क्या बदल रहा है भारत का ऐड मार्केट, किंग कौन- टीवी या मोबाइल?

एक समय था जब ब्रैंड्स के लिए टीवी पर 30 सेकंड का ऐड सबसे कीमती माना जाता था। लेकिन अब तस्वीर बदल गई है।

Vikas Saxena by
Published - Tuesday, 05 May, 2026
Last Modified:
Tuesday, 05 May, 2026
AD8956


एक समय था जब ब्रैंड्स के लिए टीवी पर 30 सेकंड का ऐड सबसे कीमती माना जाता था। लेकिन अब तस्वीर बदल गई है। आज वही पैसा (कई बार उससे भी ज्यादा) Instagram Reel जैसे प्लेटफॉर्म पर सिर्फ 15 सेकंड के वीडियो पर खर्च हो रहा है। भारत का ऐडवर्टाइजिंग मार्केट अब ऐसे दौर में पहुंच चुका है, जहां “मोबाइल-फर्स्ट इंडिया” सीधे “मोबाइल-फर्स्ट ऐडवर्टाइजिंग” बन गया है। साफ शब्दों में कहें तो अब ज्यादातर ऐड मोबाइल स्क्रीन को ध्यान में रखकर बनाए जा रहे हैं।

आंकड़े भी यही बताते हैं कि भारत में डिजिटल ऐड पर होने वाले कुल खर्च का करीब 78% हिस्सा अब सिर्फ मोबाइल पर ही खर्च हो रहा है। यानी जो टीवी कभी “सबसे बड़ी स्क्रीन” और ऐड का सबसे ताकतवर जरिया माना जाता था, उसकी पकड़ अब कमजोर पड़ रही है। और यह बदलाव इतना तेजी से आया है कि पूरी इंडस्ट्री अभी भी इसे समझने और अपनाने में लगी हुई है।

₹49,000 करोड़ का डिजिटल साम्राज्य और उसका राजा है मोबाइल

ET Brand Equity और Ipsos की रिपोर्ट "The State of Digital Advertising in India 2025-26" (सितंबर 2025) के अनुसार, भारत का कुल ऐड खर्च FY2025 (अप्रैल 2024 – मार्च 2025) में ₹1,11,000 करोड़ पहुंच गया- यह पिछले साल की तुलना में 11% की वृद्धि है।

इसमें सबसे बड़ा हिस्सा डिजिटल ऐड का है- ₹49,000 करोड़, यानी कुल बाजार का 44%। पहली बार डिजिटल ने टेलीविजन को पीछे छोड़ दिया है। टेलीविजन का हिस्सा 27%, प्रिंट का 18%, OTT का 5%, OOH (आउटडोर) का 3%, रेडियो का 2% और सिनेमा का 1% रह गया है। FY2026 में यह डिजिटल खर्च और 15% बढ़कर ₹56,400 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जो कुल बाजार का 46% होगा। और इस पूरे डिजिटल साम्राज्य का राजा है- मोबाइल। उसी Ipsos रिपोर्ट के अनुसार, 78% डिजिटल ऐड खर्च मोबाइल प्लेटफॉर्म पर होता है। स्मार्टफोन अब "commerce, content और engagement" तीनों के लिए primary screen बन चुका है।

Sensor Tower की "State of Digital Advertising India 2026" रिपोर्ट (फरवरी 2026) के अनुसार, 2025 में भारत का कुल डिजिटल ऐड खर्च US$4.2 बिलियन रहा और 2026 में इसके US$5 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। ResearchAndMarkets (फरवरी 2026) के अनुसार, सभी digital channels- Search, Social, Display, Video, OTT, Retail Media- मिलाकर 2026 में भारत का Digital Ad Spend Market US$14.56 बिलियन तक पहुंच सकता है।

अरब इंटरनेट यूजर्स- और ज्यादातर मोबाइल पर

DataReportal की "Digital 2026: India" रिपोर्ट (नवंबर 2025) के अनुसार, 2025 के अंत तक भारत में 103 करोड़ (1.03 बिलियन) इंटरनेट यूजर्स थे- internet penetration 70% पर पहुंच गई। इसके साथ ही 106 करोड़ cellular mobile connections सक्रिय थे, जो देश की कुल आबादी का 72.5% है।

ET Brand Equity–Ipsos रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत में 5.6 करोड़ नए इंटरनेट यूजर्स जुड़े। 2026 में Connected TV (CTV) यूजर्स 40 मिलियन से बढ़कर 50 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। 5G की बात करें तो जनवरी 2026 में भारत में 40 करोड़ 5G users थे- 2025 के 36.5 करोड़ से 9.59% की वृद्धि।

यह सारे आंकड़े एक बात साफ करते हैं: भारत अब दुनिया के सबसे बड़े मोबाइल इंटरनेट बाजारों में से एक है और इसी वजह से ब्रैंड्स के लिए मोबाइल स्क्रीन सबसे जरूरी ऐड माध्यम बन गई है।

OTT, Reels और Shorts- ब्रैंड्स की नई दुनिया

अब OTT प्लेटफॉर्म्स (जैसे Netflix, JioCinema, Hotstar आदि) पर ऐड करना कोई नया प्रयोग नहीं रहा, बल्कि मीडिया प्लानिंग का जरूरी हिस्सा बन गया है। Ipsos की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 वह साल था जब OTT को “ऑप्शन” नहीं, बल्कि “कोर” यानी जरूरी प्लेटफॉर्म माना जाने लगा। पहली बार 2025 में OTT ऐड को कुल एड खर्च में एक अलग और अहम कैटेगरी के तौर पर देखा गया। इसी साल भारत में OTT यूजर्स की संख्या बढ़कर करीब 60 करोड़ से ज्यादा हो गई, जिससे ब्रैंड्स के लिए यह प्लेटफॉर्म और भी अहम बन गया।

Connected TV (CTV) यानी इंटरनेट से जुड़े स्मार्ट टीवी पर भी तेजी से ग्रोथ दिख रही है। Deloitte और PwC की रिपोर्ट के अनुसार, CTV ऐड खर्च 2022 में करीब ₹450 करोड़ था, जो 2024 तक बढ़कर ₹1,500 करोड़ हो गया यानी तीन गुना से ज्यादा।

Madison World की रिपोर्ट कहती है कि 2025 के अंत तक यह खर्च ₹2,300-2,500 करोड़ तक पहुंच सकता है, और 2027 तक ₹3,500 करोड़ तक जाने की उम्मीद है। वहीं WPP Media के अनुमान के मुताबिक, भारत का कुल ऐडवर्टाइजिंग मार्केट 2026 में ₹2 लाख करोड़ के आसपास पहुंच सकता है।

अब OTT सिर्फ कंटेंट देखने का प्लेटफॉर्म नहीं रहा, बल्कि ब्रैंड्स के लिए बड़ा एड प्लेटफॉर्म बन चुका है। JioCinema और JioStar जैसे प्लेटफॉर्म IPL जैसे बड़े इवेंट्स में ब्रैंड्स को ऐसे एड ऑप्शन दे रहे हैं, जहां वे दर्शकों तक हर स्तर पर पहुंच सकते हैं।

खास बात यह है कि अब ऐसे ऐड ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं जिन्हें स्किप नहीं किया जा सकता और जिन पर दर्शकों का पूरा ध्यान जाता है। यानी साफ है—OTT अब एडवर्टाइजिंग की दुनिया का एक बड़ा और मजबूत खिलाड़ी बन चुका है।

Reels और Shorts- "15 सेकंड में बिकती दुनिया"

Short Video का जलवा: ऐड की दुनिया का नया सुपरस्टार

आज के समय में भारत में सबसे तेजी से बढ़ने वाला ऐड फॉर्मेट शॉर्ट वीडियो बन चुका है। यानी छोटे-छोटे वीडियो (15–60 सेकंड) अब ब्रैंड्स के लिए सबसे बड़ा हथियार बन रहे हैं। YouTube के Shorts ने जून 2025 में एक बड़ा रिकॉर्ड बनाया। कंपनी के सीईओ नील मोहन ने बताया कि Shorts पर रोजाना 200 अरब (200 बिलियन) व्यूज आ रहे हैं। यह 2024 के 70 अरब व्यूज के मुकाबले लगभग 3 गुना ज्यादा है।

वहीं Instagram Reels भी पीछे नहीं है। मार्क जुकरबर्ग के अनुसार, 2025 तक Instagram पर लोग जितना समय बिताते हैं, उसमें से करीब 50% समय सिर्फ Reels देखने में जा रहा है। Reels की पहुंच भी बहुत बड़ी हो चुकी है। दुनियाभर में करीब 72 करोड़ लोग इसे देखते हैं, जो Instagram के कुल ऐड दर्शकों का आधे से ज्यादा हिस्सा है।

भारत में खास बात यह है कि छोटे शहरों (Tier-2 और Tier-3) में Reels की लोकप्रियता मेट्रो शहरों से भी ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। यही वजह है कि Zomato, Swiggy और Myntra जैसे बड़े ब्रैंड्स अब अपने ऐड बजट का बड़ा हिस्सा Reels और शॉर्ट वीडियो कैंपेन पर खर्च कर रहे हैं।

साफ है, आज के दौर में अगर ब्रैंड्स को लोगों तक जल्दी और असरदार तरीके से पहुंचना है, तो शॉर्ट वीडियो ही सबसे बड़ा जरिया बन चुका है।

इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग- ₹3,375 करोड़ की नई अर्थव्यवस्था

इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग अब एक "एक्सपेरिमेंट" नहीं बल्कि मेनस्ट्रीम ऐडवर्टाइजिंग स्ट्रेटजी है। इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 में भारत का इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग बाजार ₹3,000 से ₹3,500 करोड़ के बीच था और 2026 में यह ₹3,375 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है- यानी 25% CAGR से वृद्धि।

Kofluence की इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग Research Report 2025 के अनुसार, Instagram इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग के लिए सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म बना हुआ है- 50% से अधिक brand allocations यहाँ जाते हैं। Micro-influencers (10,000 से 1 लाख followers) Tier-2 और Tier-3 शहरों में hyperlocal campaigns के जरिए brands को ज्यादा ROI दे रहे हैं। FMCG, E-commerce, Beauty, Finance और Food सेक्टर इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग में सबसे बड़े निवेशक हैं।

Sensor Tower की 2026 रिपोर्ट के अनुसार, Shopping category ने 2025 में भारत के डिजिटल ऐड खर्च का 28-30% हिस्सा घेरा, जिसमें Flipkart, Reliance Retail और Amazon के बीच सबसे कड़ा मुकाबला रहा। Flipkart की Big Billion Day 2025 campaign में लगभग 80% audience युवा users थे।

टेलीविजन की घटती ताकत: लाइसेंस वापस, ऐड गायब

टीवी पर घट रहा असर: ऐड और दर्शक दोनों कम हुए

जहां एक तरफ डिजिटल और मोबाइल तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं टीवी की हालत कुछ ठीक नहीं दिख रही। WPP की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत का कुल TV ऐड रेवेन्यू करीब 1.5% गिरकर ₹47,740 करोड़ रह गया।

TAM Media Research के आंकड़े बताते हैं कि 2025 में TV पर दिखने वाले ऐडों की संख्या (ad volumes) में पिछले साल के मुकाबले 11% की गिरावट आई। इसकी बड़ी वजह रही- रियल मनी गेमिंग गेम पर बैन, FMCG कंपनियों का कम खर्च और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की तेज बढ़त।

FICCI और Ernst & Young (FICCI-EY रिपोर्ट) के अनुसार, 2024 में भी टीवी सेक्टर की कमाई 4.5% घट गई थी। यह लगातार दूसरा साल था जब गिरावट देखी गई (2023 में 2% गिरावट आई थी)। इतना ही नहीं, 2024 में TV पर ऐड से होने वाली कमाई 6% कम हो गई और ऐड देने वाले ब्रैंड्स की संख्या भी 12% घट गई। दर्शकों की संख्या में भी गिरावट आई है। FY25 में एक्टिव DTH यूजर्स करीब 5.69 करोड़ रह गए, जो FY24 के 6.19 करोड़ से कम हैं।

Dentsu का अनुमान है कि आने वाले समय में TV का कुल ऐड खर्च में हिस्सा और घट सकता है- 2027 तक यह 21% से गिरकर करीब 15% तक आ सकता है। इस गिरावट का असर साफ दिख रहा है। पिछले तीन सालों में 50 से ज्यादा TV चैनलों के लाइसेंस वापस किए जा चुके हैं। इसमें Zee Entertainment, TV Today Network, NDTV और ABP Network जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं।

साफ है कि टीवी जो कभी ऐड की दुनिया का सबसे बड़ा मंच था, अब डिजिटल के सामने अपनी पकड़ खोता जा रहा है।

प्रोग्रामैटिक, रिटेल मीडिया और AI- अगली पीढ़ी का ऐडवर्टाइजिंग

अब मोबाइल पर दिखने वाले ऐड पहले जैसे नहीं रहे। अब यह पूरी तरह से ऑटोमेटेड (अपने आप चलने वाले) और डेटा के आधार पर तय होने लगे हैं। 

Ipsos की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में डिजिटल ऐड का 40% से ज्यादा हिस्सा अब प्रोग्रामैटिक ट्रेडिंग के जरिए हो रहा है। यानी कंप्यूटर और AI खुद तय करते हैं कि कौन-सा ऐड किसे और कब दिखाना है।

Retail media भी तेजी से बढ़ रहा है। Amazon Ads, Flipkart Ads, JioMart, Blinkit और Zepto जैसे प्लेटफॉर्म पर ऐड में साल-दर-साल 20% से ज्यादा की बढ़त देखी गई है। यह ग्रोथ सर्च और सोशल मीडिया ऐड से भी तेज है। FMCG और E-commerce कंपनियां मिलकर digital advertising का करीब 68% खर्च कर रही हैं, यानी सबसे ज्यादा पैसा यही सेक्टर लगा रहे हैं।

Sensor Tower की 2026 रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में सॉफ्टवेयर कैटेगरी में ऐड खर्च सबसे तेजी से बढ़ा- इसमें 84% की जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की गई। इसके बाद Food & Dining में 38% और Travel & Tourism में 40% की बढ़त रही।

अब AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) भी ऐड का बड़ा हिस्सा बन चुका है। Ad buying (ऐड खरीदना), टार्गेटिंग (किसे दिखाना है) और creative बनाना- इन सबमें AI का इस्तेमाल आम हो गया है।

AI की मदद से ब्रैंड्स अब छोटे शहरों (Tier-2 और Tier-3) के लोगों के लिए उनकी भाषा में, उनकी पसंद के हिसाब से पर्सनलाइज्ड ऐड बना रहे हैं। यानी हर यूजर को अलग-अलग और ज्यादा जुड़ा हुआ कंटेंट दिख रहा है। आने वाले समय में, खासकर 2026 में, यह ट्रेंड और तेज होने वाला है। साफ है—मोबाइल एडवर्टाइजिंग अब सिर्फ बड़ी नहीं, बल्कि ज्यादा स्मार्ट भी हो चुकी है।

टीवी बनाम मोबाइल: नंबरों में पूरी कहानी

पैमाना

टेलीविजन (2025)

मोबाइल/डिजिटल (2025-26)

कुल Ad Spend में हिस्सा

27% (₹47,740 Cr, घटता हुआ)

44% (₹49,000 Cr, बढ़ता हुआ)

Ad Volume growth (2025)

-11% (TAM data)

+20% (digital, Ipsos)

Brands की संख्या

-12% (2024 vs 2023)

लगातार नए advertiser जुड़ रहे

CTV ad revenue

₹1,500 Cr (2024)

₹2,300-2,500 Cr (2025 est.)

2027 तक projected share

15% (Dentsu)

46%+ (Ipsos)

जमीनी हकीकत: Tier-2 भारत बदल रहा है खेल

अब मोबाइल ऐड का असली विस्तार बड़े शहरों में नहीं, बल्कि छोटे शहरों (Tier-2 और Tier-3) में हो रहा है। Ipsos की रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले 20-30 करोड़ नए इंटरनेट यूजर्स अपनी स्थानीय भाषा (vernacular) में कंटेंट देखना पसंद करेंगे। यही वजह है कि ShareChat (और Moj), Dailyhunt (Josh) और InMobi जैसे भारतीय प्लेटफॉर्म तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ये प्लेटफॉर्म regional कंटेंट और अलग-अलग ऑडियंस को टारगेट करने की रणनीति के जरिए Google और Meta Platforms जैसी बड़ी कंपनियों को चुनौती दे रहे हैं।

वहीं दूसरी तरफ, Accenture की रिपोर्ट बताती है कि 77% भारतीय यूजर्स इतने सारे OTT प्लेटफॉर्म देखकर कन्फ्यूज हो जाते हैं। इसी वजह से अब लोग ऐसे प्लान पसंद कर रहे हैं, जिनमें कई OTT एक साथ मिल जाएं। जैसे Airtel का Xstream और Jio का JioFiber, इनमें एक ही पैक में कई OTT प्लेटफॉर्म मिल जाते हैं (Airtel में 25+ और Jio में 16 तक)।

CTV (Connected TV) यानी इंटरनेट वाले स्मार्ट टीवी का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है। MiQ की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 तक भारत में CTV यूजर्स की संख्या 87% बढ़कर करीब 13 करोड़ तक पहुंच गई है। यानी अब 6-7 करोड़ घरों में CTV इस्तेमाल हो रहा है। इसके अलावा, छोटे शहरों में Reels और शॉर्ट वीडियो का क्रेज और भी ज्यादा है। खासकर Diwali, Eid, Onam और Pongal जैसे त्योहारों के दौरान ये वीडियो तेजी से वायरल होते हैं।

यही वजह है कि अब ब्रैंड्स के लिए ये शॉर्ट वीडियो सिर्फ सोशल मीडिया कंटेंट नहीं, बल्कि पूरे देश में चलने वाले बड़े ऐड कैंपेन का मजबूत विकल्प बन चुके हैं।

'स्क्रीन' की लड़ाई खत्म हो चुकी है

अगर यह पूछा जाए कि "स्क्रीन की लड़ाई" खत्म हुई या नहीं- तो जवाब है: हां, खत्म हो चुकी है। और जीता है मोबाइल। 78% डिजिटल ad spend, 103 करोड़ internet users, 601 मिलियन OTT दर्शक, 200 billion YouTube Shorts daily views (जून 2025), Reels पर 50% Instagram screen time, ₹3,375 करोड़ का influencer economy, और 50 से अधिक TV channels का बंद होना- यह सब मिलकर एक ही कहानी कह रहे हैं। टेलीविजन अभी मरा नहीं है, लेकिन वह अब "King Screen" नहीं रहा। मोबाइल ने वह ताज छीन लिया है।

FY2026 में डिजिटल ऐड के ₹56,400 करोड़ तक पहुंचने और टोटल ऐड मार्केटिंग के ₹2 लाख करोड़ को छूने के अनुमानों के साथ, यह साफ है कि भारत की ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री का भविष्य मोबाइल स्क्रीन पर लिखा जा रहा है- Reels में, Shorts में, OTT ads में, और influencer की आवाज में।

 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

BCCI ने मुथूट फिनकॉर्प को बनाया टाइटल स्पॉन्सर

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी मुथूट फिनकॉर्प को मार्च 2028 तक होने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए टाइटल स्पॉन्सर बनाया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 26 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 26 September, 2026
BCCI84

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी मुथूट फिनकॉर्प को मार्च 2028 तक होने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए टाइटल स्पॉन्सर बनाया है। इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह डील 150 करोड़ रुपये तक की है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि कि मुथूट फिनकॉर्प हर मैच के लिए अधिकतम 4.3 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा। वहीं, मौजूदा साइकल के 35 मैचों के लिए बीसीसीआई ने 4.85 करोड़ रुपये प्रति मैच की कीमत तय की थी।

पिछले टाइटल स्पॉन्सर आईडीएफसी फर्स्ट ने पिछली साइकल में प्रति मैच 4.2 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। इस साइकल में 56 मैच शामिल थे और यह अगस्त में खत्म हुई। आईडीएफसी फर्स्ट ने 2023 में तीन साल के लिए 235.2 करोड़ रुपये की डील के तहत ये अधिकार हासिल किए थे।

बीसीसीआई ने टाइटल स्पॉन्सरशिप अधिकारों की बिक्री के लिए पहली बार 20 जुलाई को टेंडर जारी किया था। इसमें बोली जमा करने की आखिरी तारीख 13 अगस्त थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 7 सितंबर कर दिया गया था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि टेंडर प्रक्रिया के जरिए पार्टनर नहीं मिलने के बाद बीसीसीआई ने मुथूट फिनकॉर्प के साथ सीधे डील की है।

एक स्पोर्ट्स मार्केटिंग अधिकारी के जरिए रिपोर्ट में बताया गया है कि नई डील आईडीएफसी फर्स्ट की ओर से दिए गए 4.2 करोड़ रुपये प्रति मैच से ज्यादा है, लेकिन बीसीसीआई की ओर से तय 4.85 करोड़ रुपये के बेस प्राइस से कम है।

अधिकारी ने कहा कि यह डील दिखाती है कि क्रिकेट स्पॉन्सरशिप मार्केट अब भी मजबूत बना हुआ है। हालांकि, यह बीसीसीआई के लिए एक तरह का रियलिटी चेक भी है, क्योंकि बोर्ड अपनी तय उम्मीद तक पहुंचने में सफल नहीं रहा।

यह नई डील ऐसे समय हुई है जब बीसीसीआई ने टीम इंडिया से जुड़े द्विपक्षीय क्रिकेट मैचों के लिए कैंपा, एसबीआई लाइफ और चैटजीपीटी को एसोसिएट पार्टनर बनाया है। इन तीनों नई स्पॉन्सरशिप डील की कुल कीमत 130 करोड़ रुपये से ज्यादा है, जो पिछली साइकल के मुकाबले 44 प्रतिशत ज्यादा है।

मामले से जुड़े लोगों ने पहले इकनॉमिक टाइम्स को बताया था कि कैंपा कोला 1.31 करोड़ रुपये प्रति मैच की बोली के साथ सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी रही। इसके बाद चैटजीपीटी और एसबीआई लाइफ ने 1.2 करोड़ रुपये प्रति मैच की बोली लगाई। बिसलेरी और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने भी 1.2 करोड़ रुपये प्रति मैच की बोली लगाई थी और वे एसोसिएट पार्टनरशिप के लिए दौड़ में थे।

बीसीसीआई ने एसोसिएट पार्टनर अधिकारों के लिए रिजर्व प्राइस भी बढ़ाकर 95 लाख रुपये प्रति मैच कर दिया था। पहले यह 82 लाख रुपये प्रति मैच था।

डब्ल्यूपीपी मीडिया की ‘स्पोर्टिंग नेशन’ रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2025 में स्पोर्ट्स स्पॉन्सरशिप पर 7,942 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो सालाना आधार पर 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। इस दौरान स्पॉन्सरशिप मार्केट में क्रिकेट की हिस्सेदारी भी एक साल पहले के 85 प्रतिशत से बढ़कर 89 प्रतिशत हो गई।

फिनटेक और फैंटेसी स्पोर्ट्स जैसी कई नई कैटेगरी के बाहर होने के बावजूद क्रिकेट स्पॉन्सरशिप मार्केट में बड़े ब्रैंड्स की दिलचस्पी बनी हुई है। बीसीसीआई की कुछ बड़ी डील में अपोलो टायर्स के साथ फ्रंट-ऑफ-जर्सी स्पॉन्सरशिप डील भी शामिल है, जिसकी कीमत 579 करोड़ रुपये है। इसके अलावा एशियन पेंट्स के साथ 145 करोड़ रुपये की डील भी है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

क्रेयॉन्स ऐडवर्टाइजिंग ने अमित बांका को बनाया नया CFO

क्रेयॉन्स ऐडवर्टाइजिंग लिमिटेड ने अमित बांका को कंपनी का नया चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) नियुक्त किया है।

Vikas Saxena by
Published - Friday, 25 September, 2026
Last Modified:
Friday, 25 September, 2026
Crayons874

क्रेयॉन्स ऐडवर्टाइजिंग लिमिटेड ने अमित बांका को कंपनी का नया चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) नियुक्त किया है। कंपनी ने 23 सितंबर 2026 को स्टॉक एक्सचेंज को इसकी जानकारी दी।

कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की 23 सितंबर को हुई बैठक में अमित बांका की CFO और Key Managerial Personnel (KMP) के तौर पर नियुक्ति को मंजूरी दी गई। उनकी नियुक्ति 23 सितंबर 2026 से प्रभावी हो गई है।

कंपनी ने बताया कि उनकी नियुक्ति कंपनी के रोजगार से जुड़े नियमों और शर्तों के आधार पर की गई है।

अमित बांका को फाइनेंस के क्षेत्र में 24 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने वित्तीय रणनीति, ऑपरेशनल कामकाज और संगठन के विकास से जुड़े क्षेत्रों में काम किया है। उन्हें फाइनेंशियल प्लानिंग एंड एनालिसिस, कॉरपोरेट रिस्ट्रक्चरिंग, ट्रेजरी मैनेजमेंट, कंप्लायंस और टीम लीडरशिप का भी अनुभव है।

कंपनी ने यह भी बताया कि अमित बांका की नियुक्ति का कंपनी के किसी डायरेक्टर से कोई संबंध नहीं है। 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

Maxposure के शेयर भाव में हलचल पर NSE को जवाब, कंपनी बोली- कोई अप्रकाशित जानकारी नहीं

मैक्सपोजर लिमिटेड (Maxposure Limited) ने अपने शेयरों की कीमत में हाल में हुई महत्वपूर्ण हलचल को लेकर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को स्पष्टीकरण दिया है।

Vikas Saxena by
Published - Monday, 21 September, 2026
Last Modified:
Monday, 21 September, 2026
Maxposure543

मैक्सपोजर लिमिटेड (Maxposure Limited) ने अपने शेयरों की कीमत में हाल में हुई महत्वपूर्ण हलचल को लेकर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को स्पष्टीकरण दिया है। कंपनी ने कहा है कि उसके पास ऐसी कोई जानकारी, घटना, घटनाक्रम या आने वाली घोषणा नहीं है, जिसे SEBI Listing Regulations, 2015 के तहत शेयर बाजार को बताना जरूरी हो और जिसका असर कंपनी के शेयर की कीमत या कारोबार की मात्रा पर पड़ सकता हो।

बता दें कि मैक्सपोजर लिमिटेड नई पीढ़ी के मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की एक प्रमुख कंपनी है, जिसका खास फोकस एविएशन मार्केट पर है।

कंपनी ने यह स्पष्टीकरण 18 सितंबर 2026 को NSE के सर्विलांस डिपार्टमेंट को भेजा। यह जवाब NSE की 17 सितंबर 2026 की उस चिट्ठी के संदर्भ में दिया गया है, जिसमें कंपनी के शेयरों की कीमत में महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया था।

कंपनी ने कहा कि उसने SEBI (Listing Obligations and Disclosure Requirements) Regulations, 2015 के तहत लागू सभी जरूरी खुलासा नियमों का पालन किया है। कंपनी के मुताबिक, 3 सितंबर 2026 को हुई बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक के नतीजे और उससे जुड़े जरूरी खुलासे उसी दिन NSE को भेज दिए गए थे।

मैक्सपोजर ने यह भी कहा कि फिलहाल कंपनी से जुड़ी ऐसी कोई अन्य महत्वपूर्ण जानकारी या प्राइज-सेन्सिटिव इनफॉर्मेशन, घटना या घटनाक्रम लंबित नहीं है, जिसे SEBI LODR Regulations के Regulation 30 के तहत स्टॉक एक्सचेंज को बताना बाकी हो।

कंपनी ने साफ किया कि उसके पास ऐसी कोई अप्रकाशित जानकारी या घोषणा नहीं है, जिसका हाल में कंपनी के शेयरों की कीमत या कारोबार की मात्रा में हुई हलचल से कोई संबंध हो सकता है।

कंपनी के मुताबिक, शेयर की कीमत और कारोबार की मात्रा में यह बदलाव बाजार की स्थितियों और बाजार में मौजूद दूसरे कारणों की वजह से हो सकता है। इन कारणों पर कंपनी का नियंत्रण नहीं है। मैक्सपोजर ने कहा कि वह आगे भी लागू नियमों के तहत सभी जरूरी खुलासे करती रहेगी और ऐसी किसी भी महत्वपूर्ण घटना या जानकारी के बारे में स्टॉक एक्सचेंज को उचित समय पर जानकारी देती रहेगी।

 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

ISA जल्द ला सकता है क्रॉस-मीडिया मीजरमेंट सिस्टम

ISA का सिस्टम WFA के Halo फ्रेमवर्क और ब्रिटेन के ‘Origin’ मॉडल पर आधारित होगा, जिसकी शुरुआत वीडियो मेजरमेंट से होने की उम्मीद है।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 16 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 16 September, 2026
ISA854

कंचन श्रीवास्तव, सीनियर एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।

भारत के करीब ₹1.55 लाख करोड़ के ऐड मार्केट में एक बड़ी चुनौती अब भी बनी हुई है कि अलग-अलग मीडिया प्लेटफॉर्म पर चलने वाले किसी ऐड कैंपेन को वास्तव में कितने अलग-अलग लोग (यूनिक कंज्यूमर्स) देखते हैं। फिलहाल इंडस्ट्री के पास ऐसा कोई साझा मीजरमेंट सिस्टम नहीं है, जो टीवी, डिजिटल और दूसरे मीडिया प्लेटफॉर्म को मिलाकर यह बता सके कि किसी कैंपेन की कुल रीच कितनी रही और एक ही व्यक्ति तक ऐड कितनी बार पहुंचा।

इस कमी को दूर करने के लिए इंडियन सोसायटी ऑफ ऐडवर्टाइजर्स (ISA) अगले कुछ महीनों में क्रॉस-मीडिया मीजरमेंट (CMM) सिस्टम लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। इस मामले से जुड़े सूत्रों ने एक्सचेंज4मीडिया को यह जानकारी दी है। प्रस्तावित सिस्टम के पहले चरण में वीडियो को शामिल किया जाएगा, क्योंकि यह ऐडवर्टाइजिंग का सबसे बड़ा इन्वेंट्री सेगमेंट है। आगे चलकर इस सिस्टम में दूसरे मीडिया को भी शामिल किया जा सकता है।

यह पहल ISA के करीब तीन साल से चल रहे प्रयास का अगला बड़ा कदम है। ऐडवर्टाइजर लंबे समय से ऐसे साझा सिस्टम की जरूरत महसूस कर रहे हैं, जिससे अलग-अलग और तेजी से बढ़ते मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऑडियंस को एक समान तरीके से मापा जा सके।

WFA के Halo फ्रेमवर्क से प्रेरित होगा सिस्टम

ISA के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, भारत में तैयार किया जा रहा यह सिस्टम वर्ल्ड फेड्रेशन ऑफ ऐडवर्टाइजर्स (WFA) के Halo फ्रेमवर्क के सिद्धांतों के आधार पर तैयार किया जा रहा है। Halo एक ऐसा कॉमन फ्रेमवर्क है, जिसका मकसद अलग-अलग मीडिया पर कितने अलग-अलग लोगों तक ऐड पहुंचा और उन्होंने उसे कितनी बार देखा, यह पता लगाना है। यानी यह पता लगाया जा सके कि किसी कैंपेन को कुल कितने अलग लोगों ने देखा और उनमें से कितने लोगों तक ऐड बार-बार पहुंचा। 

ISA ने इस दिशा में ब्रिटेन के Origin मॉडल का भी अध्ययन किया है। Origin को Halo फ्रेमवर्क पर आधारित सफल मॉडलों में से एक माना जाता है।

ISA के अधिकारी ने बताया कि भारतीय सिस्टम की शुरुआत वीडियो मीजरमेंट से होने की उम्मीद है। इसके बाद इसे धीरे-धीरे दूसरे मीडिया तक बढ़ाया जाएगा। यानी शुरुआत से ही हर माध्यम को एक ही सिस्टम में शामिल करने के बजाय इसे चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।

ऐडवर्टाइजर्स, एजेंसीज और प्लेटफॉर्म्स को साथ लाने की तैयारी

ISA की CMM पहल पर उसकी क्रॉस मीडिया मीजरमेंट सब-कमेटी के भीतर काफी समय से चर्चा और विचार-विमर्श चल रहा है। अब ISA इस प्रक्रिया में ज्यादा से ज्यादा इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर्स को शामिल करने की तैयारी कर रहा है। इनमें ऐडवर्टाइजर्स, मीडिया एजेंसीज, ब्रॉडकास्टर्स, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, पब्लिशर्स और मीजरमेंट/डेटा कंपनीज शामिल हैं। 

मौजूदा मीजरमेंट सिस्टम और डेटा प्रोवाइडर्स जैसे BARC और TAM की भी इस प्रक्रिया में भूमिका हो सकती है। इंडस्ट्री यह समझने की कोशिश कर रही है कि अलग-अलग स्रोतों से आने वाले डेटा और मीजरमेंट मेथडोलॉजी को एक कॉमन फ्रेमवर्क के तहत किस तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। ISA का मकसद मौजूदा मीजरमेंट करेंसी को तुरंत खत्म करना नहीं है। इसके बजाय एक ऐसी न्यूट्रल मीजरमेंट layer तैयार करने की कोशिश है, जो अलग-अलग जगहों से मिले आंकड़ों को जोड़कर यह बताए कि कैंपेन कितने अलग-अलग लोगों तक पहुंचा।

ऐडवर्टाइजर 10 से ज्यादा टचपॉइंट्स का कर रहे इस्तेमाल

इंडस्ट्री से जुड़े ऐडवर्टाइजर्स के मुताबिक, मीडिया का दायरा लगातार बढ़ रहा है और आज एक ऐडवर्टाइजर अपने ऑडियंस तक पहुंचने के लिए औसतन 10 से ज्यादा टचपॉइंट्स का इस्तेमाल करता है। टीवी, कनेक्टेड टीवी, यूट्यूब, सोशल मीडिया, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स, ऑडियो और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक ही व्यक्ति तक ऐड पहुंच सकता है। ऐसे में हर प्लेटफॉर्म का अलग-अलग डेटा मिलने से यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि वास्तव में कितने यूनिक कंज्यूमर्स तक कैंपेन पहुंचा।

ऐडवर्टाइजर्स का मानना है कि करीब ₹1.5 लाख करोड़ के सालाना ऐडवर्टाइजिंग खर्च वाले बाजार में यह समझना जरूरी है कि ऑडियंस किस माध्यम पर और किस तरह जुड़ रही है। इसके लिए एक अकाउंटेबल, न्यूट्रल और क्रेडिबल क्रॉस-मीडिया मीजरमेंट सिस्टम की जरूरत है।

TV और CTV मिलाकर करीब 25% ऐड मार्केट

पिच मेडिसन ऐडवर्टाइजिंग रिपोर्ट (PMAR) 2026 के मुताबिक, भारत में 2025 में लीनियर टीवी का ऐडवर्टाइजिंग खर्च करीब ₹32,855 करोड़ रहा। इंडस्ट्री के एक अनुमान के मुताबिक, कनेक्टेड टीवी (CTV) समेत ब्रॉडर लार्ज-स्क्रीन इकोसिस्टम का ऐडवर्टाइजिंग खर्च करीब ₹38,855 करोड़ रहा। इसमें CTV का ऐडवर्टाइजिंग खर्च करीब ₹6,000 करोड़ रहने का अनुमान है, जो एक साल में दोगुना हुआ है। TV और CTV को मिलाकर यह आंकड़ा भारत के कुल ऐडवर्टाइजिंग खर्च का करीब 25% बैठता है।

Halo से Origin और अब भारत की तैयारी

दुनिया में ISA जिस मॉडल को समझने की कोशिश कर रहा है, उसमें WFA का Halo फ्रेमवर्क अहम है। यह ऐडवर्टाइजर्स की पहल पर तैयार किया गया एक ओपेन फ्रेमवर्क है। इसमें कुछ साझा तकनीकी तरीके और नियम दिए गए हैं, जिनकी मदद से अलग-अलग देश अपनी जरूरत के हिसाब से ऐसा क्रॉस-मीडिया मेजरमेंट सिस्टम बना सकते हैं, जिसमें लोगों की निजी जानकारी सुरक्षित रहे।

ब्रिटेन का Origin मॉडल, जिसे Incorporated Society of British Advertisers (ISBA) के नेतृत्व में तैयार किया गया है, Halo फ्रेमवर्क पर आधारित सबसे विकसित मॉडलों में से एक माना जाता है। इसमें टीवी, डिजिटल प्लेटफॉर्म और पैनल डेटा को एक साथ जोड़कर ऑडियंस को मापा जाता है, जबकि लोगों की निजी जानकारी सुरक्षित रखी जाती है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर एक ही ऐड कितने लोगों तक पहुंचा और लोगों ने उसे कुल कितनी बार देखा।

WFA के मुताबिक, Origin अब ब्रिटेन के ऐडवर्टाइजिंग मार्केट के खर्च के हिसाब से 60% से ज्यादा हिस्से को कवर करता है। अमेरिका में ऐडवर्टाइजर्स द्वारा विकसित Aquila भी इसी तरह के मॉडल पर काम कर रहा है और इसके ट्रायल्स चल रहे हैं। 

ISA अब Origin और Aquila दोनों का अध्ययन कर रहा है, ताकि यह समझा जा सके कि भारत में क्रॉस-मीडिया मीजरमेंट सिस्टम को किस तरह तैयार किया जा सकता है। Origin में सिंगल-सोर्स पैनल को प्लेटफॉर्म डेटा के साथ जोड़ा जाता है। यह प्राइवेसी-प्रिजर्विंग एनवॉयरमेंट में काम करता है और स्वतंत्र ऑ़डिट के अधीन है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि TV और डिजिटल के जरिए कितने नए लोगों तक ऐड पहुंचा और कितने लोगों को वही ऐड दोबारा दिखा।

सबसे बड़ी चुनौती टेक्नोलॉजी नहीं, इंडस्ट्री की सहमति

इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक, CMM सिस्टम तैयार करने में तकनीक शायद सबसे बड़ी चुनौती नहीं होगी। असली चुनौती अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स को एक साझा सिस्टम पर सहमत करना हो सकती है।

ऐडवर्टाइजर्स को independent और comparable मीजरमेंट चाहिए। एजेंसीज ऐसा करेंसी सिस्टम चाहती हैं, जिसे मीडिया प्लानिंग सिस्टम्स में इस्तेमाल किया जा सके। वहीं ब्रॉडकास्टर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स अपने डेटा और commercial interests को लेकर सतर्क रहते हैं। दूसरी तरफ मीजरमेंट कंपनीज की अपनी मेथोलॉजी और इंफ्रास्टचर्स पहले से मौजूद हैं। ऐसे में सभी पक्षों को एक साझा फ्रेमवर्क पर लाना ISA के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है।

इस पूरी पहल का अंतिम मकसद काफी सीधा है- यह पता लगाना कि किसी कैंपेन ने कितने अलग लोगों तक पहुंच बनाई, लोगों को कितनी बार ऐड दिखा और किस चैनल ने अतिरिक्त (incremental) रीच दी।

ISA की क्रॉस मीडिया मीजरमेंट सब-कमेटी की अध्यक्षता ITC Ltd के चीफ डिजिटल मार्केटिंग ऑफिसर शुवादीप बनर्जी कर रहे हैं। शुवादीप बनर्जी से इस मामले में टिप्पणी के लिए संपर्क किया गया, लेकिन उनकी प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। ISA चेयरमैन सुनील कटारिया ने एक्सचेंज4मीडिया के सवालों का जवाब नहीं दिया।

भारत में CMM की जरूरत क्यों बढ़ रही है?

भारत में TV, कनेक्टेड टीवी, यूट्यूब और दूसरे डिजिटल वीडियो प्लेटफॉर्म्स, social मीडिया, स्ट्रीमिंग सर्विसेज और ऑडियो जैसे कई माध्यमों की ऑडियंस अब एक-दूसरे से काफी हद तक overlap करती है। लेकिन इन सभी के मीजरमेंट सिस्टम अभी भी काफी हद तक प्लेटफॉर्म या medium-specific हैं।

उदाहरण के लिए, किसी ऐडवर्टाइजर को यह पता हो सकता है कि TV पर उसके ऐड को कितने इम्प्रेशंस मिले और डिजिटल पर कितने इम्प्रेशंस मिले। लेकिन दोनों को मिलाकर यह पता लगाना आसान नहीं है कि वास्तव में कितने अलग-अलग लोगों तक ऐड पहुंचा।

एक साझा क्रॉस मीडिया फ्रेमवर्क आने से फोकस सिर्फ इस बात पर नहीं रहेगा कि ऐडवर्टाइजर ने कितनी ऐडवर्टाइजिंग इन्वेंट्री खरीदी, बल्कि यह भी देखा जा सकेगा कि उसे वास्तव में कितनी इक्रीमेंटल ऑडियंस मिली। इसका असर आगे चलकर मीडिया प्लानिंग, ऐडवर्टाइजिंग प्राइसिंग, कैंपेन ऑप्टमाइजेशन और टीवी, डिजिटल वीडियो समेत अलग-अलग प्लेटफॉर्म के योगदान के आकलन पर भी पड़ सकता है।

TV ratings के बदलते दौर में पहल महत्वपूर्ण

ISA की यह पहल ऐसे समय में सामने आ रही है जब भारत का टीवी मीजरमेंट इकोसिस्टम भी बदलाव के दौर से गुजर रहा है। टीवी रेटिंग्स काफी समय से रुकी हुई हैं। सरकार की TV Ratings Policy 2026 में रेटिंग्स इकोसिस्टम को लेकर नए प्रावधान किए गए हैं। इनमें transparency, accountability, data protection और independent oversight को मजबूत करने से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। BARC नए रेगुलेट्री फ्रेमवर्क के तहत काम कर रहा है। वहीं मार्केट में TAM जैसे स्थापित खिलाड़ियों से भी ज्यादा कम्पटीशन देखने को मिल सकता है।

दूसरी तरफ दूसरे मीडिया की मीजरमेंट करेंसीज में भी कई चुनौतियां हैं। इंडियन रीडरशिप सर्वे (IRS) पिछले सात साल से रुका हुआ है। वहीं Out-of-Home (OOH) इंडस्ट्री के सामने भी अब तक कोई साझा मीजरमेंट सिस्टम नहीं है। डिजिटलमीडिया का मीजरमेंट बाकी माध्यमों की तुलना में ज्यादा विकसित है, लेकिन यहां भी बड़ी मात्रा में मीजरमेंट डेटा बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के नियंत्रण में रहता है।

ऐसे में ISA का प्रस्तावित क्रॉस-मीडिया मीजरमेंट सिस्टम अगर आकार लेता है, तो इसका उद्देश्य अलग-अलग मीडिया की ऑडियंस को एक साझा फ्रेमवर्क में देखकर ऐडवर्टाइजर्स को कैंपेन की वास्तविक रीच और फ्रीक्वेंसी समझने में मदद करना होगा। 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

Vimal Elaichi के विज्ञापन मामले में PB Agro को झटका, दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिका की खारिज

विमल इलायची (Vimal Elaichi) बनाने वाली कंपनी PB Agro LLP को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका लगा है।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 15 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 15 September, 2026
VimalElaichi5485

विमल इलायची (Vimal Elaichi) बनाने वाली कंपनी PB Agro LLP को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की ओर से Vimal Elaichi के सेलिब्रिटी ब्रैंड एंबेसडर्स शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस को चुनौती देने वाली PB Agro की याचिका खारिज कर दी है।

PB Agro ने महाराष्ट्र FDA की ओर से 11 अगस्त को जारी किए गए इन नोटिस को चुनौती दी थी। इन नोटिस में आरोप लगाया गया था कि Vimal Elaichi के विज्ञापन के जरिए Vimal Pan Masala का अप्रत्यक्ष या सरोगेट प्रचार किया जा रहा है। Vimal Pan Masala महाराष्ट्र में प्रतिबंधित है।

इस मामले में जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा था। मुख्य सवाल यह था कि क्या दिल्ली हाई कोर्ट के पास महाराष्ट्र FDA की ओर से जारी किए गए इन नोटिस पर सुनवाई करने का क्षेत्रीय अधिकार है।

केंद्र और CCPA ने याचिका का विरोध किया

केंद्र सरकार और Central Consumer Protection Authority (CCPA) ने PB Agro की याचिका की सुनवाई योग्य होने का विरोध किया था। उनका कहना था कि चूंकि कारण बताओ नोटिस महाराष्ट्र सरकार के विभाग ने जारी किए हैं, इसलिए कंपनी को इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख करना चाहिए।

सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश न होने को लेकर भी सवाल उठाया गया। वकील रुख्मिणी बोबडे ने दलील दी कि महाराष्ट्र सरकार, जिसने कारण बताओ नोटिस जारी किया है, वह अपने नोटिस का बचाव करने के लिए अदालत में मौजूद नहीं है।

वहीं, PB Agro की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन और मोहित माथुर ने कंपनी का पक्ष रखा। कंपनी की दलील थी कि कारण बताओ नोटिस केवल तीनों अभिनेताओं को जारी किए गए हैं, कंपनी को नहीं। जबकि विज्ञापन अभियान के खिलाफ किसी भी नियामकीय कार्रवाई का सीधा असर कंपनी पर पड़ सकता है। दिल्ली हाई कोर्ट ने अब PB Agro की इस याचिका को खारिज कर दिया है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

Century Business Media IPO को पहले दिन मिला अच्छा रिस्पॉन्स

सेंचुरी बिजनेस मीडिया (Century Business Media) को IPO के पहले ही दिन निवेशकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।

Vikas Saxena by
Published - Saturday, 12 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 12 September, 2026
CentuaryMedia623

सेंचुरी बिजनेस मीडिया (Century Business Media) को IPO के पहले ही दिन निवेशकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। 11 सितंबर 2026 को बोली के पहले दिन यह इश्यू कुल 1.14 गुना सब्सक्राइब हुआ। खास बात यह रही कि आखिरी घंटों में योग्य संस्थागत खरीदारों यानी QIB की तरफ से जोरदार मांग आई और उनका हिस्सा 3.51 गुना सब्सक्राइब हो गया। इसके साथ ही IPO पहले दिन ही पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया।

गैर-संस्थागत निवेशकों की बड़ी HNI (bHNI) श्रेणी में 0.59 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। वहीं छोटी HNI (sHNI) श्रेणी 0.04 गुना सब्सक्राइब हुई। खुदरा निवेशकों का हिस्सा 0.11 गुना सब्सक्राइब हुआ। कर्मचारी श्रेणी में अभी तक कोई बोली नहीं मिली और यह हिस्सा 0 गुना रहा।

दिन के दौरान IPO की मांग में तेजी देखने को मिली। सुबह 11:15 बजे तक कुल सब्सक्रिप्शन 0.08 गुना था। दोपहर 12:15 बजे यह 0.12 गुना और 01:15 बजे 0.12 गुना रहा। 02:15 बजे कुल सब्सक्रिप्शन 0.13 गुना और 04:15 बजे 0.14 गुना था। इसके बाद आखिरी अपडेट में QIB की ओर से आई मांग के चलते कुल सब्सक्रिप्शन बढ़कर 1.14 गुना हो गया।

IPO की प्रमुख जानकारी

Century Business Media IPO का प्राइस बैंड ₹70 से ₹74 प्रति शेयर रखा गया है। IPO 11 सितंबर 2026 को खुला है और इसमें बोली लगाने की आखिरी तारीख 16 सितंबर 2026 है। न्यूनतम 3,200 शेयरों के लिए बोली लगानी होगी।

क्या करती है Century Business Media?

Century Business Media साल 1999 में स्थापित एक विज्ञापन सेवा कंपनी है। कंपनी मुख्य रूप से आउट-ऑफ-होम (OOH) मीडिया के क्षेत्र में काम करती है। इसमें डिजिटल और गैर-डिजिटल दोनों तरह के विज्ञापन माध्यम शामिल हैं।

कंपनी एयरपोर्ट आउट-ऑफ-होम (AOOH), रेलवे आउट-ऑफ-होम (ROOH) और मेट्रो आउट-ऑफ-होम (MOOH) सेगमेंट में काम करती है। कंपनी के पास पांच एयरपोर्ट्स पर विज्ञापन के विशेष अधिकार हैं। इसके अलावा ईस्ट सेंट्रल रेलवे जोन के तहत 714 रेलवे स्टेशनों पर भी इसके पास विज्ञापन अधिकार हैं। कंपनी की मौजूदगी बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में है।

कंपनी के वित्तीय आंकड़े

वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का परिचालन से राजस्व ₹46.43 करोड़ रहा, जो वित्त वर्ष 2025 के ₹36.65 करोड़ से अधिक है। वित्त वर्ष 2024 में यह ₹32.03 करोड़ था। कंपनी का टैक्स से पहले का मुनाफा (PBT) वित्त वर्ष 2026 में ₹7.46 करोड़ रहा, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह ₹6.37 करोड़ और वित्त वर्ष 2024 में ₹4.89 करोड़ था।

कंपनी का कुल मुनाफा वित्त वर्ष 2026 में ₹5.56 करोड़ रहा। वित्त वर्ष 2025 में यह ₹4.71 करोड़ और वित्त वर्ष 2024 में ₹3.69 करोड़ था। वहीं कुल संपत्ति वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर ₹31.28 करोड़ हो गई, जो वित्त वर्ष 2025 में ₹22.37 करोड़ और वित्त वर्ष 2024 में ₹21.24 करोड़ थी।

IPO से जुटाई रकम का इस्तेमाल

कंपनी IPO से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कई कामों में करेगी। इसमें ₹4.21 करोड़ मीडिया एसेट खरीदने के लिए पूंजीगत खर्च, जबकि ₹3.77 करोड़ पटना एयरपोर्ट पर विज्ञापन अधिकारों के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट के भुगतान में लगाए जाएंगे।

इसके अलावा कंपनी ₹1.45 करोड़ के कुछ कर्ज के भुगतान, ₹3.25 करोड़ कार्यशील पूंजी की जरूरतों और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए भी IPO से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल करेगी।

निवेशकों के लिए प्रमुख जोखिम

Century Business Media के कारोबार में सरकारी रियायत और लाइसेंस समझौतों पर निर्भरता एक प्रमुख जोखिम है। इसके अलावा कंपनी का कारोबार कुछ खास भौगोलिक क्षेत्रों में केंद्रित है।

कंपनी पर विज्ञापन अधिकारों से जुड़े न्यूनतम मासिक गारंटी भुगतान की जिम्मेदारियां भी हैं। साथ ही, सिक्योरिटी डिपॉजिट की बड़ी जरूरत और कारोबार में ज्यादा कार्यशील पूंजी की आवश्यकता भी कंपनी के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। इसके अलावा ग्राहकों से भुगतान मिलने में देरी यानी रिसीवेबल्स रिस्क भी एक प्रमुख जोखिम है।

 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

AdCounty Media का AdTech विस्तार, Adaxx Pro से मजबूत होगी प्रोग्रामेटिक व ब्रैंडिंग क्षमता

डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग और परफॉर्मेंस मार्केटिंग कंपनी AdCounty Media India Limited ने Adaxx Adtech & Media LLP के अधिग्रहण को लेकर अपडेट जारी किया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 09 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 09 September, 2026
AdCounty875

डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग और परफॉर्मेंस मार्केटिंग कंपनी AdCounty Media India Limited ने Adaxx Adtech & Media LLP के अधिग्रहण को लेकर अपडेट जारी किया है। कंपनी ने मार्च 2026 में Adaxx Adtech & Media में 99.95% हिस्सेदारी 10 करोड़ रुपये में हासिल की थी। इस अधिग्रहण के बाद Adaxx Adtech & Media, AdCounty Media की सब्सिडियरी बन गई है।

कंपनी के मुताबिक, इस अधिग्रहण का मकसद उसकी प्रोग्रामेटिक ऐडवर्टाइजिंग और ब्रैंडिंग क्षमताओं को मजबूत करना है। AdCounty Media ने बताया कि अब Adaxx Pro उसके टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम में प्रोग्रामेटिक ऐडवर्टाइजिंग और ब्रैंडिंग प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करेगा।

क्या काम करेगा Adaxx Pro?

Adaxx Pro के जरिए AdCounty Media को डिजिटल विज्ञापन अभियानों में ऑडियंस टार्गेटिंग, डिजिटल मीडिया खरीद, कैंपेन ऑप्टिमाइजेशन, इन्वेंट्री मैनेजमेंट और ब्रैंड रीच जैसी क्षमताएं मजबूत करने में मदद मिलेगी।

इससे कंपनी ब्रैंड्स के लिए ज्यादा टार्गेटेड और मापने योग्य डिजिटल विज्ञापन कैंपेन चलाने में सक्षम होगी। कंपनी का कहना है कि इससे विज्ञापनदाताओं को सही ऑडियंस तक बड़े स्तर पर पहुंचने में मदद मिलेगी।

प्रोग्रामेटिक से लेकर CTV तक सेवाओं का विस्तार

AdCounty Media के मुताबिक, Adaxx Pro को अपने मौजूदा प्लेटफॉर्म में शामिल करने से उसकी डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग सेवाओं का दायरा और बढ़ेगा। कंपनी पहले से प्रोग्रामेटिक ऐडवर्टाइजिंग, Connected TV (CTV), डिस्प्ले ऐडवर्टाइजिंग, परफॉर्मेंस मार्केटिंग, मोबाइल ऐडवर्टाइजिंग और Apple Search Ads जैसी सेवाएं देती है।

कंपनी का कहना है कि Adaxx Pro के जुड़ने से वह ब्रैंड मार्केटिंग और परफॉर्मेंस-बेस्ड कस्टमर एक्विजिशन दोनों को एक ही इंटीग्रेटेड सिस्टम के जरिए सपोर्ट कर सकेगी।

ब्रैंडिंग और परफॉर्मेंस मार्केटिंग को जोड़ने पर जोर

कंपनी के अनुसार, इस इंटीग्रेशन से विज्ञापनदाता एक ही रणनीति के तहत ब्रैंड अवेयरनेस, कंसिडरेशन और परफॉर्मेंस जैसे अलग-अलग लक्ष्यों पर काम कर सकेंगे। AdCounty Media का मानना है कि दोनों प्लेटफॉर्म की टेक्नोलॉजी और ऑपरेशनल क्षमताओं को जोड़ने से विज्ञापन अभियानों की रीच, एंगेजमेंट और मापने योग्य रिटर्न को बेहतर किया जा सकेगा।

कंपनी के बिजनेस के लिहाज से भी यह अधिग्रहण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे AdCounty Media का संभावित बाजार केवल AI आधारित परफॉर्मेंस मार्केटिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डिस्प्ले ऐडवर्टाइजिंग, ब्रैंड बिल्डिंग और प्रोग्रामेटिक मीडिया तक इसका विस्तार होगा।

नए ब्रैंड्स और एजेंसियों तक पहुंच बढ़ाने की उम्मीद

AdCounty Media का कहना है कि इस विस्तार से उसे नए क्लाइंट्स और ऐसे ब्रैंड्स व एजेंसियों के साथ काम करने के मौके मिल सकते हैं, जो एक ही प्लेटफॉर्म से इंटीग्रेटेड डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग सॉल्यूशन चाहते हैं।

अधिग्रहण पर बात करते हुए AdCounty Media India Limited के चेयरमैन और जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर Aditya Jangid ने कहा कि Adaxx Adtech & Media और उसके प्रॉपराइटरी सॉल्यूशन Adaxx Pro का अधिग्रहण कंपनी की टेक्नोलॉजी आधारित ऐडवर्टाइजिंग क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है।

उन्होंने कहा कि Adaxx Pro से कंपनी की प्रोग्रामेटिक और ब्रैंडिंग सेवाएं मजबूत होंगी और वह ब्रैंड्स व एजेंसियों को ज्यादा इंटीग्रेटेड समाधान दे सकेगी। कंपनी दोनों प्लेटफॉर्म की टेक्नोलॉजी के बीच तालमेल के जरिए एक स्केलेबल और ग्लोबल स्तर पर प्रासंगिक AdTech बिजनेस तैयार करने की संभावना देख रही है।

कुल मिलाकर, Adaxx Pro का इंटीग्रेशन AdCounty Media को प्रोग्रामेटिक, परफॉर्मेंस और ब्रैंडिंग को एक साथ जोड़ने वाले व्यापक टेक्नोलॉजी-आधारित ऐडवर्टाइजिंग इकोसिस्टम की ओर ले जाने वाला कदम है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

विमल इलायची ऐड केस: दिल्ली HC में सुनवाई, FDA की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र पर उठे सवाल

विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की ओर से शुरू की गई कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 08 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 08 September, 2026
VimalElaichi589

विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की ओर से शुरू की गई कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से सवाल उठाया गया कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े अधिकारी किसी विज्ञापन अभियान को रोकने या उसमें शामिल सेलिब्रिटी से सोशल मीडिया पर किए गए प्रचार को हटाने के लिए तभी निर्देश दे सकते हैं, जब पहले यह तय हो कि संबंधित उत्पाद के खिलाफ प्रथम दृष्टया कानून का उल्लंघन बनता है। यह मामला W.P.(C) 12664/2026 है और इसकी सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने की।

विज्ञापन रोकने की शक्ति पर याचिकाकर्ता ने उठाए सवाल

याचिकाकर्ता के वकील ने Food Safety and Standards Act, 2006 (FSS Act) के तहत FSSAI और राज्य के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की शक्तियों के दायरे पर सवाल उठाया। दलील दी गई कि खाद्य सुरक्षा कानून मुख्य रूप से किसी खाद्य उत्पाद की सुरक्षा, उसमें इस्तेमाल सामग्री और तय मानकों से जुड़े मामलों से संबंधित है। ऐसे में विज्ञापन अभियान को रोकने या ब्रांड एंबेसडर्स को सोशल मीडिया से अपने प्रचार हटाने के लिए कहना खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की शक्तियों के दायरे में आता है या नहीं, यह महत्वपूर्ण सवाल है।

वकील ने कहा कि किसी विज्ञापन को रोकने या सेलिब्रिटी को अपने प्रचार से पीछे हटने के लिए कहने से पहले प्रभावित पक्ष को सुनना और यह तय करना जरूरी है कि संबंधित उत्पाद वास्तव में कानून का उल्लंघन करता है या नहीं।

मामला विमल पान मसाला के कथित सरोगेट विज्ञापन से जुड़ा

महाराष्ट्र FDA की कार्रवाई का संबंध विमल इलायची के जरिए विमल पान मसाला के कथित सरोगेट विज्ञापन से है। FDA की ओर से इस अभियान से जुड़े सेलिब्रिटीज को शो-कॉज नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ के नाम शामिल हैं।

नियामक का आरोप है कि इलायची के नाम से चलाए जा रहे विज्ञापनों के जरिए प्रतिबंधित विमल पान मसाला का अप्रत्यक्ष प्रचार किया जा रहा है।

FSSAI और CCPA की शक्तियों में अंतर का तर्क

याचिकाकर्ता के वकील ने FSSAI की शक्तियों और Central Consumer Protection Authority (CCPA) की शक्तियों के बीच अंतर भी बताया। दलील दी गई कि भ्रामक विज्ञापनों से निपटने के लिए उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत CCPA को विशेष अधिकार मिले हैं, जबकि FSSAI की मुख्य जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा और मानकों से जुड़ी है।

वकील ने FSS Act की धारा 24, 52 और 53 का हवाला देते हुए कहा कि इन प्रावधानों में ऐसा कोई व्यापक अधिकार नहीं दिया गया है, जिसके आधार पर नियामक विज्ञापन हटाने या सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट रोकने जैसे निर्देश जारी कर सके।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि धारा 53 मुख्य रूप से दंड से संबंधित प्रावधान है और इसे अपने आप में विज्ञापन हटाने का निर्देश देने की शक्ति के तौर पर नहीं पढ़ा जा सकता।

केंद्र और CCPA ने दिल्ली हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर उठाया सवाल

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और CCPA की ओर से सबसे पहले दिल्ली हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर आपत्ति जताई गई। केंद्र की ओर से दलील दी गई कि इस मामले की सुनवाई के लिए दिल्ली उचित मंच नहीं है, क्योंकि विवादित शो-कॉज नोटिस महाराष्ट्र सरकार के नाम से जारी हुआ है और पूरी कार्रवाई महाराष्ट्र की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी है।

केंद्र के वकील ने कहा कि जिन लोगों को नोटिस भेजे गए हैं, उनमें शामिल ब्रांड एंबेसडर्स भी मुंबई में रहते हैं। ऐसे में केवल इसलिए दिल्ली हाई कोर्ट में मामला नहीं लाया जा सकता कि याचिकाकर्ता नई दिल्ली में स्थित है।

केंद्र ने यह भी बताया कि जिस महाराष्ट्र सरकार ने विवादित शो-कॉज नोटिस जारी किया है, वह इस मामले में पक्षकार नहीं है। केंद्र की ओर से कहा गया कि ऐसे में नोटिस जारी करने वाली महाराष्ट्र सरकार के पास अदालत के सामने अपनी कार्रवाई का बचाव करने का अवसर ही नहीं है।

FSS Act की धारा 30 का दिया हवाला

केंद्र की ओर से FSS Act की धारा 30 का भी हवाला दिया गया। इस धारा के तहत राज्य सरकार को अपने राज्य में Commissioner of Food Safety नियुक्त करना होता है, ताकि खाद्य सुरक्षा और मानकों से जुड़े कानूनों को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।

केंद्र की दलील थी कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े सभी अधिकार केवल केंद्र सरकार या FSSAI के पास नहीं हैं। कानून में राज्य सरकारों और राज्य स्तर के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की भी अलग जिम्मेदारियां तय की गई हैं। इसलिए महाराष्ट्र FDA की कार्रवाई को केवल FSSAI की शक्तियों के नजरिए से नहीं देखा जा सकता।

अब अधिकार क्षेत्र पर हाई कोर्ट के फैसले का इंतजार

सोमवार की सुनवाई के बाद फिलहाल इस मामले में क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र (Territorial Jurisdiction) सबसे अहम मुद्दा बन गया है। एक तरफ याचिकाकर्ता यह सवाल उठा रहा है कि FSS Act के तहत खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के पास विज्ञापन और सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई करने की कितनी शक्ति है। दूसरी तरफ केंद्र सरकार और CCPA का कहना है कि इस मामले को दिल्ली हाई कोर्ट में ही नहीं सुना जाना चाहिए। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र के मुद्दे पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।

हाई कोर्ट के इस फैसले से यह तय होगा कि दिल्ली हाई कोर्ट आगे विमल इलायची विज्ञापन मामले से जुड़े बड़े कानूनी सवालों पर सुनवाई करेगा या नहीं। इनमें FSS Act के तहत खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की विज्ञापनों और सेलिब्रिटी प्रचार को लेकर शक्तियों का दायरा भी शामिल है।

 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

Bright Outdoor Media में डायरेक्टर्स की सैलरी बढ़ाने की तैयारी, शेयरधारक लेंगे फैसला

आउटडोर विज्ञापन के क्षेत्र में काम करने वाली और भारत की पहली सूचीबद्ध OOH (Out-of-Home) कंपनी Bright Outdoor Media Limited की बोर्ड मीटिंग में कई अहम फैसले लिए गए हैं।

Vikas Saxena by
Published - Thursday, 03 September, 2026
Last Modified:
Thursday, 03 September, 2026
BrightOutdoor4510

आउटडोर विज्ञापन के क्षेत्र में काम करने वाली और भारत की पहली सूचीबद्ध OOH (Out-of-Home) कंपनी Bright Outdoor Media Limited की बोर्ड मीटिंग में कई अहम फैसले लिए गए हैं। कंपनी के बोर्ड ने डायरेक्टर्स की पारिश्रमिक यानी सैलरी बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। हालांकि, यह बढ़ोतरी कंपनी के सदस्यों की मंजूरी और कंपनी कानून के तहत जरूरी नियमों के पालन के अधीन होगी।

कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक 2 सितंबर 2026 को हुई। यह बैठक शाम 4 बजे शुरू हुई और 4:30 बजे खत्म हो गई।

डायरेक्टर्स की बढ़ सकती है सैलरी

बोर्ड ने डायरेक्टर्स के पारिश्रमिक को बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह बढ़ोतरी कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 197 के तहत तय कुल मैनेजेरियल रिम्यूनरेशन की सीमा से ज्यादा हो सकती है।

हालांकि, इस प्रस्ताव को लागू करने से पहले कंपनी की आने वाली वार्षिक आम बैठक (AGM) में शेयरधारकों की मंजूरी लेनी होगी। इसके साथ ही कंपनी को कंपनी अधिनियम, 2013 और उसके तहत बनाए गए नियमों, जिसमें Schedule V भी शामिल है, के सभी लागू प्रावधानों का पालन करना होगा।

28 सितंबर को होगी AGM

कंपनी ने अपनी 21वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) की तारीख भी तय कर दी है। AGM सोमवार, 28 सितंबर 2026 को दोपहर 12 बजे आयोजित की जाएगी। यह बैठक Hotel Peninsula Grand, Sakinaka Junction, Lokmanya Tilak Nagar, Saki Naka, Andheri (East), Mumbai में होगी।

बोर्ड ने AGM के लिए कंपनी के वित्त वर्ष 2025-26 के डायरेक्टर्स’ रिपोर्ट को भी मंजूरी दे दी है।

वोटिंग प्रक्रिया के लिए स्क्रूटिनाइजर नियुक्त

AGM में होने वाली वोटिंग प्रक्रिया को पूरा कराने के लिए बोर्ड ने M/s Nikunj Kanabar & Associates, Practicing Company Secretaries को स्क्रूटिनाइजर नियुक्त किया है। इसके अलावा, AGM में रखे जाने वाले प्रस्तावों पर वोट देने के योग्य शेयरधारकों की पहचान के लिए कंपनी ने कट-ऑफ डेट तय करने को भी मंजूरी दी है।

कुल मिलाकर, बोर्ड मीटिंग में कंपनी की AGM से जुड़े जरूरी प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। अब डायरेक्टर्स के बढ़े हुए पारिश्रमिक समेत प्रस्तावित मुद्दों पर शेयरधारकों की मंजूरी 28 सितंबर की AGM में ली जाएगी।

 

 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

Himalaya की पैकेजिंग की नकल पड़ी भारी, HC ने Healing Pharma के प्रोडक्ट्स पर लगाई रोक

दिल्ली हाई कोर्ट ने Himalaya Global Holdings Ltd. को बड़ी राहत देते हुए Healing Pharma India Private Limited के कुछ प्रोडक्ट्स की बिक्री, निर्माण, डिस्ट्रीब्यूशन और विज्ञापन पर रोक लगा दी है।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 26 August, 2026
Last Modified:
Wednesday, 26 August, 2026
Himalaya6552

दिल्ली हाई कोर्ट ने Himalaya Global Holdings Ltd. को बड़ी राहत देते हुए Healing Pharma India Private Limited के कुछ प्रोडक्ट्स की बिक्री, निर्माण, डिस्ट्रीब्यूशन और विज्ञापन पर रोक लगा दी है।English Headline:  कोर्ट ने माना कि Healing Pharma के कुछ प्रोडक्ट्स की पैकेजिंग, नाम और रंगों का इस्तेमाल Himalaya के प्रोडक्ट्स से इतना मिलता-जुलता है कि आम ग्राहक दोनों को लेकर भ्रमित हो सकता है।

जस्टिस A. J. Bhambhani ने 18 अगस्त को इस मामले में अंतरिम आदेश जारी किया। यह मामला ट्रेडमार्क, कॉपीराइट और प्रोडक्ट की पहचान से जुड़े विवाद से संबंधित है।

किन प्रोडक्ट्स को लेकर है विवाद?

Himalaya ने आरोप लगाया था कि Healing Pharma के कुछ प्रोडक्ट्स के नाम और उनकी पैकेजिंग उसकी मशहूर दवाओं से मिलती-जुलती है। विवादित प्रोडक्ट्स में Liverheal, Liverheal 52, Liverheal DS, Senstone, Braintat, Spermax, Pilefine और Confidance X शामिल हैं।

 Himalaya का कहना था कि इन प्रोडक्ट्स की पैकेजिंग और नाम उसके Liv.52, Cystone, Mentat, Speman, Pilex और Confido प्रोडक्ट्स से मिलते हैं।

Himalaya ने क्या आरोप लगाया?

Himalaya ने कोर्ट को बताया कि उसके प्रोडक्ट्स की खास पैकेजिंग, रंगों का कॉम्बिनेशन, डिजाइन और विजुअल लेआउट लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे हैं और ग्राहकों के बीच उनकी एक अलग पहचान बन चुकी है।

कंपनी का आरोप था कि Healing Pharma ने अपने प्रोडक्ट्स के लिए इन्हीं तरह के नाम, रंग और पैकेजिंग डिजाइन का इस्तेमाल किया। Himalaya ने इसे ट्रेडमार्क और कॉपीराइट का उल्लंघन बताते हुए Passing Off का भी आरोप लगाया।

Passing Off का मतलब ऐसी स्थिति से है, जहां किसी कंपनी का प्रोडक्ट या उसकी पैकेजिंग इस तरह पेश की जाए कि ग्राहक उसे किसी दूसरी स्थापित कंपनी के प्रोडक्ट से जोड़कर देख सकता है।

आम ग्राहक हो सकता है भ्रमित: कोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने शुरुआती तौर पर माना कि दोनों कंपनियों के प्रोडक्ट्स के नाम, पैकेजिंग और रंगों में काफी समानता है।

कोर्ट के मुताबिक, सामान्य समझ रखने वाला और सही-सही याद न रखने वाला ग्राहक दोनों प्रोडक्ट्स को लेकर भ्रमित हो सकता है।

कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर Himalaya ने अपने पक्ष में Prima Facie Case यानी पहली नजर में मजबूत मामला बनाया है। कोर्ट ने यह भी माना कि सुविधा का संतुलन Himalaya के पक्ष में है और अंतरिम राहत नहीं मिलने पर कंपनी को ऐसी क्षति हो सकती है जिसकी भरपाई बाद में आसानी से नहीं की जा सकेगी।

इसी आधार पर कोर्ट ने Healing Pharma को विवादित ट्रेड ड्रेस वाले इन प्रोडक्ट्स के निर्माण, बिक्री, डिस्ट्रीब्यूशन और विज्ञापन से रोक दिया है।

Healing Pharma ने दी समझौते की पेशकश

सुनवाई के दौरान Healing Pharma ने कोर्ट को बताया कि उसने Liverheal 52 की बिक्री 10 नवंबर 2025 से बंद कर दी थी और अब यह प्रोडक्ट सिर्फ Liverheal नाम से बेचा जा रहा है। कंपनी ने इस विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए मध्यस्थता (Mediation) की इच्छा भी जताई। Himalaya ने भी इस प्रस्ताव पर सहमति जताई।

इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को Delhi High Court Mediation and Conciliation Centre भेज दिया है।

तीन हफ्ते में पूरी करनी होगी मध्यस्थता

दोनों पक्षों को 24 अगस्त 2026 को मध्यस्थता केंद्र के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने कहा है कि मध्यस्थता की प्रक्रिया तीन सप्ताह के भीतर पूरी की जाए। फिलहाल मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर 2026 को होगी। आगे की कार्रवाई मध्यस्थता के नतीजे पर भी निर्भर करेगी।

इस मामले में अंतिम फैसला अभी नहीं आया है। फिलहाल हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश Himalaya के प्रोडक्ट्स की पैकेजिंग और ब्रांड पहचान की सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है। 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए