पांच राज्यों में पार्टियों को मिला मुफ्त प्रसारण के लिए दूरदर्शन व AIR का डिजिटल वाउचर

चुनाव आयोग ने असम, केरल, पुड्डुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य राजनीतिक पार्टियों को डिजिटल वाउचर जारी किए हैं।

Last Modified:
Tuesday, 24 March, 2026
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चुनाव आयोग ने असम, केरल, पुड्डुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य राजनीतिक पार्टियों को डिजिटल वाउचर जारी किए हैं। इन वाउचर के जरिए पार्टियों को दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो (AIR) पर मुफ्त प्रसारण और टेलीकास्ट का समय मिलेगा।

चुनाव आयोग ने बताया कि यह व्यवस्था 1951 के रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट की धारा 39A के तहत पूरी तरह डिजिटल रूप में लागू की गई है। आयोग ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, "डिजिटल टाइम वाउचर सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य पार्टियों को पांच चुनावी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में जारी किए गए हैं।"

हर पार्टी को दूरदर्शन और एअर इंडिया रेडियो पर कम से कम 45 मिनट का बेस टाइम मिलेगा, जो क्षेत्रीय नेटवर्क में वितरित किया जाएगा। इसके अलावा, पिछली चुनावी प्रदर्शन के आधार पर अतिरिक्त समय भी मिलेगा, जिससे स्थापित पार्टियों को थोड़ी बढ़त मिलेगी।

प्रसारण की शुरुआत उस समय होगी जब चुनाव में भाग लेने वाले उम्मीदवारों की सूची फाइनल हो जाएगी और यह मतदान के दो दिन पहले तक जारी रहेगा। प्रसारण का समय स्टेट/UT स्तर पर लॉटरी के जरिए तय किया जाएगा, जिसमें पार्टी प्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहेंगे।

पार्टियों को प्रसारण से पहले अपने रिकॉर्डिंग और ट्रांस्क्रिप्ट जमा करनी होगी ताकि तकनीकी और नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके। आयोग ने कहा कि रिकॉर्डिंग प्रमाणित स्टूडियो या दूरदर्शन और एअर इंडिया रेडियो केंद्रों में की जा सकती है।

साथ ही, प्रसार भारती द्वारा अधिकतम दो पैनल चर्चाएं या बहसें भी आयोजित की जाएंगी, जिसमें प्रत्येक पात्र पार्टी अपना प्रतिनिधि नामित कर सकती है। इन कार्यक्रमों का संचालन अनुमोदित समन्वयक द्वारा किया जाएगा।

यह घोषणा आयोग द्वारा पांच राज्यों के चुनावी कार्यक्रम की घोषणा के बाद की गई है। केरल, असम और पुड्डुचेरी में मतदान 9 अप्रैल को होगा, जबकि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को चुनाव होंगे। पश्चिम बंगाल में दूसरी चरण की मतदान 29 अप्रैल को होगी और मतगणना 4 मई को की जाएगी।

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Vertoz में हिरेन कुमार शाह को दोबारा मैनेजिंग डायरेक्टर बनाने की तैयारी

डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग कंपनी Vertoz Limited के बोर्ड ने कंपनी के मौजूदा मैनेजिंग डायरेक्टर और प्रमोटर हिरेन कुमार रसिकलाल शाह को फिर से मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

Last Modified:
Saturday, 15 August, 2026
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डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग और टेक्नोलॉजी कंपनी Vertoz Limited के लिए वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही अच्छी रही है। कंपनी ने 30 जून 2026 को खत्म हुई तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी के कंसोलिडेटेड नतीजों के मुताबिक, तिमाही में कुल आय बढ़कर करीब 82.24 करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह करीब 70.90 करोड़ रुपये थी।

कंपनी का कंसोलिडेटेड मुनाफा भी बढ़ा है। जून 2026 तिमाही में कंपनी को करीब 6.47 करोड़ रुपये का प्रॉफिट हुआ, जबकि जून 2025 तिमाही में यह करीब 6.11 करोड़ रुपये था। यानी सालाना आधार पर मुनाफे में करीब 6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की 13 अगस्त 2026 को हुई बैठक में वित्तीय नतीजों के अलावा मैनेजमेंट से जुड़े कई अहम फैसले भी लिए गए।

कंसोलिडेटेड आय 82 करोड़ रुपये के पार

Vertoz की कंसोलिडेटेड रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2026 तिमाही में ऑपरेशंस से कंपनी की आय करीब 81.64 करोड़ रुपये रही। अन्य आय करीब 60 लाख रुपये रही। इस तरह कुल आय करीब 82.24 करोड़ रुपये रही।

जून 2025 में ऑपरेशंस से आय करीब 70.49 करोड़ रुपये और कुल आय करीब 70.90 करोड़ रुपये थी। इस तरह एक साल में कंपनी की कुल आय में करीब 16 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

तिमाही के दौरान कंपनी के कुल खर्च करीब 74.06 करोड़ रुपये रहे। इनमें डायरेक्ट सर्विस एक्सपेंस करीब 49.10 करोड़ रुपये, कर्मचारी लाभ पर 8.24 करोड़ रुपये, फाइनेंस कॉस्ट करीब 2.14 करोड़ रुपये, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन करीब 5.37 करोड़ रुपये और अन्य खर्च करीब 9.22 करोड़ रुपये रहे।

स्टैंडअलोन मुनाफे में भी मजबूत बढ़ोतरी

स्टैंडअलोन आधार पर भी कंपनी का प्रदर्शन बेहतर रहा। जून 2026 तिमाही में Vertoz की कुल आय करीब 26.69 करोड़ रुपये रही, जबकि जून 2025 में यह करीब 7.92 करोड़ रुपये थी।

तिमाही में कंपनी का प्रॉफिट करीब 1.50 करोड़ रुपये रहा। वहीं, जून 2025 तिमाही में कंपनी को करीब 75.43 लाख रुपये का मुनाफा हुआ था। इस तरह स्टैंडअलोन आधार पर भी मुनाफे में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली।

कंपनी के मुताबिक, जून 2026 तिमाही में अन्य कम्प्रिहेन्सिव इनकम का टैक्स के बाद कुल प्रभाव करीब 7.22 करोड़ रुपये का रहा। यह इक्विटी इंस्ट्रूमेंट्स और एक्चुरियल गेन/लॉस की फेयर वैल्यू के असर से जुड़ा है।

हिरेन कुमार शाह को फिर MD बनाने की तैयारी

Vertoz के बोर्ड ने कंपनी के मौजूदा मैनेजिंग डायरेक्टर और प्रमोटर हिरेन कुमार रसिकलाल शाह को फिर से मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

उन्हें मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद पांच साल के नए कार्यकाल के लिए फिर से मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया जाएगा। उनका मौजूदा कार्यकाल 13 जून 2027 को खत्म होना है। हालांकि, नए कार्यकाल के लिए कंपनी के सदस्यों की आगामी Annual General Meeting में मंजूरी जरूरी होगी।

कंपनी ने बताया कि इस प्रस्ताव को पहले से मंजूरी देने का मकसद मैनेजमेंट में निरंतरता बनाए रखना और कंपनी के कारोबार व कामकाज में किसी तरह का व्यवधान न आने देना है।

हिरेन कुमार शाह के पास बिजनेस मैनेजमेंट का लंबा अनुभव

हिरेन कुमार शाह Vertoz के मैनेजिंग डायरेक्टर और प्रमोटर हैं। कंपनी के मुताबिक, उन्हें बिजनेस मैनेजमेंट, स्ट्रैटेजिक प्लानिंग, ऑपरेशंस और कॉरपोरेट मैनेजमेंट का लंबा अनुभव है।

उन्होंने Vertoz से जुड़ने से पहले अलग-अलग स्टार्टअप वेंचर्स के साथ काम किया है। कंपनी के मुताबिक, उन्होंने Vertoz के कारोबार, ग्रोथ से जुड़ी पहलों और कंपनी के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

वह कंपनी के नॉन-एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर आशीष रसिकलाल शाह के भाई हैं। वहीं, Vertoz की CFO और एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर डिंपल हिरेन कुमार शाह उनकी पत्नी हैं।

SHM & CO. को इंटर्नल ऑडिटर बनाया

बोर्ड ने M/s SHM & CO. को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कंपनी का इंटर्नल ऑडिटर नियुक्त करने को भी मंजूरी दी है। यह नियुक्ति 13 अगस्त 2026 से प्रभावी है।

SHM & CO. के प्रोपराइटर हितांशु शेठ हैं। कंपनी के मुताबिक, यह फर्म Internal Audit, Internal Controls, Accounting Processes और Compliance Framework को मजबूत करने के क्षेत्र में काम करती है।

इंटर्नल ऑडिटर के तौर पर यह फर्म सीधे बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और जरूरत के मुताबिक Audit Committee को रिपोर्ट करेगी।

कंपनी ने कई पॉलिसीज में किया बदलाव

बोर्ड ने SEBI के नियमों और दूसरे लागू कानूनों में हुए बदलावों के हिसाब से कंपनी की कई पॉलिसीज की समीक्षा भी की। इसके बाद संबंधित पॉलिसीज में जरूरी संशोधन और अपडेट को मंजूरी दी गई।

इनमें इनसाइडर ट्रेडिंग से जुड़े आचार संहिता (Code of Conduct) और अनपब्लिश्ड प्राइस सेंसिटिव इंफॉर्मेशन (UPSI) के निष्पक्ष खुलासे की पॉलिसी, महत्वपूर्ण घटनाओं और सूचनाओं की पहचान से जुड़ी पॉलिसी, नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन पॉलिसी, बोर्ड में विविधता से जुड़ी पॉलिसी और बोर्ड सदस्यों व वरिष्ठ प्रबंधन के लिए आचार संहिता शामिल हैं।

इसके अलावा इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स के परिचय एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम, महत्वपूर्ण कानूनी मामलों (Material Litigation) की पहचान, क्रेडिटर्स के बकाया की महत्वपूर्ण देनदारियों की पहचान, महत्वपूर्ण सहायक कंपनी (Material Subsidiary) और महत्वपूर्ण ग्रुप कंपनियों/संस्थाओं की पहचान से जुड़ी पॉलिसी में भी बदलाव किए गए हैं।

कंपनी ने व्हिसलब्लोअर पॉलिसी के साथ-साथ दस्तावेजों के संरक्षण और रिकॉर्ड में रखने (Preservation & Archival) से जुड़ी पॉलिसी को भी अपडेट किया है।

कंपनी ने कहा कि इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य मौजूदा रेगुलेटरी नियमों और कंपनी के गवर्नेंस एवं कम्प्लयांस फ्रेमवर्क के साथ पॉलिसीज को बेहतर तरीके से जोड़ना है।

शेयरधारकों को पहले ही दिया गया था अंतरिम डिविडेंड

कंपनी ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बोर्ड ने 29 मई 2026 को 10 रुपये फेस वैल्यू वाले प्रत्येक शेयर पर 0.10 रुपये का अंतरिम डिविडेंड घोषित किया था।

5 जून 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की गई थी और यह अंतरिम डिविडेंड 26 जून 2026 को शेयरधारकों को भुगतान कर दिया गया। खास बात यह रही कि प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप के शेयरधारकों ने स्वेच्छा से अपने हिस्से के अंतरिम डिविडेंड का अधिकार छोड़ दिया था।

करीब दो घंटे चली बोर्ड मीटिंग 

Vertoz की बोर्ड मीटिंग 13 अगस्त 2026 को शाम 5 बजे शुरू हुई और शाम 6:55 बजे समाप्त हुई। बैठक में वित्तीय नतीजों को मंजूरी देने के साथ मैनेजिंग डायरेक्टर की दोबारा नियुक्ति, इंटर्नल ऑडिटर की नियुक्ति और कई कंपनी पॉलिसीज में संशोधन को मंजूरी दी गई।

कंपनी ने बताया कि वित्तीय नतीजों की समीक्षा ऑडिट कमेटी ने की थी और उसकी सिफारिश के बाद बोर्ड ने इन्हें मंजूरी दी।

 

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Signpost India में दो स्वतंत्र निदेशकों की पुनर्नियुक्ति, एक का कार्यकाल खत्म

देश की प्रमुख डिजिटल ऑउट-ऑफ होम (DOOH) और ट्रांजिट विज्ञापन कंपनी साइनपोस्ट इंडिया (Signpost India Limited) के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों को लेकर हाल में दो बड़े बदलाव हुए हैं।

Last Modified:
Wednesday, 12 August, 2026
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देश की प्रमुख डिजिटल ऑउट-ऑफ होम (DOOH) और ट्रांजिट विज्ञापन कंपनी साइनपोस्ट इंडिया (Signpost India Limited) के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों को लेकर हाल में दो बड़े बदलाव हुए हैं। एक तरफ कंपनी के शेयरधारकों ने गिरिश कुलकर्णी और प्रशांत संघवी को स्वतंत्र निदेशकों के तौर पर पांच-पांच साल के दूसरे कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्त करने की मंजूरी दी है। वहीं, दूसरी तरफ कंपनी की स्वतंत्र निदेशक  सयंतिका मित्रा का दूसरा कार्यकाल पूरा होने के बाद वह बोर्ड से बाहर हो गई हैं।

कंपनी ने 6 अगस्त 2026 को स्टॉक एक्सचेंज को बताया था कि 5 अगस्त 2026 को हुई असाधारण आम बैठक (EGM) में शेयरधारकों ने गिरिश कुलकर्णी और प्रशांत संघवी की पुनर्नियुक्ति से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी। दोनों का नया कार्यकाल 6 अगस्त 2026 से 5 अगस्त 2031 तक रहेगा।

गिरिश कुलकर्णी और प्रशांत संघवी को मिला दूसरा कार्यकाल

शेयरधारकों की मंजूरी के बाद गिरिश कुलकर्णी और प्रशांत संघवी दोनों कंपनी के गैर-कार्यकारी स्वतंत्र निदेशकों के तौर पर अगले पांच साल तक बोर्ड का हिस्सा रहेंगे।

गिरिश कुलकर्णी को एशिया के इंश्योरेंस और फाइनेंशियल सेक्टर में चार दशक से ज्यादा का अनुभव है। कंपनी के मुताबिक, उन्हें बिजनेस को खड़ा करने और बड़े स्तर पर ले जाने के साथ कॉरपोरेट गवर्नेंस और स्ट्रैटजिक प्लानिंग का भी व्यापक अनुभव है।

उन्होंने एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में कई जॉइंट वेंचर्स को शुरू करने और आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई है। वह Dai-Ichi Life के Global Strategy Board के शुरुआती सदस्यों में शामिल रहे और Asia Pacific में चेयरमैन (नॉन-एग्जिक्यूटिव) की भूमिका भी निभाई। इसके अलावा उन्होंने करीब एक दशक तक Star Union Dai-Ichi Life Insurance के MD और CEO के तौर पर काम किया।

वहीं, प्रशांत संघवी को Business Development, Credit Appraisal, Structured Finance और IPO Listing के क्षेत्र में 25 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने Private Equity, बैंकों और Financial Institutions के जरिए फंड जुटाने के क्षेत्र में भी काम किया है।

उनके करियर का एक बड़ा हिस्सा HDFC Bank में रहा, जहां उन्होंने मुंबई में करीब 11 साल तक Business Banking Group (Working Capital) का नेतृत्व किया। इसके अलावा उन्होंने Centurion Bank of Punjab और ICICI Bank में भी काम किया है। उनके पास SBI Life, General Motors Finance (GMAC) और Generali Group से जुड़े अनुभव भी हैं।

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि गिरिश कुलकर्णी और प्रशांत संघवी कंपनी के किसी भी अन्य डायरेक्टर से संबंधित नहीं हैं। साथ ही, दोनों को SEBI या किसी अन्य संबंधित अथॉरिटी के आदेश के तहत डायरेक्टर का पद संभालने से प्रतिबंधित नहीं किया गया है।

सयंतिका मित्रा का दूसरा कार्यकाल हुआ पूरा

इसके बाद Signpost India ने 10 अगस्त को एक और महत्वपूर्ण बोर्ड बदलाव की जानकारी दी। कंपनी की स्वतंत्र निदेशक  सयंतिका मित्रा का दूसरा कार्यकाल 8 अगस्त 2026 को कारोबारी घंटे खत्म होने के साथ पूरा हो गया।

इसके साथ ही वह कंपनी की स्वतंत्र निदेशकों नहीं रहीं। कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्होंने Nomination & Remuneration Committee की Chairperson और Audit Committee की Member की जिम्मेदारी भी छोड़ दी।

कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंजों को दी जानकारी में बताया कि सयंतिका मित्रा का कार्यकाल पूरा होना ही उनके पद से हटने का कारण है। कंपनी ने उनकी किसी नई नियुक्ति या किसी अन्य पद पर जाने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।

इस तरह अगस्त के पहले सप्ताह में Signpost India के बोर्ड में एक तरफ दो स्वतंत्र निदेशकों को अगले पांच साल के लिए बनाए रखने का फैसला हुआ, वहीं एक मौजूदा स्वतंत्र निदेशक का दूसरा कार्यकाल पूरा हो गया। यानी गिरिश कुलकर्णी और प्रशांत संघवी का दूसरा कार्यकाल 6 अगस्त 2026 से शुरू हुआ, जबकि सयंतिका मित्रा 8 अगस्त 2026 को अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद बोर्ड से बाहर हो गईं।

 

 

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Bislie नाम से पानी बेचने पर रोक, Bisleri से मिलते-जुलते ट्रेडमार्क को HC ने माना भ्रामक

पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर ब्रैंड Bisleri को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कर्नाटक की एक कंपनी को ‘Bislie’ नाम से पैकेज्ड पानी बनाने और बेचने पर फिलहाल रोक लगा दी है।

Last Modified:
Monday, 10 August, 2026
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पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर ब्रैंड Bisleri को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कर्नाटक की एक कंपनी को ‘Bislie’ नाम से पैकेज्ड पानी बनाने और बेचने पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने पहली नजर में माना कि ‘Bislie’ नाम रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क ‘Bisleri’ से इतना मिलता-जुलता है कि इससे लोगों के भ्रमित होने की संभावना है।

जस्टिस माधव जे. जमादार ने Bisleri International Private Limited की ओर से दायर अंतरिम याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। मामला कर्नाटक के बेलागुली महालिंगेगौड़ा किरणकुमार की कंपनी Kalabyraveshwara Mineral Water Industry से जुड़ा है, जो ‘Bislie’ ब्रैंड के नाम से पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर बेच रही थी।

नाम के साथ पैकेजिंग पर भी सवाल

Bisleri की ओर से कोर्ट में कहा गया कि ‘Bislie’ सिर्फ नाम में ही उसके ब्रैंड से मिलता-जुलता नहीं है, बल्कि दोनों प्रॉडक्ट्स की लेबल डिजाइन, आर्टवर्क, रंगों, लेआउट, एलिमेंट्स की प्लेसमेंट और पूरी पैकेजिंग में भी काफी समानता है।

कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि ‘Bislie’ के लिए इस्तेमाल की जा रही बोतल का डिजाइन भी Bisleri की बोतल से काफी मिलता-जुलता है।

Bisleri ने कोर्ट से मांग की थी कि संबंधित निर्माता को ‘Bislie’ नाम या उससे मिलते-जुलते किसी भी नाम, लेबल, पैकेजिंग या डिजाइन के तहत पानी बनाने, बेचने, स्टॉक करने और मार्केटिंग करने से रोका जाए।

मई में बाजार में मिले थे ‘Bislie’ के प्रोडक्ट

कोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक, Bisleri की टीम ने मई 2026 के आखिरी हफ्ते में बाजार की निगरानी के दौरान ‘Bislie’ नाम से बिक रहे प्रॉडक्ट्स की पहचान की थी। इसके बाद कंपनी को पता चला कि इन प्रॉडक्ट्स का निर्माण कर्नाटक के चन्नरायपटना में किया जा रहा था।

Bisleri ने अपने ट्रेडमार्क के अलावा अपने लेबल पर इस्तेमाल होने वाले ओरिजिनल आर्टवर्क के लिए कॉपीराइट रजिस्ट्रेशन भी करा रखा है।

जून में कोर्ट ने दी थी तलाशी और जब्ती की अनुमति

इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने पहले 11 जून को निर्माता की गैरमौजूदगी में एक अंतरिम आदेश जारी किया था। कोर्ट ने कोर्ट रिसीवर नियुक्त करते हुए उसे ‘Bislie’ नाम वाले प्रॉडक्ट्स, लेबल, पैकेजिंग सामग्री, मशीनरी और इससे जुड़ी अन्य चीजों की तलाशी लेने और उन्हें जब्त करने की अनुमति दी थी।

इसके बाद कोर्ट के आदेश के मुताबिक परिसर में छापेमारी भी की गई।

‘Bislie’ और ‘Bisleri’ में काफी समानता

कोर्ट ने दोनों ब्रैंड के नाम और पैकेजिंग की तुलना की। कोर्ट के मुताबिक, ‘Bislie’ नाम ‘Bisleri’ की नकल जैसा दिखाई देता है, जिसमें कुछ अक्षरों में बदलाव करके नया नाम तैयार किया गया है।

कोर्ट ने नाम के अलावा दोनों ब्रैंड की पैकेजिंग में भी कई समानताएं पाईं। इनमें आर्टवर्क, कलर स्कीम, डिजाइन, लेआउट और पूरी विजुअल पहचान शामिल है।

कंपनी की गैरमौजूदगी में जारी रहा आदेश

7 अगस्त को हुई सुनवाई में संबंधित निर्माता कोर्ट में पेश नहीं हुआ, जबकि उसे मामले की जानकारी और नोटिस दिया जा चुका था। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि इस संबंध में सर्विस का एफिडेविट दाखिल किया गया था।

कोर्ट ने कहा कि Additional Special Receiver की रिपोर्ट भी Bisleri के दावों को समर्थन देती है। दूसरी ओर, प्रतिवादी ने न तो कोर्ट में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा और न ही जवाबी एफिडेविट दाखिल किया। ऐसे में इस चरण पर Bisleri की ओर से लगाए गए आरोपों का कोई विरोध नहीं हुआ।

अंतिम फैसला आने तक ‘Bislie’ पर रोक

इन परिस्थितियों को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने Bisleri की अंतरिम याचिका मंजूर कर ली। कोर्ट ने मुकदमे के अंतिम निपटारे तक निर्माता को ‘BISLIE’ या ‘BISLERI’ से मिलते-जुलते किसी भी नाम या लेबल के तहत पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर बनाने, बेचने, सप्लाई करने, स्टॉक करने, पैकेजिंग, मार्केटिंग या ऑफर करने से रोक दिया है।

यह रोक सिर्फ नाम तक सीमित नहीं है। इसमें विवादित आर्टवर्क, ट्रेड ड्रेस और बोतल के डिजाइन/शेप को भी शामिल किया गया है।

यानी फिलहाल कोर्ट के आदेश के बाद संबंधित निर्माता के लिए ‘Bislie’ नाम, उसकी पैकेजिंग और कथित तौर पर मिलते-जुलते बोतल डिजाइन के साथ बाजार में पानी बेचना मुश्किल होगा। वहीं, ट्रेडमार्क विवाद पर अंतिम फैसला अभी बाकी है।

 

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डिजिटल ऐड इंडस्ट्री में बड़ा सौदा, Nielsen ने DoubleVerify के अधिग्रहण का किया ऐलान

मीडिया मेजरमेंट और ऑडियंस एनालिटिक्स कंपनी Nielsen Holdings ने डिजिटल विज्ञापन वेरिफिकेशन प्लेटफॉर्म DoubleVerify का अधिग्रहण करने का ऐलान किया है।

Last Modified:
Saturday, 08 August, 2026
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मीडिया मेजरमेंट और ऑडियंस एनालिटिक्स कंपनी Nielsen Holdings ने डिजिटल विज्ञापन वेरिफिकेशन प्लेटफॉर्म DoubleVerify का अधिग्रहण करने का ऐलान किया है। यह पूरी तरह नकद (All-Cash) सौदा है, जिसकी कुल कीमत करीब 2.15 अरब डॉलर है।

इस समझौते के तहत DoubleVerify के शेयरधारकों को प्रति शेयर 13.60 डॉलर नकद मिलेंगे। यह कीमत 5 अगस्त 2026 तक के पिछले 60 कारोबारी दिनों के औसत शेयर मूल्य से लगभग 30 फीसदी अधिक है।

दोनों कंपनियों के बोर्ड ने इस सौदे को मंजूरी दे दी है। हालांकि, इसे पूरा होने के लिए DoubleVerify के शेयरधारकों की मंजूरी और नियामकीय स्वीकृतियां मिलना बाकी हैं। उम्मीद है कि यह सौदा 2027 की पहली तिमाही तक पूरा हो जाएगा।

इस अधिग्रहण के बाद Nielsen की ऑडियंस मेजरमेंट और मीडिया इंटेलिजेंस सेवाएं, DoubleVerify की डिजिटल विज्ञापन वेरिफिकेशन, मीडिया क्वालिटी और कैंपेन मेजरमेंट तकनीक के साथ जुड़ जाएंगी। इससे विज्ञापनदाताओं को यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि उनके विज्ञापन असली लोगों तक पहुंच रहे हैं, सही माहौल में दिख रहे हैं और फर्जी ट्रैफिक से सुरक्षित हैं।

कंपनियों का दावा है कि विलय के बाद बनने वाली संयुक्त कंपनी का सालाना कारोबार 4 अरब डॉलर से अधिक होगा और यह 300 अरब डॉलर से ज्यादा के वैश्विक विज्ञापन खर्च वाले ग्राहकों को सेवाएं देने की स्थिति में होगी।

Nielsen के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कार्तिक राव ने कहा कि इस सौदे से कंपनी की डिजिटल विज्ञापन क्षेत्र में मौजूदगी और मजबूत होगी। वहीं, DoubleVerify के CEO मार्क ज़ागोर्स्की ने कहा कि Nielsen के साथ जुड़ने से कंपनी को अधिक संसाधन मिलेंगे और दोनों की तकनीक मिलकर विज्ञापन उद्योग में नए मानक स्थापित करेगी।

सौदा पूरा होने के बाद DoubleVerify, Nielsen के भीतर एक निजी (Private) कंपनी के रूप में काम करेगी। हालांकि, वह अपने मौजूदा DoubleVerify ब्रांड और नाम के साथ ही परिचालन जारी रखेगी। यह जानकारी BestMediaInfo में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर सामने आई है।

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सिर्फ सम्मान नहीं, भविष्य का निर्माण भी; AAAI को अपनानी होगी बड़ी सोच: डॉ. अनुराग बत्रा

इंडियन ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित संस्थाओं में से एक ऐडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) ने हमेशा इस इंडस्ट्री की विरासत को सहेजने का काम किया है।

Last Modified:
Monday, 03 August, 2026
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डॉ. अनुराग बत्रा, चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ, एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप ।।

इंडियन ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित संस्थाओं में से एक ऐडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) ने हमेशा इस इंडस्ट्री की विरासत को सहेजने का काम किया है। उसके लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड उन प्रोफेशनल्स को सम्मानित करते रहे हैं, जिन्होंने दशकों तक एजेंसीज खड़ी कीं, यादगार ऐड कैंपेन बनाए और इंडियन ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हर पेशे में ऐसे लोगों का सम्मान होना चाहिए, जिन्होंने उस क्षेत्र की नींव मजबूत की हो और उसकी दिशा तय की हो। AAAI लगातार यह जिम्मेदारी निभाता आया है।

लेकिन हर संस्था के जीवन में एक ऐसा समय भी आता है, जब उसे अपनी पुरानी उपलब्धियों से आगे बढ़कर खुद से एक अहम सवाल पूछना पड़ता है- आने वाले समय को आकार देने में उसकी क्या भूमिका होगी?

पिछले एक दशक में शायद ही कोई ऐसी इंडस्ट्री रही हो, जिसमें ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री जितना बड़ा बदलाव आया हो। डिजिटल मीडिया, डेटा, कंटेंट क्रिएटर्स, ई-कॉमर्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने इस क्षेत्र के कई पुराने नियम बदल दिए हैं। आज क्लाइंट्स तेजी से नए आइडिया, मापे जा सकने वाले नतीजे और एकीकृत समाधान चाहते हैं। वहीं, आज इस पेशे में आने वाली नई पीढ़ी ऐसे कारोबारी माहौल में काम शुरू कर रही है, जो उनके वरिष्ठों के दौर से बिल्कुल अलग है।

यही वजह है कि अब AAAI के भीतर चर्चा सिर्फ आजीवन योगदान देने वाले दिग्गजों को सम्मानित करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इस बात पर भी होनी चाहिए कि अगले बीस वर्षों के लिए ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री को कैसे तैयार किया जाए।

इंडस्ट्री के भीतर एक भावना लगातार मजबूत हो रही है कि AAAI का नेतृत्व अभी भी मुख्य रूप से पारंपरिक ऐडवर्टाइजिंग एजेंसीज से जुड़े वरिष्ठ लोगों के हाथों में है। उनके योगदान पर कोई सवाल नहीं है और वे हर सम्मान के हकदार हैं। लेकिन जिस इंडस्ट्री को उन्होंने बनाया, वह अब काफी बदल चुका है। ऐसे में डिजिटल कारोबार, टेक्नोलॉजी, कंटेंट, डेटा एनालिटिक्स और बदलते उपभोक्ता व्यवहार को समझने वाले युवा प्रोफेशनल्स की नई सोच इस संस्था को और मजबूत बना सकती है।

यह बात अनुभव की जगह युवाओं को लाने की नहीं है, बल्कि दोनों को साथ लेकर चलने की है। हर सफल संस्था तब बेहतर काम करती है, जब अनुभवी नेतृत्व के साथ युवा पेशेवर भी जुड़ते हैं, जो नए विचार, नई क्षमताएं और बाजार की नई समझ लेकर आते हैं।

AAAI को उन लोगों का दायरा भी बढ़ाना चाहिए, जिनसे वह सलाह लेता है। आज ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री अकेले काम नहीं करता। किसी भी अभियान को सफल बनाने में ऐडवर्टाइजिंग एजेंसीज के साथ-साथ मार्केटर्स, कंसल्टेंट्स, टेक्नोलॉजी कंपनियां, उपभोक्ता शोधकर्ता और बिजनेस स्ट्रैटेजिस्ट भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर AAAI इन क्षेत्रों के सम्मानित प्रोफेशनल्स को सलाहकार परिषदों या विशेष समितियों में शामिल करे, तो संस्था को नई सोच और व्यापक दृष्टिकोण मिलेगा। कई बार सबसे अच्छे विचार उन लोगों से आते हैं, जो किसी इंडस्ट्री को बाहर से देखते हैं।

आज अधिकांश लोग AAAI के बारे में तब सुनते हैं, जब वह गोआफेस्ट का आयोजन द ऐडवर्टाइजिंग क्लब के साथ करता है या फिर जब लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड की घोषणा होती है। दुर्भाग्य से इस वर्ष इस पुरस्कार को लेकर हुआ विवाद, सम्मान समारोह से कहीं अधिक चर्चा का विषय बन गया। इन सालाना आयोजनों के अलावा भी AAAI के पास पूरे वर्ष अधिक सक्रिय, प्रभावशाली और प्रासंगिक बनने का बड़ा अवसर है।

संस्था नियमित रूप से इंडस्ट्री से जुड़े मंचों का आयोजन कर सकती है, जहां उभरते रुझानों पर चर्चा हो। वह रिसर्च रिपोर्ट प्रकाशित कर सकती है, युवा प्रोफेशनल्स के लिए मेंटरशिप प्रोग्राम शुरू कर सकती है और एजेंसीज, क्लाइंट्स, मीडिया कंपनियों तथा टेक्नोलॉजी पार्टनर्स के बीच संवाद को बढ़ावा दे सकती है। केवल आयोजनों के लिए पहचाने जाने के बजाय AAAI खुद को विचारों और सहयोग का सबसे सम्मानित मंच बना सकता है।

एक और महत्वपूर्ण पहल नेक्स्ट जेनरेशन काउंसिल का गठन हो सकती है, जिसमें एजेंसीज, डिजिटल कंपनियों, मीडिया संस्थानों और स्वतंत्र कंसल्टेंसी से जुड़े युवा पेशेवर शामिल हों। यह समूह प्रतिभा विकास, क्लाइंट्स की बदलती अपेक्षाओं और नए बिजनेस मॉडल जैसे विषयों पर अपने विचार साझा कर सकता है और वरिष्ठ इंडस्ट्री नेताओं के साथ मिलकर काम कर सकता है। इससे भविष्य का नेतृत्व भी व्यवस्थित तरीके से तैयार होगा, न कि केवल संयोग पर छोड़ दिया जाएगा।

इसके अलावा ऐसे पुरस्कार भी शुरू किए जा सकते हैं, जो उभरते हुए एजेंसी लीडर्स, नवाचारी उद्यमियों और डिजिटल दौर में ऐडवर्टाइजिंग की नई परिभाषा गढ़ने वाले प्रोफेशनल्स को सम्मानित करें। करियर के अलग-अलग चरणों में उत्कृष्टता को पहचानना यह संदेश देता है कि इंडस्ट्री अनुभव के साथ-साथ नए विचारों को भी समान महत्व देता है।

AAAI इससे भी बड़ा सपना देख सकता है। आज भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते और सबसे गतिशील ऐडवर्टाइजिंग बाजारों में शामिल है। यहां बनने वाले कई ऐडवर्टाइजिंग कैंपेंस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जाता है। ऐसे में क्यों न AAAI हर चार वर्ष में वर्ल्ड ऐडवर्टाइजिंग कांग्रेस आयोजित करने की पहल करे? ऐसा मंच दुनिया भर के एजेंसी प्रमुखों, मार्केटर्स, मीडिया कंपनियों, टेक्नोलॉजी संगठनों, शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं को एक साथ ला सकता है। इससे न केवल इंडियन ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री को वैश्विक पहचान मिलेगी, बल्कि AAAI की छवि भी एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की इंडस्ट्री संस्था के रूप में मजबूत होगी।

विश्वविद्यालयों और प्रबंधन संस्थानों के साथ मजबूत जुड़ाव भी AAAI की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए। छात्रों के लिए आउटरीच प्रोग्राम, मेंटरशिप, इनोवेशन चैलेंज और अतिथि व्याख्यान जैसे प्रयास कक्षा और कार्यस्थल के बीच की दूरी कम कर सकते हैं। युवा प्रोफेशनल्स को यह महसूस होना चाहिए कि AAAI ऐसी संस्था है, जो उनके विकास और करियर को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाती है।

ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री कभी स्थिर नहीं रहा और उसकी सबसे पुरानी संस्था को भी स्थिर नहीं रहना चाहिए। इंडस्ट्री की विरासत को सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है, लेकिन उसे भविष्य के लिए तैयार करना भी उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी है।

कोई यह नहीं कह रहा कि AAAI उन दिग्गजों का सम्मान करना बंद कर दे, जिन्होंने इंडियन ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री की मजबूत नींव रखी। उनका योगदान हमेशा अमूल्य रहेगा। लेकिन यदि यह संस्था युवा प्रोफेशनल्स के लिए भी जगह बनाए, एजेंसी जगत के बाहर से आने वाले नए विचारों का स्वागत करे और व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करे, तो इससे उसकी प्रासंगिकता और विश्वसनीयता दोनों और मजबूत होंगी।

आखिरकार, बीते दौर के महान लोगों को सच्ची श्रद्धांजलि केवल उन्हें सम्मानित करना नहीं है, बल्कि ऐसी संस्था छोड़कर जाना भी है, जो आने वाले कल की चुनौतियों और अवसरों के लिए पूरी तरह तैयार हो।

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लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड का विवाद गहराया, तान्या गोयल ने AAAI को भेजा लीगल नोटिस

ऐडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है।

Last Modified:
Friday, 31 July, 2026
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ऐडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। इंडस्ट्री की वरिष्ठ प्रोफेशनल तान्या गोयल ने AAAI को कानूनी नोटिस भेजकर उस पर मानहानि, झूठे और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाने तथा उनकी पेशेवर छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।

सूत्रों के मुताबिक, तान्या गोयल ने AAAI से 29 जुलाई को जारी उसके मीडिया बयान पर स्पष्टीकरण और बिना शर्त सार्वजनिक माफी की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर तय समय के भीतर ऐसा नहीं किया गया तो वह संगठन और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ दीवानी और आपराधिक मानहानि का मामला दायर करेंगी।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब इस साल के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड के चयन को लेकर पहले से ही पारदर्शिता और गवर्नेंस पर सवाल उठ रहे हैं।

AAAI के बयान के बाद बढ़ा विवाद

कुछ दिन पहले AAAI ने एक सख्त मीडिया बयान जारी कर अपने अवॉर्ड चयन प्रक्रिया का बचाव किया था। संगठन ने आरोप लगाया था कि तान्या गोयल अपने पति और विज्ञापन जगत के वरिष्ठ पेशेवर संदीप गोयल के लिए यह सम्मान दिलाने की कोशिश कर रही थीं। AAAI ने यह भी कहा था कि बढ़ते विवाद के बीच उसने पूरी चयन प्रक्रिया की जांच के लिए एक स्वतंत्र पेशेवर संस्था को ऑडिट की जिम्मेदारी सौंपी है।

नोटिस में क्या कहा गया?

सूत्रों के अनुसार, कानूनी नोटिस में तान्या गोयल ने कहा है कि AAAI के प्रेस बयान में उनके खिलाफ झूठे, भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाए गए हैं। उनका आरोप है कि इन बयानों को जानबूझकर मीडिया में जारी किया गया ताकि विज्ञापन जगत में उनकी साख को नुकसान पहुंचाया जा सके।

नोटिस में कहा गया है कि AAAI ने बिना किसी ठोस सबूत के यह दिखाने की कोशिश की कि उन्होंने संदीप गोयल के पक्ष में अवॉर्ड प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया। तान्या गोयल का कहना है कि संगठन ने बिना पर्याप्त आधार के ऐसे आरोप लगाए, जिनका उद्देश्य उनकी छवि खराब करना था।

सूत्रों का कहना है कि नोटिस में यह भी आरोप लगाया गया है कि अवॉर्ड प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों से ध्यान हटाने के लिए AAAI ने एक आलोचक को निशाना बनाया।

'रोल-ओवर' नामांकन पर भी सवाल

कानूनी नोटिस में AAAI की नामांकन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं।

29 जुलाई के अपने बयान में AAAI ने कहा था कि इस वर्ष पांच नए नामांकन मिले थे। इसके अलावा पिछले साल की जूरी ने पांच अन्य नाम—एम. जी. परमेश्वरन, नकुल चोपड़ा, आशीष भसीन, तपस गुप्ता और एल. वी. कृष्णन—को इस साल भी विचार के लिए रखने की सिफारिश की थी। इस तरह जूरी के सामने कुल 10 नाम थे।

तान्या गोयल ने इस तथाकथित 'रोल-ओवर' प्रक्रिया को पारदर्शिता के विपरीत बताया है। उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या इस तरह नाम आगे बढ़ाने का प्रावधान संगठन के नियमों में है और क्या इसकी जानकारी सभी सदस्यों को दी गई थी। नोटिस में यह भी स्पष्ट करने की मांग की गई है कि किन अधिकारों के तहत इन नामों को अगले वर्ष के लिए आगे बढ़ाया गया।

ऑडिट कराने वाली संस्था का नाम क्यों नहीं बताया?

नोटिस में AAAI द्वारा चयन प्रक्रिया की जांच के लिए नियुक्त बाहरी संस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, तान्या गोयल ने पूछा है कि जब AAAI ने सार्वजनिक रूप से ऑडिट कराने की घोषणा की, तो उसने उस संस्था का नाम क्यों नहीं बताया। उनका कहना है कि संस्था का नाम सार्वजनिक न करना, उस पारदर्शिता के दावे को कमजोर करता है जिसकी बात AAAI खुद कर रहा है।

सार्वजनिक माफी की मांग

कानूनी नोटिस में AAAI से कथित मानहानिकारक बयान वापस लेने, बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगने और झूठे आरोपों के लिए स्पष्टीकरण देने की मांग की गई है।

तान्या गोयल का कहना है कि यदि संगठन को वास्तव में लॉबिंग का संदेह था, तो उसे पहले शो कॉज नोटिस जारी करना चाहिए था और बोर्ड के सदस्यों को इसकी जानकारी देनी चाहिए थी। उनका आरोप है कि AAAI ने ऐसा नहीं किया।

नोटिस में चेतावनी दी गई है कि तय समय के भीतर जवाब नहीं मिलने पर वह मानहानि सहित अन्य कानूनी कार्रवाई करेंगी।

AAAI ने क्या कहा था?

अपने मीडिया बयान में AAAI ने कहा था कि लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड की चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और प्रक्रिया आधारित थी। संगठन का दावा था कि नामांकन और जूरी की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से अपनाई गई।

AAAI ने यह भी आरोप लगाया था कि तान्या गोयल लगातार संदीप गोयल को पुरस्कार दिए जाने की मांग कर रही थीं। संगठन के अनुसार, उन्होंने पहले जूरी का हिस्सा बनने की इच्छा जताई थी, लेकिन बाद में खुद ही इससे अलग हो गईं। AAAI ने यह भी कहा था कि उनका एकमात्र उद्देश्य संदीप गोयल को सम्मान दिलाना था और पुरस्कार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर उन्होंने इसकी गरिमा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।

संगठन ने इस पूरे विवाद की तुलना चुनाव परिणामों पर होने वाले राजनीतिक विवादों से भी की थी और कहा था कि ऐसे मुद्दे इसलिए उठाए जा रहे हैं क्योंकि परिणाम कुछ लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहे।

बढ़ी गवर्नेंस पर बहस

इस कानूनी नोटिस के बाद AAAI की कार्यप्रणाली और गवर्नेंस को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है। पहले से ही विज्ञापन उद्योग के कई लोग लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड की चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता, जूरी की स्वतंत्रता और संस्थागत जवाबदेही पर सवाल उठा रहे हैं।

उधर, इस कानूनी नोटिस पर प्रतिक्रिया के लिए exchange4media ने AAAI से संपर्क किया है। खबर लिखे जाने तक संगठन की ओर से कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला था। जवाब मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।

 

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Bright Outdoor Media को बड़ी मंजूरी, BSE SME से मेन बोर्ड पर होगी लिस्टिंग

आउटडोर विज्ञापन क्षेत्र की कंपनी Bright Outdoor Media Ltd को अपने शेयरधारकों से बड़ी मंजूरी मिल गई है। कंपनी अब BSE के SME प्लेटफॉर्म से निकलकर BSE के मेन बोर्ड पर सूचीबद्ध (लिस्ट) होगी।

Last Modified:
Saturday, 18 July, 2026
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आउटडोर विज्ञापन क्षेत्र की कंपनी Bright Outdoor Media Ltd को अपने शेयरधारकों से बड़ी मंजूरी मिल गई है। कंपनी अब BSE के SME प्लेटफॉर्म से निकलकर BSE के मेन बोर्ड पर सूचीबद्ध (लिस्ट) होगी। इसके साथ ही कंपनी के शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के मेन बोर्ड पर भी सूचीबद्ध किए जाएंगे।

कंपनी ने बताया कि यह मंजूरी पोस्टल बैलेट के जरिए कराई गई वोटिंग में मिली। रिमोट ई-वोटिंग 17 जून 2026 से 16 जुलाई 2026 तक चली और इसके नतीजे 17 जुलाई 2026 को घोषित किए गए। कंपनी का कहना है कि मेन बोर्ड पर लिस्टिंग उसके विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे उसे बड़े निवेशकों तक पहुंच बनाने और पूंजी बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी।

कंपनी ने 12 जून 2026 को शेयरधारकों के पास पोस्टल बैलेट नोटिस भेजकर दो प्रस्तावों पर मंजूरी मांगी थी। वोटिंग की पूरी प्रक्रिया Bigshare Services Pvt. Ltd. ने संचालित की, जबकि CS Nikunj Kanabar & Associates ने स्क्रूटिनाइजर के रूप में वोटों की जांच की और पुष्टि की कि पूरी प्रक्रिया सेबी के नियमों के अनुरूप हुई।

मेन बोर्ड पर लिस्टिंग को मिली 100 फीसदी मंजूरी

कंपनी के शेयरों को BSE SME प्लेटफॉर्म से BSE और NSE के मेन बोर्ड पर स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को सार्वजनिक (पब्लिक) शेयरधारकों का 100 फीसदी समर्थन मिला। इस प्रस्ताव के पक्ष में कुल 2,11,500 वोट पड़े, जबकि विरोध में एक भी वोट नहीं पड़ा।

सेबी के नियमों के अनुसार इस प्रस्ताव पर प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। आवश्यक बहुमत मिलने के बाद यह प्रस्ताव पारित हो गया।

स्वतंत्र निदेशक की नियुक्ति की भी मंजूरी

शेयरधारकों ने काजल ए. अवलानी को कंपनी का स्वतंत्र निदेशक (Independent Director) नियुक्त करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी।

इस प्रस्ताव के पक्ष में कुल 1,54,66,834 वोट पड़े और इसके विरोध में कोई वोट नहीं आया। प्रमोटर और पब्लिक, दोनों श्रेणियों के सभी वोट इस प्रस्ताव के समर्थन में रहे, जिसके चलते यह भी आवश्यक बहुमत से पारित हो गया।

स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट में पुष्टि की गई है कि दोनों प्रस्ताव नियमानुसार आवश्यक बहुमत से पारित हुए हैं।

अब कंपनी BSE और NSE के मेन बोर्ड पर लिस्टिंग से जुड़ी सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी करेगी। मेन बोर्ड पर सूचीबद्ध होने के बाद कंपनी को अधिक निवेशकों तक पहुंच, बेहतर कारोबारिक पहचान और पूंजी जुटाने के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

 

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डिजिटल होर्डिंग्स से कमाई बढ़ाएगा प्रसार भारती, निजी कंपनियों से मांगे प्रस्ताव

प्रसार भारती अब अपनी जमीन और परिसंपत्तियों से कमाई बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठा रहा है।

Last Modified:
Tuesday, 14 July, 2026
PrasarBharati96532

प्रसार भारती अब अपनी जमीन और परिसंपत्तियों से कमाई बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठा रहा है। इसी कड़ी में प्रसार भारती ने आकाशवाणी पटना और दूरदर्शन केंद्र श्री विजयापुरम (पोर्ट ब्लेयर) में डिजिटल आउटडोर विज्ञापन ढांचा विकसित करने और उसका संचालन करने के लिए निजी कंपनियों से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) आमंत्रित किए हैं।

इन दोनों परियोजनाओं के तहत चुनी गई निजी एजेंसियां अपनी लागत पर LED यूनीपोल (डिजिटल होर्डिंग) लगाएंगी, उनका संचालन और रखरखाव करेंगी। इसके बदले उन्हें विज्ञापनों से होने वाली आय का एक हिस्सा प्रसार भारती के साथ साझा करना होगा।

प्रसार भारती ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी LED डिस्प्ले पर उपलब्ध कुल विज्ञापन समय का 33 प्रतिशत हिस्सा सरकार और प्रसार भारती के जनहित अभियानों के लिए मुफ्त उपलब्ध कराना होगा।

दोनों परियोजनाओं के लिए आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 22 जुलाई तय की गई है।

आकाशवाणी पटना परियोजना के तहत बिहार के फ्रेजर रोड स्थित परिसर में LED यूनीपोल लगाए जाएंगे। यह समझौता शुरुआत में पांच साल के लिए होगा, जिसे जरूरत पड़ने पर अगले पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है। अनुबंध अवधि पूरी होने के बाद पूरे डिजिटल ढांचे का स्वामित्व प्रसार भारती को सौंप दिया जाएगा।

वहीं, पोर्ट ब्लेयर में दूरदर्शन केंद्र श्री विजयापुरम के डेलानीपुर परिसर में भी इसी मॉडल पर LED यूनीपोल लगाए जाएंगे। यहां भी निजी कंपनी विज्ञापनों के जरिए व्यावसायिक उपयोग करेगी और तय शर्तों के अनुसार राजस्व का हिस्सा प्रसार भारती को देगी।

प्रसार भारती के अनुसार, चयनित एजेंसियों को साइट सर्वे, डिजाइन तैयार करना, सभी सरकारी मंजूरियां लेना, बिजली कनेक्शन की व्यवस्था करना, LED स्क्रीन लगाना, विज्ञापनों का संचालन करना और पूरे अनुबंध के दौरान रखरखाव की जिम्मेदारी निभानी होगी।

इसके अलावा कंपनियों को प्रसार भारती की विज्ञापन नीति, स्थानीय निकायों के नियम, ट्रैफिक और हाईवे से जुड़े मानकों, सुरक्षा प्रमाणपत्रों और पर्यावरण संबंधी नियमों का भी पालन करना होगा। प्रसार भारती ने साफ किया है कि अनुबंध अवधि के दौरान यदि होर्डिंग को कोई नुकसान, चोरी या अन्य बाधा होती है तो उसकी जिम्मेदारी प्रसार भारती की नहीं होगी।

तकनीकी मानकों के अनुसार, लगाए जाने वाले LED डिस्प्ले हाई-ब्राइटनेस फुल-कलर स्क्रीन होंगे, जिनकी न्यूनतम सेवा अवधि 1 लाख घंटे होगी। इनमें रिमोट के जरिए विज्ञापन सामग्री को अपडेट और मैनेज करने की सुविधा भी होगी।

यह पहल प्रसार भारती की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह पारंपरिक प्रसारण के अलावा नए राजस्व स्रोत विकसित करना चाहता है। पिछले कुछ वर्षों में सार्वजनिक प्रसारक डिजिटल बिलबोर्ड, इंफ्रास्ट्रक्चर साझेदारी और अपनी रियल एस्टेट परिसंपत्तियों के व्यावसायिक उपयोग पर लगातार जोर दे रहा है।

माना जा रहा है कि डिजिटल आउट-ऑफ-होम (DOOH) विज्ञापन बाजार की बढ़ती मांग को देखते हुए प्रसार भारती का यह कदम भविष्य में उसकी आय बढ़ाने के साथ-साथ विज्ञापनदाताओं के लिए भी नए अवसर उपलब्ध कराएगा।

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FIFA World Cup 2026: टीवी पर विज्ञापन घटे, Connected TV पर बढ़ी कंपनियों की दिलचस्पी

FIFA World Cup 2026 के दौरान पारंपरिक (Linear) टीवी पर विज्ञापनों की संख्या पिछले विश्व कप के मुकाबले कम रही, जबकि Connected TV (CTV) पर विज्ञापन देने वाली कंपनियों और ब्रैंड्स की संख्या बढ़ी।

Last Modified:
Saturday, 04 July, 2026
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FIFA World Cup 2026 के दौरान पारंपरिक (Linear) टीवी पर विज्ञापनों की संख्या पिछले विश्व कप के मुकाबले कम रही, जबकि Connected TV (CTV) पर विज्ञापन देने वाली कंपनियों और ब्रैंड्स की संख्या बढ़ी। यह जानकारी TAM Sports की नई रिपोर्ट में सामने आई है, जिसमें टूर्नामेंट के पहले 62 लाइव मैचों के दौरान दिखाए गए विज्ञापनों का विश्लेषण किया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, FIFA World Cup 2022 की तुलना में इस बार Linear TV पर विज्ञापनों की संख्या 14% घट गई। TAM Sports का कहना है कि इसकी एक बड़ी वजह टूर्नामेंट का अमेरिका में आयोजित होना हो सकती है। भारत और अमेरिका के बीच करीब 10 घंटे 30 मिनट का समय अंतर है, जबकि 2022 में मेजबान कतर के साथ यह अंतर केवल करीब ढाई घंटे था। समय का बड़ा अंतर होने के कारण भारत में कई मैच ऐसे समय पर खेले गए, जब दर्शकों की संख्या अपेक्षाकृत कम रहती है, जिसका असर विज्ञापनों पर भी पड़ा।

रिपोर्ट में सात टीवी चैनलों और चार Connected TV भाषा फीड्स पर मैचों के दौरान ब्रेक में दिखाए गए विज्ञापनों का अध्ययन किया गया। इसमें प्री-मैच, हाफ-टाइम विश्लेषण, पोस्ट-मैच कार्यक्रम, प्रोमो और ट्रेलर को शामिल नहीं किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, जहां Linear TV पर विज्ञापन देने वाले सेक्टर और कंपनियां सीमित रहीं, वहीं Connected TV पर कहीं अधिक विविधता देखने को मिली।

CTV पर 10 से ज्यादा विज्ञापन श्रेणियां थीं, जबकि Linear TV पर यह संख्या 5 से कुछ अधिक रही। इसी तरह CTV पर 15 से ज्यादा विज्ञापनदाता और 18 से ज्यादा ब्रैंड्स नजर आए, जबकि Linear TV पर क्रमशः 10 से ज्यादा विज्ञापनदाता और 15 से ज्यादा ब्रैंड्स ही सक्रिय रहे।

Linear TV पर सबसे ज्यादा विज्ञापन शराब से जुड़े ब्रैंड्स के रहे, जिनकी हिस्सेदारी 40% रही। इसके बाद कार कंपनियों का हिस्सा 36% रहा। रिटेल ज्वेलर्स ने 7%, जबकि टूथपेस्ट और परफ्यूम/डियोडोरेंट ब्रैंड्स ने 5-5% हिस्सेदारी दर्ज की।

यानी केवल पांच प्रमुख श्रेणियों ने Linear TV के कुल विज्ञापनों का 93% हिस्सा अपने नाम किया। इससे साफ है कि पारंपरिक टीवी पर विज्ञापन कुछ चुनिंदा सेक्टरों तक ही सीमित रहे।

CTV पर विज्ञापनों में दिखी ज्यादा विविधता

Connected TV पर तस्वीर अलग रही। यहां कार कंपनियां सबसे आगे रहीं और उनकी हिस्सेदारी 25% रही। इसके बाद सॉफ्ट ड्रिंक्स (12%), रिटेल ज्वेलर्स (11%), शराब (5%) और लगेज (4%) का स्थान रहा।

यहां शीर्ष पांच श्रेणियों की कुल हिस्सेदारी 57% रही, जिससे पता चलता है कि CTV पर कई अलग-अलग उद्योगों ने विज्ञापन दिए।

Linear TV पर United Spirits सबसे बड़ा विज्ञापनदाता रहा, जिसकी हिस्सेदारी 40% रही। इसके बाद Mahindra & Mahindra का 31% हिस्सा रहा। Maruti Suzuki India, Kalyan Jewellers India और Vicco Laboratories भी प्रमुख विज्ञापनदाताओं में शामिल रहे।

वहीं Connected TV पर Mahindra & Mahindra पहले स्थान पर रही, जिसकी हिस्सेदारी 23% रही। इसके बाद United Spirits (17%), Kalyan Jewellers India (7%), Pernod Ricard India और Girnar Food & Beverages रहे।

Linear TV पर Black Dog Soda सबसे ज्यादा विज्ञापन देने वाला ब्रैंड रहा। इसके बाद Mahindra Thar Roxx, Mahindra XEV 9E, Johnnie Walker Luxe Blended Water और Mahindra BE 6 का स्थान रहा।

वहीं Connected TV पर Black & White Non-Alcoholic Carbonated Beverages सबसे आगे रहा। इसके बाद Mahindra Thar Roxx, Mahindra XEV 9E, Candere by Kalyan Jewellers और Mahindra BE 6 प्रमुख ब्रैंड्स रहे।

रिपोर्ट की एक खास बात यह भी रही कि Linear TV पर कोई भी ऐसा सेक्टर या विज्ञापनदाता नहीं मिला जो केवल वहीं विज्ञापन दे रहा हो। इसके उलट Connected TV पर पांच नई विज्ञापन श्रेणियां और चार ऐसे विज्ञापनदाता मिले, जिन्होंने केवल CTV पर विज्ञापन दिए।

इनमें सॉफ्ट ड्रिंक्स, लगेज, ई-लर्निंग, विटामिन और हेल्थ सप्लीमेंट्स तथा कॉर्पोरेट ब्रैंड कैंपेन जैसी श्रेणियां शामिल थीं। वहीं Pernod Ricard India, Eduauraa Technologies, Naturell India और Adidas जैसे विज्ञापनदाता केवल CTV पर सक्रिय रहे।

TAM Sports का निष्कर्ष है कि बड़े खेल आयोजनों के दौरान पारंपरिक टीवी अभी भी कुछ बड़े विज्ञापनदाताओं पर काफी हद तक निर्भर है। वहीं Connected TV तेजी से ऐसा मंच बनता जा रहा है, जहां अलग-अलग उद्योगों, कंपनियों और ब्रैंड्स को विज्ञापन देने का बेहतर मौका मिल रहा है। यही वजह है कि CTV पर विज्ञापनदाताओं और ब्रैंड्स की विविधता लगातार बढ़ रही है।

 

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बाल यौन शोषण वाले विज्ञापनों के आरोपों पर Meta से पूछताछ करेगी सरकार

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कथित तौर पर मंत्रालय के अधिकारियों को Meta के प्रतिनिधियों को तलब करने के निर्देश दिए हैं।

Last Modified:
Saturday, 04 July, 2026
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इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कथित तौर पर मंत्रालय के अधिकारियों को Meta के प्रतिनिधियों को तलब करने के निर्देश दिए हैं। यह कदम उन आरोपों के बाद उठाया गया है, जिनमें कहा गया है कि Instagram पर बाल यौन शोषण (Child Sexual Abuse Material) से जुड़े विज्ञापन दिखाए गए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार Meta से इस मामले में विस्तृत जवाब मांगेगी। कंपनी से पूछा जाएगा कि ऐसे विज्ञापनों को उसके प्लेटफॉर्म पर कैसे मंजूरी मिली और भविष्य में इस तरह की सामग्री को रोकने के लिए उसने क्या सुरक्षा व्यवस्था की है। Meta, Facebook, Instagram और WhatsApp की मूल कंपनी है।

बताया जा रहा है कि मंत्रालय के अधिकारी Meta से यह भी जानना चाहेंगे कि कंपनी आपत्तिजनक कंटेंट की पहचान करने और उसे हटाने के लिए किन तकनीकों और प्रक्रियाओं का इस्तेमाल करती है। साथ ही कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम को और मजबूत बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

यह मामला BBC की एक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद गरमाया है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत में Instagram पर ऐसे विज्ञापन दिखाई दिए, जिनमें बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का प्रचार किया जा रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, इन विज्ञापनों में "rape video" और "child video" जैसे बेहद आपत्तिजनक कैप्शन लिखे थे। इन पर क्लिक करने के बाद यूजर्स को Telegram के ऐसे चैनलों पर भेजा जाता था, जहां कथित तौर पर अवैध सामग्री मात्र 99 रुपये में उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा था।

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए Meta के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी की बाल यौन शोषण से जुड़ी किसी भी सामग्री को लेकर "जीरो टॉलरेंस" नीति है। उन्होंने कहा कि Meta उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम की मदद से इस तरह की सामग्री की पहचान कर उसे सक्रिय रूप से हटाने का काम करती है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि दुनिया भर में कुछ लोग लगातार प्लेटफॉर्म की निगरानी व्यवस्था से बचने की कोशिश करते रहते हैं, जिससे ऐसी चुनौतियां बनी रहती हैं।

फिलहाल सरकार Meta के जवाब का इंतजार कर रही है। माना जा रहा है कि इस मामले में कंपनी से जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।

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