कमलनाथ के बर्थडे विज्ञापन पर छपा 'भूल सुधार', उड़ा खूब मजाक

आज संबंधित अखबारों में भूल सुधार के साथ संशोधित विज्ञापन प्रकाशित किया गया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 19 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 19 November, 2019
Kamal Nath

विज्ञापनों से तौबा करने वाली मध्यप्रदेश कांग्रेस ‘विज्ञापन’ को लेकर ही घिर गई है। सोशल मीडिया पर पार्टी का जमकर मजाक बनाया जा रहा है। भाजपा नेताओं को तो जैसे बैठे-बैठाए कांग्रेस पर ‘तीर’ चलाने का मौका मिल गया है और वे इस मौके को बखूबी भुना रहे हैं।

वैसे, इस मामले में ठीकरा विज्ञापन जारी करने वाली एजेंसी के माथे पर फोड़ दिया गया है। आज संबंधित अखबारों में संशोधित विज्ञापन प्रकाशित किया गया है और ‘भूल सुधार’ के माध्यम से बाकायदा यह साफ करने का प्रयास किया गया है कि ‘गलतियों’ का विज्ञापनदाता यानी मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी से कोई लेना देना नहीं है। वैसे, ये समझना मुश्किल है कि नेताओं ने बिना जांचे-परखे ही विज्ञापन को हरी झंडी कैसे दिखा दी? वो भी तब जब विज्ञापन मुख्यमंत्री कमलनाथ के जन्मदिन से जुड़ा हो।

दरअसल, 18 नवंबर को कमलनाथ का जन्मदिन था, इस उपलक्ष्य में कांग्रेस नेताओं की तरफ से लगभग सभी अखबारों में फुल पेज विज्ञापन दिए गए। ऐसा ही एक विज्ञापन मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी की तरफ से जारी किया गया, जिसमें कमलनाथ के जीवन से जुड़ी कुछ बातों पर प्रकाश डाला गया। जन्मदिन जैसे मौकों पर फोकस ‘अच्छी बातों’ पर रहना चाहिए, लेकिन विज्ञापन में कुछ ऐसी बातें भी शामिल हो गईं, जिन्हें पढ़ने के बाद तारीफ से ज्यादा कटाक्ष या तंज का अहसास हुआ।

मसलन- (1) सन 1993 में कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनने की चर्चा थी। बताया जाता है कि तब अर्जुन सिंह ने दिग्विजय सिंह का नाम आगे किया और इस तरह कमलनाथ उस वक्त सीएम बनने से चूक गए। अब 25 साल बाद दिग्विजय के समर्थन से उन्हें मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला। (2) छिंदवाड़ा से कमलनाथ को 1996 में हार का सामना करना पड़ा था। उन्हें सुंदरलाल पटवा ने चुनाव मैदान में पटखनी दी थी।

(3) आपातकाल के बाद जनता पार्टी की सरकार के दौरान संजय गांधी को एक मामले में कोर्ट ने तिहाड़ जेल भेजा था। तब इंदिरा संजय की सुरक्षा को लेकर चिंतित थीं। कहा जाता है कि तब कमलनाथ जानबूझकर एक जज से लड़ पड़े और जज ने उन्हें सात दिन के लिए तिहाड़ भेज दिया। वहां वे संजय गांधी के साथ ही रहे।’         

विज्ञापन की चर्चा आम होते ही भाजपा नेता अपने शाब्दिक ‘अस्त्रों’ को लेकर मोर्चे पर आ गए और कांग्रेस को निशाना बनाना शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर भी कांग्रेस को घेरा गया। इतना सब होने के बाद जाहिर है कि खलबली मचनी थी। कांग्रेस नेता पहले खामोशी साधे रहे फिर डैमेज कंट्रोल के लिए सामने आये।

वरिष्ठ नेताओं द्वारा कहा गया कि कांग्रेस कमेटी ने विज्ञापन जारी नहीं किया है, लेकिन आज के संबंधित अखबारों में विज्ञापन के नीचे प्रकाशित ‘भूल सुधार’ उनके ही दावे को गलत साबित कर रहा है। ‘भूल सुधार’ में लिखा गया है, ‘एजेंसी की गलती के कारण 18 नवंबर के अंक में कुछ त्रुटिपूर्ण पंक्तियां प्रकाशित हो गई थीं। इसका विज्ञापनदाता से कोई लेना-देना नहीं है। इसका हमें खेद है, भूल सुधार करते हुए विज्ञापन दोबारा प्रकाशित किया जा रहा है’। अब भले ही ‘गलती’ का ठीकरा किसी के सिर भी फोड़ा जाए, फजीहत तो कांग्रेस की हो ही गई है। कमलनाथ पर अपनों से मिली इन ‘शुभकामनाओं’ का क्या असर हुआ होगा,  समझा जा सकता है।

ऐसे ही एक अखबार में छपे भूल सुधार को आप यहां देख सकते हैं।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

मीडिया इंडस्ट्री ने सरकार के सामने उठाया विज्ञापन में कमी का मुद्दा, रखी ये मांग

कोरोनावायरस (कोविड-19) का विपरीत असर मीडिया कंपनियों पर भी पड़ रहा है। इस महामारी के बाद से मीडिया कंपनियों को मिलने वाले विज्ञापन में काफी कमी आई है।

Last Modified:
Tuesday, 07 April, 2020
Advertising

कोरोनावायरस (कोविड-19) का विपरीत असर मीडिया कंपनियों पर भी पड़ रहा है। इस महामारी के बाद से मीडिया कंपनियों को मिलने वाले विज्ञापन में काफी कमी आई है। ऐसे में मीडिया कंपनियों की ओर से मांग उठने लगी है कि ‘विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय’ (डीएवीपी)  व राज्यों के स्वामित्व वाली अन्य इकाइयां उनके विज्ञापन बिलों का तुरंत भुगतान करें, जिससे कंपनियों को नकदी की समस्या न हो और नौकरियों में संभावित कटौतियों को टाला जा सके।

मीडिया से जुड़े शीर्ष अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से ऐसे दौर में मीडिया इंडस्ट्री को संभलने में मदद मिलेगी, जब विज्ञापनदाता खर्च नहीं कर रहे हैं, कई जगह भुगतान अटका हुआ है, अखबारों के मामले में सप्लाई चेन बाधित हो रही है और स्पोर्ट्स व लाइव इंटरटेनमेंट जैसे मीडिया के कई रूप ठहर से गए हैं। बता दें कि सूचना-प्रसारण मंत्रालय की नोडल एजेंसी ‘डीएवीपी’ सरकारी विज्ञापनों को जारी करती है।

‘द इकनॉमिक टाइम्स’ (ET) की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बारे में ‘एडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (AAAI) के प्रेजिडेंट आशीष भसीन का कहना है, ‘इस नाजुक समय में मैं सरकार से गुजारिश करूंगा कि वह विभिन्न विभागों, मंत्रालयों आदि पर विज्ञापन की बकाया राशि का तत्काल भुगतान करने पर विचार करे, इनमें प्रिंट, टीवी, रेडियो, आउट ऑफ होम (OOH) और इवेंट्स आदि का बकाया शामिल है।’

प्रिंट मीडिया से जुड़े एक वरिष्ठ एग्जिक्यूटिव का कहना है, ‘सरकार की ओर से मिलने वाले भुगतान में काफी अनियमितता होती है, लेकिन इस मुश्किल घड़ी में कई बिजनेस टाइम पर भुगतान करने की स्थिति में नहीं है, ऐसे में सरकार को आगे आना चाहिए और अपने ऊपर बकाया सभी भुगतान करने चाहिए। इससे इंडस्ट्री को फिर से अपने पैरों पर मजबूती से खड़े होने में मदद मिलेगी।’

वहीं, ‘जागरण ग्रुप’ (Jagran Group) की प्रेजिडेंट अपूर्वा पुरोहित का कहना है, ‘मीडिया इंडस्ट्री में अगले कुछ महीनों में कैश फ्लो का सबसे बड़ा मुद्दा बनेगा। लॉकडाउन के कारण एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू काफी प्रभावित होने वाला है। ऐसे मौके पर हम सरकार से गुजारिश करते हैं कि वह जितनी जल्दी हो सके, बकाया का भुगतान कर दे, ताकि इस सेक्टर को मुश्किल घड़ी में मदद मिल सके। समस्या का जल्द से जल्द समाधान निकालने के लिए रेडियो इंडस्ट्री और इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी सरकार से बातचीत की प्रक्रिया में जुटे हैं।’

वहीं, ‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar) समूह के चीफ कॉरपोरेट सेल्स एंड मार्केटिंग ऑफिसर सत्यजीत सेन गुप्ता का कहना है, ‘अनिश्चितता भरे और इस मुश्किल समय में अखबारों का रेवेन्यू काफी दबाव में है। सरकार द्वारा बकाया राशि का भुगतान किए जाने से निश्चित रूप से मदद मिलेगी।’

‘बीसीसीएल’ (BCCL) की कंपनी ‘एंटरटेनमेंट नेटवर्क इंडिया लिमिटेड’ (Entertainment Network India Limited) के एमडी और सीईओ प्रशांत पांडे का कहना है, ‘रेडियो ब्रॉडकास्टर्स सोशल मैसेज अथवा अन्य कैंपेन के माध्यम से सरकार को सपोर्ट कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने अभी तक पिछले बकाया का भुगतान भी नहीं किया है। कई मामलों में तो 12 महीनों का भुगतान अटका हुआ है, जबकि कई मामलों में दो साल से भुगतान नहीं हुआ है। वहीं, ‘डीएवीपी’ ने पिछले वित्तीय वर्ष में रेडियों पर विज्ञापनों में कंमी भी कर दी है। मुझे उम्मीद है कि इस सेक्टर की बेहतरी के लिए वह पहले के मुकाबले इसे बढ़ा देंगे।’

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

दूरदर्शन की तरह Amul ने भी कुछ यूं लगाया पुरानी यादों पर अपना 'तड़का'

टीवी पर ‘रामायण’ (Ramayana) और ‘महाभारत’ (Mahabharat) देखकर लोग पुराने दिनों को याद कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ अमूल (Amul) ने भी अब इन यादों पर अपना तड़का डाल दिया है।

Last Modified:
Monday, 06 April, 2020
amul

कोविड- 19 (Covid- 19) को लेकर जहां पूरा देश इस समय लॉकडाउन के दौर से गुजर रहा है। लोग घरों में कैद हैं। ऐसे में घर पर मौजूद लोगों का मनोरंजन करने के लिए दूरदर्शन ने पब्लिक की डिमांड पर  80-90 के दशक के कई प्रोग्राम शुरू कर दिए हैं। टीवी पर ‘रामायण’ (Ramayana) और ‘महाभारत’ (Mahabharat) देखकर लोग पुराने दिनों को याद कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ अमूल (Amul ने भी अब इन यादों पर अपना तड़का डाल दिया है। दरअसल, अमूल ने उस दौर के अपने विज्ञापनों की पूरी सीरीज शेयर कर दी है, ताकि पुराने और यादगार पलों को पूरी तरह से जिया जा सके।

अमूल ने इन विज्ञापनों की शुरुआत रविवार सुबह कार्टून पर आधारित ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ की  तस्वीरें शेयर करके की। एक तस्वीर में 10 सिर वाले रावण को दिखाया गया है, जबकि दूसरे में कर्ण को नदी के पास दिखाया गया है।  साथ ही लिखा है, ‘लोकप्रिय मांग के अनुसार, हम आज एक रेट्रो मोड में हैं.. 1990 के दशक के क्लासिक #Amul विज्ञापनों को आज #डीडी पर #रामायण और #महाभारत के शो में देखते हैं।’

यहां देखिए कुछ क्लासिक अमूल के ऐड विडियो-

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

कोरोना के प्रकोप के बीच बढ़ेंगे टीवी के दर्शक, पर उठा ये सवाल

कोरोना का कोहराम बढ़ता जा रहा है। पूरी दुनिया के लोगों में इस वायरस को लेकर दहशत फैली हुई है।

Last Modified:
Friday, 20 March, 2020
Channel

कोरोना का कोहराम बढ़ता जा रहा है। पूरी दुनिया के लोगों में इस वायरस को लेकर दहशत फैली हुई है। हालात यह हैं कि इस वायरस के प्रकोप से बचने के लिए लोगों पर घरों पर रहने का दबाव बढ़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रविवार को ‘जनता कर्फ्यू’ यानी लोगों से बहुत आवश्यक न होने पर घरों से न निकलने की अपील की है। कई कंपनियों ने भी अपने एंप्लाईज को घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करने के लिए कहा है। इससे ‘इन हाउस’ एंटरटेनमेंट के अन्य रूपों के साथ-साथ टीवी की व्युअरशिप भी प्रभावित होगी। जाहिर सी बात है कि इस स्थिति में टीवी की व्युअरशिप में तो काफी इजाफा होगा, लेकिन क्या टीवी इंडस्ट्री को ऐड रेवेन्यू भी मिलेगा, यह बड़ा सवाल है।

इसके अलावा हेल्थ एडवाइजरी को ध्यान में रखते हुए प्रॉडक्शन हाउसेज ने भी आउटडोर शूटिंग रोक दी है, ऐसे में एक चुनौती यह भी है कि क्या ब्रॉडकास्टर इस स्थिति में कंटेंट के प्रवाह को बनाए रख पाएंगे। दरअसल, ‘Indian Motion Pictures Producers' Association’ (IMPPA) ने 31 मार्च तक टीवी सीरियल्स, वेब सीरीज और अन्य कार्यक्रमों की शूटिंग रोकने के लिए कहा है।  

'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) के चीफ ग्रोथ ऑफिसर (एड सेल्स) आशीष सहगल का मानना है कि बेशक प्रॉडक्शन प्रभावित होगा, लेकिन इसका व्युअरशिप पर प्रभाव नहीं पड़ेगा। उनका कहना है, ‘वर्ष 2009 में टीवी प्रॉडक्शन हाउसेज ने एक महीने लंबी हड़ताल की थी, उस समय फ्रेश एपिसोड प्रसारित नहीं किए गए थे। उस दौरान हम कुछ फ्रेश एलीमेंट्स के साथ पुराने एपिसोड ही प्रसारित कर रहे थे और हमें अच्छी व्युअरशिप मिली थी। मुझे नहीं लगता कि इस तरह की स्थिति आएगी, जिससे व्युअरशिप प्रभावित होगी। और अगर चीजें खराब होती हैं तो जरूरत पड़ने पर हम पुराने शो चलाएंगे।’

सहगल के अनुसार, ‘टीवी के लिए एक सकारात्मक बात यह भी है कि यदि कोई व्यक्ति धारावाहिक नहीं देखना चाहता है तो उसके पास मूवी चैनल्स का विकल्प है। ऐसे में मूवी चैनल्स की व्युअरशिप बढ़ने की संभावना है, यदि लोग शो नहीं देख रहे रहे हैं तो उनके मूवी देखने की संभावना है।’

वहीं, ‘9एक्स मीडिया’ (9X Media) के चीफ रेवेन्यू ऑफिसर पवन जेलखानी का कहना है कि सभी चैनल्स के पास हमेशा 10 से 15 दिन तक चलाने के लिए शो का एक बैंक होता है। जेलखानी के अनुसार, ‘मुझे पूरी उम्मीद है कि 31 मार्च से शूटिंग फिर से शुरू हो जाएंगी। इस दौरान टीवी की व्युअरशिप में इजाफा होगा, लेकिन हमें इस स्थिति को एक अवसर के रूप में नहीं देखना चाहिए।’   

हालांकि, मार्केट पर नजर रख रहे इंडस्ट्री के दिग्गजों का मानना है कि कोरोना के खौफ का असर मार्केट पर निश्चित रूप से पड़ेगा और इससे ऐड रेवेन्यू यानी विज्ञापन से मिलने वाला राजस्व भी काफी प्रभावित होगा। नाम न छापने की शर्त पर एक सीनियर एग्जिक्यूटिव ने बताया, ‘वास्तविक स्थिति का पता लगने में एक हफ्ते का समय लगेगा। टेलिविजन अभी भी ‘फास्ट मूविंग कंज्यूमर्स गुड्स’ (FMCG) पर निर्भर है और हमें उम्मीद है कि वहां से टीवी को विज्ञापन मिलना जारी रहेगा। हालांकि ऐसी संभावना है कि वे अपने खर्चों में भी कटौती कर सकते हैं।’

‘पिच मैडिसन रिपोर्ट 2020’ के अनुसार, टीवी पर विज्ञापन खर्च के मामले में FMCG सेक्टर का योगदान सबसे ज्यादा (49 प्रतिशत) है। हालांकि, वर्ष 2019 में इसमें एक प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी। टीवी पर विज्ञापन खर्च में योगदान के मामले में टेलिकॉम और ऑटो इंडस्ट्री 12 प्रतिशत और सात प्रतिशत के साथ क्रमश: दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं।

वहीं, इंडस्ट्री से जुड़े एक अन्य विशेषज्ञ के अनुसार, ‘यह कहना मुश्किल है कि टीवी पर विज्ञापन खर्च में बढ़ोतरी होगी अथवा नहीं, लेकिन यदि इस तरह के शटडाउन की स्थिति जारी रहती है तो मूवीज और न्यूज चैनल्स पर विज्ञापन खर्च में इजाफा होगा।’

जेलखानी का कहना है कि वर्तमान हालातों का प्रभाव ऐड रेवेन्यू पर सिर्फ अगले दो हफ्ते तक रह सकता है, उससे ज्यादा नहीं। जेलखानी के अनुसार, ‘हम अभी दो से तीन खराब तिमाहियों से उबरकर बाहर आए हैं और मुझे लग रहा है कि मार्च काफी अच्छा कर रहा है। वर्तमान हालातों का असर विज्ञापन राजस्व पर सिर्फ 10 से 15 दिन रहेगा, हमें टीवी पर विज्ञापन खर्च के मामले में कोई बड़ा असर दिखाई नहीं दे रहा है।’

इस मामले में ‘Elara Capital’ के वाइस प्रेजिडेंट- रिसर्च एनालिस्ट (मीडिया) करन तौरानी का कहना है कि अगले एक पखवाड़े में टीवी की व्युअरशिप बढ़ेगी, लेकिन यह थोड़े समय के लिए ही होगी। तौरानी के अनुसार, ‘शुरुआत के 10-15 दिनों में जरूर टीवी की व्युअरशिप बढ़ेगी, क्योंकि अभी फ्रेश कंटेंट है। इस बात की संभावना है कि दर्शकों का एक नया वर्ग सामने आएगा, जिन्होंने टीवी देखना बंद कर दिया है, लेकिन यह स्थिति थोड़े समय के लिए ही होगी। नए कार्यक्रमों की शूटिंग कैंसल हो गई है। ऐसे में जब लोगों को कोई नया एपिसोड देखने के लिए नहीं मिलेगा तो वे डिजिटल कंटेंट की ओर रुख करेंगे।’

हालांकि, विज्ञापन के मोर्चे पर तौरानी को चीजें बेहतर होती नहीं दिख रही हैं। तौरानी के अनुसार,‘ मुझे नहीं लगता कि कोई सुधार होगा बल्कि यह और खराब होगा। खपत में मंदी हो रही है, विश्व स्तर पर भी बहुत सारे ब्रैंड्स विज्ञापन खर्चों में कटौती कर रहे हैं।  इस स्थिति में मुझे नहीं लगता कि  एडवर्टाइजिंग में कोई सुधार होगा। 15 दिनों के बाद जब ब्रॉडकास्टर्स के पास नए एपिसोड नहीं होंगे, तब बिजनेस पर और प्रभाव पड़ेगा।’

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

इस वजह से 137 ऐडवर्टाइजर्स ने अपने विज्ञापनों को लिया वापस

ASCI द्वारा इस बारे में सूचित किए जाने के बाद 137 ऐडवर्टाइजर्स ने अपने विज्ञापनों को वापस ले लिया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 20 February, 2020
Last Modified:
Thursday, 20 February, 2020
ASCI

टीवी पर आने वाले विज्ञापनों की प्रमाणिकता की जांच करने वाली संस्था 'ऐडवर्टाइजिंग स्‍टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' (ASCI) ने पिछले साल नवंबर में 408 विज्ञापनों के खिलाफ शिकायतों की जांच की। ASCI द्वारा इस बारे में सूचित किए जाने के बाद 137 ऐडवर्टाइजर्स ने अपने विज्ञापनों को वापस ले लिया।

इसके बाद ASCI की ‘कंज्यूमर कंप्लेंट्स काउंसिल’ (CCC) ने 271 विज्ञापनों का मूल्यांकन किया और 248 शिकायतों को सही ठहराते हुए जांच के लिए रोक दिया।

इन 248 शिकायतों में 159 एजुकेशन सेक्टर के, 44 हेल्थकयर सेक्टर के, 8 पर्सनल केयर के, 4 फूड व बेवरेज सेक्टर के और 33 अन्य कैटेगरी के विज्ञापन शामिल थे। जबकि इनमें से अधिकांश विज्ञापन भ्रामक दावे कर रहे थे।

इसके अलावा ‘कंज्यूमर कंप्लेंट्स काउंसिल’ (CCC) ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण भी कुछ ऐडवरटाइजर्स के खिलाफ शिकायतों को जांच के लिए रोका है। वहीं, मशहूर हस्तियों द्वारा पेश किए जाने वाले कुछ विज्ञापनों को भी भ्रामक यानी गलत दावे पेश करते हुए पाया गया है।  

‘ऐडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया’ (ASCI) की सेक्रेटरी जनरल श्वेता पुरंदरे ने कहा कि उपभोक्ताओं को हर दिन बड़ी संख्या में विज्ञापन दिखाए जाते हैं। विज्ञापनों में दिखाए जाने वाले सेलिब्रिटीज द्वारा भी युवाओं और बच्चों को काफी ज्यादा प्रभावित किया जाता है। एक सही विज्ञापन का मतलब ये है कि इसमें किसी भी तरह से लापहरवाही को बढ़ावा न दिया जाए और दावे भी झूठे न पेश किए जाएं। इसके अलावा  सेलिब्रिटीज की भी ये जिम्मेदारी है कि वे जो विज्ञापन कर रहे हैं उनके दावों की प्रमाणिकता की जांच करें, ताकि लोग भ्रमित न हो।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

मीडिया में विज्ञापन खर्च को लेकर सामने आई ये रिपोर्ट

इस रिपोर्ट के अनुसार, विज्ञापन खर्च में 36 प्रतिशत शेयर के साथ टीवी सबसे बड़ा माध्यम बना रहेगा, लेकिन इसका ग्रोथ रेट 6.8 प्रतिशत बना रहेगा।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 13 February, 2020
Last Modified:
Thursday, 13 February, 2020
Advertising

मीडिया और ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री को लेकर पिच मैडिसन ऐडवर्टाइजिंग रिपोर्ट (PMAR) जारी कर दी गई है। इस रिपोर्ट में विज्ञापन खर्च (Adex) के मामले में पहली छमाही यथावत रहने की भविष्यवाणी की गई है, जबकि दूसरी छमाही खासकर चौथी तिमाही काफी बेहतर रहने की उम्मीद जताई गई है। रिपोर्ट में वर्ष 2020 के लिए विकास दर 10.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। 7048 करोड़ रुपए के इजाफे के साथ विज्ञापन खर्च 74650 करोड़ रुपए तक बढ़ने की उम्मीद जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें डिजिटल का योगदान 4387 करोड़ रुपए अथवा 62 प्रतिशत रहेगा।  

आर्थिक मंदी, ट्राई के नए टैरिफ ऑर्डर को लेकर छायी निराशा और त्योहारों के दौरान कंज्यूमर की उदासीनता की वजह से इंडस्ट्री के लिए पिछला साल काफी चुनौतीपूर्ण था। इस वजह से वर्ष 2019 के लिए अनुमानित विकास दर 13.04 प्रतिशत से गिर गई थी और ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री की ग्रोथ में सिर्फ 11 प्रतिशत का इजाफा हुआ था। हालांकि, दूसरी ओर इस अवधि में विज्ञापन खर्च में 6695 करोड़ रुपए का इजाफा दर्ज किया गया था। यह पिछले एक दशक के दौरान सिर्फ एक साल में विज्ञापन खर्च में दूसरी सबसे बड़ी बढ़ोतरी थी।  

जैसा कि पिछले कई साल से हो रहा है, वर्ष 2020 में भी डिजिटल मीडियम में सबसे ज्यादा 28.4 प्रतिशत की ग्रोथ देखने को मिली है और वर्ष के अंत में विज्ञापन खर्च में 27 प्रतिशत शेयर के साथ यह लगभग 20,000 करोड़ रुपए हो चुका है।   

इस रिपोर्ट के अनुसार, विज्ञापन खर्च में 36 प्रतिशत शेयर के साथ टीवी सबसे बड़ा माध्यम बना रहेगा, लेकिन इसका ग्रोथ रेट 6.8 प्रतिशत रहेगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विज्ञापन खर्च में प्रिंट के शेयर में तीन प्रतिशत की कमी देखने को मिलेगी और यह 27 प्रतिशत रह जाएगा। हालांकि इसमें अभी दो प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की जा रही है।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

IPL के दौरान देखने को मिलेंगे इन कंपनियों के विज्ञापन

‘इंडियन प्रीमियर लीग’ (आईपीएल) 2020 के 13वें सीजन का आगाज 29 मार्च को होगा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 06 February, 2020
Last Modified:
Thursday, 06 February, 2020
Advertising

‘इंडियन प्रीमियर लीग’ (आईपीएल) 2020 के 13वें सीजन का आगाज 29 मार्च को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में होगा। खबर है कि इस बार आईपीएल मैचों के दौरान नौ एडवर्टाइजर्स के विज्ञापन देखने को मिलेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रायोजकों में शुमार ‘वीवो’ (Vivo), ‘ड्रीम11’ (Dream11) और ‘कोका कोला इंडिया’ (Coca-Cola India) ने मिलाकर 800 से 900 करोड़ रुपए का विज्ञापन स्पेस लिया है। आईपीएल 2020 के मीडिया अधिकार ‘स्टार इंडिया’ (Star India) के पास हैं। बता दें कि ‘आईपीएल’ का पिछला सीजन रोहित शर्मा की कप्तानी में ‘मुंबई इंडियंस’ (Mumbai Indians) की टीम ने जीता था।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

इनके सिर सजा e4m Prime Time Awards का ताज, यहां देखें पूरी लिस्ट

बहुप्रतिष्ठित ‘एक्सजचेंज4मीडिया’ समूह के प्राइम टाइम अवॉर्ड्स के छठे एडिशन का आयोजन 31 जनवरी को मुंबई में किया गया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 01 February, 2020
Last Modified:
Saturday, 01 February, 2020
Prime Time Awards

बहुप्रतिष्ठित ‘एक्‍सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) समूह के प्राइम टाइम अवॉर्ड्स (Prime Time Awards) के छठे एडिशन का आयोजन 31 जनवरी को मुंबई में किया गया। मुंबई के ताज सांताक्रूज होटल में आयोजित एक समारोह में विभिन्न कैटेगरी में ये अवॉर्ड्स दिए गए।

एक्सीलेंस अवॉर्ड कैटेगरी में ‘ओगिल्वी एंड माथर’ (Ogilvy & Mather) को एडवर्टाइजिंग एजेंसी ऑफ द ईयर के तहत गोल्ड से नवाजा गया। ‘ओगिल्वी’ की झोली में चार मेडल आए। वहीं, ‘मैडिसन मीडिया’ (Madison Media) और ‘एमजी मोटर’ (MG Motor) ने क्रमश: ‘मीडिया एजेंसी ऑफ द ईयर’ और ‘एडवर्टाइजर ऑफ द ईयर’ के लिए गोल्ड मेडल जीता।

‘वायकॉम18’ (Viacom18) और ‘एशियन पेंट्स’ (Asian Paints) के लिए अपने कामों की वजह से ‘मैडिसन मीडिया’ ने तीन गोल्ड जीते। वहीं, ‘एमजी मोटर’ ने ‘Best Launch/Re-Launch Strategy for a Product/Service’ और ‘Best Integrated TV campaign’ कैटेगरी में दो गोल्ड पर अपना कब्जा जमाया।

कार्यक्रम में ‘स्टार इंडिया’ (Star India) को ‘Entertainment & Media’ और ‘Best Launch/Re-Launch of a Programme/Channel’ कैटेगरी में दो गोल्ड मिले। उसे यह अवॉर्ड ‘Vivo IPL 2019-Game Banayega Name’ के तहत किए गए काम के लिए दिए गए। इसके अलावा गोल्ड जीतने वालों में ‘ओयो होटल्स एंड होम्स’ (Oyo Hotels & Homes), ‘सोलर सिनेप्लेक्स, नौचंदी मेला-ऑन ग्राउंड’ (Solar Cineplax, Nauchandi Mela-On-ground) और ‘मैन वर्सेज वाइल्ड विद बेयर ग्रिल्स एंड पीएम मोदी’  (Man vs Wild with Bear Grylls and PM Modi) शामिल रहे।  

बता दें कि क्रिएटिव, एडवर्टाइजिंग, ब्रैंड्स और मीडिया एजेंसियों के क्षेत्र में उल्‍लेखनीय कार्य करने वालों को सम्‍मानित करने के लिए एक्‍सचेंज4मीडिया की ओर से ये अवॉर्ड्स दिए जाते हैं। इनके द्वारा एक अक्टूबर 2018 से सितंबर 2019 के बीच में किए गए उल्लेखनीय कार्यों की समीक्षा के लिए एक जूरी का गठन किया गया था। जूरी के फैसले के आधार पर इन विजेताओं का चुनाव किया गया।

इन अवॉर्ड्स के विजेताओं का चयन करने के लिए ‘ग्रुप एम, साउथ एशिया’ (GroupM, South Asia) के सीईओ प्रशांत कुमार की अध्यक्षता में जूरी मीट का आयोजन भी किया गया था। जूरी के अन्य सम्मानित सदस्यों में ‘Automotive Lubricants, Gulf’ के मार्केटिंग हेड अमित घेजी,’ Rentokil PCI’ की चीफ मार्केटिंग ऑफिसर अनिंदिता चटर्जी, ’ Danone’ की मार्केटिंग डायरेक्टर दीपाली अग्रवाल, ‘Initiative’ के वाइस प्रेजिडेंट धीरेंद्र सिंह, ‘UTI Mutual Funds’ के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट गौरव सूरी, ‘Honeywell’ की पूर्व मार्केटिंग डायरेक्टर गुरमीत कौर,’ Max’ के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट जितेन महेंद्रा, ‘TATA AIA Life Assurance’ की चीफ मार्केटिंग ऑफिसर मृदुला शेखर, ‘Yash Raj Films’ के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (मार्केटिंग) मनन मेहता, ’ Kaya Clinic’ की मार्केटिंग हेड पूजा सहगल,‘Samsonite’ की असिस्टेंट डायरेक्टर (मीडिया एंड कम्युनिकेशन) प्रदन्य पोपडे, ‘Muthoot’ के ग्रुप चीफ मार्केटिंग ऑफिसर संजीव शुक्ला,’ Edelweiss’ की चीफ मार्केटिंग ऑफिसर शबनम पंजवानी,‘ Metro Brands’ की मार्केटिंग हेड श्वेतल बसु, ‘Platinum’ की डायरेक्टर (कंज्यूमर मार्केटिंग) सुजला मार्टिस, ‘IDFC First Bank’ के चीफ मार्केटिंग एंड कम्युनिकेशन ऑफिसर श्रीपाद शिंदे और ‘Sonata & SF, Titan’ के मार्केटिंग हेड उत्कर्ष ठाकुर शामिल थे।

विजेताओं की पूरी लिस्ट आप यहां क्लिक कर देख सकते हैं।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

मीडिया के लिए कुछ यूं फायदे का सौदा साबित हो सकता है दिल्ली चुनाव

वोटर्स को लुभाने के लिए राजनीतिक दल आउटडोर एडवर्टाइजिंग में नए रास्ते तलाश रहे हैं, वहीं नए मीडिया प्लेटफॉर्म्स का सहारा भी लिया जा रहा है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 11 January, 2020
Last Modified:
Saturday, 11 January, 2020
Advertising

मार्केट में मंदी से उबरने के लिए विज्ञापनों को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन चुनाव में मीडिया पर विज्ञापन खर्च के मामले में राजनीतिक दल ज्यादा आगे नहीं बढ़ रहे हैं। आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान विभिन्न राजनीतक दलों द्वारा विज्ञापनों पर 150 से 200 करोड़ रुपए खर्च किए जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। इससे पहले वर्ष 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान हुए खर्च से अब के खर्च का आकलन किया जा सकता है।

‘एसोचैम’ (ASSOCHAM) की रिपोर्ट के अनुसार,पांच साल पहले राजनीतिक दलों द्वारा सभी तरह के अभियानों पर लगभग 200 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। पिछली बार के विधानसभा चुनाव के बाद प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि व्यक्तिगत तौर पर उम्मीदवारों के बजाय विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा ज्यादा और एकमुश्त बड़ा खर्चा किया गया। इसमें भी प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में विज्ञापन पर ज्यादा खर्च किया गया। इस साल 2020 में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है।      

‘मैडिसन मीडिया प्लस’ (Madison Media Plus) के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर राजुल कुलश्रेष्ठ का कहना है, ‘राजनीतिक दल आर्थिक रूप से ज्यादा प्रभावित नहीं होते हैं। इन चुनावों में भी इन दलों को अपनी बात लोगों तक पहुंचानी होगी। उन्हें इस तरह की स्ट्रैटेजी अपनानी होगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपनी बात पहुंचाई जा सके। दिल्ली की करीब दो करोड़ जनता तक प्रभावी रूप से अपनी पहुंच बनाने के लिए इन राजनीतिक दलों को मीडिया में भी खर्चा करना होगा।।’

इसके साथ ही कुलश्रेष्ठ का यह भी कहना है, ‘राजनीतिक दलों के अभियानों में जुटे लोगों की संख्या पर मंदी का प्रभाव पडेगा, इसके बावूजद विज्ञापन पर खर्च नहीं रुकेगा। दूसरी तरफ, यही समय है, जब लोग पैसे कमाएंगे।’

आउटडोर एडवर्टाइजिंग ब्रैंड ‘Jcdecaux’ के एग्जिक्यूटिव चेयरमैन प्रमोद भंडूला के अनुसार, ‘इस दौरान बहुत सारी नई चीजें होंगी। उदाहरण के लिए- आम आदमी पार्टी ने तो अपने वोटर्स से बातचीत भी शुरू कर दी है। अपने पॉलिटिकल कैंपेन के लिए उन्होंने सभी प्रकार के माध्यमों को आधार बनाया है। चाहे प्रिंट हो, टीवी हो, रेडियो हो अथवा आउट ऑफ होम (OOH), वे सभी मोर्चों पर काफी आक्रामक रहे हैं। जब एडवर्टाइजिंग की बात होती है तो राजनीतिक दल कोई भी कसर नहीं छोड़ते हैं।’

विशेषज्ञों का कहना है कि आउटडोर, रेडियो, टीवी और प्रिंट में दिए जाने वाले विज्ञापन खर्च में वर्ष 2015 के मुकाबले 10 से 15 प्रतिशत बढ़ोतरी की उम्मीद है। इस बार के विज्ञापन खर्च के मामले में सोशल मीडिया गेम चेंजर साबित होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रत्येक राजनीतिक दल द्वारा सोशल मीडिया पर कुल विज्ञापन खर्च का 25 से 30 प्रतिशत खर्च किया जाएगा। एक मीडिया बायर के अनुसार, सोशल मीडिया पर विज्ञापन खर्च के मामले में राजनीतिक दल काफी उदार हैं और उन्होंने इस माध्यम के लिए अपने बजट में कम से कम 30 प्रतिशत की वृद्धि की है।

‘Posterscope India’ के डायरेक्टर फेबियन कोवान (Fabian Cowan) के अनुसार, विज्ञापन के लिहाज से पांच साल बहुत लंबा समय है और इस समय में तमाम चीजें काफी बदल चुकी हैं। आज के समय में ऑडियंस तक पहुंच बढ़ाने के लिए तमाम नए मीडिया प्लेटफॉर्म्स आ चुके हैं। ऐसे में इन सब के साथ मिलकर चलने की जरूरत होगी। इससे निश्चित रूप से विज्ञापन खर्च बढ़ेगा।

वहीं, ‘Vizeum’ के सीईओ हिमांक दास (Himanka Das) का कहना है कि जब राजनीतिक दलों द्वारा विज्ञापन खर्च में बढ़ोतरी की बात आती है तो यह सोशल मीडिया से भी प्रेरित होती है, जो कि कम्युनिकेशन का प्रमुख टूल बन चुकी है। खास बात यह है कि इसमें फीडबैक तुरंत मिल जाता है, जो राजनीतिक दलों के लिए सुविधाजनक होता है। हालांकि, कैंपेन के लिए अभी भी पारंपरिक मीडिया यानी ट्रेडिशनल मीडिया का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसमें इन्वेंट्री नहीं बढ़ती है। उदाहरण के लिए, दिल्ली में आउट ऑफ होम अभी भी स्थिर बना हुआ है, फिर चाहे वह 2015 हो अथवा 2020। दूसरी तरफ सोशल मीडिया काफी आगे बढ़ रहा है और यह स्थिति न सिर्फ लोगों से ज्यादा बातचीत को लेकर है, बल्कि कंटेंट को लेकर भी है, जो लोगों का ध्यान खींच रहा है और राजनीतिक दलों के संदेश को उन तक पहुंचा रहा है।  

इसके अलावा, यदि रेडियो की बात करें तो 2015 के चुनाव में जहां इसने काफी अहम भूमिका निभाई थी, आज भी उसने अपनी उतनी ही मौजूदगी दर्ज करा रखी है। इस बार यह आंकड़ा कम से कम 10 प्रतिशत ज्यादा है और दिल्ली के मुख्यमंत्री व आम आदमी पार्टी लीडर अरविंद केजरीवाल के रेडियो जिंगल्स को इस बार भी मिस करना मुश्किल है।

पॉलिटिकल स्ट्रैटेजी के बारे में इंडिपेंडेंट पॉलिटिकल कम्युनिकेशंस कंसल्टेंट अनूप शर्मा का कहना है कि इस बार आरोप-प्रत्यारोप लगाने में भी विज्ञापन खर्च ज्यादा होगा। वर्ष 2015 की बात अलग थी, लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी को अपनी उपलब्धियों का प्रदर्शन करने की चुनौती होगी, वहीं बीजेपी विकास न होने का मुद्दा उठाकर जवाबी हमला करने का प्रयास करेगी।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

मीडिया में विज्ञापनों पर खर्च का सरकार ने कुछ यूं दिया हिसाब

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने मोदी सरकार द्वारा 2014 से लेकर 2019 तक विज्ञापनों पर किए गए खर्च को लेकर किए थे सवाल

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 31 December, 2019
Last Modified:
Tuesday, 31 December, 2019
Advertising

मोदी सरकार ने 2014 से लेकर 2019 तक विज्ञापनों पर कितना खर्चा किया, यह सवाल कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सूचना प्रसारण मंत्रालय से किया था, जिसका उन्हें कोई सीधा जवाब नहीं मिला। हालांकि, ये बात जरूर सामने आई है कि भारत सरकार विदेशों में विज्ञापन पर कोई खर्चा नहीं करती है। मनीष तिवारी ने सरकार से जानना चाहा था कि 26 मई 2014 से लेकर 30 सितंबर 2019 तक सरकार ने प्रिंट, ब्रॉडकास्ट और सोशल मीडिया के साथ ही विदेशी मीडिया में विज्ञापनों पर सालाना कितना खर्च किया। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा था कि देश की टॉप 20 मीडिया कंपनियों के राजस्व में सरकारी विज्ञापनों की हिस्सेदारी कितनी है?

इस संबंध में सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने अपने जवाब में कहा कि ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन (बीओसी) द्वारा नोटिस, निविदाएं, नीलामी, भर्ती आदि के साथ ही जागरूकता अभियान और सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देने वाले विज्ञापन जारी किये जाते हैं। जहां तक कुल खर्चे की बात है तो यह बीओसी की वेबसाइट पर उपलब्ध है।’

जावड़ेकर के जवाब में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि प्रिंट मीडिया में विज्ञापनों का प्रति वर्ग सेमी रेट 42.31 रुपए से बढ़कर 62.13 रुपए हो गया है, लेकिन बीओसी द्वारा प्रिंट मीडिया को हर साल दिए जाने वाले विज्ञापनों की संख्या जरूर घटी है। मोदी सरकार के वित्त वर्ष 2014-15 और 2018-19 के बीच यह 10.95 करोड़ वर्ग सेमी रहा, जबकि मनमोहन सरकार में वित्त वर्ष 2009-10 और 2013-14 के बीच 11.88 करोड़ वर्ग सेमी था।

भारतीय मीडिया कंपनियों के राजस्व प्रवाह में हिस्सेदारी के मनीष तिवारी के सवाल के जवाब में जावडेकर ने कहा कि भारत सरकार इस संबंध में कोई विवरण नहीं रखती। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा विदेशी समाचार पत्रों और टीवी चैनलों के लिए विज्ञापन जारी नहीं किये जाते हैं।

मनीष तिवारी ने अपने ट्विटर हैंडल पर इन सवालों के साथ ही मंत्रालय की ओर से मिले जवाबों को भी शेयर किया है। इस ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

'ब्लूमबर्ग' ने एक महीने में मीडिया को दे दिए इतने विज्ञापन, हो गई बल्ले-बल्ले

अमेरिका में अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवारी के लिए न्यूयॉर्क सिटी के पूर्व मेयर माइकल ब्लूमबर्ग ने अपनी दावेदारी पेश की है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 26 December, 2019
Last Modified:
Thursday, 26 December, 2019
Advertisement

अमेरिका में अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवारी के लिए न्यूयॉर्क सिटी के पूर्व मेयर और मीडिया कंपनी ‘ब्लूमबर्ग एलपी’ (Bloomberg LP) के सह संस्थापक माइकल ब्लूमबर्ग (Michael Bloomberg) ने पिछले महीने औपचारिक रूप से अपनी दावेदारी पेश कर दी है। माना जा रहा है कि माइकल ब्लूमबर्ग राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी (Democratic Party) के आधिकारिक प्रत्याशी बनने की होड़ में शामिल होने वाले आखिरी नेता हैं। प्रत्याशी चुनने का काम अगले साल तीन फरवरी से होगा।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 77 वर्षीय ब्लूमबर्ग ने उम्मीदवार की दौड़ में शामिल होने के लिए पिछले महीने के आखिर में जब से अपनी दावेदारी पेश की है, तब से अब तक लगभग एक महीने में ही उन्होंने डिजिटल और टेलिविजन एडवर्टाइजिंग पर 120 मिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च कर दिए हैं।

अमेरिका की पॉलिटिकल वेबसाइट ‘पॉलिटिको’ (Politico) के अनुसार, हालांकि ब्लूमबर्ग लगभग सभी अमेरिकी राज्यों में खर्च कर रहे हैं, लेकिन उनका मुख्य फोकस कैलिफोर्निया, टेक्सास और फ्लोरिडा पर है।

‘पॉलिटिको’ के अनुसार, डेमोक्रिटक पार्टी के जितने भी उम्मीदवारों ने राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी की दौड़ में अपनी दावेदारी पेश की है, उनके इस साल कुल विज्ञापन खर्च की तुलना में ब्लूमबर्ग ने पिछले कुछ समय के दौरान ही विज्ञापनों पर दोगुना से ज्यादा खर्चा किया है।

इस बारे में रिपब्लिकन राजनीतिक रणनीतिकार जिम मैकलॉघलिन (Jim McLaughlin) का कहना है, ‘राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी की दौड़ में हमने कभी भी इतना खर्च होते हुए नहीं देखा है। ब्लूमबर्ग के पास बजट की कोई सीमा ही नहीं है।’ वहीं, एक राजनीतिक विश्लेषक का कहना है, ‘जब आप टीवी पर एक ही विज्ञापन 10 बार देखते हैं, तो उसका ज्यादा प्रभाव पड़ने वाला नहीं है।’

वहीं, पिछले हफ्ते ‘Quinnipiac University’ की ओर से जारी नेशनल पोल के अनुसार, इस दौड़ में शामिल पूर्व उपराष्ट्रपति जो बिडेन (Joe Biden) के पास करीब 30 प्रतिशत वोटों के साथ डेमोक्रेटिक वोटर्स और इंडिपेंडेंट वोर्टस के बीच मजबूत पकड़ है। वह इस दौड़ में सबसे आगे हैं। इस पोल के अनुसार, बिडेन के बाद 17 प्रतिशत वोटों के साथ सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन (Elizabeth Warren) का नंबर है, जबकि सात प्रतिशत वोटों के साथ ब्लूमबर्ग पांचवे नंबर पर हैं।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए