देश के विज्ञापनदाताओं की शीर्ष संस्था इंडियन सोसाइटी ऑफ ऐडवर्टाइजर्स (ISA) ने अतुल अग्रवाल को अपना नया चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर नियुक्त किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
देश के विज्ञापनदाताओं की शीर्ष संस्था इंडियन सोसाइटी ऑफ ऐडवर्टाइजर्स (ISA) ने अतुल अग्रवाल को अपना नया चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर नियुक्त किया है। अतुल अग्रवाल ने 2 जनवरी 2026 से ISA के CEO के तौर पर जिम्मेदारी संभाल ली है। ISA पिछले 70 साल से ज्यादा समय से देश के विज्ञापनदाताओं की आवाज के रूप में काम कर रही है।
अतुल अग्रवाल को करीब चार दशक का प्रोफेशनल अनुभव है। उन्होंने देश की कई बड़ी और प्रतिष्ठित कंपनियों के साथ काम किया है। ब्रैंड बिल्डिंग, मीडिया, कॉरपोरेट कम्युनिकेशन और लीडरशिप में उनकी गहरी समझ मानी जाती है।
अपनी नियुक्ति पर अतुल अग्रवाल ने कहा कि ऐसे समय में ISA का नेतृत्व करना उनके लिए सम्मान की बात है जब मार्केटिंग और मीडिया तेजी से बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सालों में ब्रैंड, कंज्यूमर और टेक्नोलॉजी में आए बदलावों को करीब से देखने के बाद उन्हें लगता है कि विज्ञापनदाताओं की सामूहिक आवाज के रूप में ISA की भूमिका आज पहले से कहीं ज्यादा अहम हो गई है।
उन्होंने आगे कहा कि उनका फोकस पूरे विज्ञापन इकोसिस्टम के साथ मिलकर जिम्मेदार, असरदार और कुशल मार्केटिंग को आगे बढ़ाने पर होगा। इसमें विज्ञापनदाता, एजेंसियां, ब्रॉडकास्टर्स, मीडिया ओनर्स और अन्य सभी स्टेकहोल्डर्स शामिल होंगे। साथ ही मीडिया ट्रांसपेरेंसी और मेजरमेंट जैसे मुद्दों पर ISA के काम को और मजबूत किया जाएगा।
IIM अहमदाबाद से मैनेजमेंट की पढ़ाई कर चुके अतुल अग्रवाल ने FMCG और कॉरपोरेट सेक्टर में लंबा अनुभव हासिल किया है। उन्होंने हिन्दुस्तान लीवर और टाटा ग्रुप के हेडक्वार्टर में काम किया है, जहां वह कॉरपोरेट ब्रैंड मार्केटिंग, यूथ एंगेजमेंट, मीडिया बाइंग और बड़े स्पॉन्सरशिप प्रोग्राम्स से जुड़े रहे।
वह टाटा सर्विसेज का प्रतिनिधित्व करते हुए ISA की एग्जिक्यूटिव कमेटी का हिस्सा भी रह चुके हैं। इसके अलावा, वह वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ ऐडवर्टाइजर्स में 'ग्लोबल मार्केटर ऑफ द ईयर अवॉर्ड' की जूरी का हिस्सा भी रह चुके हैं।
ISA के चेयरमैन सुनील कटारिया ने कहा कि अतुल अग्रवाल की नियुक्ति ऐसे अहम समय पर हुई है जब इंडस्ट्री एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि टाटा ग्रुप और हिन्दुस्तान लीवर में अतुल का लीडरशिप अनुभव और ISA से उनका पुराना जुड़ाव संस्था को मजबूत और पारदर्शी इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स बनाने, विज्ञापनदाताओं को बेहतर सपोर्ट देने और विज्ञापन को ज्यादा असरदार बनाने में मदद करेगा।
ओगिल्वी इंडिया (Ogilvy India) ने मुंबई ऑफिस में विज्ञापन जगत के दिग्गज पीयूष पांडेय को सम्मान देते हुए उन्हें खास श्रद्धांजलि दी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ओगिल्वी इंडिया (Ogilvy India) ने अपने कामकाजी साल 2026 की शुरुआत एक खास और भावुक पल के साथ की। कंपनी ने मुंबई ऑफिस में विज्ञापन जगत के दिग्गज पीयूष पांडेय को सम्मान देते हुए उन्हें खास श्रद्धांजलि दी। इस मौके की जानकारी ओगिल्वी इंडिया के चीफ क्रिएटिव ऑफिसर हर्षद राजाध्यक्ष ने एक भावुक लिंक्डइन पोस्ट के जरिए साझा की।
हर्षद राजाध्यक्ष ने कहा कि ओगिल्वी ने नए साल की शुरुआत पीयूष पांडेय के आशीर्वाद के साथ की है। उन्होंने बताया कि पीयूष पांडेय की मौजूदगी और उनके शब्द आज ही नहीं बल्कि आने वाले कई सालों तक ओगिल्वी में काम करने वाले हर व्यक्ति को प्रेरणा देते रहेंगे।
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि पीयूष पांडेय की एक खास तस्वीर, जिसे सुरेश नटराजन ने कैमरे में कैद किया है, अब ओगिल्वी के मुंबई ऑफिस के एंट्री एरिया में स्थायी रूप से लगाई गई है। इस तस्वीर के साथ पीयूष पांडेय की सबसे मशहूर और यादगार सलाह भी लिखी गई है, जिसने पीढ़ियों से क्रिएटिव लोगों को रास्ता दिखाया है।
इस खास तस्वीर का अनावरण ओगिल्वी के अलग-अलग विभागों से आए सबसे युवा टीम मेंबर्स ने किया। कंपनी का कहना है कि पीयूष पांडेय की यह मौजूदगी ओगिल्वी में कदम रखने वाले हर शख्स को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।
अब सलमान खान कोटा की उपभोक्ता अदालत के आदेश पर फिर से कोर्ट का सामना करने वाले हैं। कोटा जिला उपभोक्ता आयोग ने उन्हें 20 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान और राजस्थान का रिश्ता एक बार फिर कानूनी सुर्खियों में आ गया है। हिरण शिकार मामले के बाद अब सलमान खान कोटा की उपभोक्ता अदालत के आदेश पर फिर से कोर्ट का सामना करने वाले हैं। कोटा जिला उपभोक्ता आयोग ने उन्हें 20 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।
यह मामला राजश्री पान मसाला के एक विज्ञापन से जुड़ा है, जिसमें सलमान खान के हलफनामे और उस पर किए गए हस्ताक्षरों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। अदालत ने सलमान खान को निर्देश दिया है कि वे कोर्ट में आकर अपने हस्ताक्षरों के सैंपल दें, ताकि यह साफ हो सके कि उनके जवाब और हलफनामे पर किए गए साइन असली हैं या नहीं।
हस्ताक्षरों पर उठे सवाल
यह याचिका एडवोकेट इंदरमोहन सिंह हनी की ओर से दायर की गई थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि सलमान खान की तरफ से कोर्ट में जो जवाब दाखिल किया गया है, उस पर किए गए हस्ताक्षर उनके पुराने रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते। उनका कहना है कि ये साइन जोधपुर जेल रिकॉर्ड और अन्य मामलों में मौजूद हस्ताक्षरों से अलग दिखाई देते हैं।
इस दलील के बाद कोर्ट ने पहले हस्ताक्षरों की फोरेंसिक जांच के आदेश दिए और अब सलमान खान को खुद अदालत में हाजिर होकर साइन देने को कहा है। इस मामले में अगली सुनवाई 20 जनवरी को होगी।
क्या है पूरा मामला
सलमान खान के खिलाफ कोटा की उपभोक्ता अदालत में राजश्री पान मसाला के कथित भ्रामक विज्ञापन को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस विज्ञापन के जरिए युवाओं को गुमराह किया गया और उनके स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया गया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि विज्ञापन में यह दावा किया गया कि पान मसाले में केसर मौजूद है, जबकि केसर की कीमत काफी ज्यादा होती है और इतने सस्ते उत्पाद में केसर होने का दावा भ्रामक लगता है।
सलमान खान का पक्ष
सलमान खान की ओर से अदालत में जवाब दाखिल किया गया है, जिसमें कहा गया है कि उन्होंने केवल चांदी से कोटेड इलायची का प्रचार किया था, न कि तंबाकू या गुटखे वाले किसी उत्पाद का। उनके वकील ने यह भी तर्क दिया है कि इस मामले की सुनवाई उपभोक्ता अदालत के बजाय केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण के दायरे में आती है।
हालांकि, हस्ताक्षरों को लेकर उठे विवाद के बाद अब कोर्ट ने सलमान खान की व्यक्तिगत मौजूदगी जरूरी मानते हुए उन्हें तलब किया है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि ऐडवर्टाइजिंग एजेंसियों को मीडिया फर्मों से मिलने वाले इंसेंटिव पर सर्विस टैक्स नहीं लगेगा, भले ही यह टारगेट या रेवेन्यू बेंचमार्क पूरा करने पर दिया गया हो।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि ऐडवर्टाइजिंग एजेंसियों को मीडिया फर्मों से मिलने वाले इंसेंटिव पर सर्विस टैक्स नहीं लगेगा, भले ही यह टारगेट या रेवेन्यू बेंचमार्क पूरा करने पर दिया गया हो।
'लाइवलॉ' की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली हाई कोर्ट ने “Principal Commissioner Of CGST & Central Excise Delhi IV v. M/s Nexus Alliance Advertising And Marketing Pvt Ltd” केस में यह फैसला सुनाया है।
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस शैल जैन की बेंच ने कहा कि एजेंसी मुख्य रूप से अपने क्लाइंट्स की ओर से मीडिया में स्लॉट और जगह बुक करती है और मीडिया हाउस को कोई अतिरिक्त सर्विस नहीं देती। एजेंसी केवल क्लाइंट द्वारा अप्रूव किए गए ऐडवर्टाइजिंग प्लान के अनुसार काम करती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टारगेट हासिल करना पहले से दी जा रही सर्विस का हिस्सा है, इसलिए इंसेंटिव पर सर्विस टैक्स नहीं लगेगा, क्योंकि यह केवल बिजनेस सपोर्ट सर्विस है।
GST विभाग ने तर्क दिया कि इंसेंटिव मीडिया मालिकों के बिजनेस को प्रमोट करने जैसा है और यह टैक्सेबल सर्विस के तहत आता है। लेकिन कोर्ट ने माना कि एजेंसी कोई नया काम नहीं कर रही और न ही किसी खास काम से बच रही है। एजेंसी सिर्फ अपने क्लाइंट के लिए सेवा दे रही है, मीडिया हाउस के लिए नहीं।
इस तरह, हाईकोर्ट ने विभाग की अपील खारिज कर दी और Nexus Alliance Advertising & Marketing Pvt Ltd को राहत दी।
हरियाणा सरकार ने 2022 के Municipal Advertisement Bye-laws में बदलाव करते हुए आउटडोर (Outdoor) विज्ञापन के लिए नए, कड़े नियम लागू किए हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
हरियाणा सरकार ने 2022 के Municipal Advertisement Bye-laws में बदलाव करते हुए आउटडोर (Outdoor) विज्ञापन के लिए नए, कड़े नियम लागू किए हैं। ये नए नियम 18 दिसंबर 2025 को आधिकारिक रूप से अधिसूचित किए गए और राज्य के सभी शहरी क्षेत्रों में विज्ञापनों पर नियंत्रण और पारदर्शिता बढ़ाने का काम करेंगे।
'हिन्दुस्तान टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी अधिकारियों के अनुसार, नए नियमों में आउटडोर मीडिया डिवाइसेज (OMDs) की स्पष्ट परिभाषा दी गई है और “OMD क्लस्टर” जैसी नई श्रेणियां जोड़ी गई हैं ताकि ऑक्शन प्रक्रिया में किसी प्रकार की अस्पष्टता न रहे। अब नगरपालिकाएं विज्ञापन साइट्स की न्यूनतम कीमत (Reserve Price) तय करेंगी ताकि कम कीमत पर ऑक्शन न हो और राजस्व की हानि न हो।
एलिजिब्लिटी यानी पात्रता भी कड़ी कर दी गई है। केवल वही रजिस्टर्ड संस्थाएं ऑक्शन में भाग ले सकेंगी जिनकी रजिस्ट्रेशन कम से कम छह महीने वैध हो। यह कदम विज्ञापन देने वालों की जवाबदेही बढ़ाने के लिए उठाया गया है, जैसा कि हरियाणा सरकार के अर्बन लोकल बॉडीज विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण कुमार गुप्ता ने बताया।
रिपोर्ट में बताया गया है कि ये नए नियम डिजिटल प्रक्रिया को भी बढ़ावा देते हैं। अब नगरपालिकाओं को आवेदन के अप्रूवल या रिजेक्शन की जानकारी 30 दिन के अंदर ऑनलाइन देनी होगी और मंजूर साइट्स को तीन दिन के भीतर ऑनलाइन पोर्टल पर सूचीबद्ध करना होगा। इसके अलावा, Earnest Money Deposit (EMD) 10% तय की गई है, जो ऑक्शन में सफल होने पर रखी जाएगी, और अगर कोई सफल बोलीदाता बाद में पीछे हटता है तो यह राशि जब्त हो सकती है।
ऑक्शन प्रक्रिया भी कड़ी कर दी गई है। ऑक्शन शेड्यूल करने के लिए कम से कम तीन अलग-अलग बोलीदाता होना जरूरी है। अगर दो बार लगातार ऑक्शन में यह संख्या नहीं मिलती, तब भी केवल दो या एक बोलीदाता की अनुमति दी जा सकती है।
अधिकारी बताते हैं कि अब अनधिकृत विज्ञापन और उनके ढांचे को तुरंत हटाने और “जैसा है, वहीं” निपटाने का अधिकार नगरपालिकाओं को दिया गया है। नए नियमों में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों, शहर की प्रमुख सड़कों पर विज्ञापनों की दूरी और जगह तय करने के विस्तृत निर्देश भी शामिल हैं। विज्ञापन Right of Way या Traffic Intersections के पास नहीं लगाए जा सकते।
डिजिटल विज्ञापनों पर भी कड़ा नियंत्रण रखा गया है। LED, LCD और 3D स्क्रीन केवल चुनिंदा सार्वजनिक स्थानों और मार्केट एरिया में लगाई जा सकेंगी। इन्हें चलती ट्रैफिक की दिशा में नहीं रखा जा सकेगा और केवल Static Display दिखा सकेंगे, जो ट्रैफिक सिग्नल के हिसाब से सिंक्रोनाइज होगा।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि ये नए नियम शहरों जैसे गुरुग्राम में लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को खत्म करने और शहरी सौंदर्य बनाए रखने में मदद करेंगे।
DS Group के राजीव जैन ने बताया कि यूट्यूब, सोशल मीडिया और ओटीटी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के तेजी से बढ़ने के बावजूद ब्रैंड्स आज भी टीवी न्यूज में बड़े पैमाने पर निवेश क्यों कर रहे हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एक्सचेंज4मीडिया की मेजबानी में हुए NewsNext 2025 के 14वें संस्करण में मीडिया इंडस्ट्री का एक सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला सवाल सामने आया। सवाल था, क्या डिजिटल-फर्स्ट दौर में टीवी न्यूज आज भी विज्ञापनदाताओं के लिए उतना ही अहम है? इस सवाल का जवाब पूरे भरोसे और ठोस तर्कों के साथ सामने आया और वह जवाब था, हां।
BW बिजनेसवर्ल्ड और एक्सचेंज4मीडिया के सीनियर एडिटर रुहैल अमीन के साथ हुई एक सार्थक बातचीत में DS Group में कॉरपोरेट मार्केटिंग के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट राजीव जैन ने बताया कि यूट्यूब, सोशल मीडिया और ओटीटी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के तेजी से बढ़ने के बावजूद ब्रैंड्स आज भी टीवी न्यूज में बड़े पैमाने पर निवेश क्यों कर रहे हैं।
टीवी न्यूज: खत्म नहीं हो रहा, बस बदल रहा है
बातचीत की शुरुआत में राजीव जैन ने उस आम धारणा पर बात की कि टीवी न्यूज खत्म हो रहा है। उन्होंने माना कि खासकर कोविड के बाद उपभोक्ताओं का व्यवहार तेजी से बदला है, लेकिन उनका कहना था कि आज न्यूज देखने का तरीका सिंगल प्लेटफॉर्म नहीं बल्कि मल्टी-स्क्रीन हो गया है।
उन्होंने कहा, 'आज खबरें हर जगह देखी जा रही हैं, मोबाइल फोन पर, लैपटॉप पर, टीवी पर और यहां तक कि कनेक्टेड टीवी यानी CTV पर भी। हर स्क्रीन की अपनी भूमिका है।' राजीव जैन ने बताया कि दिन के समय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर हल्की-फुल्की खपत ज्यादा होती है, लेकिन शाम के समय जब लोग रिलैक्स होते हैं, तब टीवी सबसे ज्यादा ध्यान खींचता है। इसी समय लोग गहराई से खबरें, विश्लेषण और संदर्भ देखना चाहते हैं। उनके मुताबिक, यहीं टीवी न्यूज आज भी मजबूत बना हुआ है क्योंकि यह मोबाइल नोटिफिकेशन के मुकाबले ज्यादा विस्तार, नजरिया और असरदार अनुभव देता है।
मार्केटिंग के नजरिये से बात करते हुए जैन ने कहा कि विज्ञापन सिर्फ ब्रैंड दिखाने तक सीमित नहीं होता। उन्होंने कहा, 'ब्रैंड दिखाना तो बस शुरुआत है। असली काम भरोसा बनाना, सोच में जगह बनाना और आखिर में बायर्स तक पहुंचाना होता है।' उनके मुताबिक बड़े स्क्रीन वाला टेलीविजन इस भावनात्मक और इंद्रिय अनुभव को बनाने में अहम भूमिका निभाता है, जो छोटे स्क्रीन पर उतना आसान नहीं होता।
आंकड़े भी कहते हैं अपनी कहानी
राजीव जैन ने माना कि डिजिटल विज्ञापन तेजी से बढ़ रहा है और 2025 की शुरुआत तक भारत में डिजिटल एड खर्च करीब 50,000 से 55,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जो टीवी और प्रिंट दोनों को मिलाकर भी ज्यादा है। लेकिन उन्होंने साफ कहा कि पहुंच और असर, ये दोनों अलग-अलग बातें हैं।
करीब 90 करोड़ टीवी दर्शकों के साथ टेलीविजन आज भी सबसे बड़ा पैमाना देता है। Pulse Candy, Catch Spices, Pass Pass, Silver Pulse, डेयरी प्रोडक्ट्स और लग्जरी रिटेल जैसे अलग-अलग ब्रैंड्स वाले DS Group के लिए टीवी न्यूज आज भी ब्रैंड की कहानी कहने का एक बेहद ताकतवर मंच है।
न्यूज को 'पुरुष प्रधान' जॉनर मानने की सोच पर बात करते हुए जैन ने कहा कि भले ही न्यूज देखने वालों में पुरुषों की संख्या थोड़ी ज्यादा हो, लेकिन भारत में एक टीवी वाले घरों की संस्कृति के कारण पूरा परिवार साथ बैठकर टीवी देखता है। महिलाएं भले ही जीईसी या फिल्में ज्यादा पसंद करें, लेकिन न्यूज के दौरान आने वाले विज्ञापन तक उनकी पहुंच भी उतनी ही होती है। इसी वजह से टीवी न्यूज दोनों जेंडर के लिए प्रासंगिक बना रहता है। DS Group के लिए इसका मतलब है कि जेन Z से लेकर गृहिणियों तक, सभी को ध्यान में रखकर न्यूज चैनलों पर रणनीतिक प्लेसमेंट किया जाता है।
CTV: जहां भविष्य दिखाई देता है
इस सत्र का सबसे दिलचस्प हिस्सा तब आया जब राजीव जैन ने कनेक्टेड टीवी यानी CTV पर बात की। उन्होंने इसे डिजिटल और टेलीविजन का बेहतरीन मेल बताया।
उन्होंने कहा, 'CTV मुझे दोनों दुनिया का फायदा देता है, डिजिटल जैसी सटीक टारगेटिंग और बड़े स्क्रीन का असर।' जहां एक तरफ लीनियर टीवी आज भी बड़े स्तर पर पहुंच देता है, वहीं CTV तेजी से एक ऐसा माध्यम बन रहा है जिसमें कम बर्बादी और ज्यादा असर है, खासकर उन उपभोक्ता वर्गों के लिए जो साफ तौर पर तय हैं। जैन ने माना कि CTV में अभी मापन और स्केल से जुड़ी चुनौतियां हैं, लेकिन इसकी ग्रोथ की रफ्तार को नकारा नहीं जा सकता।
भीड़ से ज्यादा कंटेंट जरूरी
कंटेंट की भरमार वाले इस दौर में राजीव जैन ने कहा कि दर्शक अक्सर विज्ञापन देखना नहीं चाहते, लेकिन कंटेंट देखना हमेशा चाहते हैं। इसलिए ब्रैंड्स के लिए सबसे समझदारी भरा तरीका यह है कि वे अपने ब्रैंड को जबरदस्ती अलग से न दिखाएं, बल्कि उसे उसी शो, बहस या कवरेज का हिस्सा बना दें जिसे दर्शक पहले से ध्यान से देख रहा है। इससे दर्शक को विज्ञापन अलग से खटकता नहीं है और ब्रैंड की मौजूदगी स्वाभाविक लगती है।
उन्होंने DS Group के एक पोर्टफोलियो विज्ञापन का उदाहरण दिया, जो सिर्फ न्यूज चैनलों पर दिखाया गया था। यह विज्ञापन दूसरे जॉनर्स में नहीं चलाया गया, फिर भी इसने शानदार रिकॉल और मजबूत ब्रैंड लिफ्ट दी। इससे यह साबित हुआ कि विज्ञापन के लिए न्यूज एक भरोसेमंद और असरदार माहौल देता है।
हिंदी और अंग्रेजी न्यूज को लेकर चलने वाली बहस पर जैन ने साफ कहा कि भाषा दर्शकों के हिसाब से तय होती है। भारत की बड़ी ग्रामीण आबादी और टियर-2 व टियर-3 शहरों के दर्शक स्थानीय और हिंदी भाषाओं में ज्यादा सहज हैं। इसी वजह से हिंदी और रीजनल न्यूज चैनलों को विज्ञापन बजट का बड़ा हिस्सा मिल रहा है। अंग्रेजी न्यूज का अपना प्रभाव है, लेकिन उसका दर्शक वर्ग सीमित है।
टीवी न्यूज विज्ञापन का आगे का रास्ता
आगे की तस्वीर पर बात करते हुए राजीव जैन ने कहा कि आने वाले समय में टीवी से अचानक दूरी नहीं बनेगी, बल्कि मीडिया मिक्स संतुलित रहेगा। बजट का झुकाव धीरे-धीरे CTV और डिजिटल की ओर बढ़ सकता है, लेकिन लीनियर टीवी अतिरिक्त पहुंच देने में अपनी अहम भूमिका निभाता रहेगा। उन्होंने कहा, 'हिस्सेदारी बदलेगी, लेकिन हर माध्यम अपनी वैल्यू जोड़ता है।'
उन्होंने यह कहते हुए बात खत्म की कि ब्रैंड्स मोबाइल, लीनियर टीवी और CTV तीनों में निवेश करते रहेंगे और हर प्लेटफॉर्म को उसकी खास ताकत के हिसाब से इस्तेमाल करेंगे।
सत्र के अंत में एक बात बिल्कुल साफ थी। टीवी न्यूज खत्म नहीं हो रहा है, बल्कि खुद को ढाल रहा है, बदल रहा है और आज भी विज्ञापन जगत का ध्यान खींच रहा है। और CTV के उभरने के साथ, न्यूज विज्ञापन का भविष्य बिल्कुल भी उबाऊ नहीं दिखता।
राज्यसभा में इस हफ्ते तंबाकू और शराब कंपनियों के विज्ञापनों पर फिर सवाल उठे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
राज्यसभा में इस हफ्ते तंबाकू और शराब कंपनियों के विज्ञापनों पर फिर सवाल उठे। कई सांसदों ने कहा कि ये कंपनियां सरकारी नियमों से बचने के लिए 'सरोगेट ऐड' यानी नकली ब्रैंड प्रमोशन और सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट का इस्तेमाल करती हैं। सांसदों ने सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की ताकि ऐसे भ्रामक प्रचार पर रोक लग सके।
यह चर्चा सेंट्रल एक्साइज (एमेंडमेंट) बिल, 2025 पर हुई, जिसमें सिगरेट, च्यूइंग तंबाकू जैसे प्रॉडक्ट्स पर टैक्स ढांचे में बड़े बदलाव का प्रस्ताव है। लेकिन चर्चा के दौरान सांसदों ने विज्ञापन पर पकड़ ढीली होने की बात उठाई।
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सांसदों ने कहा कि तंबाकू और शराब कंपनियां नियमों को दरकिनार करने के लिए बोतलबंद पानी, म्यूजिक स्टूडियो, इवेंट्स या फेस्टिवल स्पॉन्सरशिप जैसे तरीकों का इस्तेमाल करती हैं। सीधे प्रॉडक्ट का नाम नहीं आता, लेकिन असल मकसद प्रमोशन ही होता है, जिससे लोग भ्रमित होते हैं और स्वास्थ्य संबंधी नियम कमजोर पड़ जाते हैं।
बीजेपी सांसद संजय सेठ ने कहा कि ऐसे सरोगेट ऐड बिल्कुल बंद कर दिए जाने चाहिए। वहीं बीएसपी के रामजी लाल सुमन और कुछ अन्य सांसदों ने मांग की कि फिल्म सितारों और मशहूर हस्तियों को भी ऐसे नुकसानदायक प्रॉडक्ट्स से जुड़े किसी भी तरह के प्रचार में हिस्सा नहीं लेना चाहिए। कुछ सदस्यों ने टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कैंसर जागरुकता संदेश और ज्यादा बढ़ाने की भी बात कही।
हालांकि यह बिल मुख्य रूप से टैक्स स्ट्रक्चर पर केंद्रित है, लेकिन सांसदों ने इसे मौका बनाकर मार्केटिंग और प्रमोशन के नियम कड़े करने की जरूरत पर जोर दिया। सरकार की तरफ से अभी यह साफ नहीं किया गया है कि वह विज्ञापन नियमों में कोई बदलाव करेगी या नहीं, लेकिन राज्यसभा की तीखी टिप्पणियां दिखाती हैं कि दोनों तरह के विज्ञापनों (सीधे और परोक्ष) पर रोक लगाने के लिए राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है।
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों ने सबसे ज्यादा भरोसा टीवी पर जताया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों ने सबसे ज्यादा भरोसा टीवी पर जताया। AdEx India (TAM Media Research) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, 1 सितंबर से 11 नवंबर 2025 के बीच हुए कुल चुनावी विज्ञापनों में 86% विज्ञापन टीवी पर चले, जबकि प्रिंट का हिस्सा सिर्फ 14% रहा। चुनाव 6 नवंबर से 11 नवंबर 2025 के बीच हुए थे।
रिपोर्ट में बताया गया है कि कुल विज्ञापन प्लेसमेंट में सबसे आगे भाजपा रही। टीवी और प्रिंट दोनों मिलाकर भाजपा का हिस्सा 54.2% रहा। इसके बाद आरजेडी 27.6% पर दूसरे नंबर पर रही। एनडीए का हिस्सा 6.1% और कांग्रेस का 2.5% रहा।
टीवी विज्ञापनों की बात करें तो भाजपा ने यहां भी बढ़त बनाए रखी। टीवी पर भाजपा की हिस्सेदारी 68.5% रही, जबकि आरजेडी ने 31.5% हिस्सेदारी ली। आम आदमी पार्टी का हिस्सा 0.1% और जन सुराज का 0% दर्ज किया गया।
प्रिंट मीडिया में एनडीए का दबदबा दिखा। प्रिंट में एनडीए की हिस्सेदारी 43.6% रही। इसके बाद कांग्रेस 18.1% पर रही। भाजपा का हिस्सा 10.3%, जन सुराज का 6.7% और जदयू का 4.6% दर्ज किया गया। बाकी 10 अन्य विज्ञापनदाताओं का कुल मिलाकर हिस्सा 16.7% रहा।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तस्वीर और भी साफ दिखी। यहां भाजपा ने 94.2% की भारी बढ़त के साथ बाजी मारी। इसके बाद आरजेडी 2.2% पर, कांग्रेस 2.1% पर और जदयू 1.1% पर रहे। जन सुराज का हिस्सा 0.09% दर्ज हुआ। इंडियन नेशनल कांग्रेस का योगदान 0.2% और आम आदमी पार्टी का 0.02% रहा।
शहूर क्रिएटिव लीडर, गीतकार और विज्ञापन जगत के दिग्गज प्रसून जोशी को AAAI लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड 2025 से सम्मानित किया जाएगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इंडियन ऐडवरटाइजिंग इंडस्ट्री के बड़े संगठन, ऐडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) ने आज घोषणा की है कि मशहूर क्रिएटिव लीडर, गीतकार और विज्ञापन जगत के दिग्गज प्रसून जोशी को AAAI लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड 2025 से सम्मानित किया जाएगा। यह अवॉर्ड इंडस्ट्री का सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है और 1988 से हर साल उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने विज्ञापन जगत में लंबे समय तक बेहतरीन योगदान दिया है।
प्रसून जोशी इस समय McCann Worldgroup India के CEO और CCO हैं और साथ ही एशिया पैसिफिक रीजन के चेयरमैन भी हैं। करीब 30 साल से वे इंडियन ऐडवरटाइजिंग के चेहरों में शामिल रहे हैं। उनकी क्रिएटिविटी भारतीय संस्कृति, भावनाओं और मौलिकता पर आधारित होती है जिसकी वजह से भारतीय विज्ञापन की पहचान दुनिया भर में मजबूत हुई है।
विज्ञापन की दुनिया के अलावा, फिल्म इंडस्ट्री में भी उनके गीत और पटकथाएं कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड जीत चुकी हैं। वह इस इंडस्ट्री के सबसे कम उम्र के लोगों में से एक हैं जिन्हें पद्मश्री सम्मान मिला है।
AAAI के प्रेजिडेंट श्रीनिवासन के स्वामी ने कहा, "प्रसून जोशी हमारे समय के सबसे प्रेरणादायक क्रिएटिव व्यक्तियों में से एक हैं। भावनाओं, सांस्कृतिक समझ और गहरी सोच को कहानी में पिरोने की उनकी कला ने भारत के विज्ञापनों की पहचान वैश्विक स्तर पर बढ़ाई है।"
अवॉर्ड कमेटी के चेयरमैन जयदीप गांधी ने कहा, "प्रसून जोशी की यात्रा दिखाती है कि ईमानदार क्रिएटिविटी और मजबूत आइडियाज कैसे फर्क पैदा कर सकते हैं। कमेटी ने एकमत होकर उन्हें इस सम्मान के लिए चुना है।"
यह अवॉर्ड एक खास कार्यक्रम में आने वाले कुछ हफ्तों में दिया जाएगा।
AAAI यह अवॉर्ड उन लोगों को देता है जो कम से कम 25 साल तक विज्ञापन की दुनिया में सक्रिय रहे हों, टॉप मैनेजमेंट में रहे हों, इंडस्ट्री के विकास में अहम भूमिका निभाई हो और अपने काम से समाज के लिए भी कुछ खास किया हो।
इस सम्मान को पाने वालों में पहले भी कई दिग्गज शामिल रहे हैं- जैसे पीयूष पांडे, ऐलिक पदमसी, शशि सिन्हा, मधुकर कामथ, सैम बलसारा, विक्रम सक्सेना और कई अन्य।
1945 में बनी AAAI देश की प्रमुख विज्ञापन एजेंसी संस्था है जो इंडस्ट्री के विकास, प्रोफेशनल मानकों और एजेंसियों के हितों की रक्षा के लिए काम करती है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद के हालिया टीवी विज्ञापन पर सवाल उठाया है, जिसमें बाकी कंपनियों के च्यवनप्राश उत्पादों को लेकर विवादित टिप्पणी की गई थी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिल्ली हाई कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद के हालिया टीवी विज्ञापन पर सवाल उठाया है, जिसमें बाकी कंपनियों के च्यवनप्राश प्रॉडक्टों को लेकर विवादित टिप्पणी की गई थी। अदालत ने कहा कि कोई भी ब्रैंड अपने प्रॉडक्ट की गुणवत्ता को बेहतर बता सकता है, लेकिन इस आधार पर दूसरों को “धोखा” कहना अनुचित और अपमानजनक है।
न्यायमूर्ति तेजस कारिया ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि “धोखा” शब्द अत्यधिक नकारात्मक अर्थ रखता है और इससे पूरा च्यवनप्राश उद्योग बदनाम होता है। अदालत ने कहा कि किसी प्रॉडक्ट की तुलना करते समय ऐसी भाषा नहीं अपनाई जानी चाहिए जो अन्य कंपनियों को अपराधी या भ्रामक बताती हो।
यह मामला डाबर इंडिया लिमिटेड द्वारा दायर की गई याचिका से जुड़ा है, जिसमें कंपनी ने पतंजलि के नए टीवी विज्ञापन पर रोक लगाने की मांग की है। डाबर का कहना है कि विज्ञापन में बाकी सभी च्यवनप्राश ब्रैंड्स को “धोखा” बताकर उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया गया है।
डाबर की याचिका के अनुसार, विज्ञापन में योगगुरु बाबा रामदेव यह कहते हुए नजर आते हैं कि “ज्यादातर लोग च्यवनप्राश के नाम पर ठगे जा रहे हैं” और केवल पतंजलि का प्रॉडक्ट ही “सच्चे आयुर्वेद की शक्ति” देता है। कंपनी का कहना है कि यह दावा पूरे उद्योग के प्रति अविश्वास पैदा करता है और च्यवनप्राश के अन्य प्रॉडक्ट्स की छवि को ठेस पहुंचाता है।
डाबर के वरिष्ठ वकील संदीप सेठी ने दलील दी कि च्यवनप्राश एक मान्य आयुर्वेदिक औषधि है, जो ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत निर्धारित मानकों के अनुसार बनाई जाती है। ऐसे में सभी निर्माताओं को धोखा कहना कानूनी रूप से अनुचित है और पूरे उद्योग की साख को प्रभावित करता है।
वहीं पतंजलि की ओर से वरिष्ठ वकील राजीव नायर ने कहा कि विज्ञापन का उद्देश्य किसी ब्रैंड को नीचा दिखाना नहीं था, बल्कि अपने प्रॉडक्ट की विशिष्टता को दर्शाना था। उन्होंने तर्क दिया कि “धोखा” शब्द का प्रयोग संदर्भानुसार किया गया है और इसे शाब्दिक अर्थ में नहीं लिया जाना चाहिए।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डाबर की अंतरिम याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया है।
चांगलांग जिले में मंगलवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में नई अरुणाचल प्रदेश प्रिंट और डिजिटल मीडिया विज्ञापन नीति, 2025 को मंजूरी दी गई।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
चांगलांग जिले में मंगलवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में नई अरुणाचल प्रदेश प्रिंट और डिजिटल मीडिया विज्ञापन नीति, 2025 को मंजूरी दी गई।
इस नीति के तहत अब सरकार के विज्ञापनों का प्रबंधन पहले की तरह अलग-अलग नीतियों के बजाय एक ही साझा ढांचे में किया जाएगा। पहले प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए अलग-अलग नीतियां थीं।
नई नीति अब राज्य सरकार के सभी विभागों और राज्य सार्वजनिक उपक्रमों के लिए एकमात्र ढांचा होगी। इसके मुख्य उद्देश्य हैं: विज्ञापन फंड का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना, मीडिया आउटलेट्स के लिए पारदर्शी और कुशल सिंगल-विंडो सिस्टम बनाना और मीडिया हाउसेस के चयन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करना।
यह नीति विज्ञापन नीति, 2018 और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विज्ञापन नीति, 2020 की जगह लेती है, और प्रिंट व डिजिटल मीडिया दोनों के लिए एक व्यापक ढांचा पेश करती है।
अब सभी सरकारी विज्ञापन केवल सूचना और जनसंपर्क निदेशालय (DIPR) के माध्यम से ही किए जाएंगे, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
नीति में सभी पंजीकृत स्थानीय मीडिया के लिए तय विज्ञापन दरें तय की गई हैं और स्थानीय व राज्य-आधारित मीडिया हाउसेस के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण के अनुरूप राज्य के मीडिया इकोसिस्टम को मजबूत करेगा।
APC और APUWJ ने नई मीडिया नीति की सराहना की
अरुणाचल प्रेस क्लब (APC) और अरुणाचल प्रदेश कार्यरत पत्रकार संघ (APUWJ) ने राज्य सरकार की इस नई नीति को एक प्रगतिशील सुधार बताया है। उनका कहना है कि यह नीति सरकारी विज्ञापन वितरण में पारदर्शिता, जवाबदेही और स्थिरता को मजबूत करेगी।
APC और APUWJ ने एक संयुक्त बयान में कहा कि यह नीति “राज्य के मीडिया इकोसिस्टम के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर” है। साथ ही यह स्थानीय मीडिया हाउसेस और पत्रकारों को सशक्त बनाने के सरकार के संकल्प को दर्शाती है, जो सार्वजनिक जागरूकता और लोकतांत्रिक जवाबदेही में अहम भूमिका निभाते हैं।
बयान में कहा गया, “यह एकीकृत नीति अरुणाचल प्रदेश में पारंपरिक और उभरते डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स दोनों के लिए समान अवसर प्रदान करती है। यह राज्य-आधारित मीडिया के योगदान को मान्यता देती है और सुनिश्चित करती है कि जनसंपर्क पेशेवर और लोगों-केंद्रित रहे।”
पत्रकार संगठनों ने मुख्यमंत्री पेमा खांडू को प्रेस जगत के प्रति निरंतर समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही सूचना और जनसंपर्क मंत्री न्याटो डुकाम, पूर्व मंत्री बामांग फेलिक्स, IPR सचिव न्याली एटे, निदेशक गिज़ुम टाली और उप-निदेशक डेन्गा बेंगिया को नीति को तैयार करने और अंतिम रूप देने में उनके अहम योगदान के लिए धन्यवाद किया।