वरिष्ठ पत्रकार विजय विद्रोही ने उठाया सवाल, गंगा किनारे 118 शहर-144 नाले, तो कैसे साफ हो गंगा?

 ‘हरिद्वार की बात करें तो यहां रोज शाम को गंगा आरती होती है। हर आदमी गंगा की कसम खाता है कि वह गंगा को साफ रखेगा, गंगा में साबुन का इस्तेमाल नहीं करेगा, कपड़े धोएगा नहीं। लेकिन, सुबह होते ही लोग कसम भूल जाते हैं।’ हिंदी साप्ताहिक अखबार ‘चौथी दुनिया’ में छपे अपने आलेख के जरिए कहा 

Last Modified:
Friday, 15 July, 2016
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 ‘हरिद्वार की बात करें तो यहां रोज शाम को गंगा आरती होती है। हर आदमी गंगा की कसम खाता है कि वह गंगा को साफ रखेगा, गंगा में साबुन का इस्तेमाल नहीं करेग...
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