ASCI ने जताई उम्मीद, भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ काफी कारगर होगा सरकार का ये कदम

विज्ञापनों की प्रमाणिकता की जांच करने वाली संस्था 'ऐडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 का स्वागत किया है।

Last Modified:
Saturday, 18 July, 2020
ASCI

विज्ञापनों की प्रमाणिकता की जांच करने वाली संस्था 'ऐडवर्टाइजिंग स्‍टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' (ASCI) ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 (Consumer Protection Act 2019) का स्वागत किया है। यह अधिनियम 20 जुलाई से लागू होगा और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 की जगह लेगा।

ASCI ने उम्मीद जताई है कि नए अधिनियम से भ्रामक विज्ञापनों पर महत्वपूर्ण असर पड़ेगा, जो दिनों काफी छाये हुए हैं। ASCI ने कहा कि इसकी भूमिका सरकार की पूरक होगी और जिम्मेदार विज्ञापनों को बढ़ावा देने में मदद करेगी।   

'ऐडवर्टाइजिंग स्‍टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' के चेयरमैन रोहित गुप्ता का कहना है, ’20 जुलाई 2020 से अस्तित्व में आने वाले कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट का ASCI स्वागत करती है। विज्ञापन के स्व-नियामक निकाय के रूप में हमारे प्रयास, उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए भी हैं। हमें उम्मीद है कि इस एक्ट से भ्रामक विज्ञापनों के नियंत्रण की दिशा में काफी प्रभाव पड़ेगा।’

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा, ‘प्रिंट और टीवी पर निगरानी के अलावा हम जल्द ही डिजिटल मीडिया पर दिखने वाले संभावित भ्रामक विज्ञापनों की निगरानी शुरू करेंगे।’ बता दें कि इस अधिनियम के अधिकांश प्रावधान 20 जुलाई से प्रभावी होंगे। इस नए अधिनियम के तहत कंज्यूमर्स अपनी शिकायतों को उस जिला अथवा राज्य उपभोक्ता आयुक्त के यहां दर्ज करा सकते हैं, जहां वे रहते हैं, बजाय इसके कि जहां से उन्होंने उपरोक्त प्रॉडक्ट/सर्विस खरीदा था।  

इस अधिनियम के प्रावधानों से उपभोक्ताओं को घटिया उत्पाद बेचने के लिए निर्माताओं, विक्रेताओं या वितरकों को अदालत में ले जाने का अधिकार होगा। यह अधिनियम उपभोक्ताओं को नकली या मिलावटी उत्पाद के मुआवजे के लिए फाइल करने की भी अनुमति देता है।

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धोनी के इस IPL विज्ञापन पर शिकायत के बाद लगी रोक, जानें वजह

IPL का यह सीजन महेंद्र सिंह धोनी के लिए अब तक बहुत अच्छा नहीं रहा है। एक तरफ जहां उनकी टीम चेन्नई सुपर किंग्स लगातार शुरुआती तीन मैच हार चुकी है, तो वहीं दूसरी तरफ...

Last Modified:
Friday, 08 April, 2022
Dhoni4545478

इन दिनों भारत में इंडियन प्रीमियर लीग यानि कि आईपीएल (IPL) का क्रेज लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। लेकिन इस बीच आईपीएल का यह सीजन महेंद्र सिंह धोनी के लिए अब तक बहुत अच्छा नहीं रहा है। एक तरफ जहां उनकी टीम चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) लगातार शुरुआती तीन मैच हार चुकी है, तो वहीं दूसरी तरफ उनका एक विज्ञापन विवादों में है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, धोनी ने टूर्नामेंट के लिए एक प्रोमोशनल ऐड (विज्ञापन) बनाया था, जो ब्रॉडकास्टर चैनल पर दिखाया जा रहा था। अब इस प्रोमो के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। यह शिकायत कंज्यूमर यूनिटी एंड ट्रस्ट सोसायटी (CUTS) ने दर्ज कराई है, जोकि एक रोड सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन है। सोसायटी ने अपनी शिकायत में कहा है कि यह विज्ञापन ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन है।

इस प्रोमोशनल ऐड में एमएस धोनी को एक बस ड्राइवर के रूप में दिखाया गया है, जो व्यस्त सड़क के बीच में बस रोक देते हैं। ऐसे में एक ट्रैफिक पुलिसमैन उनके पास आता है और उनसे सवाल करता है। इसके बाद धोनी जवाब में कहते हैं कि वह आईपीएल का सुपर ओवर देख रहे हैं। ट्रैफिक पुलिसकर्मी इसे सामान्य मानता है और चला जाता है।

ASCI ने रोड सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन की इस शिकायत पर संज्ञान लेने के फैसला किया। ASCI ने उपभोक्ता शिकायत समिति (CCC) के सदस्यों ने प्रोमो बनाने वाली कंपनी के साथ इस विज्ञापन को देखा। प्रोमोशनल ऐड देखने के बाद उन्होंने माना कि विज्ञापन में यातायात के नियमों का उल्लंघन किया गया है।

इसके बाद विज्ञापन बनाने वाली कंपनी से कहा गया है कि वो 20 अप्रैल तक इसे हटा दें या फिर इसमें बदलाव करें। वहीं कंपनी ने लिखित रूप में इसे स्वीकार कर लिया और वह इसे वापस लेगी। 

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वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने बताया, कैसे एक परिवार की जागीर बनकर रह गया है श्रीलंका

भारत के खूबसूरत पड़ोसी सिंहल द्वीप से आ रही खबरें चिंता में डालने वाली हैं। हिन्दुस्तान के साथ साझी विरासत बांटने वाले श्रीलंका की अनेक चिंताएं भी भारत के समान हैं।

Last Modified:
Tuesday, 05 April, 2022
china785

राजेश बादल, वरिष्ठ पत्रकार ।।

भारत के लिए चेतावनी हैं श्रीलंका के दुर्दिन

भारत के खूबसूरत पड़ोसी सिंहल द्वीप से आ रही खबरें चिंता में डालने वाली हैं। हिन्दुस्तान के साथ साझी विरासत बांटने वाले श्रीलंका की अनेक चिंताएं भी भारत के समान हैं। फर्क यह है कि भारत की अपनी आंतरिक चुनौतियों और चिंताओं के बीज इसी देश की जमीन में छिपे हैं। लेकिन श्रीलंका में ऐसा नहीं है। वहां एक तीसरे देश चीन ने आराम से रह रहे इस देश के सुखों में आग लगा दी है। 

भले ही तात्कालिक तौर पर श्रीलंका की बदहाली का कारण राजपक्षे - कुनबे की नीतियां दिखाई दे रही हैं, पर हकीकत यही है कि चीन की विस्तारवादी और अपनी वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए दूसरे देशों को ऋण-जाल में फांसने की नीति ने इन राष्ट्रों का कबाड़ा कर दिया है। आज श्रीलंका की तबाही के पीछे चीन के खतरनाक मंसूबे हैं। 

राजपक्षे खानदान ने उसके शिकंजे में उलझकर अपने देश को बर्बादी के कगार पर पहुंचा दिया है। पड़ोसी होने के नाते भारत एक सीमित भूमिका ही निभा सकता है। अंतत: अपना घर तो श्रीलंका को ही ठीक करना होगा।

आज का श्रीलंका असल में एक परिवार की जागीर बनकर रह गया है। राजपक्षे परिवार के जो सदस्य हुकूमत संभाल रहे हैं, उनके बारे में जानेंगे तो दंग रह जाएंगे। गोटबाया राजपक्षे राष्ट्रपति और महिंदा राजपक्षे प्रधानमंत्री हैं। देश के गृह मंत्री सबसे बड़े भाई चमल राजपक्षे और उनका बेटा शाशेन्द्र राजपक्षे कृषि मंत्री हैं। छोटे भाई बासिल राजपक्षे वित्त मंत्नी हैं और नमल राजपक्षे खेल मंत्नालय संभाल रहे हैं। करीब सवा दो करोड़ की आबादी वाले इस देश की धरती में सरकार के लायक प्रतिभाओं का अकाल है। 

कम से कम राजपक्षे परिवार की सरकार में भागीदारी को देखकर तो यही लगता है। महिंदा राजपक्षे लिट्टे का विनाश करने के बाद देश में एक नायक की तरह उभरे थे, लेकिन आज वे खलनायक बन चुके हैं। आम आदमी से लेकर देश के जानकार तक यह मानते हैं कि वित्त और कृषि मंत्रालयों की दुर्दशा के लिए राजपक्षे बंधु ही जिम्मेदार हैं। मगर खुद महिंदा राजपक्षे भी इसके लिए कम दोषी नहीं हैं 

नाकारा मंत्रियों के कारण देश गड्ढे में जाता रहा। कोरोना काल में दोहरी मार पड़ी और इसके बाद चीन का कर्ज चुकाने में श्रीलंका बर्बाद हो गया।  

चीन के कर्ज जाल में उलझने की गाथा के लिए कुछ अतीत कथाएं जानना बेहतर होगा। लिट्टे का सफाया करने के बाद महिंदा राजपक्षे चीन की गोद में बैठ गए थे। उन्हें लगता था कि लिट्टे की जड़ें तमिलनाडु में हैं इसलिए भारत समर्थन नहीं देगा। इस बात में सच्चाई भी थी। चीन की मदद से लिट्टे का सफाया हुआ तो उपकृत राजपक्षे ने हंबनटोटा बंदरगाह चीन को सौंप दिया। 

महिंदा राजपक्षे अगला चुनाव लड़े तो चीन ने उनका पूरा चुनाव खर्च उठाया। लेकिन राजपक्षे हार गए। कभी उनके सहयोगी रहे मैत्रीपाला सिरिसेना राष्ट्रपति बन गए। चंद रोज बाद चीन के दबाव में सिरिसेना ने महिंदा राजपक्षे को फिर प्रधानमंत्री बना दिया। इसके बाद चुनाव में राष्ट्रपति भी राजपक्षे के भाई गोटबाया राजपक्षे बन गए। उपकृत श्रीलंका और चीन के रिश्तों में यह मधुरता कुछ समय पहले तक जारी रही और चीन की आक्रामक विदेश और आर्थिक नीति के शिकंजे में श्रीलंका उलझ गया। 

इसी बीच गलवान घाटी में चीन और भारत के बीच हिंसक संघर्ष हुआ, तो चीन का दबाव बढ़ा। नेपाल और पाकिस्तान खुल्लमखुल्ला भारत के खिलाफ बोलने लगे। लेकिन श्रीलंका ने ऐसा नहीं किया। वजह यह थी कि वह चारों ओर से पानी से घिरा है। यदि चीन उसे अपना अड्डा बनाना भी चाहे तो पहले उसकी नौसेना और वायुसेना को भारत के अधिकार क्षेत्र से गुजरना पड़ेगा। यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन होगा। 

भारत की सीमाओं का उल्लंघन होने पर उसे श्रीलंका के खिलाफ कार्रवाई करने से कोई नहीं रोक सकता। यह चीन की मुश्किलें बढ़ा देता। वह अपने मित्र श्रीलंका की कोई सहायता चाह कर भी नहीं कर पाता। नेपाल और पाकिस्तान तो जमीनी तौर पर चीन से जुड़े हैं और वे अपने देश में चीनी सेना को आने की अनुमति दे सकते हैं, पर श्रीलंका कभी ऐसा नहीं कर सकेगा। संभवतया चीन ने अपनी यह मजबूरी समझते हुए बढ़े पैर खींच लिए थे।

श्रीलंका की विदेश नीति में बदलाव की यही वजह थी। उसे अहसास हुआ कि भारत जिस तरह आड़े वक्त पर उसके काम आ सकता है, वैसा चीन नहीं कर सकता। संभवतया इसीलिए श्रीलंका ने विदेश  नीति में बड़े यू टर्न का ऐलान किया। उसने कहा कि श्रीलंका सबसे पहले भारत की नीति अपनाएगा और उसके सामरिक सुरक्षा हितों की रक्षा करेगा। उसने खुलासा करते हुए कहा कि श्रीलंका ऐसा कुछ नहीं करेगा जो भारत की सुरक्षा के लिए हानिकारक हो। श्रीलंका कह सकता है कि बंदरगाह का इस्तेमाल चीन की फौज को नहीं करने दिया जाएगा। भारत उसके लिए सबसे पहले है। अन्य देश उसके बाद।  

इससे बौखलाए चीन ने श्रीलंका से उधारी चुकाने का दबाव बढ़ा दिया। चीन के साथ ऋण की शर्ते नितांत गोपनीय हैं। जानकारों का मानना है कि चीनी बैंकों में श्रीलंका का बहुत पैसा फंसा हुआ है। यह पैसा करीब-करीब डूब चुका है। चीन के ऐसा करते ही श्रीलंका बीते छह महीने में लड़खड़ा गया और दुर्दशा का शिकार हो गया। अब चीन के साथ श्रीलंका के रिश्ते सांप-छछूंदर जैसे हैं। न उसके साथ वह आगे जा सकता है और न पीछे हट सकता है। 

दुनिया ने देख लिया है कि श्रीलंका को ऋण जाल में फांसने वाला चीन इन दिनों उसकी मदद के नाम पर चुप्पी साधे बैठा है और हिन्दुस्तान अतीत के रिश्तों को निभाने की खातिर सहायता में कोई कमी नहीं छोड़ रहा है।

(साभार: लोकमत)

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जानें, पिछले 5 वर्षों में प्रिंट मीडिया के विज्ञापनों पर सरकारी खर्च

सूचना-प्रसारण मंत्री ने बताया कि पिछले पांच वर्षों के दौरान बीओसी द्वारा विज्ञापन जारी किए गए अखबारों की संख्या 3,500 और 5,800 के बीच रही।

Last Modified:
Friday, 01 April, 2022
Newsprint

केंद्र सरकार ने पिछले पांच वर्षों में अखबारों के विज्ञापनों पर 190 करोड़ रुपए से 625 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। सूचना-प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में यह जानकारी दी है। बता दें कि सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) के अंतर्गत आने वाले ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन (BOC) के तहत मैगजीन समेत 7,256 अखबार सूचीबद्ध हैं।

सूचना-प्रसारण मंत्रालय के तहत बीओसी सरकार की विभिन्न नीतियों, स्कीमों, कार्यक्रमों और पहलों के बारे में सूचना के प्रसार के लिए विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) अभियान चलाता है। प्रिंट मीडिया विज्ञापन नीति, 2020 के अनुसार पैनल में शामिल अखबारों को ही विज्ञापन जारी किए जाते हैं।

सूचना-प्रसारण मंत्री ने बताया कि पिछले पांच वर्षों के दौरान बीओसी द्वारा विज्ञापन जारी किए गए अखबारों की संख्या 3,500 और 5,800 के बीच रही। केंद्र सरकार द्वारा अखबारों को दिए जाने वाले विज्ञापनों की धनराशि सरकारी विज्ञापन की विभिन्न प्राथमिकताओं, आवश्यकताओं और अन्य पहलुओं को ध्यान में रखते हुए समयानुसार बदलती रहती है और पिछले पांच वर्षों के दौरान 190 करोड़ रुपए से लेकर 625 करोड़ रुपए के बीच रही।

मंत्री ने यह भी कहा कि बीओसी उन प्रकाशनों के लिए विज्ञापन जारी करता है, जो अभियान की आवश्यकता, उपलब्ध बजट, लक्षित पाठकों और ग्राहक विभागों द्वारा दर्शाई गई प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए और प्रिंट मीडिया विज्ञापन नीति, 2020 के अनुसार ही कदम उठाते हैं।

उन्होंने कहा, ‘वर्तमान में पत्रिकाओं सहित 7,256 प्रकाशन बीओसी के साथ सूचीबद्ध हैं। 24 मार्च 2022 तक पूर्वोत्तर राज्यों से संबंधित 120 अखबार बीओसी के साथ सूचीबद्ध हैं।

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वैवाहिक विज्ञापनों में अब लड़कियों के बारे में इस तरह की जानकारी नहीं छापेगा दैनिक भास्कर

समय के साथ हमारे समाज में काफी बदलाव आया है। ऐसे में शादी तय कराने के तौर-तरीके भी काफी बदल गए हैं।

Last Modified:
Sunday, 06 March, 2022
Dainik Bhaskar

समय के साथ हमारे समाज में काफी बदलाव आया है। ऐसे में शादी तय कराने के तौर-तरीके भी काफी बदल गए हैं। पुराने समय में शादी के लिए ज्यादातर पंडित या परिवार के अन्य लोग विवाह योग्य लड़के-लड़कियों की तलाश करते थे और नाई की सहायता से रिश्ते लेकर एक-दूसरे के घर जाया करते थे और रिश्तों की बात करते थे। लेकिन अब ज्यादातर यह काम विज्ञापन, इंटरनेट या मैरिज ब्यूरो द्वारा किया जा रहा है। इन दिनों तमाम अखबारों में वैवाहिक विज्ञापनों की भरमार रहती थी। इन विज्ञापनों में लड़के-लड़कियों के बारे में तमाम विवरण (जैसे-उम्र, रंग, नौकरी व पढ़ाई-लिखाई) दिया रहता है।   

लेकिन अब ऐसे वैवाहिक विज्ञापनो में बेटियों का विवरण छापने के मामले में ‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar) समूह ने एक नई पहल की है। इस पहल के अनुसार, भास्कर समूह ने तय किया है कि अब अखबार में वैवाहिक विज्ञापनों में बेटियों के रंग से संबंधित विवरण जैसे कि कलर कॉम्प्लेक्शन- गोरी, गेहुआं और फेयर जैसे शब्द प्रकाशित नहीं किए जाएंगे।

‘दैनिक भास्कर’ द्वारा किए गए एक ट्वीट के अनुसार, एक प्रगतिशील समाज के लिए हम सबको ऐसे रंगभेद के खिलाफ खड़ा होना होगा। रंग से परे हर बेटी का अपना विशिष्ट व्यक्तित्व व योग्यता होती है। भास्कर की यह सामाजिक पहल जागरूकता के इसी उद्देश्य के साथ की जा रही है।

दैनिक भास्कर ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर सुधीर अग्रवाल की ओर से जारी इस ट्वीट में यह भी कहा गया है, ‘मुझे भरोसा है कि हम सबका एक छोटा सा प्रयास समाज के निर्माण में एक बड़ा योगदान दे सकता है। आने वाली पीढ़ियों को हम एक स्वस्थ और प्रगतिवादी सोच का वातावरण सौंपें, यही वास्तविक विरासत और असल पूंजी होगी।’

इस बारे में ‘दैनिक भास्कर‘ की ओर से किए गए ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं।

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विज्ञापन राजस्व को लेकर TV इंडस्ट्री ने जताई ये बड़ी उम्मीद

जेनिथ मीडिया, इंडिया के इंटीग्रेटेड मीडिया बाइंग के सीनियर वीपी और नेशनल हेड रामसाई पंचपकेसन ने कहा कि विज्ञापन राजस्व के मामले में टीवी ने जनवरी में 5-8% की वृद्धि दर्ज की।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 28 February, 2022
Last Modified:
Monday, 28 February, 2022
TV Viewership

टीवी इंडस्ट्री ने नए साल की शुरुआत कोविड की तीसरी लहर के बीच की, लेकिन इस सेक्टर को आगे चलकर बेहतर ग्रोथ की उम्मीद है। जनवरी, 2021 की तुलना में जनवरी, 2022 को देखें तो यहां एक सपाट वृद्धि देखने को मिली थी, लेकिन फरवरी ने गति पकड़ ली, जिससे इंडस्ट्री को उम्मीद है कि अब यह प्रवृत्ति (trend) चालू वित्त वर्ष के अंत तक जारी रहेगी।

टीवी को लेकर टैम-एडेक्स (TAM AdEx) के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2020 की तुलना में जनवरी 2021 और जनवरी 2022 के दौरान कुल विज्ञापनों की संख्या में क्रमशः 33 प्रतिशत और 32 प्रतिशत की वृद्धि हुई हैं।

इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का कहना है कि जनवरी 2021 की तुलना में जनवरी 2022 में भले ही विज्ञापनों की संख्या में 1 प्रतिशत की मामूली गिरावट हुई हो, लेकिन विज्ञापन राजस्व सिंगल डिजिट में बढ़ने की उम्मीद है और फरवरी व मार्च में भी यह ग्रोथ पॉजिटिव रहेगी।

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) के विज्ञापन राजस्व (ऐड रेवेन्यू) के चीफ ग्रोथ ऑफिसर आशीष सहगल ने कहा कि वर्ष 2022 की शुरुआत कोविड की तीसरी लहर के बीच हुई। सहगल ने कहा, 'हालांकि विज्ञापन की संख्या में फरवरी में तेजी आयी, जोकि जनवरी से बेहतर थी। उनके अनुसार, जैसे-जैसे हम वित्तीय वर्ष के अंत की ओर बढ़ेंगे, विज्ञापनदाता (ऐडवर्टाइजर्स) अपने बजट से अधिक खर्च कर सकते हैं, जिसका इंडस्ट्री के समग्र विज्ञापन खर्च (AdEx) पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

उन्होंने बताया, ‘पिछले कुछ दिनों में हमने देखा है कि ‘थम्स अप’, ‘कोका-कोला’ और ‘सर्फ एक्सेल’ जैसे ब्रैंड्स ने बड़े पैमाने पर नए कैंपेन शुरू किए हैं।’

 

टैम के आंकड़ों के मुताबिक, टॉयलेट क्लीनिंग की कैटेगरी जनवरी 2021 के दूसरे स्थान की तुलना में जनवरी 22 में शीर्ष स्थान पर पहुंच गई। इसके अतिरिक्त, इस साल जनवरी में तीन नई कैटेगरीज ने टॉप-10 की सूची में प्रवेश किया, जिनमें चॉकलेट्स, टी और ई-कॉम-एजुकेशन शामिल हैं। टी कैटेगरी ने जनवरी 2021 की तुलना में जनवरी 2022 में 61% की ग्रोथ के साथ विज्ञापनों की संख्या के मामले में सबसे अधिक ग्रोथ दर्ज की। इसके बाद ई-कॉम-एजुकेशन में 57% की वृद्धि हुई। जनवरी, 2022 को टीवी पर 170 से ज्यादा उभरती हुई कैटेगरी मौजूद थीं।

जारी किए गए डेटा में यह भी कहा गया है कि विज्ञापनदाताओं में एचयूएल (HUL) और रेकिट बेंकिज़र (Reckitt Benckiser) जनवरी 21 और जनवरी 22 में शीर्ष  पर थे। वहीं, टॉप-10 विज्ञापनदाताओं की सूची में एमेजॉन ऑनलाइन इंडिया (Amazon Online India) की नई एंट्री थी।

ब्रैंड की ओर से जनवरी, 22 के दौरान, टीवी पर 4100 से अधिक ब्रैंड्स दिखाई दिए, जिसमें ‘हार्पिक पावर प्लस 10x मैक्स क्लीन’ शीर्ष पर था, जिसके बाद डेटॉल एंटीसेप्टिक लिक्विड का नंबर था। विज्ञापनों की संख्या का 10% हिस्सा टॉप-10 ब्रैंड्स का था। सूची में दो ब्रैंड्स एचयूएल (HUL) से जुड़े थे और पांच ब्रैंड्स रेकिट बेंकिजर (Reckitt Benckiser) के थे।

जेनिथ मीडिया, इंडिया के इंटीग्रेटेड मीडिया बाइंग के सीनियर वीपी और नेशनल हेड रामसाई पंचपकेसन ने कहा कि विज्ञापन राजस्व के मामले में टीवी ने जनवरी में 5-8% की वृद्धि दर्ज की। उनका कहना है कि यह वृद्धि कई कारकों (multiple factors) के संयोजन से प्रेरित है, जिसमें विज्ञापन कैटेगरीज के मिश्रण में बदलाव भी शामिल है। उन्होंने कहा, ‘स्टार्ट-अप जैसे नए जमाने के विज्ञापनदाताओं ने, जिनका कभी प्रसारकों के साथ बेंचमार्क नहीं रहा, उन्होंने भी अब विज्ञापन देना शुरू कर दिया है और इसलिए विज्ञापन की संख्या में थोड़ी कमी हो सकती है, लेकिन राजस्व बढ़ रहा है। मेरा मानना ​​​​है कि जब से महामारी शुरू हुई है, तब से 5000 से अधिक नए ब्रैंड्स सामने आए हैं, जोकि बहुत बड़ी संख्या है।’

पंचपकेसन ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में जनवरी में विज्ञापनदाताओं की कम्पोजिशन पूरी तरह से अलग रही है। उदाहरण के लिए, जनवरी 2019 में, ब्रॉडकास्टर की दृष्टि से यह एक एक बहुत ही स्वस्थ मिश्रण था, जिसमें FMCGs इस स्पेस में अग्रणी था। FMCG ब्रैंडस ब्रॉडकास्टर्स के लिए मोस्ट कॉस्ट इफ्फैक्टिव विज्ञापनदाताओं में से एक हैं, क्योंकि इस ब्रैंड्स के साल भर की उपस्थिति है और विज्ञापनों की संख्या भी ठीक-ठाक है। एफएमसीजी के अलावा, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, ऑटो, ई-कॉमर्स और ट्रैवल जैसी अन्य दिग्गज कंपनियां थीं। इसलिए, ब्रॉडकास्टर्स को अपनी 12 मिनट की विज्ञापन अवधि के दौरान इन कैटेगरीज का संतुलन दिखाई देगा। 

उन्होंने कहा कि कंज्यूमर ड्यूरेबल और ऑटो जैसी कैटेगरीज की तुलना में, FMCG हमेशा कीमत के मामले में सबसे कम रहा है। मिक्स कैटेगरीज के साथ, ब्रॉडाकास्टर्स को तय किए राजस्व को प्राप्त करने के लिए विज्ञापनों की संख्या बहुत अधिक बढ़ाने की जरूरत नहीं है।

He further added that the mix of categories in media planning didn't see much deviation in 2020 compared to 2019 because the first few months of 2020 were normal for everyone. He also explained that in the last two years, the media landscape has changed. The digital has evolved and this has also affected the ad volumes on TV. The shift from TV to digital started happening and digital started taking more money.

उन्होंने आगे कहा कि 2019 की तुलना में 2020 में मीडिया प्लानिंग में मिक्स कैटेगरीज में बहुत ज्यादा भिन्नता देखने को नहीं मिली है, क्योंकि 2020 में पहले के कुछ महीने सभी के लिए सामान्य थे। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले दो वर्षों में मीडिया का परिदृश्य बदल गया है। डिजिटल अब और विकसित हो गया है और इसने टीवी पर विज्ञापन की संख्या को भी प्रभावित किया है। टीवी से डिजिटल की ओर बदलाव होने लगा है और डिजिटल ने कीमतों में इजाफा करना शुरू कर दिया है।

इसके अलावा, विज्ञापनों की संख्या में कमी की एक वजह यह भी रही कि टीवी पर प्रमुख एफएमसीजी प्लेयर्स ने तीसरी तिमाही में अपने विज्ञापन खर्च में कटौती की थी।

एलारा कैपिटल (Elara Capital) के एसवीपी करण तौरानी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि टेलीविजन पर ई-कॉमर्स, तकनीक और डिजिटल विज्ञापनदाताओं के चलते जनवरी 2022 में दिखी ग्रोथ अभी भी जारी है। हम देख रहे हैं कि क्रिप्टो कंपनियां भारी विज्ञापन कर रही हैं और यह कम से कम कुछ वर्षों के लिए ही सही लेकिन एक ट्रेंड बनता जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि एफएमसीजी विज्ञापन खर्च में गिरावट का टीवी पर कोई असर नहीं पड़ा है।

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वर्चुअल डिजिटल एसेट के लिए ASCI ने जारी की ये नई गाइडलाइंस

देश में विज्ञापनों पर नजर रखने वाली सेल्फ रेग्युलेटरी बॉडी ‘एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड काउंसिल ऑफ इंडिया’ (ASCI) ने वर्चुअल डिजिटल एसेट के लिए गाइडलाइन जारी कर की हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 23 February, 2022
Last Modified:
Wednesday, 23 February, 2022
ASCI

देश में विज्ञापनों पर नजर रखने वाली सेल्फ रेग्युलेटरी बॉडी ‘एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड काउंसिल ऑफ इंडिया’ (ASCI) ने वर्चुअल डिजिटल एसेट के लिए गाइडलाइन जारी कर की हैं। बता दें कि इस नई गाइडलाइन के तहत, क्रिप्टो विज्ञापनों को ग्राहकों को स्पष्ट तौर पर निवेश से जुड़े जोखिमों की जानकारी देनी होगी।

गाइडलाइंस को सरकार व अन्य स्टेकहोल्डर्स के साथ विचार-विमर्श के बाद तय किया गया और ये गाइडलाइंस 1 अप्रैल 2022 से लागू होगी। विज्ञापनों के लिए नई गाइडलाइंस को लेकर लंबे समय से सरकार के साथ चर्चा की जा रही थी।

‘जी बिजनेस’ की एक मुताबिक, ASCI ने नई गाइडलाइन के तहत कहा है कि क्रिप्टो विज्ञापनों के साथ रिस्क की जानकारी दी जाएगी। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि ग्राहकों को किसी भी तरह के भ्रामक दावों से दूर रखा जाए। साथ ही मुनाफे के बढ़ा-चढ़ाकर किए जाने वाले दावों से भी सचेत किया जा सके।

क्या है गाइडलाइंस?

1 अप्रैल 2022 से सभी वर्चुअल डिजिटल एसेट-संबंधी विज्ञापनों पर लागू होंगी। VDA प्रॉडक्ट्स और VDA एक्सचेंजों या VDA की विशेषता वाले सभी विज्ञापनों में निम्नलिखित अस्वीकरण होना चाहिए। साफ लिखना होगा क्रिप्टो और NFT अनरेगुलेटेड प्रॉडक्ट हैं और भारी जोखिम हो सकता है।

VDA प्रॉडक्ट और सर्विसेज के विज्ञापनों में ‘करेंसी’, ‘सिक्योरिटीज’, ‘कस्टोडियन’ और ‘डिपॉजिटरी’ शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है, क्योंकि उपभोक्ता इन शर्तों को रेगुलेटेड प्रॉडक्ट के साथ जोड़ते हैं।

कॉस्ट कितनी होगी इसकी साफ-साफ जानकारी देनी होगी। विज्ञापन कौन दे रहा है इसकी साफ जानकारी देनी होगी। सेलिब्रिटीज को विज्ञापन से पहले जोखिम को समझना होगा।

विज्ञापनों में दी गई जानकारी उस सूचना या चेतावनियों का खंडन नहीं करेगी, जो रेगुलेटेड संस्थाएं समय-समय पर VDA प्रॉडक्ट के मार्केटिंग के लिए ग्राहकों को बताती हैं।

VDA प्रॉडक्ट की कॉस्ट या प्रॉफिट के बारे में साफ स्पष्ट जानकारी देनी होगी। विज्ञापनों में स्पष्ट, सटीक, पर्याप्त और अपडेट जानकारी होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, 'Zero Cost' में उन सभी कॉस्ट को शामिल करना होगा, जिससे उपभोक्ता को ऑफर या ट्रांजैक्शन से संबंधित पूरी जानकारी मिल सके।

पिछले प्रदर्शन की जानकारी किसी भी आंशिक या पक्षपातपूर्ण तरीके से नहीं दी जा सकेगी। 12 महीने से कम की अवधि के लिए रिटर्न शामिल नहीं किया जाएगा।

VDA प्रॉडक्ट के हर विज्ञापन में स्पष्ट रूप से विज्ञापनदाता का नाम होना चाहिए और उनसे संपर्क करने का एक आसान तरीका (फोन नंबर या ईमेल) दिया जाना चाहिए। यह जानकारी इस तरह से प्रस्तुत की जानी चाहिए कि उपभोक्ता आसानी से समझ सके।

किसी भी विज्ञापन में ऐसे बयान नहीं होंगे जो भविष्य में मुनाफे में वृद्धि का वादा या गारंटी देते हों।

VDA प्रॉडक्ट की तुलना किसी दूसरी रेगुलेटेड एसेट से नहीं की जा सकती है।

एक जोखिम भरी श्रेणी है, VDA विज्ञापनों में दिखाई देने वाली मशहूर हस्तियों या प्रमुख हस्तियों को यह सुनिश्चित करने के लिए विशेष ध्यान रखना चाहिए कि उन्होंने विज्ञापन में दिए गए बयानों और दावों के बारे में अपना उचित परिश्रम किया है, ताकि उपभोक्ताओं को गुमराह न किया जा सके।

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मीडिया में सरकारी विज्ञापन खर्च को लेकर क्या कहते हैं आंकड़े, पढ़ें ये रिपोर्ट

आठ दिसंबर 2017 को तत्कालीन डीएवीपी, फील्ड प्रचार निदेशालय (डीएफपी) और गीत और नाटक प्रभाग (एसएंडडीडी) को एकीकृत करके ‘BOC’ का गठन किया गया था।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 11 February, 2022
Last Modified:
Friday, 11 February, 2022
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सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) के तहत आने वाले ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ (पूर्व में ‘विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय) ने वर्ष 2021-22 में 10 फरवरी तक प्रिंट, टीवी और रेडियो प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापनों पर 118.48 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। सूचना-प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। इन आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021-22 में ‘BOC’ ने 5,608 पब्लिकेशंस पर 96.39 करोड़ रुपये, 168 टीवी चैनल्स पर 8.13 करोड़ रुपये और 368 रेडियो स्टेशनों पर 13.96 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

तुलनात्मक रूप से देखें तो 2020-21 में तीन माध्यमों पर ‘BOC’ द्वारा कुल सरकारी विज्ञापन 329.38 करोड़ रुपये था। इसमें 5,211 पब्लिकेशंस पर 197.49 करोड़ रुपये, 317 टीवी चैनल्स पर 69.81 करोड़ रुपये और 378 रेडियो स्टेशनों पर 62.08 करोड़ रुपये शामिल हैं।

वहीं, वर्ष 2019-20 में विज्ञापनों पर कुल 452.03 करोड़ रुपये खर्च किए, जिसमें 5,326 पब्लिकेशंस पर 295.05 करोड़ रुपये, 270 टीवी चैनल्स पर 98.69 करोड़ रुपये और 350 रेडियो स्टेशनों पर 58.29 करोड़ रुपये खर्च किए गए। दिलचस्प बात यह है कि वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान ‘BOC’ ने विज्ञापनों पर 772.77 करोड़ रुपये खर्च किए, जिसमें 5,631 पब्लिकेशंस पर 429.55 करोड़ रुपये, 298 टीवी चैनल्स पर 149.96 करोड़ रुपये और 325 रेडियो स्टेशनों पर 193.26 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

2017-18 में सरकार का कुल विज्ञापन खर्च 922.12 करोड़ रुपये था। इसमें 6,782 पब्लिकेशंस पर 636.09 करोड़ रुपये, 265 टीवी चैनल्स पर 153.02 करोड़ रुपये और 273 रेडियो स्टेशनों पर 133.01 करोड़ रुपये शामिल हैं।

ऐसे में पिछले पांच वर्षों में बीओसी ने पब्लिकेशंस पर 1654.57 करोड़ रुपये, टीवी चैनल्स पर 479.61 करोड़ रुपये और रेडियो पर 460.6 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। कुल मिलाकर वर्ष 2017 से वर्ष 2022 तक विज्ञापनों पर बीओसी द्वारा 2,594.78 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। गौरतलब है कि ‘BOC’ 2017-18 से अब तक सोशल मीडिया पर विज्ञापनों के लिए 7.20 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है।

बता दें कि आठ दिसंबर 2017 को तत्कालीन डीएवीपी, फील्ड प्रचार निदेशालय (डीएफपी) और गीत और नाटक प्रभाग (एसएंडडीडी) को एकीकृत करके ‘BOC’ का गठन किया गया था। इसका उद्देश्य मंत्रालयों/विभागों/सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को कम्युनिकेशन को लेकर सभी तरह की मदद करना है। यह मीडिया स्ट्रैटेजी पर सरकार के लिए एक सलाहकार निकाय के रूप में कार्य करता है।

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Amul ने बेहद इमोशनल अंदाज में दी लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि

लोकप्रिय डेयरी ब्रैंड ‘अमूल’ (Amul) ने ट्विटर पर एक मोनोक्रोमैटिक पोस्ट के जरिए लता मंगेशकर को भावभीनी श्रद्धांजलि दी  है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 07 February, 2022
Last Modified:
Monday, 07 February, 2022
Amul5572

भारत की स्वरकोकिला लता मंगेशकर लता मंगेशकर ने रविवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। वह 92 वर्ष की थीं। प्रसिद्ध गायिका के निधन के बाद, देश और दुनिया के कोने-कोने में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। इस बीच लोकप्रिय डेयरी ब्रैंड ‘अमूल’ (Amul) ने ट्विटर पर एक मोनोक्रोमैटिक पोस्ट के जरिए लता मंगेशकर को भावभीनी श्रद्धांजलि दी  है।

अमूल अपने ऑर्ट वर्क और मोनोक्रोमैटिक डूडल के लिए पॉपुलर है। अब इस ब्रैंड ने उनकी तीन तस्वीरों के अपने आर्टवर्क में दिखाया है। पहली तस्वीर लता मंगेशकर के बचपन की है, दूसरी तस्वीर में वे तानपुरा बजाती हुई नजर आ रही हैं और तीसरी तस्वीर में वे स्टेज पर गाते हुए दिखाया गया है, जिसमें वे माइक स्टैंड के सामने खड़ी होकर गाते हुए नजर आ रही हैं।

भारत की स्वर कोकिला को याद करते हुए, अमूल ने 1966 के 'मेरा साया' के उनके यादगार गीत 'तू जहां जहां चलेगा मेरा साया साथ होगा' का हवाला देते हुए लिखा, 'हम जहां जहां चलेंगे, आपका साया साथ होगा'।

अमूल का यह आर्टवर्क लोगों को काफी पसंद आ रहा है। खासकर सोशल मीडिया पर यह तेजी से वायरल हो रही है।

लता मंगेशकर ने साल 1942 में 13 साल की उम्र में करियर की शुरुआत की थी। उन्हें उनकी असाधारण प्रतिभा के लिए भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण और दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

92 साल की स्वर कोकिला लता मंगेशकर 8 जनवरी को कोरोना वायरस से संक्रमित हुई थीं, जिसके बाद उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तब उन्हें आईसीयू में रखा गया था, जहां डॉ. प्रतीत समदानी और अन्य डॉक्टरों की टीम की देखरेख में उनका इलाज चल रहा था। बाद में उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था, जिसके बाद उनकी हालत में सुधार होने लगा था और फिर उन्हें वेंटिलेटर से हटा लिया गया था। हालांकि, शनिवार को अचानक उनकी तबीयत फिर से बिगड़ गई और उन्हें फिर से लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखना पड़ा, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया न जा सका और रविवार को सुबह 8 बजकर 12 मिनट पर स्वर कोकिला ने इस दुनिया को हमेशा-हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।

मुंबई के शिवाजी पार्क में  राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके पार्थिव शरीर को तिरंगे से लपेटा गया था और सशस्त्र जवानों ने उन्हें अंतिम सलामी दी। अंतिम संस्कार में पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, शाहरुख खान समेत तमाम हस्तियां मौजूद थीं। लता मंगेशकर के भाई हृदयनाथ मंगेशकर ने नम आंखों से उन्हें मुखाग्नि दी।

  

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जब पहली बार इस विज्ञापन में नजर आईं थीं स्वर कोकिला लता मंगेशकर

महान गायिका, भारत रत्न से सम्मानित लता मंगेशकर ने 92 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में 6 फरवरी की सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 07 February, 2022
Last Modified:
Monday, 07 February, 2022
latamangeskar545

महान गायिका, भारत रत्न से सम्मानित लता मंगेशकर ने 92 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में 6 फरवरी की सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली, जहां कोरोना से संक्रमित होने के बाद उन्हें भर्ती किया गया था। लता मंगेशकर के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है।

भारत रत्न से सम्मानित लता मंगेशकर ने साल 1942 में अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्हें पहचान फिल्म महल के गाने 'आएगा आने वाला' से मिली थी। लता मंगेशकर ने दुनियाभर की 36 भाषाओं में 30 हजार से ज्यादा गाना गाए हैं।

विज्ञापन की दुनिया में उनके योगदान को याद करें, तो जब तमाम सेलेब्रेटीज विज्ञापनों से करोड़ों की कमाई करते हैं, ऐसे में लता दीदी ने साल 1991 में सिर्फ वडोदरा स्थित एलेम्बिक फार्मास्युटिकल लिमिटेड द्वारा निर्मित ग्लाइकोडिन कफ सीरफ का एक विज्ञापन किया था। यह उनका पहला और आखिरी विज्ञापन था।

 भले ही इसके बाद लता दीदी कभी किसी विज्ञापन में दिखाई नहीं दी थीं, लेकिन एलेम्बिक मैनेजमेंट ने एक विज्ञापन एजेंसी के माध्यम से उनसे संपर्क किया था। कंपनी मैनेजमेंट न केवल विज्ञापन में अपनी आवाज देने के लिए उन्हें मनाने में कामयाब रहा, बल्कि उन्हें इसमें अभिनय करने के लिए भी राजी किया।

बताया जाता है कि लता दीदी विज्ञापन में शामिल होने के लिए इसलिए सहमत हुईं थी, क्योंकि वह गले में खराश को बर्दाश्त नहीं कर सकती थीं। वह देश में सबसे अधिक पसंद की जाने वाली प्रतिष्ठित गायिकाओं में से एक हैं और उन्हें 'भारत की स्वर कोकिला' के तौर पर भी जाना जाता है।

ग्लाइकोडिन विज्ञापन गोविंद निहलानी द्वारा शूट किया गया था। वैसे विज्ञापन लता दीदी के 60 साल पूरे होने के मौके पर सेलिब्रेट करने के लिए बनाया गया था। उनका जन्म 1929 में हुआ था और  ग्लाइकोडिन को 1930 में लॉन्च किया गया था।

हालांकि, लता दीदी अपने पहले विज्ञापन के बाद मिले रिस्पॉन्स से शर्मिंदा थीं। इसके बाद उन्होंने कहा भी कि ‘यह मेरा पहला और आखिरी विज्ञापन है’। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब लता दीदी से पूछा गया कि वह ब्रैड्स के विज्ञापनों का समर्थन क्यों नहीं करती हैं, तो उन्होंने विनम्रतापूर्वक जवाब दिया था कि ब्रैंड्स के विज्ञापन उन्हें बहुत ही कमर्शियल बना देंगे और वास्तव में उनका मन ऐसा करने का बिल्कुल भी नहीं है।

लता दीदी 8 जनवरी को कोरोना वायरस से संक्रमित हुई थीं, जिसके बाद उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तब उन्हें आईसीयू में रखा गया था, जहां डॉ. प्रतीत समदानी और अन्य डॉक्टरों की टीम की देखरेख में उनका इलाज चल रहा था। बाद में उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था, जिसके बाद उनकी हालत में सुधार होने लगा था और फिर उन्हें वेंटिलेटर से हटा लिया गया था। हालांकि, शनिवार को अचानक उनकी तबीयत फिर से बिगड़ गई और उन्हें फिर से लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखना पड़ा, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया न जा सका और रविवार को सुबह 8 बजकर 12 मिनट पर स्वर कोकिला ने इस दुनिया को हमेशा-हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।

  

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महामारी का न्यूज जॉनर पर नहीं दिखा असर, बढ़ा विज्ञापन खर्च

TAM AdEx के आंकड़ों पर एक नजर डालें तो पता चलता है कि 2020 की तुलना में साल 2021 में न्यूज जॉनर में कुल विज्ञापन खर्च 12 प्रतिशत तक बढ़ा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 19 January, 2022
Last Modified:
Wednesday, 19 January, 2022
NewsGenre454

TAM AdEx के आंकड़ों पर एक नजर डालें तो पता चलता है कि 2020 की तुलना में साल 2021 में न्यूज जॉनर में कुल विज्ञापन खर्च 12 प्रतिशत तक बढ़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 के बाद से ऐड वॉल्यूम (विज्ञापनों की संख्या) में यह सबसे बड़ी ग्रोथ है।

न्यूज जॉनर में ऐड वॉल्यूम (विज्ञापनों की संख्या) में तीसरी और चौथी तिमाही के दौरान फिर से बढ़त देखने को मिली, वह भी तब जब अर्थव्यवस्था दूसरी कोविड लहर से उबर रही थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2017 की तुलना में न्यूज जॉनर में ऐड वॉल्यूम में 23% अनुक्रमित वृद्धि (indexed growth) हुई है।

इस जॉनर में एवरेज ऐड वॉल्यूम दूसरी लहर के बाद देखे गए दो महीनों के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई। यह महीने थे मार्च 2021 और अक्टूबर 2021, जब सबसे ज्यादा ऐड वॉल्यूम देखा गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, अन्य सभी जॉनर को मिलाकर देखा जाए तो 2020 की तुलना में 2021 में ऐड वॉल्यूम में 26% की वृद्धि देखी गई। इसलिए, 2021 में न्यूज जॉनर बनाम अन्य जॉनर के बीच का अनुपात 2021 में 72:28 और 2020 में 70:30 था।

न्यूज जॉनर में ऐड वॉल्यूम की बात की जाए तो हिंदी न्यूज कैटेगरी सर्वोपरि रही है, जिसने 32% से भी ज्यादा की हिस्सेदारी के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया है। इसके अलावा, शीर्ष पांच सब-जॉनर्स में से चार ने अपनी पोजिशन पहले की तरह बरकरार रखी है। वहीं 2021 में कन्नड़ न्यूज ने असम न्यूज की जगह ले ली है। शीर्ष पांच सब-जॉनर्स ने दोनों अवधियों के दौरान ऐड वॉल्यूम का लगभग 65% हिस्सा किया है। इसके अतिरिक्त, रीजनल व नेशनल न्यूज चैनल्स ने 2021 के दौरान न्यूज जॉनर में क्रमशः 74% और 26% ऐड वॉल्यूम दर्ज किया है। रीजनल न्यूज चैनल्स ने 2020 की तुलना में 2021 के दौरान ऐड वॉल्यूम में 13% की वृद्धि दर्ज की है।

वहीं, मार्च 2021 से दिसंबर 2021 तक यानी 10 महीनों के दौरान ‘रेकिट बेंकिज़र’ (Reckitt Benckiser) न्यूज जॉनर में टॉप ऐडवर्टाइजर रहा है। फूड एंड बेवरेजेज सेक्टर ने न्यूज जॉनर के ऐड वॉल्यूम में 15% की हिस्सेदारी के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया है। इसके बाद सर्विस सेक्टर का 14% हिस्सा रहा है। दूसरी ओर, कार कैटेगरी ने 2021 में 3% ऐड वॉल्यूम के साथ न्यूज जॉनर का नेतृत्व किया। यह 2019 और 2020 में भी सूची में सबसे ऊपर रही थी।

तेजी से उभरती कैटेगरी (top growing categories) में ईकॉम-एजुकेशन के विज्ञापनों ने 2020 की तुलना में 2021 के दौरान पान मसाला के बाद सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की।   

टॉप 10 कैटेगरीज में ग्रोथ की बात करें तो, ईकॉम-फार्मा/हेल्थकेयर 4.7 गुना की उच्चतम वृद्धि के साथ शीर्ष पर रहा है, इसके बाद हेयर रिमूवर ने 2.5 गुना की वृद्धि दर्ज की है।

टैम की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 और 2021 में न्यूज जॉनर में शीर्ष तीन ऐडवर्टाइजर्स रेकिट बेंकिज़र (Reckitt Benckiser), एचयूएल (HUL) और GCMMF (अमूल) के तेजी से आगे आए हैं। वहीं टॉप 10 की सूची में LIC, एशियन पेंट्स (Asian Paints), विष्णु पैकेजिंग (Vishnu Packaging) और अमेजॉन ऑनलाइन इंडिया (Amazon Online India) पहली बार शामिल हुआ हैं। न्यूज जॉनर में पान मसाला की ‘विमल इलायची’ (Vimal Elaichi) 2021 की टॉप 10 की सूची में पहली बार शामिल हुआ है और इसी वर्ष का पान मसाला अग्रणी ब्रैंड भी था।

2021 में न्यूज जॉनर में 4,100 से अधिक ऐडवर्टाइजर्स ने विज्ञापन दिए और 6,400 ब्रैंड्स के विज्ञापन दिखाई दिए। आंकड़ों के मानें तो ‘महर्षि मार्कंडेस एजुकेशनल ट्रस्ट’ (Maharishi Markandes Educational Trust) और ‘विप्रो’ (Wipro) 2021 के दौरान क्रमशः नेशनल और रीजनल न्यूज चैनल्स पर प्रमुख एक्सक्लूसिव ऐडवर्टाइजर्स रहे।

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