दो कंपनियों के विज्ञापन को लेकर उठे सवाल, कॉस्ट कटिंग का नायाब नमूना है या गलती?

आमतौर पर कंपनियां कम चर्चित मॉडल्स को प्रतियोगी कंपनियों के विज्ञापन में इस्तेमाल करती रहती हैं, लेकिन यहां मामला अलग हो गया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 15 October, 2019
Last Modified:
Tuesday, 15 October, 2019
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मंदी की आहट के बीच कॉस्ट कटिंग के कई नायाब नमूने देखने को मिलते हैं। एक ऐसा ही नमूना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, अभी ये स्पष्ट नहीं हुआ है कि ये वाकई कॉस्ट कटिंग का परिणाम है या फिर गलती हो गई है। दरअसल, टाइम्स ऑफ इंडिया के 13 अक्टूबर के मुंबई संस्करण के पेज 6 पर एलजी कंपनी का विज्ञापन छपा है, जिसमें एक परिवार को दिवाली मनाते दिखाया गया है। इसी तरह पेज 7 पर भी इलेक्ट्रॉनिक एप्लायंस कंपनी व्हर्लपूल का विज्ञापन है।

गौर करने वाली बात ये है कि व्हर्लपूल के विज्ञापन में भी वही परिवार दिवाली मना रहा है जो एलजी के विज्ञापन में है। यानी एक ही परिवार दो अलग-अलग कंपनियों का प्रचार कर रहा है। वैसे ये कोई नई बात नहीं है। आमतौर पर कंपनियां कम चर्चित मॉडल्स को प्रतियोगी कंपनियों के विज्ञापन में इस्तेमाल करती रहती हैं, लेकिन यहां मामला इसलिए अलग हो गया है, क्योंकि दोनों विज्ञापन एक ही दिन एक ही अखबार में प्रकाशित हुए हैं।

मोदी सरकार के डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म ‘मेरी सरकार (MyGov India)’ के सीईओ रह चुके अरविंद गुप्ता ने दोनों ही विज्ञापनों की कटिंग को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया है। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा है, ‘जब एक ही परिवार दो अलग-अलग ब्रैंड, टीवी और माइक्रोवेव का प्रचार कर रहा है।’ गुप्ता के इस ट्वीट को काफी पसंद किया जा रहा है। लोगों ने अपने-अपने अंदाज में विज्ञापन कंपनी पर चुटकी ली है। लवेश नामक यूजर ने लिखा है, ‘परिवार टीवी एलजी से खरीदेगा और माइक्रोवेव व्हर्लपूल से।’ इसी तरह एक अन्य यूजर ने कुछ साल पहले प्रकाशित दो विज्ञापन पोस्ट किये हैं, जिसमें एक ही महिला को रिटेल आउटलेट ‘मोर’ और ‘बिग बाजार’ से खरीदारी करते दिखाया गया है।

संजीवा नामक यूजर ने इसे कंपनी की चालबाजी करार देते हुए लिखा है, ‘विज्ञापन कंपनी एक ही होगी, जिसके पास एलजी और व्हर्लपूल दोनों के विज्ञापन अधिकार होंगे। लागत और बिलिंग कम करके ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए विज्ञापन कंपनी ने एक ही परिवार की फोटो को दो अलग-अलग विज्ञापनों के लिए इस्तेमाल किया है।’

यदि आप दोनों विज्ञापनों को ध्यान से देखें तो व्हर्लपूल के विज्ञापन में फोटो को थोड़ा अलग अंदाज में लगाया गया है, शायद इसलिए कि दिवाली मनाता परिवार एक जैसा न लगे। हालांकि, अरविंद गुप्ता जैसी पारखी नजर रखने वाले इस ‘अंदाज’ में छिपे भेद को पहचान ही गए। आप भी इन दोनों विज्ञापनों को यहां देख सकते हैं।

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इन दो बड़ी कंपनियों ने सोशल मीडिया से बनाई दूरी

‘यूनिलीवर’ (Unilever) ने कथित तौर पर घोषणा की है कि वह संयुक्त राज्य अमेरिका में फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर पर इस साल के अंत तक के लिए अपना विज्ञापन बंद कर देगी

Last Modified:
Saturday, 27 June, 2020
Social-Media

एक बड़े घटनाक्रम में कंज्यूमर गुड्स कंपनी ‘यूनिलीवर’ (Unilever) ने कथित तौर पर घोषणा की है कि वह संयुक्त राज्य अमेरिका में फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर पर इस साल के अंत तक के लिए अपना विज्ञापन बंद कर देगी। इसके अलावा ‘कोका कोला’ (Coca-Cola) ने भी कहा है कि वह कम से कम 30 दिनों तक सोशल मीडिया पर अपने विज्ञापनों को रोक देगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों कंपनियों का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर अभद्र भाषा, भेदभाव और नस्लवादी कंटेंट के कारण उन्होंने यह निर्णय लिया है। 

रिपोर्ट्स के अनुसार, फेसबुक पर नफरत फैलाने वाले भाषण और विभाजनकारी विमर्श का आरोप लगाते हुए यूनिलीवर ने यह घोषणा की है। यूनिलीवर का कहना है कि नवंबर में प्रस्तावित राष्ट्रपति चुनाव से पहले अमेरिका में ध्रुवीकृत माहौल के कारण यह फैसला किया गया है। बता दें कि पुलिस हिरासत में अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड (George Floyd) की मौत के बाद अमेरिका में नस्लीय तनाव फैला हुआ है। ऐसे में कुछ दिनों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चल रहे नस्लवादी विज्ञापन का विरोध हो रहा है, इसीलिए कई कंपनियां अपने विज्ञापनों पर रोक लगा रही हैं। इस निर्णय के साथ ही यह कंपनी जॉर्ज फ्लॉयड की मृत्यु के बाद अमेरिकी नागरिक अधिकार समूहों द्वारा शुरू किए गए ‘स्टॉप हेट फॉर प्रॉफिट’ (Stop Hate for Profit) अभियान के हिस्से के रूप में फेसबुक के बढ़ते विज्ञापन बहिष्कार में शामिल हो गई है।

यूनिलीवर की ओर से कथित रूप से जारी एक स्टेमेंट में कहा गया है, ‘इस समय इन प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापन जारी रखना लोगों और समाज के लिए मूल्य (Value) नहीं बढ़ाएगा। हम पूरे मामले पर नजर रखेंगे और जरूरत पड़ने पर अपनी वर्तमान स्थिति में वापस आएंगे।’

इस बारे में कोका कोला कंपनी के चेयरमैन और सीईओ जेम्स क्विंसी ने एक स्टेटमेंट में कहा है, ‘दुनिया में नस्लवाद के लिए कोई जगह नहीं है और सोशल मीडिया पर भी नस्लवाद के लिए  कोई जगह नहीं है।’ उन्होंने कहा कि कोका कोला इस ‘ब्रेक’ का उपयोग अपनी विज्ञापन नीतियों को फिर से निर्धारित करने के लिए करेगी कि क्या इनमें संशोधन की आवश्यकता है। हालांकि, कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से दूर रहने का मतलब यह नहीं है कि वह नागरिक अधिकार समूहों द्वारा शुरू किए गए आंदोलन में शामिल हो रही है।

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CBI के 'निशाने' पर आए DAVP के कई अधिकारी, जांच के घेरे में फंसे कुछ अखबार

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीबीआई ने डीएवीपी के कुछ अधिकारियों समेत दो लोगों के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू की है।

Last Modified:
Friday, 26 June, 2020
Newspaper

‘केंद्रीय जांच ब्यूरो’ (सीबीआई) द्वारा ‘विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय’ (डीएवीपी) के कुछ अधिकारियों के खिलाफ आरंभिक जांच शुरू करने की खबरें सामने आई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन अधिकारियों ने सरकारी विज्ञापन कथित रूप से आउट ऑफ सर्कुलेशन (out-of-circulation) अखबारों को आवंटित कर दिए थे। इस संस्था से बाहर के दो अन्य लोग भी जांच के दायरे में आए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोप है कि इन अधिकारियों ने ऐसे अखबार मालिकों के साथ मिलकर यह साजिश रची, जिनका या तो न्यूनतम सर्कुलेशन है अथवा वह काफी समय पहले बंद हो चुके हैं। विजिलेंस अधिकारियों द्वारा अगस्त 2019 में डीएवीपी जैसे सरकारी विभागों को ध्यान में रखकर की गई राष्ट्रव्यापी कार्रवाई में इस तरह की धोखाधड़ी का मामला सामने आया था।

जांच के दौरान अधिकारियों को वर्ष 2016 से 2019 के दौरान दिए गए सरकारी विज्ञापनों में गड़बड़ी का पता चला। बताया जाता है कि ये अखबार अपनी मौजूदगी दिखाने के लिए आवश्यक न्यूनतम प्रतियां छाप रहे थे, लेकिन डीएवीपी के कुछ अधिकारियों की मदद से सरकारी विज्ञापन प्राप्त करने के लिए प्रसार संख्या काफी अधिक बता रहे थे। कहा जा रहा है कि इस धोखाधड़ी से सरकारी खजाने को करीब 65 लाख रुपए का नुकसान हुआ है।

इन मीडिया रिपोर्ट्स में सीबीआई अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि यदि जांच में और सबूत मिलते हैं तो एफआईआर दर्ज की जाएगी।

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शुरू होने लगी विज्ञापनों की शूटिंग, तय हुईं ये गाइडलाइंस

एसोसिएशन ऑफ एडवर्टाइजिंग प्रड्यूसर्स ने लॉकडाउन के बाद पिछले दिनों देश में कॉमर्शियल फिल्म प्रॉडक्शन के लिए तमाम गाइडलाइंस तय की हैं।

Last Modified:
Tuesday, 23 June, 2020
Shooting

लॉकडाउन के कारण काफी समय से ठप पड़ी विज्ञापनों की शूटिंग फिर शुरू होने की खबर सामने आई है। दरअसल, कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए ‘एसोसिएशन ऑफ एडवर्टाइजिंग प्रड्यूसर्स’ (ASAP) समेत ‘FWICE’, ‘IMPAA’, ‘WIPFA’, ‘IFTPC’ और IFTDA जैसे तमाम निकायों ने सर्वसम्मति से 19 मार्च से सभी शूटिंग कैंसिल करने का निर्णय लिया था। अब खबर है कि एसोसिएशन ऑफ एडवर्टाइजिंग प्रड्यूसर्स ने लॉकडाउन के बाद पिछले दिनों देश में कॉमर्शियल फिल्म प्रॉडक्शन के लिए तमाम गाइडलाइंस तय की हैं।

इन गाइडलाइंस में घर से काम (Work From Home) की स्ट्रैटेजी को बढ़ावा देने, कार्यस्थल पर सोशल डिस्टैंसिंग का पालन करने और कार्यस्थल पर स्टाफ की स्क्रीनिंग करने जैसे सामान्य अभ्यास शामिल हैं। इसके अलावा गाइडलाइंस में यह भी तय किया गया है कि सहकर्मियों के बीच छह फीट की दूरी रहनी चाहिए और ग्लब्स के साथ हर समय मुंह पर मास्क भी रहना चाहिए। इन गाइडलाइंस में कहा गया है कि कार्यस्थल को सैनिटाइज किया जाना चाहिए। साबुन के साथ हाथ धोने की सुविधा होनी चाहिए, वहीं सेंसर आधारित सैनिटाइजर्स को बढ़ावा देना चाहिए। इसके अलावा, मैन्युअल रूप से संचालित डिस्पेंसर को भी हर समय संभालकर रखा जाना चाहिए।

इन गाइडलाइंस के अनुसार, कार्यस्थल को कोविड-19 रिस्क से मुक्त होना चाहिए। यदि किसी को बीमारी के लक्षण दिखें चाहे वह सामान्य खांसी-जुकाम हो, उसकी अनुपस्थिति अथवा छुट्टी पर जोर दिया जाना चाहिए। वहीं, सभी एम्प्लॉयीज को आने-जाने के लिए परिवहन की उचित और सुरक्षित व्यवस्था की जानी चाहिए।

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लॉकडाउन में रेडियो पर सबसे ज्यादा रहे इस तरह के विज्ञापन

इन दिनों अपने स्वास्थ्य को लेकर लोग ज्यादा डरे हुए हैं और अपने मेडिकल खर्चों को बीमा में कवर करने के लिए इसमें निवेश कर रहे हैं

Last Modified:
Wednesday, 10 June, 2020
Radio

देश-दुनिया में इन दिनों कोरोनावायरस (कोविड-19) का कहर छाया हुआ है। इन दिनों अपने स्वास्थ्य को लेकर लोग ज्यादा डरे हुए हैं और अपने मेडिकल खर्चों को बीमा में कवर करने के लिए इसमें निवेश कर रहे हैं। ऐसे में इंश्योरेंस कैटेगरी में काफी उछाल देखा जा रहा है। वहीं, इस उछाल को देखते हुए इस समय इस सेक्टर के लिए विज्ञापन भी काफी महत्वपूर्ण हो जाता है।

संकट के इस दौर में प्रिंट, डिजिटल और रेडियो के मुकाबले टीवी की व्युअरशिप में काफी इजाफा देखा गया है। लेकिन, लाइफ इंश्योरेंस कैटेगरी के लिए टीवी सबसे पसंदीदा माध्यम नहीं रहा, बल्कि वह रेडियो था। लॉकडाउन के दौरान रेडियो ने 51 मिलियन लोगों तक अपनी पहुंच बनाई।

‘टैम एडेक्स’ (TAM AdEx) की रिपोर्ट के अनुसार, रेडियो को छोड़कर सभी माध्यमों में लाइफ इंश्योरेंस कैटेगरी के विज्ञापनों में कमी देखने को मिली है। इस साल मार्च से मई के बीच टीवी माध्यमों पर विज्ञापनों में उल्लेखनीय रूप से 47 प्रतिशत और डिजिटल माध्यमों में 25 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। हालांकि, इस अवधि के दौरान रेडियो पर दिए जाने वाले विज्ञापनों में 2.5 गुना से अधिक इजाफा हुआ है। इस अवधि के दौरान पिछली साल की तुलना में इसमें 163 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।  

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि रेडियो पर विज्ञापन खर्च की श्रेणी में जबरदस्त वृद्धि के लिए पहुंच (reach) के अलावा, दो-तीन कारक (factors) हो सकते हैं। इनमें पहला कारण तो यह है कि प्रिंट और आउटडोर की गैरमौजूदगी ने रेडियो की तरफ विज्ञापन खर्च बढ़ाया। इसके अलावा विज्ञापन की कीमतें (ad rates) भी एडवर्टाइजिंग के लिए प्लेटफॉर्म को चुनने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कोविड-19 के दौरान विभिन्न सेक्टर्स में विज्ञापनों की कीमतों में कमी आई, लेकिन दूसरे माध्यमों के मुकाबले टीवी अभी भी महंगा माध्यम बना हुआ है।

इस बारे में ‘Wavemaker India’ के चीफ क्लाइंट ऑफिसर और हेड (West) शेखर बनर्जी का कहना है, ‘ऐसे समय में अधिक आवश्यक होने पर भी बीमा COVID के लिए अछूता नहीं है। इस समय कंज्यूमर्स बचाव (preservation) की मुद्रा में हैं और वे निवेश करने के मूड में नहीं हैं। दूसरी बात ये है कि वित्तीय वर्ष समाप्त हो चुका है और नए साल की शुरुआत नए बजट के साथ नहीं हो सकती है। इसके साथ भी तमाम कारण हैं।’

उनका कहना है, ‘जीवन के प्रत्येक पहलू की तरह शंका समाधान करना एडवर्टाइजिंग का अभिन्न हिस्सा है। सामान्य परिस्थितियों में जीवन बीमा जैसी उच्च भागीदारी खरीद के लिए खरीदारों के दिमाग में अधिकांश तर्कों को संतुष्ट करने के लिए काफी समझाने-बुझाने की आवश्यकता होती है। हालांकि, इस वैश्विक महामारी में अधिकांश लोगों के लिए बीमा आवश्यक वित्तीय निवेश बन गया है। ’

वहीं, ‘Carat India’ की एसोसिएट वाइस प्रेजिडेंट (डिजिटल मीडिया प्लानिंग) मेघा आहूजा का कहना है, ‘इस दौरान तमाम लोगों ने ऑनलाइन बीमा खरीदने में रुचि दिखाई है। इसके अलावा कुछ बीमा प्रदाता कोविड-19 पर केंद्रित कुछ खास पॉलिसी और अल्प अवधि की पॉलिसी लॉन्च कर रही हैं। इससे इस कैटेगरी में बढ़ोतरी हुई है। लॉकडाउन के दौरान रेडियो की लिसनरशिप बढ़ी है। अधिकांश लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों ने अपने बजट को रेडियो की ओर शिफ्ट किया है, ताकि उन्हें बेहतर पहुंच मिल सके।’

इस बारे में ‘Aegon Life Insurance’ के सीएफओ और प्रिंसिपल ऑफिसर सतीश्वर बालाकृष्णन के अनुसार, ‘रेडियो हमारी मार्केटिंग का हिस्सा रहा है, लेकिन हमारे लिए डिजिटल मीडियम काफी बड़ा हिस्सा रहा है। हालाकिं, हम लगभग सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपने विज्ञापन और मार्केटिंग कैंपेन चलाते हैं, लेकिन हमारे प्रॉडक्ट्स की मार्केटिंग करने और विज्ञापन करने में फेसबुक सबसे ज्यादा उपयोगी प्लेटफॉर्म साबित हुआ है।’

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विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर ‘द हिन्दू ग्रुप’ ने इंसानों को यूं दिखाया 'आईना'

विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर ‘द हिन्दू ग्रुप’ ने अपने एक विज्ञापन में केरल के पलक्कड़ में एक हाथिनी की मौत पर अपना ध्यान केंद्रित किया है, जिसने लोगों के दिमाग को झकझोर दिया है।

Last Modified:
Friday, 05 June, 2020
The Hindu

विश्व वन्यजीव दिवस (World Wildlife Day) के मौके पर ‘द हिन्दू ग्रुप’ ने कछुए का एक विचारणीय विज्ञापन प्रकाशित कर जिस तरह से प्रशंसा बंटोरी थी, उसी अंदाज में यह ग्रुप विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) के मौके पर एक और तीखी प्रतिक्रिया के साथ आगे आया है। ग्रुप ने केरल के पलक्कड़ में एक हाथिनी की मौत पर अपना ध्यान केंद्रित किया है, जिसने लोगों के दिमाग को झकझोर कर रख दिया है।

इस घटना पर केंद्रित अपने नए विज्ञापन में, द हिन्दू ग्रुप ने विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) पर एक संदेश जारी किया है, जिसमें इंसान की लालसा और अहंकार पर प्रकाश डाला गया है, जिसकी कीमत जानवरों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है।

यह विज्ञापन ‘जंगल के बेताज बादशाह’ को नीचे गिराने के लिए ‘बहादुर इंसानों’ की व्यंग्यात्मक रूप से प्रशंसा करता है। विज्ञापन में हाथी की मौत की वजह का उल्लेख किया गया है कि जब जानवर को मारने के लिए एक बंदूक नहीं होती है, तो कैसे खाने में घातक जहर देकर ‘हाथी के शासनकाल’ को समाप्त कर दिया जाता है। यह ओक के पेड़ों, व्हेल, पक्षियों और सदाबहार जंगलों जैसे मानव "साहस" के अन्य हताहतों के नाम पर भी जाता है।

बता दें कि यह घटना 27 मई को सामने आई थी। केरल के साइलेंट वैली नेशनल पार्क की एक गर्भवती हथिनी को कुछ लोगों ने पटाखों से भरा अनानास खिला दिया था। अनानास चबाते ही उसमें हुए विस्फोट से हथिनी का जबड़ा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। असहनीय दर्द के कारण वह कुछ भी खाने-पीने में असमर्थ थी, जिसके बाद 15 साल की इस गर्भवती हथिनी की मलप्पुरम में वेल्लियार नदी में खड़े खड़े मौत हो गई थी।

 

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Kent ने वापस लिया अपना यह विज्ञापन, मांगी माफी

हेल्थकेयर कंपनी ‘केंट आरओ सिस्टम्स’ (Kent RO Systems) ने तमाम आलोचनाओं के बाद अपने ‘आटा मेकर’ के विज्ञापन को बुधवार को वापस ले लिया है।

Last Modified:
Thursday, 28 May, 2020
Kent

हेल्थकेयर कंपनी ‘केंट आरओ सिस्टम्स’ (Kent RO Systems) ने तमाम आलोचनाओं के बाद अपने ‘आटा मेकर’ के विज्ञापन को बुधवार को वापस ले लिया है। यही नहीं, कंपनी ने इसके लिए माफी भी मांगी है। दरअसल, पिछले दिनों अपने आटा और ब्रेड मेकर के लिए जारी विज्ञापन में साफ-सफाई पर जोर देते हुए ऑटोमेशन (automation) की वकालत की थी। इसके साथ ही कंपनी ने नए उत्पाद में घरेलू सहायिकों के आटा गूंथने के प्रति सावधान रहने की चेतावनी दी थी।

विज्ञापन में कंपनी ने कहा था, ‘क्या आप अपनी मेड (घरेलू सहायिका) को घर पर आटा गूंथने देते हैं? उनके हाथ इंफेक्टेड हो सकते हैं’ इसके स्थान पर कंपनी ने उसके नए उत्पाद को उपयोग करने की सलाह दी थी। ऐसे में घरेलू सहायिकाओं के प्रति श्रेणीगत भेदभाव और स्त्री द्वेषी होने के चलते कंपनी को अपने इस विज्ञापन के लिए भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा था।

इसके बाद कंपनी ने अपना वह विज्ञापन वापस ले लिया है। इस बारे में कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और चेयरमैन महेश गुप्ता ने बताया, ‘हमने केंट आटा मेकर के विज्ञापन को वापस ले लिया है और यह दोबारा दिखाई नहीं देखा। यह अंजाने में हुआ था। यह विज्ञापन गलत था और इसलिए इसे वापस ले लिया गया है। इस विज्ञापन को पब्लिश करने के लिए हमें खेद है। हम समाज के सभी वर्गों का समर्थन और सम्मान करते हैं।’  

बता दें कि इस बारे में तमाम लोगों ने टीवी पर आने वाले विज्ञापनों की प्रमाणिकता की जांच करने वाली संस्था 'ऐडवर्टाइजिंग स्‍टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' (ASCI) को भी सूचित किया था। इस मामले में ‘ASCI’ का कहना है कि उसे तमाम शिकायतें मिली थीं, लेकिन चूंकि अब इस विज्ञापन को हटा लिया गया है, इसलिए शिकायतों पर आगे कार्रवाई नहीं की गई है।

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आर्थिक पैकेज का विज्ञापन जगत पर क्या पड़ेगा असर, विशेषज्ञों ने किया आकलन

पीएम मोदी के 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज के प्रमुख पहलुओं को साझा करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एमएसएमई सेक्टर के लिए सरकार की प्रतिबद्धताओं की बात कही है

Last Modified:
Thursday, 14 May, 2020
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज के कुछ प्रमुख पहलुओं को साझा करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को अपने भाषण में एमएसएमई (MSME) क्षेत्र के लिए सरकार की प्रतिबद्धताओं की बात कही है। भारतीय उद्योग जगत ने इस क्षेत्र को बढ़ावा देने का स्वागत किया है, वहीं विज्ञापन जगत को भी कोरोना संकट के इस दौर में पुनरुद्धार की उम्मीद दिखाई दे रही है।

 इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, इस पैकेज के बाद सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग की डिमांड और सप्लाई की चेन शुरू होने पर उनके द्वारा विज्ञापन पर खर्च फिर शुरू करने की संभावना है। ‘हवास ग्रुप इंडिया’ (Havas Group India) के सीईओ राणा बरुआ ने वित्तमंत्री के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा है, ‘कुल मिलाकर यह काफी सकारात्मक और उत्साहजनक है। प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत का जो विजन तैयार किया है, मुझे लगता है कि वित्त मंत्री की घोषणा सही दिशा में है और इससे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग को काफी फायदा होगा और इस चुनौतीपूर्ण समय में सुनिश्चित करना होगा कि कंज्यूमर के हाथ में थोड़े पैसे भी हों।’

‘Gozoop’ के सीईओ और को-फाउंडर अहमद आफताब नकवी का कहना है कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग को अपने टार्गेट ऑडियंस तक पहुंचने के लिए डिजिटल एडवर्टाइजिंग पर पहले के मुकाबले अधिक भरोसा है, ऐसे में डिजिटल मार्केटिंग के आगे बढ़ने की उम्मीद है। ‘लोकल के लिए वोकल’ (Local ke liye vocal) थीम डिजिटल के अलावा किसी अन्य माध्यम के लिए अधिक उपयुक्त नहीं हो सकती है। नकवी का कहना है, ‘देश में डिजिटल की पहुंच और तेजी से बढ़ेगी, जिसका मतलब है कि अधिकांश ब्रैंड्स के इनवेस्टमेंट अब डिजिटल का रुख करेंगे।’

‘Bang In The Middle’ के मैनेजिंग पार्टनर और चीफ क्रिएटिव ऑफिसर प्रताप सूथान (Prathap Suthan) का कहना है, ‘ब्रैंड्स ज्यादा समय तक एडवर्टाइजिंग से दूर नहीं रह सकते हैं। क्योंकि जब आप (ब्रैंड्स) विज्ञापन पर खर्च नहीं करते हैं तो आप दिखाई नहीं देंगे और फिर दौड़ से बाहर हो जाएंगे। उनका कहना है कि बीटूबी (b2b) ब्रैंड्स एक-दूसरे के संपर्क में रहेंगे और एक साधारण ई-मेल अथवा फोन से उनका बिजनेस दोबारा शुरू हो सकता है, लेकिन बीटूसी (b2c) ब्रैंड्स के लिए यह इतना आसान नहीं होगा। कोविड-19 के बाद विभिन्न मोर्चों पर क्लाइंट्स को आश्वासन देना होगा और उनका भरोसा जीतना होगा। आपको एडवर्टाइज करने की जरूरत है और यह भी नहीं भूलना होगा कि फेस्टिव सीजन भी आने वाला है। इस संकट से बाहर निकलने का यह सही समय है।’

‘Khaitan & Co’ के पार्टनर अतुल पांडे का भी यही मानना है। पांडे का कहना है, ‘कोविड-19 के बाद ‘MSME’ तेजी से आगे बढ़ेगा और उनके मार्केटिंग खर्च में बढ़ोतरी होगी।’ उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जैसे ही घरेलू खपत बढ़ेगी और नए मार्केट खुलेंगे, ‘MSME’ हर संभव तरीके से बाजार में हिस्सेदारी हासिल करने की कोशिश करेगा।।

 ‘Hyper Connect Asia’ के को-फाउंडर और ग्रोथ लीड अंकुर पुजारी का करना है कि सोशल मीडिया डाटा का इस्तेमाल बाजार के ट्रेंड को समझने के लिए किया जा सकता है। सोशल मीडिया पर तमाम कैंपेन और विज्ञापन किए जाने की जरूरत है, ताकि कम निवेश में ज्यादा रेवेन्यू जुटाया जा सके। वहीं, ‘Pocket Aces’ के वाइस प्रेजिडेंट (Finance and Operations) कुणाल लखारा का कहना है, ‘MSME के लिए टर्नओवर और निवेश की सीमा बढ़ाकर नए सिरे से इसका गठन करने से हमें सरकारी योजनाओं के तहत कई संस्थाओं में बहुत सारे लाभ दिखाई देंगे और इससे देश को वापस अपने पैर जमाने में और आने वाले समय में काफी ग्रोथ करने में मदद मिलेगी।’

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The Social Street के चेयरमैन और फाउंडिंग पार्टनर प्रताप बोस ने उठाया ये बोल्ड स्टेप

एडवर्टाइजिंग इडंस्ट्री में जाना-माना नाम प्रताप बोस पूर्व में ‘द एडवर्टाइजिंग क्लब’ के प्रेजिडेंट भी रह चुके हैं

Last Modified:
Friday, 08 May, 2020
Pratap Bose

इंटीग्रेटिड एडवर्टाइजिंग एजेंसी ‘द सोशल स्ट्रीट’ के चेयरमैन और फाउंडिंग पार्टनर प्रताप बोस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से यह खबर आई है। बता दें कि बोस एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री का जाना-माना नाम हैं। वह पूर्व में ‘द एडवर्टाइजिंग क्लब’ (The Advertising Club) के प्रेजिडेंट भी रह चुके हैं।

बता दें कि बोस ने ‘डीडीबी मुद्रा’ (DDB Mudra) से अलग होने के बाद जून 2015 में ‘द सोशल स्ट्रीट’ की स्थापना की थी। वह ऑगिल्वी (Ogilvy) से भी जुड़े हुए थे और सीईओ के पद से इस्तीफा देने के बाद वर्ष 2008 में एजेंसी को अलविदा कह दिया था।

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ASCI: शिकायत के बाद 110 एडवर्टाइजर्स ने वापस लिए अपने विज्ञापन

'ऐडवर्टाइजिंग स्टैंखडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' (ASCI) ने इस साल जनवरी में 342 विज्ञापनों के खिलाफ शिकायतों की जांच की

Last Modified:
Saturday, 02 May, 2020
ASCI

टीवी पर आने वाले विज्ञापनों की प्रमाणिकता की जांच करने वाली संस्था 'ऐडवर्टाइजिंग स्‍टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' (ASCI) ने इस साल जनवरी में 342 विज्ञापनों के खिलाफ शिकायतों की जांच की। ‘ASCI’  द्वारा सूचित किए जाने के बाद 110 एडवर्टाइजर्स ने अपने विज्ञापनों को हटा लिया।

‘एएससीआई’ की ‘कंज्यूमर कंप्लेंट्स काउंसिल’ (CCC) ने शेष बचे 232 विज्ञापनों का मूल्यांकन किया और 208 शिकायतों के सही ठहराते हुए इन विज्ञापनों को जांच के लिए रोका गया। इन 208 विज्ञापनों में 83 एजुकेशन सेक्टर के, 64 हेल्थकेयर सेक्टर के, आठ पर्सनल केयर के, सात रियल एस्टेट के, पांच फूड और बेवरेज कैटेगरी के व 41 अन्य कैटेगरी के थे।

जनवरी में ‘कंज्यूमर कंप्लेंट्स काउंसिल’ को ‘आईबीएफ अस्पताल’ (IVF hospitals) और ‘फर्टिलिटी क्लिनिक’ (Fertility clinics) कई भ्रामक विज्ञापन देखने को मिले। इसके अलावा रियल एस्टेट के कई विज्ञापनों में भी किए गए दावे झूठे व भ्रामक निकले।

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जानिए, क्यों HC ने हिन्दुस्तान लीवर के इस विज्ञापन पर लगा दी रोक

टीवी पर दिखाने जाए वाले विज्ञापन, अकसर दर्शकों के मस्तिष्क में गहरा प्रभाव छोड़ते हैं। वहीं कई बार भ्रामक व झूठे विज्ञापन टीवी पर दिखाए जाते रहे हैं

Last Modified:
Thursday, 23 April, 2020
delhi high court

टीवी पर दिखाने जाए वाले विज्ञापन, अकसर दर्शकों के मस्तिष्क में गहरा प्रभाव छोड़ते हैं। वहीं कई बार भ्रामक व झूठे विज्ञापन टीवी पर दिखाए जाते रहे हैं, जिन पर कार्रवाई भी होती रही है। ऐसे में एक बार फिर एक नामी-गिरामी कंपनी के विज्ञापन पर रोक लगा दी गई है, लेकिन यहां  मामला दूसरा है।  

दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को हिन्दुस्तान लीवर के लाइफबॉय साबुन के विज्ञापनों के प्रसारण पर रोक लगा दी, जिसमें कथित रूप से रेकिट बेनकाइजर के डेटॉल एंटीसेप्टिक लिक्विड को कथित रूप से कमतर करके दिखाया गया है।

न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ ने रेकिट को अंतरिम राहत देते हुए कहा कि विचारणीय विज्ञापन में ‘द्वेषपूर्ण संकेत’ हैं जो लोगों को एंटीसेप्टिक लिक्विड के उपयोग के लिए हतोत्साहित करता है।

अदालत ने कहा कि यह कमतर करके दिखाने का प्रथम दृष्टया मामला है तथा यदि कोई अंतरिम राहत नहीं दी जाती तो रेकिट को अपूरणीय क्षति होती।

अदालत ने यह भी ध्यान दिलाया कि कमतर करके दिखाने वाले इस विज्ञापन का दिसंबर 2018 के बाद से प्रसारण नहीं किया गया किंतु हिन्दुस्तान लीवर यह बयान देने के लिए तैयार नहीं था कि जब तक रेकिट बेनकाइजर की मुख्य याचिका पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक वह इन्हें प्रसारित नहीं करेगा।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि हिन्दुस्तान लीवर विवादित विज्ञापन को प्रसारित करने से पहले रेकिट को उचित नोटिस देने को तैयार नहीं था। अदालत ने यह भी ध्यान दिलाया कि जब कलकत्ता उच्च न्यायालय ने हिन्दुस्तान लीवर को यह विज्ञापन प्रसारित करने से प्रतिबंधित किया तो वह प्रतिबंध पूरे देश के लिए था। केवल किसी एक राज्य के लिए नहीं था क्योंकि टेलीविजन पर दिखाये जाने वाले विज्ञापन का कवरेज राष्ट्रीय होता है।

रेकिट बेनकाइजर को अंतरिम राहत देते हुए अदालत ने मुख्य मामले की सुनवाई को 16 जून के लिए सूचीबद्ध किया।

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