‘वैचारिक प्रतिबद्धता के साथ-साथ कांग्रेस के कई बड़े नेताओं का कार्पोरेट से इतना गहरा रिश्ता है कि वे उस रिश्ते की खातिर दूसरे दलों के नेताओं से फर्क मिटाते चले गए। इसीलिए कई मौकों पर जनता को कांग्रेस और भाजपा एक ही लगती है। दोनों एक ही प्रकार के कार्पोरेट समूह के शुभचिंतक हैं या कहिए कि दो हाथ हैं।’ हिंदी दैनिक अखब
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समाचार4मीडिया ब्यूरो