‘कश्मीर आसानी से पाकिस्तान में चला गया होता, अगर शेख अब्दुल्लाह (जो नेहरू और महात्मा गांधी के प्रशंसक थे) ने भारत के साथ रहने का फैसला नहीं किया होता। ये शेख अब्दुल्लाह थे जिन्होंने फैसला किया कि कश्मीर सेक्युलर भारत के साथ रहेगा न कि मुस्लिम पाकिस्तान के साथ।’ हिंदी साप्ताहिक अखबार ‘चौथी दुन
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समाचार4मीडिया ब्यूरो