विस्तार के साथ ही कवरेज का दायरा सिकुड़ रहा है, परिणाम सोच लीजिए मिस्टर मीडिया!

अगर हमारी मानसिक सीमाएं सिकुड़कर केवल टीआरपी की होड़ पर टिक जाएंगीं तो इसका खामियाजा कौन भुगतेगा?

राजेश बादल by
Published - Thursday, 09 January, 2020
Last Modified:
Thursday, 09 January, 2020
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राजेश बादल , वरिष्ठ पत्रकार ।। अटपटा सा लगता है। अपने चैनल और अखबार देखिए। जिन्हें हम राष्ट्रीय कहते हैं, क्या वे वाकई पूरे हिन्दुस्तान क...
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