भास्कर डॉट कॉम के युवा संपादक अनुज खरे की मांग: निंदा रस को मिले दसवें रस का दर्जा'

‘किसी की बुराई करते मनुष्य का चेहरा देखिए, मानवता अपने सर्वोच्च स्तर पर दिखाई देगी। इस कला के प्रदर्शन के लिए बहुत ताम-झाम नहीं चाहिए। बस एक अदद मुंह होना चाहिए। मुंह बिजी हो तो इशारे वगैरह से भी काम चलाया जा सकता है। बस, मन में लगन होनी चाहिए। सीने में अगन होनी चाहिए।’ हिंदी अखबार ‘दैनिक भास्कर’  में प्रकाशित एक व्य

Last Modified:
Thursday, 14 July, 2016
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‘किसी की बुराई करते मनुष्य का चेहरा देखिए, मानवता अपने सर्वोच्च स्तर पर दिखाई देगी। इस कला के प्रदर्शन के लिए बहुत ताम-झाम नहीं चाहिए। बस एक अदद मुंह...
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