'आदमी अखबार में कितना बड़ा क्यों न हो, अंत में वो सिंगल कॉलम ही होता है'

आदमी अपने ही अखबार में कितना ही बड़ा क्यों न हो, अंत में वो सिंगल कॉलम ही होता है...

Last Modified:
Monday, 16 July, 2018


‘आदमी अपने ही अखबार में कितना ही बड़ा क्यों न हो, अंत में वो सिंगल कॉलम ही होता है। भले ही वो दूसरों की मौत पर स्पेशल पेज और जैकेट बनवाता रहा हो।’...
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