‘कश्मीर की हिंसा के कवरेज को राष्ट्रहित, देशहित, एकता, अखंडता के नाम से परखा जा रहा है। जेएनयू के समय भी राष्ट्रवाद उभरा था। कैराना में फर्जी खबर के दम पर इसी मीडिया ने वहां कश्मीर तक पैदा कर दिया था। वही मीडिया अब कश्मीर में राष्ट्रवाद का ढोल पीट रहा है।’ अपने ब्लॉग ‘कस्बा’ के जरिए ये कहा वरिष्ठ टीवी पत्रकार रवीश कु
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समाचार4मीडिया ब्यूरो