'संपादक का काम अखबार निकालना व सरकार की खामिया गिनाना होता है, सरकार की दावत खाना नहीं'

‘कौन सही और कौन गलत यह तो नहीं पता पर इतना सच है कि जहां अंग्रेजी अखबारों की पहुंच महज तीन फीसदी लोगों तक हैं वहीं हिंदी व क्षेत्रीय भाषा के अखबारों की पहुंच देश के 97 फीसदी पाठकों तक हैं। यह बात अलग है कि जहां अंग्रेजी का मीडिया दिल्ली के लुटियन जोन व सत्ता के गलियारों में पढ़ा जाता है वहीं हिदी व क्षेत्रीय भाषा के अखबार गांव में छज्जू के चौबारे से

Last Modified:
Tuesday, 21 June, 2016
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‘कौन सही और कौन गलत यह तो नहीं पता पर इतना सच है कि जहां अंग्रेजी अखबारों की पहुंच महज तीन फीसदी लोगों तक हैं वहीं हिंदी व क्षेत्रीय भाषा के अखबारों क...
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