नहीं पता कि किस दम पर लोग वर्षों प्राइम टाइम कर लेते हैं। क्या मिल जाता है, रोजगार के अलावा:रवीश कुमार

रवीश कुमार वरिष्ठ टीवी पत्रकार ।। बहुत दिनों से मन बगावत कर रहा था। मन एक शाम मांग रहा था। कब से डूबते सूरज के बाद का नीला आकाश नहीं देखा था। मेरा मन थोड़ा सा नीला आकाश मांग रहा था। मैं कुछ दिनों के लिए हर शाम

Last Modified:
Friday, 05 August, 2016
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रवीश कुमार वरिष्ठ टीवी पत्रकार ।। बहुत दिनों से मन बगावत कर रहा था। मन एक शाम मांग रहा था। कब से डूबते सूरज के बाद का नीला आकाश नहीं देखा था। मेरा म...
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