दो कंपनियों के विज्ञापन को लेकर उठे सवाल, कॉस्ट कटिंग का नायाब नमूना है या गलती?

आमतौर पर कंपनियां कम चर्चित मॉडल्स को प्रतियोगी कंपनियों के विज्ञापन में इस्तेमाल करती रहती हैं, लेकिन यहां मामला अलग हो गया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 15 October, 2019
Last Modified:
Tuesday, 15 October, 2019
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मंदी की आहट के बीच कॉस्ट कटिंग के कई नायाब नमूने देखने को मिलते हैं। एक ऐसा ही नमूना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, अभी ये स्पष्ट नहीं हुआ है कि ये वाकई कॉस्ट कटिंग का परिणाम है या फिर गलती हो गई है। दरअसल, टाइम्स ऑफ इंडिया के 13 अक्टूबर के मुंबई संस्करण के पेज 6 पर एलजी कंपनी का विज्ञापन छपा है, जिसमें एक परिवार को दिवाली मनाते दिखाया गया है। इसी तरह पेज 7 पर भी इलेक्ट्रॉनिक एप्लायंस कंपनी व्हर्लपूल का विज्ञापन है।

गौर करने वाली बात ये है कि व्हर्लपूल के विज्ञापन में भी वही परिवार दिवाली मना रहा है जो एलजी के विज्ञापन में है। यानी एक ही परिवार दो अलग-अलग कंपनियों का प्रचार कर रहा है। वैसे ये कोई नई बात नहीं है। आमतौर पर कंपनियां कम चर्चित मॉडल्स को प्रतियोगी कंपनियों के विज्ञापन में इस्तेमाल करती रहती हैं, लेकिन यहां मामला इसलिए अलग हो गया है, क्योंकि दोनों विज्ञापन एक ही दिन एक ही अखबार में प्रकाशित हुए हैं।

मोदी सरकार के डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म ‘मेरी सरकार (MyGov India)’ के सीईओ रह चुके अरविंद गुप्ता ने दोनों ही विज्ञापनों की कटिंग को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया है। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा है, ‘जब एक ही परिवार दो अलग-अलग ब्रैंड, टीवी और माइक्रोवेव का प्रचार कर रहा है।’ गुप्ता के इस ट्वीट को काफी पसंद किया जा रहा है। लोगों ने अपने-अपने अंदाज में विज्ञापन कंपनी पर चुटकी ली है। लवेश नामक यूजर ने लिखा है, ‘परिवार टीवी एलजी से खरीदेगा और माइक्रोवेव व्हर्लपूल से।’ इसी तरह एक अन्य यूजर ने कुछ साल पहले प्रकाशित दो विज्ञापन पोस्ट किये हैं, जिसमें एक ही महिला को रिटेल आउटलेट ‘मोर’ और ‘बिग बाजार’ से खरीदारी करते दिखाया गया है।

संजीवा नामक यूजर ने इसे कंपनी की चालबाजी करार देते हुए लिखा है, ‘विज्ञापन कंपनी एक ही होगी, जिसके पास एलजी और व्हर्लपूल दोनों के विज्ञापन अधिकार होंगे। लागत और बिलिंग कम करके ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए विज्ञापन कंपनी ने एक ही परिवार की फोटो को दो अलग-अलग विज्ञापनों के लिए इस्तेमाल किया है।’

यदि आप दोनों विज्ञापनों को ध्यान से देखें तो व्हर्लपूल के विज्ञापन में फोटो को थोड़ा अलग अंदाज में लगाया गया है, शायद इसलिए कि दिवाली मनाता परिवार एक जैसा न लगे। हालांकि, अरविंद गुप्ता जैसी पारखी नजर रखने वाले इस ‘अंदाज’ में छिपे भेद को पहचान ही गए। आप भी इन दोनों विज्ञापनों को यहां देख सकते हैं।

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नहीं रुका कमलनाथ की फजीहत का सिलसिला, ‘भूल सुधार’ में भी भूल कर गए कांग्रेसी

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के जन्मदिन के मौके पर कांग्रेस कमेटी की ओर से प्रदेश के अधिकांश अखबारों में दिए गए थे विज्ञापन

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Friday, 22 November, 2019
Last Modified:
Friday, 22 November, 2019
Kamalnath

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ को अपना 73वां जन्मदिन हमेशा याद रहेगा। पहले उन्हें मध्यप्रदेश कांग्रेस द्वारा जारी विज्ञापन के लिए फजीहत झेलनी पड़ी, फिर उस विज्ञापन की गलतियों के लिए छपे ‘भूल सुधार’ में उनका नाम ही भुला दिया गया। अब इस ‘भूल’ को वाकई भूल माना जाए या साजिश, इसका फैसला तो कमलनाथ को ही करना है।

दरअसल, 18 नवंबर को कमलनाथ का जन्मदिन था। इस मौके पर कांग्रेस कमेटी की तरफ से प्रदेश के अधिकांश अखबारों में विज्ञापन छापे गए। इन विज्ञापनों का मकसद मुख्यमंत्री के चेहरे पर मुस्कान खिलाना और जनता को उनके संघर्ष से रूबरू कराना था, लेकिन हुआ इसके एकदम उलट।

कुछ विज्ञापनों में कमलनाथ की तारीफ के साथ-साथ इतिहास का हवाला देकर उन पर तंज भी कसे गए। बात जब आम हुई तो बवाल मच गया। पहले कांग्रेस नेता संबंधित विज्ञापन से पल्ला झाड़ते रहे और दूसरे दिन अखबारों में प्रकाशित ‘भूल सुधार’ के जरिये अपनी भूल सुधारने का प्रयास किया गया, लेकिन फजीहत का सिलसिला यहीं नहीं रुका।

‘भूल सुधार’ में फिर एक ऐसी भूल कर दी गई, जिसे देखकर कमलनाथ का आगबबूला होना लाजमी है। संबंधित अखबारों में ‘भूल सुधार’ की सूचना के तहत विवादस्पद विज्ञापनों को दुरुस्त करके पुन: दूसरे दिन प्रकाशित किया गया। पहली नजर में सबकुछ ठीक नजर आया है, पर जब नजरों पर जोर दिया गया, तो ‘भूल’ में एक और भूल नजर के सामने आ गई।

संशोधित विज्ञापन के पहले पैरा में मुख्यमंत्री का नाम ही बदल दिया गया। उन्हें कमलनाथ से कमलाथ बनाया गया है। ‘सांसद से मुख्यमंत्री तक का सफर’ शीर्षक तले कमलनाथ की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया है, जिसकी आखिरी लाइन कहती है, ‘कमलाथ के नेतृत्व में कांग्रेस कमेटी ने मध्यप्रदेश में शानदार विजय हासिल की।’ इसे टाइपिंग त्रुटि कहा जा सकता है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या पहली गलती से सबक लिया गया? यदि लिया गया होता तो एक-एक शब्द को ध्यान से पढ़ा जाता और तब शायद कमलनाथ को पुन: अपना सिर नहीं पकड़ना पड़ता।

आमतौर पर कोई विज्ञापन जारी करने से पहले उसकी कई बार प्रूफरीडिंग की जाती है तो फिर मुख्यमंत्री से जुड़े विज्ञापन को पुन: जांचना कांग्रेसियों को क्यों याद नहीं रहा, यह समझ से परे है। बहरहाल यह आपसी साजिश है या भूल, ये कांग्रेस का आंतरिक मामला है, पर इतना तय है कि कमलनाथ ने ऐसा जन्मदिन पहले कभी नहीं मनाया होगा और न ही भविष्य में मनाना चाहेंगे।

विज्ञापन में हुई इस गलती को आप यहां देख सकते हैं- 

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कमलनाथ के बर्थडे विज्ञापन पर छपा 'भूल सुधार', उड़ा खूब मजाक

आज संबंधित अखबारों में भूल सुधार के साथ संशोधित विज्ञापन प्रकाशित किया गया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 19 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 19 November, 2019
Kamal Nath

विज्ञापनों से तौबा करने वाली मध्यप्रदेश कांग्रेस ‘विज्ञापन’ को लेकर ही घिर गई है। सोशल मीडिया पर पार्टी का जमकर मजाक बनाया जा रहा है। भाजपा नेताओं को तो जैसे बैठे-बैठाए कांग्रेस पर ‘तीर’ चलाने का मौका मिल गया है और वे इस मौके को बखूबी भुना रहे हैं।

वैसे, इस मामले में ठीकरा विज्ञापन जारी करने वाली एजेंसी के माथे पर फोड़ दिया गया है। आज संबंधित अखबारों में संशोधित विज्ञापन प्रकाशित किया गया है और ‘भूल सुधार’ के माध्यम से बाकायदा यह साफ करने का प्रयास किया गया है कि ‘गलतियों’ का विज्ञापनदाता यानी मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी से कोई लेना देना नहीं है। वैसे, ये समझना मुश्किल है कि नेताओं ने बिना जांचे-परखे ही विज्ञापन को हरी झंडी कैसे दिखा दी? वो भी तब जब विज्ञापन मुख्यमंत्री कमलनाथ के जन्मदिन से जुड़ा हो।

दरअसल, 18 नवंबर को कमलनाथ का जन्मदिन था, इस उपलक्ष्य में कांग्रेस नेताओं की तरफ से लगभग सभी अखबारों में फुल पेज विज्ञापन दिए गए। ऐसा ही एक विज्ञापन मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी की तरफ से जारी किया गया, जिसमें कमलनाथ के जीवन से जुड़ी कुछ बातों पर प्रकाश डाला गया। जन्मदिन जैसे मौकों पर फोकस ‘अच्छी बातों’ पर रहना चाहिए, लेकिन विज्ञापन में कुछ ऐसी बातें भी शामिल हो गईं, जिन्हें पढ़ने के बाद तारीफ से ज्यादा कटाक्ष या तंज का अहसास हुआ।

मसलन- (1) सन 1993 में कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनने की चर्चा थी। बताया जाता है कि तब अर्जुन सिंह ने दिग्विजय सिंह का नाम आगे किया और इस तरह कमलनाथ उस वक्त सीएम बनने से चूक गए। अब 25 साल बाद दिग्विजय के समर्थन से उन्हें मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला। (2) छिंदवाड़ा से कमलनाथ को 1996 में हार का सामना करना पड़ा था। उन्हें सुंदरलाल पटवा ने चुनाव मैदान में पटखनी दी थी।

(3) आपातकाल के बाद जनता पार्टी की सरकार के दौरान संजय गांधी को एक मामले में कोर्ट ने तिहाड़ जेल भेजा था। तब इंदिरा संजय की सुरक्षा को लेकर चिंतित थीं। कहा जाता है कि तब कमलनाथ जानबूझकर एक जज से लड़ पड़े और जज ने उन्हें सात दिन के लिए तिहाड़ भेज दिया। वहां वे संजय गांधी के साथ ही रहे।’         

विज्ञापन की चर्चा आम होते ही भाजपा नेता अपने शाब्दिक ‘अस्त्रों’ को लेकर मोर्चे पर आ गए और कांग्रेस को निशाना बनाना शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर भी कांग्रेस को घेरा गया। इतना सब होने के बाद जाहिर है कि खलबली मचनी थी। कांग्रेस नेता पहले खामोशी साधे रहे फिर डैमेज कंट्रोल के लिए सामने आये।

वरिष्ठ नेताओं द्वारा कहा गया कि कांग्रेस कमेटी ने विज्ञापन जारी नहीं किया है, लेकिन आज के संबंधित अखबारों में विज्ञापन के नीचे प्रकाशित ‘भूल सुधार’ उनके ही दावे को गलत साबित कर रहा है। ‘भूल सुधार’ में लिखा गया है, ‘एजेंसी की गलती के कारण 18 नवंबर के अंक में कुछ त्रुटिपूर्ण पंक्तियां प्रकाशित हो गई थीं। इसका विज्ञापनदाता से कोई लेना-देना नहीं है। इसका हमें खेद है, भूल सुधार करते हुए विज्ञापन दोबारा प्रकाशित किया जा रहा है’। अब भले ही ‘गलती’ का ठीकरा किसी के सिर भी फोड़ा जाए, फजीहत तो कांग्रेस की हो ही गई है। कमलनाथ पर अपनों से मिली इन ‘शुभकामनाओं’ का क्या असर हुआ होगा,  समझा जा सकता है।

ऐसे ही एक अखबार में छपे भूल सुधार को आप यहां देख सकते हैं।

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ASCI: जांच में भ्रामक निकले इन बड़ी कंपनियों के विज्ञापन

टीवी पर आने वाले विज्ञापनों की प्रमाणिकता की जांच करती है भारतीय विज्ञापन मानक परिषद

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 23 October, 2019
Last Modified:
Wednesday, 23 October, 2019
ASCI

टीवी पर आने वाले विज्ञापनों की प्रमाणिकता की जांच करने वाली संस्था 'ऐडवर्टाइजिंग स्‍टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' (ASCI) ने जुलाई में 489 विज्ञापनों की जांच की। ‘एएससीआई’ द्वारा इस बारे में सूचित किए जाने के बाद 151 एडवर्टाइजर्स ने अपने विज्ञापनों को हटा लिया। इसके बाद ‘एएससीआई’ की ‘कंज्यूमर कंप्लेंट्स काउंसिल’ (CCC) ने 338 विज्ञापनों का मूल्यांकन किया और 299 शिकायतों को सही ठहराते हुए जांच के लिए रोका गया।

इन 299 विज्ञापनों में 201 एजूकेशन सेक्टर के, 59 हेल्थकेयर सेक्टर के, नौ पर्सनल केयर के, चार फूड और बेवरेज सेक्टर के और 26 अन्य कैटेगरी के थे। इन सभी विज्ञापनों में ‘एएससीआई’ की गाइडलाइंस का पालन नहीं किया गया था। इन सभी को भ्रामक विज्ञापनों की श्रेणी में रखा गया।  

स्‍वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई (SUO MOTO ACTION)

‘ASCI’ की प्रिंट और टीवी मीडिया सर्विलॉन्‍स ने ‘नेशनल ऐडवर्टाइजिंग मॉनीटरिंग सर्विसेज प्रोजेक्‍ट’ (NAMS) द्वारा स्‍वत: संज्ञान लेकर कुछ विज्ञापनों को जांच के लिए रोका गया। इसके त‍हत 409 विज्ञापनों में से 128 मामले तुरंत निपटा दिए गए। इनमें एडवर्टाइजर्स ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद ये विज्ञापन हटा दिए गए थे। बाकी बचे विज्ञापनों की ‘CCC’ द्वारा जांच की गई और 278 विज्ञापनों के खिलाफ शिकायतों को बरकरार रखते हुए जांच के लिए रोका गया। इन 278 विज्ञापनों में 193 एजुकेशन सेक्टर के, 59 हेल्थ केयर सेक्टर के, सात पर्सनल केयर कैटेगरी के और 19 अन्य कैटेगरी के थे।  

फूड और बेवरेज कैटेगरी में एएससीआई ने जिन विज्ञापनों को भ्रामक पाया है, उनमें ‘ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन कंज्यूमर हेल्थकेयर लिमिटेड’ (हॉर्लिक्स प्रोटीन प्लस) का नाम भी शामिल है। वहीं ‘रसना इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड’ (Rasna Insta EnerG) के टीवी विज्ञापन के दावे को भी फर्जी पाया गया है। यदि पर्सनल केयर कैटेगरी की बात करें तो ‘जायडस वेलनेस लिमिटेड’ (नायसिल) का नाम भी इस लिस्ट में शामिल है। इस विज्ञापन में दावा किया गया है कि यह पाउडर कीटाणुओं का तुरंत खात्मा करता है और तीन दिन में इसके परिणाम दिखने लगते हैं। यह विज्ञापन भी भ्रामक पाया गया। क्योंकि इसमें किसी भी तरह के मार्केट रिसर्च डाटा को नहीं दिखाया गया है।

इसके साथ ही अन्य कैटेगरी में हैवेल्स इंडिया लिमिटेड (Lloyd AC) और ‘कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट’ के दावे भी भ्रामक मिले। हैवेल्स इंडिया लिमिटेड के विज्ञापन में जहां दावा किया गया था कि उनका ए.सी 45 सेकेंड में 18 डिग्री सेल्सियस तापमान कर देता है, जबकि कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट ने पर्किंसन बीमारी के इलाज में अग्रणी होने का दावा किया था, लेकिन इससे संबंधित कोई सबूत नहीं दे सके।

वहीं, ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (Zee Educare) के विज्ञापन में इसे देश का सबसे बड़ा एजुकेशन फेस्टिवल (India's Largest Education Festival) होने का दावा किया गया है, जो सही नही है। जांच में पता चला कि वर्ष 2019 में देश में कई करियर, एजुकेशन और ट्रेनिंग ट्रेड सो हुए। ऐसे में एडवर्टाइजर्स ऐसा कोई भी तुलनात्मक डाटा उपलब्ध नहीं करा सका, जिससे इसके दावे की पुष्टि हो।

टाइम्स इंटरनेट लिमिटेड (TOI App) के प्रिंट विज्ञापन में इसे देश का सबसे ज्यादा भरोसेमंद न्यूज ब्रैंड होने का दावा किया गया है। केवल ‘रॉयटर्स इंस्टीट्यूट इंडिया डिजिटल रिपोर्ट’ (Reuters Institute India Digital News Report) के आधार पर यह दावा उचित नहीं है। यह दावा अस्पष्ट और भ्रामक है। जांच में पता चला कि सर्वे के नमूनों में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले सिर्फ अंग्रेजी भाषा के न्यूज यूजर्स को शामिल किया गया। ऐसे में ये विज्ञापन ‘एएससीआई’ की गाइडलाइंस का उल्लंघन करते मिले।

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‘ZEE’ के पुनीत गोयनका को फिर मिली ये बड़ी जिम्मेदारी

बैठक में एसोसिएशन के कई अन्य पदाधिकारियों का भी किया गया चुनाव

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 01 October, 2019
Last Modified:
Tuesday, 01 October, 2019
Punit Goenka

'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) के एमडी और सीईओ पुनीत गोयनका को लगातार दूसरी बार ‘इंटरनेशनल एडवर्टाइजिंग एसोसिएशन’ (IAA) के इंडिया चैप्टर का प्रेजिडेंट चुना गया है। वहीं, ‘डिस्कवरी’ (साउथ एशिया) की एमडी मेघा टाटा को वाइस प्रेजिडेंट के पद पर चुना गया है। इनके अलावा अन्य पदाधिकारियों में जयदीप गांधी (सचिव), प्रदीप द्विवेदी (कोषाध्यक्ष) और रमेश नारायण (पूर्व प्रेजिडेंट) को शामिल किया गया है।

वहीं, मैनेजिंग कमेटी में अनंत गोयनका (इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप), अभिषेक करनानी (फ्री प्रेस जर्नल), जनक सारदा (देशदूत), एमवी श्रेयम्स कुमार (मातृभूमि ग्रुप) और आई वेंकट (इनाडु ग्रुप) को चुना गया है। 

इस मौके पर पुनीत गोयनका ने कहा, ‘इंडस्ट्री के प्रमुख मुद्दों को लेकर आईएए लगातार पूरी तरह से सक्रिय रहेगी। इस प्रतिष्ठित संस्थान के साथ काम करना वाकई काफी अच्छा अनुभव रहा है और अपने दूसरे कार्यकाल में मैं इसके सदस्यों के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह तैयार हूं। इसके साथ ही उनके सहयोग और समर्थन की अपेक्षा के साथ मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं।’
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विज्ञापनों पर नजर रखने के लिए ASCI ने बनाई नई टीम, ये नाम हुए शामिल

एडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया की 33वीं वार्षिक आम बैठक के बाद हुई बोर्ड मीटिंग में लिया गया फैसला

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Friday, 20 September, 2019
Last Modified:
Friday, 20 September, 2019
ASCI

‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क’ के प्रेजिडेंट रोहित गुप्ता को टीवी पर आने वाले विज्ञापनों की प्रामाणिकता की जांच करने वाली संस्था 'एडवर्टाइजिंग स्‍टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' (एएससीआई) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का नया चेयरमैन चुना गया है। ‘ASCI’ की 33वीं वार्षिक आम बैठक के बाद हुई बोर्ड मीटिंग में उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई। रोहित गुप्ता के पास उपभोक्ता, मीडिया और मनोरंजन उद्योग में प्रमुख पदों पर काम करने का 30 वर्षों से अधिक का अनुभव है।

रोहित गुप्ता को चेयरमैन पद पर चुनने के अलावा ‘बीबीएच कम्युनिकेशंस इंडिया’ (BBH Communications India) के मैनेजिंग पार्टनर सुभाष कामथ को वाइस चेयरमैन चुना गया और ‘आईपीजी मीडिया ब्रैंड्स’ (IPG Mediabrands) के सीईओ शशि सिन्हा को एक बार फिर मानद कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में ‘दैनिक भास्कर’ समूह के निदेशक गिरीश अग्रवाल, ‘गूगल इंडिया’ के डायरेक्टर (सेल्स) विकास अग्निहोत्री, ‘नील्सन इंडिया’ के प्रेजिडेंट (साउथ एशिया) प्रसून बासु, ‘टाटा ग्लोबल बेवरेजेज लिमिटेड’ के डायरेक्टर हरीश भट्ट,‘प्रॉक्टर एंड गैंबल हाइजीन एंड हेल्थ केयर लिमिटेड’ के सीईओ मधुसूदन गोपालन, ‘हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड’ (पर्सनल केयर) के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर और वाइस प्रेजिडेंट संदीप कोहली, ‘एग्जिक्यूटिव एजुकेशन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी’ के अनुबंधक प्रोफेसर एवं सलाहकार प्रोफेसर एसके पालेकर, ‘केचम सम्पर्क प्राइवेट लिमिटेड’ के प्रबंध निदेशक एनएस राजन, ‘सीआईएबीसी’ के पूर्व वाइस चेयरपर्सन अबंति शंकरनारायणन, ‘आदित्य बिड़ला मैनेजमेंट कॉर्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड’ के ग्रुप एग्जिक्यूटिव प्रेजिडेंट डी. शिवकुमार,‘टैपरूट इंडिया कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड’ के सीईओ उमेश श्रीखंडे, ‘हाइपर कलेक्टिव क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड’ के फाउंडर और चीफ क्रिएटिव ऑफिसर (डायरेक्टर) केवी श्रीधर और ‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ के प्रेजिडेंट (रेवेन्यू) शिवकुमार सुंदरम को शामिल किया गया है।

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Fevicol का ऐड तो हुआ वायरल,पर क्या ये लड्डू वाला ऐड देखा है?

फेविकोल के इस ऐड की धुन पर एक विक्रेता का लड्डू बेचने का विडियो भी अब चर्चा में आ रहा है।

Last Modified:
Friday, 30 August, 2019
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हमेशा से अपने विज्ञापनों के जरिए चर्चा बटोरने वाला फेविकोल एक बार फिर नए विज्ञापन के साथ चर्चा का विषय बना है। उसका ये नया विज्ञापन सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हो गया है। आप भी उसके इस विज्ञापन को यहां देख सकते हैं।

ये तो हो गया फेविकोल का ऐड, पर बात सिर्फ यहीं तक नहीं है। बताया जा रहा है कि इसी धुन पर एक स्थानीय विक्रेता का लड्डू बेचने का एक विडियो भी अब चर्चा में आ रहा है। नवभारत टाइम्स के पत्रकार नरेंद्र कुमार मिश्रा ने इस बावत अपने फेसबुक पर कुछ यूं लिखा है, 'फेविकोल का लोकप्रिय और वायरल एड 'शर्माइन का सोफा' बहुत पसंद किया जा रहा है। मुझे भी बेहद पसंद आ रहा था। फेविकोल ने इस ऐड को कंपनी के 60 साल पुरानी होने पर बनाया है,एक परंपरा को दिखाने के लिए। शानदार कंसेप्ट लगा था। इनके पुराने ऐड भी बेहद पसंद आते रहे हैं।'

उन्होंने लिखा है, 'लेकिन जब से लड्डू वाले विडियो को देखा है, एकदम शॉक में हूं। एक स्थानीय लड्डू विक्रेता ने जनवरी 2019 में इसी धुन में यह ऐड बनाया था, अपने लिये। सीधे तौर पर यह नकल का मामला है। बोल भी इसी ऐड से प्रभावित हैं। संभव है कि यह धुन किसी इलाके का लोकगीत हो, जिसे दोनों ने उठाया हो, लेकिन तब इसकी जानकारी देनी चाहिए थी।' आप लड्डू वाला विडियो यहां देख सकते हैं...

नरेंद्र कुमार मिश्रा के अनुसार, अभी भी फेविकोल का पूरा पक्ष आने का इंतजार करूंगा कि उनका पक्ष क्या है। अभी दोनों ऐड सुनें।

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सुस्त इकॉनॉमी के बीच टीवी इंडस्ट्री की बढ़ सकती है 'कमाई'

अर्थव्यवस्थी की सुस्त रफ्तार और ट्राई के नए टैरिफ ऑर्डर को लेकर बनी अनिश्चितता की स्थिति के कारण कई ब्रैंड्स ने साल की शुरुआत में नहीं दिए विज्ञापन

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 29 August, 2019
Last Modified:
Thursday, 29 August, 2019
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सोमवार को गणेश चतुर्थी के साथ ही फेस्टिव सीजन शुरू होने जा रहा है। ऐसे में ब्रॉडकास्टर्स और ब्रैंड्स की नजरें अब इस सीजन पर टिकी हैं और उन्हें पहली छमाही में रही सुस्ती से उबरने की उम्मीद है। हालांकि, इस साल की पहली छमाही में आईपीएल, क्रिकेट वर्ल्ड कप और आम चुनाव जैसे कई बड़े आयोजन थे, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ्तार और ट्राई के नए टैरिफ ऑर्डर को लेकर बनी अनिश्चितता की स्थिति के कारण कई ब्रैंड्स ने अपने विज्ञापन नहीं दिए थे। अब फेस्टिव सीजन में उन्हें रेवेन्यू में 10-15 प्रतिशत ग्रोथ की उम्मीद है।  

‘डेंट्सू एजिस नेटवर्क’ के सीईओ (ग्रेटर साउथ) और चेयरमैन व सीईओ (इंडिया) आशीष भसीन का मानना है कि यह ग्रोथ पिछले साल से बेहतर हो सकती है। उनका कहना है, ‘फेस्टिव सीजन गणपति उत्सव से शुरू होता है और क्रिसमस तक चलता है। मेरा मानना है कि पिछले साल के मुकाबले रेवेन्यू में 10-12 प्रतिशत की ग्रोथ हो सकती है।’

‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स’ के प्रेजिडेंट (नेटवर्क्स सेल्स और इंटरनेशनल बिजनेस) रोहित गुप्ता का कहना है  कि आने वाले फेस्टिव सीजन में दोहरे अंकों (डबल डिजिट) में ग्रोथ होनी चाहिए, क्योंकि पिछली तिमाही अच्छी नहीं रही है। इस कमी को पूरा करने के लिए हमें कम से कम 10-15 प्रतिशत ग्रोथ की उम्मीद है, लेकिन अभी ये प्लान थोड़े लेट हो गए हैं। आमतौर पर अर्थव्यवस्था और खर्च करने को लेकर लोगों के असमंजस के कारण ऐसा होता है। कई ब्रैंड्स अपने खर्चों में कटौती कर रहे हैं। गिरती अर्थव्यवस्था से मीडियम साइज के कई ब्रैंड्स काफी प्रभावित हुए हैं।

‘9एक्स मीडिया’ के चीफ रेवेन्यू ऑफिसर पवन जेलखानी की राय भी रोहित गुप्ता से मिलती जुलती है। जेलखानी का कहना है, ‘इस साल अगस्त तक रेवेन्यू कुछ खास नहीं रहा है। अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी होने के कारण ब्रैंड्स खर्च करने से परहेज कर रहे हैं। ब्रैंड्स और मार्केटर्स से बातचीत करने के बाद मुझे उम्मीद है कि आने वाले दो-ढाई महीने हम सबके लिए काफी अच्छे रहेंगे। दरअसल, मार्केट में मंदी का मूल कारण कंज्यूमर्स द्वारा खर्चों में कटौती करना है। मुझे लगता है कि इसमें अब 18 प्रतिशत की ग्रोथ होगी।’

ट्राई का प्रभाव: भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के नए टैरिफ ऑर्डर को लेकर इस साल की शुरुआत में काफी उथल-पुथल रही थी। नए नियम धीरे-धीरे लागू हुए थे और इससे टीवी पर विज्ञापन खर्च काफी प्रभावित रहा। ‘द पिच मैडिसन एडवर्टाइजिंग आउटलुक रिपोर्ट 2019’ ने अपने पूर्वानुमानों को संशोधित करते हुए विज्ञापन खर्च में गिरावट की बात कही थी, जिसका मुख्य कारण पहली तिमाही में टीवी पर विज्ञापन खर्च में कमी आना था। हालांकि, इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स और ब्रॉडकास्टर्स ने भरोसा जताया है कि इससे विज्ञापन खर्च पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा। भसीन के अनुसार, ‘मुझे नहीं लगता कि ट्राई के मामले का ग्रोथ पर कोई असर पड़ेगा। इससे एडवर्टाइजिंग पर अभी तक कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।’  

हालांकि, गुप्ता ने माना कि एडवर्टाइजर्स के साथ ट्राई के इश्यू को सुलझा लिया गया है और जेलखानी ने दावा किया कि नए टैरिफ ऑर्डर के बाद अब डाटा में स्थिरता आ गई है। उनका कहना है, ‘अब हम देख सकते हैं कि फ्री टू एयर और पे चैनल्स किस तरह का प्रदर्शन कर रहे हैं। जहां तक फेस्टिव सीजन की बात है, टीवी की पहुंच बढ़ी है। मुझे नहीं लगता कि विज्ञापन पर खर्च के मामले में नए टैरिफ ऑर्डर का कोई प्रभाव पड़ेगा।’  

‘Carat India’ की सीनियर वाइस प्रेजिडेंट विनीत पचीसिया का भी मानना है कि नए टैरिफ ऑर्डर के कारण जो ब्रैंड्स पिछले कुछ महीनों से ज्यादा खर्च नहीं कर रहे थे, वे अब फेस्टिव सीजन में इस खर्च में 40-50 प्रतिशत का इजाफा करेंगे। उन्होंने कहा, ‘अगले दो-तीन महीने में विज्ञापन खर्च को बढ़ाने में यह फेस्टिव सीजन निश्चित रूप से मदद करेगा। हालांकि, नए टैरिफ ऑर्डर और डीडी फ्रीडिश से फ्री टू एयर चैनल हटने के कारण चैनल की परफॉर्मेंस पर असर पड़ा है, जिससे विज्ञापन खर्च में कमी देखने को मिली है, लेकिन उम्मीद है कि पिछले कुछ महीनों के दौरान आई इस कमी को फेस्टिव सीजन में दूर कर लिया जाएगा।’

कौन होंगे बड़े विज्ञापनदाता: एक्सपर्ट्स और ब्रॉडकास्टर्स की मानें तो इस फेस्टिव सीजन में विज्ञापन पर खर्च के मामले में ऑटोमोबाइल और ई-कॉमर्स सेक्टर बड़े एडवर्टाइजर्स की भूमिका निभाएंगे। जेलखानी का कहना है कि ई-कॉमर्स दमदार वापसी करेगा। जेलखानी के अनुसार, ‘मुझे लगता है कि एडवर्टाइजिंग खर्च के मामले में ऑटोमोबाइल सेक्टर्स भी वापसी करेगा। ये बड़ी कंपनियां हैं और मात्री दो-तीन तिमाही खराब होने से वे एडवर्टाइजिंग बंद नहीं कर सकते हैं।’

पचीसिया के अनुसार, ‘ऐसे देश में जहां एक के बाद एक त्योहार मनाए जाते हैं और इनमें लोग नई चीजें खरीदना शुभ मानते हैं। इसके साथ ही एक-दूसरे को गिफ्ट देने का चलन भी होता है, तो हमें उम्मीद है कि इस सीजन में ज्वेलरी, कंफेक्शनरी आदि में विज्ञापन खर्च बढ़ेगा। इस फेस्टिव सीजन में विज्ञापन पर ई-कॉमर्स की ओर से बड़ा खर्च किया जा सकता है।’

‘DCMN India’ के डायरेक्टर (ऑफलाइन मीडिया) सुधीर कुमार ने उम्मीद जताई है कि आने वाले कुछ दिनों में ब्रॉडकास्टर्स एडवर्टाइजिंग रेट बढ़ा सकते हैं। सुधीर कुमार का कहना है, ‘इस साल की पहली छमाही में आईपीएल, क्रिकेट वर्ल्ड कप और आम चुनाव जैसे बड़े आयोजन थे। इस दौरान सिर्फ दस प्रतिशत एडवर्टाइजर्स ही एक्टिव दिखे, जबकि अन्य इसी उलझन में रहे कि खर्च करें या नहीं। मीडियम साइज के ब्रैंड्स आईपीएल और क्रिकेट वर्ल्ड कप जैसे आयोजनों में विज्ञापन खर्च नहीं उठा सकते थे, इसलिए अब वे फेस्टिव सीजन में इस कमी को पूरा करेंगे। रही बात रेवेन्यू ग्रोथ की तो वह 15-20 प्रतिशत होने की उम्मीद है। चूंकि ब्रॉडकास्टर्स के लिए भी यह अच्छा मौका है, इसलिए वे अपने एडवर्टाइजिंग रेट को बढ़ा सकते हैं।’

‘TheSmallBigIdea’ के सीईओ और को-फाउंडर हरिकृष्णन पिल्लई का भी कहना है कि इस सीजन में भी ‘फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स’ (FMCG) सेक्टर की ओर से विज्ञापन पर काफी खर्च किया जाएगा। पिल्लई के अनुसार, ‘पूरे साल कुल जितना विज्ञापन पर खर्च होता है, उसका करीब 40 प्रतिशत फेस्टिव सीजन में होता है। ऐसे में ब्रॉडकास्टर्स को अपनी पेशकश को और शानदार बनाना होगा। मेरा मानना है कि विज्ञापन पर खर्च के मामले में इस फेस्टिव सीजन में ई-कॉमर्स और एफएमसीजी सबसे आगे होंगे।’ पिल्लई का मानना है कि छोटे चैनल जो पहले ही व्युअरशिप के लिए दौड़ में शामिल हैं, उन्हें एडवर्टाइजर्स द्वारा अन्य विकल्पों के लिए नजरअंदाज किया जा सकता है।

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सरकारी विज्ञापनों में हुआ 'बड़ा' इजाफा, कई गुना हुआ फायदा

रिपोर्ट्स के अनुसार, जब नरेंद्र मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बने थे, उस दौरान केंद्र सरकार की ओर से पांच साल में प्रचार-प्रसार के लिए 5726 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे

Last Modified:
Tuesday, 27 August, 2019
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सोशल मीडिया के इस दौर में इंटरनेट पर विज्ञापन देने में सरकार ने काफी खर्च किया है। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मिले आंकड़ों का जिक्र करते हुए मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वर्ष 2014-15 से वर्ष 2018-19 तक इस खर्च में सरकार ने करीब चार गुना इजाफा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2014-15 से 2018-19 के दौरान विज्ञापन खर्च 6.64 करोड़ रुपए से बढ़कर 26.95 करोड़ रुपए हो गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस दौरान टीवी और प्रिंट पर विज्ञापन देने में सरकार ने ज्यादा रुचि नहीं दिखाई है और इन मीडियम्स पर विज्ञापन खर्च लगभग उसी स्तर पर पहुंच चुका है, जितना वर्ष 2014-15 में था। रिपोर्ट्स के अनुसार, जब नरेंद्र मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बने थे, उस दौरान केंद्र सरकार की ओर से पांच साल में प्रचार-प्रसार के लिए 5726 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे।

इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस बार के लोकसभा चुनाव में आचार संहिता लागू होने से पहले 100 दिनों के भीतर विज्ञापनों पर 367 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे।

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एडवर्टाइजिंग खर्च के मामले में जानिए क्या कहती है DAN की ये रिपोर्ट

विज्ञापन खर्च के मामले में देश में टीवी अभी भी काफी अहम बना हुआ है

Last Modified:
Saturday, 15 June, 2019
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डेंट्सू एजिस नेटवर्क (DAN) ने पिछले दिनों विज्ञापन पर खर्च के मामले को लेकर पूर्वानुमान रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019 में भारत में विज्ञापन खर्च 11.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 69.700 करोड़ रुपए होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि इसके पीछे पिछले दिनों हुए आम चुनाव और इंग्लैंड में चल रहा क्रिकेट वर्ल्ड कप प्रमुख कारण है।

एजेंसी का कहना है कि डिजिटल मीडिया पर विज्ञापन खर्च की बात करें तो यह वर्ष 2019 में 32.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 14410 करोड़ रुपए होने का अनुमान है। यह कुल विज्ञापन खर्च का 21 प्रतिशत शेयर है। डिजिटल मीडिया के बावजूद देश में टीवी अभी भी विज्ञापन खर्च के मामले में काफी अहम बना हुआ है और वर्ष 2019 में कुल विज्ञापन खर्च में इसकी 39 प्रतिशत भागीदारी का अनुमान है। माना जा रहा है कि इस माध्यम में वर्ष 2019 में 9.5 प्रतिशत की वृद्धि होगी और यह 27140 करोड़ रुपए के आंकड़े को छू लेगा।

इस बारे में डेंट्सू एजिस नेटवर्क (DAN) ग्रुप की कंपनी ‘एंप्लीफाई इंडिया’ (Amplifi India) के प्रेजिडेंट कार्तिक अय्यर का कहना है, ‘भारत काफी बदलाव के दौर से गुजर रहा है। यहां मोबाइल फोन पर ऑनलाइन विडियो का विस्तार हो रहा है और टीवी की भूमिका बदल रही है।’  इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ग्लोबल स्तर पर विज्ञापन खर्च में कम बढ़ोतरी के बीच एशिया पैसिफिक में विज्ञापन पर खर्च में वर्ष 2019 में चार प्रतिशत तक बढ़ोतरी की उम्मीद है।

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देखें विडियो: पाक के टीवी चैनल ने यूं उड़ाया 'अभिनंदन' का मजाक

किक्रेट वर्ल्ड कप में 16 जून को होगा भारत-पाकिस्तान के बीच मुकाबला

Last Modified:
Wednesday, 12 June, 2019
Abhinandan

भारतीय वायुसेना द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ की गई एयर स्ट्राइक के बाद भारतीय विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान किसी न किसी वजह से आए दिन पाकिस्तानी मीडिया में छाये रहते हैं। पिछले दिनों लोकसभा चुनाव में बीजेपी की भारी जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने भाषण में इस्तेमाल किए गए अभिनंदन शब्द को पाकिस्तान के एक न्यूज चैनल के एंकर ने विंग कमांडर अभिनंदन समझ लिया था और उसी के अनुसार न्यूज भी प्रसारित कर दी थी। हालांकि इसके बाद न्यूज एंकर का सोशल मीडिया पर काफी मजाक भी उड़ा था।

अब क्रिकेट वर्ल्ड कप को लेकर अभिनंदन वर्तमान एक बार फिर चर्चा में हैं। दरअसल, 16 जून को होने वाले भारत-पाकिस्तान के मैच से पूर्व पाकिस्तानी टीवी चैनल ‘जैज टीवी’ ने एक विज्ञापन में अभिनंदन वर्तमान का डुप्लीकेट कैरेक्टर दिखाते हुए उनका मजाक उड़ाया है।

33 सेकेंड के इस विडियो में एक शख्स अभिनंदन वर्तमान जैसी मूंछे रखे हुए है और उनकी जैसी नकल कर रहा है।  हालांकि इस शख्स ने सेना की वर्दी की जगह भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी पहन रखी है। इस विज्ञापन में जब भी उस व्यक्ति से भारतीय टीम के अंतिम-11 के बारे में पूछा जाता है तो अभिनंदन द्वारा वायरल बयान के लहजे में जबाव देते हुए वह कहता है, ‘माफ कीजिए, मैं आपको यह नहीं बता सकता।‘

विज्ञापन में इस व्यक्ति को उसी तरह चाय पीते हुए दिखाया गया है, जिस तरह अभिनंदन का विडियो वायरल हुआ था। यही नहीं, विज्ञापन के आखिर में जब यह व्यक्ति जाने लगता है तो एक शख्स उन्हें रोककर कहता है, ‘एक सेकेंड रुको, कप कहां लेकर जा रहे हो?’ पाकिस्तानी टीवी द्वारा बनाए गए इस विज्ञापन को भारतीय यूजर्स ने शर्मनाक करार देते हुए सोशल मीडिया पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

 

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