‘इंडियन एक्सप्रेस में दीप्तिमान तिवारी की रिपोर्ट पढ़ कर एक पत्रकार, पाठक और नागरिक के तौर पर खुद को टटोल रहा हूं। किसानों की आत्महत्या पर इतने हंगामे के बाद भी हम आत्महत्या रोकने में असफल क्यों रहे? क्या इस मसले पर हम सिर्फ बहस ही कर सकते हैं?’ अपने ब्लॉग ‘कस्बा’ के जरिए ये कहा वरिष्ठ टीवी पत्रकार रवीश कुमार ने। उनक
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो