किया है। इसके साथ ही वह देश के जाने-माने थिंक टैंक सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (CCS) से ग्रेजुएट भी हैं।

रिपोर्टिंग के दौरान प्रभात उपाध्याय ने कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज की, जो काफी चर्चित रहीं। हरियाणा के पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला ने तिहाड़ जेल में रहते हुए दावा किया था कि वे 12वीं की परीक्षा ए ग्रेड से पास हो गए हैं। हिंदी और अंग्रेजी के तमाम प्रमुख अखबारों ने यह स्टोरी छापी, लेकिन अगले ही दिन प्रभात उपाध्याय ने एक्सक्लूसिव रिपोर्ट छापी कि किस तरह चौटाला झूठ बोल रहे हैं। उस वक्त उन्होंने कोई परीक्षा पास ही नहीं की थी। यह स्टोरी दैनिक जागरण में तमाम दस्तावेजों के साथ देशभर में पहले पन्ने पर छपी। इसी तरह प्रभात उपाध्याय ने नोएडा प्राधिकरण में पीएफ घोटाले का भी खुलासा किया था। 

समाचार4मीडिया की ओर से प्रभात उपाध्याय को नई पारी के लिए शुभकामनाएं।

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अब इस मीडिया समूह से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार आलोक कुमार, मिली बड़ी जिम्मेदारी

आलोक कुमार को मीडिया के क्षेत्र में काम करने का काफी अनुभव है। पूर्व में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में निभा चुके हैं अहम भूमिका

Last Modified:
Monday, 20 January, 2020
Alok Kumar

वरिष्ठ पत्रकार आलोक कुमार ने ‘नवभारत टाइम्स’ (डिजिटल) के साथ अपनी नई पारी की शुरुआत की है। उन्होंने यहां पर एडिटर के तौर पर जॉइन किया है। इस नई जिम्मेदारी को संभालने से पहले आलोक कुमार ‘टीवी9’ समूह के साथ जुड़े हुए थे और एग्जिक्यूटिव एडिटर (डिजिटल) के पद पर अपनी भूमिका निभा रहे थे।

बिहार में मुजफ्फरपुर के मूल निवासी आलोक कुमार को मीडिया के क्षेत्र में काम करने का काफी अनुभव है। पूर्व में वह कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं। ‘टीवी9’ समूह को जॉइन करने से पहले वह एग्जिक्यूटिव एडिटर के रूप में ‘नेटवर्क18’ के डिजिटल प्लेटफॉर्म के रीजनल विंग की कमान संभाल चुके हैं।

आलोक मई  2015 में ‘लाइव इंडिया’ से इस्तीफा देकर ‘नेटवर्क18’ आए थे।‘लाइव इंडिया’ में वे डिजिटल एडिटर के तौर पर बहुत ही कम समय तक रहे, जहां उन्होंने जनवरी 2015 से मई 2015 तक मात्र पांच महीने की पारी खेली। इसके पहले तक आलोक कुमार ने ‘सहारा समय’, ‘बीबीसी’ (BBC), ‘यूएनआई’ (UNI)  और‘नेटजाल’ (www.netjaal.com) डिजिटल पोर्टल के साथ काम किया।   

देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षण संस्थान ‘आईआईएमसी’ से वर्ष 2001 में पत्रकारिता की तालीम हासिल करने वाले आलोक ने पत्रकारिता का सफर ‘नेटजाल’ (www.netjaal.com) के साथ बतौर कॉपी राइटर शुरू किया, जहां वे करीब एक साल तक रहे। इसके बाद वे अप्रैल 2002 में प्रतिष्ठित न्यूज एजेंसी ‘यूएनआई’ (UNI)से जुड़ गए। सब एडिटर व रिपोर्टर के तौर पर चार साल की पारी खेलने के बाद वे ‘यूएनआई’ से अलग हो गए और ‘बीबीसी’ (BBC) से बतौर प्रड्यूसर (मल्टीमीडिया) जुड़ गए। यहां भी वे करीब चार साल तक रहे।

अप्रैल 2010 में यहां से अलग होने के बाद वे ‘सहारा समय’ के डिजिटल वेंचर से जुड़ गए और यहां करीब पांच वर्षों तक अपना योगदान दिया। जनवरी 2015 में वे ‘लाइव इंडिया’ पहुंचे और फिर ‘नेटवर्क18’ और ‘टीवी9’ होते हुए अब ‘नवभारत टाइम्स’ के साथ नए सफर की शुरुआत की है।

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Network18 ने अजीम ललानी पर कुछ यूं दिखाया और भरोसा

नेटवर्क18 (Network18) के डिजिटल विंग से खबर आई है कि यहां अजीम ललानी को प्रमोट किया गया है

Last Modified:
Friday, 03 January, 2020
azim

नेटवर्क18 (Network18) के डिजिटल विंग से खबर आई है कि यहां अजीम ललानी को प्रमोट किया गया है। नेटवर्क18 ने उन्हें अब ब्रैंड सॉल्यूशंस एंड कनवर्जेंस (Brand solutions & Convergence) का सीओओ (COO) बना दिया है।

वैसे अभी तक अजीम ललानी इंग्लिश न्यूज क्लस्टर- ‘फर्स्टपोस्ट’ (Firstpost) के बिजनेस हेड थे।  उन्होंने 2013 में नेटवर्क18 जॉइन किया था।

अजीम को मीडिया इंडस्ट्री में लगभग 19 सालों का अनुभव है। उन्होंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। अजीम को कई अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है, जिसमें साल 2006 में ‘लिविंग मीडिया इंडिया’ के चेयरमैन अरुण पुरी से मिला बेस्ट इनोवेशन अवॉर्ड भी शामिल है।

अजीम ने ‘फर्स्टपोस्ट’ को इसके शुरुआती चरण में ही जॉइन किया था। वहीं नेटवर्क18 जॉइन करने से पहले वे Rediff.com के साथ थे, जहां उन्होंने 6 साल की पारी खेली। वे यहां एडवर्टाइजिंग और सेल्स के डायरेक्टर थे। उन्होंने ‘इंडिया टुडे’ (India Today) में मीडिया सेल्स के सीनियर मैनेजर के तौर पर भी काम किया है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘इंडियन एक्सप्रेस’ (Indian Express) में बतौर सीनियर एग्जिक्यूटिव शुरू की।

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ABP News में पारी को विराम देकर पत्रकार वरुण कुमार ने इस दिशा में बढ़ाए कदम

अपने 17 साल के पत्रकारिता करियर में कई मीडिया संस्थानों में निभा चुके हैं जिम्मेदारी। एबीपी न्यूज के साथ उनकी यह दूसरी पारी थी

Last Modified:
Friday, 03 January, 2020
Varun Kumar

‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) की डिजिटल विंग में काम कर रहे पत्रकार वरुण कुमार ने संस्थान को अलविदा कह दिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने कुछ व्यक्तिगत कारणों के चलते ये फैसला लिया है। वे अब लखनऊ पहुंच गए हैं, जहां से वो खुद का यूट्यूब चैनल शुरू करेंगे।

वरुण की ‘एबीपी न्यूज’ के साथ ये दूसरी पारी थी। इस बार 2017 से लेकर 2019 तक उन्होंने यहां अपनी सेवाएं दीं। इससे पहले 2010 से 2013 तक भी वे इस संस्थान से जुड़े रहे थे।

वरुण कुमार ‘एबीपी न्यूज’ की वेबसाइट की लॉन्चिंग टीम के मेंबर रहे हैं। इसके बाद 2014 में वे ‘अमर उजाला’ (डिजिटल) चले गए थे और 2015 में उन्होंने ‘हिन्दुस्तान’ की डिजिटल विंग का दामन थाम लिया था। इसके बाद 2017 में कुछ महीनों के लिए उन्होंने ‘यूसी न्यूज’ के लिए भी काम किया था।

उत्तर प्रदेश में बुलंदशहर के रहने वाले वरुण ने 17 सालों के पत्रकारिता करियर में करीब 10 साल डिजिटल में बिताए हैं, जबकि इससे पहले करीब सात साल वो रिपोर्टर रहे हैं। उन्होंने ‘न्यूज 24’ और ‘राष्ट्रीय सहारा’ के लिए रिपोर्टिंग की और कई बड़ी खबरों पर काम किया।

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डिजिटल मीडिया में FDI को लेकर उठ रहे इन सवालों का DPIIT देगा जवाब!

इसी मुद्दे पर इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने भी स्पष्टीकरण की मांग की है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 26 December, 2019
Last Modified:
Thursday, 26 December, 2019
Digital Media

डिजिटल मीडिया के क्षेत्र के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। दरअसल, इस क्षेत्र में उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) जल्द ही 26 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा को लेकर स्पष्टीकरण जारी कर सकता है।

मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक, डिजिटल मीडिया क्षेत्र में 26 प्रतिशत FDI की अनुमति के फैसले पर कुछ शेयर होल्डर्स ने सवाल खड़े किए हैं, जिन पर स्थिति स्पष्ट होनी जरूरी है। दरअसल, इस उद्योग की कंपनियों और विशेषज्ञों का मानें तो इनमें से कई कंपनियां कोष जुटाने की तैयारी कर रही हैं, लेकिन 26 प्रतिशत की सीमा की वजह से उनके समक्ष कुछ समस्याएं आ सकती हैं, जिनमें ये दो अहम हैं-

पहला ये कि इस क्षेत्र के लिए FDI पॉलिसी न्यूज ब्रॉडकास्टर्स को किस रूप में देखती है और दूसरा ये कि जिन डिजिटल मीडिया कंपनियों में FDI पहले से 26 प्रतिशत से अधिक है, उनका क्या होगा? माना जा रहा है कि इन्हीं सवालों के जवाब देने के लिए DPIIT स्पष्टीकरण जारी करेगा। खबरों की मानें तो DPIIT ने पहले ही इस मुद्दे पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) की राय ले ली है।

‘डेलॉयट इंडिया’ के पार्टनर जेहिल ठक्कर के मुताबिक, न्यूज को ऑनलाइन स्ट्रीम करने वाले टेलिविजन ब्रॉडकास्टर्स को पहले से 49 प्रतिशत FDI की अनुमति है, उनका क्या होगा? यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्या उनके लिए भी 26 प्रतिशत की सीमा ही लागू होगी? और फिर ऐसी न्यूज वेबसाइट्स का क्या होगा, जो 100 प्रतिशत विदेशी इकाई हैं।

बता दें कि इसी मुद्दे पर इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने भी स्पष्टीकरण की मांग की है।

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NBT को बाय बोल अब इस मीडिया समूह से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार प्रभाष झा

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 19 साल की पारी के दौरान तमाम मीडिया संस्थानों में निभा चुके हैं अपने जिम्मेदारी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 21 December, 2019
Last Modified:
Saturday, 21 December, 2019
Prabhash-Jha

‘नवभारत टाइम्स’ (डिजिटल) में एडिटर पद से इस्तीफा देने के बाद वरिष्ठ पत्रकार प्रभाष झा ने ‘हिन्दुस्तान’ की न्यूज वेबसाइट (livehindustan.com) के साथ अपना नया सफर शुरू किया है। उन्होंने यहां पर बतौर एडिटर जॉइन किया है।

प्रभाष झा को मीडिया के क्षेत्र में काम करने का करीब 19 साल का अनुभव है। मूलरूप से मधुबनी (बिहार) के रहने वाले प्रभाष झा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2000 में बतौर इंटर्न ‘जैन टीवी’ (Jain TV) से की थी। करीब एक साल तक काम करने के बाद उन्होंने यहां से बाय बोलकर ‘नवभारत’ (Navbharat), भोपाल का दामन थाम लिया। यहां बतौर करेसपॉन्डेंट उन्होंने करीब 11 महीने तक अपनी जिम्मेदारी निभाई और फिर यहां से अलविदा कह दिया।

इसके बाद प्रभाष झा ने ‘दैनिक जागरण’ (Dainik Jagran), मेरठ में जूनियर सब एडिटर के तौर पर अपनी नई शुरुआत की। करीब सवा साल यहां काम करने के बाद अक्टूबर 2003 में वह ‘अमर उजाला’ (Amar Ujala), देहरादून चले गए। करीब 10 महीने तक इस अखबार से जुड़े रहने के बाद उन्होंने ‘दैनिक जागरण’ में वापसी की। इस बार उन्होंने नोएडा में सीनियर सब एडिटर के तौर पर यहां जॉइन किया। लगभग तीन साल तक ‘दैनिक जागरण’ में अपने सेवाएं देने के बाद उन्होंने यहां से फिर अलविदा बोल दिया और ‘बीबीसी न्यूज’ (BBC News), हिंदी में कॉन्ट्रीब्यूटिंग एडिटर के तौर पर जुड़ गए।

करीब सवा साल तक यह जिम्मेदारी निभाने के बाद प्रभाष झा ने वर्ष 2007 में ‘नवभारत टाइम्स’ (Navbharat Times) का रुख किया। उस समय उन्होंने चीफ सब एडिटर के तौर पर यहां जॉइन किया और फिर करीब साढ़े 12 साल तक इस संस्थान में विभिन्न पदों पर अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए एडिटर के पद पर पहुंच गए। अब उन्होंने यहां से अलविदा कहकर अपनी नई पारी ‘हिन्दुस्तान’ की डिजिटल विंग के साथ शुरू की है।

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो प्रभाष झा ने नागपुर के एसएफएस कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने मेघालय की महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन, एडवर्टाइजिंग और जर्नलिज्म में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। कम्युनिकेशन और मीडिया स्टडीड में ‘नेट’ (NET) क्वालीफाइड प्रभाष झा ने दिल्ली के ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन’ (IIMC) से रेडियो और टीवी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा भी किया है। समाचार4मीडिया की ओर से प्रभाष झा को उनके नए सफर के लिए शुभकामनाएं।

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लंबे समय बाद डॉ. प्रवीण तिवारी की सहारा में वापसी, मिली ये बड़ी जिम्मेदारी

डॉ. तिवारी की सात पुस्तकें बाजार में आ चुकी हैं। जल्द ही उनकी आठवीं पुस्तक भी पाठकों के लिए उपलब्ध होगी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 19 December, 2019
Last Modified:
Thursday, 19 December, 2019
Dr Praveen Tiwari

वरिष्ठ पत्रकार डॉ. प्रवीण तिवारी ने लंबे समय बाद दोबारा ‘सहारा समय’ में वापसी की है। वह यहां डिजिटल विंग के हेड के तौर पर अपना कार्यभार संभाल चुके हैं। इसके साथ ही साथ उनके एंकरिंग के लंबे अनुभव का फायदा भी ‘सहारा नेटवर्क’ को मिलेगा।

हाल के दिनों में डॉ. तिवारी ने इनोवेशन और स्टार्टअप पर काफी काम किया है। वह दूरदर्शन के साथ कई शो करते रहे और साथ ही राजस्थान की जेजेटी यूनिवर्सिटी के साथ पीएचडी गाइड के तौर पर भी जुड़े रहे।

उन्होंने बीता समय लेखन कार्य में व्यतीत किया है। उनकी सात पुस्तकें बाजार में आ चुकी हैं। जल्द ही उनकी आठवीं पुस्तक ‘इनोवेट इंडिया एंड स्टार्टअप एरा’ भी पाठकों के लिए उपलब्ध होगी। बीते साल ‘ब्लूम्सबरी’ के लिए लिखी गई उनकी पुस्तक ‘द ग्रेट इंडियन कॉन्सपिरेसी’ (The Great Indian Conspiracy) को अच्छी सफलता मिली है।

मूलतः इंदौर के रहने वाले डॉ. तिवारी ने ‘लोकस्वामी’ और ‘भास्कर’ जैसे समूहों के साथ 1998 में इंदौर से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत की थी। दिल्ली में उन्होंने 2003 में ‘सहारा समय’ के साथ अपना सफर शुरू किया और इसके बाद से ही वह लगातार विभिन्न चैनलों के साथ जुड़े रहे हैं। वे ‘लाइव इंडिया’, ‘आईबीएन7’ और  ‘जी बिजनेस’ जैसे संस्थानों के साथ भी जुड़े रहे हैं।

हाल ही में उन्होंने लोकसभा चुनाव के लिए ‘अमर उजाला’ समूह के साथ बतौर कंसल्टेंट अपनी भूमिका निभाई थी। डॉ. तिवारी को वर्ष 2019 के नेशनल एक्सीलेंट अवार्ड से भी नवाजा गया। उन्हें यह सम्मान स्टार्टअप्स और इनोवेशन पर उनके किए गए काम के लिए दिया गया।

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न्यूज नेशन को बाय बोल पत्रकार दृगराज मधेशिया ने तलाशा नया ठिकाना

मूल रूप से उत्तर प्रदेश में कुशीनगर के रहने वाले दृगराज मधेशिया लंबे समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 17 December, 2019
Last Modified:
Tuesday, 17 December, 2019
Drigraj Madheshia

‘न्यूज नेशन’ में करीब 13 महीने से कार्यरत पत्रकार दृगराज मधेशिया ने यहां से बाय बोल दिया है। उन्होंने अपना सफर अब ‘हिन्दुस्तान’ की न्यूज वेबसाइट (livehindustan.com) के साथ शुरू किया है। उन्होंने चीफ कंटेंट प्रड्यूसर के तौर पर यहां जॉइन किया है।

दृगराज मधेशिया को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का काफी अनुभव है। उन्होंने वर्ष 2005 में गोरखपुर से सितंबर 2005 में ‘सहारा समय’ वीकली अखबार के साथ अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की थी। इस अखबार में ‘खाने को चूहे खेलने को घोंघे’ शीर्षक से प्रकाशित स्टोरी ने देशभर में काफी चर्चा बटोरी थी। इसके बाद उन्हें नोएडा से स्टोरी के असाइनमेंट मिलने लगे। वर्ष 2006 में सहारा समय वीकली बंद होने पर वे ‘सहारा समय’ टीवी के साथ बतौर स्ट्रिंगर जुड़ गए। यहां उनकी पारी करीब ढाई साल रही।

इसके बाद यहां से अपनी पारी को विराम देकर वे छत्तीसगढ़ से शुरू हुए ‘वॉच न्यूज’ चैनल से बतौर एसोसिएट प्रड्यूसर जुड़ गए। हालांकि कुछ समय बाद ही यह चैनल बंद हो गया और जुलाई 2009 में उन्होंने ‘हिन्दुस्तान’ अखबार बरेली में रिपोर्टर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभाली। यहां रिपोर्टिंग के साथ डेस्क पर भी उन्हें काम करने का मौका मिला और बाद में उन्हें सीनियर रिपोर्टर के पद पर प्रमोट कर दिया गया।

करीब साढ़े सात साल ‘हिन्दुस्तान’ में रहने के बाद वर्ष 2017 में वे ‘दैनिक जागरण’, नोएडा के साथ जुड़ गए। यहां बतौर चीफ सब एडिटर लगभग दो साल तक अपनी भूमिका निभाने के बाद उन्होंने बतौर चीफ सब एडिटर ‘न्यूज नेशन’ का दामन थाम लिया था। ‘न्यूज नेशन’ के साथ करीब 13 महीने की अपनी पारी के दौरान वे मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़ व विधानसभा चुनाव प्रभारी रहे। इसके बाद अब उन्होंने नया सफर शुरू किया है।

मूल रूप से कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले दृगराज मधेशिया ने ‘राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय’ से पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म किया है। उन्होंने कंप्यूटर साइंस में भी पीजी डिप्लोमा किया है।

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शिकायत के बाद भी कार्रवाई न करने का गूगल इंडिया को यूं भुगतना पड़ेगा खामियाजा

कार्यवाही से बचने के लिए ‘गूगल इंडिया’ ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन यहां भी उसे कोई राहत नहीं मिली है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 16 December, 2019
Last Modified:
Monday, 16 December, 2019
Google

कथित मानहानि के मामले में ‘गूगल इंडिया’ को आपराधिक मुकदमे का सामना करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी को राहत देने से इनकार करते हुए कहा है कि वह इस संबंध में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 में 2009 के संशोधन से पहले के मानहानि मामले में सुरक्षा कवर का दावा नहीं कर सकती।

गौरतलब है कि इस कानून के पास होने के बाद किसी भी प्रकाशित कंटेंट के मामले में थर्ड पार्टी इंटरमीडियरी की लायबिलिटी घट गई थी। पूरा मामला ‘गूगल’ की ब्लॉग प्रकाशन सेवा से संबंधित है। दरअसल, ‘गूगल ग्रुप्स’ में ‘विशाखा इंडस्ट्रीज’ के उत्पादों पर सवाल उठाते हुए ब्लॉग पोस्ट किये गए थे।

कंपनी ने नोटिस भेजकर ‘गूगल इंडिया’ से पोस्ट हटाने के लिए कहा, लेकिन उसने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद ‘विशाखा इंडस्ट्रीज’ द्वारा ‘गूगल इंडिया’ पर केस चलाने के लिए अदालत में अपील की गई, जिस पर कोर्ट ने उसके पक्ष में फैसला सुनाया। इस पर ‘गूगल इंडिया’ ने कार्यवाही से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन यहां भी उसे कोई राहत नहीं मिली है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून की धारा 79 (बदलाव से पहले), आईपीसी की धारा 499/500 के तहत दर्ज अपराध के संबंध में किसी इंटरमीडियरी की रक्षा नहीं करती। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब ‘गूगल इंडिया’ को आपराधिक मुकदमे का सामना करना होगा। इस पूरे मामले में वरिष्ठ वकील श्रीधर पोटाराजू की भूमिका बेहद अहम् रही। जिन्होंने ‘विशाखा इंडस्ट्रीज’ का पक्ष अदालत के समक्ष रखा और ‘गूगल इंडिया’ को अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का कोई मौका नहीं दिया।

बता दें कि शिकायतकर्ता ‘विशाखा इंडस्ट्रीज’ एक लिस्टेड कंपनी है, जो एसबेस्टस सीमेंट की शीट बनाती है। उसने अपनी याचिका में कहा था कि उसके सभी प्लांट में एसबेस्टस सीमेंट की शीटों का उत्पादन पर्यावरण के अनुकूल तरीके से होता है, मगर बैन एसबेस्टस नेटवर्क इंडिया के को-ऑर्डिनेटर गोपाल कृष्ण द्वारा उसके बारे में गलत बातें प्रचारित की जा रही हैं। गोपाल ने उसके खिलाफ ब्लॉग पोस्ट लिखा था, जिसकी वजह से उसकी मानहानि हुई।

चूंकि ‘गूगल इंडिया’ के विरुद्ध मानहानि का मामला 2009 में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 में हुए संशोधन से पहले दर्ज किया गया था, इसलिए कंपनी की इस दलील को अस्वीकार कर दिया गया कि साइट का संचालन उसकी मूल कंपनी गूगल द्वारा किया जा रहा था और साइट से सामग्री को हटाने के अधिकार उसके पास नहीं थे।

समाचार4मीडिया से बातचीत में वरिष्ठ वकील श्रीधर पोटाराजू ने कहा, ‘सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर लगाम लगाना संबंधित कंपनी की जिम्मेदारी है और वह इससे मुकर नहीं सकती। इस मामले में ‘गूगल इंडिया’ सबकुछ जानते हुए भी खामोश रही, यही उसकी सबसे बड़ी गलती है। ‘विशाखा इंडस्ट्री’ द्वारा ‘गूगल इंडिया’ को यह बताया गया था कि उसकी प्रतिस्पर्धी कंपनी बैन एसबेस्टस इंडिया द्वारा उसे बदनाम करने के लिए गूगल ब्लॉग प्रकाशन सेवा का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद उसने कोई कार्रवाई नहीं की। ऐसे पोस्ट नहीं हटाये गए, जो विशाखा इंडस्ट्री की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाते थे। तो फिर किस आधार पर गूगल इंडिया को खुद को निर्दोष करार दे सकती है?’

पोटाराजू का यह भी कहना था, ‘हमने शीर्ष अदालत में इन्हीं बातों को मजबूती के साथ रखा, जिस पर सहमति जताते हुए कोर्ट ने ‘गूगल इंडिया’ के खिलाफ क्रिमिनल ट्रायल चलाने का आदेश दिया। अब साक्ष्य-सबूतों के आधार पर यह तय होगा कि ‘गूगल इंडिया’ दोषी है या नहीं, लेकिन इतना साफ हो गया है कि ‘थर्ड पार्टी’ की आड़ में कोई कंपनी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती।’ 

श्रीधर पोटाराजू ने आगे कहा, ‘गूगल इंडिया ने अपनी दलील में कहा कि वह थर्ड पार्टी है और केवल लोगों को अपने विचार व्यक्त करने के लिए एक प्लेटफार्म प्रदान करती है। जो कुछ हुआ, उसमें उसकी कोई गलती नहीं है, क्योंकि लोग क्या लिखते हैं, इस पर उसका कोई नियंत्रण नहीं। हालांकि, अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि जब कोई कंपनी आपको यह बता रही है कि उसके साथ कुछ गलत हो रहा है, तो आप थर्ड पार्टी का हवाला देकर खामोश नहीं बैठा सकते। जानकारी मिलने के बाद भी कोई करवाई नहीं करने का खामियाजा तो ‘गूगल इंडिया’ को उठाना होगा।’ 

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पत्रकार नमित शुक्ला की मेनस्ट्रीम मीडिया में वापसी

एक दशक से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय नमित शुक्ला को प्रिंट व ऑनलाइन मीडिया दोनों में कार्य करने का अनुभव है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 09 December, 2019
Last Modified:
Monday, 09 December, 2019
Namit Shukla

पत्रकार नमित शुक्ला ने मेन स्ट्रीम मीडिया में वापसी की है। उन्होंने हैदराबाद में 'इनाडु’ समूह के हिंदी न्यूज पोर्टल 'ईटीवी भारत’ (ETV Bharat) में बतौर सीनियर कटेंट एडिटर जॉइन किया है। एक दशक से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय नमित शुक्ला को प्रिंट व ऑनलाइन मीडिया दोनों में कार्य करने का अनुभव है। मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जनपद फतेहपुर के बिंदकी तहसील निवासी नमित ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।

उन्होंने वर्ष 2007 में छत्तीसगढ़ में ‘दैनिक भास्कर’ के बिलासपुर संस्करण के साथ बतौर ट्रेनी जर्नलिस्ट अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद टीवी मीडिया में कदम रखते हुए ‘जी न्यूज’ (एमपी/सीजी) चैनल का साथ बतौर रिपोर्टर थामा। इसके बाद वह फिर से प्रिंट मीडिया में वापसी करते हुए ‘दैनिक भास्कर’ समूह के भिलाई संस्करण के साथ बतौर सीनियर रिपोर्टर जुड़ गए।

वर्ष 2011 में रायपुर में ‘राजस्थान पत्रिका’ के साथ सिटी चीफ के तौर पर अपनी सेवाएं देने के बाद वर्ष 2016 में उन्होंने यूपी की ओर रुख करते हुए 'जागरण समूह' के बाईलिंगुअल अखबार ‘आईनेक्स्ट’ के आगरा एडिशन के साथ डिप्टी चीफ रिपोर्टर के रूप में अपनी नई पारी शुरू की। यहां से वर्ष 2018 में अपनी पारी को विराम देकर आगरा में ही ‘अमर उजाला’ वेब को नया ठिकाना बनाकर सीनियर कटेंट राइटर के रूप में फरवरी 2019 तक जुड़े रहे। नमित शुक्ला निजी कारणों के चलते करीब आठ महीने से मेन स्ट्रीम मीडिया से दूर थे। अब उन्होंने ‘ईटीवी भारत’ के साथ नई शुरुआत की है।

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