मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी ज्यादा का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ मीडिया प्रोफेशनल विनय सरावगी ने The Media GCC की स्थापना की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी ज्यादा का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ मीडिया प्रोफेशनल विनय सरावगी ने The Media GCC की स्थापना की है। यह एक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर है जिसका उद्देश्य मीडिया संस्थानों को कुशलता से स्केल करने, लाभप्रदता बढ़ाने और AI-प्राथमिक, प्लेटफॉर्म-फ्रैगमेंटेड परिदृश्य में चुनौतियों से निपटने में मदद करना है।
इस नई पहल से पहले, सरावगी टाइम्स ग्रुप में डिजिटल के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट के रूप में कार्यरत थे, जहां उन्होंने कंटेंट, ऑडियंस ग्रोथ, प्रोडक्ट इनोवेशन और रेवेन्यू से जुड़े कई प्रमुख परिवर्तनकारी कैंपेंस का नेतृत्व किया।
सरावगी Network18, Business Standard, The Times of India और Reuters जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं में भी नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभा चुके हैं। उन्हें एडिटोरियल स्ट्रैटेजी, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और बिजनेस ऑपरेशंस में गहरी विशेषज्ञता प्राप्त है।
टेलीविजन विज्ञापन की दुनिया के चर्चित e4m प्राइम टाइम अवॉर्ड्स (PTA) हो रही है। अवॉर्ड्स का 12वां संस्करण 30 सितंबर 2026 को मुंबई में आयोजित किया जाएगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
टेलीविजन विज्ञापन की दुनिया के चर्चित e4m प्राइम टाइम अवॉर्ड्स (PTA) हो रही है। अवॉर्ड्स का 12वां संस्करण 30 सितंबर 2026 को मुंबई में आयोजित किया जाएगा।
इन अवॉर्ड्स का मकसद टेलीविजन विज्ञापन के क्षेत्र में बेहतरीन क्रिएटिव काम को सम्मानित करना और शानदार अभियानों का जश्न मनाना है। इस आयोजन में प्रमुख विज्ञापन एजेंसियों, मीडिया प्लानर्स और ब्रैंड मार्केटर्स के एक जगह जुटने की उम्मीद है। समय के साथ एक्सचेंज4मीडिया प्राइम टाइम अवॉर्ड्स टेलीविजन जगत में प्रभावशाली कैंपेन, दमदार कहानी और क्रिएटिव काम को पहचान देने वाला एक प्रमुख मंच बन गया है।
e4m प्राइम टाइम अवॉर्ड्स ऐसे टेलीविजन कैंपेन में क्रिएटिविटी और इनोवेशन को सम्मानित करते हैं, जो न सिर्फ दर्शकों का ध्यान खींचते हैं, बल्कि ब्रैंड के लिए वास्तविक असर भी पैदा करते हैं। इस मंच पर एजेंसियों, ब्रैंड्स, प्रोडक्शन हाउसेज और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को अलग-अलग कैटेगरी में उनके बेहतरीन काम के लिए सम्मानित किया जाता है।
इस बार कई नई कैटेगरी शामिल
इस साल के संस्करण में मार्केटिंग, एंटरटेनमेंट और टैलेंट सेगमेंट में कई नई कैटेगरी जोड़ी गई हैं। ये कैटेगरी मीडिया और कंटेंट की बदलती तस्वीर को ध्यान में रखते हुए शामिल की गई हैं। अवॉर्ड्स की कैटेगरी तेजी से बदलते मीडिया माहौल में टीवी विज्ञापन के बदलते स्वरूप को दिखाती हैं। इस साल विजेताओं का फैसला 6 मुख्य कैटेगरी में किया गया है, जिन्हें आगे 95 सब-कैटेगरी में बांटा गया है।
इस साल जूरी के चेयरमैन टाइटन कंपनी लिमिटेड के सीईओ-ज्वेलरी अरुण नारायण हैं। वहीं BW बिजनेसवर्ल्ड और एक्सचेंज4मीडिया के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अन्नुराग बत्रा को-चेयरमैन हैं। जूरी में इंडस्ट्री के कई प्रमुख लीडर्स, बिजनेस हेड्स और अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ भी शामिल रहे हैं।
मुथूट फिनकॉर्प ने अगले दो वर्षों के लिए भारतीय क्रिकेट के टाइटल स्पॉन्सरशिप राइट्स हासिल किए हैं। करार के तहत करीब 35 घरेलू इंटरनेशनल मैचों के अधिकार शामिल होने की उम्मीद है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मुथूट फिनकॉर्प (Muthoot Fincorp) ने अगले दो वर्षों के लिए भारतीय क्रिकेट के टाइटल स्पॉन्सरशिप राइट्स (Title Sponsorship Rights) हासिल किए हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया (Times of India) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह करार करीब 35 घरेलू इंटरनेशनल मैचों (International Matches) को कवर कर सकता है।
दो साल की अवधि में 10 टेस्ट (Tests), 12 वनडे (ODIs) और 13 टी20 इंटरनेशनल (T20Is) मैच शामिल होने की उम्मीद है। यह करार वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज से शुरू होगा।
कोच्चि स्थित मुथूट ग्रुप (Muthoot Group) के पास भारत में खेले जाने वाले सभी इंटरनेशनल और घरेलू मैचों के टाइटल स्पॉन्सरशिप राइट्स 31 मार्च 2028 तक रहेंगे। भारतीय क्रिकेट की बाइलेटरल स्पॉन्सरशिप लाइनअप (Bilateral Sponsorship Line-up) में कैंपा (Campa), एसबीआई लाइफ (SBI Life) और चैटजीपीटी (ChatGPT) भी शामिल हैं।
यह घटनाक्रम भारत के आगामी होम सीजन (Home Season) से पहले सामने आया है। इस दौरान वेस्टइंडीज, श्रीलंका और जिम्बाब्वे की टीमें भारत का दौरा करेंगी। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) का नया कमर्शियल साइकल (Commercial Cycle) मार्च 2028 तक चलेगा और इसमें भारत की होम बाइलेटरल सीरीज (Home Bilateral Commitments) शामिल हैं।
एला दास को ELLE DECOR India का नया एडिटर नियुक्त किया गया है। वह प्रिंट, डिजिटल और अन्य प्लेटफॉर्म्स के लिए मैगजीन की एडिटोरियल दिशा की जिम्मेदारी संभालेंगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एला डेकोर इंडिया (ELLE DECOR India) ने एला दास (Ela Das) को अपना नया एडिटर (Editor) नियुक्त किया है। वह मैगजीन के प्रिंट (Print), डिजिटल (Digital) और अन्य प्लेटफॉर्म्स (Platforms) की एडिटोरियल दिशा संभालेंगी।
कॉरपोरेट लॉयर (Corporate Lawyer) के तौर पर करियर शुरू करने के बाद पत्रकार और एडिटर बनीं एला दास ने पब्लिशिंग करियर (Publishing Career) की शुरुआत कोंडे नास्ट इंडिया (Condé Nast India) से की थी। इसके बाद वह आर्किटेक्चरल डाइजेस्ट इंडिया (Architectural Digest India) की फाउंडिंग डिजिटल एडिटर (Founding Digital Editor) बनीं।
एला दास के पास 22 वर्षों से अधिक का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने भारत में डिजाइन और संस्कृति को आकार देने वाले लोगों, जगहों और विचारों पर काम किया है। उनका काम उन्हें भारत के अलग-अलग हिस्सों और विदेशों तक ले गया, जहां उन्होंने घरों, स्टूडियो, गैलरीज और क्रिएटिव कम्युनिटीज (Creative Communities) से जुड़ी कहानियों को कवर किया।
एला दास के नेतृत्व में ELLE DECOR India का फोकस डिजाइन, आर्किटेक्चर (Architecture), इंटीरियर्स (Interiors), आर्ट (Art) और कल्चर (Culture) से जुड़ी बातचीत को और मजबूत करने पर रहेगा। मैगजीन उन लोगों और विचारों को भी सामने लाने पर जोर जारी रखेगी, जो आज के भारत के रहन-सहन को आकार दे रहे हैं।
दिशा संघवी ने सर्वम में ब्रांड एंड कम्युनिकेशन लीड के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है। इससे पहले वह जेट में मार्केटिंग कम्युनिकेशन और पीआर की जिम्मेदारी संभाल रही थीं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिशा संघवी (Disha Sanghvi) ने भारतीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी सर्वम (Sarvam) में ब्रांड एंड कम्युनिकेशंस लीड (Brand & Communications Lead) के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है। यह नियुक्ति पत्रकारिता, फिनटेक (Fintech) और ब्रांड कम्युनिकेशंस (Brand Communications) में उनके करियर के बाद फ्रंटियर एआई (Frontier AI) क्षेत्र में उनकी नई पारी की शुरुआत है।
दिशा ने लिंक्डइन (LinkedIn) पर अपनी नियुक्ति की जानकारी साझा करते हुए कहा कि वह सर्वम के साथ भारत की फ्रंटियर एआई में स्थिति को आकार देने के काम से जुड़ने को लेकर उत्साहित हैं। अपनी नई भूमिका में वह कंपनी की ब्रांड और कम्युनिकेशंस स्ट्रैटेजी (Communications Strategy) पर काम करेंगी।
दिशा ने अपने करियर की शुरुआत मिंट (Mint) में पत्रकार के तौर पर की थी, जहां उन्होंने इंश्योरेंस (Insurance) और फिनटेक रेगुलेशन (Fintech Regulation) को कवर किया। बाद में उनका करियर उन बिजनेस से जुड़ा, जिनकी वह पहले रिपोर्टिंग कर चुकी थीं। इस दौरान उन्हें फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स (Financial Products) और जटिल सेवाओं को उपभोक्ताओं तक आसान तरीके से पहुंचाने की चुनौती का अनुभव मिला।
दिशा के मुताबिक, “मेकिंग द कॉम्प्लिकेटेड फील ऑब्वियस” (Making the complicated feel obvious) की सोच उनके करियर को लगातार दिशा देती रही है। उनका मानना है कि यह सोच उभरते एआई इंडस्ट्री (AI Industry) के लिए भी खास तौर पर प्रासंगिक है।
सर्वम से जुड़ने से पहले दिशा जेट (ZET) के साथ काम कर रही थीं। वहां उन्होंने ब्रांड, कंटेंट, पब्लिक रिलेशंस (Public Relations) और परफॉर्मेंस मार्केटिंग (Performance Marketing) से जुड़े काम संभाले।
श्रीजा एमएस ने 15 साल की पत्रकारिता, मीडिया और ब्रांडेड कंटेंट के अनुभव के बाद व्हाइट गोल्ड में हेड ऑफ कम्युनिकेशंस की नई जिम्मेदारी संभाली है।
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श्रीजा एमएस (Sreeja MS) ने व्हाइट गोल्ड (White Gold) में हेड ऑफ कम्युनिकेशंस (Head of Communications) के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है। यह कदम पत्रकारिता, मीडिया और ब्रांडेड कंटेंट (Branded Content) में करीब 15 साल के करियर के बाद आया है।
श्रीजा ने कॉलेज के दौरान एक हॉस्पिटैलिटी मैगजीन (Hospitality Magazine) से पत्रकारिता में करियर शुरू किया था। इसके बाद वह न्यूज9 (News9) से एसोसिएट प्रोड्यूसर (Associate Producer) के तौर पर जुड़ीं, जहां उन्होंने न्यूज स्टोरीज, बुलेटिन और फीचर्स पर काम किया। बाद में उन्होंने रिपोर्टिंग में कदम रखा और फील्ड जर्नलिज्म (Field Journalism) तथा न्यूज गैदरिंग (News Gathering) का अनुभव हासिल किया।
अपने सफर को याद करते हुए श्रीजा ने कहा, “15 साल पहले मैं अपने पहले न्यूजरूम में गई थी। आज मैं अपने पहले बोर्डरूम में जा रही हूं।” उन्होंने कहा कि शुरुआती न्यूजरूम अनुभव और उनके साथ काम करने वाले पत्रकारों ने स्टोरीटेलिंग और रिपोर्टिंग के प्रति उनके नजरिए को आकार दिया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने ऐसी पत्रकारिता की जो मायने रखती थी और जिसका असर पड़ा, और वह अनुभव उनके साथ आगे भी रहेगा।
मुख्यधारा की पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा समय बिताने के बाद श्रीजा ने तीन साल पहले अपना पहला करियर पिवट (Career Pivot) किया। उन्होंने टाइम्स नेटवर्क (Times Network) में मीडिया के भीतर ब्रांडेड कंटेंट की जिम्मेदारी संभाली। इस अवसर के लिए उन्होंने मिहिर भट्ट (Mihir Bhatt) को श्रेय दिया।
व्हाइट गोल्ड में अपनी नई भूमिका में श्रीजा कंपनी के कम्युनिकेशंस मैंडेट (Communications Mandate) की जिम्मेदारी संभालेंगी। कंपनी ऑर्गनाइज्ड गोल्ड बाइंग (Organised Gold Buying) के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
टाटा संस एसपी ग्रुप की हिस्सेदारी के एक हिस्से को खरीदने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इसके लिए कम से कम 25,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है।
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टाटा संस (Tata Sons) अपनी होल्डिंग कंपनी (Holding Company) में शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप (Shapoorji Pallonji Group) की हिस्सेदारी के एक हिस्से को खरीदने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। टाटा संस बोर्ड (Board) की बैठक के बाद जारी बयान के अनुसार, इस सौदे के लिए कम से कम 25,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है। यह प्रस्ताव टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) के चेयरमैन नोएल एन टाटा (Noel N Tata) ने बोर्ड के सामने रखा।
यह प्रस्ताव नोएल टाटा, टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) और एसपी ग्रुप के चेयरमैन शापूर मिस्त्री (Shapoor Mistry) के बीच हुई शुरुआती बातचीत के बाद सामने आया है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत स्टर्लिंग इन्वेस्टमेंट्स कॉरपोरेशन प्राइवेट लिमिटेड (Sterling Investment Corporation Private Limited) और साइरस इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड (Cyrus Investments Private Limited) के पास मौजूद टाटा संस के शेयर बेचे जाएंगे।
इन शेयरों का न्यूनतम मूल्यांकन आयकर नियम, 1962 के नियम 11यूए (Rule 11UA) के तहत तय मूल्य के आधार पर होगा। एसपी ग्रुप ने संकेत दिया है कि शेयरों की खरीद दो चरणों में 18 महीने के भीतर पूरी की जा सकती है।
इसके साथ ही टाटा संस राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (National Company Law Tribunal) के जरिए चुनिंदा पूंजी कटौती (Selective Capital Reduction) की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। शेयरों का मूल्यांकन आयकर नियमों के तहत उचित बाजार मूल्य (Fair Market Value) के आधार पर किया जाएगा।
नोएल टाटा ने सौदे के लिए जरूरी धन जुटाने के कई विकल्प तलाशने का सुझाव दिया है। इनमें आंतरिक नकदी प्रवाह (Internal Cash Flow), सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों की बिक्री, नए कारोबारों में निवेशकों को शामिल करना और कुछ कारोबारों को ऑफर फॉर सेल (Offer for Sale) के जरिए सूचीबद्ध करना शामिल है।
उन्होंने बोर्ड से एनसीएलटी (NCLT) प्रक्रिया शुरू करने और टाटा संस व टाटा ट्रस्ट्स की टीमों को एसपी ग्रुप तथा उसके बैंकरों के साथ बातचीत जारी रखने की अनुमति देने का भी प्रस्ताव रखा।
आरएसएस के संगठनकर्ता से गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर लगातार तीन बार प्रधानमंत्री बनने तक नरेंद्र मोदी ने राजनीतिक संवाद, चुनावी प्रचार और अपनी सार्वजनिक छवि को एक खास पहचान दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 76 साल के हो गए हैं। जन्मदिन के इस मौके पर उनके करीब 25 साल के राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो यह यात्रा गुजरात से देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने के साथ-साथ एक अलग तरह की राजनीतिक ब्रैंडिंग की कहानी भी है। आरएसएस के संगठनकर्ता से गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर लगातार तीन बार प्रधानमंत्री बनने तक नरेंद्र मोदी ने राजनीतिक संवाद, चुनावी प्रचार और अपनी सार्वजनिक छवि को एक खास पहचान दी है।
17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में जन्मे नरेंद्र मोदी का शुरुआती जीवन साधारण आर्थिक परिस्थितियों में बीता। वह अपने शुरुआती वर्षों और परिवार की चाय की दुकान से जुड़ी कहानी का अक्सर उल्लेख करते रहे हैं। हालांकि उनकी राजनीतिक नींव चुनावी राजनीति में आने से पहले संगठन के स्तर पर तैयार हुई।
नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और आरएसएस प्रचारक के तौर पर काम किया। इसके बाद वह भारतीय जनता पार्टी के संगठन में आए। वर्ष 1987 तक वह बीजेपी की गुजरात इकाई के महासचिव के तौर पर काम कर रहे थे। वर्ष 1995 में उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया और हरियाणा व हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में पार्टी के काम की जिम्मेदारी मिली।
गुजरात से राष्ट्रीय राजनीति तक: 7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वह मई 2014 तक इस पद पर रहे और गुजरात के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले व्यक्ति बने। गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल ने उनकी राष्ट्रीय राजनीतिक पहचान को आकार देने में अहम भूमिका निभाई। उनकी सरकार ने गुजरात को निवेश के प्रमुख केंद्र के तौर पर पेश किया। वाइब्रेंट गुजरात समिट राज्य के आर्थिक विकास और निवेश के प्रस्ताव को सामने रखने का एक प्रमुख मंच बना। विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश और प्रशासनिक दक्षता आगे चलकर नरेंद्र मोदी की राष्ट्रीय राजनीतिक छवि के महत्वपूर्ण हिस्से बने।
हालांकि गुजरात के वर्ष 2002 के सांप्रदायिक दंगों को लेकर उनका राजनीतिक सफर विवादों से भी जुड़ा रहा। मोदी और उनकी सरकार को हिंसा को लेकर वर्षों तक राजनीतिक आलोचना और जांच का सामना करना पड़ा। 2012 में कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल ने दंगों से जुड़े आरोपों में उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं पाए। वर्ष 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। 2013 में बीजेपी ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया और इसके बाद 2014 का लोकसभा चुनाव उनके राजनीतिक सफर में एक बड़ा पड़ाव बना।
2014 में बदला चुनावी प्रचार का अंदाज: 2014 का लोकसभा चुनाव नरेंद्र मोदी की जीत के साथ-साथ भारतीय राजनीतिक प्रचार के तौर-तरीकों में बदलाव के लिए भी महत्वपूर्ण रहा। ‘अबकी बार मोदी सरकार’, ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ और ‘चाय पर चर्चा’ जैसे नारों ने चुनावी अभियान में नरेंद्र मोदी को केंद्र में रखा। उनकी साधारण पृष्ठभूमि भी राजनीतिक संवाद का हिस्सा बनी। विरोधियों की ओर से इस्तेमाल किया गया ‘चायवाला’ शब्द भी अभियान के दौरान उनकी पहचान का हिस्सा बन गया।
इस चुनाव में तकनीक का भी बड़े स्तर पर इस्तेमाल हुआ। 3D होलोग्राम रैलियों, सोशल मीडिया आउटरीच और योजनाबद्ध कार्यक्रमों के जरिए नरेंद्र मोदी को अभियान के केंद्र में रखा गया। बीजेपी ने 282 लोकसभा सीटें जीतीं और 1984 के बाद पहली बार किसी एक पार्टी को अपने दम पर लोकसभा में बहुमत मिला।
26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी ने भारत के 14वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 303 सीटें जीतीं और नरेंद्र मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बने। 2024 के चुनाव में बीजेपी को 240 सीटें मिलीं और वह अपने दम पर बहुमत से दूर रही, लेकिन बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने सरकार बनाने के लिए पर्याप्त सीटें हासिल कीं। 9 जून 2024 को नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। वह जवाहरलाल नेहरू के बाद लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शुरुआत करने वाले दूसरे प्रधानमंत्री बने।
जब ‘मोदी’ सिर्फ नाम नहीं, एक ब्रैंड बना: करीब 25 साल की राजनीतिक यात्रा में एक समय ऐसा आया जब नरेंद्र मोदी सिर्फ एक राजनेता के नाम तक सीमित नहीं रहे, बल्कि ‘मोदी’ एक राजनीतिक ब्रैंड के तौर पर पहचाना जाने लगा। इस ब्रैंड की अपनी एक पहचान बनी। ‘मित्रों’, ‘भाइयों और बहनों’, ‘सबका साथ, सबका विकास’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ जैसे शब्द और नारों ने उनकी राजनीतिक संवाद शैली को अलग पहचान दी।
उनकी दृश्य पहचान भी इसी तरह स्पष्ट हुई। आधी बांह वाले कुर्ते को उनके साथ इतना जोड़ा गया कि इसे लोकप्रिय तौर पर ‘मोदी कुर्ता’ कहा जाने लगा। बिना आस्तीन की जैकेट, शॉल, स्वतंत्रता दिवस पर अलग-अलग तरह की पगड़ियां और क्षेत्रीय पहनावे उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों का हिस्सा बने।
हिमाचल प्रदेश में हिमाचली टोपी, अलग-अलग राज्यों के कार्यक्रमों में क्षेत्रीय साफे और पगड़ी, हैंडलूम, खादी तथा कोविड के दौरान नजर आया गमछा भी उनकी सार्वजनिक छवि का हिस्सा रहे हैं। राजनीतिक संवाद के इस दौर में कपड़े भी संदेश देने का एक माध्यम बने।
गुजरात के विकास से ‘विश्वगुरु’ की छवि तक: प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी की राजनीतिक छवि में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विस्तार हुआ। बड़े प्रवासी भारतीय कार्यक्रम, द्विपक्षीय बैठकें, जी20 से जुड़ी तस्वीरें, विदेश यात्राएं और वैश्विक नेताओं के साथ उनकी मुलाकातें उनकी घरेलू सार्वजनिक छवि का महत्वपूर्ण हिस्सा बनीं।
इसी के साथ भारत को संभावित ‘विश्वगुरु’ के तौर पर पेश करने वाली राजनीतिक शब्दावली भी सामने आई। ‘विश्वगुरु’ नरेंद्र मोदी और बीजेपी की ओर से समर्थित एक आकांक्षी राजनीतिक विचार है। भारत का अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और सरकार का विदेश नीति रिकॉर्ड राजनीतिक बहस के विषय बने हुए हैं।
राजनीतिक ब्रैंडिंग के नजरिए से देखें तो कहानी गुजरात के विकास से भारत के विकास और फिर दुनिया में भारत की भूमिका तक पहुंचती दिखाई देती है। समर्थकों के लिए नरेंद्र मोदी की अंतरराष्ट्रीय सक्रियता वैश्विक मंच पर अधिक मुखर भारत की तस्वीर पेश करती है, जबकि आलोचक इस नैरेटिव और भारत के कूटनीतिक, आर्थिक व लोकतांत्रिक रिकॉर्ड के अलग-अलग पहलुओं पर सवाल उठाते रहे हैं।
रेडियो से सोशल मीडिया और अब जेनरेशन Z तक: नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर में संचार का माध्यम बदलने के साथ उसके इस्तेमाल का तरीका भी बदला। रैलियां महत्वपूर्ण बनी रहीं, लेकिन ‘मन की बात’ के जरिए रेडियो को भी राजनीतिक संवाद में प्रमुखता मिली।
टेलीविजन के साथ सीधे डिजिटल संवाद पर भी जोर बढ़ा। ट्विटर, जिसे अब एक्स कहा जाता है, राजनीतिक संवाद का एक बड़ा माध्यम बना। इसके बाद इंस्टाग्राम और यूट्यूब भी सीधे दर्शकों तक पहुंचने के महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म बने। नमो ऐप ने अपना डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया।
इसका सबसे महत्वपूर्ण पहलू केवल फॉलोअर्स की संख्या नहीं, बल्कि राजनेता और जनता के बीच दूरी कम होना था। प्रधानमंत्री को हर संदेश के लिए अखबार के फ्रंट पेज या रात के टीवी बुलेटिन पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं रही। वह खुद भी सीधे अपना संदेश लोगों तक पहुंचा सकते हैं। यह बदलाव सिर्फ नरेंद्र मोदी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अलग-अलग राजनीतिक दलों में राजनीतिक संवाद के तरीके को भी प्रभावित किया।
अब राजनीतिक संवाद में जेनरेशन Z पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मंत्रियों को इंस्टाग्राम और रील्स के जरिए ज्यादा सक्रियता से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करने की उनकी हालिया कोशिश इस बदलाव की ओर संकेत करती है। हालांकि यह उनके राजनीतिक करियर की पूरी कहानी नहीं, बल्कि संचार के बदलते माध्यम के साथ जुड़ा नया अध्याय है।
76 की उम्र में भी राजनीतिक सफर जारी: अक्टूबर 2026 में नरेंद्र मोदी के किसी सरकार के मुखिया बनने के 25 साल पूरे होंगे। इस दौरान उनके नेतृत्व में एनडीए ने तीन लोकसभा चुनाव जीते हैं। वह एक दशक से अधिक समय से प्रधानमंत्री हैं, 13 साल तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और इससे पहले कई दशक राजनीतिक संगठन में काम कर चुके हैं।
उनके राजनीतिक सफर में विवाद, राजनीतिक संघर्ष, नीतिगत बदलाव, चुनावी उतार-चढ़ाव और उनकी सरकार के रिकॉर्ड को लेकर तीखे मतभेद भी रहे हैं। उनके कार्यकाल ने जहां मजबूत समर्थन पैदा किया, वहीं उतना ही मुखर विरोध भी देखने को मिला। 17 सितंबर 2026 को 76 साल के हुए नरेंद्र मोदी आज भी भारतीय राजनीति के केंद्र में हैं और प्रधानमंत्री के तौर पर अपने तीसरे कार्यकाल में हैं। वडनगर में जन्मे बच्चे से आरएसएस के संगठनकर्ता, फिर गुजरात के मुख्यमंत्री और उसके बाद प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने वाली यह यात्रा करीब 25 साल से सरकार के शीर्ष स्तर पर जारी है।
राजनीतिक कार्यकर्ता से मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार, उम्मीदवार से प्रधानमंत्री और फिर लगातार तीन बार प्रधानमंत्री बनने तक नरेंद्र मोदी की यात्रा में उनका नाम एक राजनीतिक ब्रैंड के रूप में भी स्थापित हुआ। ‘मोदी कुर्ता’ उनकी पहचान का हिस्सा बना, नारे चुनावी अभियान की संपत्ति बने और ‘मित्रों’ राजनीतिक संवाद का पहचाना जाने वाला अंदाज।
गणेशोत्सव पर ब्रैंड्स ने भी क्रिएटिव अंदाज में बप्पा का स्वागत किया। किसी ने डिलीवरी रूट से गणेश की आकृति बनाई, तो किसी ने रोजमर्रा की चीजों को त्योहार से जोड़ा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गणेशोत्सव सिर्फ पंडालों और घरों तक सीमित नहीं रही। इस बार कई ब्रैंड्स ने अपने-अपने अंदाज में बप्पा के स्वागत को क्रिएटिव कैंपेन से जोड़ा। किसी ने डिलीवरी रूट को गणेश की आकृति में बदला, तो किसी ने रोजमर्रा की चीजों को गणपति के रूप में पेश किया। वहीं कुछ ब्रैंड्स ने त्योहार को यादों, परंपरा और सामाजिक संदेश के साथ जोड़ा।
आइए नजर डालते हैं गणेशोत्सव के दौरान नजर आए कुछ ऐसे ही क्रिएटिव ब्रैंड कैंपेन पर-
Zomato ने गणेशोत्सव की अपनी क्रिएटिविटी में इंटरनेट की भाषा और रोजमर्रा की बातचीत को जगह दी। ब्रैंड ने बप्पा को एक ऐसे करीबी दोस्त के तौर पर पेश किया, जिनके साथ लोग बिना किसी झिझक के अपनी भावनाएं साझा करते हैं। कैंपेन ने त्योहार को मॉडर्न डिजिटल कल्चर से जोड़ने की कोशिश की।
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वहीं Blinkit और Domino’s ने एक जैसे क्रिएटिव आइडिया के साथ लोगों का ध्यान खींचा। दोनों ब्रैंड्स ने अपने लाइव ऑर्डर-ट्रैकिंग मैप का इस्तेमाल करते हुए डिलीवरी रूट को इस तरह दिखाया कि वह भगवान गणेश की आकृति जैसा नजर आए। इस तरह रोजमर्रा की डिलीवरी को गणेशोत्सव के जश्न से जोड़ दिया गया।
Visa और Mastercard ने त्योहार के सबसे पसंदीदा व्यंजनों में से एक मोदक को अपने कैंपेन का हिस्सा बनाया। Visa ने मोदक को गणेश उत्सव के 10 दिनों के खास स्वाद से जोड़ा, जबकि Mastercard ने अपने चर्चित टैगलाइन के जरिए बप्पा को पहला निवाला अर्पित करने की परंपरा को क्रिएटिव अंदाज में पेश किया।
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Croma और Goldmedal ने घर में इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट्स को गणेशोत्सव की क्रिएटिविटी से जोड़ दिया। Croma ने कंप्यूटर माउस को मूषक राज के रूप में दिखाया। वहीं Goldmedal ने दो आयरन की मदद से गणपति का चेहरा बनाया और इसके जरिए जिंदगी की छोटी-बड़ी परेशानियों को ‘आयरन आउट’ करने का संदेश दिया।
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BPCL ने त्योहार को सामाजिक संदेश के साथ जोड़ा। अपने #SilentVoices कैंपेन के जरिए ब्रैंड ने उन लोगों और उनकी प्रतिभाओं को सामने लाने की कोशिश की, जिनकी आवाज अक्सर अनसुनी रह जाती है। कैंपेन ने गणेशोत्सव के ‘नई शुरुआत’ वाले संदेश को समान अवसर और सपनों को आगे बढ़ाने के विचार से जोड़ा।
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Hero MotoCorp ने गणेशोत्सव के लिए देश की अलग-अलग लोक कलाओं का सहारा लिया। ब्रैंड ने पांच लोक कला शैलियों (वारली, कलमकारी, गोंड, पिछवाई और माता नी पछेड़ी) के कलाकारों के साथ मिलकर अपने वाहनों को इन कलाओं में शामिल किया। कैंपेन में बप्पा के आगमन को स्थानीय कला और भारतीय परंपराओं के साथ जोड़ा गया।
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Hero ने अपने कैंपेन में ASMR साउंडस्केप का भी इस्तेमाल किया। इसमें Hero Destini से आने वाली धातु की टैपिंग और क्लिक जैसी आवाजों को शामिल किया गया, जिससे पारंपरिक कला और रोजमर्रा की जिंदगी का एक अलग मेल देखने को मिला।
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DHL ने भी त्योहार के लिए एक सरल लेकिन दिलचस्प आइडिया पेश किया। धूप में उड़ते कार्गो प्लेन की जमीन पर पड़ने वाली परछाई को इस तरह दिखाया गया कि वह भगवान गणेश की आकृति जैसी नजर आती है। इसके जरिए ब्रैंड ने अपनी डिलीवरी सर्विस को बप्पा के ‘स्पेशल डिलीवरी’ वाले संदर्भ से जोड़ दिया।
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Paper Boat ने अपने कैंपेन में लोगों को बचपन की यादों की ओर ले जाने की कोशिश की। ब्रैंड ने गणेश उत्सव के दौरान लगने वाले बाजारों और वहां सजी बप्पा की मूर्तियों को देखकर बचपन में महसूस होने वाली उत्सुकता और हर मूर्ति को घर ले जाने की मासूम इच्छा को क्रिएटिव अंदाज में पेश किया।
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मनोरंजन और मीडिया ब्रैंड्स ने भी गणेशोत्सव को अपने कंटेंट के अंदाज में पेश किया। Discovery Channel ने बप्पा को सिर्फ पंडालों तक सीमित न रखते हुए आसपास की दुनिया में मौजूद एक सकारात्मक एहसास के तौर पर दिखाया।
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वहीं Cartoon Network ने अपने चिर-परिचित किरदार Jerry के जरिए त्योहार को बच्चों की मासूमियत से जोड़ा। क्रिएटिव में Jerry एक छोटे हाथी के कान में अपनी इच्छा बताते हुए नजर आया, जो बचपन में भगवान गणेश से अपनी छोटी-बड़ी बातें साझा करने वाली भावनाओं की याद दिलाता है।
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इस तरह गणेशोत्सव पर ब्रैंड्स ने सिर्फ शुभकामनाएं देने के बजाय फूड, डिलीवरी, ऑटोमोबाइल, पेमेंट, टेक्नोलॉजी, मनोरंजन और रोजमर्रा के प्रोडक्ट्स को त्योहार की कहानी से जोड़ने की कोशिश की। अलग-अलग क्रिएटिव आइडियाज के जरिए बप्पा के स्वागत को डिजिटल फीड और विज्ञापन कैंपेन का हिस्सा बनाया गया।
फिलिप्स (Philips) ने अभिनेत्री और उद्यमी सुष्मिता सेन को अपना नया ब्रैंड एंबेसडर बनाया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
फिलिप्स (Philips) ने अभिनेत्री और उद्यमी सुष्मिता सेन को अपना नया ब्रैंड एंबेसडर बनाया है। कंपनी ने इसके साथ ही अपने एयरफ्रायर को प्रमोट करने के लिए नया कैंपेन ‘Airfryer Matlab Philips’ भी लॉन्च किया है।
इस कैंपेन फिल्म में रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े कई ऐसे मौके दिखाए गए हैं, जहां लोग अलग-अलग विकल्पों में से किसी एक को चुनने को लेकर सोचते हैं। इसके बाद फिल्म एयरफ्रायर की खरीदारी से इसकी तुलना करती है और दिखाती है कि एयरफ्रायर की बात आते ही Philips एक आसान और तुरंत पसंद बनने वाला विकल्प है।
इस कैंपेन की रणनीति और क्रिएटिव तैयार करने की जिम्मेदारी Philips की क्रिएटिव और स्ट्रैटेजिक पार्टनर WillBe Done ने संभाली है। यह कैंपेन टेलीविजन, डिजिटल, सोशल मीडिया और रिटेल प्लेटफॉर्म पर चलाया जाएगा। कंपनी ने इसे त्योहारी सीजन से पहले शुरू करने की योजना बनाई है।
Versuni India की MD और CEO गुलबहार तौरानी ने कहा कि ‘Airfryer Matlab Philips’ कैंपेन उन उपभोक्ताओं के प्यार का जश्न है, जो Philips को दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी ने एयरफ्रायर कैटेगरी में अपनी मजबूत स्थिति बनाई है और अब उसका लक्ष्य एयरफ्राइंग को हर भारतीय घर तक पहुंचाना है।
वहीं, Philips की ब्रैंड एंबेसडर बनने पर सुष्मिता सेन ने कहा कि वह Philips के साथ अपनी साझेदारी को आगे बढ़ाने और ज्यादा से ज्यादा भारतीय परिवारों के रोजमर्रा के खाना बनाने में एयरफ्राइंग को शामिल करने की दिशा में कंपनी के सफर का हिस्सा बनने को लेकर उत्साहित हैं।
ईजमायट्रिप के को-फाउंडर निशांत पिट्टी ने निजी इस्तेमाल के लिए कंपनी के 34.51 करोड़ शेयर गिरवी रखे हैं। इन शेयरों की कीमत करीब 211.92 करोड़ रुपये बताई गई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ऑनलाइन ट्रैवल कंपनी ईजमायट्रिप (EaseMyTrip) के को-फाउंडर और प्रमोटर निशांत पिट्टी (Nishant Pitti) ने निजी इस्तेमाल के लिए कंपनी के करीब 212 करोड़ रुपये के शेयर गिरवी रखे हैं। रेगुलेटरी फाइलिंग (Regulatory Filing) के मुताबिक, उन्होंने 24 अगस्त को मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (Motilal Oswal Financial Services) के पक्ष में 34.51 करोड़ शेयर प्लेज (Pledge) किए।
गिरवी रखे गए 34.51 करोड़ शेयर ईजमायट्रिप की कुल पेड-अप शेयर कैपिटल (Paid-up Share Capital) का 8.66 फीसदी हैं। फाइलिंग में बताया गया है कि यह ट्रांजैक्शन प्रमोटर के निजी इस्तेमाल के लिए है। यानी इससे जुटाई जाने वाली रकम का इस्तेमाल लिस्टेड कंपनी के कारोबार के लिए नहीं किया जाएगा।
गिरवी रखे गए शेयरों की वैल्यू और ट्रांजैक्शन में शामिल रकम, दोनों 211.92 करोड़ रुपये बताई गई हैं। इस ट्रांजैक्शन के लिए सिक्योरिटी कवर (Security Cover) 1:1 रखा गया है।
नए शेयर प्लेज के बाद निशांत पिट्टी के पास मौजूद ईजमायट्रिप के कुल 44.87 करोड़ शेयर गिरवी हो गए हैं। यह कंपनी की कुल शेयर कैपिटल का 11.26 फीसदी है। पिट्टी की कंपनी में कुल हिस्सेदारी 11.39 फीसदी है।
इसका मतलब है कि ईजमायट्रिप में निशांत पिट्टी की लगभग पूरी हिस्सेदारी अब गिरवी है। रेगुलेटरी डिस्क्लोजर (Regulatory Disclosure) में साफ किया गया है कि शेयर प्लेज का उद्देश्य प्रमोटर का निजी इस्तेमाल है और इससे मिलने वाली रकम का उपयोग ईजमायट्रिप के फायदे या कंपनी की जरूरतों के लिए नहीं किया जाएगा।