नहीं रुका कमलनाथ की फजीहत का सिलसिला, ‘भूल सुधार’ में भी भूल कर गए कांग्रेसी

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के जन्मदिन के मौके पर कांग्रेस कमेटी की ओर से प्रदेश के अधिकांश अखबारों में दिए गए थे विज्ञापन

नीरज नैयर by
Published - Friday, 22 November, 2019
Last Modified:
Friday, 22 November, 2019
Kamalnath

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ को अपना 73वां जन्मदिन हमेशा याद रहेगा। पहले उन्हें मध्यप्रदेश कांग्रेस द्वारा जारी विज्ञापन के लिए फजीहत झेलनी पड़ी, फिर उस विज्ञापन की गलतियों के लिए छपे ‘भूल सुधार’ में उनका नाम ही भुला दिया गया। अब इस ‘भूल’ को वाकई भूल माना जाए या साजिश, इसका फैसला तो कमलनाथ को ही करना है।

दरअसल, 18 नवंबर को कमलनाथ का जन्मदिन था। इस मौके पर कांग्रेस कमेटी की तरफ से प्रदेश के अधिकांश अखबारों में विज्ञापन छापे गए। इन विज्ञापनों का मकसद मुख्यमंत्री के चेहरे पर मुस्कान खिलाना और जनता को उनके संघर्ष से रूबरू कराना था, लेकिन हुआ इसके एकदम उलट।

कुछ विज्ञापनों में कमलनाथ की तारीफ के साथ-साथ इतिहास का हवाला देकर उन पर तंज भी कसे गए। बात जब आम हुई तो बवाल मच गया। पहले कांग्रेस नेता संबंधित विज्ञापन से पल्ला झाड़ते रहे और दूसरे दिन अखबारों में प्रकाशित ‘भूल सुधार’ के जरिये अपनी भूल सुधारने का प्रयास किया गया, लेकिन फजीहत का सिलसिला यहीं नहीं रुका।

‘भूल सुधार’ में फिर एक ऐसी भूल कर दी गई, जिसे देखकर कमलनाथ का आगबबूला होना लाजमी है। संबंधित अखबारों में ‘भूल सुधार’ की सूचना के तहत विवादस्पद विज्ञापनों को दुरुस्त करके पुन: दूसरे दिन प्रकाशित किया गया। पहली नजर में सबकुछ ठीक नजर आया है, पर जब नजरों पर जोर दिया गया, तो ‘भूल’ में एक और भूल नजर के सामने आ गई।

संशोधित विज्ञापन के पहले पैरा में मुख्यमंत्री का नाम ही बदल दिया गया। उन्हें कमलनाथ से कमलाथ बनाया गया है। ‘सांसद से मुख्यमंत्री तक का सफर’ शीर्षक तले कमलनाथ की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया है, जिसकी आखिरी लाइन कहती है, ‘कमलाथ के नेतृत्व में कांग्रेस कमेटी ने मध्यप्रदेश में शानदार विजय हासिल की।’ इसे टाइपिंग त्रुटि कहा जा सकता है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या पहली गलती से सबक लिया गया? यदि लिया गया होता तो एक-एक शब्द को ध्यान से पढ़ा जाता और तब शायद कमलनाथ को पुन: अपना सिर नहीं पकड़ना पड़ता।

आमतौर पर कोई विज्ञापन जारी करने से पहले उसकी कई बार प्रूफरीडिंग की जाती है तो फिर मुख्यमंत्री से जुड़े विज्ञापन को पुन: जांचना कांग्रेसियों को क्यों याद नहीं रहा, यह समझ से परे है। बहरहाल यह आपसी साजिश है या भूल, ये कांग्रेस का आंतरिक मामला है, पर इतना तय है कि कमलनाथ ने ऐसा जन्मदिन पहले कभी नहीं मनाया होगा और न ही भविष्य में मनाना चाहेंगे।

विज्ञापन में हुई इस गलती को आप यहां देख सकते हैं- 

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ASCI ने इस तकनीक के जरिए की डिजिटल पर भ्रामक कंटेंट वाले ऐड की निगरानी

ASCI ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और व्यक्तिगत देखभाल जैसे क्षेत्रों को डिजिटल श्रेणी में शीर्ष तीन उल्लंघनकारी श्रेणियों के रूप में पाया गया है।

Last Modified:
Wednesday, 29 June, 2022
ASCI

भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (ASCI) ने डिजिटल मंचों पर भ्रामक सामग्री संबंधी विज्ञापनों की निगरानी के लिए ‘डिजिटल निगरानी’ प्रणाली स्थापित की है। ASCI इसके लिए कृत्रिम मेधा (AI) आधारित निगरानी प्रणाली का उपयोग कर रहा है। ASCI ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए अपनी वार्षिक शिकायत रिपोर्ट में यह जानकारी दी।

नियामक ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और व्यक्तिगत देखभाल जैसे क्षेत्रों को डिजिटल श्रेणी में शीर्ष तीन उल्लंघनकारी श्रेणियों के रूप में पाया गया है।

ASCI ने कहा कि विज्ञापन अब मोबाइल जैसी व्यक्तिगत स्क्रीन पर तेजी से दर्शाये जा रहे हैं, जिसके कारण नियामकों के लिए विज्ञापनों के पैमाने और प्रभाव को समझना मुश्किल हो गया है।

नियामक ने कहा कि विज्ञापन बनाने वाली इकाइयों की संख्या में जोरदार वृद्धि हुई है और एक अनुमान के अनुसार, एक व्यक्ति प्रतिदिन औसतन 6,000 से 10,000 विज्ञापनों के संपर्क में आता है।

ASCI की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं महासचिव मनीषा कपूर ने कहा, ‘डिजिटल दुनिया में बहुत कुछ हो रहा है। हम निगरानी करने के लिए AI तकनीक की मदद ले रहे हैं।’

रिपोर्ट के अनुसार, ASCI को बीते वित्त वर्ष के दौरान प्रिंट, डिजिटल और टेलीविजन समेत सभी माध्यमों से 7,631 शिकायतें मिलीं और इनमे से 5,532 का निपटान किया गया। डिजिटल क्षेत्र पर सबसे अधिक ध्यान देने के साथ ASCI की अनुपालन दर 94 प्रतिशत रही।

ASCI ने वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान लगभग 75 प्रतिशत शिकायतों को खुद संज्ञान लिया, जबकि 21 प्रतिशत उपभोक्ता और शेष उद्योग जगत तथा सरकार की तरफ से मिलीं।

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’इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ ने BARC की इस प्रणाली का किया समर्थन, दिया ये बयान

यह स्टेटमेंट इंडस्ट्री के कुछ स्टेक होल्डर्स की उन मांगों के मद्देनजर आया है, जिनमें वास्तविक व्युअरशिप से लैंडिंग पृष्ठ डेटा को अलग करने की आवश्यकता बताई गई है।

Last Modified:
Tuesday, 21 June, 2022
ISA

एडवर्टाइजर्स की प्रमुख संस्था ’इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ (ISA) ने देश में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था ‘ब्रॉडकास्टर्स ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) के लैंडिंग पेज की ‘एल्गोरिथम’   (algorithm) का समर्थन किया है। बता दें कि बार्क इंडिया के स्टेक होल्डर्स (stakeholders) में ’इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ भी शामिल है।

इस बारे में ’इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ की ओर से जारी स्टेटमेंट में कहा गया है,  ‘बार्क ने माप विज्ञान (measurement science) में सुधार लाने और बाहरी कारकों के दर्शकों की संख्या पर प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से एक डेटा सत्यापन गुणवत्ता पहल (Data Validation Quality Initiative) शुरू की है।’

इस स्टेटमेंट में कहा गया है कि बार्क इंडिया ने अपने डेटा सत्यापन पद्धति में एक एल्गोरिथम पेश किया है, ताकि सभी चैनल्स पर जबरन व्युअरशिप डेटा को लेकर लैंडिंग पृष्ठ के प्रभाव को दूर किया जा सके।

’इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ के अनुसार, यह तरीका सभी शैलियों में बेहतर परिणाम देने के लिए सीधे अनुमानित आंकड़ों (inferential statistics) का उपयोग करता है। इसे बार्क की टेक्निकल कमेटी द्वारा सत्यापित और प्रमाणित किया गया है।

इस बारे में ’इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ के चेयरमैन सुनील कटारिया का कहना है, ’ बार्क की एल्गोरिथम बहुत उच्च सफलता दर वाले लैंडिंग पृष्ठों का पता लगाती है और एक बार पता चलने के बाद, यह एल्गोरिथम जबर्दस्ती थोपी गई व्युअरशिप (forced viewership) को हटाने का प्रयास करती है और स्वैच्छिक व्युअरशिप (voluntary viewership) उस चैनल के लिए वास्तविक व्युअरशिप के रूप में गिनी जाती है। यह एक सही तरीका है और लैंडिंग पेज व्युअरशिप के मुद्दे पर बार्क द्वारा अपनाए जा रहे इस तरीके पर तमाम एडवर्टाइजर्स एकमत हैं।’

बता दें कि यह स्टेटमेंट इंडस्ट्री के कुछ स्टेक होल्डर्स की उन मांगों के मद्देनजर आया है, जिनमें वास्तविक व्युअरशिप से लैंडिंग पृष्ठ डेटा को अलग करने की आवश्यकता बताई गई है। इन स्टेक होल्डर्स का मानना ​​है कि लैंडिंग पेज टीवी चैनल्स की लोकप्रियता की गलत तस्वीर प्रस्तुत करता है।

लैंडिंग पृष्ठ के मुद्दे पर टीवी न्यूज इंडस्ट्री की अलग-अलग राय है। कुछ प्लेयर्स ने दावा किया है कि यह सिर्फ उन मीडिया कंपनियों के पक्ष में है, जिनके पास काफी पैसा है, जबकि कुछ का दावा है कि लैंडिंग पृष्ठ पूरी तरह से कानूनी है।

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जानिए, प्रिंट पर ब्रैंड्स के विज्ञापन के मामले में कैसा रहा साल का शुरुआती सफर

TAM AdEx के आंकड़ों पर एक नजर डालें तो पता चलता है कि 2020 की तुलना में साल 2022 में प्रिंट सेक्टर के कुल ऐड स्पेस में 12 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है

Last Modified:
Wednesday, 15 June, 2022
Newsprint

TAM AdEx के आंकड़ों पर एक नजर डालें तो पता चलता है कि 2020 की तुलना में साल 2022 में प्रिंट सेक्टर के कुल ऐड स्पेस में 12 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं 2021 की इसी समयावधि की तुलना में इसमें मामूली गिरावट दर्ज की गई थी।  

जनवरी से मार्च 2022 में ऐड स्पेस प्रति पब्लिकेशन लगभग जनवरी से मार्च 2021 के बराबर ही था।

इसके अलावा, सर्विस सेक्टर 17% ऐड स्पेस के साथ शीर्ष पर रहा और उसके बाद ऑटो सेक्टर 11% शेयर के साथ दूसरे नंबर पर रहा। शीर्ष तीन सेक्टर्स ने मिलकर प्रिंट में ऐड स्पेस का 38% हिस्सा लिया। इस बीच, तीन सेक्टर्स- रिटेल, फूड एंड बेवजरेज और पर्सनल एसेसरीज ने टॉप-10 की सूची में अपनी रैंकिंग बनाए रखी।

रिपोर्ट के अनुसार, टॉप-10 में शामिल अन्य कैटेगरीज ने मिलकर प्रिंट में ऐड स्पेस का 30% से अधिक हिस्सा अर्जित किया। प्रॉपर्टीज/रियल एस्टेट्स, हॉस्पिटल/क्लीनिक्स व लाइफ इंश्योरेंस जनवरी से मार्च 2022 के दौरान रैंकिंग में ऊपर चले गए और केवल सार्वजनिक निर्गम श्रेणी (Public Issues category) ने जनवरी से मार्च 21 व 22 में अपनी रैंकिंग जस की तस बनाए रखी। साथ ही, टॉप-10 कैटेगरीज में से दो ऑटो, रिटेल और एक-एक बैंकिंग/फाइनेंशियल/इनवेस्ट सेक्टर से थीं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि SBS बायोटेक प्रिंट में एडवर्टाइजर्स की सूची में सबसे ऊपर है, उसके बाद एलआईसी ऑफ इंडिया है। शीर्ष तीन एडवर्टाइजर्स ने जनवरी से मार्च 2022 के दौरान अपनी स्थिति बनाए रखी। रिलायंस रिटेल जनवरी से मार्च 2021 में 13वें स्थान की तुलना में जनवरी से मार्च 2022 में आठवें स्थान पर पहुंच गया। जबकि रुचि सोया इंडस्ट्रीज व पतंजलि आयुर्वेद जनवरी से मार्च 2022 की ऐडवर्टाइजमेंट रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंच गए हैं। इसी अवधि के दौरान 53,800 से अधिक ऐडवर्टाइजर्स ने ऐड दिया।

पहली तिमाही में 62,600 से अधिक ब्रैंडस ने प्रिंट में ऐड दिया, जिसमें एलआईसी ब्रैंड सूची में सबसे आगे रहा। टॉप 10 ब्रैंडस में, दो-दो बैंकिंग/फाइनेंशियल/इनवेस्ट और पर्सनल हेल्थकेयर सेक्टर से आए हैं।

ऐड स्पेस में विटामिन/टॉनिक्स/हेल्थ सप्लिमेंट्स ने 87 प्रतिशत की बढ़त के साथ सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की, इसके बाद EcomMedia/Ent./Social Media का स्थान रहा, जो जनवरी से मार्च 2022 और जनवरी से मार्च 2021 के बीच तीन गुना बढ़ गया। ग्रोथ के संदर्भ में, ईकॉम-फाइनेंशियल सर्विस कैटेगरी में टॉप-10 में सबसे अधिक ग्रोथ परसेंटेज देखा गया, यानी जनवरी से मार्च 2022 के बीच 18 गुना।

इस बीच, जनवरी से मार्च 2022  के दौरान जनवरी से मार्च 2021 की तुलना में 32,000 से अधिक ऐडवर्टाइजर्स और 41,000 ब्रैंड्स को विशेष रूप से प्रिंट में विज्ञापित किया गया था। पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में जनवरी से मार्च 2022 में रुचि सोया इंडस्ट्रीज और Kia Carens टॉप ऐडवर्जाइजर्स और ब्रैंड्स थे।

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ऑनलाइन सट्टेबाजी के विज्ञापनों पर सरकार सख्त, मीडिया के लिए जारी की ये एडवाइजरी

देश में ऑनलाइन सट्टेबाजी वेबसाइट्स/प्लेटफार्म्स (Online Betting websites/ Platforms) के विज्ञापनों को लेकर ‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है।

Last Modified:
Monday, 13 June, 2022
MIB

देश में ऑनलाइन सट्टेबाजी वेबसाइट्स/प्लेटफार्म्स (Online Betting websites/ Platforms) के विज्ञापनों को लेकर ‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है।

मंत्रालय ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को सलाह दी है कि वे ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफार्म्स के विज्ञापनों को प्रकाशित/प्रसारित करने से बचें। इसके साथ ही मंत्रालय ने ऑनलाइन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भारत में ऐसे विज्ञापनों को प्रदर्शित न करने की सलाह दी है।

सूचना प्रसारण मंत्रालय की ओर से इस बारे में 13 जून 2022 को जारी लेटर में कहा गया है, ‘मंत्रालय की ओर से चार दिसंबर 2020 को प्राइवेट टीवी चैनल्स के लिए एक एडवाइजरी जारी कर ऑनलाइन गेमिंग के बारे में विज्ञापनों को लेकर एडवर्टाइजमेंट स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) की गाइडलाइंस का पालन करने के लिए कहा गया था, जिनमें बताया गया है कि क्या करना है और क्या नहीं।’

सूचना प्रसारण मंत्रालय के अनुसार, ’यह संज्ञान में आया है कि इन दिनों प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, ऑनलाइन और सोशल मीडिया पर ऑनलाइन सट्टेबाजी वेबसाइट्स/प्लेटफॉर्म्स के विज्ञापन दिखाए जा रहे हैं। देश के अधिकांश हिस्सों में सट्टेबाजी और जुआ अवैध है और इस तरह के विज्ञापन उपभोक्ताओं, खासकर युवाओं और बच्चों के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय और सामाजिक व आर्थिक जोखिम पैदा करते हैं।’

अपनी एडवाइजरी में मंत्रालय का कहना है, ’लोगों को हितों के देखते हुए सलाह दी जाती है कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया इस तरह के विज्ञापनों को प्रकाशित/प्रसारित न करें। साथ ही ऑनलाइन और सोशल मीडिया को भी इस तरह के विज्ञापनों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।’

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ऐसे विज्ञापन करने पर अब सेलेब्स पर भी होगी कार्रवाई, जारी हुए दिशानिर्देश

केंद्र सरकार ने भ्रमाक विज्ञापनों और ऐसे विज्ञापनों को चर्चित हस्तियों की ओर से पहचान दिए जाने पर रोकथाम के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं

Last Modified:
Saturday, 11 June, 2022
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केंद्र सरकार ने भ्रमाक विज्ञापनों और ऐसे विज्ञापनों को चर्चित हस्तियों की ओर से पहचान दिए जाने पर रोकथाम के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिनके मुताबिक, अब भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और ऐसी स्थिति में उनका प्रचार करने वाली हस्तियों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है और भी उन्हें कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। 

उपभोक्ता मामलों के विभाग के तहत काम करने वाली एजेंसी केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने भ्रामक विज्ञापनों पर अंकुश लगाने और ऐसे विज्ञापनों से उपभोक्ताओं की रक्षा करने के उद्देश्य से 'भ्रामक विज्ञापनों की रोकथाम के लिए दिशानिर्देश और भ्रामक विज्ञापनों के समर्थन, 2022' को अधिसूचित किया है।

उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत पहले से ही भ्रामक विज्ञापनों और उल्लंघनकर्ताओं के लिए दंड और कार्रवाई का प्रावधान है, लेकिन नए नियम सेलिब्रिटी विज्ञापनों को लक्षित करते हैं, जो गैरकानूनी हो सकते हैं। इनमें सरोगेट विज्ञापन और ऐसे विज्ञापन जो बच्चों के लिए हानिकारक हो सकते हैं, शामिल हैं।

नए नियमों के मुताबिक उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण द्वारा भ्रामक विज्ञापनों का समर्थन करने वाली हस्तियों पर 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। नियमों का बार-बार उल्लंघन करने पर 50 लाख रुपए तक का जुर्माना और 5 साल तक जेल की सजा का प्रावधान है। हालांकि, नए दिशानिर्देश किसी विशेष सेलिब्रिटी को परिभाषित नहीं करते हैं। इस शब्द को आमतौर पर एक प्रसिद्ध व्यक्ति, जैसे अभिनेता या खिलाड़ी के रूप में समझा जाता है। एक विज्ञापन को गैर-भ्रामक और वैध तभी माना जाएगा जब वह नए नियमों में निर्धारित मानदंडों को पूरा करेगा। सरोगेट विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाया गया है।

जानिए, क्या होते हैं सरोगेट विज्ञापन

कुछ ऐसे प्रोडक्ट, जिनका सीधे विज्ञापन करने पर बैन लगा है। आमतौर पर इनमें शराब, सिगरेट और पान मसाला जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं। ऐसे में इन प्रोडक्ट विज्ञापन करने के लिए सरोगेट विज्ञापनों का सहारा लिया जाता है। यानी ऐसे ही किसी प्रोडक्ट का विज्ञापन, जिसमें प्रोडक्ट के बारे में सीधे न बताते हुए उसे किसी दूसरे ऐसे ही प्रोडक्ट या पूरी तरह अलग प्रोडक्ट के तौर पर बताया और दिखाया जाता है। जैसे शराब को अक्सर म्यूजिक CD या सोडे के तौर पर दिखाया जाता है। यानी ऐसा ऐड जिसमें दिखाया कोई और प्रोडक्ट जाता है, लेकिन असल प्रोडक्ट दूसरा होता है, जो सीधा-सीधा ब्रैंड से जुड़ा होता है।

नए दिशानिर्देश में बच्चों को टार्गेट करने और उपभोक्ताओं को लुभाने के लिए मुफ्त दावे करने वाले विज्ञापन शामिल हैं।  नियम और शर्तों में जो कुछ भी फ्री बताया गया है, डिस्क्लेमर में भी वह फ्री होना चाहिए। ‘शर्तें लागू’ होने वाले इस तरह के विज्ञापनों को भ्रामक कहा जाएगा। कंपनी के वे विज्ञापन जो कंपनी से जुड़े लोग कर रहे हैं, तो उन्हें बताना होगा कि वह कंपनी से क्या संबंध रखते हैं। मैन्युफैक्चरर अपने प्रोडक्ट के बारे में सही जानकारी देंगे। जिस आधार पर दावा किया गया है उसकी जानकारी देनी होगी।

मंत्रालय द्वारा जारी किये गए ये दिशानिर्देश प्रिंट, टेलीविजन और ऑनलाइन जैसे सभी मंचों पर प्रकाशित विज्ञापनों पर लागू होंगे। नए दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (CCPA) के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

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ASCI ने विज्ञापनों में लैंगिक चित्रण को बढ़ावा देने पर लगाई रोक, जारी किए दिशा निर्देश

भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (ASCI) ने लैंगिक रूढ़िवाद पर दिशा निर्देश जारी किए हैं। इस दिशा-निर्देश को केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बुधवार को जारी किया।  

Last Modified:
Friday, 10 June, 2022
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विज्ञापन में लैंगिक रूढ़िवाद को देखना आम हो गया है। लैंगिक रूढ़िवाद हमारे दिमाग में इतनी गहरी जड़ें जमा चुकी है कि हम शायद ही सोचते हैं कि किसी भी विज्ञापन में एक आदर्श परिवार में एक बड़ा लड़का और एक छोटी लड़की क्यों होते हैं, परिवार में दो लड़कियां क्यों नहीं? एक ठेठ भारतीय ब्रैंड के विज्ञापन की शुरुआत एक आदमी के अखबार पढ़ने और महिला द्वारा उसे चाय पिलाने से क्यों होती है? ‘मर्द मर्द होते हैं’ जैसे शब्द हमारे दिमाग में क्यों आते हैं? हमारे दिमाग में इस तरह की गहरी पैठ जमा चुके लैंगिक रूढ़िवाद को ध्यान में रखते हुए, भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (ASCI) ने लैंगिक रूढ़िवाद पर दिशा निर्देश जारी किए हैं। इस दिशा-निर्देश (गाइडलाइंस) को केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बुधवार को जारी किया।  

ASCI ने विज्ञापनों में लैंगिक चित्रण को बढ़ावा देने पर रोक लगाने की बात कही है, ऐसा इसलिए क्योंकि यह समाज के लिए हानिकारक है। लिहाजा ASCI ने विज्ञापनों में ‘हानिकारिक लैंगिक रूढ़िवाद’ के संबंध में दिशा-निर्देश जारी करते हुए अस्वीकार्य चित्रण के लिए सीमाएं निर्धारित की हैं। मुख्य रूप से महिलाओं से संबंधित सभी मामलों में इसका पालन करना होगा।

इसके साथ ही विज्ञापन देने वाली कंपनियों को यह निर्देश दिया गया है कि वे प्रगतिशील लैंगिक चित्रों को बढ़ावा देने वाली सामग्रियों को प्रोत्साहित करें।

नए दिशा-निर्देश में अनिवार्य किया गया है कि विज्ञापनों में ‘किसी भी लिंग के पात्रों का यौन उद्देश्य से चित्रण’ या दर्शकों को खुश करने के मकसद से लोगों के लिए कामुक तरीके से चीजों को चित्रित नहीं करना चाहिए।

नए दिशा निर्देशों के अनुसार, किसी भी लिंग के लिए अपमानजनक भाषा या लहजे के जरिये दूसरों पर अधिकार जमाने के लिए प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही विज्ञापन लिंग के आधार पर हिंसा (शारीरिक या भावनात्मक), गैरकानूनी या असामाजिक व्यवहार को बढ़ावा नहीं दे सकते। 

ASCI ने एक बयान में कहा, ‘लैंगिक रूढ़िवादिता, उनकी यौन अभिविन्यास या लिंग पहचान के अनुरूप नहीं होने के चलते विज्ञापनों में लोगों का उपहास नहीं उड़ाया जाना चाहिए।’

बयान के मुताबिक, भले ही यह दिशा-निर्देश मुख्य रूप से महिलाओं पर केंद्रित हैं, लेकिन अन्य लिंग वालों के गलत चित्रण में भी यह लागू होगा। ASCI ने कहा कि भाषा के उपयोग या विजुअल के मामले में यह वहां भी लागू होगा, जहां उत्पाद इससे संबंधित नहीं हैं। दिशानिर्देश में कहा गया है कि विज्ञापनों में लैंगिक आधार पर लोगों का मजाक नहीं बनाया जाना चाहिए।

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’इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ ने अपने मेंबर्स के लिए जारी की एडवाइजरी, कही ये बात

17 महीने के अंतराल के बाद ‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) के आदेश के बाद बार्क ने 17 मार्च से न्यूज रेटिंग्स देना दोबारा शुरू किया है।

Last Modified:
Monday, 06 June, 2022
ISA

एडवर्टाइजर्स की प्रमुख संस्था ’इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ (ISA) ने हाल ही में अपने सदस्यों को एक एडवाइजरी नोट जारी किया है। इस एडवाइजरी नोट में ’इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ ने कुछ प्लेटफॉर्म के बारे में बात की है, जो देश में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था ‘ब्रॉडकास्टर्स ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) की रेटिंग्स से बाहर निकलना चाह रहे हैं।

इस नोट में ’इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ ने अपने सदस्यों को सलाह दी है कि वे स्वतंत्र रूप से स्थिति का आकलन करें और विज्ञापनों के बारे में डीलिंग के दौरान इस तरह के प्लेटफार्म्स के संबंध में उचित निर्णय लें।

हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) को मिली जानकारी के अनुसार, ‘आईएसए’ के सदस्य अनौपचारिक रूप से बार्क रेटिंग्स से बाहर निकलने वाले कुछ चैनल्स के बारे में 'कोई मीजरमेंट नहीं तो कोई विज्ञापन नहीं'  को लेकर चर्चा कर रहे हैं।

बता दें कि 17 महीने के अंतराल के बाद ‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) के आदेश के बाद बार्क ने 17 मार्च से न्यूज रेटिंग्स देना दोबारा शुरू किया है। नई व्यवस्था के अंतर्गत न्यूज और विशिष्ट वर्ग के लिए रेटिंग्स चार सप्ताह की रोलिंग औसत परिकल्पना (four-week rolling average basis) के आधार पर जारी की जा रही है।

जैसा कि हम पूर्व में बता चुके हैं कि ‘NDTV 24x7’ और ‘NDTV India’ न्यूज चैनल्स के स्वामित्व वाले न्यूज ब्रॉडकास्टर्स ‘एनडीटीवी’ (NDTV) ने ‘ब्रॉडकास्टर्स ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) इंडिया के रेटिंग सिस्टम में कथित विसंगतियों को लेकर इससे अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं।

मिली जानकारी के अनुसार कई न्यूज ब्रॉडकास्टर्स नाखुश हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि बार्क ने व्युअरशिप बढ़ाने के लिए लैंडिंग पेज का दुरुपयोग, ब्रॉडकास्ट इंडिया अध्ययन आयोजित करने में देरी और कुछ शरारती तत्वों द्वारा पैनल से छेड़छाड़ की आशंका जैसे उनके मुद्दों को अभी तक हल नहीं किया है।

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जानिए, क्या है परफ्यूम ब्रैंड से जुड़ा विवादित ऐड का मामला, क्यों IB मंत्रालय ने लगाया बैन

सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने शनिवार को एक परफ्यूम ब्रैंड के  दो विज्ञापन के वीडियो को ट्विटर, यू-ट्यूब समेत सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटाने को कहा है

Last Modified:
Monday, 06 June, 2022
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सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने शनिवार को एक परफ्यूम ब्रैंड के दो विज्ञापन के वीडियो को ट्विटर, यू-ट्यूब समेत सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटाने को कहा है। मंत्रालय की ओर से इस संबंध में ट्विटर और यू-ट्यूब को पत्र भी लिखा गया है।

पत्र में कहा गया है, 'यह महिलाओं के लेकर नैतिकता और शिष्टता के हिसाब से हानिकारक' और डिजिटल मीडिया के गाइडलाइंस का उल्लंघन है और किया गया चित्रण महिलाओं के लिए हानिकारक है।’

पत्र में कहा आगे कहा गया है कि वीडियो का कंटेंट सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) के नियमों 3 (1) (बी) (ii) का उल्लंघन है। नियमों के मुताबिक, लिंग के आधार पर अपमानजनक या परेशान करने वाली किसी भी जानकारी को होस्ट, प्रदर्शित, अपलोड, संशोधित, प्रकाशित, प्रसारित, स्टोर, अपडेट या साझा नहीं किया जा सकता।

बता दें कि परफ्यूम ब्रैंड लेयर'आर शॉट (Layer'r Shot) के बॉडी स्प्रे के दो आपत्तिजनक विज्ञापन का वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की थी, जो अधिकतर वीडियो के विरोध में थी, जिसमें कई लोगों द्वारा दावा किया गया कि विज्ञापन महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा को प्रमोट करता है। लिहाजा विज्ञापनों लेकर कई यूजर्स ने सोशल मीडिया पर ASCI को टैग करके कहा था कि इस तरह के विज्ञापन को बंद किया जाए।

इसके​​​​​​ जवाब में ASCI ने लिखा था कि हमें टैग करने के लिए धन्यवाद। यह विज्ञापन नियमों का उल्लंघन है। हमने इस पर तत्काल कार्रवाई की है। कंपनी से विज्ञापन को हटाने के लिए कहा है और आगे की जांच की जा रही है।

सूचना-प्रसारण मंत्रालय द्वारा लिखे गए पत्र में आगे कहा गया है कि यह उल्लेख किया जा सकता है कि संबंधित वीडियो टीवी पर भी प्रसारित किए गए थे। इस संबंध में एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) ने भी केबल टेलीविजन नेटवर्क 1994 के नियम 7(2)(ix) के अनुसार विज्ञापन में अपने दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाला पाया है। इस संबंध में ASCI ने विज्ञापनदाता को विज्ञापन को तत्काल आधार पर निलंबित करने को कहा है।

सूचना-प्रसारण मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता की ओर से कहा गया कि मंत्रालय के संज्ञान में आया है कि सोशल मीडिया पर परफ्यूम का एक अपमानजनक विज्ञापन वायरल हो रहा है। मंत्रालय ने ट्विटर और यूट्यूब को लिखे पत्र में कहा कि एडवर्टाइजिंग स्टैंडडर्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) ने भी वीडियो को अपने दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए पाया है और विज्ञापनदाता से विज्ञापन को तत्काल निलंबित करने को कहा है। कहा गया कि मामला संज्ञान में आने के कुछ घंटों के अंदर मंत्रालय ने विज्ञापन को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी थी। मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, इस तरह के विज्ञापन पूरी तरह से अस्वीकार्य है।

दरअसल, सूचना-प्रसारण मंत्रालय के इस मामले पर कार्रवाई करने से पहले दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने परफ्यूम 'शॉट' के विज्ञापन पर गुस्सा जाहिर किया था और कहा था कि कंपनी के मालिकों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया और सूचना-प्रसारण मंत्री को प्राथमिकी दर्ज करने के लिए पत्र लिखा था। साथ ही कड़ी कार्रवाई की मांग की थी।

शॉट नाम के परफ्यूम से जुड़े दो विज्ञापनों में यह कंटेंट

पहले विज्ञापन में एक स्टोर पर चार लड़के बातचीत कर रहे हैं। चारों लड़के परफ्यूम की आखिरी बची हुई बोतल देखते हैं, और आपस में चर्चा करते हुए बोलते हैं कि हम चार हैं और वह सिर्फ एक, तो ‘शॉट’ कौन लेगा। लड़की डर जाती है और पीछे मुड़ती है, उसे लगता है कि वे उसी के बारे में बात कर रहे हैं। लेकिन इस बातचीत के दौरान विज्ञापन में लड़की के साथ-साथ बॉडी स्प्रे को भी दिखाया जाता है।  

दूसरा विज्ञापन बेडरूम में एक कपल के साथ शुरू होता है। अचानक से लड़के के चार दोस्त कमरे में घुसते हैं और बेहद ही भद्दा सवाल पूछते हुए बोलते हैं कि लगता है शॉट मारा। अब हमारी बारी। मगर इसी विज्ञापन को पूरा देखने पर मालूम पड़ता है कि दोस्त सिर्फ पूछ रहे थे कि क्या वे कमरे में रखे शॉट परफ्यूम का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन जैसे ही इसे लोगों ने देखे तो बवाल मचना शुरू हो गया।

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IAA ने की लीडरशिप अवॉर्ड्स की घोषणा, जूरी में शामिल हैं ये नाम

यह इस आयोजन का नौवां एडिशन है। जूरी की अध्यक्षता आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरपर्सन हर्ष गोयनका करेंगे।

Last Modified:
Monday, 06 June, 2022
IAA

‘इंटरनेशनल एडवर्टाइजिंग एसोसिएशन’ (IAA) के इंडिया चैप्टर ने अपने लीडरशिप अवॉर्ड्स (Leadership Awards) 2022 के लिए जूरी की घोषणा कर दी है। इस अवॉर्ड का उद्देश्य उन प्रोफेशनल्स को सम्मानित करना और उन्हें एक नई पहचान देना है, जिन्होंने अपनी काबिलियत के दम पर मार्केटिंग, विज्ञापन और मीडिया के क्षेत्र में बेहतरीन योगदान दिया है और कंपनियों को सफलता के नए आयाम तक पहुंचाया है।

जूरी की अध्यक्षता ‘आरपीजी एंटरप्राइजेज’ (RPG Enterprises) के चेयरपर्सन हर्ष गोयनका करेंगे। इसके अलावा जूरी में ‘भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र’ (IN-SPACe) के चेयरपर्सन और ‘महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड’ (Mahindra & Mahindra Ltd) के पूर्व एमडी व सीईओ पवन गोयनका, ’आईटीसी लिमिटेड’ (ITC Limited) के डिवीजन चीफ एग्जिक्यूटिव (फूड्स) हेमंत मलिक, ‘टाइटन कंपनी लिमिटेड’ (Titan Company Limited) की सीईओ( Watches & Wearables Division) सुपर्णा मित्रा, ‘फिलिप कैपिटल इंडिया’ ( PhillipCapital India) के एमडी और सीईओ विनीत भटनागर, ‘क्यूमैथ’ (Cuemath) के सीईओ विवेक सुंदर और ‘ट्रांशन इंडिया‘ (Transsion India) के सीईओ अरिजीत तलापात्रा को शामिल किया गया है।

विजेताओं का चुनाव दो चरणों वाली चयन प्रक्रिया के द्वारा किया जाएगा। पहले चरण में डेटा पर फोकस किया जाएगा प्रोफेशनल्स को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में इन शॉर्टलिस्ट प्रोफेशनल्स में से जूरी द्वारा विजेताओं का चुनाव किया जाएगा।

‘इंटरनेशनल एडवर्टाइजिंग एसोसिएशन’ की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक हर साल दिए जाने वाले इस लीडरशिप अवॉर्ड्स के तहत विजेताओं को सम्मानित किया जाता है। यह इस अवॉर्ड्स समारोह का नौवां एडिशन है।

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योगी-केजरीवाल बनने की राह पर KCR, अपनी खुशी के नाम पर की विज्ञापनों की ‘बरसात’

तेलंगाना ने हाल ही में अपना स्थापना दिवस मनाया। राज्य के मुख्यमंत्री ने अपनी ये खुशी विज्ञापनों के रूप में व्यक्त की, वो भी छोटा-मोटा नहीं बल्कि जैकेट विज्ञापन।

Last Modified:
Sunday, 05 June, 2022
Newspaper Advertisement

तेलंगाना ने हाल ही में अपना स्थापना दिवस मनाया। राज्य के मुख्यमंत्री ने अपनी ये खुशी विज्ञापनों के रूप में व्यक्त की, वो भी छोटा-मोटा नहीं बल्कि जैकेट विज्ञापन। यानी कि सूबे के मुखिया के. चंद्रशेखर राव (KCR) की खुशी व्यक्त करने में अखबारों के फ्रंट पेज सहित दो-तीन पृष्ठ खप गए।

अब ये खुशी आम जनता को कितने की पड़ी होगी, समझा जा सकता है। ‘जनता’ को इसलिए कि मुख्यमंत्री अपनी जेब से तो भुगतान करेंगे नहीं, खर्चा सरकारी खजाने से किया जाएगा और सरकारी खजाना जनता से मिलने वाले टैक्स से ही भरता है।

वैसे, चंद्रशेखर राव ने ये कोई नई परंपरा शुरू नहीं की है। मोदी-योगी से लेकर दिल्ली की ‘आप’ सरकार भी यही करती आई है। वहीं, पंजाब में ‘आप’ को सत्ता संभाले कुछ महीने ही गुजरे हैं, लेकिन विज्ञापन की ‘बरसात’ की जा रही है। भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि पंजाब सरकार ने अपने अब तक के कार्यकाल में 10 हजार करोड़ रुपये उधार लिए, जिसको विज्ञापन पर ही खर्च किया जा रहा है।

विज्ञापन सरकार की उपलब्धियों-योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम होता है, लिहाजा इसकी आवश्यकता से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन इस ‘आवश्यकता’ पर कितना खर्चा जायज है, इसका सटीक आकलन सरकार की जिम्मेदारी है और अक्सर सरकार इस जिम्मेदारी को ईमानदारी से पूरा करने में नाकाम हो जाती है।

के. चंद्रशेखर राव ने अपने राज्य के स्थापना दिवस पर विभिन्न मीडिया संस्थानों को दिल-खोलकर विज्ञापन दिए, ये विज्ञापन ऑल एडिशन थे। यानी कि तेलंगाना से बाहर के अखबारों में भी राज्य का स्थापना दिवस नज़र आया। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल माध्यम पर KCR की हंसती ही तस्वीर विज्ञापन की शक्ल में दिखाई गई। अब गौर करने वाली बात ये है कि दूसरे राज्यों के लोग, तेलंगाना सरकार की उपलब्धि या राज्य के विकास में बारे में जानकर क्या कर लेंगे? क्या ये कुछ ऐसा है, जो नहीं जानना उनके लिए अपराध है?

तेलंगाना सरकार क्या कर रही है, क्या करने वाली है, इसका सीधा सरोकार केवल वहां की जनता से है। इसलिए करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाकर दूसरे राज्यों के लोगों को तेलंगाना का विकास दिखाने से बेहतर होता कि मुख्यमंत्री राज्य के विकास पर कुछ और ध्यान केंद्रित कर लेते। तब शायद वास्तव में राज्य की जनता को खुशी मिलती। हालांकि, मोदी-योगी, केजरीवाल बनने की KCR  की इस कोशिश से विज्ञापन और मीडिया इंडस्ट्री को कोई परहेज नहीं होगा, आख़िरकार उनका अस्तित्व ही इस पर टिका है।

कोई लाख इनकार करे, लेकिन आज का कड़वा सच यही है कि मीडिया विज्ञापन के बिना नहीं चल सकता। विज्ञापन ही तय करते हैं कि कोई संस्थान कितने वक्त तक खड़ा रह सकता है। ऐसे में विज्ञापन देने वाले और लेने वाले के बीच एक अदृश्य या अनकहा रिश्ता बनना लाजमी है।

अब तेलंगाना के बाहर भी मीडिया को KCR को उतनी ही तवज्जो देनी होगी, जितनी योगी या केजरीवाल को मिलती है, क्योंकि राज्य के स्थापना दिवस के जैकेट विज्ञापन से उस अनकहे रिश्ते की शुरुआत हो चुकी है। कहावत है न, पैसा अपने साथ मुसीबतें भी लाता है। विज्ञापन की इस ‘बरसात’ के बाद मीडिया को भी संतुलन बनाने के लिए मशक्कत करनी पड़ेगी।  यदि वो तेलंगाना की अगली ‘बरसात’ की चाह में KCR पर ज्यादा फोकस करती है, तो दिल्ली में बैठे बॉस को संतुष्ट करना मुश्किल हो जाएगा।

अब चलते-चलते जरा सरकारों द्वारा विज्ञापन पर खर्चे के आंकड़ों पर भी नजर डाल लेते हैं। कुछ महीनों पहले सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बताया था कि मोदी सरकार ने तीन सालों में विज्ञापनों पर 1,700 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। यह विज्ञापन अखबारों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दिए गए थे। लोकसभा में एक सवाल के जवाब में सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया था कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर 2018-19, 2019-20 और 2020-21 में 1,698.98 करोड़ रुपए खर्च किए गए।

इसी तरह अप्रैल 2020 से लेकर मार्च 2021 के बीच योगी सरकार ने टीवी न्यूज चैनल्स और अखबारों को विज्ञापन देने में 160.31 करोड़ रुपए खर्च किए थे। वहीं, दावा ये भी किया जा रहा है दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने कोरोना काल के चार महीनों में 48 करोड़ रुपए विज्ञापनों पर खर्च किए थे। क्या इतना भारी-भरकम खर्चा विज्ञापनों पर करना वास्तव में जरूरी था? ये सवाल नेताओं/सरकारों को खुद से पूछना चाहिए।

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