‘Walk The Talk Communications’ ने विस्तार की दिशा में कुछ इस तरह बढ़ाए कदम

इस एजेंसी की लीडरशिप टीम में शामिल सभी लोगों को पूर्व में तमाम प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने का दशकों का अनुभव है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 25 August, 2022
Last Modified:
Thursday, 25 August, 2022
OOH

कुछ महीनों पहले ही अस्तित्व में आई ‘आउट ऑफ होम’ (OOH) एडवर्टाइजिंग एजेंसी ‘वॉक द टॉक कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड’ (Walk The Talk Communications Pvt Ltd) ने अपने विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसके तहत इस एजेंसी ने पांच बड़े शहरों मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई और कोलकाता से अपना परिचालन शुरू किया है। 20 अनुभवी ओओएच प्रोफेशनल्स की टीम इन शहरों में काम कर रही है।

इस नई ओओएच कंपनी के विचार को अमल में लाने वाले निखिल वर्मा का कहना है, ‘जब आप विभिन्न संस्थानों में बहुत लंबे समय तक काम करते हैं, तो आप अनजाने में उन चीजों की लिस्ट बनाते रहते हैं जो आपको सही लगती हैं। समय के साथ आप और बेहतर बनाने के लिए इस लिस्ट को लगातार देखते रहते हैं और अपडेट करते रहते हैं। एक दिन आपको पता चलता है कि आपके पास जो लिस्ट है, वह एक नई यात्रा के लिए शुरुआती बिंदु हो सकती है और आप पूरे दिल और जुनून के साथ उस दिशा में चलना शुरू कर देते हैं।’

इसके साथ ही निखिल वर्मा का कहना है, ’हम सभी ने पिछले कई वर्षों में तमाम संस्थानों की सेवा की है, अब मालिक बनने का समय है। इस एजेंसी का विचार ऐसे संगठन का निर्माण करना है, जहां हर व्यक्ति इसका मालिक हो।’

नई एजेंसी की प्रारंभिक योजना को क्रियान्वित करने में अग्रणी भूमिका निभाने वाले रजत सिकदर का कहना है, ’ हमारा मानना है कि एक खुश व्यक्ति सकारात्मकता फैलाता है और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करता है। हम एक ऐसी टीम बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो खुश हो।’

एजेंसी की लीडरशिप टीम में शामिल विपुल मेहता का कहना है, ’हमारा फोकस बिजनेस के हर पहलू में हमेशा बुनियादी सिद्धांतों और पारदर्शिता पर रहेगा। यही एक स्वस्थ रिश्ते और आपसी विश्वास की कुंजी है।’ वहीं, लीडरशिप टीम में शामिल हरदीप सिंह का कहना है, ’हमारे सम्मानित क्लाइंट्स की अपेक्षाओं को पूरा करना ही हमारा एकमात्र लक्ष्य नहीं होगा, मैं उम्मीद करता हूं कि हमारी टीम का प्रत्येक सदस्य उन अपेक्षाओं से आगे बढ़कर उन्हें बेहतर अनुभव प्रदान करेगा।’

बता दें कि इस एजेंसी की लीडरशिप टीम में शामिल सभी लोगों को पूर्व में तमाम प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने का दशकों का अनुभव है। इस बारे में निखिल वर्मा का कहना है, ’अपनी योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए आपको वित्तीय सहायता की आवश्यकता होती है। मैं भाग्यशाली हूं कि मेरे बहुत प्रिय मित्र मनोज बाजपेयी को बोर्ड में शामिल किया गया, जिन्होंने हमारी परियोजना में विश्वास किया और इसे सपोर्ट देने के लिए सहमत हुए।’

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लोकप्रिय कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव ने विज्ञापनों की दुनिया में कुछ यूं बिखेरा था जलवा

कॉमेडी स्टार राजू श्रीवास्तव ने कुछ विज्ञापनों में अपनी आवाज दी है और कुछ विज्ञापनों में वे खुद सामने आए हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 September, 2022
Last Modified:
Wednesday, 21 September, 2022
rajusrivastav5215

एक महीने की लंबी लड़ाई के बाद, 21 सितंबर बुधवार को लोकप्रिय कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव का निधन हो गया। वह 58 वर्ष के थे। बता दें कि 10 अगस्त को जिम में वर्कआउट दौरान राजू को दिल का दौरा पड़ा था, जिसके बाद उन्हें एम्स में भर्ती करवाया गया था। यहां उनकी एंजियोप्लास्टी हुई, लेकिन उन्हें कभी होश नहीं आया और बीते 41 दिनों से वेंटिलेटर पर मौत से जंग लड़ते रहे, लेकिन अंत में वह यह जंग हार गए।

राजू श्रीवास्तव के मौत की खबर सामने आने के बाद से ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। हर कोई नम आंखों से राजू को श्रद्धांजलि दे रहा है। 

राजू श्रीवास्तव देश के सबसे लोकप्रिय स्टैंड-अप कॉमेडियन में से एक थे। वह अपेक्षाकृत जल्दी ही स्टैंड-अप दृश्य में आ गए और ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ पर अपनी दिनचर्या को लेकर वह काफी लोकप्रिय होगए। कॉमेडी की दुनिया में शोहरत हासिल करने वाले राजू श्रीवास्तव बॉलीवुड की कई फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं। उन्होंने ‘बाजीगर’, ‘मैंने प्यार किया’ और ‘आमदानी अठ्ठनी खर्चा रुपइया’ जैसी बॉलीवुड की कई अन्य फिल्मों में अपनी भूमिका निभाई।

राजू का हर अंदाज, बिल्कुल आम लोगों का था और आम लोग राजू के लतीफ़ों पर तालियां बजाने लगे। यूपी के भैया वाले अंदाज में राजू ने कॉमेडी में कभी अश्लीलता नहीं आने दी और ये हर घर में उनकी पहचान बनाने में सबसे कारगर साबित हुआ।

कॉमेडी स्टार ने कुछ विज्ञापनों में अपनी आवाज दी है और खुद भी सामने आए हैं। हालांकि उनके द्वारा किए विज्ञापन बहुत ही कम थे, लेकिन काफी यादगार और क्रिएटिविटी से भरे हुए थे, जिनमें से कुछ को यहां देख सकते हैं-

स्वच्छ भारत अभियान

राजू अपने सभी किरदारों में डूबकर अदाकारी करते थे और उस किरदार को एक अलग आवाज देते थे। 2014 में प्रचंड जीत के बाद जब केंद्र में भाजपा की अगुवाई में एनडीए की सरकार बनी तो स्वच्छ भारत अभियान के लिए राजू श्रीवास्तव को पीएम मोदी ने नॉमिनेट किया। इसके बाद राजू की लोकप्रियता और जन-अपील की वजह से वह भारत सरकार के स्वच्छता कार्यक्रम ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के एक बेहतरीन एंबेस्डर बन गए।

पेट सफ़ा

राजू श्रीवास्तव के सबसे हालिया विज्ञापनों में से एक आयुर्वेदिक ब्रैंड ‘पेट सफ़ा’ भी था। अपनी विशिष्ट हास्य शैली से वह इस विज्ञापन में कब्ज को दूर करने का प्रयास करते हैं। वह सभी से इसे एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या के रूप में देखने और इसे हंसी में न उड़ाने की अपील करते हैं।

हिमरत्न ऑयल

राजू श्रीवास्तव ने आयुर्वेदिक ब्रैंड ‘हिमरत्न ऑयल’ के एक विज्ञापन में अभिनय किया। वह ‘सर जो तेरा चकराए...’ की धुन में तनाव-मुक्त मालिश वाले तेल का प्रचार एक क्रिएटिव जिंगल बजाते हुए करते हैं।

सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसी प्रमुख हस्तियों ने राजू श्रीवास्तव के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित की और इस दुख की घड़ी में प्रिय कॉमेडियन के परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की।

58 साल के रहे राजू श्रीवास्तव के परिवार में उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं।

 

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Netflix अब इस तरह के विज्ञापनों पर लगाएगा रोक

इस साल के अंत तक नेटफ्लिक्स का यह सब्सक्रिप्शन प्लान लॉन्च किया जाएगा।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 07 September, 2022
Last Modified:
Wednesday, 07 September, 2022
netflix

स्ट्रीमिंग सर्विस प्लेटफॉर्म ‘नेटफ्लिक्स’ (Netflix) ने कम प्राइस वाले अपने सब्सक्रिप्शन पर क्रिप्टोकरेंसी और गैंबलिंग के विज्ञापनों पर रोक लगाने का फैसला किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल के अंत तक यह सब्सक्रिप्शन प्लान लॉन्च किया जाएगा।

रिपोर्ट में बताया गया है कि ‘नेटफ्लिक्स’ के इस स्ट्रीमिंग सर्विस का प्राइस केवल सात डॉलर होगा। माना जा रहा है कि इस साल नवंबर की शुरुआत से अमेरिका और कुछ अन्य देशों में लॉन्च किया जाएगा। नेटफ्लिक्स ने विज्ञापनों के लिए सपोर्ट को डेवेलप करने के लिए माइकोसॉफ्ट के साथ टाई-अप किया है।

बता दें कि इससे पहले TikTok के इंफ्लुएंसर्स पर भी क्रिप्टोकरेंसीज का प्रचार करने को लेकर बैन लग चुका है। फेसबुक ने भी क्रिप्टो से जुड़े विज्ञापनों पर कुछ वर्ष पहले रोक लगाई थी, लेकिन बाद में इसे हटा लिया गया था।
  

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निजी कंपनियों पर आकाशवाणी व दूरदर्शन का करोड़ों का विज्ञापन शुल्क बकाया

लोकसभा में सूचना-प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि प्रसार भारती ने बकाया राशि की वसूली की निगरानी के लिए एक तंत्र स्थापित किया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 03 August, 2022
Last Modified:
Wednesday, 03 August, 2022
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इस साल 31 मार्च तक निजी कंपनियों पर आकाशवाणी और दूरदर्शन का 214.24 करोड़ रुपए का विज्ञापन शुल्क बकाया है। यह जानकारी केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में पूछे गए सवालों के जवाब में दी।

लोकसभा में एक लिखित उत्तर में, अनुराग ठाकुर ने बताया कि प्रसार भारती ने बकाया राशि की वसूली की निगरानी के लिए एक तंत्र स्थापित किया है। बकाया देय राशि की वसूली के लिए प्रसार भारती निजी कंपनियों के साथ संपर्क में है और अनुवर्ती कार्रवाई भी करता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए बैंक गारंटी के नकदीकरण और मध्यस्थता जैसे उपायों का भी सहारा लिया जाता है।

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पिछले 3 वर्षों में सरकार ने मीडिया में विज्ञापनों पर कितना किया खर्च, जानें यहां

केंद्र सरकार ने पिछले तीन वर्षों में मीडिया में विज्ञापनों पर 911.17 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

Last Modified:
Tuesday, 26 July, 2022
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केंद्र सरकार ने पिछले तीन वर्षों में मीडिया में विज्ञापनों पर 911.17 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। सूचना-प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने राज्य सभा में गुरुवार को यह जानकारी दी है।

सूचना-प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि सरकार ने पिछले तीन वर्षों में अखबारों, टेलीविजन चैनलों और वेबसाइटों में विज्ञापनों पर 911.17 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। उन्होंने एक प्रश्न के लिखित जवाब में बताया कि वित्तीय वर्ष 2019-20 से जून 2022 तक केंद्रीय संचार ब्यूरो द्वारा विज्ञापनों का भुगतान किया गया था।

अखबारों में विज्ञापन पर खर्च:

अनुराग ठाकुर ने बताया कि सरकार ने 2019-20 में 5,326 अखबारों में विज्ञापनों पर 295.05 करोड़ रुपए, 2020-21 में 5,210 अखबारों में विज्ञापनों पर 197.49 करोड़ रुपए, 2021-22 में 6,224 अखबारों में विज्ञापनों पर 179.04 करोड़ रुपए और 2022-23 में जून तक 1,529 अखबारों में विज्ञापनों पर 19.25 करोड़ रुपए खर्च किए।

टीवी चैनलों पर विज्ञापन खर्च:

सूचना-प्रसारण मंत्री के मुताबिक, इसी अवधि के दौरान, सरकार ने 2019-20 में 270 टेलीविजन (टीवी) चैनलों में विज्ञापनों पर 98.69 करोड़ रुपए, 2020-21 में 318 टीवी चैनलों में विज्ञापनों पर 69.81 करोड़ रुपए, 2021-22 में 265  न्यूज चैनलों में विज्ञापनों पर 29.3 करोड़ रुपए और 2022-23 में जून तक 99 टीवी चैनलों में विज्ञापनों पर 1.96 करोड़ रुपए खर्च किए।

इंटरनेट वेबसाइटों पर खर्च किया गया विज्ञापन:  

मंत्री ने कांग्रेस सदस्य दिग्विजय सिंह के एक सवाल के लिखित जवाब में कहा कि वेब पोर्टल पर विज्ञापनों पर सरकार का खर्च 2019-20 में 54 वेबसाइटों पर 9.35 करोड़ रुपए, 2020-21 में 72 वेबसाइटों पर विज्ञापनों पर 7.43 करोड़ रुपए, 2021-22 में 18 वेबसाइटों में विज्ञापनों पर 1.83 करोड़ रुपए और 2022-23 में जून तक 30 वेबसाइटों पर 1.97 करोड़ रुपए था।

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ASCI की रिपोर्ट में खुलासा, इस तरह के विज्ञापनों में मिली सबसे अधिक शिकायतें

विज्ञापनों पर निगरानी रखने वाली संस्था एडवर्टाइजिंग एंड स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) ने साल 2021-22 की रिपोर्ट जारी की है।

Last Modified:
Thursday, 30 June, 2022
ASCI

विज्ञापनों पर निगरानी रखने वाली संस्था एडवर्टाइजिंग एंड स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) ने साल 2021-22 की रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे बड़ी समस्या विज्ञापन में सही तस्वीर न देने की रही है। ‘आपत्तिजनक या भ्रामक’ विज्ञापनों में से सबसे ज्यादा यानी 33 प्रतिशत शिक्षा क्षेत्र से जुड़े पाए गए, जो मुख्य रूप से एडटेक उद्यमों से संबंधित थे।

बाकी आपत्ति वाले विज्ञापनों में हेल्थकेयर की 16% और पर्सनल केयर की 11% हिस्सेदारी रही। क्रिप्टो का 8-8% हिस्सा वर्चुअल डिजिटल असेट कंपनियों, ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग और फूड एंड बेवरेज कंपनियों के आपत्तिजनक विज्ञापनों का रहा।

इस तरह के विज्ञापन तीन श्रेणियों से संबंधित थे- वे जिनके बारें में दर्शकों से शिकायतें प्राप्त हुईं, वे जिन्हें उद्योग द्वारा चिन्हित किया गया और वे जिनके बारे में ASCI ने स्वत: संज्ञान लिया।

रिपोर्ट के अनुसार, ASCI ने प्रिंट, डिजिटल और टेलीविजन में 5,532 विज्ञापनों की निगरानी की और और उसी आधार पर ये निष्कर्ष निकाला है। 2020-2021 की तुलना में 62 प्रतिशत अधिक विज्ञापनों की निगरानी की गई, जिसके बाद शिकायतों में 25 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।

ASCI के मुताबिक 39% विज्ञापनों को एडवर्टाइजर ने कंटेस्ट नहीं किया, यानि आपत्तियों पर कोई एतराज नहीं किया। जबकि 55% विज्ञापनों पर उठाए गए सवाल जायज पाए गए। 4% विज्ञापनों के खिलाफ आई शिकायतों में कोई दम नहीं मिला।

ASCI के मुताबिक उसके नियमों पर खरा उतरने के लिए 5532 विज्ञापनों में से 94% ऐसे पाए गए, जिनमें सुधार की जरूरत पायी गई।

ASCI ने डिजिटल परिदृश्य में विज्ञापन को लगातार निगरानी में रखकर अपने दायरे को व्यापक बनाया। निगरानी किए गए विज्ञापनों में से लगभग 48 फीसदी डिजिटल माध्यम से संबंधित थे। पिछले वर्ष प्रभावशाली दिशा-निर्देशों के लागू होने के साथ ही साथ, प्रभावशाली लोगों के खिलाफ शिकायतें, कुल शिकायतों की 29 फीसदी थी।

वहीं, मशहूर हस्तियों वाले विज्ञापनों में भ्रामक दावों की शिकायतों में 41 फीसदी की वृद्धि देखी गई, जिनमें से 92 फीसदी को ASCI के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए पाया गया।

शिक्षा क्षेत्र में नियमों के उल्लंघन में हुई वृद्धि को देखते हुए, ASCI ने एडटेक कंपनियों के सभी विज्ञापनों पर एक अलग अध्ययन की योजना बनाई है।

इसके बारे में बताते हुए ASCI की सीईओ मनीषा कपूर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ‘शिक्षा हमेशा से एक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र रहा है और एक चीज जिसे हमें इस संदर्भ में देखने की जरूरत है, वह यह है कि कुछ अन्य श्रेणियों या ब्रैंड्स के विपरीत शिक्षा इस देश में हर एक उपभोक्ता के संपर्क में आती है।’

उन्होने कहा, ‘यह विशेष रूप से एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें काफी अधिक चिंताएं शामिल हैं और अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण है।’ उन्होंने बताया कि एडटेक कंपनियों के पास बड़े-बड़े बजट हैं, वे कई प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद हैं और ये नई कंपनियां स्थानीय और क्षेत्रीय दर्शकों की सेवा कर रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘नौकरी की गारंटी और कुछ खास अंक या टेस्ट्स जैसा वादा करने वाली चीजें ठीक नहीं हैं। हां, हम एडटेक के साथ जुड़ी एक चिंता को देखते हैं और इसलिए हम एक ऐसे अध्ययन पर काम कर रहे हैं, जो सभी एडटेक विज्ञापनों का ऑडिट करेगा। यह अध्ययन इनकी थीम (विषय वस्तु) और भ्रामक दावों का विश्लेषण करेगा।’

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ASCI ने इस तकनीक के जरिए की डिजिटल पर भ्रामक कंटेंट वाले ऐड की निगरानी

ASCI ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और व्यक्तिगत देखभाल जैसे क्षेत्रों को डिजिटल श्रेणी में शीर्ष तीन उल्लंघनकारी श्रेणियों के रूप में पाया गया है।

Last Modified:
Wednesday, 29 June, 2022
ASCI

भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (ASCI) ने डिजिटल मंचों पर भ्रामक सामग्री संबंधी विज्ञापनों की निगरानी के लिए ‘डिजिटल निगरानी’ प्रणाली स्थापित की है। ASCI इसके लिए कृत्रिम मेधा (AI) आधारित निगरानी प्रणाली का उपयोग कर रहा है। ASCI ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए अपनी वार्षिक शिकायत रिपोर्ट में यह जानकारी दी।

नियामक ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और व्यक्तिगत देखभाल जैसे क्षेत्रों को डिजिटल श्रेणी में शीर्ष तीन उल्लंघनकारी श्रेणियों के रूप में पाया गया है।

ASCI ने कहा कि विज्ञापन अब मोबाइल जैसी व्यक्तिगत स्क्रीन पर तेजी से दर्शाये जा रहे हैं, जिसके कारण नियामकों के लिए विज्ञापनों के पैमाने और प्रभाव को समझना मुश्किल हो गया है।

नियामक ने कहा कि विज्ञापन बनाने वाली इकाइयों की संख्या में जोरदार वृद्धि हुई है और एक अनुमान के अनुसार, एक व्यक्ति प्रतिदिन औसतन 6,000 से 10,000 विज्ञापनों के संपर्क में आता है।

ASCI की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं महासचिव मनीषा कपूर ने कहा, ‘डिजिटल दुनिया में बहुत कुछ हो रहा है। हम निगरानी करने के लिए AI तकनीक की मदद ले रहे हैं।’

रिपोर्ट के अनुसार, ASCI को बीते वित्त वर्ष के दौरान प्रिंट, डिजिटल और टेलीविजन समेत सभी माध्यमों से 7,631 शिकायतें मिलीं और इनमे से 5,532 का निपटान किया गया। डिजिटल क्षेत्र पर सबसे अधिक ध्यान देने के साथ ASCI की अनुपालन दर 94 प्रतिशत रही।

ASCI ने वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान लगभग 75 प्रतिशत शिकायतों को खुद संज्ञान लिया, जबकि 21 प्रतिशत उपभोक्ता और शेष उद्योग जगत तथा सरकार की तरफ से मिलीं।

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’इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ ने BARC की इस प्रणाली का किया समर्थन, दिया ये बयान

यह स्टेटमेंट इंडस्ट्री के कुछ स्टेक होल्डर्स की उन मांगों के मद्देनजर आया है, जिनमें वास्तविक व्युअरशिप से लैंडिंग पृष्ठ डेटा को अलग करने की आवश्यकता बताई गई है।

Last Modified:
Tuesday, 21 June, 2022
ISA

एडवर्टाइजर्स की प्रमुख संस्था ’इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ (ISA) ने देश में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था ‘ब्रॉडकास्टर्स ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) के लैंडिंग पेज की ‘एल्गोरिथम’   (algorithm) का समर्थन किया है। बता दें कि बार्क इंडिया के स्टेक होल्डर्स (stakeholders) में ’इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ भी शामिल है।

इस बारे में ’इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ की ओर से जारी स्टेटमेंट में कहा गया है,  ‘बार्क ने माप विज्ञान (measurement science) में सुधार लाने और बाहरी कारकों के दर्शकों की संख्या पर प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से एक डेटा सत्यापन गुणवत्ता पहल (Data Validation Quality Initiative) शुरू की है।’

इस स्टेटमेंट में कहा गया है कि बार्क इंडिया ने अपने डेटा सत्यापन पद्धति में एक एल्गोरिथम पेश किया है, ताकि सभी चैनल्स पर जबरन व्युअरशिप डेटा को लेकर लैंडिंग पृष्ठ के प्रभाव को दूर किया जा सके।

’इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ के अनुसार, यह तरीका सभी शैलियों में बेहतर परिणाम देने के लिए सीधे अनुमानित आंकड़ों (inferential statistics) का उपयोग करता है। इसे बार्क की टेक्निकल कमेटी द्वारा सत्यापित और प्रमाणित किया गया है।

इस बारे में ’इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ के चेयरमैन सुनील कटारिया का कहना है, ’ बार्क की एल्गोरिथम बहुत उच्च सफलता दर वाले लैंडिंग पृष्ठों का पता लगाती है और एक बार पता चलने के बाद, यह एल्गोरिथम जबर्दस्ती थोपी गई व्युअरशिप (forced viewership) को हटाने का प्रयास करती है और स्वैच्छिक व्युअरशिप (voluntary viewership) उस चैनल के लिए वास्तविक व्युअरशिप के रूप में गिनी जाती है। यह एक सही तरीका है और लैंडिंग पेज व्युअरशिप के मुद्दे पर बार्क द्वारा अपनाए जा रहे इस तरीके पर तमाम एडवर्टाइजर्स एकमत हैं।’

बता दें कि यह स्टेटमेंट इंडस्ट्री के कुछ स्टेक होल्डर्स की उन मांगों के मद्देनजर आया है, जिनमें वास्तविक व्युअरशिप से लैंडिंग पृष्ठ डेटा को अलग करने की आवश्यकता बताई गई है। इन स्टेक होल्डर्स का मानना ​​है कि लैंडिंग पेज टीवी चैनल्स की लोकप्रियता की गलत तस्वीर प्रस्तुत करता है।

लैंडिंग पृष्ठ के मुद्दे पर टीवी न्यूज इंडस्ट्री की अलग-अलग राय है। कुछ प्लेयर्स ने दावा किया है कि यह सिर्फ उन मीडिया कंपनियों के पक्ष में है, जिनके पास काफी पैसा है, जबकि कुछ का दावा है कि लैंडिंग पृष्ठ पूरी तरह से कानूनी है।

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जानिए, प्रिंट पर ब्रैंड्स के विज्ञापन के मामले में कैसा रहा साल का शुरुआती सफर

TAM AdEx के आंकड़ों पर एक नजर डालें तो पता चलता है कि 2020 की तुलना में साल 2022 में प्रिंट सेक्टर के कुल ऐड स्पेस में 12 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है

Last Modified:
Wednesday, 15 June, 2022
Newsprint

TAM AdEx के आंकड़ों पर एक नजर डालें तो पता चलता है कि 2020 की तुलना में साल 2022 में प्रिंट सेक्टर के कुल ऐड स्पेस में 12 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं 2021 की इसी समयावधि की तुलना में इसमें मामूली गिरावट दर्ज की गई थी।  

जनवरी से मार्च 2022 में ऐड स्पेस प्रति पब्लिकेशन लगभग जनवरी से मार्च 2021 के बराबर ही था।

इसके अलावा, सर्विस सेक्टर 17% ऐड स्पेस के साथ शीर्ष पर रहा और उसके बाद ऑटो सेक्टर 11% शेयर के साथ दूसरे नंबर पर रहा। शीर्ष तीन सेक्टर्स ने मिलकर प्रिंट में ऐड स्पेस का 38% हिस्सा लिया। इस बीच, तीन सेक्टर्स- रिटेल, फूड एंड बेवजरेज और पर्सनल एसेसरीज ने टॉप-10 की सूची में अपनी रैंकिंग बनाए रखी।

रिपोर्ट के अनुसार, टॉप-10 में शामिल अन्य कैटेगरीज ने मिलकर प्रिंट में ऐड स्पेस का 30% से अधिक हिस्सा अर्जित किया। प्रॉपर्टीज/रियल एस्टेट्स, हॉस्पिटल/क्लीनिक्स व लाइफ इंश्योरेंस जनवरी से मार्च 2022 के दौरान रैंकिंग में ऊपर चले गए और केवल सार्वजनिक निर्गम श्रेणी (Public Issues category) ने जनवरी से मार्च 21 व 22 में अपनी रैंकिंग जस की तस बनाए रखी। साथ ही, टॉप-10 कैटेगरीज में से दो ऑटो, रिटेल और एक-एक बैंकिंग/फाइनेंशियल/इनवेस्ट सेक्टर से थीं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि SBS बायोटेक प्रिंट में एडवर्टाइजर्स की सूची में सबसे ऊपर है, उसके बाद एलआईसी ऑफ इंडिया है। शीर्ष तीन एडवर्टाइजर्स ने जनवरी से मार्च 2022 के दौरान अपनी स्थिति बनाए रखी। रिलायंस रिटेल जनवरी से मार्च 2021 में 13वें स्थान की तुलना में जनवरी से मार्च 2022 में आठवें स्थान पर पहुंच गया। जबकि रुचि सोया इंडस्ट्रीज व पतंजलि आयुर्वेद जनवरी से मार्च 2022 की ऐडवर्टाइजमेंट रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंच गए हैं। इसी अवधि के दौरान 53,800 से अधिक ऐडवर्टाइजर्स ने ऐड दिया।

पहली तिमाही में 62,600 से अधिक ब्रैंडस ने प्रिंट में ऐड दिया, जिसमें एलआईसी ब्रैंड सूची में सबसे आगे रहा। टॉप 10 ब्रैंडस में, दो-दो बैंकिंग/फाइनेंशियल/इनवेस्ट और पर्सनल हेल्थकेयर सेक्टर से आए हैं।

ऐड स्पेस में विटामिन/टॉनिक्स/हेल्थ सप्लिमेंट्स ने 87 प्रतिशत की बढ़त के साथ सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की, इसके बाद EcomMedia/Ent./Social Media का स्थान रहा, जो जनवरी से मार्च 2022 और जनवरी से मार्च 2021 के बीच तीन गुना बढ़ गया। ग्रोथ के संदर्भ में, ईकॉम-फाइनेंशियल सर्विस कैटेगरी में टॉप-10 में सबसे अधिक ग्रोथ परसेंटेज देखा गया, यानी जनवरी से मार्च 2022 के बीच 18 गुना।

इस बीच, जनवरी से मार्च 2022  के दौरान जनवरी से मार्च 2021 की तुलना में 32,000 से अधिक ऐडवर्टाइजर्स और 41,000 ब्रैंड्स को विशेष रूप से प्रिंट में विज्ञापित किया गया था। पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में जनवरी से मार्च 2022 में रुचि सोया इंडस्ट्रीज और Kia Carens टॉप ऐडवर्जाइजर्स और ब्रैंड्स थे।

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ऑनलाइन सट्टेबाजी के विज्ञापनों पर सरकार सख्त, मीडिया के लिए जारी की ये एडवाइजरी

देश में ऑनलाइन सट्टेबाजी वेबसाइट्स/प्लेटफार्म्स (Online Betting websites/ Platforms) के विज्ञापनों को लेकर ‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है।

Last Modified:
Monday, 13 June, 2022
MIB

देश में ऑनलाइन सट्टेबाजी वेबसाइट्स/प्लेटफार्म्स (Online Betting websites/ Platforms) के विज्ञापनों को लेकर ‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है।

मंत्रालय ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को सलाह दी है कि वे ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफार्म्स के विज्ञापनों को प्रकाशित/प्रसारित करने से बचें। इसके साथ ही मंत्रालय ने ऑनलाइन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भारत में ऐसे विज्ञापनों को प्रदर्शित न करने की सलाह दी है।

सूचना प्रसारण मंत्रालय की ओर से इस बारे में 13 जून 2022 को जारी लेटर में कहा गया है, ‘मंत्रालय की ओर से चार दिसंबर 2020 को प्राइवेट टीवी चैनल्स के लिए एक एडवाइजरी जारी कर ऑनलाइन गेमिंग के बारे में विज्ञापनों को लेकर एडवर्टाइजमेंट स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) की गाइडलाइंस का पालन करने के लिए कहा गया था, जिनमें बताया गया है कि क्या करना है और क्या नहीं।’

सूचना प्रसारण मंत्रालय के अनुसार, ’यह संज्ञान में आया है कि इन दिनों प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, ऑनलाइन और सोशल मीडिया पर ऑनलाइन सट्टेबाजी वेबसाइट्स/प्लेटफॉर्म्स के विज्ञापन दिखाए जा रहे हैं। देश के अधिकांश हिस्सों में सट्टेबाजी और जुआ अवैध है और इस तरह के विज्ञापन उपभोक्ताओं, खासकर युवाओं और बच्चों के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय और सामाजिक व आर्थिक जोखिम पैदा करते हैं।’

अपनी एडवाइजरी में मंत्रालय का कहना है, ’लोगों को हितों के देखते हुए सलाह दी जाती है कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया इस तरह के विज्ञापनों को प्रकाशित/प्रसारित न करें। साथ ही ऑनलाइन और सोशल मीडिया को भी इस तरह के विज्ञापनों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।’

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ऐसे विज्ञापन करने पर अब सेलेब्स पर भी होगी कार्रवाई, जारी हुए दिशानिर्देश

केंद्र सरकार ने भ्रमाक विज्ञापनों और ऐसे विज्ञापनों को चर्चित हस्तियों की ओर से पहचान दिए जाने पर रोकथाम के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं

Last Modified:
Saturday, 11 June, 2022
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केंद्र सरकार ने भ्रमाक विज्ञापनों और ऐसे विज्ञापनों को चर्चित हस्तियों की ओर से पहचान दिए जाने पर रोकथाम के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिनके मुताबिक, अब भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और ऐसी स्थिति में उनका प्रचार करने वाली हस्तियों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है और भी उन्हें कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। 

उपभोक्ता मामलों के विभाग के तहत काम करने वाली एजेंसी केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने भ्रामक विज्ञापनों पर अंकुश लगाने और ऐसे विज्ञापनों से उपभोक्ताओं की रक्षा करने के उद्देश्य से 'भ्रामक विज्ञापनों की रोकथाम के लिए दिशानिर्देश और भ्रामक विज्ञापनों के समर्थन, 2022' को अधिसूचित किया है।

उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत पहले से ही भ्रामक विज्ञापनों और उल्लंघनकर्ताओं के लिए दंड और कार्रवाई का प्रावधान है, लेकिन नए नियम सेलिब्रिटी विज्ञापनों को लक्षित करते हैं, जो गैरकानूनी हो सकते हैं। इनमें सरोगेट विज्ञापन और ऐसे विज्ञापन जो बच्चों के लिए हानिकारक हो सकते हैं, शामिल हैं।

नए नियमों के मुताबिक उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण द्वारा भ्रामक विज्ञापनों का समर्थन करने वाली हस्तियों पर 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। नियमों का बार-बार उल्लंघन करने पर 50 लाख रुपए तक का जुर्माना और 5 साल तक जेल की सजा का प्रावधान है। हालांकि, नए दिशानिर्देश किसी विशेष सेलिब्रिटी को परिभाषित नहीं करते हैं। इस शब्द को आमतौर पर एक प्रसिद्ध व्यक्ति, जैसे अभिनेता या खिलाड़ी के रूप में समझा जाता है। एक विज्ञापन को गैर-भ्रामक और वैध तभी माना जाएगा जब वह नए नियमों में निर्धारित मानदंडों को पूरा करेगा। सरोगेट विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाया गया है।

जानिए, क्या होते हैं सरोगेट विज्ञापन

कुछ ऐसे प्रोडक्ट, जिनका सीधे विज्ञापन करने पर बैन लगा है। आमतौर पर इनमें शराब, सिगरेट और पान मसाला जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं। ऐसे में इन प्रोडक्ट विज्ञापन करने के लिए सरोगेट विज्ञापनों का सहारा लिया जाता है। यानी ऐसे ही किसी प्रोडक्ट का विज्ञापन, जिसमें प्रोडक्ट के बारे में सीधे न बताते हुए उसे किसी दूसरे ऐसे ही प्रोडक्ट या पूरी तरह अलग प्रोडक्ट के तौर पर बताया और दिखाया जाता है। जैसे शराब को अक्सर म्यूजिक CD या सोडे के तौर पर दिखाया जाता है। यानी ऐसा ऐड जिसमें दिखाया कोई और प्रोडक्ट जाता है, लेकिन असल प्रोडक्ट दूसरा होता है, जो सीधा-सीधा ब्रैंड से जुड़ा होता है।

नए दिशानिर्देश में बच्चों को टार्गेट करने और उपभोक्ताओं को लुभाने के लिए मुफ्त दावे करने वाले विज्ञापन शामिल हैं।  नियम और शर्तों में जो कुछ भी फ्री बताया गया है, डिस्क्लेमर में भी वह फ्री होना चाहिए। ‘शर्तें लागू’ होने वाले इस तरह के विज्ञापनों को भ्रामक कहा जाएगा। कंपनी के वे विज्ञापन जो कंपनी से जुड़े लोग कर रहे हैं, तो उन्हें बताना होगा कि वह कंपनी से क्या संबंध रखते हैं। मैन्युफैक्चरर अपने प्रोडक्ट के बारे में सही जानकारी देंगे। जिस आधार पर दावा किया गया है उसकी जानकारी देनी होगी।

मंत्रालय द्वारा जारी किये गए ये दिशानिर्देश प्रिंट, टेलीविजन और ऑनलाइन जैसे सभी मंचों पर प्रकाशित विज्ञापनों पर लागू होंगे। नए दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (CCPA) के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

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