‘यदि अंग्रेजी या कोई और विदेशी भाषा दुनिया की संपर्क भाषा बनी रहे तो इसमें कोई बुराई नहीं है। वह विदेश-व्यापार, कूटनीति, अनुसंधान आदि की भाषा रह सकती है लेकिन यदि वह किसी भी देश पर अगर थोपी जाती है तो उसके परिणाम विनाशकारी होते हैं।’ हिंदी दैनिक अखबार नया इंडिया में छपे अपने आलेख के जरिए ये कहना है वरिष्ठ पत्रकार डॉ.
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समाचार4मीडिया ब्यूरो