CBI के 'निशाने' पर आए DAVP के कई अधिकारी, जांच के घेरे में फंसे कुछ अखबार

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीबीआई ने डीएवीपी के कुछ अधिकारियों समेत दो लोगों के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू की है।

Last Modified:
Friday, 26 June, 2020
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‘केंद्रीय जांच ब्यूरो’ (सीबीआई) द्वारा ‘विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय’ (डीएवीपी) के कुछ अधिकारियों के खिलाफ आरंभिक जांच शुरू करने की खबरें सामने आई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन अधिकारियों ने सरकारी विज्ञापन कथित रूप से आउट ऑफ सर्कुलेशन (out-of-circulation) अखबारों को आवंटित कर दिए थे। इस संस्था से बाहर के दो अन्य लोग भी जांच के दायरे में आए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोप है कि इन अधिकारियों ने ऐसे अखबार मालिकों के साथ मिलकर यह साजिश रची, जिनका या तो न्यूनतम सर्कुलेशन है अथवा वह काफी समय पहले बंद हो चुके हैं। विजिलेंस अधिकारियों द्वारा अगस्त 2019 में डीएवीपी जैसे सरकारी विभागों को ध्यान में रखकर की गई राष्ट्रव्यापी कार्रवाई में इस तरह की धोखाधड़ी का मामला सामने आया था।

जांच के दौरान अधिकारियों को वर्ष 2016 से 2019 के दौरान दिए गए सरकारी विज्ञापनों में गड़बड़ी का पता चला। बताया जाता है कि ये अखबार अपनी मौजूदगी दिखाने के लिए आवश्यक न्यूनतम प्रतियां छाप रहे थे, लेकिन डीएवीपी के कुछ अधिकारियों की मदद से सरकारी विज्ञापन प्राप्त करने के लिए प्रसार संख्या काफी अधिक बता रहे थे। कहा जा रहा है कि इस धोखाधड़ी से सरकारी खजाने को करीब 65 लाख रुपए का नुकसान हुआ है।

इन मीडिया रिपोर्ट्स में सीबीआई अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि यदि जांच में और सबूत मिलते हैं तो एफआईआर दर्ज की जाएगी।

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महामारी का न्यूज जॉनर पर नहीं दिखा असर, बढ़ा विज्ञापन खर्च

TAM AdEx के आंकड़ों पर एक नजर डालें तो पता चलता है कि 2020 की तुलना में साल 2021 में न्यूज जॉनर में कुल विज्ञापन खर्च 12 प्रतिशत तक बढ़ा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 19 January, 2022
Last Modified:
Wednesday, 19 January, 2022
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TAM AdEx के आंकड़ों पर एक नजर डालें तो पता चलता है कि 2020 की तुलना में साल 2021 में न्यूज जॉनर में कुल विज्ञापन खर्च 12 प्रतिशत तक बढ़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 के बाद से ऐड वॉल्यूम (विज्ञापनों की संख्या) में यह सबसे बड़ी ग्रोथ है।

न्यूज जॉनर में ऐड वॉल्यूम (विज्ञापनों की संख्या) में तीसरी और चौथी तिमाही के दौरान फिर से बढ़त देखने को मिली, वह भी तब जब अर्थव्यवस्था दूसरी कोविड लहर से उबर रही थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2017 की तुलना में न्यूज जॉनर में ऐड वॉल्यूम में 23% अनुक्रमित वृद्धि (indexed growth) हुई है।

इस जॉनर में एवरेज ऐड वॉल्यूम दूसरी लहर के बाद देखे गए दो महीनों के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई। यह महीने थे मार्च 2021 और अक्टूबर 2021, जब सबसे ज्यादा ऐड वॉल्यूम देखा गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, अन्य सभी जॉनर को मिलाकर देखा जाए तो 2020 की तुलना में 2021 में ऐड वॉल्यूम में 26% की वृद्धि देखी गई। इसलिए, 2021 में न्यूज जॉनर बनाम अन्य जॉनर के बीच का अनुपात 2021 में 72:28 और 2020 में 70:30 था।

न्यूज जॉनर में ऐड वॉल्यूम की बात की जाए तो हिंदी न्यूज कैटेगरी सर्वोपरि रही है, जिसने 32% से भी ज्यादा की हिस्सेदारी के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया है। इसके अलावा, शीर्ष पांच सब-जॉनर्स में से चार ने अपनी पोजिशन पहले की तरह बरकरार रखी है। वहीं 2021 में कन्नड़ न्यूज ने असम न्यूज की जगह ले ली है। शीर्ष पांच सब-जॉनर्स ने दोनों अवधियों के दौरान ऐड वॉल्यूम का लगभग 65% हिस्सा किया है। इसके अतिरिक्त, रीजनल व नेशनल न्यूज चैनल्स ने 2021 के दौरान न्यूज जॉनर में क्रमशः 74% और 26% ऐड वॉल्यूम दर्ज किया है। रीजनल न्यूज चैनल्स ने 2020 की तुलना में 2021 के दौरान ऐड वॉल्यूम में 13% की वृद्धि दर्ज की है।

वहीं, मार्च 2021 से दिसंबर 2021 तक यानी 10 महीनों के दौरान ‘रेकिट बेंकिज़र’ (Reckitt Benckiser) न्यूज जॉनर में टॉप ऐडवर्टाइजर रहा है। फूड एंड बेवरेजेज सेक्टर ने न्यूज जॉनर के ऐड वॉल्यूम में 15% की हिस्सेदारी के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया है। इसके बाद सर्विस सेक्टर का 14% हिस्सा रहा है। दूसरी ओर, कार कैटेगरी ने 2021 में 3% ऐड वॉल्यूम के साथ न्यूज जॉनर का नेतृत्व किया। यह 2019 और 2020 में भी सूची में सबसे ऊपर रही थी।

तेजी से उभरती कैटेगरी (top growing categories) में ईकॉम-एजुकेशन के विज्ञापनों ने 2020 की तुलना में 2021 के दौरान पान मसाला के बाद सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की।   

टॉप 10 कैटेगरीज में ग्रोथ की बात करें तो, ईकॉम-फार्मा/हेल्थकेयर 4.7 गुना की उच्चतम वृद्धि के साथ शीर्ष पर रहा है, इसके बाद हेयर रिमूवर ने 2.5 गुना की वृद्धि दर्ज की है।

टैम की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 और 2021 में न्यूज जॉनर में शीर्ष तीन ऐडवर्टाइजर्स रेकिट बेंकिज़र (Reckitt Benckiser), एचयूएल (HUL) और GCMMF (अमूल) के तेजी से आगे आए हैं। वहीं टॉप 10 की सूची में LIC, एशियन पेंट्स (Asian Paints), विष्णु पैकेजिंग (Vishnu Packaging) और अमेजॉन ऑनलाइन इंडिया (Amazon Online India) पहली बार शामिल हुआ हैं। न्यूज जॉनर में पान मसाला की ‘विमल इलायची’ (Vimal Elaichi) 2021 की टॉप 10 की सूची में पहली बार शामिल हुआ है और इसी वर्ष का पान मसाला अग्रणी ब्रैंड भी था।

2021 में न्यूज जॉनर में 4,100 से अधिक ऐडवर्टाइजर्स ने विज्ञापन दिए और 6,400 ब्रैंड्स के विज्ञापन दिखाई दिए। आंकड़ों के मानें तो ‘महर्षि मार्कंडेस एजुकेशनल ट्रस्ट’ (Maharishi Markandes Educational Trust) और ‘विप्रो’ (Wipro) 2021 के दौरान क्रमशः नेशनल और रीजनल न्यूज चैनल्स पर प्रमुख एक्सक्लूसिव ऐडवर्टाइजर्स रहे।

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ASCI ने बताए ऐसे विज्ञापन, जिनकी वजह से ब्रैंड्स को पहुंचा नुकसान

ऐसे विज्ञापन जो पुरुषों को खराब तरीके से चित्रित करते हैं, कम कपड़े पहने महिलाओं को दिखाते हैं या वित्तीय लाभ का दावा करते हैं, वे भारतीयों को सबसे ज्यादा परेशान करते हैं।

Last Modified:
Friday, 14 January, 2022
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ऐसे विज्ञापन जो पुरुषों को खराब तरीके से चित्रित करते हैं, कम कपड़े पहने महिलाओं को दिखाते हैं या वित्तीय लाभ का दावा करते हैं, वे भारतीयों को सबसे ज्यादा परेशान करते हैं। यह जानकारी उद्योग जगत की संस्था भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (ASCI) ने ‘व्हाट इंडिया टेक्स ऑफंस टू’ शीर्षक नाम से जारी की गई अपनी रिपोर्ट में दी है।

भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (ASCI) द्वारा हाल ही में किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि देश में पिछले तीन साल में धार्मिक भावनाएं आहत करने वाले विज्ञापन बढ़े हैं। इन विज्ञापनों के अपमानजनक रवैये पर लोगों ने कई सारी शिकायतें दर्ज कराई हैं।  

गुरुवार को जारी की गई रिपोर्ट में बताया गया है कि इस संदर्भ में पिछले तीन सालों में 488 विज्ञापनों के खिलाफ ASCI को करीब 1700 शिकायतें मिली हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि विज्ञापन बनाने वाली कंपनियों ने देश की सांस्कृतिक सीमाओं की अवहेलना की और विज्ञापनों में जानबूझकर पुरुषों का मजाक उड़ाया है। धार्मिक भावनाओं को आहत करने के कारण कंपनियों के खिलाफ आपराधिक मामले भी दर्ज हुए हैं।

शिकायत में कहा कि विज्ञापन में धार्मिक पहचान पर चोट किया जा रहा है। परंपरा को एक नए तरीके से परिभाषित करने की कोशिश की जा रही है। नारियल व कुंडली को एक संकीर्ण सोच का दिखाया जा रहा है। 

‘व्हाट इंडिया टेक्स ऑफंस टू’ शीर्षक नाम से जारी की गई रिपोर्ट में छह प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला गया है:

ऐसे विज्ञापन जो समाज में गलत संदेश दे रहे हैं-

ऐसे विज्ञापन जो व्यावसायिक लाभ के लिए समाज में गलत चीजों को सही बता कर उसे ऐड फिल्म के जरिए दिखाना, कई लोगों को बिल्कुल भी पसंद नहीं आया। जैसे- White hat Jr, Levi’s denims, CRED, Ziddi Perfume, Kia motors के विज्ञापन

White hat Jr के जरिए सिर्फ कोडिंग सीखने वाले बच्चों का भविष्य सुनहरा है या फिर राहुल द्रविड़ को गुंडे के रूप में प्रदर्शित करने वाला CRED का विज्ञापन, जिसमें उनका गुस्से में कार का शीशा तोड़ना सही ठहराना, महिलाओं की बॉडी को एंगल्स में दिखाने वाला Ziddi Perfume का विज्ञापन।

बच्चों की मानसिकता को प्रभावित करने वाले विज्ञापन-

ऐसे विज्ञापन जो बच्चों के लिए अनुपयुक्त माने जाते हैं और प्राइम टाइम या पूरे परिवार के देखने के समय प्रसारित किए जाते हैं, जैसे पारले किसमी टॉफी वाला विज्ञापन, जिसमें एक बहुत ही छोटी लड़की अपने प्रेमी से चुंबन के लिए कहती है। या फिर Crax, Sebamed baby bath वाले विज्ञापन। वैसे कई भारतीयों की माने, तो ऐसे विज्ञापन जिसमें रोमांस, प्रेगनेंसी या डिलीवरी को दर्शाया जाए, जिससे एक छोटा बच्चा असहज सवाल पूछे, तो ऐसे विज्ञापनो को देखकर भी भारतीय परिवारों को गुस्सा आता है।

सामाजिक मर्यादा की सीमा लांघने वाली विज्ञापन-

ऐसे विज्ञापन जो ऐसे लोगों के कैरेक्टर को चित्रित करते हैं, या जो समाज द्वारा बनाए गए आदर-सम्मान की सीमाओं को लांघते हैं या जो रिश्तों का मजाक या फिर सामाजिक संस्कृति का मजाक उड़ाते हैं, ऐसे विज्ञापन भी भारतीय परिवारों को देखना अच्छा नहीं लगा। (उदाहरण के लिए Amul Macho का विज्ञापन, जिसमें विक्की कौशल को पुरुष की निगाहों के बारे में दिखाया गया है) Bingo mad angles, Kwality walls भी इसका उदाहरण हैं।

पुरुषों का मजाक उड़ाने वाले विज्ञापन-

ऐसे विज्ञापन, जिनमें पुरुषों का मजाक उड़ाया जाता है, उदाहरण के लिए Pepperfry का विज्ञापन, जो एक उग्र महिला को एक पुरुष पर चाकू फेंकते हुए दिखाता है। Cars 24 व Lions gate के भी विज्ञापन हैं, जिनमें पतियों या फिर बॉयफ्रैंड का मजाक उड़ाया गया है। इस तरह के विज्ञापनों को देखकर ज्यादातर पुरुषों की रुची इनके प्रॉडक्ट खरीदने में कम हुई है।  

धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले विज्ञापन-

ICICI Banking Business, Manyavar, Wonder Cement, Fevicol- इन ब्रैंड्स के विज्ञापन को देखने वाले कई भारतीय ऐसे हैं, जिनको क्रिएटिविटी के नाम पर इस विज्ञापन को देखकर गुस्सा आया है, क्योंकि लोगों का मानना है कि इन विज्ञापनों में आस्था से जुड़ी चीजों का मज़ाक़ उड़ाते हुए दिखाया गया है।

अप्रिय वास्तविकताओं को दर्शाने वाले विज्ञापन-

अप्रिय वास्तविकताओं को दर्शाने वाले ऐसे विज्ञापन, जिनमें खून, मीट या मौत से जुड़ी बातों का खुलेआम जिक्र किया गया हो, वह भी देखना भारतीयों को रास नहीं आया। उदाहरण के लिए Stay free, policy bazaar, licious के विज्ञापन।

भारतीय विज्ञापन मानक परिषद ने सभी ब्रैंड्स से उम्मीद जताई है की उनकी स्टडी को गंभीरता से लें और सही तरीके से अपने प्रॉडक्ट का विज्ञापन दिखाएं, जिससे उनकी सेल बढ़े, न कि विज्ञापन देखकर लोगों का गुस्सा।

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जानिए, मीडिया में विज्ञापन खर्च का हाल बताती पिच मैडिसन रिपोर्ट से कब उठेगा पर्दा

‘गोदरेज कंज्यूमर प्रॉडक्ट्स लिमिटेड’ (Godrej Consumer Products Ltd) के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ सुधीर सीतापति इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि होंगे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 04 January, 2022
Last Modified:
Tuesday, 04 January, 2022
PMAR

मीडिया और एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में विज्ञापन खर्च (ad spends) के पूर्वानुमान को लेकर बहुप्रतीक्षित ‘पिच मैडिसन एडवर्टाइजिंग रिपोर्ट’ (PMAR) 2022 का अनावरण 16 फरवरी 2022 को किया जाएगा। ‘पिच’ (Pitch) द्वारा ‘मैडिसन वर्ल्ड’ की पार्टनरशिप में यह रिपोर्ट लॉन्च की जाएगी।

‘गोदरेज कंज्यूमर प्रॉडक्ट्स लिमिटेड’ (Godrej Consumer Products Ltd) के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ सुधीर सीतापति (Sudhir Sitapati) इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि होंगे। इसके साथ ही मैडिसन वर्ल्ड (Madison World) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर सैम बलसारा इस बात पर प्रकाश डालेंगे कि भारतीय विज्ञापन उद्योग के लिए 2022 कैसा रहेगा।

बता दें कि वर्षों से यह रिपोर्ट इंडस्ट्री में एक बेंचमार्क बन गई है और अक्सर मीडिया, पिच प्रजेंटेशंस, कंपनी रिपोर्ट्स, कॉर्पोरेट जगत और यहां तक ​​कि मीडिया कंपनियों द्वारा दायर आईपीओ दस्तावेजों में प्रस्तुत की जाती है।

यह रिपोर्ट न केवल भारतीय एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री के भविष्य की ग्रोथ के बारे में पूर्वानुमान बताती है, बल्कि आने वाले ट्रेंड्स, चुनौतियों और अवसरों के बारे में भी काफी विश्लेषणात्मक जानकारी प्रदान करती है। आने वाले साल से इंडस्ट्री को क्या उम्मीदें हैं, इसका व्यापक अध्ययन प्रदान करने के लिए प्रिंट, टीवी, डिजिटल, रेडियो और ओओएच (OOH) जैसे हर विज्ञापन माध्यम का गहन विश्लेषण किया जाता है।

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टीवी चैनल्स पर विज्ञापनों के मामले की सुनवाई को लेकर कोर्ट ने दी नई तारीख

ट्राई ने न्यूज चैनल्स द्वारा दिखाए जा रहे अत्याधिक विज्ञापनों के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर (intervention application) की है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 27 December, 2021
Last Modified:
Monday, 27 December, 2021
DelhiHC4

दिल्‍ली हाई कोर्ट ने टीवी चैनलों पर ऐड कैप (10+2 Ad Cap) के मामले की सुनवाई को 25 मई, 2022 तक स्‍थगित कर दिया है। बता दें कि ट्राई ने न्यूज चैनल्स द्वारा दिखाए जा रहे अत्याधिक विज्ञापनों के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर (intervention application) की है। ट्राई ने न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन (एनबीडीए) द्वारा पहले से दायर एक याचिका में हस्तक्षेप  (intervention) की मांग की है। ट्राई की इस याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान एनबीडीए और केंद्र से उसके हस्तक्षेप आवेदन का जवाब देने को कहा था और मामले को 23 दिसंबर को सुनवाई के लिए स्थगित कर दिया था।

इस मामले में न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन (एनबीडीए) ने केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल कर दिया है, पर वह ट्राई के आवेदन पर भी अपना जवाब दाखिल करेगा।

बता दें कि ट्राई ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि तमाम टेलीविजन चैनल्स पर जरूरत से ज्यादा विज्ञापन दिखाए जा रहे हैं, जिसे लेकर उपभोक्ताओं से उन्हें कई शिकायती पत्र मिले हैं, जिसमें उपभोक्ताओं ने टीवी देखने के अपने अनुभव को साझा करते हुए उनसे शिकायत की है।

ट्राई ने केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 के नियम 7(11) को चुनौती देने वाली न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) द्वारा दायर एक याचिका में हस्तक्षेप आवेदन (intervention application) दायर किया है। एनबीए ने तर्क दिया है कि ये नियम संविधान द्वारा प्रदत्त वाक एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए अधिकारहीन हैं।

केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 के नियम 7(11) में कहा गया है कि कोई भी टीवी चैनल एक घंटे में 12 मिनट से ज्यादा विज्ञापन नहीं दिखा सकता है। उक्त नियम में कहा गया है, ‘कोई भी कार्यक्रम बारह मिनट प्रति घंटे से अधिक के विज्ञापन नहीं दिखाएगा, जिसमें प्रति घंटे दस मिनट तक वाणिज्यिक विज्ञापन और दो मिनट प्रति घंटे तक चैनल के प्रमोशनल प्रोग्राम शामिल हो सकते हैं।’

दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष 12 मिनट की विज्ञापन सीमा के खिलाफ पहले से ही दो अलग-अलग याचिकाएं दायर हैं। एक याचिका 2013 में न्यूज, रीजनल और म्यूजिक ब्रॉडकास्टर्स ने ट्राई द्वारा लागू किए गए 12 मिनट की ऐड कैप रेगुलेशन के खिलाफ दायर की थी। इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता ब्रॉडकास्टर्स को अंतरिम राहत दी हुई है।

वहीं दूसरी याचिका इस साल अप्रैल में NBDA ने दायर की थी, जिसमें केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम 1994 के नियम 7(11) को चुनौती दी गयी है, जो विज्ञापनों की अवधि को विनियमित करने का प्रयास करता है। एनबीडीए ने तर्क दिया कि ट्राई के पास टीवी चैनल्स पर विज्ञापनों की समय-सीमा तय करने की पावर नहीं है। विज्ञापन को रेगुलेट करने का मतलब संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत सिर्फ फ्री कमर्शियल स्पीच को ही रेगुलेट करने के अलावा और कुछ नहीं है।

कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान इस मामले से जुड़ी पहले से पेंडिंग याचिकाओं को एनबीडीए की लंबित याचिका के साथ जोड़ दिया था।

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मीडिया में विज्ञापनों पर सरकार ने तीन साल में कितना किया खर्चा, जानें यहां

सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में इसके बारे में पूरी जानकारी दी है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 08 December, 2021
Last Modified:
Wednesday, 08 December, 2021
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केंद्र सरकार ने पिछले तीन साल में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में विज्ञापनों पर 1698.98 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में यह जानकारी दी है। संसद के निचले सदन में पूछे गए एक सवाल के जवाब में अनुराग ठाकुर ने बताया, ‘वर्ष 2018-19 से 2020-21 की अवधि के दौरान प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से सरकार द्वारा विज्ञापनों पर 1698.98 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।’

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकारी विज्ञापनों का प्राथमिक उद्देश्य प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और आउटडोर मीडिया के माध्यम से दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सरकारी नीतियों और योजनाओं के बारे में बताना और उनमें जागरूकता पैदा करना है।

सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) के तहत आने वाला ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ (BOC) विज्ञापन जारी करने और संबंधित मीडिया को पैनलबद्ध करने संबंधी नीतिगत दिशा-निर्देशों में निर्धारित मानदंडों के आधार पर विभिन्न मीडिया साधनों के माध्यम से विज्ञापन जारी करता है। ये दिशा-निर्देश ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ की वेबसाइट  www.davp.nic.in पर भी उपलब्ध हैं।  

उन्होंने बताया कि ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ ने एकीकृत अभियान, थीम-आधारित अभियान, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कम लागत वाले विज्ञापनों पर जोर देने, केंद्रित सामग्री के साथ कम प्रिंट स्थान का उपयोग करने और क्यूआर कोड का उपयोग करके जानकारी एम्बेड करने, लक्षित लाभार्थियों के लिए अभियानों की बेहतर स्थिति सहित विज्ञापन व्यय को युक्तिसंगत बनाने के लिए तमाम स्ट्रैटेजी शुरू की हैं।

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ममता बनर्जी बोलीं- सरकारी विज्ञापन चाहिए तो मीडिया को करना होगा ये काम!

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 07 December, 2021
Last Modified:
Tuesday, 07 December, 2021
mamata banerjee

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दरअसल इस वीडियो में वह एक पत्रकार को चौंकाने वाला जवाब देती नजर आ रही है, जिसमें वह पत्रकार को विज्ञापन पाने के लिए अपनी सरकार की तारीफ करने की हिदायत देती दिखायी दे रही हैं।

वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे ग्रामीण क्षेत्र की एक महिला पत्रकार ने मुख्यमंत्री से अपने अखबार की माली हालत और आर्थिक तंगी की समस्या साझा की और बताया कि सरकार की ओर से अखबार को विज्ञापन नहीं मिलते हैं। इस पर सीएम ममता बनर्जी ने बांग्ला में जवाब देते हुए कहा कि अगर विज्ञापन चाहिए तो अखबार में सरकार के बारे में पॉजिटिव न्यूज प्रकाशित करना होगा। इतना ही नहीं वह पत्रकार को रोजाना अखबार की एक कॉपी डीएम कार्यालय में जमा करने के लिए भी कहती है। 

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक कार्यक्रम में कहा कि ग्रामीण पत्रकारों को सरकार की पॉजिटिव न्यूज दिखानी चाहिए। अगर वो ऐसा करते हैं तो मैं उस जिले के डीएम (जिलाधिकारी) से कहूंगी की उन्हें विज्ञापन दिया जाए।

उन्होंने आगे कहा, ‘सरकार के बारे में पॉजिटिव खबर दिखाने वाले पत्रकार डीएम कार्यालय या अन्य कार्यालयों में अपनी खबर को भेजें ताकि उन्हें भी पता चल सके कि अखबार में सरकार के बारे में अच्छी खबर दिखाई जा रही है। ऐसा करने वालों को विज्ञापन दिया जाए।’

दरअसल, यह पहली बार नहीं है जब मीडिया संस्थान को सरकार के हक में खबर दिखाने पर विज्ञापन देने की बात कही गई है, इससे पहले हरियाणा सरकार ने एक आदेश दिया था कि सभी जिलों से प्रकाशित/वितरित होने वाले सभी प्रकार के समाचार पत्र, पत्रिकाओं व न्यूज चैनल जोकि सरकार की निगेटिव या पॉजिटिव कवरेज कर रहे हैं उनकी लिस्ट बनाई जाए। हालांकि विवाद बढ़ने के बाद सरकार को इस आदेश को वापस लेना पड़ा था।

 

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मंत्री के अल्टीमेटम के बाद इस विवादित विज्ञापन को डिजाइनर ने लिया वापस

मशहूर फैशन डिजाइनर सब्यसाची मुखर्जी (Sabyasachi) ने देशभर में कड़ी आलोचना के बीच मंगलसूत्र वाले अपने विज्ञापन को वापस ले लिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 01 November, 2021
Last Modified:
Monday, 01 November, 2021
sabyasachi5487

मशहूर फैशन डिजाइनर सब्यसाची मुखर्जी (Sabyasachi) ने देशभर में कड़ी आलोचना के बीच मंगलसूत्र वाले अपने विज्ञापन को वापस ले लिया है। दरअसल यह विज्ञापन पिछले कुछ दिनों से काफी विवादों में था।  विज्ञापन की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए जाने के बाद से ही सोशल मीडिया यूजर्स के एक वर्ग ने विज्ञापन को हिंदू संस्कृति के खिलाफ बताया और अश्लील करार देते हुए एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। इसके बाद ट्विटर पर #Sabyasachi_Insults_HinduCulture और #BoycottSabyasachi जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे थे।

विज्ञापन को लेकर मध्यप्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने आपत्ति जताई थी और सब्यसाची को चेतावनी देते हुए कहा था कि विज्ञापन अगले 24 घंटे में नहीं हटाया तो उन पर FIR दर्ज की जाएगी।

नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि इस विज्ञापन को देखकर मेरा मन बहुत आहत है। मैं व्यक्तिगत रूप से सब्यसाजी को 24 घंटे का अल्टीमेटम देता हूं। अगर वह मंगलसूत्र का विज्ञापन नहीं हटाते हैं, तो उनके खिलाफ केस दर्ज होगा। उनके खिलाफ कार्रवाई भी होगी। साथ ही अलग से पुलिस भी भेजी जाएगी। अगर उनमें हिम्मत तो दूसरे धर्म के खिलाफ करें। 

इसके बाद सब्यसाची ने इंस्टाग्राम पर लिखा, ‘धरोहर और संस्कृति पर सतत चर्चा की पृष्ठभूमि में मंगलसूत्र विज्ञापन का मकसद समावेशिता और सशक्तिकरण पर बातचीत करना था। इस अभियान का मकसद उत्सव मनाना था और हमें इस बात का गहरा दुख है कि इससे हमारे समाज के एक वर्ग को कष्ट पहुंचा है। इसलिए हमने इस विज्ञापन अभियान को वापस लेने का निर्णय लिया हैं।’

दरअसल, सब्यसाची ने हाल ही में एक ज्वैलरी कलेक्शन लॉन्च किया, जिसका नाम 'द रॉयल बंगाल टाइगर आइकन' रखा गया। इसमें से मंगलसूत्र के विज्ञापन पर हंगामा शुरू हुआ। इस मंगलसूत्र को कंपनी ने 'द रॉयल बंगाल मंगलसूत्र 1.2' नाम दिया। इस विज्ञापन में एक महिला को कम गर्दन वाली पोशाक के साथ मंगलसूत्र पहने दिखाया गया था, जिसे एक पुरुष के साथ अकेले और अंतरंग स्थिति में चित्रित किया गया था। महिला मॉडल का नाम वर्षिता तटावर्ती बताया जा रहा है और पुरुष मॉडल का नाम प्रतेयिक जैन है।

सोशल मीडिया के बाद इस विवादित विज्ञापन को लेकर हिंदू संगठनों ने भी विरोध शुरू कर दिया था। उनका कहना है कि कोई हिंदू त्योहार आते ही क्रिएटिविटी क्यों दिखने लगती है। संगठनों का कहना है कि ये विज्ञापन हिंदू रीति-रिवाज और भावनाओं पर हमला है। हिंदू शादी जैसे पवित्र रिश्ते को ये कंपनियां बदनाम कर रही हैं।

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अपने जन्मदिन पर बॉलीवुड के महानायक ने लिया बड़ा फैसला, यूं मानी फैंस की बात

बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन का आज 79वां जन्मदिन है। इस खास दिन पर अमिताभ ने एक बड़ा फैसला किया है।

Last Modified:
Monday, 11 October, 2021
amitabh54512

बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन का आज 79वां जन्मदिन है। इस खास दिन पर अमिताभ ने एक बड़ा फैसला किया है। दरअसल, कुछ समय पहले एक पान मसाला ऐड करने के चलते उन्हें सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल किया गया था, लेकिन तब उन्होंने इस पर खास प्रतिक्रिया नहीं दी थी, मगर अब इस मामले में अमिताभ बच्चन ने एक्शन ले लिया है। उन्होंने अब 'कमला पसंद' के साथ अपना करार खत्म कर दिया है और इसकी जानकारी उन्होंने अपने ऑफिशियल ब्लॉग पर पोस्ट शेयर कर दी है।

वजह बताते हुए अमिताभ बच्चन के ब्लॉग पर उनके ऑफिस की ओर से जारी एक पोस्ट में कहा गया है, 'कमला पसंद का ऐड प्रसारित होने के कुछ दिन बाद अमिताभ बच्चन ने ब्रैंड से संपर्क किया और पिछले सप्ताह इस करार को खत्म करने का फैसला किया था। जब अमिताभ बच्चन इस ब्रैंड से जुड़े थे, तब उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि यह सरोगेट ऐडवरटाइजमेंट के अंतर्गत आता है।'

उन्होंने कहा कि वे ऐसा इसलिए कर रहे हैं ताकि इससे नई पीढ़ी को पान मसाला का सेवन करने के लिए मोटिवेशन ना मिले। उन्होंने इस ऐड के लिए मिली फीस भी वापस कर दी है।

अमिताभ बच्चन ने कमला पसंद का ऐड किया था, जिसके बाद इसे लेकर कई सारे लोगों ने आपत्ति जताई थी। लोगों का ऐसा मानना था कि देश की सीनियर मोस्ट पर्सनैलिटी होने के नाते अमिताभ बच्चन को ऐसे ऐड नहीं करने चाहिए। नेशनल एंटी-टोबैको ऑर्गेनाइजेशन ने भी अमिताभ बच्चन से रिक्वेस्ट की थी कि बिग बी इस ऐड से अपना नाम वापस ले लें।

इसी बीच अमिताभ बच्चन से एक फैन ने पान मसाला का ऐड करने पर सवाल भी किया था। इसके जवाब में अमिताभ ने कहा था कि- 'अगर किसी संस्था को इससे फायदा हो रहा है तो फिर हमें ऐसे नहीं सोचना चाहिए कि हम ये क्यों कर रहे हैं। जैसे हम लोगों की इंडस्ट्री चलती है वैसे ही उनकी इंडस्ट्री भी चलती है। आपको ऐसा लगता है कि मुझे ये नहीं करना चाहिए लेकिन मुझे इसके लिए फीस मिली है।'

 

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अनुप्रिया आचार्य फिर चुनी गईं AAAI की प्रेजिडेंट, एग्जिक्यूटिव कमेटी में शामिल हुए ये नाम

एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री के हितों को आगे बढ़ाने के लिए वर्ष 1945 में ‘एडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ का गठन किया गया था।

Last Modified:
Friday, 01 October, 2021
ANUPRIYA ACHARYA

‘Publicis Groupe’ की सीईओ (साउथ एशिया) अनुप्रिया आचार्य को एक बार फिर ‘एडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (AAAI) का प्रेजिडेंट चुना गया है। इसके साथ ही ‘ग्रुप एम’ (GroupM) के सीईओ (इंडिया) प्रशांत कुमार को दोबारा से एसोसिएशन का वाइस प्रेजिडेंट चुना गया है।

इनके अलावा एसोसिएशन की एग्जिक्यूटिव कमेटी में बतौर मेंबर विवेक श्रीवास्तव (Innocean Worldwide Communications Pvt Ltd), राणा बरुआ (Havas Worldwide India Pvt Ltd), मोहित जोशी (Havas Media India Pvt Ltd), कुणाल ललानी (Crayons Advertising Pvt Ltd) और रोहन मेहता (Kinnect Media) को शामिल किया गया है।

गौरतलब है कि एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री के हितों को आगे बढ़ाने के लिए वर्ष 1945 में ‘एडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ का गठन किया गया था।

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‘इंडियन सोसायटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ में सुनील कटारिया को फिर मिली ये बड़ी जिम्मेदारी

’इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ (ISA) की नवनिर्वाचित कार्यकारी परिषद की 27 सितंबर 2021 को हुई बैठक में उन्हें इस पद के लिए चुना गया। लगातार छठी बार इस पद के लिए चुने गए हैं सुनील कटारिया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 28 September, 2021
Last Modified:
Tuesday, 28 September, 2021
Sunil Kataria

’इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ (ISA) की नवनिर्वाचित कार्यकारी परिषद की बैठक 27 सितंबर 2021 को हुई। इस बैठक में ’गोदरेज कंज्यूमर प्रॉडक्ट्स लिमिटेड’ के सीईओ (India and SAARC) सुनील कटारिया को एक बार फिर ’ISA’ का चेयरमैन चुना गया। उन्हें इस पद पर लगातार छठी बार चुना गया है।

इस मौके पर सुनील कटारिया का कहना था, ’ डिजिटल विज्ञापन टीवी के बाद दूसरे स्थान पर आ गया है और आगे भी बढ़ रहा है, इस वर्ष हमारा प्रयास डिजिटल मीजरमेंट के क्षेत्र में अपने प्रयासों को आगे बढ़ाने का होगा। मल्टीमीडिया मीजरमेंट बनाने के लिए ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) के साथ काम करने के लिए ’ISA’ सही दिशा में आगे बढ़ रही है। हम सभी संगठनों को उनकी मजबूत भागीदारी के लिए दिल से धन्यवाद देते हैं और यह निश्चित रूप से हमें नई ऊंचाइयों को छूने में मदद करेगा। मैं अपने सभी प्रयासों में आईएसए सदस्यों के समर्थन को भी धन्यवाद देता हूं।’

इसके साथ ही उन्होंने कहा, ‘विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के संदर्भ में, मुझे अपने सभी सदस्यों, उद्योग सहयोगियों, विक्रेताओं और आईएसए सचिवालय टीम के सुरक्षित रहने, टीका लगवाने और स्वास्थ्य अधिकारियों और सरकारों के निर्देशों का पालन करने में सहयोग करने को लेकर खुशी हो रही है।’

वहीं, कार्यकारी परिषद के सदस्यों ने पिछले पांच वर्षों में ‘आईएसए’ चेयरमैन के रूप में सुनील कटारिया के योगदान के लिए उन्हें धन्यवाद दिया और 2021-22 के लिए फिर से चुने जाने पर खुशी व्यक्त की।

कार्यकारी परिषद के अन्य सदस्यों में ये नाम शामिल हैं:

Atul Agrawal, Senior Vice President – Corporate Brand and Marketing, Tata Services Limited

Narendra Ambwani, Director, Agro Tech Foods Limited

Tarun G. Arora, Chief Executive Officer & Whole Time Director, Zydus Wellness Limited

Subhadip Dutta Choudhury, Chief Executive Officer, Hawkins Cookers Limited

Paulomi Dhawan, Independent Director, Whistling Woods International

Neil George, Managing Director, Nivea India Pvt Limited

Girish Kalyanaraman, Vice President, Brand Operations, Procter & Gamble Hygiene and Health Care Limited

Chandru Kalro, Managing Director, TTK Prestige Limited

Devraj Lahiri, Chief Operating Officer - India Tobacco Division, ITC Limited

Angshu Mallick, Managing Director & CEO, Adani Wilmar Limited

Bharat V. Patel, Independent Director, Aditya Birla Sun Life AMC Limited

Anuj Poddar, Executive Director, Bajaj Electricals Limited

Ramakrishnan Ramamurthi, Advisor J. K. Enterprises

Ram Raghavan, Managing Director, Colgate-Palmolive (India) Limited

Gauravjeet Singh, General Manager – Media Services (South Asia) Media Dept, Hindustan Unilever Limited

Shashank Srivastava, Senior Executive Director (Marketing & Sales), Maruti Suzuki India Limited

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