होम / विचार मंच / आमीर तांबा की हत्या पर बोले ब्रजेश सिंह, शठे शाठ्यम समाचरेत्
आमीर तांबा की हत्या पर बोले ब्रजेश सिंह, शठे शाठ्यम समाचरेत्
आमीर तांबा साये की तरह हाफिज मोहम्मद सईद के साथ रहता था। रैली में भी वो हाफिज सईद के पीछे खड़ा रहता था।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 1 year ago
ब्रजेश सिंह, वरिष्ठ पत्रकार।
पाकिस्तान के मशहूर शहर लाहौर में आज दोपहर उस आतंकी सरफराज उर्फ आमीर तांबा को जहन्नुम पहुंचा दिया गया, जिसने भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह पर लाहौर की ही कोट लखपत जेल में 2013 में जानलेवा हमला किया था।सरबजीत की मौत के 11 साल के अंदर ही न्याय हो गया, सरबजीत की आत्मा को शांति मिली होगी।
पंजाब के निवासी सरबजीत सिंह गलती से पाकिस्तान की सीमा में घुस गये थे, लेकिन उन पर भारतीय जासूस होने का आरोप लगाते हुए एक बम धमाके के मामले में फांसी की सजा पाकिस्तान में सुनाई गई। उन्हीं सरबजीत की हत्या लश्कर ए तैयबा के सरगना हाफिज मोहम्मद सईद के इशारे पर आमीर तांबा ने कर दी थी। पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में अप्रैल 2013 के आखिरी हफ्ते में अपने साथी मुदस्सर के साथ मिलकर आमीर तांबा ने सरबजीत सिंह पर जानलेवा हमला किया था जिसके कारण घायल हुए सरबजीत का 2 मई 2013 को निधन हुआ।
इस मामले में दोनों हत्यारों को सबूत के अभाव के नाम पर लाहौर की कोर्ट ने छोड़ दिया था। आमीर तांबा साये की तरह हाफिज मोहम्मद सईद के साथ रहता था। रैली में भी वो हाफिज सईद के पीछे खड़ा रहता था। उसी आमीर को आज उसके घर के बाहर ही, लाहौर शहर में, दिन दहाड़े, दोपहर बारह से एक बजे के बीच गोलियों से भून दिया गया। कुल इक्कीस गोलियां चलीं, जिनमें से 7 आमीर ताम्बा को लगीं।हाल ही में पीएम मोदी व गृह मंत्री अमित शाह ने चेतावनी दी थी कि आतंकियों को भारत उनके घर में घुसकर मारेगा।
इन बयानों के कुछ दिनों के अंदर ही एक बड़ा आतंकी आमीर तांबा जिसने सरबजीत की हत्या की थी, जहन्नुम पहुंच गया है और उसका आका हाफिज मोहम्मद सईद डर के मारे अपने बिल में। पाकिस्तान में पिछले कुछ वर्षों के अंदर एक के बाद एक वो सारे आतंकी ठिकाने लगाये जा रहे हैं, जिन्होंने भारत में आतंकी हमलों को अंजाम दिया था, या फिर भारतीयों को निशाना बनाया था। ये महज संयोग नहीं हो सकता है कि अज्ञात हमलावर भारत विरोधी आतंकियों को जहन्नुम का रास्ता दिखा रहे हैं।
दरअसल नरेंद्र मोदी की अगुआई वाला भारत वो भारत नहीं है, जो अपने उपर हमला करने वालों को बख्श दे। ये मदद के लिए किसी और के पास गुहार लगाने नहीं जाता, अपने दुश्मनों को खुद ठिकाने लगाने में यकीन करता है, शठे शाठ्यम समाचरेत् के अंदाज में, जैसा करोगे, वैसा ही भुगतोगे, ये संदेश देते हुए। इसकी शुरुआत 2019 में ही हो गई थी, जब PM नरेंद्र मोदी की अगुआई में दूसरी बार बीजेपी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार केंद्र में सत्ता में आई, अमित शाह गृहमंत्री बने। हमला हो जाने के बाद कुछ करने की जगह आतंकियों और हमलावरों को उनकी मांद में ही निबटाने की सोच बनी।
( यह लेखक के निजी विचार हैं )
टैग्स पाकिस्तान लाहौर अमीर सरफ़राज़ सरबजीत सिंह