जो बात आज अर्नब कह रहे हैं, अगर वह भीड़ का नारा बना तो सोचिए पत्रकारिता का क्या हाल होगा...

डॉ. मुकेश कुमार ये भारतीय मीडिया के इतिहास में संभवत पहली बार हो रहा है जब कोई पत्रकार, कोई संपादक कह रहा है कि उन पत्रकारों को जेल में डालो जो उसकी परिभाषा के हिसाब से राष्ट्रवादी नहीं हैं। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। लाख असहमतियों के बावजूद पत्रकार इस हद तक नहीं जाते

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 10 August, 2016
Last Modified:
Wednesday, 10 August, 2016
mukesh


डॉ. मुकेश कुमार ये भारतीय मीडिया के इतिहास में संभवत पहली बार हो रहा है जब कोई पत्रकार, कोई संपादक कह रहा है कि उन पत्रकारों को जेल में डालो जो उसकी...
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