एक समय था जब ब्रैंड्स के लिए टीवी पर 30 सेकंड का ऐड सबसे कीमती माना जाता था। लेकिन अब तस्वीर बदल गई है।
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Vikas Saxena
एक समय था जब ब्रैंड्स के लिए टीवी पर 30 सेकंड का ऐड सबसे कीमती माना जाता था। लेकिन अब तस्वीर बदल गई है। आज वही पैसा (कई बार उससे भी ज्यादा) Instagram Reel जैसे प्लेटफॉर्म पर सिर्फ 15 सेकंड के वीडियो पर खर्च हो रहा है। भारत का ऐडवर्टाइजिंग मार्केट अब ऐसे दौर में पहुंच चुका है, जहां “मोबाइल-फर्स्ट इंडिया” सीधे “मोबाइल-फर्स्ट ऐडवर्टाइजिंग” बन गया है। साफ शब्दों में कहें तो अब ज्यादातर ऐड मोबाइल स्क्रीन को ध्यान में रखकर बनाए जा रहे हैं।
आंकड़े भी यही बताते हैं कि भारत में डिजिटल ऐड पर होने वाले कुल खर्च का करीब 78% हिस्सा अब सिर्फ मोबाइल पर ही खर्च हो रहा है। यानी जो टीवी कभी “सबसे बड़ी स्क्रीन” और ऐड का सबसे ताकतवर जरिया माना जाता था, उसकी पकड़ अब कमजोर पड़ रही है। और यह बदलाव इतना तेजी से आया है कि पूरी इंडस्ट्री अभी भी इसे समझने और अपनाने में लगी हुई है।
₹49,000 करोड़ का डिजिटल साम्राज्य और उसका राजा है मोबाइल
ET Brand Equity और Ipsos की रिपोर्ट "The State of Digital Advertising in India 2025-26" (सितंबर 2025) के अनुसार, भारत का कुल ऐड खर्च FY2025 (अप्रैल 2024 – मार्च 2025) में ₹1,11,000 करोड़ पहुंच गया- यह पिछले साल की तुलना में 11% की वृद्धि है।
इसमें सबसे बड़ा हिस्सा डिजिटल ऐड का है- ₹49,000 करोड़, यानी कुल बाजार का 44%। पहली बार डिजिटल ने टेलीविजन को पीछे छोड़ दिया है। टेलीविजन का हिस्सा 27%, प्रिंट का 18%, OTT का 5%, OOH (आउटडोर) का 3%, रेडियो का 2% और सिनेमा का 1% रह गया है। FY2026 में यह डिजिटल खर्च और 15% बढ़कर ₹56,400 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जो कुल बाजार का 46% होगा। और इस पूरे डिजिटल साम्राज्य का राजा है- मोबाइल। उसी Ipsos रिपोर्ट के अनुसार, 78% डिजिटल ऐड खर्च मोबाइल प्लेटफॉर्म पर होता है। स्मार्टफोन अब "commerce, content और engagement" तीनों के लिए primary screen बन चुका है।
Sensor Tower की "State of Digital Advertising India 2026" रिपोर्ट (फरवरी 2026) के अनुसार, 2025 में भारत का कुल डिजिटल ऐड खर्च US$4.2 बिलियन रहा और 2026 में इसके US$5 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। ResearchAndMarkets (फरवरी 2026) के अनुसार, सभी digital channels- Search, Social, Display, Video, OTT, Retail Media- मिलाकर 2026 में भारत का Digital Ad Spend Market US$14.56 बिलियन तक पहुंच सकता है।
अरब इंटरनेट यूजर्स- और ज्यादातर मोबाइल पर
DataReportal की "Digital 2026: India" रिपोर्ट (नवंबर 2025) के अनुसार, 2025 के अंत तक भारत में 103 करोड़ (1.03 बिलियन) इंटरनेट यूजर्स थे- internet penetration 70% पर पहुंच गई। इसके साथ ही 106 करोड़ cellular mobile connections सक्रिय थे, जो देश की कुल आबादी का 72.5% है।
ET Brand Equity–Ipsos रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत में 5.6 करोड़ नए इंटरनेट यूजर्स जुड़े। 2026 में Connected TV (CTV) यूजर्स 40 मिलियन से बढ़कर 50 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। 5G की बात करें तो जनवरी 2026 में भारत में 40 करोड़ 5G users थे- 2025 के 36.5 करोड़ से 9.59% की वृद्धि।
यह सारे आंकड़े एक बात साफ करते हैं: भारत अब दुनिया के सबसे बड़े मोबाइल इंटरनेट बाजारों में से एक है और इसी वजह से ब्रैंड्स के लिए मोबाइल स्क्रीन सबसे जरूरी ऐड माध्यम बन गई है।
OTT, Reels और Shorts- ब्रैंड्स की नई दुनिया
अब OTT प्लेटफॉर्म्स (जैसे Netflix, JioCinema, Hotstar आदि) पर ऐड करना कोई नया प्रयोग नहीं रहा, बल्कि मीडिया प्लानिंग का जरूरी हिस्सा बन गया है। Ipsos की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 वह साल था जब OTT को “ऑप्शन” नहीं, बल्कि “कोर” यानी जरूरी प्लेटफॉर्म माना जाने लगा। पहली बार 2025 में OTT ऐड को कुल एड खर्च में एक अलग और अहम कैटेगरी के तौर पर देखा गया। इसी साल भारत में OTT यूजर्स की संख्या बढ़कर करीब 60 करोड़ से ज्यादा हो गई, जिससे ब्रैंड्स के लिए यह प्लेटफॉर्म और भी अहम बन गया।
Connected TV (CTV) यानी इंटरनेट से जुड़े स्मार्ट टीवी पर भी तेजी से ग्रोथ दिख रही है। Deloitte और PwC की रिपोर्ट के अनुसार, CTV ऐड खर्च 2022 में करीब ₹450 करोड़ था, जो 2024 तक बढ़कर ₹1,500 करोड़ हो गया यानी तीन गुना से ज्यादा।
Madison World की रिपोर्ट कहती है कि 2025 के अंत तक यह खर्च ₹2,300-2,500 करोड़ तक पहुंच सकता है, और 2027 तक ₹3,500 करोड़ तक जाने की उम्मीद है। वहीं WPP Media के अनुमान के मुताबिक, भारत का कुल ऐडवर्टाइजिंग मार्केट 2026 में ₹2 लाख करोड़ के आसपास पहुंच सकता है।
अब OTT सिर्फ कंटेंट देखने का प्लेटफॉर्म नहीं रहा, बल्कि ब्रैंड्स के लिए बड़ा एड प्लेटफॉर्म बन चुका है। JioCinema और JioStar जैसे प्लेटफॉर्म IPL जैसे बड़े इवेंट्स में ब्रैंड्स को ऐसे एड ऑप्शन दे रहे हैं, जहां वे दर्शकों तक हर स्तर पर पहुंच सकते हैं।
खास बात यह है कि अब ऐसे ऐड ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं जिन्हें स्किप नहीं किया जा सकता और जिन पर दर्शकों का पूरा ध्यान जाता है। यानी साफ है—OTT अब एडवर्टाइजिंग की दुनिया का एक बड़ा और मजबूत खिलाड़ी बन चुका है।
Reels और Shorts- "15 सेकंड में बिकती दुनिया"
इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग- ₹3,375 करोड़ की नई अर्थव्यवस्था
इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग अब एक "एक्सपेरिमेंट" नहीं बल्कि मेनस्ट्रीम ऐडवर्टाइजिंग स्ट्रेटजी है। इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 में भारत का इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग बाजार ₹3,000 से ₹3,500 करोड़ के बीच था और 2026 में यह ₹3,375 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है- यानी 25% CAGR से वृद्धि।
Kofluence की इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग Research Report 2025 के अनुसार, Instagram इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग के लिए सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म बना हुआ है- 50% से अधिक brand allocations यहाँ जाते हैं। Micro-influencers (10,000 से 1 लाख followers) Tier-2 और Tier-3 शहरों में hyperlocal campaigns के जरिए brands को ज्यादा ROI दे रहे हैं। FMCG, E-commerce, Beauty, Finance और Food सेक्टर इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग में सबसे बड़े निवेशक हैं।
Sensor Tower की 2026 रिपोर्ट के अनुसार, Shopping category ने 2025 में भारत के डिजिटल ऐड खर्च का 28-30% हिस्सा घेरा, जिसमें Flipkart, Reliance Retail और Amazon के बीच सबसे कड़ा मुकाबला रहा। Flipkart की Big Billion Day 2025 campaign में लगभग 80% audience युवा users थे।
टेलीविजन की घटती ताकत: लाइसेंस वापस, ऐड गायब
टीवी पर घट रहा असर: ऐड और दर्शक दोनों कम हुए
जहां एक तरफ डिजिटल और मोबाइल तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं टीवी की हालत कुछ ठीक नहीं दिख रही। WPP की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत का कुल TV ऐड रेवेन्यू करीब 1.5% गिरकर ₹47,740 करोड़ रह गया।
TAM Media Research के आंकड़े बताते हैं कि 2025 में TV पर दिखने वाले ऐडों की संख्या (ad volumes) में पिछले साल के मुकाबले 11% की गिरावट आई। इसकी बड़ी वजह रही- रियल मनी गेमिंग गेम पर बैन, FMCG कंपनियों का कम खर्च और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की तेज बढ़त।
FICCI और Ernst & Young (FICCI-EY रिपोर्ट) के अनुसार, 2024 में भी टीवी सेक्टर की कमाई 4.5% घट गई थी। यह लगातार दूसरा साल था जब गिरावट देखी गई (2023 में 2% गिरावट आई थी)। इतना ही नहीं, 2024 में TV पर ऐड से होने वाली कमाई 6% कम हो गई और ऐड देने वाले ब्रैंड्स की संख्या भी 12% घट गई। दर्शकों की संख्या में भी गिरावट आई है। FY25 में एक्टिव DTH यूजर्स करीब 5.69 करोड़ रह गए, जो FY24 के 6.19 करोड़ से कम हैं।
Dentsu का अनुमान है कि आने वाले समय में TV का कुल ऐड खर्च में हिस्सा और घट सकता है- 2027 तक यह 21% से गिरकर करीब 15% तक आ सकता है। इस गिरावट का असर साफ दिख रहा है। पिछले तीन सालों में 50 से ज्यादा TV चैनलों के लाइसेंस वापस किए जा चुके हैं। इसमें Zee Entertainment, TV Today Network, NDTV और ABP Network जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं।
साफ है कि टीवी जो कभी ऐड की दुनिया का सबसे बड़ा मंच था, अब डिजिटल के सामने अपनी पकड़ खोता जा रहा है।
प्रोग्रामैटिक, रिटेल मीडिया और AI- अगली पीढ़ी का ऐडवर्टाइजिंग
अब मोबाइल पर दिखने वाले ऐड पहले जैसे नहीं रहे। अब यह पूरी तरह से ऑटोमेटेड (अपने आप चलने वाले) और डेटा के आधार पर तय होने लगे हैं।
Ipsos की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में डिजिटल ऐड का 40% से ज्यादा हिस्सा अब प्रोग्रामैटिक ट्रेडिंग के जरिए हो रहा है। यानी कंप्यूटर और AI खुद तय करते हैं कि कौन-सा ऐड किसे और कब दिखाना है।
Retail media भी तेजी से बढ़ रहा है। Amazon Ads, Flipkart Ads, JioMart, Blinkit और Zepto जैसे प्लेटफॉर्म पर ऐड में साल-दर-साल 20% से ज्यादा की बढ़त देखी गई है। यह ग्रोथ सर्च और सोशल मीडिया ऐड से भी तेज है। FMCG और E-commerce कंपनियां मिलकर digital advertising का करीब 68% खर्च कर रही हैं, यानी सबसे ज्यादा पैसा यही सेक्टर लगा रहे हैं।
Sensor Tower की 2026 रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में सॉफ्टवेयर कैटेगरी में ऐड खर्च सबसे तेजी से बढ़ा- इसमें 84% की जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की गई। इसके बाद Food & Dining में 38% और Travel & Tourism में 40% की बढ़त रही।
अब AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) भी ऐड का बड़ा हिस्सा बन चुका है। Ad buying (ऐड खरीदना), टार्गेटिंग (किसे दिखाना है) और creative बनाना- इन सबमें AI का इस्तेमाल आम हो गया है।
AI की मदद से ब्रैंड्स अब छोटे शहरों (Tier-2 और Tier-3) के लोगों के लिए उनकी भाषा में, उनकी पसंद के हिसाब से पर्सनलाइज्ड ऐड बना रहे हैं। यानी हर यूजर को अलग-अलग और ज्यादा जुड़ा हुआ कंटेंट दिख रहा है। आने वाले समय में, खासकर 2026 में, यह ट्रेंड और तेज होने वाला है। साफ है—मोबाइल एडवर्टाइजिंग अब सिर्फ बड़ी नहीं, बल्कि ज्यादा स्मार्ट भी हो चुकी है।
टीवी बनाम मोबाइल: नंबरों में पूरी कहानी
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पैमाना |
टेलीविजन (2025) |
मोबाइल/डिजिटल (2025-26) |
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कुल Ad Spend में हिस्सा |
27% (₹47,740 Cr, घटता हुआ) |
44% (₹49,000 Cr, बढ़ता हुआ) |
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Ad Volume growth (2025) |
-11% (TAM data) |
+20% (digital, Ipsos) |
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Brands की संख्या |
-12% (2024 vs 2023) |
लगातार नए advertiser जुड़ रहे |
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CTV ad revenue |
₹1,500 Cr (2024) |
₹2,300-2,500 Cr (2025 est.) |
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2027 तक projected share |
15% (Dentsu) |
46%+ (Ipsos) |
जमीनी हकीकत: Tier-2 भारत बदल रहा है खेल
अब मोबाइल ऐड का असली विस्तार बड़े शहरों में नहीं, बल्कि छोटे शहरों (Tier-2 और Tier-3) में हो रहा है। Ipsos की रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले 20-30 करोड़ नए इंटरनेट यूजर्स अपनी स्थानीय भाषा (vernacular) में कंटेंट देखना पसंद करेंगे। यही वजह है कि ShareChat (और Moj), Dailyhunt (Josh) और InMobi जैसे भारतीय प्लेटफॉर्म तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ये प्लेटफॉर्म regional कंटेंट और अलग-अलग ऑडियंस को टारगेट करने की रणनीति के जरिए Google और Meta Platforms जैसी बड़ी कंपनियों को चुनौती दे रहे हैं।
वहीं दूसरी तरफ, Accenture की रिपोर्ट बताती है कि 77% भारतीय यूजर्स इतने सारे OTT प्लेटफॉर्म देखकर कन्फ्यूज हो जाते हैं। इसी वजह से अब लोग ऐसे प्लान पसंद कर रहे हैं, जिनमें कई OTT एक साथ मिल जाएं। जैसे Airtel का Xstream और Jio का JioFiber, इनमें एक ही पैक में कई OTT प्लेटफॉर्म मिल जाते हैं (Airtel में 25+ और Jio में 16 तक)।
CTV (Connected TV) यानी इंटरनेट वाले स्मार्ट टीवी का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है। MiQ की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 तक भारत में CTV यूजर्स की संख्या 87% बढ़कर करीब 13 करोड़ तक पहुंच गई है। यानी अब 6-7 करोड़ घरों में CTV इस्तेमाल हो रहा है। इसके अलावा, छोटे शहरों में Reels और शॉर्ट वीडियो का क्रेज और भी ज्यादा है। खासकर Diwali, Eid, Onam और Pongal जैसे त्योहारों के दौरान ये वीडियो तेजी से वायरल होते हैं।
यही वजह है कि अब ब्रैंड्स के लिए ये शॉर्ट वीडियो सिर्फ सोशल मीडिया कंटेंट नहीं, बल्कि पूरे देश में चलने वाले बड़े ऐड कैंपेन का मजबूत विकल्प बन चुके हैं।
'स्क्रीन' की लड़ाई खत्म हो चुकी है
अगर यह पूछा जाए कि "स्क्रीन की लड़ाई" खत्म हुई या नहीं- तो जवाब है: हां, खत्म हो चुकी है। और जीता है मोबाइल। 78% डिजिटल ad spend, 103 करोड़ internet users, 601 मिलियन OTT दर्शक, 200 billion YouTube Shorts daily views (जून 2025), Reels पर 50% Instagram screen time, ₹3,375 करोड़ का influencer economy, और 50 से अधिक TV channels का बंद होना- यह सब मिलकर एक ही कहानी कह रहे हैं। टेलीविजन अभी मरा नहीं है, लेकिन वह अब "King Screen" नहीं रहा। मोबाइल ने वह ताज छीन लिया है।
FY2026 में डिजिटल ऐड के ₹56,400 करोड़ तक पहुंचने और टोटल ऐड मार्केटिंग के ₹2 लाख करोड़ को छूने के अनुमानों के साथ, यह साफ है कि भारत की ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री का भविष्य मोबाइल स्क्रीन पर लिखा जा रहा है- Reels में, Shorts में, OTT ads में, और influencer की आवाज में।
पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर ब्रैंड Bisleri को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कर्नाटक की एक कंपनी को ‘Bislie’ नाम से पैकेज्ड पानी बनाने और बेचने पर फिलहाल रोक लगा दी है।
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Samachar4media Bureau
पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर ब्रैंड Bisleri को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कर्नाटक की एक कंपनी को ‘Bislie’ नाम से पैकेज्ड पानी बनाने और बेचने पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने पहली नजर में माना कि ‘Bislie’ नाम रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क ‘Bisleri’ से इतना मिलता-जुलता है कि इससे लोगों के भ्रमित होने की संभावना है।
जस्टिस माधव जे. जमादार ने Bisleri International Private Limited की ओर से दायर अंतरिम याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। मामला कर्नाटक के बेलागुली महालिंगेगौड़ा किरणकुमार की कंपनी Kalabyraveshwara Mineral Water Industry से जुड़ा है, जो ‘Bislie’ ब्रैंड के नाम से पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर बेच रही थी।
नाम के साथ पैकेजिंग पर भी सवाल
Bisleri की ओर से कोर्ट में कहा गया कि ‘Bislie’ सिर्फ नाम में ही उसके ब्रैंड से मिलता-जुलता नहीं है, बल्कि दोनों प्रॉडक्ट्स की लेबल डिजाइन, आर्टवर्क, रंगों, लेआउट, एलिमेंट्स की प्लेसमेंट और पूरी पैकेजिंग में भी काफी समानता है।
कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि ‘Bislie’ के लिए इस्तेमाल की जा रही बोतल का डिजाइन भी Bisleri की बोतल से काफी मिलता-जुलता है।
Bisleri ने कोर्ट से मांग की थी कि संबंधित निर्माता को ‘Bislie’ नाम या उससे मिलते-जुलते किसी भी नाम, लेबल, पैकेजिंग या डिजाइन के तहत पानी बनाने, बेचने, स्टॉक करने और मार्केटिंग करने से रोका जाए।
मई में बाजार में मिले थे ‘Bislie’ के प्रोडक्ट
कोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक, Bisleri की टीम ने मई 2026 के आखिरी हफ्ते में बाजार की निगरानी के दौरान ‘Bislie’ नाम से बिक रहे प्रॉडक्ट्स की पहचान की थी। इसके बाद कंपनी को पता चला कि इन प्रॉडक्ट्स का निर्माण कर्नाटक के चन्नरायपटना में किया जा रहा था।
Bisleri ने अपने ट्रेडमार्क के अलावा अपने लेबल पर इस्तेमाल होने वाले ओरिजिनल आर्टवर्क के लिए कॉपीराइट रजिस्ट्रेशन भी करा रखा है।
जून में कोर्ट ने दी थी तलाशी और जब्ती की अनुमति
इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने पहले 11 जून को निर्माता की गैरमौजूदगी में एक अंतरिम आदेश जारी किया था। कोर्ट ने कोर्ट रिसीवर नियुक्त करते हुए उसे ‘Bislie’ नाम वाले प्रॉडक्ट्स, लेबल, पैकेजिंग सामग्री, मशीनरी और इससे जुड़ी अन्य चीजों की तलाशी लेने और उन्हें जब्त करने की अनुमति दी थी।
इसके बाद कोर्ट के आदेश के मुताबिक परिसर में छापेमारी भी की गई।
‘Bislie’ और ‘Bisleri’ में काफी समानता
कोर्ट ने दोनों ब्रैंड के नाम और पैकेजिंग की तुलना की। कोर्ट के मुताबिक, ‘Bislie’ नाम ‘Bisleri’ की नकल जैसा दिखाई देता है, जिसमें कुछ अक्षरों में बदलाव करके नया नाम तैयार किया गया है।
कोर्ट ने नाम के अलावा दोनों ब्रैंड की पैकेजिंग में भी कई समानताएं पाईं। इनमें आर्टवर्क, कलर स्कीम, डिजाइन, लेआउट और पूरी विजुअल पहचान शामिल है।
कंपनी की गैरमौजूदगी में जारी रहा आदेश
7 अगस्त को हुई सुनवाई में संबंधित निर्माता कोर्ट में पेश नहीं हुआ, जबकि उसे मामले की जानकारी और नोटिस दिया जा चुका था। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि इस संबंध में सर्विस का एफिडेविट दाखिल किया गया था।
कोर्ट ने कहा कि Additional Special Receiver की रिपोर्ट भी Bisleri के दावों को समर्थन देती है। दूसरी ओर, प्रतिवादी ने न तो कोर्ट में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा और न ही जवाबी एफिडेविट दाखिल किया। ऐसे में इस चरण पर Bisleri की ओर से लगाए गए आरोपों का कोई विरोध नहीं हुआ।
अंतिम फैसला आने तक ‘Bislie’ पर रोक
इन परिस्थितियों को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने Bisleri की अंतरिम याचिका मंजूर कर ली। कोर्ट ने मुकदमे के अंतिम निपटारे तक निर्माता को ‘BISLIE’ या ‘BISLERI’ से मिलते-जुलते किसी भी नाम या लेबल के तहत पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर बनाने, बेचने, सप्लाई करने, स्टॉक करने, पैकेजिंग, मार्केटिंग या ऑफर करने से रोक दिया है।
यह रोक सिर्फ नाम तक सीमित नहीं है। इसमें विवादित आर्टवर्क, ट्रेड ड्रेस और बोतल के डिजाइन/शेप को भी शामिल किया गया है।
यानी फिलहाल कोर्ट के आदेश के बाद संबंधित निर्माता के लिए ‘Bislie’ नाम, उसकी पैकेजिंग और कथित तौर पर मिलते-जुलते बोतल डिजाइन के साथ बाजार में पानी बेचना मुश्किल होगा। वहीं, ट्रेडमार्क विवाद पर अंतिम फैसला अभी बाकी है।
मीडिया मेजरमेंट और ऑडियंस एनालिटिक्स कंपनी Nielsen Holdings ने डिजिटल विज्ञापन वेरिफिकेशन प्लेटफॉर्म DoubleVerify का अधिग्रहण करने का ऐलान किया है।
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Samachar4media Bureau
मीडिया मेजरमेंट और ऑडियंस एनालिटिक्स कंपनी Nielsen Holdings ने डिजिटल विज्ञापन वेरिफिकेशन प्लेटफॉर्म DoubleVerify का अधिग्रहण करने का ऐलान किया है। यह पूरी तरह नकद (All-Cash) सौदा है, जिसकी कुल कीमत करीब 2.15 अरब डॉलर है।
इस समझौते के तहत DoubleVerify के शेयरधारकों को प्रति शेयर 13.60 डॉलर नकद मिलेंगे। यह कीमत 5 अगस्त 2026 तक के पिछले 60 कारोबारी दिनों के औसत शेयर मूल्य से लगभग 30 फीसदी अधिक है।
दोनों कंपनियों के बोर्ड ने इस सौदे को मंजूरी दे दी है। हालांकि, इसे पूरा होने के लिए DoubleVerify के शेयरधारकों की मंजूरी और नियामकीय स्वीकृतियां मिलना बाकी हैं। उम्मीद है कि यह सौदा 2027 की पहली तिमाही तक पूरा हो जाएगा।
इस अधिग्रहण के बाद Nielsen की ऑडियंस मेजरमेंट और मीडिया इंटेलिजेंस सेवाएं, DoubleVerify की डिजिटल विज्ञापन वेरिफिकेशन, मीडिया क्वालिटी और कैंपेन मेजरमेंट तकनीक के साथ जुड़ जाएंगी। इससे विज्ञापनदाताओं को यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि उनके विज्ञापन असली लोगों तक पहुंच रहे हैं, सही माहौल में दिख रहे हैं और फर्जी ट्रैफिक से सुरक्षित हैं।
कंपनियों का दावा है कि विलय के बाद बनने वाली संयुक्त कंपनी का सालाना कारोबार 4 अरब डॉलर से अधिक होगा और यह 300 अरब डॉलर से ज्यादा के वैश्विक विज्ञापन खर्च वाले ग्राहकों को सेवाएं देने की स्थिति में होगी।
Nielsen के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कार्तिक राव ने कहा कि इस सौदे से कंपनी की डिजिटल विज्ञापन क्षेत्र में मौजूदगी और मजबूत होगी। वहीं, DoubleVerify के CEO मार्क ज़ागोर्स्की ने कहा कि Nielsen के साथ जुड़ने से कंपनी को अधिक संसाधन मिलेंगे और दोनों की तकनीक मिलकर विज्ञापन उद्योग में नए मानक स्थापित करेगी।
सौदा पूरा होने के बाद DoubleVerify, Nielsen के भीतर एक निजी (Private) कंपनी के रूप में काम करेगी। हालांकि, वह अपने मौजूदा DoubleVerify ब्रांड और नाम के साथ ही परिचालन जारी रखेगी। यह जानकारी BestMediaInfo में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर सामने आई है।
इंडियन ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित संस्थाओं में से एक ऐडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) ने हमेशा इस इंडस्ट्री की विरासत को सहेजने का काम किया है।
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Samachar4media Bureau
डॉ. अनुराग बत्रा, चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ, एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप ।।
इंडियन ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित संस्थाओं में से एक ऐडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) ने हमेशा इस इंडस्ट्री की विरासत को सहेजने का काम किया है। उसके लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड उन प्रोफेशनल्स को सम्मानित करते रहे हैं, जिन्होंने दशकों तक एजेंसीज खड़ी कीं, यादगार ऐड कैंपेन बनाए और इंडियन ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हर पेशे में ऐसे लोगों का सम्मान होना चाहिए, जिन्होंने उस क्षेत्र की नींव मजबूत की हो और उसकी दिशा तय की हो। AAAI लगातार यह जिम्मेदारी निभाता आया है।
लेकिन हर संस्था के जीवन में एक ऐसा समय भी आता है, जब उसे अपनी पुरानी उपलब्धियों से आगे बढ़कर खुद से एक अहम सवाल पूछना पड़ता है- आने वाले समय को आकार देने में उसकी क्या भूमिका होगी?
पिछले एक दशक में शायद ही कोई ऐसी इंडस्ट्री रही हो, जिसमें ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री जितना बड़ा बदलाव आया हो। डिजिटल मीडिया, डेटा, कंटेंट क्रिएटर्स, ई-कॉमर्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने इस क्षेत्र के कई पुराने नियम बदल दिए हैं। आज क्लाइंट्स तेजी से नए आइडिया, मापे जा सकने वाले नतीजे और एकीकृत समाधान चाहते हैं। वहीं, आज इस पेशे में आने वाली नई पीढ़ी ऐसे कारोबारी माहौल में काम शुरू कर रही है, जो उनके वरिष्ठों के दौर से बिल्कुल अलग है।
यही वजह है कि अब AAAI के भीतर चर्चा सिर्फ आजीवन योगदान देने वाले दिग्गजों को सम्मानित करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इस बात पर भी होनी चाहिए कि अगले बीस वर्षों के लिए ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री को कैसे तैयार किया जाए।
इंडस्ट्री के भीतर एक भावना लगातार मजबूत हो रही है कि AAAI का नेतृत्व अभी भी मुख्य रूप से पारंपरिक ऐडवर्टाइजिंग एजेंसीज से जुड़े वरिष्ठ लोगों के हाथों में है। उनके योगदान पर कोई सवाल नहीं है और वे हर सम्मान के हकदार हैं। लेकिन जिस इंडस्ट्री को उन्होंने बनाया, वह अब काफी बदल चुका है। ऐसे में डिजिटल कारोबार, टेक्नोलॉजी, कंटेंट, डेटा एनालिटिक्स और बदलते उपभोक्ता व्यवहार को समझने वाले युवा प्रोफेशनल्स की नई सोच इस संस्था को और मजबूत बना सकती है।
यह बात अनुभव की जगह युवाओं को लाने की नहीं है, बल्कि दोनों को साथ लेकर चलने की है। हर सफल संस्था तब बेहतर काम करती है, जब अनुभवी नेतृत्व के साथ युवा पेशेवर भी जुड़ते हैं, जो नए विचार, नई क्षमताएं और बाजार की नई समझ लेकर आते हैं।
AAAI को उन लोगों का दायरा भी बढ़ाना चाहिए, जिनसे वह सलाह लेता है। आज ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री अकेले काम नहीं करता। किसी भी अभियान को सफल बनाने में ऐडवर्टाइजिंग एजेंसीज के साथ-साथ मार्केटर्स, कंसल्टेंट्स, टेक्नोलॉजी कंपनियां, उपभोक्ता शोधकर्ता और बिजनेस स्ट्रैटेजिस्ट भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर AAAI इन क्षेत्रों के सम्मानित प्रोफेशनल्स को सलाहकार परिषदों या विशेष समितियों में शामिल करे, तो संस्था को नई सोच और व्यापक दृष्टिकोण मिलेगा। कई बार सबसे अच्छे विचार उन लोगों से आते हैं, जो किसी इंडस्ट्री को बाहर से देखते हैं।
आज अधिकांश लोग AAAI के बारे में तब सुनते हैं, जब वह गोआफेस्ट का आयोजन द ऐडवर्टाइजिंग क्लब के साथ करता है या फिर जब लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड की घोषणा होती है। दुर्भाग्य से इस वर्ष इस पुरस्कार को लेकर हुआ विवाद, सम्मान समारोह से कहीं अधिक चर्चा का विषय बन गया। इन सालाना आयोजनों के अलावा भी AAAI के पास पूरे वर्ष अधिक सक्रिय, प्रभावशाली और प्रासंगिक बनने का बड़ा अवसर है।
संस्था नियमित रूप से इंडस्ट्री से जुड़े मंचों का आयोजन कर सकती है, जहां उभरते रुझानों पर चर्चा हो। वह रिसर्च रिपोर्ट प्रकाशित कर सकती है, युवा प्रोफेशनल्स के लिए मेंटरशिप प्रोग्राम शुरू कर सकती है और एजेंसीज, क्लाइंट्स, मीडिया कंपनियों तथा टेक्नोलॉजी पार्टनर्स के बीच संवाद को बढ़ावा दे सकती है। केवल आयोजनों के लिए पहचाने जाने के बजाय AAAI खुद को विचारों और सहयोग का सबसे सम्मानित मंच बना सकता है।
एक और महत्वपूर्ण पहल नेक्स्ट जेनरेशन काउंसिल का गठन हो सकती है, जिसमें एजेंसीज, डिजिटल कंपनियों, मीडिया संस्थानों और स्वतंत्र कंसल्टेंसी से जुड़े युवा पेशेवर शामिल हों। यह समूह प्रतिभा विकास, क्लाइंट्स की बदलती अपेक्षाओं और नए बिजनेस मॉडल जैसे विषयों पर अपने विचार साझा कर सकता है और वरिष्ठ इंडस्ट्री नेताओं के साथ मिलकर काम कर सकता है। इससे भविष्य का नेतृत्व भी व्यवस्थित तरीके से तैयार होगा, न कि केवल संयोग पर छोड़ दिया जाएगा।
इसके अलावा ऐसे पुरस्कार भी शुरू किए जा सकते हैं, जो उभरते हुए एजेंसी लीडर्स, नवाचारी उद्यमियों और डिजिटल दौर में ऐडवर्टाइजिंग की नई परिभाषा गढ़ने वाले प्रोफेशनल्स को सम्मानित करें। करियर के अलग-अलग चरणों में उत्कृष्टता को पहचानना यह संदेश देता है कि इंडस्ट्री अनुभव के साथ-साथ नए विचारों को भी समान महत्व देता है।
AAAI इससे भी बड़ा सपना देख सकता है। आज भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते और सबसे गतिशील ऐडवर्टाइजिंग बाजारों में शामिल है। यहां बनने वाले कई ऐडवर्टाइजिंग कैंपेंस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जाता है। ऐसे में क्यों न AAAI हर चार वर्ष में वर्ल्ड ऐडवर्टाइजिंग कांग्रेस आयोजित करने की पहल करे? ऐसा मंच दुनिया भर के एजेंसी प्रमुखों, मार्केटर्स, मीडिया कंपनियों, टेक्नोलॉजी संगठनों, शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं को एक साथ ला सकता है। इससे न केवल इंडियन ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री को वैश्विक पहचान मिलेगी, बल्कि AAAI की छवि भी एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की इंडस्ट्री संस्था के रूप में मजबूत होगी।
विश्वविद्यालयों और प्रबंधन संस्थानों के साथ मजबूत जुड़ाव भी AAAI की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए। छात्रों के लिए आउटरीच प्रोग्राम, मेंटरशिप, इनोवेशन चैलेंज और अतिथि व्याख्यान जैसे प्रयास कक्षा और कार्यस्थल के बीच की दूरी कम कर सकते हैं। युवा प्रोफेशनल्स को यह महसूस होना चाहिए कि AAAI ऐसी संस्था है, जो उनके विकास और करियर को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाती है।
ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री कभी स्थिर नहीं रहा और उसकी सबसे पुरानी संस्था को भी स्थिर नहीं रहना चाहिए। इंडस्ट्री की विरासत को सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है, लेकिन उसे भविष्य के लिए तैयार करना भी उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी है।
कोई यह नहीं कह रहा कि AAAI उन दिग्गजों का सम्मान करना बंद कर दे, जिन्होंने इंडियन ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री की मजबूत नींव रखी। उनका योगदान हमेशा अमूल्य रहेगा। लेकिन यदि यह संस्था युवा प्रोफेशनल्स के लिए भी जगह बनाए, एजेंसी जगत के बाहर से आने वाले नए विचारों का स्वागत करे और व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करे, तो इससे उसकी प्रासंगिकता और विश्वसनीयता दोनों और मजबूत होंगी।
आखिरकार, बीते दौर के महान लोगों को सच्ची श्रद्धांजलि केवल उन्हें सम्मानित करना नहीं है, बल्कि ऐसी संस्था छोड़कर जाना भी है, जो आने वाले कल की चुनौतियों और अवसरों के लिए पूरी तरह तैयार हो।
ऐडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है।
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Samachar4media Bureau
ऐडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। इंडस्ट्री की वरिष्ठ प्रोफेशनल तान्या गोयल ने AAAI को कानूनी नोटिस भेजकर उस पर मानहानि, झूठे और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाने तथा उनकी पेशेवर छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।
सूत्रों के मुताबिक, तान्या गोयल ने AAAI से 29 जुलाई को जारी उसके मीडिया बयान पर स्पष्टीकरण और बिना शर्त सार्वजनिक माफी की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर तय समय के भीतर ऐसा नहीं किया गया तो वह संगठन और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ दीवानी और आपराधिक मानहानि का मामला दायर करेंगी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब इस साल के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड के चयन को लेकर पहले से ही पारदर्शिता और गवर्नेंस पर सवाल उठ रहे हैं।
AAAI के बयान के बाद बढ़ा विवाद
कुछ दिन पहले AAAI ने एक सख्त मीडिया बयान जारी कर अपने अवॉर्ड चयन प्रक्रिया का बचाव किया था। संगठन ने आरोप लगाया था कि तान्या गोयल अपने पति और विज्ञापन जगत के वरिष्ठ पेशेवर संदीप गोयल के लिए यह सम्मान दिलाने की कोशिश कर रही थीं। AAAI ने यह भी कहा था कि बढ़ते विवाद के बीच उसने पूरी चयन प्रक्रिया की जांच के लिए एक स्वतंत्र पेशेवर संस्था को ऑडिट की जिम्मेदारी सौंपी है।
नोटिस में क्या कहा गया?
सूत्रों के अनुसार, कानूनी नोटिस में तान्या गोयल ने कहा है कि AAAI के प्रेस बयान में उनके खिलाफ झूठे, भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाए गए हैं। उनका आरोप है कि इन बयानों को जानबूझकर मीडिया में जारी किया गया ताकि विज्ञापन जगत में उनकी साख को नुकसान पहुंचाया जा सके।
नोटिस में कहा गया है कि AAAI ने बिना किसी ठोस सबूत के यह दिखाने की कोशिश की कि उन्होंने संदीप गोयल के पक्ष में अवॉर्ड प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया। तान्या गोयल का कहना है कि संगठन ने बिना पर्याप्त आधार के ऐसे आरोप लगाए, जिनका उद्देश्य उनकी छवि खराब करना था।
सूत्रों का कहना है कि नोटिस में यह भी आरोप लगाया गया है कि अवॉर्ड प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों से ध्यान हटाने के लिए AAAI ने एक आलोचक को निशाना बनाया।
'रोल-ओवर' नामांकन पर भी सवाल
कानूनी नोटिस में AAAI की नामांकन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं।
29 जुलाई के अपने बयान में AAAI ने कहा था कि इस वर्ष पांच नए नामांकन मिले थे। इसके अलावा पिछले साल की जूरी ने पांच अन्य नाम—एम. जी. परमेश्वरन, नकुल चोपड़ा, आशीष भसीन, तपस गुप्ता और एल. वी. कृष्णन—को इस साल भी विचार के लिए रखने की सिफारिश की थी। इस तरह जूरी के सामने कुल 10 नाम थे।
तान्या गोयल ने इस तथाकथित 'रोल-ओवर' प्रक्रिया को पारदर्शिता के विपरीत बताया है। उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या इस तरह नाम आगे बढ़ाने का प्रावधान संगठन के नियमों में है और क्या इसकी जानकारी सभी सदस्यों को दी गई थी। नोटिस में यह भी स्पष्ट करने की मांग की गई है कि किन अधिकारों के तहत इन नामों को अगले वर्ष के लिए आगे बढ़ाया गया।
ऑडिट कराने वाली संस्था का नाम क्यों नहीं बताया?
नोटिस में AAAI द्वारा चयन प्रक्रिया की जांच के लिए नियुक्त बाहरी संस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, तान्या गोयल ने पूछा है कि जब AAAI ने सार्वजनिक रूप से ऑडिट कराने की घोषणा की, तो उसने उस संस्था का नाम क्यों नहीं बताया। उनका कहना है कि संस्था का नाम सार्वजनिक न करना, उस पारदर्शिता के दावे को कमजोर करता है जिसकी बात AAAI खुद कर रहा है।
सार्वजनिक माफी की मांग
कानूनी नोटिस में AAAI से कथित मानहानिकारक बयान वापस लेने, बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगने और झूठे आरोपों के लिए स्पष्टीकरण देने की मांग की गई है।
तान्या गोयल का कहना है कि यदि संगठन को वास्तव में लॉबिंग का संदेह था, तो उसे पहले शो कॉज नोटिस जारी करना चाहिए था और बोर्ड के सदस्यों को इसकी जानकारी देनी चाहिए थी। उनका आरोप है कि AAAI ने ऐसा नहीं किया।
नोटिस में चेतावनी दी गई है कि तय समय के भीतर जवाब नहीं मिलने पर वह मानहानि सहित अन्य कानूनी कार्रवाई करेंगी।
AAAI ने क्या कहा था?
अपने मीडिया बयान में AAAI ने कहा था कि लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड की चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और प्रक्रिया आधारित थी। संगठन का दावा था कि नामांकन और जूरी की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से अपनाई गई।
AAAI ने यह भी आरोप लगाया था कि तान्या गोयल लगातार संदीप गोयल को पुरस्कार दिए जाने की मांग कर रही थीं। संगठन के अनुसार, उन्होंने पहले जूरी का हिस्सा बनने की इच्छा जताई थी, लेकिन बाद में खुद ही इससे अलग हो गईं। AAAI ने यह भी कहा था कि उनका एकमात्र उद्देश्य संदीप गोयल को सम्मान दिलाना था और पुरस्कार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर उन्होंने इसकी गरिमा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।
संगठन ने इस पूरे विवाद की तुलना चुनाव परिणामों पर होने वाले राजनीतिक विवादों से भी की थी और कहा था कि ऐसे मुद्दे इसलिए उठाए जा रहे हैं क्योंकि परिणाम कुछ लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहे।
बढ़ी गवर्नेंस पर बहस
इस कानूनी नोटिस के बाद AAAI की कार्यप्रणाली और गवर्नेंस को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है। पहले से ही विज्ञापन उद्योग के कई लोग लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड की चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता, जूरी की स्वतंत्रता और संस्थागत जवाबदेही पर सवाल उठा रहे हैं।
उधर, इस कानूनी नोटिस पर प्रतिक्रिया के लिए exchange4media ने AAAI से संपर्क किया है। खबर लिखे जाने तक संगठन की ओर से कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला था। जवाब मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।
आउटडोर विज्ञापन क्षेत्र की कंपनी Bright Outdoor Media Ltd को अपने शेयरधारकों से बड़ी मंजूरी मिल गई है। कंपनी अब BSE के SME प्लेटफॉर्म से निकलकर BSE के मेन बोर्ड पर सूचीबद्ध (लिस्ट) होगी।
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Vikas Saxena
आउटडोर विज्ञापन क्षेत्र की कंपनी Bright Outdoor Media Ltd को अपने शेयरधारकों से बड़ी मंजूरी मिल गई है। कंपनी अब BSE के SME प्लेटफॉर्म से निकलकर BSE के मेन बोर्ड पर सूचीबद्ध (लिस्ट) होगी। इसके साथ ही कंपनी के शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के मेन बोर्ड पर भी सूचीबद्ध किए जाएंगे।
कंपनी ने बताया कि यह मंजूरी पोस्टल बैलेट के जरिए कराई गई वोटिंग में मिली। रिमोट ई-वोटिंग 17 जून 2026 से 16 जुलाई 2026 तक चली और इसके नतीजे 17 जुलाई 2026 को घोषित किए गए। कंपनी का कहना है कि मेन बोर्ड पर लिस्टिंग उसके विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे उसे बड़े निवेशकों तक पहुंच बनाने और पूंजी बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी।
कंपनी ने 12 जून 2026 को शेयरधारकों के पास पोस्टल बैलेट नोटिस भेजकर दो प्रस्तावों पर मंजूरी मांगी थी। वोटिंग की पूरी प्रक्रिया Bigshare Services Pvt. Ltd. ने संचालित की, जबकि CS Nikunj Kanabar & Associates ने स्क्रूटिनाइजर के रूप में वोटों की जांच की और पुष्टि की कि पूरी प्रक्रिया सेबी के नियमों के अनुरूप हुई।
मेन बोर्ड पर लिस्टिंग को मिली 100 फीसदी मंजूरी
कंपनी के शेयरों को BSE SME प्लेटफॉर्म से BSE और NSE के मेन बोर्ड पर स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को सार्वजनिक (पब्लिक) शेयरधारकों का 100 फीसदी समर्थन मिला। इस प्रस्ताव के पक्ष में कुल 2,11,500 वोट पड़े, जबकि विरोध में एक भी वोट नहीं पड़ा।
सेबी के नियमों के अनुसार इस प्रस्ताव पर प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। आवश्यक बहुमत मिलने के बाद यह प्रस्ताव पारित हो गया।
स्वतंत्र निदेशक की नियुक्ति की भी मंजूरी
शेयरधारकों ने काजल ए. अवलानी को कंपनी का स्वतंत्र निदेशक (Independent Director) नियुक्त करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी।
इस प्रस्ताव के पक्ष में कुल 1,54,66,834 वोट पड़े और इसके विरोध में कोई वोट नहीं आया। प्रमोटर और पब्लिक, दोनों श्रेणियों के सभी वोट इस प्रस्ताव के समर्थन में रहे, जिसके चलते यह भी आवश्यक बहुमत से पारित हो गया।
स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट में पुष्टि की गई है कि दोनों प्रस्ताव नियमानुसार आवश्यक बहुमत से पारित हुए हैं।
अब कंपनी BSE और NSE के मेन बोर्ड पर लिस्टिंग से जुड़ी सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी करेगी। मेन बोर्ड पर सूचीबद्ध होने के बाद कंपनी को अधिक निवेशकों तक पहुंच, बेहतर कारोबारिक पहचान और पूंजी जुटाने के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
प्रसार भारती अब अपनी जमीन और परिसंपत्तियों से कमाई बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठा रहा है।
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Samachar4media Bureau
प्रसार भारती अब अपनी जमीन और परिसंपत्तियों से कमाई बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठा रहा है। इसी कड़ी में प्रसार भारती ने आकाशवाणी पटना और दूरदर्शन केंद्र श्री विजयापुरम (पोर्ट ब्लेयर) में डिजिटल आउटडोर विज्ञापन ढांचा विकसित करने और उसका संचालन करने के लिए निजी कंपनियों से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) आमंत्रित किए हैं।
इन दोनों परियोजनाओं के तहत चुनी गई निजी एजेंसियां अपनी लागत पर LED यूनीपोल (डिजिटल होर्डिंग) लगाएंगी, उनका संचालन और रखरखाव करेंगी। इसके बदले उन्हें विज्ञापनों से होने वाली आय का एक हिस्सा प्रसार भारती के साथ साझा करना होगा।
प्रसार भारती ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी LED डिस्प्ले पर उपलब्ध कुल विज्ञापन समय का 33 प्रतिशत हिस्सा सरकार और प्रसार भारती के जनहित अभियानों के लिए मुफ्त उपलब्ध कराना होगा।
दोनों परियोजनाओं के लिए आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 22 जुलाई तय की गई है।
आकाशवाणी पटना परियोजना के तहत बिहार के फ्रेजर रोड स्थित परिसर में LED यूनीपोल लगाए जाएंगे। यह समझौता शुरुआत में पांच साल के लिए होगा, जिसे जरूरत पड़ने पर अगले पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है। अनुबंध अवधि पूरी होने के बाद पूरे डिजिटल ढांचे का स्वामित्व प्रसार भारती को सौंप दिया जाएगा।
वहीं, पोर्ट ब्लेयर में दूरदर्शन केंद्र श्री विजयापुरम के डेलानीपुर परिसर में भी इसी मॉडल पर LED यूनीपोल लगाए जाएंगे। यहां भी निजी कंपनी विज्ञापनों के जरिए व्यावसायिक उपयोग करेगी और तय शर्तों के अनुसार राजस्व का हिस्सा प्रसार भारती को देगी।
प्रसार भारती के अनुसार, चयनित एजेंसियों को साइट सर्वे, डिजाइन तैयार करना, सभी सरकारी मंजूरियां लेना, बिजली कनेक्शन की व्यवस्था करना, LED स्क्रीन लगाना, विज्ञापनों का संचालन करना और पूरे अनुबंध के दौरान रखरखाव की जिम्मेदारी निभानी होगी।
इसके अलावा कंपनियों को प्रसार भारती की विज्ञापन नीति, स्थानीय निकायों के नियम, ट्रैफिक और हाईवे से जुड़े मानकों, सुरक्षा प्रमाणपत्रों और पर्यावरण संबंधी नियमों का भी पालन करना होगा। प्रसार भारती ने साफ किया है कि अनुबंध अवधि के दौरान यदि होर्डिंग को कोई नुकसान, चोरी या अन्य बाधा होती है तो उसकी जिम्मेदारी प्रसार भारती की नहीं होगी।
तकनीकी मानकों के अनुसार, लगाए जाने वाले LED डिस्प्ले हाई-ब्राइटनेस फुल-कलर स्क्रीन होंगे, जिनकी न्यूनतम सेवा अवधि 1 लाख घंटे होगी। इनमें रिमोट के जरिए विज्ञापन सामग्री को अपडेट और मैनेज करने की सुविधा भी होगी।
यह पहल प्रसार भारती की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह पारंपरिक प्रसारण के अलावा नए राजस्व स्रोत विकसित करना चाहता है। पिछले कुछ वर्षों में सार्वजनिक प्रसारक डिजिटल बिलबोर्ड, इंफ्रास्ट्रक्चर साझेदारी और अपनी रियल एस्टेट परिसंपत्तियों के व्यावसायिक उपयोग पर लगातार जोर दे रहा है।
माना जा रहा है कि डिजिटल आउट-ऑफ-होम (DOOH) विज्ञापन बाजार की बढ़ती मांग को देखते हुए प्रसार भारती का यह कदम भविष्य में उसकी आय बढ़ाने के साथ-साथ विज्ञापनदाताओं के लिए भी नए अवसर उपलब्ध कराएगा।
FIFA World Cup 2026 के दौरान पारंपरिक (Linear) टीवी पर विज्ञापनों की संख्या पिछले विश्व कप के मुकाबले कम रही, जबकि Connected TV (CTV) पर विज्ञापन देने वाली कंपनियों और ब्रैंड्स की संख्या बढ़ी।
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Samachar4media Bureau
FIFA World Cup 2026 के दौरान पारंपरिक (Linear) टीवी पर विज्ञापनों की संख्या पिछले विश्व कप के मुकाबले कम रही, जबकि Connected TV (CTV) पर विज्ञापन देने वाली कंपनियों और ब्रैंड्स की संख्या बढ़ी। यह जानकारी TAM Sports की नई रिपोर्ट में सामने आई है, जिसमें टूर्नामेंट के पहले 62 लाइव मैचों के दौरान दिखाए गए विज्ञापनों का विश्लेषण किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, FIFA World Cup 2022 की तुलना में इस बार Linear TV पर विज्ञापनों की संख्या 14% घट गई। TAM Sports का कहना है कि इसकी एक बड़ी वजह टूर्नामेंट का अमेरिका में आयोजित होना हो सकती है। भारत और अमेरिका के बीच करीब 10 घंटे 30 मिनट का समय अंतर है, जबकि 2022 में मेजबान कतर के साथ यह अंतर केवल करीब ढाई घंटे था। समय का बड़ा अंतर होने के कारण भारत में कई मैच ऐसे समय पर खेले गए, जब दर्शकों की संख्या अपेक्षाकृत कम रहती है, जिसका असर विज्ञापनों पर भी पड़ा।
रिपोर्ट में सात टीवी चैनलों और चार Connected TV भाषा फीड्स पर मैचों के दौरान ब्रेक में दिखाए गए विज्ञापनों का अध्ययन किया गया। इसमें प्री-मैच, हाफ-टाइम विश्लेषण, पोस्ट-मैच कार्यक्रम, प्रोमो और ट्रेलर को शामिल नहीं किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, जहां Linear TV पर विज्ञापन देने वाले सेक्टर और कंपनियां सीमित रहीं, वहीं Connected TV पर कहीं अधिक विविधता देखने को मिली।
CTV पर 10 से ज्यादा विज्ञापन श्रेणियां थीं, जबकि Linear TV पर यह संख्या 5 से कुछ अधिक रही। इसी तरह CTV पर 15 से ज्यादा विज्ञापनदाता और 18 से ज्यादा ब्रैंड्स नजर आए, जबकि Linear TV पर क्रमशः 10 से ज्यादा विज्ञापनदाता और 15 से ज्यादा ब्रैंड्स ही सक्रिय रहे।
Linear TV पर सबसे ज्यादा विज्ञापन शराब से जुड़े ब्रैंड्स के रहे, जिनकी हिस्सेदारी 40% रही। इसके बाद कार कंपनियों का हिस्सा 36% रहा। रिटेल ज्वेलर्स ने 7%, जबकि टूथपेस्ट और परफ्यूम/डियोडोरेंट ब्रैंड्स ने 5-5% हिस्सेदारी दर्ज की।
यानी केवल पांच प्रमुख श्रेणियों ने Linear TV के कुल विज्ञापनों का 93% हिस्सा अपने नाम किया। इससे साफ है कि पारंपरिक टीवी पर विज्ञापन कुछ चुनिंदा सेक्टरों तक ही सीमित रहे।
CTV पर विज्ञापनों में दिखी ज्यादा विविधता
Connected TV पर तस्वीर अलग रही। यहां कार कंपनियां सबसे आगे रहीं और उनकी हिस्सेदारी 25% रही। इसके बाद सॉफ्ट ड्रिंक्स (12%), रिटेल ज्वेलर्स (11%), शराब (5%) और लगेज (4%) का स्थान रहा।
यहां शीर्ष पांच श्रेणियों की कुल हिस्सेदारी 57% रही, जिससे पता चलता है कि CTV पर कई अलग-अलग उद्योगों ने विज्ञापन दिए।
Linear TV पर United Spirits सबसे बड़ा विज्ञापनदाता रहा, जिसकी हिस्सेदारी 40% रही। इसके बाद Mahindra & Mahindra का 31% हिस्सा रहा। Maruti Suzuki India, Kalyan Jewellers India और Vicco Laboratories भी प्रमुख विज्ञापनदाताओं में शामिल रहे।
वहीं Connected TV पर Mahindra & Mahindra पहले स्थान पर रही, जिसकी हिस्सेदारी 23% रही। इसके बाद United Spirits (17%), Kalyan Jewellers India (7%), Pernod Ricard India और Girnar Food & Beverages रहे।
Linear TV पर Black Dog Soda सबसे ज्यादा विज्ञापन देने वाला ब्रैंड रहा। इसके बाद Mahindra Thar Roxx, Mahindra XEV 9E, Johnnie Walker Luxe Blended Water और Mahindra BE 6 का स्थान रहा।
वहीं Connected TV पर Black & White Non-Alcoholic Carbonated Beverages सबसे आगे रहा। इसके बाद Mahindra Thar Roxx, Mahindra XEV 9E, Candere by Kalyan Jewellers और Mahindra BE 6 प्रमुख ब्रैंड्स रहे।
रिपोर्ट की एक खास बात यह भी रही कि Linear TV पर कोई भी ऐसा सेक्टर या विज्ञापनदाता नहीं मिला जो केवल वहीं विज्ञापन दे रहा हो। इसके उलट Connected TV पर पांच नई विज्ञापन श्रेणियां और चार ऐसे विज्ञापनदाता मिले, जिन्होंने केवल CTV पर विज्ञापन दिए।
इनमें सॉफ्ट ड्रिंक्स, लगेज, ई-लर्निंग, विटामिन और हेल्थ सप्लीमेंट्स तथा कॉर्पोरेट ब्रैंड कैंपेन जैसी श्रेणियां शामिल थीं। वहीं Pernod Ricard India, Eduauraa Technologies, Naturell India और Adidas जैसे विज्ञापनदाता केवल CTV पर सक्रिय रहे।
TAM Sports का निष्कर्ष है कि बड़े खेल आयोजनों के दौरान पारंपरिक टीवी अभी भी कुछ बड़े विज्ञापनदाताओं पर काफी हद तक निर्भर है। वहीं Connected TV तेजी से ऐसा मंच बनता जा रहा है, जहां अलग-अलग उद्योगों, कंपनियों और ब्रैंड्स को विज्ञापन देने का बेहतर मौका मिल रहा है। यही वजह है कि CTV पर विज्ञापनदाताओं और ब्रैंड्स की विविधता लगातार बढ़ रही है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कथित तौर पर मंत्रालय के अधिकारियों को Meta के प्रतिनिधियों को तलब करने के निर्देश दिए हैं।
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Samachar4media Bureau
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कथित तौर पर मंत्रालय के अधिकारियों को Meta के प्रतिनिधियों को तलब करने के निर्देश दिए हैं। यह कदम उन आरोपों के बाद उठाया गया है, जिनमें कहा गया है कि Instagram पर बाल यौन शोषण (Child Sexual Abuse Material) से जुड़े विज्ञापन दिखाए गए।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार Meta से इस मामले में विस्तृत जवाब मांगेगी। कंपनी से पूछा जाएगा कि ऐसे विज्ञापनों को उसके प्लेटफॉर्म पर कैसे मंजूरी मिली और भविष्य में इस तरह की सामग्री को रोकने के लिए उसने क्या सुरक्षा व्यवस्था की है। Meta, Facebook, Instagram और WhatsApp की मूल कंपनी है।
बताया जा रहा है कि मंत्रालय के अधिकारी Meta से यह भी जानना चाहेंगे कि कंपनी आपत्तिजनक कंटेंट की पहचान करने और उसे हटाने के लिए किन तकनीकों और प्रक्रियाओं का इस्तेमाल करती है। साथ ही कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम को और मजबूत बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
यह मामला BBC की एक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद गरमाया है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत में Instagram पर ऐसे विज्ञापन दिखाई दिए, जिनमें बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का प्रचार किया जा रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, इन विज्ञापनों में "rape video" और "child video" जैसे बेहद आपत्तिजनक कैप्शन लिखे थे। इन पर क्लिक करने के बाद यूजर्स को Telegram के ऐसे चैनलों पर भेजा जाता था, जहां कथित तौर पर अवैध सामग्री मात्र 99 रुपये में उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा था।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए Meta के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी की बाल यौन शोषण से जुड़ी किसी भी सामग्री को लेकर "जीरो टॉलरेंस" नीति है। उन्होंने कहा कि Meta उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम की मदद से इस तरह की सामग्री की पहचान कर उसे सक्रिय रूप से हटाने का काम करती है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि दुनिया भर में कुछ लोग लगातार प्लेटफॉर्म की निगरानी व्यवस्था से बचने की कोशिश करते रहते हैं, जिससे ऐसी चुनौतियां बनी रहती हैं।
फिलहाल सरकार Meta के जवाब का इंतजार कर रही है। माना जा रहा है कि इस मामले में कंपनी से जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।
भारतीय टेलीविजन इंडस्ट्री इस साल के त्योहारी सीजन से पहले बड़ी अनिश्चितता का सामना कर रही है। इसकी वजह ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) की टीवी रेटिंग्स पर लगी रोक है।
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Samachar4media Bureau
इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
भारतीय टेलीविजन इंडस्ट्री इस साल के त्योहारी सीजन से पहले बड़ी अनिश्चितता का सामना कर रही है। इसकी वजह ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) की टीवी रेटिंग्स पर लगी रोक है। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि इससे मीडिया प्लानिंग पर असर पड़ सकता है, ठीक ऐसे समय जब टीवी चैनल अपने बड़े शो लॉन्च करने की तैयारी में हैं और विज्ञापनदाता त्योहारों के लिए अपने विज्ञापन बजट को अंतिम रूप दे रहे हैं।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने BARC को निर्देश दिया है कि वह नई टेलीविजन रेटिंग एजेंसी नीति के तहत लाइसेंस रिन्यू होने तक किसी भी टीवी रेटिंग का प्रकाशन न करे। इस फैसले के बाद ब्रॉडकास्टर्स, विज्ञापनदाताओं और मीडिया एजेंसियों के पास दर्शकों की संख्या मापने का सबसे बड़ा और भरोसेमंद पैमाना फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि इस फैसले का समय बेहद संवेदनशील है। जुलाई से सितंबर का समय आमतौर पर त्योहारी सीजन की मीडिया प्लानिंग का होता है। इसी दौरान कंपनियां गणेश चतुर्थी, ओणम, नवरात्रि, दुर्गा पूजा, दशहरा, दिवाली और साल के आखिर में होने वाली खरीदारी के सीजन के लिए अपने विज्ञापन बजट तय करती हैं। दूसरी ओर, टीवी नेटवर्क भी इसी समय नए फिक्शन शो, रियलिटी शो और बड़े एंटरटेनमेंट कार्यक्रम लॉन्च करते हैं ताकि त्योहारों के दौरान ज्यादा से ज्यादा दर्शकों को आकर्षित किया जा सके।
इंडस्ट्री का मानना है कि अगर दर्शकों के आंकड़े उपलब्ध नहीं होंगे तो विज्ञापनदाता डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर ज्यादा झुक सकते हैं, क्योंकि वहां उन्हें रियल-टाइम डेटा और कैंपेन की पूरी रिपोर्ट मिलती रहती है।
एक प्रमुख मीडिया एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) ने कहा कि त्योहारी तिमाही में टीवी पर सबसे ज्यादा विज्ञापन खर्च होता है, क्योंकि इसी दौरान नए शो और बड़े एंटरटेनमेंट प्रोग्राम शुरू होते हैं। लेकिन विज्ञापनदाता यह भी चाहते हैं कि उनके निवेश का सही आकलन हो सके। अगर यह भरोसा खत्म होता है तो बजट खत्म नहीं होगा, बल्कि ऐसे प्लेटफॉर्म पर चला जाएगा जहां प्रदर्शन को मापा जा सकता है।
टीवी इंडस्ट्री के सबसे बड़े विज्ञापन सीजन पर संकट
त्योहारी सीजन टीवी चैनलों के लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी समय माना जाता है। इसी दौरान मनोरंजन, समाचार, फिल्म और क्षेत्रीय चैनलों की आय का बड़ा हिस्सा विज्ञापनों से आता है।
एफएमसीजी कंपनियां, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, ऑटोमोबाइल कंपनियां, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन ब्रांड, ज्वेलरी रिटेलर, वित्तीय सेवा कंपनियां और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म इस दौरान बड़े स्तर पर विज्ञापन अभियान चलाते हैं क्योंकि त्योहारों में उपभोक्ताओं की खरीदारी बढ़ जाती है।
इसी समय टीवी चैनल भी अपने सबसे बड़े शो लॉन्च करते हैं। आने वाले हफ्तों में कई जनरल एंटरटेनमेंट चैनल नए फिक्शन शो शुरू करने वाले हैं, जबकि हिंदी और क्षेत्रीय बाजारों में बड़े रियलिटी शो और विशेष त्योहारी कार्यक्रम भी लॉन्च किए जाएंगे।
आमतौर पर BARC की साप्ताहिक रेटिंग्स से चैनलों को तुरंत पता चल जाता है कि नया शो कैसा प्रदर्शन कर रहा है। इसी आधार पर विज्ञापन दरें तय होती हैं और कंपनियां अपने विज्ञापन बजट में बदलाव करती हैं। लेकिन मौजूदा रेटिंग्स फ्रीज के कारण यह पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो गई है।
एक बड़ी एफएमसीजी कंपनी के मार्केटिंग अधिकारी का कहना है कि हर नए शो की पहचान उसकी रेटिंग से बनती है। स्वतंत्र ऑडियंस डेटा के बिना यह साबित करना मुश्किल हो जाता है कि शो कितने लोगों तक पहुंच रहा है और उस पर ज्यादा विज्ञापन दर क्यों ली जाए।
विज्ञापनदाता चाहते हैं साफ और मापने योग्य नतीजे
यह रेटिंग्स फ्रीज ऐसे समय आया है जब कंपनियां अपने मार्केटिंग खर्च का स्पष्ट परिणाम देखना चाहती हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म विज्ञापनदाताओं को तुरंत जानकारी देते हैं कि उनके विज्ञापन कितने लोगों ने देखे, कितने क्लिक मिले, कितने लोगों ने खरीदारी की और विज्ञापन पर खर्च का कितना फायदा हुआ।
मीडिया एजेंसियों का मानना है कि अगर टीवी लंबे समय तक बिना रेटिंग्स के रहा तो डिजिटल प्लेटफॉर्म की बढ़त और मजबूत हो सकती है।
एक वैश्विक मीडिया बाइंग एजेंसी के अधिकारी ने कहा कि मार्केटिंग बजट सीमित होता है। अगर एक माध्यम अपने प्रदर्शन का डेटा नहीं दे पा रहा है और दूसरा लगातार विस्तृत रिपोर्ट दे रहा है तो कंपनियां स्वाभाविक रूप से अपना अतिरिक्त बजट उसी माध्यम में लगाएंगी।
इंडस्ट्री का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबी चली तो Meta और Google जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म, कनेक्टेड टीवी, ऑनलाइन वीडियो और रिटेल मीडिया प्लेटफॉर्म को सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है। पिछले कुछ वर्षों में भी कई कंपनियां सोशल मीडिया और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म की बढ़ती लोकप्रियता के कारण डिजिटल विज्ञापनों पर खर्च बढ़ा चुकी हैं।
ब्रॉडकास्टर्स की मोलभाव करने की ताकत होगी कमजोर
टीवी चैनलों के लिए रेटिंग्स सिर्फ साप्ताहिक रिपोर्ट कार्ड नहीं होती, बल्कि विज्ञापन दरें तय करने, स्पॉन्सरशिप, इन्वेंट्री की कीमत और लंबे समय की मीडिया प्लानिंग का आधार भी होती हैं।
नई रेटिंग्स नहीं मिलने से अब विज्ञापन दरें तय करने में पुराने आंकड़ों, चैनलों के अपने डेटा और अनुमान का सहारा लेना पड़ेगा।
एक वरिष्ठ ब्रॉडकास्टर ने कहा कि टेलीविजन हमेशा स्वतंत्र रेटिंग्स के दम पर अपनी विश्वसनीयता साबित करता रहा है। जब यही पैमाना उपलब्ध नहीं होगा तो व्यावसायिक बातचीत पहले से ज्यादा कठिन हो जाएगी।
मीडिया एजेंसियों का कहना है कि फिलहाल पुराने रेटिंग्स डेटा का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन नए शो आने के बाद पुराने आंकड़े ज्यादा उपयोगी नहीं रहेंगे।
सबसे ज्यादा परेशानी नए शो को होगी, क्योंकि उनके पास दर्शकों की संख्या साबित करने के लिए कोई ताजा डेटा ही नहीं होगा। एक एजेंसी अधिकारी ने कहा कि नए शो के लिए रेटिंग्स सबसे ज्यादा जरूरी होती हैं, क्योंकि विज्ञापनदाता बड़ा बजट लगाने से पहले उसके प्रदर्शन का प्रमाण चाहते हैं।
मीडिया प्लानिंग भी होगी प्रभावित
कई बड़ी कंपनियां हर सप्ताह रेटिंग्स के आधार पर अपने विज्ञापन अलग-अलग चैनलों और कार्यक्रमों में शिफ्ट करती हैं। लेकिन नए डेटा के बिना ऐसा करना मुश्किल हो जाएगा।
मीडिया प्लानर्स का कहना है कि जब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, कई विज्ञापनदाता टीवी पर नए विज्ञापन अभियान शुरू करने में सावधानी बरत सकते हैं।
एक मीडिया निवेश विशेषज्ञ ने कहा कि अगर अनिश्चितता लंबे समय तक बनी रही तो कई ब्रांड अपना अतिरिक्त और लचीला बजट डिजिटल प्लेटफॉर्म पर खर्च करना शुरू कर सकते हैं, जहां विज्ञापन अभियान को लगातार बेहतर बनाया जा सकता है।
पूरे टीवी इकोसिस्टम पर पड़ेगा असर
इसका असर सिर्फ टीवी चैनलों तक सीमित नहीं रहेगा। नए शो बनाने वाले प्रोडक्शन हाउस रेटिंग्स के आधार पर अपने कार्यक्रम की सफलता साबित करते हैं और अगला सीजन हासिल करते हैं। डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियां चैनलों की प्लेसमेंट तय करने में रेटिंग्स का इस्तेमाल करती हैं। विज्ञापन एजेंसियां अपने अभियान की सफलता मापती हैं और कंपनियां निवेश पर मिलने वाले रिटर्न का आकलन करती हैं।
इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो ऐसे समय में टीवी की प्रतिस्पर्धी स्थिति कमजोर हो सकती है, जब दर्शकों का एक बड़ा वर्ग पहले ही डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रहा है।
हालांकि भारत में लाइव इवेंट, मनोरंजन और क्षेत्रीय कंटेंट के मामले में टीवी की पहुंच अब भी सबसे ज्यादा है, लेकिन बेहतर टारगेटिंग और विस्तृत डेटा के कारण डिजिटल प्लेटफॉर्म लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।
एक वरिष्ठ ब्रॉडकास्ट अधिकारी ने कहा कि टीवी इंडस्ट्री ने वर्षों तक भरोसेमंद रेटिंग्स के दम पर अपनी ताकत साबित की है। अगर देश के सबसे बड़े विज्ञापन सीजन में यही रेटिंग्स उपलब्ध नहीं होंगी तो प्रतिस्पर्धी माध्यमों को स्वाभाविक रूप से फायदा मिलेगा।
त्योहारी सीजन बनेगा पहली बड़ी परीक्षा
आने वाले कुछ हफ्तों में त्योहारी विज्ञापन अभियान तेज होने वाले हैं। ऐसे में टीवी चैनलों को उम्मीद है कि रेटिंग्स पर लगी रोक जल्द हट जाएगी। क्योंकि हर गुजरता सप्ताह विज्ञापन खरीद, मीडिया प्लानिंग और नए कार्यक्रमों की रणनीति को और अधिक अनिश्चित बना रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि टीवी रातोंरात अपना महत्व नहीं खोएगा, लेकिन फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर पूरे इंडस्ट्री के पास दर्शकों को मापने का साझा और भरोसेमंद पैमाना नहीं होगा तो त्योहारी सीजन के अतिरिक्त विज्ञापन बजट का बड़ा हिस्सा डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर जा सकता है।
यही वजह है कि इस समय टीवी इंडस्ट्री के लिए BARC रेटिंग्स की वापसी सिर्फ साप्ताहिक रैंकिंग का मामला नहीं रह गई है, बल्कि यह देश के सबसे बड़े त्योहारी विज्ञापन बाजार में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने का भी अहम सवाल बन चुकी है।
डिजिटल मीडिया और विज्ञापन क्षेत्र की कंपनी Adcounty Media India Limited के शेयरधारकों ने पोस्टल बैलेट के जरिए रखे गए दोनों विशेष प्रस्तावों (Special Resolutions) को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है।
by
Vikas Saxena
डिजिटल मीडिया और विज्ञापन क्षेत्र की कंपनी Adcounty Media India Limited के शेयरधारकों ने पोस्टल बैलेट के जरिए रखे गए दोनों विशेष प्रस्तावों (Special Resolutions) को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है। कंपनी ने 26 जून 2026 को शेयर बाजार को इसकी जानकारी दी।
कंपनी के अनुसार, पहला प्रस्ताव प्रतीक भंसाली को कंपनी का स्वतंत्र निदेशक (Independent Director) नियुक्त करने से जुड़ा था। शेयरधारकों ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब प्रतीक भंसाली अगले 5 वर्षों के लिए कंपनी के स्वतंत्र निदेशक के रूप में कार्य करेंगे।
वहीं, दूसरा प्रस्ताव कुमार सौरव को कंपनी का पूर्णकालिक निदेशक (Whole-time Director) नियुक्त करने, उन्हें Executive Director का पद देने और उनके पारिश्रमिक (Remuneration) को मंजूरी देने से संबंधित था। इस प्रस्ताव को भी शेयरधारकों ने आवश्यक बहुमत के साथ मंजूरी दे दी।
कंपनी ने बताया कि दोनों प्रस्तावों पर मतदान रिमोट ई-वोटिंग के जरिए पोस्टल बैलेट के माध्यम से कराया गया। मतदान में दोनों प्रस्तावों को लगभग सर्वसम्मति से समर्थन मिला।
प्रतीक भंसाली की नियुक्ति वाले प्रस्ताव के पक्ष में 99.99% से अधिक वोट पड़े, जबकि विरोध में केवल 800 वोट दर्ज हुए।
इसी तरह कुमार सौरव की नियुक्ति और पारिश्रमिक से जुड़े प्रस्ताव को भी 99.99% से अधिक वोटों का समर्थन मिला। इस प्रस्ताव पर भी केवल 800 वोट विरोध में पड़े।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि दूसरे प्रस्ताव पर मतदान के दौरान कुमार सौरव, जो स्वयं इस प्रस्ताव से संबंधित थे, उनके द्वारा डाले गए 6,40,400 इक्विटी शेयरों के वोट को मतदान परिणाम में शामिल नहीं किया गया। यह कदम कॉर्पोरेट गवर्नेंस के नियमों और हितों के टकराव (Conflict of Interest) से जुड़े प्रावधानों का पालन करते हुए उठाया गया।
Adcounty Media ने बताया कि पोस्टल बैलेट की वोटिंग का परिणाम और स्क्रूटिनाइज़र की रिपोर्ट कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध करा दी गई है।
इन दोनों प्रस्तावों के पारित होने के बाद कंपनी के निदेशक मंडल (Board of Directors) को मजबूती मिलने की उम्मीद है। एक ओर स्वतंत्र निदेशक के रूप में प्रतीक भंसाली बोर्ड में शामिल होंगे, वहीं कुमार सौरव कार्यकारी निदेशक के रूप में कंपनी के संचालन और रणनीतिक फैसलों में अहम भूमिका निभाएंगे।