लेखक ने एक अध्याय में बिंदुवार तरीके से यह समझाने की कोशिश की है कि गांधीजी की हत्या को रोका जा सकता था। प्रखर श्रीवास्तव वर्ष 2005 से ही गांधी हत्याकांड से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर कार्य कर रहे हैं।
by
आनंद पाराशर